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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 301

حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ أَبِي الْفُرَاتِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ قَالَ عَفَّانُ عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِي الْأَسْوَدِ الدِّيلِيِّ قَالَ أَتَيْتُ الْمَدِينَةَ وَقَدْ وَقَعَ بِهَا مَرَضٌ قَالَ عَبْدُ الصَّمَدِ فَهُمْ يَمُوتُونَ مَوْتًا ذَرِيعًا فَجَلَسْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَرَّتْ بِهِ جَنَازَةٌ فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرٌ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرٌ فَقَالَ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَيْهَا شَرٌّ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ فَقَالَ أَبُو الْأَسْوَدِ فَقُلْتُ لَهُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَا وَجَبَتْ فَقَالَ قُلْتُ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّمَا مُسْلِمٍ شَهِدَ لَهُ أَرْبَعَةٌ بِخَيْرٍ إِلَّا أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ قَالَ قُلْنَا وَثَلَاثَةٌ قَالَ وَثَلَاثَةٌ قُلْنَا وَاثْنَانِ قَالَ وَاثْنَانِ قَالَ وَلَمْ نَسْأَلْهُ عَنْ الْوَاحِدِ

हमरा सभ केँ [अब्दुश शमाद] आ ['अफ्फान] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब के कहलक अछि [दाउद बिन अबुल फुराथ] हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] ['अफ्फान] स [इब्नु बुराइदा] स [अबुल असवद अद दिली] स कहलक अछि; जखन हम मदीना पहुँचलहुँ तखन ओतय महामारी छल,' -[अब्दुश शमाद] कहलनि; 'ओ सभ भयावह रूपेँ मरि गेल, - तखन हम [उमर बिन अल खथथब] बगल मे बैसल रही, अचानक लाश - बियर - ओहि ठाम सँ गुजरि गेल, आ लाशक प्रशंसा दयापूर्वक कयल गेल जखन कि उमर कहलनि; 'आवश्यक'। तखन दोसर लाश ओहि ठाम सँ गुजरि गेल आ लाशक प्रशंसा ओहिना कयल गेल जेना ओ कहलनि; 'आवश्यक'। तखन तेसर लाश बीति गेल, मुदा लाशक कुरूपताक खुलासा भेल, तें उमर कहलनि; अबुल असवद कहलनि जे, ई अनिवार्य अछि; हम हुनकासँ पुछलियनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, फर्ज के की मतलब छै?' उमर जबाब देलकै; 'हम कहैत छी जेना कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा कहल गेल अछि जे: 'कोनो मुसलमान जेकरा चारि लोक भलाई के गवाह बनत, अल्लाह ओकरा स्वर्ग मे प्रवेश देत'। उमर बजलाह; हम पूछैत छी; 'जँ -तीन लोकक गवाह- भ' गेल हो?' ओ उत्तर देलनि: 'तीन लोक द्वारा सेहो'। हम फेर पुछलियनि; 'जँ दू गोटे ?' ओ उत्तर देलनि: 'दू गोटे द्वारा सेहो'। उमर बजलाह; 'तखन हम सभ नहि पुछैत छी जे ई एक व्यक्ति अछि की नहि'।

Hadith

Imam Ahmad : 302

حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا حَرْبٌ يَعْنِي ابْنَ شَدَّادٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ حَدَّثَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ بَيْنَمَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْطُبُ إِذْ جَاءَ رَجُلٌ فَجَلَسَ فَقَالَ عُمَرُ لِمَ تَحْتَبِسُونَ عَنْ الْجُمُعَةِ فَقَالَ الرَّجُلُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ سَمِعْتُ النِّدَاءَ فَتَوَضَّأْتُ ثُمَّ أَقْبَلْتُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَأَيْضًا أَلَمْ تَسْمَعُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا رَاحَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْجُمُعَةِ فَلْيَغْتَسِلْ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنِي أَبِي حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ الْمُعَلِّمُ حَدَّثَنَا يَحْيَى أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَيْنَا هُوَ يَخْطُبُ فَذَكَرَهُ

हमरा सब के कहलक [अब्दुश शमाद] हमरा सब के कहलक [हरब मतलब इब्न स्याद्दद] हमरा सब के कहलक [याह्या] हमरा सब के बता देलक [अबू सलामा] हमरा सब के कहलक [अबू हुरैरा] ओ कहलक; जखन [उमर बिन अल खथथब] प्रवचन द रहल छलाह तखन अचानक एकटा आदमी आबि क' बैसि गेलाह, तखन उमर पुछलखिन्ह; 'जुमाक नमाज मे शामिल होबय मे किएक देरी भ' रहल अछि?' तखन ओ आदमी उत्तर देलक। 'हे अमीरुल मुकमिनिन, जखन हम नमाज के आह्वान सुनलहुं त तुरंत वजूद केलहुं आ फेर मस्जिद चलि गेलहुं,' तखन उमर कहलनि; 'आ संगहि -बस वजूद करैत-, की अहाँ कहियो नहि सुनने छी जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जखन अहाँ सभ मे सँ कियो जुम्मक नमाज मे जेबाक इच्छा रखैत अछि तखन ओकरा नहा लेबाक चाही'। हमरा सभकेँ कहलक अछि [अब्दुश शमाद] हमरा सभकेँ कहलक अछि [हमर पिता] हमरा सभकेँ कहलक अछि [अल हुसैन अल मुअल्लीम] हमरा सभकेँ कहलक अछि [याह्या] हमरा [अबू सलामा]केँ कहलक अछि जे [अबू हुरैराह] ओकरा कहने अछि, जे जखन [उमर] उपदेश दऽ रहल छल। तखन ओ उपरोक्त हदीसक जिक्र केलनि।

Hadith

Imam Ahmad : 303

حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا حَرْبٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حِطَّانَ فِيمَا يَحْسِبُ حَرْبٌ أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ لَبُوسِ الْحَرِيرِ فَقَالَ سَلْ عَنْهُ عَائِشَةَ فَسَأَلَ عَائِشَةَ فَقَالَتْ سَلْ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَسَأَلَ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ حَدَّثَنِي أَبُو حَفْصٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ لَبِسَ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا فَلَا خَلَاقَ لَهُ فِي الْآخِرَةِ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुश शमाद] हमरा सब के कहलक अछि [हरब] हमरा सब के [इमरान बिन हिथथान] स [याह्या] के कहने अछि हरब के अनुमान के अनुसार जे ओ इब्न अब्बास स रेशम पहिरबाक बारे में पूछने छल, ओ जवाब देलक; 'ऐस्या सँ ओहि विषय मे पूछू!,' तखन ओ ऐश्या सँ पूछलनि, आ ऐश्या उत्तर देलनि; 'इब्न उमर सँ पूछू!' तखन ओ [इब्न उमर] सँ पूछलनि, आ ओ उत्तर देलनि; हमरा [अबू हफश] के कहल गेल अछि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, 'जे कियो एहि दुनिया मे रेशमी कपड़ा पहिरत, ओकरा अंतिम दिन एहि मे कोनो हिस्सा नहि भेटत'।

Hadith

Imam Ahmad : 304

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمَّادٍ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَوْدِيِّ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيِّ حَدَّثَنَا ابْنُ عَبَّاسٍ بِالْبَصْرَةِ قَالَ أَنَا أَوَّلُ مَنْ أَتَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حِينَ طُعِنَ فَقَالَ احْفَظْ عَنِّي ثَلَاثًا فَإِنِّي أَخَافُ أَنْ لَا يُدْرِكَنِي النَّاسُ أَمَّا أَنَا فَلَمْ أَقْضِ فِي الْكَلَالَةِ قَضَاءً وَلَمْ أَسْتَخْلِفْ عَلَى النَّاسِ خَلِيفَةً وَكُلُّ مَمْلُوكٍ لَهُ عَتِيقٌ فَقَالَ لَهُ النَّاسُ اسْتَخْلِفْ فَقَالَ أَيَّ ذَلِكَ أَفْعَلُ فَقَدْ فَعَلَهُ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي إِنْ أَدَعْ إِلَى النَّاسِ أَمْرَهُمْ فَقَدْ تَرَكَهُ نَبِيُّ اللَّهِ عَلَيْهِ الصَّلَاة وَالسَّلَامُ وَإِنْ أَسْتَخْلِفْ فَقَدْ اسْتَخْلَفَ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُلْتُ لَهُ أَبْشِرْ بِالْجَنَّةِ صَاحَبْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَطَلْتَ صُحْبَتَهُ وَوُلِّيتَ أَمْرَ الْمُؤْمِنِينَ فَقَوِيتَ وَأَدَّيْتَ الْأَمَانَةَ فَقَالَ أَمَّا تَبْشِيرُكَ إِيَّايَ بِالْجَنَّةِ فَوَاللَّهِ لَوْ أَنَّ لِي قَالَ عَفَّانُ فَلَا وَاللَّهِ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ لَوْ أَنَّ لِي الدُّنْيَا بِمَا فِيهَا لَافْتَدَيْتُ بِهِ مِنْ هَوْلِ مَا أَمَامِي قَبْلَ أَنْ أَعْلَمَ الْخَبَرَ وَأَمَّا قَوْلُكَ فِي أَمْرِ الْمُؤْمِنِينَ فَوَاللَّهِ لَوَدِدْتُ أَنَّ ذَلِكَ كَفَافًا لَا لِي وَلَا عَلَيَّ وَأَمَّا مَا ذَكَرْتَ مِنْ صُحْبَةِ نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَلِكَ

हमरा सब के कहल गेल अछि जे [याह्या बिन हम्मद] आ [अफ्फान] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब के [अबू अवानाह] के [दाउद बिन अब्दुल्लाह अल औदी] स [हुमैद बिन अब्दुररहमान अल हिम्यारी] स कहलक अछि हमरा सब के [इब्न अब्बास] के बसरा में कहलक अछि जे ओ कहलनि; हम पहिल व्यक्ति छलहुँ जे [उमर] लग जखन चाकू मारल गेल छल, तखन ओ कहलनि; 'हमरा दिस सँ तीन बात मोन राखू, कारण हमरा डर अछि जे लोक हमरा सँ नहि भेंट करत, वास्तव मे हम कलालाहक संबंध मे कोनो निर्णय नहि लेलहुं, आ हम जनताक लेल - हमरा बाद - खलीफा - प्रतिस्थापन - नहि नियुक्त केलहुँ, आ हर दास लेल कियो एहन होइत छैक जे ओकरा मुक्त करैत छैक'। तखन लोक सभ हुनका कहलथिन; 'खलीफा नियुक्त करू!' उमर जबाब देलकै; 'हम एहि सँ जे किछु करब, निश्चित रूप सँ हमरा सँ नीक कियो केने अछि; जँ हम हुनका लोकनिक काज - खिलाफत - केँ -हमर बादक- लोक पर छोड़ि दी तऽ सचमुच नबीयुल्लाह अलाहिश शलातु वस्सलम एकरा छोड़ि देने छथि | आ जँ हम खलीफा नियुक्त करब तँ सचमुच हमरासँ नीक कियो अर्थात अबू बकर -खलीफा-' नियुक्त केने छथि । तखन हम हुनका कहलियनि; 'धन्य छी अहाँ स्वर्ग मे, अहाँ काफी दिन सँ अल्लाह के रसूलुल्लाह के संग केने छी, अहाँ मुसलमान के काज केने छी आ अहाँ सक्षम छी आ अहाँ जनादेश के पूरा केने छी'। ओ कहैत छथि; 'रहल बात स्वर्गक संग हमरा बारे मे अहाँक शुभ समाचारक त' अल्लाहक कसम, जँ स्वर्ग हमरा लेल रहैत,' - अफान कहलनि; - 'कोनो बात नै, अल्लाह के द्वारा, जिनका पास हुनका अलावा कोनो भगवान नै छै, अगर दुनिया आरू ओकरा में सब कुछ हमरा लेली इरादा छेलै, त॑ हम्में निश्चित रूप सें हमरा सामने जे आपदा छै ओकरऽ प्रायश्चित करी लेतै, ओकरा सें पहलें कि हमरा पता चलै कि की घटित होय गेलऽ छै, जैसनऽ कि आपने मुसलमानऽ के मामला के बारे में की कहलऽ छेल्हऽ, अल्लाह के कसम, वास्तव में हम्में चाहै छियै कि ई खाली वू ही होय जेकरा सें हमरा कोनो फायदा नै होय आरू नुकसान नै होय।' रहल बात जे अहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग देबय के बारे में जे कहलहुं अछि त ओ सचमुच सही अछि.

Hadith

Imam Ahmad : 305

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَيَّاشٍ عَنْ حَكِيمِ بْنِ حَكِيمٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلٍ قَالَ كَتَبَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَى أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ الْجَرَّاحِ أَنْ عَلِّمُوا غِلْمَانَكُمْ الْعَوْمَ وَمُقَاتِلَتَكُمْ الرَّمْيَ فَكَانُوا يَخْتَلِفُونَ إِلَى الْأَغْرَاضِ فَجَاءَ سَهْمٌ غَرْبٌ إِلَى غُلَامٍ فَقَتَلَهُ فَلَمْ يُوجَدْ لَهُ أَصْلٌ وَكَانَ فِي حَجْرِ خَالٍ لَهُ فَكَتَبَ فِيهِ أَبُو عُبَيْدَةَ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَى مَنْ أَدْفَعُ عَقْلَهُ فَكَتَبَ إِلَيْهِ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُولُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ مَوْلَى مَنْ لَا مَوْلَى لَهُ وَالْخَالُ وَارِثُ مَنْ لَا وَارِثَ لَهُ

हमरा सब के [याह्या बिन आदम] हमरा सब के [सुफयान] के [अब्दुररहमान बिन अय्यासी] स [हकीम बिन हकीम] स [अबू उमामा बिन सहल] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] अबू उबैदा बिन अल जर्राह के एकटा पत्र लिखलनि -जाहि मे छल-; 'अपन बच्चा सभकेँ हेलब आ बाणसँ लड़ब सिखाउ, कारण ओ सभ विभिन्न काजक काज करत।' तखन एकटा आवारा तीर एकटा बच्चा के मारि देलक आ ओकरा मारि देलक, मुदा ओकर माता-पिता नहि भेटल, जखन कि ओ अपन काका के देखभाल में छल - अपन माय के तरफ सं -, तखन अबू उबैदा उमर के एहि बारे में चिट्ठी लिखलखिन - जाहि में छल -; 'हम दियात केकरा देब?' तखन उमर हुनका चिट्ठी लिखलनि; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहने छलाह : 'अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह ओहि लोकक रक्षक छथि जिनका कोनो संरक्षक नहि छनि, आ चाचा - माँ दिस सँ - एहन लोकक उत्तराधिकारी छथि जिनका कोनो वारिस नहि छनि' |

Hadith

Imam Ahmad : 306

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ أَخْبَرَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ يَرِثُ الْوَلَاءَ مَنْ وَرِثَ الْمَالَ مِنْ وَالِدٍ أَوْ وَلَدٍ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन जैद] हमरा सब के [इब्नु लहिअह] स [अमरू बिन स्यूअइब] स [अपन पिता] स [अपन दादा] स [उमर बिन खथथब] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम सुनलहुँ जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'जे वला के उत्तराधिकारी बनैत अछि' ओ व्यक्ति अछि जे पिता आ बेटा दुनू स संपत्ति के उत्तराधिकारी अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 307

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَابِسِ بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَتَى الْحَجَرَ فَقَالَ أَمَا وَاللَّهِ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ لَا تَضُرُّ وَلَا تَنْفَعُ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَكَ مَا قَبَّلْتُكَ ثُمَّ دَنَا فَقَبَّلَهُ

हमरा सब के [मुहम्मद बिन उबैद] हमरा सब के [अबीस बिन रबियाह] स [इब्राहिम] स [अल अ'मासी] के कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर] के हाजर -असवद- लग पहुँचैत देखलियैक तखन कहलियैक; 'अल्लाह के कसम, वास्तव में हमरा सचमुच पता छै कि तोहें खाली एगो पाथर छियै जेकरा सें कोय नुकसान या फायदा नै होय सकै छै, अगर हम्में अल्लाह के रसूलुल्लाह के तोरा चुम्मा लेत॑ नै देखितियै त॑ हम्में तोरा चुम्मा नै लेतै' । तखन ओ ओकरा लग आबि चुम्मा लेलक।

Hadith

Imam Ahmad : 308

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا دُجَيْنٌ أَبُو الْغُصْنِ بَصْرِيٌّ قَالَ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فَلَقِيتُ أَسْلَمَ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُلْتُ حَدِّثْنِي عَنْ عُمَرَ فَقَالَ لَا أَسْتَطِيعُ أَخَافُ أَنْ أَزِيدَ أَوْ أَنْقُصَ كُنَّا إِذَا قُلْنَا لِعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَدِّثْنَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَخَافُ أَنْ أَزِيدَ حَرْفًا أَوْ أَنْقُصَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ فَهُوَ فِي النَّارِ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू सईद] हमरा सब के [दुजैन अबुल घुशनी] बसराह के लोक के कहलक अछि ओ कहलक; हम मदीना आयल रही तखन [असलम] उमर बिन अल खथथब के नौकर सं भेंट भेल, हम हुनका कहलियनि; ‘[उमर] के एकटा हदीस बताउ,’ ओ जवाब देलनि; 'हम नहि क' सकैत छी, हमरा डर अछि जे हम जोड़ब वा घटा देब, जँ हम उमर केँ कहब त' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ हदीस बताउ, ओ जवाब देलनि; 'हमरा डर अछि जे हम एकटा वाक्य जोड़ब वा घटा देब, वास्तव मे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि जे हमरा संग जे झूठ बाजत ओ नरक मे जायत'।

Hadith

Imam Ahmad : 309

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ مَوْلَى آلِ الزُّبَيْرِ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَالَ فِي سُوقٍ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ بِيَدِهِ الْخَيْرُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِهَا أَلْفَ أَلْفِ حَسَنَةٍ وَمَحَا عَنْهُ بِهَا أَلْفَ أَلْفِ سَيِّئَةٍ وَبَنَى لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू सईद] हमरा सब के [अमरू बिन दिनार] स [हम्मद बिन जैद] के कहलक अछि जे अज जुबैर के परिवार के पूर्व गुलाम [सलीम] स [अपन पिता] स [उमर] स ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: जे बजार मे रहैत पढ़ैत अछि; 'ला इलाहा इल्लाल्लाहु वाहदहु ला शरीकलाहु लाहुल मुलकु वालहुल हमदु बियादिहिल खैरू युहयी वायुमीतु ह्वा 'आला कुल्ली स्या'इन कोदीर - अल्लाह सर्वशक्तिमान के छोड़ि कए कोनो देवता नहि छथि जिनका पूजा करबाक अधिकार छनि, हुनकर कोनो साथी नहि छनि, हुनका लग सब राज्य छनि आ सब स्तुति, हुनकर हाथ मे सब भलाई छनि, ओ ओ अछि जे जीवन दैत अछि आ मृत्युक कारण बनैत अछि आ ओ सभ किछु पर सर्वशक्तिमान अछि- 'तखन अल्लाह ओकरा लेल लाख नीक काज दर्ज करत, ओकरा सँ लाख खराब काज हटा देत आ ओकरा लेल स्वर्ग मे घर बनाओत' |

Hadith

Imam Ahmad : 310

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو زُمَيْلٍ حَدَّثَنِي ابْنُ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ خَيْبَرَ أَقْبَلَ نَفَرٌ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُونَ فُلَانٌ شَهِيدٌ وَفُلَانٌ شَهِيدٌ حَتَّى مَرُّوا بِرَجُلٍ فَقَالُوا فُلَانٌ شَهِيدٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَلَّا إِنِّي رَأَيْتُهُ يُجَرُّ إِلَى النَّارِ فِي عَبَاءَةٍ غَلَّهَا اخْرُجْ يَا عُمَرُ فَنَادِ فِي النَّاسِ إِنَّهُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا الْمُؤْمِنُونَ فَخَرَجْتُ فَنَادَيْتُ إِنَّهُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا الْمُؤْمِنُونَ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू सईद] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इकरीमा बिन अम्मार] हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू जुमैल] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इब्नु अब्बास] हमरा कहलक अछि [उमर बिन अल खथथब] ओ कहलनि; जखन खैबर के लड़ाई भेल त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब स लोक के एकटा समूह आयल, ओ सब कहलक; 'फल्लाँ शहीद भेल आ फल्लाँ शहीद भेल,' जाबत धरि एकटा आदमीक पास नहि भ' गेल, ओ सभ कहलक; 'फल्लाँ शहीद भ' गेल'। तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'बिल्कुल नहि, सचमुच हम देखलहुँ जे हुनका एकटा वस्त्रक कारण नरकक आगि मे घसीटल गेल छल जे ओ लेलक, हे उमर, जाउ, आ लोक केँ बजाउ जे विश्वास करयवला केँ छोड़ि कियो स्वर्ग मे प्रवेश नहि करत'।

Hadith

Imam Ahmad : 311

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْرُوقٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَ لَا وَأَبِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَهْ إِنَّهُ مَنْ حَلَفَ بِشَيْءٍ دُونَ اللَّهِ فَقَدْ أَشْرَكَ

हमरा सभकेँ [अबू सईद] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इजरायल] हमरा सभकेँ [सैद बिन मसरुक] [स’द बिन उबैदा]सँ [इब्न उमर]सँ [उमर]सँ कहलक अछि जे ओ कहलनि; 'नहि, हमर पिताक कसम,' अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: 'चुप रहू, सचमुच जे कियो अल्लाहक अतिरिक्त कोनो आन चीजक कसम खाइत अछि, ओ मूर्तिपूजक अछि।'

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Imam Ahmad : 312

حَدَّثَنَا حَمَّادٌ الْخَيَّاطُ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ زَادَ فِي الْمَسْجِدِ مِنْ الْأُسْطُوَانَةِ إِلَى الْمَقْصُورَةِ وَزَادَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ نَبْغِي نَزِيدُ فِي مَسْجِدِنَا مَا زِدْتُ فِيهِ

हमरा सभ केँ [हमद अल खय्यात] हमरा सभ केँ [अब्दुल्लाह] केँ [नाफी'] सँ कहलक अछि ओ कहलनि; कि [उमर] मस्जिद के खंभा सं ल क छोट-छोट कोठली तक विस्तार देलखिन्ह आ उस्मान सेहो जोड़लखिन्ह, तखन उमर कहलनि; जँ हम रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ ई कहैत नहि सुनने रहितहुँ जे ‘हम सभ मस्जिद मे जगह केँ विस्तार देबय चाहैत छी’ त’ हम एहि सँ बेसी नहि जोड़ितहुँ।

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Imam Ahmad : 313

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ بَعَثَ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْحَقِّ وَأَنْزَلَ مَعَهُ الْكِتَابَ فَكَانَ مِمَّا أُنْزِلَ عَلَيْهِ آيَةُ الرَّجْمِ فَرَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ ثُمَّ قَالَ قَدْ كُنَّا نَقْرَأُ وَلَا تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ فَإِنَّهُ كُفْرٌ بِكُمْ أَوْ إِنَّ كُفْرًا بِكُمْ أَنْ تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ ثُمَّ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أُطْرِيَ ابْنُ مَرْيَمَ وَإِنَّمَا أَنَا عَبْدٌ فَقُولُوا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ وَرُبَّمَا قَالَ مَعْمَرٌ كَمَا أَطْرَتْ النَّصَارَى ابْنَ مَرْيَمَ

हमरा सब के [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [अज ज़ुहरी] स [मा'मर] के [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स [इब्नु अब्बास] स [उमर] स कहलक अछि जे ओ कहलनि; 'सत्ते, अल्लाह न॑ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम क॑ सच्चाई के साथ भेजलकै, आरू ओकरा पर किताब - कुरान - उतारलकै, ओकरा पर जे आयत उतारलऽ गेलै ओकरा म॑ पत्थरबाजी के नियम के बारे म॑ आयत छेलै, तखनिये अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ पत्थरबाजी के नियम क॑ लागू करलकै, आरू हम्मं॑ ओकरऽ मौत के बाद पत्थरबाजी के नियम क॑ भी लागू करलियै,' तखन॑ वू कहलकै; 'सत्ते हम सभ पढ़ने छी; 'अपन पिता-पिता सँ घृणा नहि करू, कारण ई अहाँ सभ केँ काफिर बना सकैत अछि,' वा; 'सत्ते, अहाँ सब काफिर बनि सकैत छी, कारण अहाँ अपन पिता सँ घृणा करैत छी,' तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हमर पूजा ओहिना नहि करू जेना इब्न ईसा के पूजा कयल गेल छल, हम मात्र नौकर छी, तें कहब; "हुनकर सेवक आ दूत"। मा'मार कहि सकैत छलाह; 'जहिना ईसाई इब्न मरियम के पूजा करैत छथि'।

Hadith

Imam Ahmad : 314

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ لِعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي سَمِعْتُ النَّاسَ يَقُولُونَ مَقَالَةً فَآلَيْتُ أَنْ أَقُولَهَا لَكُمْ زَعَمُوا أَنَّكَ غَيْرُ مُسْتَخْلِفٍ فَوَضَعَ رَأْسَهُ سَاعَةً ثُمَّ رَفَعَهُ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَحْفَظُ دِينَهُ وَإِنِّي إِنْ لَا أَسْتَخْلِفْ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَسْتَخْلِفْ وَإِنْ أَسْتَخْلِفْ فَإِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ اسْتَخْلَفَ قَالَ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ ذَكَرَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبَا بَكْرٍ فَعَلِمْتُ أَنَّهُ لَمْ يَكُنْ يَعْدِلُ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحَدًا وَأَنَّهُ غَيْرُ مُسْتَخْلِفٍ

हमरा सभकेँ [अब्दुर्रज्जाक] हमरा सभकेँ [मा'मर]केँ [अज ज़ुहरी]सँ [सलीम]सँ [इब्न उमर]सँ कहलक अछि, जे ओ [उमर]सँ कहलक; 'सत्ते, हम लोक सभकेँ किछु कहैत सुनलहुँ, मुदा हम अहाँकेँ कहबासँ हिचकिचाइत छलहुँ, हुनका सभकेँ लागल जे अहाँ खलीफा नहि नियुक्त केने छी ।' तखन उमर एक क्षणक लेल माथ नीचाँ केलक फेर ओकरा उठौलक आ कहलक; 'वास्तव में अल्लाह अपन धर्म के रक्षा करताह, अगर हम खलीफा के नियुक्ति नै करब त सचमुच अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खलीफा के नियुक्ति नै केने छथि, आ जौं हम खलीफा के नियुक्ति करब त सचमुच अबू बकर खलीफा के नियुक्ति केने छथि'। इब्न उमर कहलनि; 'अल्लाह केरऽ कसम, हुनका छोड़ी क॑ दोसरऽ कोय नै - उमर - रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू अबू बकर केरऽ याद नै करै छै, ई लेली हमरा पता छै कि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम जैसनऽ कोय नै छै, आरू वू खलीफा के नियुक्ति नै करलकै' ।

Hadith

Imam Ahmad : 315

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ قَالَ أَرْسَلَ إِلَيَّ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ فَقُلْتُ لَكُمَا إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ

हमरा सब के [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] स [मलिक बिन औस बिन अल हदातसन] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] हमरा एकटा चिट्ठी पठौलनि, - तखन ओ एकटा हदीसक जिक्र केलनि, - तेँ हम अहाँ दुनू गोटे केँ कहैत छी, सच मे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहने छलाह: 'वास्तव मे हमरा सभ केँ विरासत मे नहि भेटल अछि, जे धन छोड़ैत छी से दानक लेल अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 316

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ لَمَّا مَاتَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بُكِيَ عَلَيْهِ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْمَيِّتَ يُعَذَّبُ بِبُكَاءِ الْحَيِّ

हमरा सब के [अब्दुर्रज्जाक] हमरा सब के [मा'मर] के [अज जुहरी] स [इब्नुल मुसैयब] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'जखन अबू बकरक मृत्यु भेलनि तखन हुनका शोक कयल गेलनि, तखन [उमर] कहलनि; दरअसल, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहने छलाह : 'सत्ते, एकटा मृत व्यक्ति के यातना देल जायत, कियाक त एकटा जीवित व्यक्ति ओकरा पर कानि रहल अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 317

حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا رَبَاحٌ عَنْ مَعْمَرٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَفَرَ مَنْ كَفَرَ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا أَبَا بَكْرٍ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَدْ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ إِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عَنَاقًا كَانُوا يُؤَدُّونَهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَى مَنْعِهَا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ أَنَّ اللَّهَ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بِالْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ

हमरा सब के [इब्राहिम बिन खालिद] हमरा सब के [रबाह] के [मा'मार] स [अज जुहरी] स [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] स [अबू हुरैरा] स कहलक अछि, ओ कहलनि; जखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मरि गेलाह त किछु लोक काफिर भ गेलाह, -अबू हुरैरा कहानी आगू बढ़ेलनि; - 'तखन [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; 'हे अबू बकर, अहाँ मनुक्ख सँ कोना लड़ब, जखन कि अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि जे हमरा मनुक्ख सँ लड़बाक आदेश देल गेल छल जा धरि ओ 'ला इलाहा इल्लाह' नहि कहत, आ जे कियो 'ला इलाहा इल्लाह' कहने अछि, तखन ओ सभ हमरा सँ अपन खून आ संपत्तिक रक्षा क' लेने अछि, जखन कि हिसाब अल्लाह पर छोड़ि देल गेल अछि'। [अबू बकर] उत्तर देलनि; 'हम ओहि लोकनि सँ लड़ब जे नमाज आ जकात के फर्ज मे अंतर करैत छथि, कारण वास्तव मे जकात संपत्ति के अधिकार अछि, अल्लाह के द्वारा जँ ओ कोनो ऊंट देबय सँ मना क' देताह जे ओ पहिने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सौंपने छलाह त' हम हुनका सब सँ मना करब के कारण अवश्य लड़ब।' तखन उमर बजलाह; 'अल्लाह केरऽ कसम, कुछ भी नै सिवाय हम्में देखै छियै कि अल्लाह न॑ अबू बकर केरऽ दिल लड़ै लेली खोललकै, आरू हमरा पता छै कि यही सच्चाई छै' ।

Hadith

Imam Ahmad : 318

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّا لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ

हमरा सब के [सुफयान] के [अमरू] स [अज ज़ुहरी] स [मलिक बिन औस] स [उमर] स कहला के बाद ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, सचमुच हमरा सब के विरासत में नहिं भेटैत अछि, आ जे धन छोड़ैत छी से दान के रूप में अछि।

Hadith

Imam Ahmad : 319

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسٍ قَالَ أَرْسَلَ إِلَيَّ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَقَالَ إِنَّ أَمْوَالَ بَنِي النَّضِيرِ كَانَتْ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَى رَسُولِهِ مِمَّا لَمْ يُوجِفْ عَلَيْهِ الْمُسْلِمُونَ بِخَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ فَكَانَ يُنْفِقُ عَلَى أَهْلِهِ مِنْهَا نَفَقَةَ سَنَةٍ وَمَا بَقِيَ جَعَلَهُ فِي الْكُرَاعِ وَالسِّلَاحِ عُدَّةً فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सभ केँ [सुफयान] केँ ['अमरू] सँ [अज ज़ुहरी] सँ [मलिक बिन औस] सँ कहला के बाद ओ कहलनि; [उमर] हमरा चिट्ठी पठौलनि, -तखन ओ हदीसक जिक्र केलनि, - आ कहलनि; 'सत्ते, बनी नदलीर केरऽ धन वू खजाना म॑ स॑ एक छै जेकरा अल्लाह न॑ अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह लेली फै' केरऽ संपत्ति बनैलकै जे मुसलमानऽ स॑ बिना मेहनत के घोड़ा या अन्य वाहन स॑ मिललऽ छेलै, ई धन क॑ वू एक साल तलक अपनऽ परिवार प॑ खर्च करलकै, आरू बाकी के हिस्सा वू अल्लाह केरऽ रास्ता म॑ -युद्ध लेली- तैयारी म॑ सवार जानवर आरू हथियार खरीदै छेलै’ ।

Hadith

Imam Ahmad : 320

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَقْبَلَ اللَّيْلُ وَأَدْبَرَ النَّهَارُ وَغَرَبَتْ الشَّمْسُ فَقَدْ أَفْطَرَ الصَّائِمُ

हमरा सब के [सुफयान] के [हिस्याम] स [हुनकर पिता] स [अशिम बिन उमर] स [अपन पिता] स कहल गेल अछि, जे एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छलाह: 'जखन राति पड़ैत अछि, दिन गायब भ जाइत अछि आ सूर्यास्त भ जाइत अछि, तखन जे रोजा रखैत छथि हुनका लेल रोजा तोड़बाक समय आबि गेल अछि'।