Imam Ahmad : 321
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ حُنَيْنٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَرَدْتُ أَنْ أَسْأَلَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَا رَأَيْتُ مَوْضِعًا فَمَكَثْتُ سَنَتَيْنِ فَلَمَّا كُنَّا بِمَرِّ الظَّهْرَانِ وَذَهَبَ لِيَقْضِيَ حَاجَتَهُ فَجَاءَ وَقَدْ قَضَى حَاجَتَهُ فَذَهَبْتُ أَصُبُّ عَلَيْهِ مِنْ الْمَاءِ قُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَنْ الْمَرْأَتَانِ اللَّتَانِ تَظَاهَرَتَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عَائِشَةُ وَحَفْصَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا
हमरा सब के [सुफयान] के [यह्या] स मतलब इब्न सईद के [उबैद बिन हुनैन] स [इब्न अब्बास] स कहला के बाद ओ कहलनि; हम [उमर] स पूछय चाहैत छलहुं, मुदा मौका नहि भेटल, ताहि लेल दू साल तक इंतजार केलहुं, जखन हम सब मरर पहुंचलहुं त अझ झाहरान आ उमर अपना कए राहत देबा लेल गेलाह, हुनकर शौच समाप्त केलाक बाद हम हुनका लग पहुंचलहुं जे हुनका पानि देल जाए, तखन हम कहलियनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बुराई करय वाली दू महिला के छै?' उमर जबाब देलकै; 'ऐस्याह आ हफशाह'।
Imam Ahmad : 322
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَيُّوبَ عَنِ ابْنِ سِيرِينَ سَمِعَهُ مِنْ أَبِي الْعَجْفَاءِ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ لَا تُغْلُوا صُدُقَ النِّسَاءِ فَإِنَّهَا لَوْ كَانَتْ مَكْرُمَةً فِي الدُّنْيَا أَوْ تَقْوَى فِي الْآخِرَةِ لَكَانَ أَوْلَاكُمْ بِهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَنْكَحَ شَيْئًا مِنْ بَنَاتِهِ وَلَا نِسَائِهِ فَوْقَ اثْنَتَيْ عَشْرَةَ وُقِيَّةً وَأُخْرَى تَقُولُونَهَا فِي مَغَازِيكُمْ قُتِلَ فُلَانٌ شَهِيدًا مَاتَ فُلَانٌ شَهِيدًا وَلَعَلَّهُ أَنْ يَكُونَ قَدْ أَوْقَرَ عَجُزَ دَابَّتِهِ أَوْ دَفَّ رَاحِلَتِهِ ذَهَبًا وَفِضَّةً يَبْتَغِي التِّجَارَةَ فَلَا تَقُولُوا ذَاكُمْ وَلَكِنْ قُولُوا كَمَا قَالَ مُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قُتِلَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَهُوَ فِي الْجَنَّةِ
हमरा सब के [सुफयान] के [अय्यूब] स [इब्न सिरिन] स कहलक अछि जे ओ [अबुल ‘अजफा’] स सुनने अछि हम [उमर] के कहैत सुनने छी; 'स्त्रीकेँ दहेज देबामे बेसी नहि करू।' कारण जँ दहेज दुनियाँ मे सम्मान अछि, वा अंतिम दिन धरि भक्ति अछि, त' निश्चित रूप सँ अहाँ सँ नीक कियो, अर्थात नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ई काज करितथि, ओ अपन कोनो बेटी सँ कहियो विवाह नहि केलनि आ संगहि अपन पत्नी सँ सेहो कहियो विवाह नहि केलनि - बारह उकिया सँ बेसी दहेजक संग। आ दोसर - अतिशयोक्ति नहि करू - अपन युद्धक्षेत्र मे कहब; 'फल्लाँ शहीद भेल, फलां शहीद भ' गेल,' भले ई भ' सकैत अछि जे ओ अपन वाहनक पीठ पर वा अपन वाहनक काठी पर भारी बोझ अर्थात सोना वा चानी, जे कारोबारक उद्देश्य छल, लादने होथि । ऐसनऽ नै कहऽ, लेकिन जेना मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि 'जेकरा अल्लाह के रास्ता म॑ -लड़ाई के कारण- मारलऽ जाय छै, वू स्वर्ग म॑ प्रवेश करै छै' ।
Imam Ahmad : 323
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ أَمَلَّهُ عَلَيَّ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ الْغَطَفَانِيِّ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ الْيَعْمَرِيِّ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَامَ خَطِيبًا فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَذَكَرَ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ثُمَّ قَالَ إِنِّي رَأَيْتُ رُؤْيَا كَأَنَّ دِيكًا نَقَرَنِي نَقْرَتَيْنِ وَلَا أُرَى ذَلِكَ إِلَّا لِحُضُورِ أَجَلِي وَإِنَّ نَاسًا يَأْمُرُونَنِي أَنْ أَسْتَخْلِفَ وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَمْ يَكُنْ لِيُضِيعَ خِلَافَتَهُ وَدِينَهُ وَلَا الَّذِي بَعَثَ بِهِ نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنْ عَجِلَ بِي أَمْرٌ فَالْخِلَافَةُ شُورَى فِي هَؤُلَاءِ الرَّهْطِ السِّتَّةِ الَّذِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَنْهُمْ رَاضٍ فَأَيُّهُمْ بَايَعْتُمْ لَهُ فَاسْمَعُوا لَهُ وَأَطِيعُوا وَقَدْ عَرَفْتُ أَنَّ رِجَالًا سَيَطْعَنُونَ فِي هَذَا الْأَمْرِ وَإِنِّي قَاتَلْتُهُمْ بِيَدِي هَذِهِ عَلَى الْإِسْلَامِ فَإِنْ فَعَلُوا فَأُولَئِكَ أَعْدَاءُ اللَّهِ الْكَفَرَةُ الضُّلَّالُ وَإِنِّي وَاللَّهِ مَا أَدَعُ بَعْدِي شَيْئًا هُوَ أَهَمُّ إِلَيَّ مِنْ أَمْرِ الْكَلَالَةِ وَلَقَدْ سَأَلْتُ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْهَا فَمَا أَغْلَظَ لِي فِي شَيْءٍ قَطُّ مَا أَغْلَظَ لِي فِيهَا حَتَّى طَعَنَ بِيَدِهِ أَوْ بِإِصْبَعِهِ فِي صَدْرِي أَوْ جَنْبِي وَقَالَ يَا عُمَرُ تَكْفِيكَ الْآيَةُ الَّتِي نَزَلَتْ فِي الصَّيْفِ الَّتِي فِي آخِرِ سُورَةِ النِّسَاءِ وَإِنِّي إِنْ أَعِشْ أَقْضِ فِيهَا قَضِيَّةً لَا يَخْتَلِفُ فِيهَا أَحَدٌ يَقْرَأُ الْقُرْآنَ أَوْ لَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أُشْهِدُكَ عَلَى أُمَرَاءِ الْأَمْصَارِ فَإِنِّي بَعَثْتُهُمْ يُعَلِّمُونَ النَّاسَ دِينَهُمْ وَسُنَّةَ نَبِيِّهِمْ وَيَقْسِمُونَ فِيهِمْ فَيْئَهُمْ وَيُعَدِّلُونَ عَلَيْهِمْ وَمَا أَشْكَلَ عَلَيْهِمْ يَرْفَعُونَهُ إِلَيَّ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَأْكُلُونَ مِنْ شَجَرَتَيْنِ لَا أُرَاهُمَا إِلَّا خَبِيثَتَيْنِ هَذَا الثُّومُ وَالْبَصَلُ لَقَدْ كُنْتُ أَرَى الرَّجُلَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوجَدُ رِيحُهُ مِنْهُ فَيُؤْخَذُ بِيَدِهِ حَتَّى يُخْرَجَ بِهِ إِلَى الْبَقِيعِ فَمَنْ كَانَ آكِلَهُمَا لَا بُدَّ فَلْيُمِتْهُمَا طَبْخًا قَالَ فَخَطَبَ بِهَا عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَأُصِيبَ يَوْمَ الْأَرْبِعَاءِ لِأَرْبَعِ لَيَالٍ بَقِينَ مِنْ ذِي الْحِجَّةِ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [सैद बिन अबी अरूबा] के कहने छैथ जे ओ हमरा [कतादाह] स [सलीम बिन अबिल जा'द अल घथाफनी] स [मदन बिन अबू थल्हाह अल या'मारी] स डिक्टेट केने छथि जे [उमर] एकटा प्रवचन देलनि, ओ अल्लाह के स्तुति केलनि आ हुनकर स्तुति केलनि, तखन ओ नबी के याद केलनि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ अबू बकर, तखन कहलनि; 'असल मे हम सपना देखलहुँ जेना मुर्गा हमरा दू बेर चुभने हो ।' हम अपन आसन्न प्रलयक -एकटा संकेत- छोड़ि नहि बुझलहुँ । असल मे कतेको लोक एहन छलाह जे हमरा खलीफाक उत्तराधिकारी तकबाक आदेश देलनि, आ सचमुच अल्लाह अपन धर्म आ खिलाफत केँ बर्बाद नहि करताह, जे हुनका अनबाक लेल अपन नबी केँ पठौने छथि। जँ हमर मृत्यु जल्दिये आबि जायत तखन खिलाफत पर चर्चा ओहि छह गोटे द्वारा कयल जायत जिनका नबीयुल्लाह मरला पर आशीर्वाद देने छलाह | अहाँ सब में स जे कियो वफादारी करब, तखन अहाँ सब के एकर बात जरूर सुनब आ ओकर पालन करब, वास्तव में हमरा बुझल अछि जे किछु एहन लोक छथि जे एहि मामला में हमरा निंदा करताह, आ हम हुनका सब स इस्लाम के नाम पर अपन दुनु हाथ स लड़ब। अगर करै छै त॑ वू अल्लाह केरऽ दुश्मन के दुश्मन छै जे काफिर आरू गुमराह करै छै । असल मे हम अल्लाह क कसम हमरा लेल हार क समस्या स बेसी महत्वपूर्ण किछु नहि छोड़ब। असल मे हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एहि बारे मे पूछने रही, आ ओ हमरा स कहियो कोनो बात पर जोर नहि देलथि जेना ओ एहि मामला मे जोर देलथि, ताहि लेल ओ अपन दूनू आँगुर हमर छाती मे या हमर पेट मे ठोकि देलथि। तखन ओ कहलनि : 'हे उमर, अहाँक लेल काफी अछि सूरह अन नीसा के अंत मे शेफ आयत'। असल मे जँ हम एखनो जीवित रहितहुँ त' ओहि बात पर निर्णय एहन निर्णय सँ करितहुँ जे ओहि व्यक्ति द्वारा निर्णय कयल जायत जे -कुरान- पढ़ि सकैत अछि वा जे कुरान' नहि पढ़ि सकैत अछि । तखन उमर कहलखिन, हे अल्लाह, सचमुच हम अहाँ के देश के नेता सब के गवाही दैत छी, सचमुच हम हुनका सब के एहि लेल पठेलौं जे ओ सब लोक के अपन धर्म आ अपन पैगम्बर के सुन्नत के बारे में सिखाबैथ। अपन फै` संपत्ति हुनका लोकनि केँ बाँटि देलनि, हुनका सभक संग न्याय केलनि, आ हमरा सँ एहन बातक शिकायत केलनि जे ओहि लोकक समस्याक संबंध मे हुनका लोकनि केँ स्पष्ट नहि छलनि'. तखन उमर बजलाह; 'हे लोक सभ, असल मे अहाँ दू टा गाछ मे सँ खा लेने छी जे हमरा दुनू घृणित बुझाइत अछि, गाछ लहसुन आ शैलोट अछि ।' हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में एकटा आदमी के देखलहुं जे हुनका सं गाछ के गंध के गंध करैत छल, ताहि लेल हुनकर हाथ पकड़ल गेल छल, जाबत तक हुनका बकी नहिं बाहर नहिं ल गेल गेल छल. जेकरा दुनू खाय के इच्छा हो त' दुनू के ता धरि पका दियौक जा धरि दुनूक गंध गायब नहि भ' जाय'। म'दन बाजल; 'उमर शुक्रवार के प्रचार करलकै, आरू बुध दिन, धुल हिज्जा महीना के अंत स॑ चारि दिन पहलें ओकरऽ हत्या करी देलऽ गेलै' ।
Imam Ahmad : 324
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ وَأَخْبَرَنِي هُشَيْمٌ عَنِ الْحَجَّاجِ بْنِ أَرْطَاةَ عَنِ الْحَكَمِ بْنِ عُتَيْبَةَ عَنْ عُمَارَةَ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ هِيَ سُنَّةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْنِي الْمُتْعَةَ وَلَكِنِّي أَخْشَى أَنْ يُعَرِّسُوا بِهِنَّ تَحْتَ الْأَرَاكِ ثُمَّ يَرُوحُوا بِهِنَّ حُجَّاجًا
हमरा सभ [अब्दुरज्जाक] केँ कहि ओ कहलनि; आरू हमरा [हुसैम] क॑ [अल हज्जाज बिन अर्थह] स॑ [अल हकम बिन उतैबा] स॑ [उमराह] स॑ [अबू बुरदाह] स॑ [अबू मूसा] स॑ रिपोर्ट करल॑ छै कि [उमर] न॑ कहलकै; 'से त' अल्लाह केर रसूलुल्लाह केर सुन्नत थिक, - अर्थात मुत'ह - हज - मुदा हमरा डर अछि जे ओ सभ अपन पत्नीक संग अराक गाछक नीचा आराम करबाक लेल रुकि जेताह, तखन ओ सभ अपन पत्नीक संग हज करबाक लेल चलि जेताह।'
Imam Ahmad : 325
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَاصِمٍ أَنْبَأَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي زِيَادٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ أَوْ جَدِّهِ الشَّكُّ مِنْ يَزِيدَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ بَعْدَ الْحَدَثِ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ وَصَلَّى
हमरा सब के कहलक अछि [अली बिन अशिम] हमरा सब के [यजीद बिन अबू जियाद] स [अशिम बिन उबैदिल्लाह] स [अपन पिता] या [अपन दादा] स कहलक अछि -शंका यजीद स अबैत अछि- [उमर] स ओ कहलनि; 'हम देखलहुँ जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हदात केलाक बाद वज़ूद करैत छलाह, फेर अपन दू खुफ पोछैत छलाह तखन ओ नमाज केलनि'।
Imam Ahmad : 326
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكٍ قَالَ سَمِعْتُ عِيَاضًا الْأَشْعَرِيَّ قَالَ شَهِدْتُ الْيَرْمُوكَ وَعَلَيْنَا خَمْسَةُ أُمَرَاءَ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ وَيَزِيدُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ وَابْنُ حَسَنَةَ وَخَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ وَعِيَاضٌ وَلَيْسَ عِيَاضٌ هَذَا بِالَّذِي حَدَّثَ سِمَاكًا قَالَ وَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِذَا كَانَ قِتَالٌ فَعَلَيْكُمْ أَبُو عُبَيْدَةَ قَالَ فَكَتَبْنَا إِلَيْهِ إِنَّهُ قَدْ جَاشَ إِلَيْنَا الْمَوْتُ وَاسْتَمْدَدْنَاهُ فَكَتَبَ إِلَيْنَا إِنَّهُ قَدْ جَاءَنِي كِتَابُكُمْ تَسْتَمِدُّونِي وَإِنِّي أَدُلُّكُمْ عَلَى مَنْ هُوَ أَعَزُّ نَصْرًا وَأَحْضَرُ جُنْدًا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فَاسْتَنْصِرُوهُ فَإِنَّ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ نُصِرَ يَوْمَ بَدْرٍ فِي أَقَلَّ مِنْ عِدَّتِكُمْ فَإِذَا أَتَاكُمْ كِتَابِي هَذَا فَقَاتِلُوهُمْ وَلَا تُرَاجِعُونِي قَالَ فَقَاتَلْنَاهُمْ فَهَزَمْنَاهُمْ وَقَتَلْنَاهُمْ أَرْبَعَ فَرَاسِخَ قَالَ وَأَصَبْنَا أَمْوَالًا فَتَشَاوَرُوا فَأَشَارَ عَلَيْنَا عِيَاضٌ أَنْ نُعْطِيَ عَنْ كُلِّ رَأْسٍ عَشْرَةً قَالَ وَقَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ مَنْ يُرَاهِنِّي فَقَالَ شَابٌّ أَنَا إِنْ لَمْ تَغْضَبْ قَالَ فَسَبَقَهُ فَرَأَيْتُ عَقِيصَتَيْ أَبِي عُبَيْدَةَ تَنْقُزَانِ وَهُوَ خَلْفَهُ عَلَى فَرَسٍ عَرَبِيٍّ
हमरा सब के कहने छथि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [स्यूबाह] के [सुन] स कहने छथि ओ कहलनि; सुनलहुँ ['इयादल अल अस्य'री] कहैत छथि; हम यरमुक युद्धक गवाह बनलहुँ आ हमरा सभक संग पाँच सेना सेनापति; अबू उबैदाह बिन अल जर्राह, यजीद बिन अबू सुफियन, इब्नू हसनाह, खालिद बिन अल वालिद आ 'इयादल, -मुदा ई 'इयादल 'इयादल' नहि अछि जे सिमक केँ कहलक-'। 'इयादल कहलक; [उमर] कहलनि; 'जँ युद्ध होयत तखन अहाँ केँ अबू उबैदाक संग रहबाक चाही' 'इयादल कहलनि; 'त' हम सभ हुनका चिट्ठी लिखि देलियनि जे हमरा सभक दिस सं हताहत भेल अछि, तें हम सभ हुनका सं ट्रूप रिनफोर्समेंट मंगलनि, तखन ओ हमरा सभ कें एकटा रिप्लाई लेटर लिखलनि जे; अहाँक पत्र हमरा लग पहुँचि गेल अछि जाहि मे सुदृढीकरणक आग्रह अछि आ सचमुच हम अहाँ केँ ओहि दिस इशारा क' रहल छी जे जीत मे बेसी शक्तिशाली आ अपन सेना मे बेसी तैयार अछि, अर्थात अल्लाह, तेँ हुनका सँ जीत माँगू, कारण वास्तव मे मुहम्मद बदरक लड़ाई मे जीतल छलाह भले ओ अहाँ सँ कम सुसज्जित छलाह, आ जँ हमर पत्र अहाँ धरि पहुँचि जायत तखन हुनका सभ सँ लड़ू आ हमरा लग नहि घुरि जाउ।' 'इयादल कहलक; 'त' हम सभ ओकरा सभसँ लड़लहुँ, ओकरा सभकेँ नष्ट कएलहुँ आ चारि फरसाखक दूरी धरि मारि देलहुँ, ' 'इयादल कहलनि; 'हमरा सभकेँ घनिमाहक धन भेटल आ फेर चर्चा भेल, तखन 'इयादल हमरा सभकेँ प्रस्ताव देलक जे हम सभ एक-एकटा नेताकेँ दस हिस्सा द' दी' 'इयादल कहलनि; आ अबू उबैदा कहलनि; 'हमरा के प्यादा करत?' तखन एकटा युवक बाजल; 'हम, जँ अहाँ तमसाएल नहि छी' 'इयादल कहलनि; 'त' युवक ओकरा आगू बढ़ल आ हम देखलहुँ जे अबू उबैदाक दू टा केशक ताला नीचाँ लटकल छल आ ओ ओहि युवकक पाछू अरब घोड़ा पर सवार छल'।
Imam Ahmad : 327
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ أَنْبَأَنَا عُيَيْنَةُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ قَالَ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فَدَخَلْتُ عَلَى سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَعَلَيَّ جُبَّةُ خَزٍّ فَقَالَ لِي سَالِمٌ مَا تَصْنَعُ بِهَذِهِ الثِّيَابِ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّمَا يَلْبَسُ الْحَرِيرَ مَنْ لَا خَلَاقَ لَهُ
हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन बकर] [अली बिन जैद] स हमरा सब के ['उयनाह] के रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; हम मदीना पहुँचलहुँ, तखन [सलीम बिन अब्दुल्ला] सँ भेंट भेल, आ हम कपास आ रेशम सँ बनल वस्त्र पहिरलहुँ, तखन सलीम हमरा कहलनि; कोन मटेरियल स ई शर्ट बनेलौं? हम एक बेर [हमर पिता] के [उमर बिन अल खथथब] स एकटा कहानी सुनने छलहुं जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छलाह: 'जे रेशमी कपड़ा पहिरैत छथि ओ एहन लोक छथि जिनका अपन हिस्सा नहिं भेटतनि - परलोक में -'.
Imam Ahmad : 328
حَدَّثَنَا أَبُو الْمُنْذِرِ إِسْمَاعِيلُ بْنُ عُمَرَ أُرَاهُ عَنِ حَجَّاجٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَ قَتَلَ رَجُلٌ ابْنَهُ عَمْدًا فَرُفِعَ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَجَعَلَ عَلَيْهِ مِائَةً مِنْ الْإِبِلِ ثَلَاثِينَ حِقَّةً وَثَلَاثِينَ جَذَعَةً وَأَرْبَعِينَ ثَنِيَّةً وَقَالَ لَا يَرِثُ الْقَاتِلُ وَلَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يُقْتَلُ وَالِدٌ بِوَلَدِهِ لَقَتَلْتُكَ
हमरा सब [अबुल मुंडजिरर, अर्थात इस्माइल बिन उमर] के कहला के बाद हमरा लगैत अछि जे हदीस [हज्जाज] स ['अमरू बिन स्यूअइब] स [हुनकर पिता] स [अपन दादा] स आयल अछि ओ कहलनि; एकटा आदमी अपन बच्चा के जानबूझि क हत्या क देलक, तखन एहि मामला के सूचना [उमर बिन अल खथथब] के देल गेल, तखन उमर एक सौ ऊंट के जुर्माना लगा देलक; तीस हिककोह ऊँट -जे चारि वर्षक भ' रहल अछि-, तीस जदजा'आ ऊँट -मादा ऊँट जे पाँच वर्षक भ' रहल अछि- आ चालीस टा त्सानिया ऊँट -जे छह वर्षक भ' रहल अछि-। उमर कहलनि जे 'हत्यारा विरासत मे नहि भेटि सकैत अछि।' काश, हम कहियो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत नहि सुनने रहितियैक जे 'बाप के अपन बच्चा के -मारयला पर -दीकिशा- नहि मारल जाइत छैक'। हम अहाँकेँ अवश्य मारि देब'।
Imam Ahmad : 329
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ وَيَزِيدُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيْسَ لِقَاتِلٍ شَيْءٌ لَوَرَّثْتُكَ قَالَ وَدَعَا خَالَ الْمَقْتُولِ فَأَعْطَاهُ الْإِبِلَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي نَجِيحٍ وَعَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ كِلَاهُمَا عَنْ مُجَاهِدِ بْنِ جَبْرٍ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَقَالَ أَخَذَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ الْإِبِلِ ثَلَاثِينَ حِقَّةً وَثَلَاثِينَ جَذَعَةً وَأَرْبَعِينَ ثَنِيَّةً إِلَى بَازِلِ عَامِهَا كُلُّهَا خَلِفَةٌ قَالَ ثُمَّ دَعَا أَخَا الْمَقْتُولِ فَأَعْطَاهَا إِيَّاهُ دُونَ أَبِيهِ وَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيْسَ لِقَاتِلٍ شَيْءٌ
हमरा सभ केँ [हुसैम] आ [यजीद] केँ [याह्या बिन सईद] सँ [अमरू बिन स्यूअइब] सँ कहलाक बाद ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; 'जँ हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) केँ ई कहैत नहि सुनने रहितहुँ जे 'मारनिहार केँ किछु नहि भेटैत छैक,' त' हम अहाँ केँ अवश्य उत्तराधिकार मे भेटि जायत'।' अमरू कहलक; तखन उमर अपन पिताक वंश सँ हत्याराक काका केँ बजा क' एकटा ऊँट द' देलकैक'। हमरा सभ [या'कुब] केँ कहि क' ओ कहलनि; [इब्न इशाक] सँ हमरा सभ केँ [हमर पिता केँ] कहि क’ ओ कहलनि; हमरा [अब्दुल्लाह बिन अबी नजीह] आ ['अमरू बिन स्यू'एब] दुनू केँ [मुजाहिद बिन जबर] सँ कहने छथि तखन ओ हदीसक जिक्र केलनि, आ कहलनि; 'उमर चारि वर्षक तीस टा मादा ऊँट, पैंतीस वर्षक, आ छियालीस सँ उन वर्षक ऊँट ल' लेलनि आ सभ एखनो गर्भवती छल,' अमरू कहलनि; 'तखन उमर मारल गेल आदमी के भाई के बजा क' बिना पिता के देलखिन आ उमर कहलखिन; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छी जे मारय वाला के किछु नहि भेटैत छैक'।
Imam Ahmad : 330
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ خَالِدٍ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ قَالَ جَاءَ الْعَبَّاسُ وَعَلِيٌّ عَلَيْهِمَا السَّلَام إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْتَصِمَانِ فَقَالَ الْعَبَّاسُ اقْضِ بَيْنِي وَبَيْنَ هَذَا الْكَذَا كَذَا فَقَالَ النَّاسُ افْصِلْ بَيْنَهُمَا افْصِلْ بَيْنَهُمَا قَالَ لَا أَفْصِلُ بَيْنَهُمَا قَدْ عَلِمَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ
हमरा सब के [इस्माइल] हमरा सब के [अय्यूब] के [इकरीमा बिन खालिद] स [मलिक बिन औस बिन अल हदातसन] स कहलक अछि ओ कहलनि; अल अब्बास आ अली एक दोसरा सं बहस करैत [उमर] लग आबि गेलाह, अब्बास कहलनि; 'हमरा आ एहि व्यक्तिक बीच एहि आ एहि सँ निर्णय करू'। तखन लोक सभ कहलक; 'दुनू के बीच अलग, दुनु के बीच अलग, कियाक त दुनु के पहिने स पता छै कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छैथ: 'हमरा सब के विरासत में नै भेटैत अछि, जे धन छोड़ैत छी ओ दान के लेल अछि'।
Imam Ahmad : 331
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنِ ابْنِ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِنَّ مِنْ آخِرِ مَا أُنْزِلَ آيَةُ الرِّبَا وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تُوُفِّيَ وَلَمْ يُفَسِّرْهَا فَدَعُوا الرِّبَا وَالرِّيبَةَ
[इब्न अबी अरूबा] स [कतदाह] स [इब्नुल मुसैयब] स हमरा सब [इस्माइल] स इ कहल गेल अछि जे [उमर] कहला; 'सत्ते, अंतिम आयत मे सँ एकटा जे उतारल गेल छल ओ सूदक विषय मे छल, आ सचमुच अल्लाह केर रसूलुल्लाह मरि गेलाह मुदा ओ एहि आयत केर व्याख्या नहि केलनि, तेँ सूद आ संदेह छोड़ि दियौक'।
Imam Ahmad : 332
حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ اللَّهِ مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنِ الْحَكَمِ عَنْ عُمَارَةَ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ أَبِي مُوسَى عَنْ أَبِي مُوسَى أَنَّهُ كَانَ يُفْتِي بِالْمُتْعَةِ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ رُوَيْدَكَ بِبَعْضِ فُتْيَاكَ فَإِنَّكَ لَا تَدْرِي مَا أَحْدَثَ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ فِي النُّسُكِ بَعْدَكَ حَتَّى لَقِيَهُ بَعْدُ فَسَأَلَهُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ عَلِمْتُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ فَعَلَهُ وَأَصْحَابُهُ وَلَكِنِّي كَرِهْتُ أَنْ يَظَلُّوا بِهِنَّ مُعَرِّسِينَ فِي الْأَرَاكِ وَيَرُوحُوا لِلْحَجِّ تَقْطُرُ رُءُوسُهُمْ
हमरा सब के [अबू अब्दुल्लाह, अर्थात मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [अल हकम] स [उमर बिन उमैर] स [इब्राहिम बिन अबू मूसा] स [अबू मूसा] स [स्यूबाह] स कहने छथि जे एक बेर ओ मुतअह के संग फतवा देने छलाह -तमतु के संग हज के अंजाम देब'-। एक आदमी ओकरा कहलकनि; 'अपनऽ कुछ फतवाऽ स॑ सावधान रहऽ, कैन्हेंकि तोरा बाद केरऽ हज आरू उमरा के संबंध म॑ अमीरुल मुकमिनिन द्वारा कहलऽ गेलऽ हदीस के बारे म॑ नै पता छै' । अस्तु, अबू मूसा तकर बाद अमीरुल मुकमिनिन सं भेंट केलनि, तखन ओ हुनका सं पूछलनि, [उमर] जवाब देलनि; 'सत्ते, हमरा पता अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ हुनकर साथी एक बेर एहन केने छलाह -तमातु के संग हज केने छलाह'-। ओना हमरा नीक नहि लागत जँ ओ सभ आ पत्नी सभ अरक गाछक नीचाँ आराम करबाक लेल रुकि जाथि , तखन माथ पर पानि टपकैत हज करय लेल चलि जाथि ।'
Imam Ahmad : 333
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ وَحَجَّاجٌ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ قَالَ سَمِعْتُ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ قَالَ حَجَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَرَادَ أَنْ يَخْطُبَ النَّاسَ خُطْبَةً فَقَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ إِنَّهُ قَدْ اجْتَمَعَ عِنْدَكَ رَعَاعُ النَّاسِ فَأَخِّرْ ذَلِكَ حَتَّى تَأْتِيَ الْمَدِينَةَ فَلَمَّا قَدِمَ الْمَدِينَةَ دَنَوْتُ مِنْهُ قَرِيبًا مِنْ الْمِنْبَرِ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ وَإِنَّ نَاسًا يَقُولُونَ مَا بَالُ الرَّجْمِ وَإِنَّمَا فِي كِتَابِ اللَّهِ الْجَلْدُ وَقَدْ رَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ وَلَوْلَا أَنْ يَقُولُوا أَثْبَتَ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا لَيْسَ فِيهِ لَأَثْبَتُّهَا كَمَا أُنْزِلَتْ
हमरा सब के कहल गेल अछि जे [मुहम्मद बिन जा'फर] आ [हज्जाज] दुनू गोटे कहलनि; [सअद बिन इब्राहिम] स हमरा सब [स्यूअबाह] स संबंधित केलाक बाद ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] [इब्नु अब्बास] सँ [अब्दुररहमान बिन औफ] सँ एकटा कथा कहैत छलाह ओ कहलनि; [उमर बिन अल खथथब] हज के काज केलनि तखन ओ लोकक सोझाँ प्रचार करय चाहैत छलाह, तखन अब्दुररहमान बिन औफ कहलनि; 'सत्ते, निम्न वर्गक लोक अहाँक कात मे जमा भ' गेल अछि, तें मदीना पहुँचबा धरि एहि बात केँ टालि दियौक'। उमर मदीना पहुँचला पर हम मंच लग हुनका लग पहुँचलहुँ । तखन हम हुनका कहैत सुनलियनि; 'सत्ते लोक कहैत अछि; 'पत्थर मारबाक सजा किएक अछि, जखन कि अल्लाहक किताब - कुरान मे - मात्र कोड़ा मारबाक सजा अछि ? ' भले ही अल्लाह के रसूलुल्लाह के पत्थर मारल गेलै, आरू हम्में हुनकऽ मरला के बाद पत्थरबाजी के नियम लागू करलियै, लेकिन अगर हमरा चिंता नै छेलै त॑ वू कहतै; 'उमर अल्लाह केरऽ किताब म॑ कुछ ऐसनऽ स्थापित करलकै जे ओकरा स॑ नै छै' । हम पाथर मारबाक सजा अवश्य तय करब जेना कोड़ा मारबाक सजा देल गेल छल |"
Imam Ahmad : 334
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ وَحَجَّاجٌ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ يَعْنِي ابْنَ بَشِيرٍ يَخْطُبُ قَالَ ذَكَرَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَا أَصَابَ النَّاسُ مِنْ الدُّنْيَا فَقَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَظَلُّ الْيَوْمَ يَلْتَوِي مَا يَجِدُ دَقَلًا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ
हमरा सब के कहल गेल अछि जे [मुहम्मद बिन जा'फर] आ [हज्जाज] दुनू गोटे कहलनि; [सिमक बिन हरब] सँ हमरा सभ केँ [स्यू'बाह] कहि क' ओ कहलनि; हम [अन नु'मान अर्थात इब्न बसिर] के उपदेश दैत सुनलहुँ, ओ कहलनि; [उमर] लोक के अनुभव करय वाला सांसारिक सुख के जिक्र केलनि, तें ओ कहलनि; 'सत्ते, हम दिन भरि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखलियैन जे हुनकर पेट खाली छलनि, कारण हुनका एकोटा खराब खजूर नहि भेटलनि जे हुनकर पेट भरि सकय'।
Imam Ahmad : 335
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنِي شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَيِّتُ يُعَذَّبُ فِي قَبْرِهِ بِمَا نِيحَ عَلَيْهِ وَقَالَ حَجَّاجٌ بِالنِّيَاحَةِ عَلَيْهِ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ [स्यूबाह] आ [हज्जाज] कहलक अछि; हमरा [स्यू'बाह] कहि क' ओ कहलनि; हम [कतदाह] स [सैद बिन अल मुसैयब] स [इब्नु उमर] स [अपन पिता] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एकटा कहानी कहैत सुनलहुं, ओ कहलथि: 'लाश कए ओकर कब्र मे यातना देल जाएत, किया कि ओकर शोक कैल जाइत अछि'। आ हज्जाज कहलनि; 'किएक तँ ओकरा नियहाह'।
Imam Ahmad : 336
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ رُفَيْعًا أَبَا الْعَالِيَةِ يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي رِجَالٌ قَالَ شُعْبَةُ أَحْسِبُهُ قَالَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَأَعْجَبُهُمْ إِلَيَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الصَّلَاةِ فِي سَاعَتَيْنِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ
हमरा सभकेँ [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ [स्यूबाह] आ [कतादह] कहि देने अछि ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [रुफैअबुल अलियाह] [इब्न अब्बास] सँ एकटा कथा कहैत हमरा पुरुष सभ केँ कहने छथि, -स्यूबाह कहलनि; हमरा लागल जे ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब स- ओ कहलनि; 'आरू हुनका सब के बारे में [उमर बिन अल खथथब] के बारे में सबसें आश्चर्यजनक बात ई छै कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दू बार नमाज, अस्र नमाज के बाद सूर्यास्त तक आरू फजर नमाज के बाद सूर्योदय तक नमाज मनाबै छेलै'।
Imam Ahmad : 337
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنِي شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ النَّهْدِيَّ قَالَ جَاءَنَا كِتَابُ عُمَرَ وَنَحْنُ بِأَذْرَبِيجَانَ مَعَ عُتْبَةَ بْنِ فَرْقَدٍ أَوْ بِالشَّامِ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْحَرِيرِ إِلَّا هَكَذَا أُصْبُعَيْنِ قَالَ أَبُو عُثْمَانَ فَمَا عَتَّمْنَا إِلَّا أَنَّهُ الْأَعْلَامُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ وَأَبُو دَاوُدَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ النَّهْدِيَّ قَالَ جَاءَنَا كِتَابُ عُمَرَ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ [स्यूबाह] आ [हज्जाज] कहलक अछि; [कतादा] स हमरा [शुबाह] स संबंधित कए ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [अबू उस्मान अन नहदी] कहैत छथि; [उमर के] पत्र हमरा सब लग पहुँचल, ओहि समय हम सब उतबाह बिन फरकाद के संग अजरबैजान में छलहुं, या हम सीरिया में छलहुं, -जाहि में छल-; 'अम्मा बा'दू, सचमुच रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम रेशम के मना क देने छैथ, सिवाय केवल -एतेक आकार के, दू आँगुर के,' अबू उस्मान कहलनि; 'हमरा सभ केँ ई बुझबा मे देरी नहि छल जे उमर केर की मतलब छल आ की चाहैत छल, जे ओकर मतलब कमीज पर लिखल चित्र छल।' हमरा सभकेँ [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ [स्यूबाह], [हज्जाज] आ [अबू दाउद] कहलक अछि ओ कहलनि; [कतादा] स हमरा सब [शुबाह] स संबंधित क ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [अबू उस्मान अन नहदी] कहैत छथि; 'उमरक चिट्ठी हमरा सभ लग पहुँचि गेल अछि'।
Imam Ahmad : 338
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَأَبُو دَاوُدَ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ قَالَ صَلَّى عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ الصُّبْحَ وَهُوَ بِجَمْعٍ قَالَ أَبُو دَاوُدَ كُنَّا مَعَ عُمَرَ بِجَمْعٍ فَقَالَ إِنَّ الْمُشْرِكِينَ كَانُوا لَا يُفِيضُونَ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَيَقُولُونَ أَشْرِقْ ثَبِيرُ وَإِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَالَفَهُمْ فَأَفَاضَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [स्यूबाह] आ [अबू दाउद] के [स्यूबाह] स [अबू इशाक] स [अमरू बिन मैमुन] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] जमून -मुजदलिफा-' मे रहैत फजर नमाज केलनि। अबू दाउद कहलनि; 'जखन हम सभ जम'न मे उमरक संग छलहुँ, उमर कहलनि; 'सत्ते मुश्रिकियन लोकनि जा धरि सूर्य नहि निकलल ता धरि जम'उन नहि छोड़लनि, आ ओ सभ कहलनि; 'ऊपर- त्साबिर'। आ सचमुच नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका सब स असहमत छलाह आ ओ सूर्य उगय स पहिने जमून स चलि गेलाह।
Imam Ahmad : 339
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ يَقُولُ سَأَلَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ تُصِيبُنِي الْجَنَابَةُ مِنْ اللَّيْلِ فَمَا أَصْنَعُ قَالَ اغْسِلْ ذَكَرَكَ ثُمَّ تَوَضَّأْ ثُمَّ ارْقُدْ
हमरा सभकेँ [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ [स्यूबाह] [अब्दुल्लाह बिन दिनार]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हम [इब्न उमर] के कहैत सुनलहुं; उमर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलखिन; 'काल्हि राति हम जुनब छलहुँ तखन की करब?' ओ उत्तर देलनि: 'जननांग धोउ तखन वजूद करू आ सुतू'।
Imam Ahmad : 340
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْحَكَمِ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ عَنِ الْجَرِّ فَحَدَّثَنَا عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْجَرِّ وَعَنْ الدُّبَّاءِ وَعَنْ الْمُزَفَّتِ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [स्यूबाह] के [सलामह बिन कुहैल] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [अबुल हकम] केँ कहैत सुनलहुँ; हम [इब्न उमर] स अल जरर क बारे मे पूछलहुं, त ओ [उमर] स हमरा सब कए कहलथि जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल जरर, अद दुब्बा`- आ अल मुजफ्फात मे शराब प्रेस स मना क देने छथि।