इमाम अहमद : 321
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ حُنَيْنٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَرَدْتُ أَنْ أَسْأَلَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَا رَأَيْتُ مَوْضِعًا فَمَكَثْتُ سَنَتَيْنِ فَلَمَّا كُنَّا بِمَرِّ الظَّهْرَانِ وَذَهَبَ لِيَقْضِيَ حَاجَتَهُ فَجَاءَ وَقَدْ قَضَى حَاجَتَهُ فَذَهَبْتُ أَصُبُّ عَلَيْهِ مِنْ الْمَاءِ قُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَنْ الْمَرْأَتَانِ اللَّتَانِ تَظَاهَرَتَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عَائِشَةُ وَحَفْصَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا
हमें [याह्या] से [सुफ़यान] यानी [उबैद बिन हुनैन] से [इब्न अब्बास] से इब्न सईद के बारे में बताने के बाद उन्होंने कहा; मैं [उमर] से पूछना चाहता था, लेकिन मुझे मौका नहीं मिला, इसलिए मैंने दो साल तक इंतज़ार किया, जब हम मर्र अज़ ज़हरान पहुँचे और उमर शौच के लिए गए, जब उन्होंने शौच किया, तो मैं उनके पास पानी देने गया, फिर मैंने कहा; "ऐ अमीरुल मुख्मिनीन, वे दो औरतें कौन हैं जिन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बुरा किया है?" उमर ने जवाब दिया; "ऐस्या और हफ़्शा।"
इमाम अहमद : 322
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَيُّوبَ عَنِ ابْنِ سِيرِينَ سَمِعَهُ مِنْ أَبِي الْعَجْفَاءِ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ لَا تُغْلُوا صُدُقَ النِّسَاءِ فَإِنَّهَا لَوْ كَانَتْ مَكْرُمَةً فِي الدُّنْيَا أَوْ تَقْوَى فِي الْآخِرَةِ لَكَانَ أَوْلَاكُمْ بِهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَنْكَحَ شَيْئًا مِنْ بَنَاتِهِ وَلَا نِسَائِهِ فَوْقَ اثْنَتَيْ عَشْرَةَ وُقِيَّةً وَأُخْرَى تَقُولُونَهَا فِي مَغَازِيكُمْ قُتِلَ فُلَانٌ شَهِيدًا مَاتَ فُلَانٌ شَهِيدًا وَلَعَلَّهُ أَنْ يَكُونَ قَدْ أَوْقَرَ عَجُزَ دَابَّتِهِ أَوْ دَفَّ رَاحِلَتِهِ ذَهَبًا وَفِضَّةً يَبْتَغِي التِّجَارَةَ فَلَا تَقُولُوا ذَاكُمْ وَلَكِنْ قُولُوا كَمَا قَالَ مُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قُتِلَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَهُوَ فِي الْجَنَّةِ
हमें [सुफ़यान] ने [अय्यूब] से [इब्न सिरिन] से बताया है उसने [अबुल 'अजफा'] से सुना है मैंने [उमर] को कहते सुना; "औरतों को दहेज देने में ज़्यादा मत करो। क्योंकि अगर दहेज दुनिया में इज़्ज़त के लिए होता, या आखिरी दिन के लिए तक़वा के लिए होता, तो तुमसे बेहतर इंसान, यानी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ज़रूर ऐसा करते। उन्होंने कभी अपनी बेटियों से शादी नहीं की और न ही अपनी पत्नियों से बारह उक़िया से ज़्यादा दहेज लेकर शादी की। और दूसरे लोग तुम्हारी लड़ाई के मैदानों में यह कहते हैं: 'फलां शहीद है, फलां शहीद है,' जबकि हो सकता है कि उसने अपने घोड़े की पीठ या काठी पर भारी बोझ लादा हो, यानी सोना या चांदी, जो व्यापार के लिए था। ऐसा मत कहो, बल्कि जैसा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, वैसा कहो: "जो कोई अल्लाह के रास्ते में (लड़ते हुए) मारा जाएगा, वह जन्नत में जाएगा।"
इमाम अहमद : 323
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ أَمَلَّهُ عَلَيَّ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ الْغَطَفَانِيِّ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ الْيَعْمَرِيِّ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَامَ خَطِيبًا فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَذَكَرَ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ثُمَّ قَالَ إِنِّي رَأَيْتُ رُؤْيَا كَأَنَّ دِيكًا نَقَرَنِي نَقْرَتَيْنِ وَلَا أُرَى ذَلِكَ إِلَّا لِحُضُورِ أَجَلِي وَإِنَّ نَاسًا يَأْمُرُونَنِي أَنْ أَسْتَخْلِفَ وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَمْ يَكُنْ لِيُضِيعَ خِلَافَتَهُ وَدِينَهُ وَلَا الَّذِي بَعَثَ بِهِ نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنْ عَجِلَ بِي أَمْرٌ فَالْخِلَافَةُ شُورَى فِي هَؤُلَاءِ الرَّهْطِ السِّتَّةِ الَّذِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَنْهُمْ رَاضٍ فَأَيُّهُمْ بَايَعْتُمْ لَهُ فَاسْمَعُوا لَهُ وَأَطِيعُوا وَقَدْ عَرَفْتُ أَنَّ رِجَالًا سَيَطْعَنُونَ فِي هَذَا الْأَمْرِ وَإِنِّي قَاتَلْتُهُمْ بِيَدِي هَذِهِ عَلَى الْإِسْلَامِ فَإِنْ فَعَلُوا فَأُولَئِكَ أَعْدَاءُ اللَّهِ الْكَفَرَةُ الضُّلَّالُ وَإِنِّي وَاللَّهِ مَا أَدَعُ بَعْدِي شَيْئًا هُوَ أَهَمُّ إِلَيَّ مِنْ أَمْرِ الْكَلَالَةِ وَلَقَدْ سَأَلْتُ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْهَا فَمَا أَغْلَظَ لِي فِي شَيْءٍ قَطُّ مَا أَغْلَظَ لِي فِيهَا حَتَّى طَعَنَ بِيَدِهِ أَوْ بِإِصْبَعِهِ فِي صَدْرِي أَوْ جَنْبِي وَقَالَ يَا عُمَرُ تَكْفِيكَ الْآيَةُ الَّتِي نَزَلَتْ فِي الصَّيْفِ الَّتِي فِي آخِرِ سُورَةِ النِّسَاءِ وَإِنِّي إِنْ أَعِشْ أَقْضِ فِيهَا قَضِيَّةً لَا يَخْتَلِفُ فِيهَا أَحَدٌ يَقْرَأُ الْقُرْآنَ أَوْ لَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أُشْهِدُكَ عَلَى أُمَرَاءِ الْأَمْصَارِ فَإِنِّي بَعَثْتُهُمْ يُعَلِّمُونَ النَّاسَ دِينَهُمْ وَسُنَّةَ نَبِيِّهِمْ وَيَقْسِمُونَ فِيهِمْ فَيْئَهُمْ وَيُعَدِّلُونَ عَلَيْهِمْ وَمَا أَشْكَلَ عَلَيْهِمْ يَرْفَعُونَهُ إِلَيَّ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَأْكُلُونَ مِنْ شَجَرَتَيْنِ لَا أُرَاهُمَا إِلَّا خَبِيثَتَيْنِ هَذَا الثُّومُ وَالْبَصَلُ لَقَدْ كُنْتُ أَرَى الرَّجُلَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوجَدُ رِيحُهُ مِنْهُ فَيُؤْخَذُ بِيَدِهِ حَتَّى يُخْرَجَ بِهِ إِلَى الْبَقِيعِ فَمَنْ كَانَ آكِلَهُمَا لَا بُدَّ فَلْيُمِتْهُمَا طَبْخًا قَالَ فَخَطَبَ بِهَا عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَأُصِيبَ يَوْمَ الْأَرْبِعَاءِ لِأَرْبَعِ لَيَالٍ بَقِينَ مِنْ ذِي الْحِجَّةِ
हमें [मुहम्मद बिन जाफर] ने बताया है हमें [सईद बिन अबी अरूबा] ने बताया है उन्होंने मुझे [कतदा] से [सलीम बिन अबिल जाद अल घतफनी] से [मदान बिन अबू थलहा अल यामारी] से लिखवाया कि [उमर] ने एक उपदेश दिया, उन्होंने अल्लाह की प्रशंसा की और उसकी प्रशंसा की, फिर उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और अबू बकर को याद किया, फिर कहा; "सच में, मैंने सपना देखा जैसे मुर्गे ने मुझे दो बार चोंच मारी हो। मुझे यह (एक इशारा) के अलावा कुछ समझ नहीं आया कि मेरी मौत आने वाली है। असल में, कई लोगों ने मुझे खलीफ़ा का वारिस ढूंढने का हुक्म दिया था, और सच में अल्लाह अपने दीन और खिलाफत को बर्बाद नहीं करेगा, जिसने अपने पैगंबर को इसे लाने के लिए भेजा है। अगर मेरी मौत जल्द ही हो जाती है, तो खिलाफत से छह लोग सलाह लेंगे जिन्हें नबीउल्लाह ने मरने पर आशीर्वाद दिया था। तुम में से तुम जिस किसी के भी प्रति वफ़ादारी की कसम खाओ, तो तुम्हें उसकी बात सुननी चाहिए और उसका पालन करना चाहिए, असल में मुझे पता है कि कुछ लोग हैं जो इस मामले में मेरी बेइज़्ज़ती करेंगे, और मैं इस्लाम के नाम पर उनसे अपने दोनों हाथों से लड़ूंगा अगर वे ऐसा करते हैं, तो वे अल्लाह के दुश्मन हैं जो काफ़िर और गुमराह हैं। सच में, अल्लाह की कसम, मैं कलालत के मामले से ज़्यादा ज़रूरी कुछ भी अपने लिए नहीं छोड़ूंगा। असल में, मैंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इस बारे में पूछा था, और उन्होंने कभी भी मुझ पर किसी बात पर ज़ोर नहीं दिया उन्होंने कहा, "इस पर ज़ोर दो, इसलिए उन्होंने अपनी दो उंगलियां मेरे सीने या पेट में घुसा दीं। फिर उन्होंने कहा: "ऐ उमर, तुम्हारे लिए सूरह अन निसा के आखिर में दी गई शैफ़ आयत काफ़ी है।" सच में, अगर मैं ज़िंदा होता, तो मैं इस मामले में ऐसा फ़ैसला करता जो कोई भी (क़ुरान) पढ़ सकता है या जो क़ुरान नहीं पढ़ सकता, वह तय करता।" फिर उमर ने कहा, "ऐ अल्लाह, मैं उस देश के नेताओं की गवाही तुम्हारे सामने देता हूँ, बेशक मैंने उन्हें इसलिए भेजा था ताकि वे लोगों को उनके धर्म और उनके पैगंबर की सुन्नत के बारे में सिखाएं। अपनी फ़ई की जायदाद उन्हें बांटी, उनके साथ इंसाफ़ किया, और लोगों की समस्याओं के बारे में जो बातें उन्हें साफ़ नहीं थीं, उनके बारे में मुझसे शिकायत की।" फिर उमर ने कहा; "ऐ लोगों, असल में तुमने दो पेड़ों का फल खाया है जो मुझे दोनों ही गंदे लगते हैं, पेड़ हैं लहसुन और प्याज़। मैंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में एक आदमी को देखा था जिसने अपने हाथ से पेड़ की खुशबू सूंघी, तो उसने अपना हाथ तब तक रोके रखा जब तक उसे बाकी में नहीं ले जाया गया। जो कोई दोनों खाना चाहता है, उसे दोनों को तब तक पकाना चाहिए जब तक दोनों (खुशबू) गायब न हो जाएं।" मदन ने कहा; "उमर ने शुक्रवार को उपदेश दिया, और वह बुधवार को मारा गया, ज़ुल हिज्जा का महीना खत्म होने से चार दिन पहले।"
इमाम अहमद : 324
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ وَأَخْبَرَنِي هُشَيْمٌ عَنِ الْحَجَّاجِ بْنِ أَرْطَاةَ عَنِ الْحَكَمِ بْنِ عُتَيْبَةَ عَنْ عُمَارَةَ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ هِيَ سُنَّةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْنِي الْمُتْعَةَ وَلَكِنِّي أَخْشَى أَنْ يُعَرِّسُوا بِهِنَّ تَحْتَ الْأَرَاكِ ثُمَّ يَرُوحُوا بِهِنَّ حُجَّاجًا
उन्होंने कहा, "हमें [अब्दुर्रज्जाक] ने बताया है; और मुझे [हुसैय्यम] ने [अल हज्जाज बिन अर्था] से [अल हकम बिन उतैबा] से [उमराह] से [अबू बुरदा] से [अबू मूसा] से बताया है कि [उमर] ने कहा; "यह अल्लाह के रसूल की सुन्नत है, - यानी मुताह (हज), - लेकिन मुझे डर है कि वे अपनी पत्नियों के साथ अरक के पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुकेंगे, फिर वे अपनी पत्नियों के साथ हज करने जाएंगे।"
इमाम अहमद : 325
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَاصِمٍ أَنْبَأَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي زِيَادٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ أَوْ جَدِّهِ الشَّكُّ مِنْ يَزِيدَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ بَعْدَ الْحَدَثِ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ وَصَلَّى
अली बिन अशिम ने हमें यज़ीद बिन अबू ज़ियाद से रिवायत किया है, अशिम बिन उबैदिल्लाह ने अपने पिता या दादा से - शक यज़ीद से आता है - उमर ने कहा; "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को हदीस के बाद वज़ू करते देखा, फिर अपने दोनों खूफ़ पर मसह किया और फिर नमाज़ पढ़ी।"
इमाम अहमद : 326
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكٍ قَالَ سَمِعْتُ عِيَاضًا الْأَشْعَرِيَّ قَالَ شَهِدْتُ الْيَرْمُوكَ وَعَلَيْنَا خَمْسَةُ أُمَرَاءَ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ وَيَزِيدُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ وَابْنُ حَسَنَةَ وَخَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ وَعِيَاضٌ وَلَيْسَ عِيَاضٌ هَذَا بِالَّذِي حَدَّثَ سِمَاكًا قَالَ وَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِذَا كَانَ قِتَالٌ فَعَلَيْكُمْ أَبُو عُبَيْدَةَ قَالَ فَكَتَبْنَا إِلَيْهِ إِنَّهُ قَدْ جَاشَ إِلَيْنَا الْمَوْتُ وَاسْتَمْدَدْنَاهُ فَكَتَبَ إِلَيْنَا إِنَّهُ قَدْ جَاءَنِي كِتَابُكُمْ تَسْتَمِدُّونِي وَإِنِّي أَدُلُّكُمْ عَلَى مَنْ هُوَ أَعَزُّ نَصْرًا وَأَحْضَرُ جُنْدًا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فَاسْتَنْصِرُوهُ فَإِنَّ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ نُصِرَ يَوْمَ بَدْرٍ فِي أَقَلَّ مِنْ عِدَّتِكُمْ فَإِذَا أَتَاكُمْ كِتَابِي هَذَا فَقَاتِلُوهُمْ وَلَا تُرَاجِعُونِي قَالَ فَقَاتَلْنَاهُمْ فَهَزَمْنَاهُمْ وَقَتَلْنَاهُمْ أَرْبَعَ فَرَاسِخَ قَالَ وَأَصَبْنَا أَمْوَالًا فَتَشَاوَرُوا فَأَشَارَ عَلَيْنَا عِيَاضٌ أَنْ نُعْطِيَ عَنْ كُلِّ رَأْسٍ عَشْرَةً قَالَ وَقَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ مَنْ يُرَاهِنِّي فَقَالَ شَابٌّ أَنَا إِنْ لَمْ تَغْضَبْ قَالَ فَسَبَقَهُ فَرَأَيْتُ عَقِيصَتَيْ أَبِي عُبَيْدَةَ تَنْقُزَانِ وَهُوَ خَلْفَهُ عَلَى فَرَسٍ عَرَبِيٍّ
हमें [मुहम्मद बिन जाफर] ने बताया है हमें [स्यूबा] ने [सिमक] से बताया है उसने कहा; मैंने ['इयादल अल असीरी] को कहते सुना; मैंने यरमुक की लड़ाई देखी और हमारे साथ पांच सेना कमांडर थे; अबू उबैदा बिन अल जर्राह, यज़ीद बिन अबू सुफ़यान, इब्न हसनाह, खालिद बिन अल वालिद और 'इयादल, -लेकिन यह 'इयादल' वह 'इयादल नहीं है जिसने सिमक को बताया-।" 'इयादल ने कहा; [उमर] ने कहा; "अगर युद्ध छिड़ जाता है तो आपको अबू उबैदा के साथ होना चाहिए" 'इयादल ने कहा; "इसलिए हमने उन्हें लिखा कि हमारी तरफ भी हताहत हुए हैं, इसलिए हमने उनसे सुदृढीकरण के लिए कहा, फिर उन्होंने हमें एक उत्तर लिखा कि; तुम्हारा लेटर मेरे पास आया है जिसमें मदद के लिए रिक्वेस्ट है और मैं तुम्हें उस इंसान की तरफ इशारा कर रहा हूँ जो जीतने में ज़्यादा ताकतवर है और अपनी फौज में बेहतर तैयार है, यानी अल्लाह, तो उससे जीत के लिए दुआ करो, क्योंकि असल में मुहम्मद बद्र की लड़ाई में जीते गए थे, भले ही वे तुमसे कम तैयार थे, और अगर मेरा लेटर तुम्हें पहुँचता है तो उनसे लड़ो और मेरे पास वापस मत आना।" इयादल ने कहा; "तो हमने उनसे लड़ाई की, उन्हें खत्म कर दिया और चार फरसख की दूरी तक उन्हें मार डाला," इयादल ने कहा; "हमें गनीमा का खज़ाना मिला, फिर सोच-विचार हुआ, फिर इयादल ने हमें प्रपोज़ किया कि हम हर लीडर को दस हिस्से दें" इयादल ने कहा; और अबू उबैदा ने कहा; "इसे मेरे पास कौन गिरवी रखेगा?" फिर एक जवान आदमी ने कहा; "मैं, अगर तुम नाराज़ नहीं हो" इयादल ने कहा; "तो वह जवान आदमी उसके आगे चला गया और मैंने देखा कि अबू उबैदा के बालों की दो लटें नीचे लटक रही थीं और वह एक अरबी घोड़े पर उस जवान आदमी के पीछे था।"
इमाम अहमद : 327
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ أَنْبَأَنَا عُيَيْنَةُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ قَالَ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فَدَخَلْتُ عَلَى سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَعَلَيَّ جُبَّةُ خَزٍّ فَقَالَ لِي سَالِمٌ مَا تَصْنَعُ بِهَذِهِ الثِّيَابِ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّمَا يَلْبَسُ الْحَرِيرَ مَنْ لَا خَلَاقَ لَهُ
मुहम्मद बिन बकर ने हमें अली बिन ज़ैद से बताया है कि मैं मदीना पहुँचा, फिर मैं सलीम बिन अब्दुल्ला से मिला, और मैंने सूती और रेशम का कपड़ा पहना, फिर सलीम ने मुझसे कहा कि तुमने यह कमीज़ किस चीज़ से बनाई है? मैंने एक बार अपने पिता को उमर बिन खत्ताब से कहते सुना था कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा था: "जो लोग रेशम का कपड़ा पहनते हैं, वे लोग हैं जिन्हें (आख़िरत में) उनका हिस्सा नहीं मिलेगा।"
इमाम अहमद : 328
حَدَّثَنَا أَبُو الْمُنْذِرِ إِسْمَاعِيلُ بْنُ عُمَرَ أُرَاهُ عَنِ حَجَّاجٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَ قَتَلَ رَجُلٌ ابْنَهُ عَمْدًا فَرُفِعَ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَجَعَلَ عَلَيْهِ مِائَةً مِنْ الْإِبِلِ ثَلَاثِينَ حِقَّةً وَثَلَاثِينَ جَذَعَةً وَأَرْبَعِينَ ثَنِيَّةً وَقَالَ لَا يَرِثُ الْقَاتِلُ وَلَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يُقْتَلُ وَالِدٌ بِوَلَدِهِ لَقَتَلْتُكَ
हमें [अबुल मुंडज़िर, यानी इस्माइल बिन उमर] बताते हुए, मुझे लगता है कि हदीस [हज्जाज] से [अमरू बिन स्यूऐब] से [उनके पिता] से [उनके दादा] से आई है, उन्होंने कहा; एक आदमी ने जानबूझकर अपने बच्चे को मार डाला, फिर यह बात [उमर बिन अल खत्थब] को बताई गई, फिर उमर ने सौ ऊँटों का जुर्माना लगाया; तीस हिक़्कोह ऊँट (जो चार साल के हो रहे हैं), तीस जदज़ाह ऊँट (मादा ऊँट जो पाँच साल की हो रही हैं) और चालीस त्सानियाह ऊँट (जो छह साल की हो रही हैं)। उमर ने कहा, "कातिल विरासत में नहीं पा सकते। अगर मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते नहीं सुना होता: "एक पिता अपने बच्चे को (मारने) के लिए मारा (दीकिशास) नहीं जाता।" तो मैं तुम्हें ज़रूर मार डालता।"
इमाम अहमद : 329
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ وَيَزِيدُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيْسَ لِقَاتِلٍ شَيْءٌ لَوَرَّثْتُكَ قَالَ وَدَعَا خَالَ الْمَقْتُولِ فَأَعْطَاهُ الْإِبِلَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي نَجِيحٍ وَعَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ كِلَاهُمَا عَنْ مُجَاهِدِ بْنِ جَبْرٍ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَقَالَ أَخَذَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ الْإِبِلِ ثَلَاثِينَ حِقَّةً وَثَلَاثِينَ جَذَعَةً وَأَرْبَعِينَ ثَنِيَّةً إِلَى بَازِلِ عَامِهَا كُلُّهَا خَلِفَةٌ قَالَ ثُمَّ دَعَا أَخَا الْمَقْتُولِ فَأَعْطَاهَا إِيَّاهُ دُونَ أَبِيهِ وَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيْسَ لِقَاتِلٍ شَيْءٌ
उन्होंने कहा, "हमें [हुसैय्यम] और [यज़ीद] को [याह्या बिन सईद] से [अमरू बिन स्यूऐब] से बताया है; [उमर] ने कहा; "यदि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते नहीं सुना होता कि "जो हत्या करता है उसे कुछ नहीं मिलता," तो मैं तुम्हारा वारिस होता।" अमरू ने कहा; फिर उमर ने अपने पिता की तरफ़ से मारे गए आदमी के चाचा को बुलाया और उसे एक ऊँट दिया।" उसने हमें [याक़ूब] बताया; उसने हमें [मेरे पिता] [इब्न इसहाक] से बताया, उसने कहा; उसने मुझे [अब्दुल्ला बिन अबी नजीह] और [अमरू बिन स्यूऐब] दोनों [मुजाहिद बिन जब्र] से बताया, फिर उसने हदीस का ज़िक्र किया, और उसने कहा; "उमर ने तीस ऊँटनियाँ लीं जो चार साल की थीं, और पाँच साल की, उनमें से तीस तक, और चालीस ऊँटनियाँ जो छह से नौ साल की थीं और वे सभी अभी भी प्रेग्नेंट थीं," अमरू ने कहा; "फिर उमर ने मारे गए आदमी के भाई को बुलाया और उसे उसके पिता के बिना उसे दे दिया और उमर ने कहा; "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "जो लोग मारते हैं उन्हें कुछ नहीं मिलता।"
इमाम अहमद : 330
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ خَالِدٍ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ قَالَ جَاءَ الْعَبَّاسُ وَعَلِيٌّ عَلَيْهِمَا السَّلَام إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْتَصِمَانِ فَقَالَ الْعَبَّاسُ اقْضِ بَيْنِي وَبَيْنَ هَذَا الْكَذَا كَذَا فَقَالَ النَّاسُ افْصِلْ بَيْنَهُمَا افْصِلْ بَيْنَهُمَا قَالَ لَا أَفْصِلُ بَيْنَهُمَا قَدْ عَلِمَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ
[इस्माईल] ने हमें [अय्यूब] [इकरीमा बिन खालिद] से [मलिक बिन औस बिन अल हदत्सन] से बताया है, उन्होंने कहा; अल अब्बास और अली उनके बीच एक झगड़े के साथ [उमर] के पास आए, अब्बास ने कहा; "मेरे और इस आदमी के बीच यह और यह तय करो।" तब लोगों ने कहा; "उनके बीच फैसला करो, उनके बीच फैसला करो, क्योंकि वे दोनों जानते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: "हमें विरासत में नहीं मिला है, जो धन हम पीछे छोड़ते हैं वह दान है।"
इमाम अहमद : 331
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنِ ابْنِ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِنَّ مِنْ آخِرِ مَا أُنْزِلَ آيَةُ الرِّبَا وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تُوُفِّيَ وَلَمْ يُفَسِّرْهَا فَدَعُوا الرِّبَا وَالرِّيبَةَ
हमें [इब्न अबी अरूबा] से [क़तादा] से [इब्नुल मुसय्यब] तक [उमर] ने बताया है कि उन्होंने कहा; "बेशक, जो आखिरी आयतें उतारी गईं उनमें से एक सूद के बारे में थी, और बेशक अल्लाह के रसूल की मौत हो गई लेकिन उन्होंने इस आयत का मतलब नहीं बताया, इसलिए सूद और शक को पीछे छोड़ दो।"
इमाम अहमद : 332
حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ اللَّهِ مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنِ الْحَكَمِ عَنْ عُمَارَةَ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ أَبِي مُوسَى عَنْ أَبِي مُوسَى أَنَّهُ كَانَ يُفْتِي بِالْمُتْعَةِ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ رُوَيْدَكَ بِبَعْضِ فُتْيَاكَ فَإِنَّكَ لَا تَدْرِي مَا أَحْدَثَ أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ فِي النُّسُكِ بَعْدَكَ حَتَّى لَقِيَهُ بَعْدُ فَسَأَلَهُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ عَلِمْتُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ فَعَلَهُ وَأَصْحَابُهُ وَلَكِنِّي كَرِهْتُ أَنْ يَظَلُّوا بِهِنَّ مُعَرِّسِينَ فِي الْأَرَاكِ وَيَرُوحُوا لِلْحَجِّ تَقْطُرُ رُءُوسُهُمْ
हमें [अबू अब्दुल्लाह यानी मुहम्मद बिन जाफ़र] ने [स्यूबा] ने [अल हकम] से [उमरह बिन उमैर] से [इब्राहिम बिन अबू मूसा] से [अबू मूसा] से बताया है कि उन्होंने एक बार मुताह के साथ फतवा दिया (तमतु के साथ हज किया)। एक आदमी ने उनसे कहा; "अपने कुछ फतवों से सावधान रहें, क्योंकि आप अमीरुल मुकमिनिन द्वारा हज और उमराह के बारे में आपके बाद बताई गई हदीस नहीं जानते हैं।" तो अबू मूसा उसके बाद अमीरुल मुकमिनिन से मिले, फिर उन्होंने उनसे पूछा, [उमर] ने उत्तर दिया; "वास्तव में, मुझे पता है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके साथियों ने एक बार ऐसा किया था (तमतु के साथ हज किया था)। हालांकि, मैं यह पसंद नहीं करूंगा कि वे और उनकी पत्नियां अरक के पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुकें, फिर वे हज करने चले जाएं जबकि उनके सिर से पानी टपक रहा हो।"
इमाम अहमद : 333
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ وَحَجَّاجٌ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ قَالَ سَمِعْتُ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ قَالَ حَجَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَرَادَ أَنْ يَخْطُبَ النَّاسَ خُطْبَةً فَقَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ إِنَّهُ قَدْ اجْتَمَعَ عِنْدَكَ رَعَاعُ النَّاسِ فَأَخِّرْ ذَلِكَ حَتَّى تَأْتِيَ الْمَدِينَةَ فَلَمَّا قَدِمَ الْمَدِينَةَ دَنَوْتُ مِنْهُ قَرِيبًا مِنْ الْمِنْبَرِ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ وَإِنَّ نَاسًا يَقُولُونَ مَا بَالُ الرَّجْمِ وَإِنَّمَا فِي كِتَابِ اللَّهِ الْجَلْدُ وَقَدْ رَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ وَلَوْلَا أَنْ يَقُولُوا أَثْبَتَ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا لَيْسَ فِيهِ لَأَثْبَتُّهَا كَمَا أُنْزِلَتْ
हमें बताया गया है कि [मुहम्मद बिन जाफ़र] और [हज्जाज] दोनों ने कहा; हमें [स्यूबा] ने [सअद बिन इब्राहीम] से बताया कि उन्होंने कहा; मैंने [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा] को [इब्न अब्बास] से [अब्दुर्रहमान बिन औफ़] से एक कहानी सुनाते सुना, उन्होंने कहा; [उमर बिन अल खत्तब] ने हज किया, फिर वह लोगों के सामने उपदेश देना चाहते थे, तो अब्दुर्रहमान बिन औफ़ ने कहा; "बेशक, तुम्हारे पास निचले तबके के लोग जमा हो गए हैं, इसलिए इसे तब तक टाल दो जब तक तुम मदीना न पहुँच जाओ।" जब उमर मदीना पहुँचे, तो मैं उनके पास पल्पिट के पास गया। फिर मैंने उन्हें यह कहते सुना; "बेशक, लोग कहते हैं: 'पत्थर मारने की सज़ा क्यों है, जबकि अल्लाह की किताब (कुरान) में सिर्फ़ कोड़े मारने की सज़ा है?' फिर भी अल्लाह के रसूल पत्थर मारते थे, और हमने उनकी मौत के बाद भी पत्थर मारने का नियम लागू किया, अगर मुझे डर न होता कि वे कहेंगे: 'उमर ने अल्लाह की किताब में कुछ ऐसा लिखा है जो उसमें से नहीं है।' तो मैं पत्थर मारने की सज़ा उसी तरह लिख देता जैसे कोड़े मारने की सज़ा बताई गई थी।
इमाम अहमद : 334
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ وَحَجَّاجٌ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ يَعْنِي ابْنَ بَشِيرٍ يَخْطُبُ قَالَ ذَكَرَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَا أَصَابَ النَّاسُ مِنْ الدُّنْيَا فَقَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَظَلُّ الْيَوْمَ يَلْتَوِي مَا يَجِدُ دَقَلًا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ
हमें बताया गया है कि [मुहम्मद बिन जाफ़र] और [हज्जाज] दोनों ने कहा; हमें [सिमक बिन हरब] से [स्यूबा] ने बताया, उन्होंने कहा; मैंने [अन नुमान यानी इब्न बसीर] को उपदेश देते सुना, उन्होंने कहा; [उमर] ने दुनियावी सुखों का ज़िक्र किया जो लोग अनुभव करते हैं, तो उन्होंने कहा; "वास्तव में, मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को पूरे दिन खाली देखा, क्योंकि उन्हें एक भी खराब खजूर नहीं मिला जो उनका पेट भर सके।"
इमाम अहमद : 335
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنِي شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَيِّتُ يُعَذَّبُ فِي قَبْرِهِ بِمَا نِيحَ عَلَيْهِ وَقَالَ حَجَّاجٌ بِالنِّيَاحَةِ عَلَيْهِ
मुहम्मद बिन जाफ़र ने हमें बताया है, स्यूबा ने हमें बताया है और हज्जाज ने कहा; स्यूबा ने मुझे बताया है, उन्होंने कहा; मैंने क़तादा को सईद बिन मुसय्यब से इब्न उमर से उनके पिता से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक कहानी सुनाते सुना, उन्होंने कहा: "एक लाश को उसकी कब्र में तड़पाया जाएगा क्योंकि उस पर दुख मनाया जाता है।" और हज्जाज ने कहा; "क्योंकि उस पर नियाह है।"
इमाम अहमद : 336
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ رُفَيْعًا أَبَا الْعَالِيَةِ يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي رِجَالٌ قَالَ شُعْبَةُ أَحْسِبُهُ قَالَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَأَعْجَبُهُمْ إِلَيَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الصَّلَاةِ فِي سَاعَتَيْنِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ
हमें [मुहम्मद बिन जाफ़र] ने बताया है, हमें [स्यूबा] और [क़तदा] ने बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [रुफ़ईअबुल अलियाह] को [इब्न अब्बास] से एक कहानी सुनाते सुना है, मुझे आदमियों ने बताया है, -स्यूबा ने कहा; मुझे लगा उन्होंने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों से- उन्होंने कहा; "और उनके बारे में सबसे हैरानी की बात यह है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दो समय नमाज़ पढ़ने से मना किया है, अस्र की नमाज़ के बाद सूरज डूबने तक और फ़ज्र की नमाज़ के बाद सूरज उगने तक।"
इमाम अहमद : 337
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنِي شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ النَّهْدِيَّ قَالَ جَاءَنَا كِتَابُ عُمَرَ وَنَحْنُ بِأَذْرَبِيجَانَ مَعَ عُتْبَةَ بْنِ فَرْقَدٍ أَوْ بِالشَّامِ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْحَرِيرِ إِلَّا هَكَذَا أُصْبُعَيْنِ قَالَ أَبُو عُثْمَانَ فَمَا عَتَّمْنَا إِلَّا أَنَّهُ الْأَعْلَامُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ وَأَبُو دَاوُدَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ النَّهْدِيَّ قَالَ جَاءَنَا كِتَابُ عُمَرَ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन जाफर] हमें [स्यूबा] और [हज्जाज] के बारे में बताया है उन्होंने कहा; मुझे [क़तादा] से [शुबा] के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा; मैंने [अबू उस्मान अन नहदी] को कहते सुना; [उमर का] पत्र हमारे पास पहुँचा, उस समय हम उतबा बिन फरकद के साथ अज़रबैजान में थे, या हम शाम में थे, (जिसमें है); "अम्मा बा'दु, वास्तव में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रेशम पर प्रतिबंध लगा दिया है, केवल इसके आकार के, दो अंगुल के अलावा," अबू उस्मान ने कहा; "हम यह समझने में देर नहीं कर रहे थे कि उमर का क्या मतलब था और वह क्या चाहते थे, कि उनका मतलब शर्ट पर तस्वीर से था।" हमें बताया है [मुहम्मद बिन जाफर] हमें [स्यूबा], [हज्जाज] और [अबू दाऊद] के बारे में बताया है उन्होंने कहा; हमें [क़तादा] से [शुबा] के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा; मैंने [अबू उथमन अन नहदी] को यह कहते सुना; "उमर का पत्र हमारे पास पहुँच गया है।"
इमाम अहमद : 338
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَأَبُو دَاوُدَ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ قَالَ صَلَّى عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ الصُّبْحَ وَهُوَ بِجَمْعٍ قَالَ أَبُو دَاوُدَ كُنَّا مَعَ عُمَرَ بِجَمْعٍ فَقَالَ إِنَّ الْمُشْرِكِينَ كَانُوا لَا يُفِيضُونَ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَيَقُولُونَ أَشْرِقْ ثَبِيرُ وَإِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَالَفَهُمْ فَأَفَاضَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ
मुहम्मद बिन जाफ़र ने हमें बताया है कि स्यूबा और अबू दाऊद ने स्यूबा से, अबू इसहाक से, अमरू बिन मैमुन से कहा कि उमर ने फज्र की नमाज़ जमून (मुज़दलिफ़ा) में पढ़ी। अबू दाऊद ने कहा कि जब हम जमून में उमर के साथ थे, तो उमर ने कहा कि मुशरिक जमून से तब तक नहीं निकले जब तक सूरज न निकल जाए और उन्होंने कहा कि त्साबिर से ऊपर उठो। और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे असहमति जताई और सूरज निकलने से पहले ही जमून छोड़ दिया।
इमाम अहमद : 339
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ يَقُولُ سَأَلَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ تُصِيبُنِي الْجَنَابَةُ مِنْ اللَّيْلِ فَمَا أَصْنَعُ قَالَ اغْسِلْ ذَكَرَكَ ثُمَّ تَوَضَّأْ ثُمَّ ارْقُدْ
मुहम्मद बिन जाफ़र ने हमें बताया है कि अब्दुल्लाह बिन दीनार ने हमें बताया है कि मैंने इब्न उमर को कहते सुना है कि उमर ने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा कि "कल रात मैं जुनूब था तो मैं क्या करूँ?" उन्होंने जवाब दिया: "अपने प्राइवेट पार्ट धो लो, फिर वुज़ू करो और सो जाओ।"
इमाम अहमद : 340
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْحَكَمِ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ عَنِ الْجَرِّ فَحَدَّثَنَا عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْجَرِّ وَعَنْ الدُّبَّاءِ وَعَنْ الْمُزَفَّتِ
मुहम्मद बिन जाफ़र ने हमें बताया है कि स्यूबा ने सलमा बिन कुहैल से कहा है कि मैंने अबुल हकम को कहते सुना है कि मैंने इब्न उमर से जर्र के बारे में पूछा तो उन्होंने उमर से बताया कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जर्र, अद दुब्बा और मुज़फ़्फ़ात में मिलने वाली शराब की भट्टियों को हराम कर दिया है।