इमाम अहमद : 301
حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ أَبِي الْفُرَاتِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ قَالَ عَفَّانُ عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِي الْأَسْوَدِ الدِّيلِيِّ قَالَ أَتَيْتُ الْمَدِينَةَ وَقَدْ وَقَعَ بِهَا مَرَضٌ قَالَ عَبْدُ الصَّمَدِ فَهُمْ يَمُوتُونَ مَوْتًا ذَرِيعًا فَجَلَسْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَرَّتْ بِهِ جَنَازَةٌ فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرٌ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرٌ فَقَالَ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَيْهَا شَرٌّ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ فَقَالَ أَبُو الْأَسْوَدِ فَقُلْتُ لَهُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَا وَجَبَتْ فَقَالَ قُلْتُ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّمَا مُسْلِمٍ شَهِدَ لَهُ أَرْبَعَةٌ بِخَيْرٍ إِلَّا أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ قَالَ قُلْنَا وَثَلَاثَةٌ قَالَ وَثَلَاثَةٌ قُلْنَا وَاثْنَانِ قَالَ وَاثْنَانِ قَالَ وَلَمْ نَسْأَلْهُ عَنْ الْوَاحِدِ
"हमें [अब्दुश शमद] और ['अफ़्फ़ान] दोनों ने बताया; हमें [दाऊद बिन अबुल फुराथ] ने बताया है, हमें [अब्दुल्ला बिन बुरैदा] ने कहा है ['अफ़्फ़ान] [इब्न बुरैदा] से [अबुल असवद अद दिली] से उसने कहा; जब मैं मदीना पहुंचा, तो वहां एक महामारी फैली हुई थी," - [अब्दुश शमद] ने कहा; "वे बहुत बुरी तरह मर गए, - फिर मैं [उमर बिन अल ख़त्थाब] के पास बैठ गया, अचानक एक लाश (स्ट्रेचर) पास से गुज़री, और लाश की दयालुता से प्रशंसा की गई जबकि उमर ने कहा; "अवश्य।" फिर दूसरी लाश पास से गुज़री और लाश की दयालुता से प्रशंसा की गई क्योंकि उसने कहा; "अवश्य।" फिर तीसरी लाश गुज़री, लेकिन लाश की कुरूपता प्रकट हो गई, इसलिए उमर ने कहा; "यह अनिवार्य है," अबुल असवद ने कहा; मैंने उनसे पूछा; " "मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहे अनुसार कहता हूँ कि: "कोई भी मुसलमान जिसे चार लोग अच्छाई के साथ देखें, तो अल्लाह उसे जन्नत में दाखिल करेगा।" उमर ने कहा; हमने पूछा; "अगर तीन लोग देखें?" उन्होंने जवाब दिया: "तीन लोग भी देखें।" हमने फिर पूछा; "अगर दो लोग देखें?" उन्होंने जवाब दिया: "दो लोग भी देखें।" उमर ने कहा; "तो हमने यह नहीं पूछा कि क्या वह एक व्यक्ति था।"
इमाम अहमद : 302
حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا حَرْبٌ يَعْنِي ابْنَ شَدَّادٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ حَدَّثَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ بَيْنَمَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْطُبُ إِذْ جَاءَ رَجُلٌ فَجَلَسَ فَقَالَ عُمَرُ لِمَ تَحْتَبِسُونَ عَنْ الْجُمُعَةِ فَقَالَ الرَّجُلُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ سَمِعْتُ النِّدَاءَ فَتَوَضَّأْتُ ثُمَّ أَقْبَلْتُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَأَيْضًا أَلَمْ تَسْمَعُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا رَاحَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْجُمُعَةِ فَلْيَغْتَسِلْ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنِي أَبِي حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ الْمُعَلِّمُ حَدَّثَنَا يَحْيَى أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَيْنَا هُوَ يَخْطُبُ فَذَكَرَهُ
हमें बताया है [अब्दुश शमद] हमें बताया है [हरब जिसका अर्थ इब्न स्याद्दाद है] हमें बताया है [याह्या] हमें बताया है [अबू सलामा] हमें बताया है [अबू हुरैरा] उन्होंने कहा; जब [उमर बिन अल खत्थब] उपदेश दे रहे थे, अचानक एक आदमी आया और बैठ गया, फिर उमर ने पूछा; "आप शुक्रवार की नमाज़ में शामिल होने में देर क्यों करते हैं?" तब उस आदमी ने उत्तर दिया; "हे अमीरुल मुक्मिनीन, जब मैंने नमाज़ की पुकार सुनी, तो मैंने तुरंत वुज़ू किया और फिर मस्जिद चला गया," तब उमर ने कहा; "और (सिर्फ़ वज़ू करते हुए), क्या तुमने कभी नहीं सुना कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "जब तुम में से कोई जुमे की नमाज़ के लिए जाना चाहे, तो उसे नहाना ज़रूरी है।" उन्होंने हमें [अब्दुश शमद] बताया, उन्होंने मुझे [मेरे पिता] बताया, उन्होंने हमें [अल हुसैन अल मुअल्लिम] बताया, उन्होंने हमें [याह्या] बताया कि उन्होंने मुझे [अबू सलामा] बताया कि [अबू हुरैरा] ने उन्हें बताया था कि जब [उमर] खुत्बा दे रहे थे, तो उन्होंने ऊपर बताई हदीस का ज़िक्र किया था।"
इमाम अहमद : 303
حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا حَرْبٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حِطَّانَ فِيمَا يَحْسِبُ حَرْبٌ أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ لَبُوسِ الْحَرِيرِ فَقَالَ سَلْ عَنْهُ عَائِشَةَ فَسَأَلَ عَائِشَةَ فَقَالَتْ سَلْ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَسَأَلَ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ حَدَّثَنِي أَبُو حَفْصٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ لَبِسَ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا فَلَا خَلَاقَ لَهُ فِي الْآخِرَةِ
हमें [अब्दुश शमद] ने बताया है, हमें [हरब] ने हमें [याह्या] [इमरान बिन हित्थन] से बताया है, हरब के अंदाज़े के मुताबिक कि उन्होंने इब्न अब्बास से सिल्क पहनने के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया; "इसके बारे में ऐश्या से पूछो!" फिर उन्होंने ऐश्या से पूछा, और ऐश्या ने जवाब दिया; "इब्न उमर से पूछो!" फिर उन्होंने [इब्न उमर] से पूछा, और उन्होंने जवाब दिया; मुझे [अबू हफ़्श] बताया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "जो कोई भी इस दुनिया में सिल्क का कपड़ा पहनेगा, आखिरी दिन उसका उसमें कोई हिस्सा नहीं होगा।"
इमाम अहमद : 304
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمَّادٍ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَوْدِيِّ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيِّ حَدَّثَنَا ابْنُ عَبَّاسٍ بِالْبَصْرَةِ قَالَ أَنَا أَوَّلُ مَنْ أَتَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حِينَ طُعِنَ فَقَالَ احْفَظْ عَنِّي ثَلَاثًا فَإِنِّي أَخَافُ أَنْ لَا يُدْرِكَنِي النَّاسُ أَمَّا أَنَا فَلَمْ أَقْضِ فِي الْكَلَالَةِ قَضَاءً وَلَمْ أَسْتَخْلِفْ عَلَى النَّاسِ خَلِيفَةً وَكُلُّ مَمْلُوكٍ لَهُ عَتِيقٌ فَقَالَ لَهُ النَّاسُ اسْتَخْلِفْ فَقَالَ أَيَّ ذَلِكَ أَفْعَلُ فَقَدْ فَعَلَهُ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي إِنْ أَدَعْ إِلَى النَّاسِ أَمْرَهُمْ فَقَدْ تَرَكَهُ نَبِيُّ اللَّهِ عَلَيْهِ الصَّلَاة وَالسَّلَامُ وَإِنْ أَسْتَخْلِفْ فَقَدْ اسْتَخْلَفَ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُلْتُ لَهُ أَبْشِرْ بِالْجَنَّةِ صَاحَبْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَطَلْتَ صُحْبَتَهُ وَوُلِّيتَ أَمْرَ الْمُؤْمِنِينَ فَقَوِيتَ وَأَدَّيْتَ الْأَمَانَةَ فَقَالَ أَمَّا تَبْشِيرُكَ إِيَّايَ بِالْجَنَّةِ فَوَاللَّهِ لَوْ أَنَّ لِي قَالَ عَفَّانُ فَلَا وَاللَّهِ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ لَوْ أَنَّ لِي الدُّنْيَا بِمَا فِيهَا لَافْتَدَيْتُ بِهِ مِنْ هَوْلِ مَا أَمَامِي قَبْلَ أَنْ أَعْلَمَ الْخَبَرَ وَأَمَّا قَوْلُكَ فِي أَمْرِ الْمُؤْمِنِينَ فَوَاللَّهِ لَوَدِدْتُ أَنَّ ذَلِكَ كَفَافًا لَا لِي وَلَا عَلَيَّ وَأَمَّا مَا ذَكَرْتَ مِنْ صُحْبَةِ نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَلِكَ
हमें बताया गया है कि [याह्या बिन हम्माद] और ['अफ़्फ़ान] दोनों ने कहा; हमें [अबू अवाना] ने [दाऊद बिन अब्दुल्लाह अल ऑडी] से [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान अल हिमियारी] से बताया है। हमें [इब्न अब्बास] ने बसरा में बताया कि उन्होंने कहा; मैं पहला व्यक्ति था जो [उमर] के पास आया जब उन्हें चाकू मारा गया था, फिर उन्होंने कहा; "मेरी ओर से तीन बातें याद रखें, क्योंकि मुझे डर है कि लोग मुझसे नहीं मिलेंगे, वास्तव में मैंने कलालह के बारे में कोई फैसला नहीं किया, और मैंने लोगों के लिए (मेरे बाद) कोई खलीफ़ा (उत्तराधिकारी) नियुक्त नहीं किया, और प्रत्येक दास के लिए कोई न कोई है जो उसे मुक्त करता है।" तब लोगों ने उनसे कहा; "एक खलीफ़ा नियुक्त करें!" उमर ने उत्तर दिया; "मैं इसमें से जो कुछ भी करता हूँ, तो वह ज़रूर मुझसे बेहतर किसी ने किया है; अगर मैं उनके मामले (खिलाफत) लोगों (मेरे बाद) पर छोड़ता हूँ, तो बेशक नबीउल्लाह अलैहिश शलातु वस्सलाम ने उसे छोड़ दिया है। और अगर मैं कोई खलीफ़ा नियुक्त करता हूँ, तो बेशक मुझसे बेहतर किसी व्यक्ति, यानी अबू बक्र ने (खलीफ़ा) नियुक्त किया है।" फिर मैंने उससे कहा; "तुम जन्नत में बरकत वाले हो, तुम काफी लंबे समय से अल्लाह के रसूल के साथ हो, तुमने ईमान वालों के मामले पूरे किए हैं और तुम काबिल हो और तुमने अपना काम पूरा किया है।" उसने कहा; "जन्नत के बारे में तुम्हारी खुशखबरी का सवाल है, अल्लाह की कसम, काश जन्नत मेरे लिए होती," - अफ्फान ने कहा; - "तो किसी भी तरह, अल्लाह की कसम, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं है, अगर दुनिया और उसमें जो कुछ भी है, वह मेरे लिए तय होता, तो मैं ज़रूर अपने सामने आई मुसीबत का बदला उससे ले लेता, इससे पहले कि मुझे पता चलता कि क्या हुआ। जहाँ तक आप ईमान वालों के मामलों के बारे में कहते हैं, अल्लाह की कसम, मैं चाहता हूँ कि यह थोड़ा सा हो जिससे मुझे न तो फ़ायदा हो और न ही नुकसान। जहाँ तक आपने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ जाने की बात कही, तो यह बिल्कुल (सच) है।"
इमाम अहमद : 305
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَيَّاشٍ عَنْ حَكِيمِ بْنِ حَكِيمٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلٍ قَالَ كَتَبَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَى أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ الْجَرَّاحِ أَنْ عَلِّمُوا غِلْمَانَكُمْ الْعَوْمَ وَمُقَاتِلَتَكُمْ الرَّمْيَ فَكَانُوا يَخْتَلِفُونَ إِلَى الْأَغْرَاضِ فَجَاءَ سَهْمٌ غَرْبٌ إِلَى غُلَامٍ فَقَتَلَهُ فَلَمْ يُوجَدْ لَهُ أَصْلٌ وَكَانَ فِي حَجْرِ خَالٍ لَهُ فَكَتَبَ فِيهِ أَبُو عُبَيْدَةَ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَى مَنْ أَدْفَعُ عَقْلَهُ فَكَتَبَ إِلَيْهِ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُولُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ مَوْلَى مَنْ لَا مَوْلَى لَهُ وَالْخَالُ وَارِثُ مَنْ لَا وَارِثَ لَهُ
हमें [याह्या बिन आदम] ने बताया है कि हमें [सुफ़यान] ने [अब्दुर्रहमान बिन अय्यासी] से [हकीम बिन हकीम] से [अबू उमामाह बिन सहल] से बताया है, उन्होंने कहा; [उमर] ने अबू उबैदा बिन अल जर्राह को एक पत्र लिखा (जिसमें था); "अपने बच्चों को तैरना और तीरों से लड़ना सिखाओ, क्योंकि वे विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति करेंगे।" फिर एक भटका हुआ तीर एक बच्चे को लगा और उसे मार डाला, लेकिन उसके माता-पिता नहीं मिले, जबकि वह अपने चाचा (अपनी माँ की तरफ से) की देखभाल में था, फिर अबू उबैदा ने इस बारे में उमर को एक पत्र लिखा (जिसमें था); "मैं किसे दीयात दूं?" फिर उमर ने उन्हें एक पत्र लिखा; "वास्तव में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार कहा: "अल्लाह और उसका रसूल उन लोगों के संरक्षक हैं जिनके कोई संरक्षक नहीं हैं, और चाचा (माँ की तरफ से) उन लोगों के उत्तराधिकारी हैं जिनके कोई उत्तराधिकारी नहीं हैं।"
इमाम अहमद : 306
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ أَخْبَرَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ يَرِثُ الْوَلَاءَ مَنْ وَرِثَ الْمَالَ مِنْ وَالِدٍ أَوْ وَلَدٍ
[अब्दुल्ला बिन ज़ैद] ने हमें [इब्न लहिया] [अम्र बिन स्यूऐब] से [अपने पिता] से [अपने दादा] से [उमर बिन ख़तथब] से बताया है; उन्होंने कहा; मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "उत्तराधिकारी वह है जो पिता और पुत्र दोनों से संपत्ति का उत्तराधिकारी हो।"
इमाम अहमद : 307
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَابِسِ بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَتَى الْحَجَرَ فَقَالَ أَمَا وَاللَّهِ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ لَا تَضُرُّ وَلَا تَنْفَعُ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَكَ مَا قَبَّلْتُكَ ثُمَّ دَنَا فَقَبَّلَهُ
मुहम्मद बिन उबैद ने हमें इब्राहिम से अबीस बिन रबीअह से रिवायत किया है, जिन्होंने कहा, मैंने उमर को हजर (असवद) के पास आते देखा और फिर कहा, "अल्लाह की कसम, मुझे पता है कि तुम सिर्फ़ एक पत्थर हो जो न तो नुकसान पहुंचा सकता है और न ही फ़ायदा, अगर मैंने अल्लाह के रसूल को तुम्हें चूमते हुए न देखा होता, तो मैं तुम्हें चूमता ही नहीं।" फिर वह उसके पास गए और उसे चूमा।
इमाम अहमद : 308
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا دُجَيْنٌ أَبُو الْغُصْنِ بَصْرِيٌّ قَالَ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فَلَقِيتُ أَسْلَمَ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقُلْتُ حَدِّثْنِي عَنْ عُمَرَ فَقَالَ لَا أَسْتَطِيعُ أَخَافُ أَنْ أَزِيدَ أَوْ أَنْقُصَ كُنَّا إِذَا قُلْنَا لِعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَدِّثْنَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَخَافُ أَنْ أَزِيدَ حَرْفًا أَوْ أَنْقُصَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ فَهُوَ فِي النَّارِ
हमें बताया है [अबू सईद] हमें बताया है [दुजैन अबुल गुशनी] बसरा वालों ने कहा; मैं मदीना आया तो [असलम] उमर बिन अल खत्थब के नौकर से मिला, मैंने उससे कहा; "मुझे [उमर] से कोई हदीस बताओ," उसने जवाब दिया; "मैं नहीं बता सकता, मुझे डर है कि मैं कुछ जोड़ या घटा दूंगा, अगर हम उमर से कहें, हमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कोई हदीस बताओ," उसने जवाब दिया; "मुझे डर है कि मैं एक लाइन जोड़ या घटा दूंगा, असल में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: "जो कोई मुझसे झूठ बोलेगा वह जहन्नम में जाएगा।"
इमाम अहमद : 309
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ مَوْلَى آلِ الزُّبَيْرِ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَالَ فِي سُوقٍ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ بِيَدِهِ الْخَيْرُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِهَا أَلْفَ أَلْفِ حَسَنَةٍ وَمَحَا عَنْهُ بِهَا أَلْفَ أَلْفِ سَيِّئَةٍ وَبَنَى لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ
हमें [अबू सईद] ने बताया है हमें [हम्मद बिन ज़ैद] ने [अमरू बिन दीनार] से बताया है जो अज़ ज़ुबैर के परिवार का पूर्व गुलाम था [सलीम] से [उसके पिता] से [उमर] से उसने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई बाज़ार में पढ़ता है; 'ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला श्यारीकालाहु लाहुल मुल्कु वलहुल हम्दु बियादिहिल खैरु युह्यी वेयूमीतु वुवा अला कुल्ली स्याइन क़ोदीर (अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं है जिसकी इबादत की जा सके, सर्वशक्तिमान, उसका कोई साझी नहीं, सारी सल्तनत और सारी तारीफ़ उसी की है, सारी अच्छाई उसी के हाथ में है, वही ज़िंदगी देता है और मारता है और वही हर चीज़ पर ताकतवर है) तो अल्लाह उसके दस लाख अच्छे काम लिख देगा, उससे दस लाख बुरे काम मिटा देगा और उसके लिए जन्नत में एक घर बना देगा।"
इमाम अहमद : 310
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو زُمَيْلٍ حَدَّثَنِي ابْنُ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ خَيْبَرَ أَقْبَلَ نَفَرٌ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُونَ فُلَانٌ شَهِيدٌ وَفُلَانٌ شَهِيدٌ حَتَّى مَرُّوا بِرَجُلٍ فَقَالُوا فُلَانٌ شَهِيدٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَلَّا إِنِّي رَأَيْتُهُ يُجَرُّ إِلَى النَّارِ فِي عَبَاءَةٍ غَلَّهَا اخْرُجْ يَا عُمَرُ فَنَادِ فِي النَّاسِ إِنَّهُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا الْمُؤْمِنُونَ فَخَرَجْتُ فَنَادَيْتُ إِنَّهُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا الْمُؤْمِنُونَ
हमें बताया है [अबू सईद] हमें बताया है [इकरीमा बिन अम्मार] हमें बताया है [अबू जुमैल] मुझे बताया है [इब्न अब्बास] मुझे बताया है [उमर बिन अल खत्थब] उन्होंने कहा; जब खैबर की लड़ाई हुई, तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों का एक समूह आया, उन्होंने कहा; "फलां शहीद हुआ और फलां शहीद हुआ," जब तक वे एक आदमी के पास से गुजरे, उन्होंने कहा; "फलां शहीद हुआ।" फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कोई बात नहीं, वास्तव में मैंने उसे एक कपड़े के कारण नरक की आग में घसीटते हुए देखा, ऐ उमर, जाओ, और लोगों को बुलाओ कि कोई भी स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेगा सिवाय उन लोगों के जो विश्वास करते हैं।"
इमाम अहमद : 311
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْرُوقٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَ لَا وَأَبِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَهْ إِنَّهُ مَنْ حَلَفَ بِشَيْءٍ دُونَ اللَّهِ فَقَدْ أَشْرَكَ
हमें [अबू सईद] ने बताया है, हमें [इस्राइल] ने बताया है, हमें [सईद बिन मसरूक] ने [सईद बिन उबैदा] से [इब्न उमर] से [उमर] से बताया है कि उसने कहा; "नहीं, मेरे पिता की कसम," अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "चुप रहो, बेशक, जो कोई अल्लाह के अलावा किसी और की कसम खाता है वह मूर्तिपूजक है।"
इमाम अहमद : 312
حَدَّثَنَا حَمَّادٌ الْخَيَّاطُ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ زَادَ فِي الْمَسْجِدِ مِنْ الْأُسْطُوَانَةِ إِلَى الْمَقْصُورَةِ وَزَادَ عُثْمَانُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ نَبْغِي نَزِيدُ فِي مَسْجِدِنَا مَا زِدْتُ فِيهِ
हमें [हम्मद अल खय्यात] ने बताया है, हमें [अब्दुल्ला] ने [नफी] से बताया है; उन्होंने कहा; कि [उमर] ने मस्जिद को खंभों से लेकर छोटे कमरों तक बढ़ाया और उस्मान ने भी जोड़ा, फिर उमर ने कहा; अगर मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए नहीं सुना होता: "हम मस्जिद में जगह बढ़ाना चाहते हैं," तो मैंने और नहीं जोड़ा होता।
इमाम अहमद : 313
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ بَعَثَ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْحَقِّ وَأَنْزَلَ مَعَهُ الْكِتَابَ فَكَانَ مِمَّا أُنْزِلَ عَلَيْهِ آيَةُ الرَّجْمِ فَرَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ ثُمَّ قَالَ قَدْ كُنَّا نَقْرَأُ وَلَا تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ فَإِنَّهُ كُفْرٌ بِكُمْ أَوْ إِنَّ كُفْرًا بِكُمْ أَنْ تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ ثُمَّ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تُطْرُونِي كَمَا أُطْرِيَ ابْنُ مَرْيَمَ وَإِنَّمَا أَنَا عَبْدٌ فَقُولُوا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ وَرُبَّمَا قَالَ مَعْمَرٌ كَمَا أَطْرَتْ النَّصَارَى ابْنَ مَرْيَمَ
हमें [अब्दुर्रज्जाक] ने बताया है कि हमें [ममार] ने [अज़ ज़ुहरी] से [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा बिन मसऊद] से [इब्न अब्बास] से [उमर] से बताया कि उन्होंने कहा; "वास्तव में अल्लाह ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सत्य के साथ भेजा, और उन पर किताब (अल-कुरान) उतारी, उन पर जो आयतें उतारी गईं उनमें पत्थर मारने के नियम की आयत भी थी, फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पत्थर मारने के नियम का पालन किया, और हमने भी उनकी मृत्यु के बाद पत्थर मारने के नियम का पालन किया," फिर उन्होंने कहा; "असल में हमने पढ़ा है; "अपने पुरखों से नफ़रत मत करो, क्योंकि यह तुम्हें काफ़िर बना सकता है," या; "असल में तुम काफ़िर बन सकते हो क्योंकि तुम अपने पुरखों से नफ़रत करते हो," फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मुझे इबादत मत बनाओ जैसे इब्न ईसा को इबादत माना जाता था, मैं तो बस एक बंदा हूँ, इसलिए कहो; 'उसका बंदा और उसका रसूल'।" म'मार कह सकती थीं; "जैसे ईसाई इब्न मरियम की इबादत करते थे।"
इमाम अहमद : 314
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ لِعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي سَمِعْتُ النَّاسَ يَقُولُونَ مَقَالَةً فَآلَيْتُ أَنْ أَقُولَهَا لَكُمْ زَعَمُوا أَنَّكَ غَيْرُ مُسْتَخْلِفٍ فَوَضَعَ رَأْسَهُ سَاعَةً ثُمَّ رَفَعَهُ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَحْفَظُ دِينَهُ وَإِنِّي إِنْ لَا أَسْتَخْلِفْ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَسْتَخْلِفْ وَإِنْ أَسْتَخْلِفْ فَإِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَدْ اسْتَخْلَفَ قَالَ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ ذَكَرَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبَا بَكْرٍ فَعَلِمْتُ أَنَّهُ لَمْ يَكُنْ يَعْدِلُ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحَدًا وَأَنَّهُ غَيْرُ مُسْتَخْلِفٍ
हमें [अब्दुर्रज्जाक] ने बताया है कि हमें [ममार] ने [अज़ ज़ुहरी] से [सलीम] से [इब्न उमर] से बताया है कि उसने [उमर] से कहा; "वास्तव में, मैंने लोगों को कुछ कहते सुना, लेकिन मैं इसे आपसे कहने से हिचकिचा रहा था, उन्हें लगा कि आपने खलीफ़ा नियुक्त नहीं किया है।" फिर उमर ने एक पल के लिए अपना सिर झुकाया, फिर उसे उठाया और कहा; "वास्तव में, अल्लाह अपने धर्म को सुरक्षित रखेगा, अगर मैं खलीफ़ा नियुक्त नहीं करता, तो वास्तव में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खलीफ़ा नियुक्त नहीं किया, और अगर मैं खलीफ़ा नियुक्त करता हूं, तो वास्तव में अबू बक्र ने खलीफा नियुक्त किया है।" इब्न उमर ने कहा; "अल्लाह की कसम, कोई और बात नहीं है सिवाय इसके कि वह (उमर) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और अबू बक्र को याद करते हैं, इसलिए मुझे पता है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जैसा कोई नहीं है, और उन्होंने कोई खलीफ़ा नहीं बनाया।"
इमाम अहमद : 315
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ قَالَ أَرْسَلَ إِلَيَّ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ فَقُلْتُ لَكُمَا إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ
हमें [अब्दुर्रज्जाक] ने बताया है, हमें [ममार] ने [अज़ ज़ुहरी] से [मलिक बिन औस बिन अल हदत्सन] से बताया है, उन्होंने कहा; [उमर] ने मेरे पास एक पत्र भेजा, - फिर उन्होंने एक हदीस का उल्लेख किया, - तो मैं तुम दोनों से कहता हूं, वास्तव में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार कहा था: "वास्तव में हमें विरासत में नहीं मिला है, जो धन हम पीछे छोड़ते हैं वह दान के लिए है।"
इमाम अहमद : 316
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ لَمَّا مَاتَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بُكِيَ عَلَيْهِ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْمَيِّتَ يُعَذَّبُ بِبُكَاءِ الْحَيِّ
हमें [अब्दुर्रज्जाक] ने बताया है कि हमें [ममार] ने [अज़ ज़ुहरी] से [इब्नुल मुसय्यब] से बताया है कि उन्होंने कहा; "जब अबू बकर की मृत्यु हुई तो उनका शोक मनाया गया, फिर [उमर] ने कहा; वास्तव में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार कहा था: "निश्चित रूप से, एक मृत व्यक्ति को यातना दी जाएगी क्योंकि एक जीवित व्यक्ति रो रहा है।"
इमाम अहमद : 317
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا رَبَاحٌ عَنْ مَعْمَرٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَفَرَ مَنْ كَفَرَ قَالَ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا أَبَا بَكْرٍ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَدْ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ إِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عَنَاقًا كَانُوا يُؤَدُّونَهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَى مَنْعِهَا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ أَنَّ اللَّهَ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بِالْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ
हमें [इब्राहिम बिन खालिद] ने बताया है कि हमें [रबाह] ने [ममार] से [अज़ ज़ुहरी] से [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा] से [अबू हुरैरा] से बताया है, उन्होंने कहा; जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हुई तो कुछ लोग अविश्वासी हो गए, -अबू हुरैरा ने कहानी को जारी रखा; - "तब [उमर बिन अल खत्थब] ने कहा; "ऐ अबू बकर, तुम इंसानों से कैसे लड़ सकते हो, जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: "मुझे इंसानों से लड़ने का आदेश दिया गया था जब तक कि वे "ला इलाहा इल्लल्लाह" न कहें, और जिसने भी "ला इलाहा इल्लल्लाह" कहा है, तो उन्होंने अपने खून और संपत्ति को मुझसे सुरक्षित कर लिया है, जबकि हिसाब अल्लाह पर छोड़ दिया गया है।" [अबू बकर] ने उत्तर दिया; "मैं उन लोगों से लड़ूंगा जो नमाज़ और ज़कात में फ़र्क करते हैं, क्योंकि ज़कात दौलत का हक़ है, अल्लाह की कसम, अगर वे मुझे वह ऊँट देने से मना करते हैं जो उन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को दिया था, तो मैं उनके मना करने की वजह से उनसे लड़ूंगा।" तब उमर ने कहा: "अल्लाह की कसम, मुझे बस यही दिखता है कि अल्लाह ने अबू बक्र का दिल लड़ने के लिए खोल दिया है, और मैं जानता हूँ कि यह सच है।"
इमाम अहमद : 318
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّا لَا نُورَثُ مَا تَرَكْنَا صَدَقَةٌ
उन्होंने हमें [सुफ़यान], [अमरू], [अज़ ज़ुहरी], [मलिक बिन औस], [उमर] से बताया, और कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वास्तव में, हम विरासत में नहीं हैं, और हम जो धन पीछे छोड़ते हैं वह दान के लिए है।"
इमाम अहमद : 319
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسٍ قَالَ أَرْسَلَ إِلَيَّ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَقَالَ إِنَّ أَمْوَالَ بَنِي النَّضِيرِ كَانَتْ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَى رَسُولِهِ مِمَّا لَمْ يُوجِفْ عَلَيْهِ الْمُسْلِمُونَ بِخَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ فَكَانَ يُنْفِقُ عَلَى أَهْلِهِ مِنْهَا نَفَقَةَ سَنَةٍ وَمَا بَقِيَ جَعَلَهُ فِي الْكُرَاعِ وَالسِّلَاحِ عُدَّةً فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ
उन्होंने हमें [सुफ़यान] को [अमरू] से [अज़ ज़ुहरी] से [मलिक बिन औस] तक बताया; [उमर] ने मुझे एक चिट्ठी भेजी, -फिर उन्होंने हदीस का ज़िक्र किया,- और कहा; "बेशक, बनी नदलीर का माल उन खजानों में से है जिन्हें अल्लाह ने अल्लाह के रसूल के लिए फाई' की संपत्ति बनाया था, जो मुसलमानों से बिना मेहनत के घोड़ों या दूसरी गाड़ियों से हासिल किया गया था, उन्होंने इस माल को एक साल तक अपने परिवार पर खर्च किया, और बाकी का इस्तेमाल उन्होंने अल्लाह के रास्ते में (युद्ध की) तैयारी के लिए घुड़सवारी के जानवर और हथियार खरीदने में किया।"
इमाम अहमद : 320
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَقْبَلَ اللَّيْلُ وَأَدْبَرَ النَّهَارُ وَغَرَبَتْ الشَّمْسُ فَقَدْ أَفْطَرَ الصَّائِمُ
हमको [सुफ़यान] को [हिसाम] से [उनके पिता] से ['आशिम बिन उमर] से [उनके पिता] से बताया गया है, कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार कहा: "जब रात होती है, दिन छिप जाता है और सूरज डूब जाता है, तो उपवास करने वालों के लिए उपवास तोड़ने का समय आ गया है।"