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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 281

حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ زَائِدَةَ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَانَ مِنْكُمْ مُلْتَمِسًا لَيْلَةَ الْقَدْرِ فَلْيَلْتَمِسْهَا فِي الْعَشْرِ الْأَوَاخِرِ وِتْرًا

हमरा सभ केँ [हुसैन बिन अली] केँ [जैदा] सँ ['अशिम] सँ [अपन पिता] सँ [इब्न अब्बास] सँ कहलाक बाद ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'अहाँ सभ मे जे कियो लैलातुल कदरक राति ताकि रहल अछि, ओ एकरा अंतिम दस राति मे -रमदलान मासक- अर्थात विषम राति मे ताकय'।

Hadith

Imam Ahmad : 282

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ عُمَرَ قِيلَ لَهُ أَلَا تَسْتَخْلِفُ فَقَالَ إِنْ أَتْرُكْ فَقَدْ تَرَكَ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَإِنْ أَسْتَخْلِفْ فَقَدْ اسْتَخْلَفَ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ

हमरा सब के [मुहम्मद बिन बिसीर] हमरा सब के [हिस्यम बिन उर्वाह] के [अपन पिता] स [इब्न उमर] स कहने छथि जे उमर स पूछल गेल छल; 'अहाँ -प्रतिस्थापन- खलीफा नियुक्ति नहि कर' जा रहल छी?' [उमर] उत्तर देलनि; 'जँ हम हुनका छोड़ि देबनि तखन सचमुच हमरा सँ नीक कियो हुनका छोड़ि देने छथि, अर्थात अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम।' आ जँ हम खलीफा - प्रतिस्थापन - तऽ सचमुच हमरासँ नीक कियो, अर्थात अबू बकर खलीफा नियुक्त केने छथि' ।

Hadith

Imam Ahmad : 283

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ عَلْقَمَةَ بْنَ وَقَّاصٍ اللَّيْثِيَّ يَقُولُ إِنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَهُوَ يَخْطُبُ النَّاسَ وَهُوَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْعَمَلُ بِالنِّيَّةِ وَإِنَّمَا لِامْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَإِلَى رَسُولِهِ فَهِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَإِلَى رَسُولِهِ وَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ لِدُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ امْرَأَةٍ يَتَزَوَّجُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के [याह्या बिन सईद] के कहने अछि जे [मुहम्मद बिन इब्राहिम] हुनका कहलक अछि, जे ओ [‘अलकामाह बिन वक्कास अल लैत्सी] के कहैत सुनने छल; कि ओ [उमर बिन अल खथथब] के लोक के सामने उपदेश दैत सुनने छलाह आ कहैत छलाह; हम सुनलहुँ जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'कर्म केवल नियत पर निर्भर करैत अछि, आ सब केँ ओ भेटत जे ओकर इरादा छलैक, जे कियो अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह केँ अपन हिजरा करत, तखन ओकर हिजरा अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह दिस होयत, आ जे अपन हिजरा करत जे दुनियाँक जीवन प्राप्त करबाक लेल वा कोनो महिला लेल विवाह करत, तखन ओकर हिजरा ओ भेटतैक जे ओकर इरादा छलैक'।

Hadith

Imam Ahmad : 284

حَدَّثَنَا يَزِيدُ حَدَّثَنَا عَاصِمٌ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ اتَّزِرُوا وَارْتَدُوا وَانْتَعِلُوا وَأَلْقُوا الْخِفَافَ وَالسَّرَاوِيلَاتِ وَأَلْقُوا الرُّكُبَ وَانْزُوا نَزْوًا وَعَلَيْكُمْ بِالْمَعَدِّيَّةِ وَارْمُوا الْأَغْرَاضَ وَذَرُوا التَّنَعُّمَ وَزِيَّ الْعَجَمِ وَإِيَّاكُمْ وَالْحَرِيرَ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ نَهَى عَنْهُ وَقَالَ لَا تَلْبَسُوا مِنْ الْحَرِيرِ إِلَّا مَا كَانَ هَكَذَا وَأَشَارَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِإِصْبَعَيْهِ

हमरा सभकेँ [यजीद] हमरा सभकेँ [‘अशिम] [अबू उस्मान अन नहदी]सँ [उमर बिन अल खथथब]सँ कहलक अछि जे ओ कहलनि; 'सारोंग, शाल आ चप्पल पहिरू, आ चमड़ाक जूता-पैंटल फेकि दियौक, घोड़ा पर सवार सँ मदद नहि माँगू, एक मारि सँ घोड़ा पर कूदि जाउ, खुरदुरा कपड़ा आ रोजी-रोटी सँ दूर रहू, आ निशाना फेकि दियौक, सुख-भोग, विदेशी वस्त्र छोड़ि दियौक, आ रेशम नहि पहिरू, वास्तव मे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वल्लम केर अछि।' मना कयलनि, आ कहलनि: 'रेशम नहि पहिरब, जाबत धरि ओ मात्र एहि आकारक नहि हो'। आ दुनू आँगुरसँ इशारा केलक'।

Hadith

Imam Ahmad : 285

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا يَحْيَى عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِيَّاكُمْ أَنْ تَهْلِكُوا عَنْ آيَةِ الرَّجْمِ وَأَنْ يَقُولَ قَائِلٌ لَا نَجِدُ حَدَّيْنِ فِي كِتَابِ اللَّهِ تَعَالَى فَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجَمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के [याह्या] के [सईद बिन अल मुसैयब] स रिपोर्ट केने छथि जे [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; 'पत्थर मारबाक श्लोकक कारणेँ नष्ट नहि होउ, जाबत कियो नहि कहत; 'हमरा सब के अल्लाह तआला के किताब में दू टा सजा नै भेटैत अछि,' कियाक त वास्तव में हम एक बेर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्थर मारैत देखलहुं, आ हम सब हुनकर बाद पत्थरबाजी के नियम के सेहो पालन केलहुं'।

Hadith

Imam Ahmad : 286

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا الْعَوَّامُ حَدَّثَنِي شَيْخٌ كَانَ مُرَابِطًا بِالسَّاحِلِ قَالَ لَقِيتُ أَبَا صَالِحٍ مَوْلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ لَيْسَ مِنْ لَيْلَةٍ إِلَّا وَالْبَحْرُ يُشْرِفُ فِيهَا ثَلَاثَ مَرَّاتٍ عَلَى الْأَرْضِ يَسْتَأْذِنُ اللَّهَ فِي أَنْ يَنْفَضِخَ عَلَيْهِمْ فَيَكُفُّهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के कहने अछि [अल अव्वाम] हमरा [शेख] के कहने अछि जे रिबाथ अछि - तटीय इलाका में सीमा के पहरा दैत अछि - ओ कहलनि; हमरा [अबू शालिह] उमर बिन अल खथथब के पूर्व नौकर सं भेंट भेल अछि, ओ कहलनि; हमरा सब [उमर बिन खथथब] के रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहने छथि जे ओ कहने छलाह : 'जा धरि समुद्र तीन बेर जमीन पर नहि उठैत अछि, अल्लाह स आग्रह करैत अछि जे ओ अपन शक्ति हुनका -मनुष्य- के सामने प्रकट नहि करथि, मुदा ओकरा रोकय लेल'।

Hadith

Imam Ahmad : 287

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ عَنْ أَنَسِ بْنِ سِيرِينَ قَالَ قُلْتُ لِابْنِ عُمَرَ حَدِّثْنِي عَنْ طَلَاقِكَ امْرَأَتَكَ قَالَ طَلَّقْتُهَا وَهِيَ حَائِضٌ قَالَ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَهُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا فَإِذَا طَهُرَتْ فَلْيُطَلِّقْهَا فِي طُهْرِهَا قَالَ قُلْتُ لَهُ هَلْ اعْتَدَدْتَ بِالَّتِي طَلَّقْتَهَا وَهِيَ حَائِضٌ قَالَ فَمَا لِي لَا أَعْتَدُّ بِهَا وَإِنْ كُنْتُ قَدْ عَجَزْتُ وَاسْتَحْمَقْتُ

हमरा सभ केँ [यजीद] हमरा सभ केँ [अब्दुल मलिक] केँ [अनस बिन सिरिन] सँ कहि देने छलाह ओ कहलनि; हम [इब्न उमर] केँ कहलियनि; पत्नी स तलाक के बारे में बताउ! इब्न उमर कहलनि; हम मासिक धर्म के दौरान मासिक धर्म भ रहल छलहुं, फेर हम उमर बिन अल खथथब के ई बात कहलियनि, फेर उमर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहलखिन्ह, फेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन्ह: 'हुनका एकर संदर्भ देबाक आदेश दियौक, जँ ओ शुद्ध छथि, तखन हुनका अपन पवित्र अवधि मे एकरा मेनाक करय दियौक'। अनस बाजल; हम इब्न उमर केँ कहलियनि; 'की अहाँ अपन पत्नीक लेल इद्दाह अवधि अंजाम देलहुँ जकरा पीरियड मे तलाक द' देलियैक?' इब्नू उमर जवाब देलखिन: 'हम पहिने इद्दाह काल किएक नहि केने रही? भले हम हुनका लग नहि पहुँचि सकलहुँ आ नहि पहुँचि सकलहुँ'।

Hadith

Imam Ahmad : 288

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا أَصْبَغُ عَنْ أَبِي الْعَلَاءِ الشَّامِيِّ قَالَ لَبِسَ أَبُو أُمَامَةَ ثَوْبًا جَدِيدًا فَلَمَّا بَلَغَ تَرْقُوَتَهُ قَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي مَا أُوَارِي بِهِ عَوْرَتِي وَأَتَجَمَّلُ بِهِ فِي حَيَاتِي ثُمَّ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ اسْتَجَدَّ ثَوْبًا فَلَبِسَهُ فَقَالَ حِينَ يَبْلُغُ تَرْقُوَتَهُ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي مَا أُوَارِي بِهِ عَوْرَتِي وَأَتَجَمَّلُ بِهِ فِي حَيَاتِي ثُمَّ عَمَدَ إِلَى الثَّوْبِ الَّذِي أَخْلَقَ أَوْ قَالَ أَلْقَى فَتَصَدَّقَ بِهِ كَانَ فِي ذِمَّةِ اللَّهِ تَعَالَى وَفِي جِوَارِ اللَّهِ وَفِي كَنَفِ اللَّهِ حَيًّا وَمَيِّتًا حَيًّا وَمَيِّتًا حَيًّا وَمَيِّتًا

हमरा सभ केँ [यजीद] हमरा सभ केँ [अशबाग] केँ [अबुल 'आला` असी शामी] सँ कहि देने छलाह ओ कहलनि; [अबू उमामा] नव कपड़ा पहिरने छलाह, जखन गर्दनक नाकक गप्प अबैत छलनि त' ओ पढ़ैत छलाह; 'अलहमदुलिल्लाहिल्लाद्जी कसानी माँ उवारी बिहि 'औराती वा अताजम्मलु बिहिई फि हयती -अल्लाह के स्तुति हो जे हमरा एहन कपड़ा देने छथि जे हमर नग्नता के झाँपि सकैत अछि आ हमरा जीवन में एहि सं सजाओल जा सकैत अछि-,' तखन ओ कहलनि; हम [उमर बिन खथथब] कहैत सुनलहुँ; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जकरा लग नव वस्त्र अछि तखन ओ पहिरैत अछि आ जखन ओकर गरदनिक पाछू पहुँचि जाइत अछि त ओ पढ़ैत अछि; 'अलहमदुलिल्लाहिल लद्जीई कसानी माँ उवारी बिहि 'औरोटी वा अताजम्मलु बिहिई फि हयती -अल्लाह के स्तुति हो जे हमरा एहन कपड़ा देने छथि जे हमर औरोत के झाँपि सकैत अछि आ हमरा जीवन में ओहि स सजा सकैत अछि-' तखन हुनकर इरादा छनि जे ओ कपड़ा के संग खर्च करथि जे घिसल-पिटल भ गेल अछि या जे आब नहि पहिरल गेल अछि, तखन ओ अल्लाह त'अला के गारंटी में छथि आ अल्लाह के संग छथि आ नीचा छथि अल्लाह के रक्षा चाहे जीवित हो या मृत, जीवित हो या नहीं। मृत आ ने जीवित आ ने मृत'।

Hadith

Imam Ahmad : 289

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَحَدُنَا إِذَا أَرَادَ أَنْ يَنَامَ وَهُوَ جُنُبٌ كَيْفَ يَصْنَعُ قَبْلَ أَنْ يَغْتَسِلَ قَالَ يَتَوَضَّأُ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ يَنَامُ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के [मुहम्मद बिन इशाक] के [नाफी'] स [इब्न उमर] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलियैन; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, जँ हमरा सभ मे सँ कियो जुनुब केर अवस्था मे सुतय चाहैत अछि त' स्नान सँ पहिने की करबाक चाही?' ओ उत्तर देलनि: 'अहाँ सभ केँ जहिना नमाज लेल वज़ूज करैत छी आ फेर सुतैत छी तहिना वजूद करू'।

Hadith

Imam Ahmad : 290

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا وَرْقَاءُ وَأَبُو النَّضْرِ قَالَ حَدَّثَنَا وَرْقَاءُ عَنْ عَبْدِ الْأَعْلَى الثَّعْلَبِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَ كُنْتُ مَعَ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ وَعُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي الْبَقِيعِ يَنْظُرُ إِلَى الْهِلَالِ فَأَقْبَلَ رَاكِبٌ فَتَلَقَّاهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ مِنْ أَيْنَ جِئْتَ فَقَالَ مِنْ الْعَرَبِ قَالَ أَهْلَلْتَ قَالَ نَعَمْ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اللَّهُ أَكْبَرُ إِنَّمَا يَكْفِي الْمُسْلِمِينَ الرَّجُلُ ثُمَّ قَامَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَتَوَضَّأَ فَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ صَلَّى الْمَغْرِبَ ثُمَّ قَالَ هَكَذَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَنَعَ قَالَ أَبُو النَّضْرِ وَعَلَيْهِ جُبَّةٌ ضَيِّقَةُ الْكُمَّيْنِ فَأَخْرَجَ يَدَهُ مِنْ تَحْتِهَا وَمَسَحَ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के [वारका` बिन उमर] आ [अबू अन नडलर] के कहलक अछि ओ कहलनि; [अब्दुल अ'ला अतस त्सा`लाबी] स॑ [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स॑ हमरा सब क॑ [वारका`] क॑ बतैला के बाद हुनी कहलकै; हम एक बेर अल बर्रा' बिन 'अजीब आ [उमर बिन अल खथथब] के संग बकी' कब्रिस्तान में अमावस्या -अर्धचंद्र- देखय लेल छलहुं, तखन एकटा सवार आबि गेल, उमर हुनका सं भेंट केलनि आ पुछलनि; 'अहाँ कत' सँ अबैत छी?' सवार उत्तर देलक; 'बेदुइन अरब सं', उमर पुछलखिन; 'अमावासी देखलहुँ अछि ?' ओ उत्तर देलथिन; 'हँ'। उमर बजलाह; 'अल्लाह महान छथि, सचमुच मुसलमानक लेल एक व्यक्ति पर्याप्त', तखन उमर ठाढ़ भ' गेलाह, वजूद केलनि आ अपन दू खुफ पोछलनि, फेर मगरीबक नमाज केलनि, तखन कहलनि; 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एना करैत देखलहुं'। अबू अन नडलर कहलनि; 'ओ संकीर्ण आस्तीन बला वस्त्र पहिरने छलाह, आ वस्त्रक नीचाँ सँ हाथ निकालि खुफ रगड़लनि ।'

Hadith

Imam Ahmad : 291

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ أَنْبَأَنَا الزُّبَيْرُ بْنُ الْخِرِّيتِ عَنْ أَبِي لَبِيدٍ قَالَ خَرَجَ رَجُلٌ مِنْ طَاحِيَةَ مُهَاجِرًا يُقَالُ لَهُ بَيْرَحُ بْنُ أَسَدٍ فَقَدِمَ الْمَدِينَةَ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِأَيَّامٍ فَرَآهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَعَلِمَ أَنَّهُ غَرِيبٌ فَقَالَ لَهُ مَنْ أَنْتَ قَالَ مِنْ أَهْلِ عُمَانَ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَخَذَ بِيَدِهِ فَأَدْخَلَهُ عَلَى أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ هَذَا مِنْ أَهْلِ الْأَرْضِ الَّتِي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَرْضًا يُقَالُ لَهَا عُمَانُ يَنْضَحُ بِنَاحِيَتِهَا الْبَحْرُ بِهَا حَيٌّ مِنْ الْعَرَبِ لَوْ أَتَاهُمْ رَسُولِي مَا رَمَوْهُ بِسَهْمٍ وَلَا حَجَرٍ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के कहलक अछि [जरीर] हमरा सब के [अज जुबैर बिन अल खिरित] के [अबू लुबैद] स कहलक अछि ओ कहलनि; एकटा आदमी थाहिया सं प्रवास करय लेल निकलल छल, ओकर नाम छल बैराह बिन असद, तखन ओ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मृत्यु के किछु दिन बाद मदीना आयल छल आ उमर के देखल गेल छल, तखन [उमर] के पता चलल जे ओ विदेशी छथि, तें उमर हुनका सं पूछलखिन; 'अहां के छी?' ओ उत्तर देलथिन; 'हम ओमान के जनता स आयल छी'। उमर बजलाह; 'हँ'। अबू लुबैद कहलनि; उमर हुनका हाथ पकड़ि अबू बकर सँ भेंट करय लेल ल' गेलाह, उमर कहलनि; 'ओ एकटा एहन देशक लोक सँ छथि जकर बारे मे हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ सुनने रही जे ओ कहलनि: 'सत्ते, हमरा ओमान नामक देशक बारे मे पता अछि, जकर तट पर समुद्रक पानि बहैत अछि, अरबक गाम अछि, जँ हमर दूत हुनका सभ लग आबि जायत त' ओ सभ निश्चित रूप सँ हुनका पर तीर वा पाथर नहि फेकताह'।'

Hadith

Imam Ahmad : 292

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا عَاصِمُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَا أَعْلَمُهُ إِلَّا رَفَعَهُ قَالَ يَقُولُ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى مَنْ تَوَاضَعَ لِي هَكَذَا وَجَعَلَ يَزِيدُ بَاطِنَ كَفِّهِ إِلَى الْأَرْضِ وَأَدْنَاهَا إِلَى الْأَرْضِ رَفَعْتُهُ هَكَذَا وَجَعَلَ بَاطِنَ كَفِّهِ إِلَى السَّمَاءِ وَرَفَعَهَا نَحْوَ السَّمَاءِ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के ['अशिम बिन मुहम्मद] [अपन पिता] स [इब्न उमर] स [उमर] स कहलक अछि, -ओ कहलनि; हमरा ई ताबत धरि नहि बुझल छल जाबत धरि ई डिमरफू नहि छल' -जखन धरि नबी-, - उमर कहलनि: 'अल्लाह तबराका व ता'ला कहलनि: 'जे हमरा एहि तरहेँ नम्र करत', उमर अपन हथेली जमीन पर नीचाँ उतारि देलनि जाबत धरि ओ लगभग जमीन केँ नहि छुबि गेल, 'तखन हम एकरा एहिना उठा देब', आ उमर अपन हथेली केँ आकाश दिस बना लेलनि आ फेर ओकरा आकाश दिस उठौलनि'।

Hadith

Imam Ahmad : 293

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا دَيْلَمُ بْنُ غَزْوَانَ الْعَبْدِيُّ حَدَّثَنَا مَيْمُونٌ الْكُرْدِيُّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ قَالَ إِنِّي لَجَالِسٌ تَحْتَ مِنْبَرِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَهُوَ يَخْطُبُ النَّاسَ فَقَالَ فِي خُطْبَتِهِ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَخَافُ عَلَى هَذِهِ الْأُمَّةِ كُلُّ مُنَافِقٍ عَلِيمِ اللِّسَانِ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के कहलक अछि [दैलम बिन गज़वान अल अब्दी] हमरा सब के [मैमुन अल कुर्दी] के [अबू उस्मान अन नहदी] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर के] मंच के नीचा बैसल छलहुं आ ओ लोक के प्रवचन द रहल छलाह, ओ अपन प्रवचन में कहलनि; एक बेर हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही जे सचमुच हमरा अपन उम्मा स सबस बेसी डर हर पाखंडी अछि जे अपन जीभ के प्रयोग में चतुर अछि।'

Hadith

Imam Ahmad : 294

حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا مَالِكٌ ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ أَخْبَرَنِي مَالِكٌ قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ عَبْد اللَّهِ بْن أَحْمَد و حَدَّثَنَا مُصْعَبٌ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَبِي أُنَيْسَةَ أَنَّ عَبْدَ الْحَمِيدِ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُ عَنْ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سُئِلَ عَنْ هَذِهِ الْآيَةِ { وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِنْ بَنِي آدَمَ مِنْ ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّاتِهِمْ } الْآيَةَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ خَلَقَ آدَمَ ثُمَّ مَسَحَ ظَهْرَهُ بِيَمِينِهِ وَاسْتَخْرَجَ مِنْهُ ذُرِّيَّةً فَقَالَ خَلَقْتُ هَؤُلَاءِ لِلْجَنَّةِ وَبِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ يَعْمَلُونَ ثُمَّ مَسَحَ ظَهْرَهُ فَاسْتَخْرَجَ مِنْهُ ذُرِّيَّةً فَقَالَ خَلَقْتُ هَؤُلَاءِ لِلنَّارِ وَبِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ يَعْمَلُونَ فَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَفِيمَ الْعَمَلُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ إِذَا خَلَقَ الْعَبْدَ لِلْجَنَّةِ اسْتَعْمَلَهُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ حَتَّى يَمُوتَ عَلَى عَمَلٍ مِنْ أَعْمَالِ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَيُدْخِلَهُ بِهِ الْجَنَّةَ وَإِذَا خَلَقَ الْعَبْدَ لِلنَّارِ اسْتَعْمَلَهُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَتَّى يَمُوتَ عَلَى عَمَلٍ مِنْ أَعْمَالِ أَهْلِ النَّارِ فَيُدْخِلَهُ بِهِ النَّارَ

हमरा सभकेँ कहि देने अछि [रौह] हमरा सभकेँ [मलिक] कहि देने अछि। आ हमरा सभकेँ कहलक अछि [इशक] हमरा कहलक अछि [मलिक] कहलक अछि अबू अब्दुर्रहमान अब्दुल्लाह बिन अहमद; हमरा सब [मुशअब अज जुबैरी] के कहल गेल अछि [जैद बिन अबी उनैसाह] स हमरा [मलिक] के कहल गेल अछि जे [अब्दुल हामिद बिन अब्दुररहमान बिन जैद बिन अल खथथब] हुनका [मुस्लिम बिन यासर अल जुहानी] स कहने छथि जे [उमर बिन अल खथथब] स एहि आयत के बारे में पूछल गेल छल: 'आ -स्मरण-, जखन अहाँक प्रभु आदम के संतान के वंशज को उनके बेल से बाहर लाया' -QS अल अ'रोफ श्लोक: 172- | तेँ उमर उत्तर देलनि; 'हम सुनलहुँ जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ एहि आयत केर बारे मे पूछल गेल छल, तखन ओ जवाब देलनि: 'सत्ते, अल्लाह आदम केँ बनौलनि, फेर ओकर मांस केँ पोछलनि, फेर ओकर मांस सँ - आदम - अल्लाह आदम केर वंशज केँ बाहर निकालि देलनि जखन कि कहैत छथि: 'हम ओकरा सब केँ स्वर्ग मे प्रवेश करबाक लेल बनौने छी आ ओ सब स्वर्गवासी केर कर्म सँ नीक काज करत'।' तखन अल्लाह आदम के सुल्बी पोछि देलखिन आ ओहि मे स अल्लाह हुनकर संतान पैदा केलनि, ई कहैत; 'हम ओकरा सभकेँ नरकमे प्रवेश करबाक लेल बनौने छी आ ओ सभ नरकक निवासीक कर्मसँ नीक काज करत' । तेँ कोनो मित्रसँ पूछू; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, तखन दान कियैक?' त रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'सत्ते, जखन अल्लाह कोनो नौकर के स्वर्ग में प्रवेश करय लेल बनौताह त ओकरा स्वर्ग के निवासी के कर्म स नीक काज करौताह, जाहि स जखन ओ मरत त ओ स्वर्ग के निवासी के कर्म स ऊपर रहत, आ फेर ओकरा स्वर्ग में प्रवेश करत। आ जँ अहाँ कोनो नोकर केँ नरक मे जेबाक लेल बना देब तँ ओकरा नरकक निवासीक कर्म सँ नीक काज करबा देब, जाहि सँ जखन ओ मरि जायत तखन ओ नरकक निवासीक काज सँ ऊपर रहत, तखन ओकरा नरक मे राखि दियौक'।

Hadith

Imam Ahmad : 295

حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَجُلًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ الْمَسْجِدَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَعُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَائِمٌ يَخْطُبُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَيَّةُ سَاعَةٍ هَذِهِ فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ انْقَلَبْتُ مِنْ السُّوقِ فَسَمِعْتُ النِّدَاءَ فَمَا زِدْتُ عَلَى أَنْ تَوَضَّأْتُ فَأَقْبَلْتُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ الْوُضُوءُ أَيْضًا وَقَدْ عَلِمْتَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَأْمُرُنَا بِالْغُسْلِ

हमरा सब के [रौह] हमरा सब के [मलिक बिन अनस] के [इब्नु शिहाब] स [अपन पिता] स [सलीम बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] स कहलक अछि, जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब में स एकटा आदमी शुक्रदिन मस्जिद में प्रवेश केलक, जखन कि [उमर बिन अल खथथब] प्रवचन द रहल छल, तखन उमर पुछलक; 'आब की समय अछि?' ओ आदमी उत्तर देलक; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, हम बजार सँ घुरलहुँ आ नमाजक आह्वान सुनलहुँ, तखन हम किछु नहि केलहुँ सिवाय तुरन्त वज़ूद क' मस्जिद गेलहुँ ।' तखन उमर बजलाह; 'वज़ूद सेहो करू, भले अहाँ पहिने सँ जनैत छी जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सभ केँ नहाबाक आदेश देने छथि'।

Hadith

Imam Ahmad : 296

حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي سُلَيْمَانُ بْنُ عَتِيقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَابَيْهِ عَنْ بَعْضِ بَنِي يَعْلَى عَنْ يَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ قَالَ طُفْتُ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَاسْتَلَمَ الرُّكْنَ قَالَ يَعْلَى فَكُنْتُ مِمَّا يَلِي الْبَيْتَ فَلَمَّا بَلَغْتُ الرُّكْنَ الْغَرْبِيَّ الَّذِي يَلِي الْأَسْوَدَ جَرَرْتُ بِيَدِهِ لِيَسْتَلِمَ فَقَالَ مَا شَأْنُكَ فَقُلْتُ أَلَا تَسْتَلِمُ قَالَ أَلَمْ تَطُفْ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ بَلَى فَقَالَ أَفَرَأَيْتَهُ يَسْتَلِمُ هَذَيْنِ الرُّكْنَيْنِ الْغَرْبِيَّيْنِ قَالَ فَقُلْتُ لَا قَالَ أَفَلَيْسَ لَكَ فِيهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ قَالَ قُلْتُ بَلَى قَالَ فَانْفُذْ عَنْكَ

हमरा सब के कहलक अछि [रौह] हमरा सब के कहलक अछि [इब्नु जुरैज] हमरा [सुलेमान बिन अथिक] के [अब्दुल्लाह बिन बबैह] स [बानी या'ला स वंशज किछु लोक] स [या'ला बिन उमैया] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर बिन अल खथथब] के संग तवाफ केलहुं तखन ओ रुकून रगड़लनि, या'ला कहलनि; आ हम काबा के ठीक बगल में छलहुं, तें जखन हम पश्चिमी खंभा पर पहुँचलहुं जे कारी पाथरक बगल में अछि, तखन ओकरा पोछय लेल हाथ बढ़ेलहुं, तखन उमर पुछलखिन; 'अहां की कए रहल छी?' हम उत्तर देलियनि; 'नहि पोछलहुँ ?' ओ कहैत छथि; 'की अहाँ कहियो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग तवाफ नै केने छी?' तेँ हम उत्तर देलियनि; 'हँ'। उमर फेर पुछलकै; 'पच्छिम मे ई दुनू खंभा पोछैत देखलहुँ?' हम उत्तर देलियनि; 'नहि'। उमर बजलाह; 'की एहि मामला मे हुनका लेल नीक रोल मॉडल नहि अछि?' हम उत्तर देलियनि; ‘हँ,’ तखन उमर बजलाह; 'तखन अहाँक लेल करू - एकर उदाहरण अछि -'।

Hadith

Imam Ahmad : 297

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ وَأَبُو عَامِرٍ قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ قَالَ جِئْتُ بِدَنَانِيرَ لِي فَأَرَدْتُ أَنْ أَصْرِفَهَا فَلَقِيَنِي طَلْحَةُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ فَاصْطَرَفَهَا وَأَخَذَهَا فَقَالَ حَتَّى يَجِيءَ سَلْمٌ خَازِنِي قَالَ أَبُو عَامِرٍ مِنْ الْغَابَةِ وَقَالَ فِيهَا كُلِّهَا هَاءَ وَهَاءَ قَالَ فَسَأَلْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الذَّهَبُ بِالْوَرِقِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالْبُرُّ بِالْبُرِّ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالشَّعِيرُ بِالشَّعِيرِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ وَالتَّمْرُ بِالتَّمْرِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ

हमरा सब [उस्मान बिन उमर] आ [अबू अमीर] के कहला के बाद ओ कहलनि; [मलिक बिन औस बिन अल हदातसन] स [अज ज़ुहरी] स हमरा सब कए [मलिक] कए बता कए ओ कहलथि; हम अपन किछु दिनार ल' क' आयल रही जे हम बाँटय चाहैत छलहुँ, तखन तल्हा बिन उबैदिल्लाह सँ भेंट भेल, तखन ओ आदान-प्रदान क' दिनार ल' लेलक, ओ कहलनि; ‘जखन धरि हमर कोषाध्यक्ष सलमुन नहि आओत,’ अबू अमीर कहलनि; ‘जंगलसँ,’ तल्हा ओ सभटा नगदीमे बाजल, मालिक बिन औस बाजल; तखन हम [उमर बिन अल खथथब] स एहि बारे मे पूछलहुं, उमर जवाब देलथि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत सुनलहुँ; 'चानीक बदला मे सोना -बदली- नगद छोड़ि सूद, गहूम -गहूमक बदला- गहूम ताबत धरि सूद होइत अछि जाबत धरि ओ नगदी मे नहि हो, जेजावत -विनिमय- जेजावत मे नगद छोड़ि सूद आ खजूरक बदला मे खजूर नगद छोड़ि सूद होइत अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 298

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ أَخْبَرَنَا يُونُسُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْمَيِّتَ يُعَذَّبُ بِبُكَاءِ أَهْلِهِ عَلَيْهِ

हमरा सब के कहलक अछि [उस्मान बिन उमर] हमरा सब के [यूनुस] के [अज जुहरी] स [सैद बिन अल मुसैयब] स कहलक अछि जे [उमर] कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सत्ते, मृतक के यातना देल जायत, कारण ओकर परिवार ओकरा लेल कानैत अछि'।

Hadith

Imam Ahmad : 299

حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنِ الْمُغِيرَةِ عَنِ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ قَالَ أَتَيْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فِي أُنَاسٍ مِنْ قَوْمِي فَجَعَلَ يَفْرِضُ لِلرَّجُلِ مِنْ طَيِّئٍ فِي أَلْفَيْنِ وَيُعْرِضُ عَنِّي قَالَ فَاسْتَقْبَلْتُهُ فَأَعْرَضَ عَنِّي ثُمَّ أَتَيْتُهُ مِنْ حِيَالِ وَجْهِهِ فَأَعْرَضَ عَنِّي قَالَ فَقُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أَتَعْرِفُنِي قَالَ فَضَحِكَ حَتَّى اسْتَلْقَى لِقَفَاهُ ثُمَّ قَالَ نَعَمْ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَعْرِفُكَ آمَنْتَ إِذْ كَفَرُوا وَأَقْبَلْتَ إِذْ أَدْبَرُوا وَوَفَيْتَ إِذْ غَدَرُوا وَإِنَّ أَوَّلَ صَدَقَةٍ بَيَّضَتْ وَجْهَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَوُجُوهَ أَصْحَابِهِ صَدَقَةُ طَيِّئٍ جِئْتَ بِهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ أَخَذَ يَعْتَذِرُ ثُمَّ قَالَ إِنَّمَا فَرَضْتُ لِقَوْمٍ أَجْحَفَتْ بِهِمْ الْفَاقَةُ وَهُمْ سَادَةُ عَشَائِرِهِمْ لِمَا يَنُوبُهُمْ مِنْ الْحُقُوقِ

हमरा सब के [बकर बिन ईसा] हमरा सब के [अबू अवानाह] के [अल मुगिराह] स [आश स्या'बी] स [आदी बिन हातिम] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'हम [उमर बिन अल खथथब] लग तखन आयल रही जखन ओ हमर लोकक लोकक समूहक बीच मे छलाह, तखन ओ बनी थाय्यीक ककरो बीस हजारक हिस्सा द' देलनि' आ हमरा सँ मुँह घुमा देलनि,' 'आदी कहलनि; 'त' हम हुनका लग गेलहुँ मुदा ओ हमरा सँ मुँह घुमा लेलनि, तखन हुनकर चेहरा सँ भेंट भेलनि मुदा ओ तइयो हमरा सँ मुँह घुमा लेलनि,' 'आदी आगू बजलाह; तेँ हम हुनकासँ पुछलियनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, अहाँ हमरा नहि चिन्हैत छी?' 'आदी कहलक; 'तखन ओ हँसैत रहलाह जाबत धरि आँखि उठा क' नहि तकलनि आ फेर कहलनि; 'हँ, अल्लाह के कसम, हम अहाँ के सही मायने में चिन्हैत छी, अहाँ एकटा एहन व्यक्ति छी जे जखन लोक काफिर अछि तखन विश्वास करैत अछि, अहाँ एकटा एहन व्यक्ति छी जे लोक के पाछू हटला पर मोर्चा पर जाइत अछि, आ अहाँ एकटा एहन व्यक्ति छी जे जखन सब ओकरा संग धोखा करैत अछि तखन अपन वादा के पालन करैत अछि, आ सचमुच ओ दान जे पहिने अल्लाह के रसूलुल्लाह के चेहरा आ ओकर साथी के चेहरा के चमका देलक, ओ छल बनी थाय्य के दान' जे अहाँ के सामने अनने रही पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। तखन ओ माफी मंगलनि आ कहलनि; "सार मे दक्षिणा ओहि लोक केँ देल जाइत छैक जे गरीबीक अनुभव क' रहल अछि आ ओ अपन परिवारक नेता होइत छैक, कारण ओ जे सहैत छैक से ओकर अधिकार छैक."

Hadith

Imam Ahmad : 300

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ فِيمَا الرَّمَلَانُ الْآنَ وَالْكَشْفُ عَنْ الْمَنَاكِبِ وَقَدْ أَطَّأَ اللَّهُ الْإِسْلَامَ وَنَفَى الْكُفْرَ وَأَهْلَهُ وَمَعَ ذَلِكَ لَا نَدَعُ شَيْئًا كُنَّا نَفْعَلُهُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमरा सब के [अब्दुल मलिक बिन अमरू] हमरा सब के [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स [हिस्यम बिन स'द] के कहलक अछि ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [उमर बिन अल खथथब] कहैत छथि : 'रामल - तवाफ आ सई के दौरान जॉगिंग - एहि समय आ अपन कान्ह खोलैत किएक अछि, भले अल्लाह इस्लाम के मजबूत क' क' कुफर आ ओकर अनुयायी के समाप्त क' देने होथि, मुदा तइयो हम सब एहन काज नहि छोड़ब जे हम सब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में केने रही।