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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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इमाम अहमद (الامام احمد) - 26363 हदीस

पत्थर मारने के कानून के बारे में उमर की चेतावनी जिसे अनदेखा कर दिया गया क्योंकि यह कुरान में नहीं लिखा था

इमाम अहमद : 241

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ يَحْيَى قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِيَّاكُمْ أَنْ تَهْلِكُوا عَنْ آيَةِ الرَّجْمِ لَا نَجِدُ حَدَّيْنِ فِي كِتَابِ اللَّهِ فَقَدْ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ رَجَمَ وَقَدْ رَجَمْنَا

उन्होंने हमें [याह्या] से बताया कि मैंने [सईद बिन अल मुसय्यब] सुना कि [उमर] ने कहा; "पत्थर मारने के नियम को समझाने वाली आयत की वजह से तुम खत्म मत हो जाओ, यह कहते हुए: 'हमें अल्लाह की किताब में दो नियम (पत्थर मारना और कोड़े मारना) नहीं मिलते।" इसलिए मैंने एक बार पैगंबर को पत्थर मारने के नियम का पालन करते देखा, और हम भी पत्थर मारने के नियम का पालन करते हैं।"

उमर को मक़ाम इब्राहिम और हिजाब सहित कई मामलों में अल्लाह ने मंजूरी दी थी

इमाम अहमद : 242

حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَافَقْتُ رَبِّي فِي ثَلَاثٍ وَوَافَقَنِي رَبِّي فِي ثَلَاثٍ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ اتَّخَذْتَ مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى فَأَنْزَلَ اللَّهُ { وَاتَّخِذُوا مِنْ مَقَامِ إِبْرَاهِيمَ مُصَلًّى } قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهُ يَدْخُلُ عَلَيْكَ الْبَرُّ وَالْفَاجِرُ فَلَوْ أَمَرْتَ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ بِالْحِجَابِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ آيَةَ الْحِجَابِ وَبَلَغَنِي مُعَاتَبَةُ النَّبِيِّ عَلَيْهِ السَّلَام بَعْضَ نِسَائِهِ قَالَ فَاسْتَقْرَيْتُ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ فَدَخَلْتُ عَلَيْهِنَّ فَجَعَلْتُ أَسْتَقْرِيهِنَّ وَاحِدَةً وَاحِدَةً وَاللَّهِ لَئِنْ انْتَهَيْتُنَّ وَإِلَّا لَيُبَدِّلَنَّ اللَّهُ رَسُولَهُ خَيْرًا مِنْكُنَّ قَالَ فَأَتَيْتُ عَلَى بَعْضِ نِسَائِهِ قَالَتْ يَا عُمَرُ أَمَا فِي رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا يَعِظُ نِسَاءَهُ حَتَّى تَكُونَ أَنْتَ تَعِظُهُنَّ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { عَسَى رَبُّهُ إِنْ طَلَّقَكُنَّ أَنْ يُبْدِلَهُ أَزْوَاجًا خَيْرًا مِنْكُنَّ }

हमें [याह्या] ने बताया है कि हमें [हुमैद] ने [अनस] से बताया कि उन्होंने कहा; कि [उमर] ने कहा; "मैंने तीन चीजों में अपने रब की आज्ञा का पालन किया और मेरे रब ने तीन चीजों में मुझसे सहमति व्यक्त की; मैंने कहा, 'अल्लाह के रसूल, यदि आप मक़ाम इब्राहीम को प्रार्थना का स्थान बनाते हैं,' तो अल्लाह ने आयत का खुलासा किया: "और मक़ाम इब्राहीम का एक हिस्सा प्रार्थना का स्थान बनाओ," मैंने कहा: 'अल्लाह के रसूल, वास्तव में आपके पास आने वाले लोग कुछ अच्छे हैं और कुछ बुरे हैं, यदि आपने उम्मततुल विश्वासियों (अल्लाह के रसूल की पत्नियों) को हिजाब पहनने का आदेश दिया,' फिर हिजाब के बारे में आयत उतरी और मुझे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अपनी कई पत्नियों के प्रति क्रोध के बारे में खबर मिली," उन्होंने कहा; "इसलिए मैंने उम्मततुल मुकम्मिनिन की जांच की, मैं उनसे मिला और मैंने उन्हें एक-एक करके जांचा; "अल्लाह की कसम, तुम (अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति अपने कामों से) रुक जाओ, वरना अगर नहीं, तो अल्लाह ज़रूर अपने रसूल के बदले तुम्हारी जगह तुमसे बेहतर किसी को ले आएगा।" उन्होंने कहा; "तो मैं उनकी एक पत्नी से मिला, तो उन्होंने कहा; "ऐ उमर, क्या रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ से उनकी पत्नियों के लिए कोई सलाह नहीं थी जब तक कि तुमने उन्हें सलाह नहीं दी?" फिर अल्लाह ने आयत उतारी: "अगर पैगंबर तुम्हें तलाक दे दें, तो शायद उनका रब उनकी जगह तुमसे बेहतर पत्नी ले आए जो आज्ञा मानने वाली, ईमान लाने वाली, आज्ञा मानने वाली, तौबा करने वाली हो" (QS अत तहरीम आयत 5)।

स्वर्ग में वस्त्र पाने की आशा रखने वालों के लिए रेशमी वस्त्र पहनने पर प्रतिबन्ध

इमाम अहमद : 243

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ شُعْبَةَ حَدَّثَنِي أَبُو ذِبْيَانَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُ لَا تُلْبِسُوا نِسَاءَكُمْ الْحَرِيرَ فَإِنِّي سَمِعْتُ عُمَرَ يُحَدِّثُ يَقُولُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ مَنْ لَبِسَ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا لَمْ يَلْبَسْهُ فِي الْآخِرَةِ و قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الزُّبَيْرِ مِنْ عِنْدِهِ وَمَنْ لَمْ يَلْبَسْهُ فِي الْآخِرَةِ لَمْ يَدْخُلْ الْجَنَّةَ قَالَ اللَّهُ تَعَالَى { وَلِبَاسُهُمْ فِيهَا حَرِيرٌ }

हमें [याह्या] ने [शुबा] से बताया है। मुझे [अबू ज़िब्यान] बताया है। मैंने [अब्दुल्ला बिन अज़ ज़ुबैर] को कहते सुना; अपनी बीवियों को रेशमी कपड़ा मत पहनाओ, क्योंकि मैंने एक बार [उमर] को एक कहानी सुनाते हुए सुना था, उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, कि उन्होंने कहा: "जो कोई इस दुनिया में रेशम पहनता है, वह उसे आख़िरत में नहीं पहनेगा," और अब्दुल्ला बिन अज़ ज़ुबैर ने खुद के अनुसार कहा; "और जो कोई इसे आख़िरत में नहीं पहनता वह जन्नत में दाखिल नहीं होगा, क्योंकि अल्लाह तआला कहते हैं: "और उनके कपड़े वहाँ (आख़िरत में) रेशम के होंगे।" (QS अल हज्ज आयत: 23)

उमर ने मौत से पहले शहादत की सजा की अहमियत बताई

इमाम अहमद : 244

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا عَامِرٌ و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ رَجُلٍ عَنِ الشَّعْبِيِّ قَالَ مَرَّ عُمَرُ بِطَلْحَةَ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ قَالَ مَرَّ عُمَرُ بِطَلْحَةَ فَرَآهُ مُهْتَمًّا قَالَ لَعَلَّكَ سَاءَكَ إِمَارَةُ ابْنِ عَمِّكَ قَالَ يَعْنِي أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ لَا وَلَكِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنِّي لَأَعْلَمُ كَلِمَةً لَا يَقُولُهَا الرَّجُلُ عِنْدَ مَوْتِهِ إِلَّا كَانَتْ نُورًا فِي صَحِيفَتِهِ أَوْ وَجَدَ لَهَا رَوْحًا عِنْدَ الْمَوْتِ قَالَ عُمَرُ أَنَا أُخْبِرُكَ بِهَا هِيَ الْكَلِمَةُ الَّتِي أَرَادَ بِهَا عَمَّهُ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ قَالَ فَكَأَنَّمَا كُشِفَ عَنِّي غِطَاءٌ قَالَ صَدَقْتَ لَوْ عَلِمَ كَلِمَةً هِيَ أَفْضَلُ مِنْهَا لَأَمَرَهُ بِهَا

हमें [याह्या] ने [इस्माइल] से बताया है, हमें [अमीर] से बताया है और हमें [मुहम्मद बिन उबैद] ने बताया है, हमें [इस्माइल बिन अबू खालिद] ने [एक आदमी] से [अश शाबी] से बताया है, उन्होंने कहा; उमर तल्हा के पास से गुजरे। फिर स्याबी ने इस हदीस का अर्थ उल्लेख किया, स्याबी ने कहा; उमर तल्हा के पास से गुजरे तो उन्होंने उसे ध्यान से देखा, इसलिए [उमर] ने कहा; "क्या ऐसा हो सकता है कि आपके चाचा के बेटे के नेतृत्व ने आपके साथ अन्याय किया है?" उन्होंने कहा कि उनका मतलब अबू बकर से था, तो उन्होंने [(थलहा)] उत्तर दिया; "नहीं, लेकिन मैंने एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते सुना था: "सच में, मैं एक ऐसा वाक्य जानता हूँ, जिसे कोई भी अपनी मौत से पहले नहीं बोलता, सिवाय इसके कि उसके पन्ने पर रोशनी हो, या उसे मौत से पहले आराम मिले।" उमर ने कहा; "मैं तुम्हें वह वाक्य बताता हूँ, यानी वह वाक्य जो वह अपने चाचा से चाहता था, कि अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं है।" तल्हा ने कहा; "ऐसा है जैसे मेरी तरफ से कोई पर्दा उतरा हो," उमर ने कहा; "तुम सही हो, अगर उसे कोई ऐसा वाक्य पता होता जो उससे बेहतर होता, तो वह उस वाक्य का हुक्म देता।"

उमर ने थवाफ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का उदाहरण बताया

इमाम अहमद : 245

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ بْنُ عَتِيقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَابَيْهِ عَنْ يَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ قَالَ طُفْتُ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَلَمَّا كُنْتُ عِنْدَ الرُّكْنِ الَّذِي يَلِي الْبَابَ مِمَّا يَلِي الْحَجَرَ أَخَذْتُ بِيَدِهِ لِيَسْتَلِمَ فَقَالَ أَمَا طُفْتَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ بَلَى قَالَ فَهَلْ رَأَيْتَهُ يَسْتَلِمُهُ قُلْتُ لَا قَالَ فَانْفُذْ عَنْكَ فَإِنَّ لَكَ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةً حَسَنَةً

हमें [याह्या] ने [इब्न जुराइज] से बताया है, मुझे [सुलेमान बिन अतीक] ने [अब्दुल्ला बिन बबैह] से [याला बिन उमैया] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [उमर बिन अल खत्थब] के साथ तवाफ़ किया, और जब मैं रुकुन (कोने) में था जो दरवाजे (काबा) से जुड़ता है, जो हजर (असवद) से जुड़ता है, तो मैंने उसे छूने के लिए उसका हाथ खींचा, लेकिन उसने कहा; "क्या तुमने कभी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ तवाफ़ नहीं किया?" मैंने जवाब दिया; "हाँ (मैंने किया है)," उमर ने कहा; "तो क्या आपने उसे (कोने) को छूते देखा?" मैंने उत्तर दिया; "नहीं," उमर ने कहा; "तो इसका अभ्यास करो, क्योंकि वास्तव में अल्लाह के रसूल में तुम्हारे लिए एक अच्छा उदाहरण है।"

पैगंबर की सुन्नत के अनुसार एक ही समय में उमराह और हज के लिए सिफारिशें

इमाम अहमद : 246

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنِ الْأَعْمَشِ حَدَّثَنَا شَقِيقٌ حَدَّثَنِي الصُّبَيُّ بْنُ مَعْبَدٍ وَكَانَ رَجُلًا مِنْ بَنِي تَغْلِبَ قَالَ كُنْتُ نَصْرَانِيًّا فَأَسْلَمْتُ فَاجْتَهَدْتُ فَلَمْ آلُ فَأَهْلَلْتُ بِحَجَّةٍ وَعُمْرَةٍ فَمَرَرْتُ بِالْعُذَيْبِ عَلَى سَلْمَانَ بْنِ رَبِيعَةَ وَزَيْدِ بْنِ صُوحَانَ فَقَالَ أَحَدُهُمَا أَبِهِمَا جَمِيعًا فَقَالَ لَهُ صَاحِبُهُ دَعْهُ فَلَهُوَ أَضَلُّ مِنْ بَعِيرِهِ قَالَ فَكَأَنَّمَا بَعِيرِي عَلَى عُنُقِي فَأَتَيْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ لِي عُمَرُ إِنَّهُمَا لَمْ يَقُولَا شَيْئًا هُدِيتَ لِسُنَّةِ نَبِيِّكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमें [याह्या] ने [अल अमासी] से बताया है, हमें [स्याक़िक] ने बताया है, मुझे [अश शुबे बिन मबाद] ने बताया है कि वह एक आदमी है जो बनी तग़लिब से है, उसने कहा; पहले मैं एक ईसाई था फिर इस्लाम में परिवर्तित हो गया, फिर मैंने इज्तिहाद किया और मैं भटका नहीं, फिर मैंने उमराह और हज करने का इरादा किया, मैं उदज़ैब में सलमान बिन रबीआ और ज़ैद बिन शुहान के पास से गुज़रा, उनमें से एक ने कहा; "क्या उसने दोनों (उमरा और हज) एक ही समय में किए?" उसके दोस्त ने तब जवाब दिया; "उसे रहने दो, क्योंकि वह वास्तव में ऊंट से भी ज़्यादा भटका हुआ है।" शुबे ने कहा; "ऐसा था जैसे मेरा ऊंट मेरी गर्दन के पीछे था, इसलिए मैं [उमर] के पास आया और उसे घटना के बारे में बताया," उमर ने मुझसे कहा; "वास्तव में उन दोनों ने कुछ नहीं कहा, तुम्हें अपने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत दिखाई गई है।"

पैगंबर शल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम का उमर को हराम मस्जिद में नदजर की पूर्ति का आदेश

इमाम अहमद : 247

حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي نَذَرْتُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ أَنْ أَعْتَكِفَ فِي الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ لَيْلَةً فَقَالَ لَهُ فَأَوْفِ بِنَذْرِكَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ صُبَيِّ بْنِ مَعْبَدٍ التَّغْلِبِيِّ قَالَ كُنْتُ حَدِيثَ عَهْدٍ بِنَصْرَانِيَّةٍ فَأَرَدْتُ الْجِهَادَ أَوْ الْحَجَّ فَأَتَيْتُ رَجُلًا مِنْ قَوْمِي يُقَالُ لَهُ هُدَيْمٌ فَسَأَلْتُهُ فَأَمَرَنِي بِالْحَجِّ فَقَرَنْتُ بَيْنَ الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ فَذَكَرَهُ

हमें [याह्या] ने [उबैदिल्लाह] से बताया है, मुझे [नफी] ने [इब्न उमर] से बताया है, [उमर] से कि उसने कहा; "अल्लाह के रसूल, मैंने असल में नासमझी के समय में एक रात ग्रैंड मस्जिद में एतिकाफ़ करने की मन्नत मानी थी," उन्होंने जवाब दिया; "अपनी मन्नतें पूरी करो।" हमें 'अब्दुर्रज्जाक' ने बताया है, उन्होंने कहा; हमें मंसूर से सुफ़यान, अबू वाइल से शुबै बिन मबाद से बताया है। तग़लीबी में उन्होंने कहा; "मैंने अभी-अभी ईसाई धर्म से इस्लाम कबूल किया था, फिर मैं जिहाद करना चाहता था या हज करना चाहता था, इसलिए मैं अपने एक बंदे के पास गया जिसका नाम हुदैम था, मैंने उससे पूछा और उसने मुझे हज करने के लिए कहा, मैंने हज और उमराह को मिला दिया।" फिर उसने इसका ज़िक्र किया।

उमर ने यात्रियों के लिए दो रकात नमाज़ों और छुट्टियों की नमाज़ों के बारे में बताया

इमाम अहमद : 248

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ زُبَيْدٍ الْإِيَامِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ صَلَاةُ السَّفَرِ رَكْعَتَانِ وَصَلَاةُ الْأَضْحَى رَكْعَتَانِ وَصَلَاةُ الْفِطْرِ رَكْعَتَانِ وَصَلَاةُ الْجُمُعَةِ رَكْعَتَانِ تَمَامٌ غَيْرُ قَصْرٍ عَلَى لِسَانِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ سُفْيَانُ وَقَالَ زُبَيْدٌ مَرَّةً أُرَاهُ عَنْ عُمَرَ قَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَلَى غَيْرِ وَجْهِ الشَّكِّ و قَالَ يَزِيدُ يَعْنِي ابْنَ هَارُونَ ابْنُ أَبِي لَيْلَى قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ

हमें बताया है [वाकी'] हमें बताया है [सुफ़यान] और [अब्दुर्रहमान] [सुफ़यान] से [ज़ुबैद अल इयामी] से [अब्दुर्रहमान बिन अबुल लैला] से [उमर] से उन्होंने कहा; "सफ़र में नमाज़ दो रकाअत है, ऐदुल अज़हा की नमाज़ दो रकाअत है, ईदुल फ़ित्र की नमाज़ दो रकाअत है और जुमे की नमाज़ दो बराबर रकाअत है बिना क़शर के (संक्षेप में) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शब्दों के आधार पर।" सुफ़यान ने कहा; और एक बार ज़ुबैद ने कहा; मैंने इसे उमर से देखा। अब्दुर्रहमान ने कहा; "बिना किसी शक के," और [यज़ीद बिन हारून] ने कहा; इब्न अबू लैला ने कहा; "मैंने उमर को सुना।"

दी गई भिक्षा को वापस खरीदने पर प्रतिबन्ध

इमाम अहमद : 249

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ وَجَدَ فَرَسًا كَانَ حَمَلَ عَلَيْهَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ تُبَاعُ فِي السُّوقِ فَأَرَادَ أَنْ يَشْتَرِيَهَا فَسَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَهَاهُ وَقَالَ لَا تَعُودَنَّ فِي صَدَقَتِكَ

हमें [वाकी'] ने बताया है कि हमें [हिस्याम बिन साद] ने [ज़ैद बिन असलम] से [अपने पिता] से [उमर] से बताया है कि उन्हें एक घोड़ा मिला जो अल्लाह के मार्ग में लड़ने के लिए बाजार में बिक्री के लिए इस्तेमाल किया गया था, फिर उमर इसे खरीदना चाहते थे, उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा और उन्होंने इसे मना करते हुए कहा: "अपने दान वापस न लें।"

उमर ने एक पढ़े हुए पत्र के माध्यम से खिलाफत अबू बकर की इच्छा से अवगत कराया

इमाम अहमद : 250

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنِ ابْنِ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسٍ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَبِيَدِهِ عَسِيبُ نَخْلٍ وَهُوَ يُجْلِسُ النَّاسَ يَقُولُ اسْمَعُوا لِقَوْلِ خَلِيفَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ مَوْلًى لِأَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يُقَالُ لَهُ شَدِيدٌ بِصَحِيفَةٍ فَقَرَأَهَا عَلَى النَّاسِ فَقَالَ يَقُولُ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اسْمَعُوا وَأَطِيعُوا لِمَا فِي هَذِهِ الصَّحِيفَةِ فَوَاللَّهِ مَا أَلَوْتُكُمْ قَالَ قَيْسٌ فَرَأَيْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَعْدَ ذَلِكَ عَلَى الْمِنْبَرِ

उन्होंने हमें [इब्न अबू खालिद] से [क़ैस] से [वाकी] बताया; मैंने [उमर] को देखा जो खजूर का एक पत्ता पकड़े हुए थे, उन्होंने लोगों को इकट्ठा किया और कहा; "खलीफ़ा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बातें सुनो," फिर अबू बक्र का गुलाम स्यादीद एक चिट्ठी लेकर आया और उसने लोगों को पढ़कर सुनाया, उसने कहा; अबू बक्र ने कहा; "सुनो और इस चिट्ठी में जो है उसे मानो, फिर अल्लाह की कसम मैं तुम्हें गुमराह नहीं करूँगा।" क़ैस ने कहा; "मैंने उसके बाद उमर को मिम्बर पर देखा।"

नुकसान को रोकने के प्रयास के रूप में कुछ कंटेनरों में अंगूरों के भंडारण पर प्रतिबंध

इमाम अहमद : 251

حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ سَلَمَةَ عَنْ عِمْرَانَ السُّلَمِيِّ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عَنْ النَّبِيذِ فَقَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ وَالدُّبَّاءِ فَلَقِيتُ ابْنَ عُمَرَ فَسَأَلْتُهُ فَأَخْبَرَنِي فِيمَا أَظُنُّ عَنْ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ وَالدُّبَّاءِ شَكَّ سُفْيَانُ قَالَ فَلَقِيتُ ابْنَ الزُّبَيْرِ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ وَالدُّبَّاءِ

हमें [अल मुअम्मल] ने बताया है, हमें [सुफ़यान] ने [सलमा] से [इमरान अस सुलामी] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने [इब्न अब्बास] से वाइन प्रेस के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल जर्र और अद दुब्बा में वाइन (जो स्टोर की गई थी) को चखने से मना किया है, फिर मैं [इब्न उमर] के पास गया और उनसे पूछा तो उन्होंने मुझे बताया, जैसा कि मुझे याद है उन्होंने [उमर] से कहा था कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल जर्र और अद दुब्बा में वाइन प्रेस करने से मना किया है, - सुफ़यान को शक हुआ - फिर उन्होंने (इमरान) कहा; "फिर मैं [इब्न अज़ ज़ुबैर] से मिला और उनसे पूछा और उन्होंने जवाब दिया; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल जर्र और अद दुब्बा में वाइन प्रेस करने से मना किया है।"

उमर ने बैतुल मक़दिस में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरह प्रार्थना करना चुना

इमाम अहमद : 252

حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ أَبِي سِنَانٍ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ آدَمَ وَأَبِي مَرْيَمَ وَأَبِي شُعَيْبٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كَانَ بِالْجَابِيَةِ فَذَكَرَ فَتْحَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ قَالَ فَقَالَ أَبُو سَلَمَةَ فَحَدَّثَنِي أَبُو سِنَانٍ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ آدَمَ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ لِكَعْبٍ أَيْنَ تُرَى أَنْ أُصَلِّيَ فَقَالَ إِنْ أَخَذْتَ عَنِّي صَلَّيْتَ خَلْفَ الصَّخْرَةِ فَكَانَتْ الْقُدْسُ كُلُّهَا بَيْنَ يَدَيْكَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ضَاهَيْتَ الْيَهُودِيَّةَ لَا وَلَكِنْ أُصَلِّي حَيْثُ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَتَقَدَّمَ إِلَى الْقِبْلَةِ فَصَلَّى ثُمَّ جَاءَ فَبَسَطَ رِدَاءَهُ فَكَنَسَ الْكُنَاسَةَ فِي رِدَائِهِ وَكَنَسَ النَّاسُ

हमें [असवद बिन 'अमीर] ने [हम्मद बिन सलमा] को [अबू सिनान] से ['उबैद बिन आदम] और [अबू मरियम] और [अबू स्यू'एब] से बताया है कि जब [उमर बिन ख़त्थाब] जबिया में थे, तो उन्होंने बैतुल मक्दिस शहर की आज़ादी का ज़िक्र किया। [असवद] ने कहा; [अबू सलमा] ने कहा; मुझे [अबू सिनान] ने ['उबैद बिन आदम] से बताया है उसने कहा; मैंने [उमर बिन अल ख़त्थाब] को का'ब से पूछते सुना; "तुम क्या सोचते हो कि मैं कहाँ नमाज़ पढ़ता हूँ?" का'ब ने जवाब दिया; "अगर तुम मेरी राय मान लो, तो एक बड़ी चट्टान के पीछे नमाज़ पढ़ो, फिर सारा अल कुद्स तुम्हारे सामने होगा," उमर ने कहा; "तुम यहूदियों जैसे हो, नहीं, लेकिन मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरह नमाज़ पढ़ूंगा।" वह आगे आए और क़िबला की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ी, उन्होंने अपनी शॉल बिछाई और उससे झाड़ू लगाई, फिर लोग भी उनके पीछे-पीछे आए और उन्होंने भी झाड़ू लगाई।"

कलालाह के बारे में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जवाब एक हजार ऊँटों से ज़्यादा कीमती है

इमाम अहमद : 253

حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا مَالِكٌ يَعْنِي ابْنَ مِغْوَلٍ قَالَ سَمِعْتُ الْفُضَيْلَ بْنَ عَمْرٍو عَنْ إِبْرَاهِيمَ النَّخَعِيِّ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْكَلَالَةِ فَقَالَ تَكْفِيكَ آيَةُ الصَّيْفِ فَقَالَ لَأَنْ أَكُونَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْهَا أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ أَنْ يَكُونَ لِي حُمْرُ النَّعَمِ

हमें बताया है [अबू नुआइम] हमें बताया है [मलिक -इब्न मिघवाल-] उन्होंने कहा; मैंने [अल फुदलैल बिन 'अमरू] को [इब्राहिम अन नखाई] से [उमर] से सुना, उन्होंने कहा; मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कलालह के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया: "अश शैफ की आयत तुम्हारे लिए काफी है।" फिर उमर ने कहा; "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कलालह के बारे में पूछा, यह मेरे लिए एक हज़ार ऊँट होने से बेहतर है।"

पैगंबर शल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम का उमर को जुनुब के दौरान वुजू करने का आदेश

इमाम अहमद : 254

حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ أَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِنَّهُ تُصِيبُنِي الْجَنَابَةُ فَأَمَرَهُ أَنْ يَغْسِلَ ذَكَرَهُ وَيَتَوَضَّأَ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ

[अबू अहमद मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह] ने हमें [सुफ़यान] ने [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [इब्न उमर] से [उमर] से बताया है कि वह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए और कहा: "वास्तव में मैं जुनूब हूँ।" तो आपने उन्हें अपने गुप्तांग धोने और नमाज़ के लिए वज़ू करने का आदेश दिया।

परिवार के विलाप के कारण शव को यातना दी गई

इमाम अहमद : 255

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ قَزَعَةَ قَالَ قُلْتُ لِابْنِ عُمَرَ يُعَذِّبُ اللَّهُ هَذَا الْمَيِّتَ بِبُكَاءِ هَذَا الْحَيِّ فَقَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا كَذَبْتُ عَلَى عُمَرَ وَلَا كَذَبَ عُمَرُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

उन्होंने कहा, "अफ़्फ़ान ने हमें बताया है, क़तादा से हम्माम को बताया है, क़ज़ा से मैंने पूछा, "क्या अल्लाह ने इस लाश को उसके बचे हुए परिवार की चीखों की वजह से सज़ा दी?" उन्होंने जवाब दिया, "यह बात मुझे रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तरफ़ से बताई गई है और न मैंने उमर से झूठ बोला और न ही उमर ने रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से झूठ बोला।"

अब्दुल्ला बिन मसूद के कुरान पढ़ने पर पैगंबर शल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम की प्रशंसा

इमाम अहमद : 256

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ الْقَرْثَعِ عَنِ قَيْسٍ أَوْ ابْنِ قَيْسٍ رَجُلٍ مِنْ جُعْفِيٍّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ قَالَ مَرَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا مَعَهُ وَأَبُو بَكْرٍ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَهُوَ يَقْرَأُ فَقَامَ فَسَمِعَ قِرَاءَتَهُ ثُمَّ رَكَعَ عَبْدُ اللَّهِ وَسَجَدَ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَلْ تُعْطَهْ سَلْ تُعْطَهْ قَالَ ثُمَّ مَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ غَضًّا كَمَا أُنْزِلَ فَلْيَقْرَأْهُ مِنْ ابْنِ أُمِّ عَبْدٍ قَالَ فَأَدْلَجْتُ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ لِأُبَشِّرَهُ بِمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَلَمَّا ضَرَبْتُ الْبَابَ أَوْ قَالَ لَمَّا سَمِعَ صَوْتِي قَالَ مَا جَاءَ بِكَ هَذِهِ السَّاعَةَ قُلْتُ جِئْتُ لِأُبَشِّرَكَ بِمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَدْ سَبَقَكَ أَبُو بَكْرٍ قُلْتُ إِنْ يَفْعَلْ فَإِنَّهُ سَبَّاقٌ بِالْخَيْرَاتِ مَا اسْتَبَقْنَا خَيْرًا قَطُّ إِلَّا سَبَقَنَا إِلَيْهَا أَبُو بَكْرٍ

हमें बताया है ['अफ़ान] हमें बताया है [अब्दुल वाहिद बिन ज़ियाद] हमें बताया है [अल हसन बिन 'उबैदिल्लाह] हमें बताया है [इब्राहिम] ['अलकामा] से [अल क़र्तसा'] से [क़ैस] या इब्नु क़ैस से एक आदमी जुफ़ी से आया, [उमर बिन अल ख़त्थाब] से उसने कहा; रसूलुल्लाह और अबू बकर मेरे साथ थे, फिर हम अब्दुल्ला इब्न मसूद के पास से गुज़रे जो (कुरान) पढ़ रहे थे, फिर वह खड़े हुए और पढ़ने को सुनने लगे, फिर अब्दुल्ला ने झुककर सजदा किया, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मांगो और तुम्हें दिया जाएगा, मांगो और तुम्हें दिया जाएगा।" उमर ने कहा; फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पास से गुज़रे और कहा: "जो कोई भी कुरान को ताज़ा पढ़ना चाहता है जैसा कि इसे प्रकट किया गया था, तो इसे इब्न उम्मी 'अब्द ने पढ़ा था।" उमर ने कहा; "फिर मैंने अब्दुल्लाह बिन मसूद से मिलकर उन्हें रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कही बातों के बारे में अच्छी खबर देने का सोचा, उमर ने कहा; "जब मैंने दरवाज़ा खटखटाया," या उमर ने कहा; "जब उन्होंने मेरी आवाज़ सुनी, तो उन्होंने पूछा; "आखिर तुम इस समय क्यों आए हो?" मैंने जवाब दिया; "मैं तुम्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की कही बातों के बारे में अच्छी खबर देने आया हूँ," उन्होंने कहा; "तुमसे पहले अबू बकर आए थे।" मैंने कहा; "अगर उन्होंने ऐसा किया तो यह सही होगा, क्योंकि वह एक ऐसे इंसान हैं जो हमेशा अच्छाई में सबसे आगे रहते हैं, हम अच्छाई में उनसे मुकाबला नहीं कर रहे हैं लेकिन यकीनन अबू बकर हमसे आगे निकल गए हैं।"

पैगंबर शल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उमर को उवैस अल-क़रनी से माफ़ी मांगने की सलाह दी

इमाम अहमद : 257

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ سَعِيدٍ الْجُرَيْرِيِّ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ عَنْ أُسَيْرِ بْنِ جَابِرٍ قَالَ لَمَّا أَقْبَلَ أَهْلُ الْيَمَنِ جَعَلَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَسْتَقْرِي الرِّفَاقَ فَيَقُولُ هَلْ فِيكُمْ أَحَدٌ مِنْ قَرَنٍ حَتَّى أَتَى عَلَى قَرَنٍ فَقَالَ مَنْ أَنْتُمْ قَالُوا قَرَنٌ فَوَقَعَ زِمَامُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَوْ زِمَامُ أُوَيْسٍ فَنَاوَلَهُ أَحَدُهُمَا الْآخَرَ فَعَرَفَهُ فَقَالَ عُمَرُ مَا اسْمُكَ قَالَ أَنَا أُوَيْسٌ فَقَالَ هَلْ لَكَ وَالِدَةٌ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَهَلْ كَانَ بِكَ مِنْ الْبَيَاضِ شَيْءٌ قَالَ نَعَمْ فَدَعَوْتُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ فَأَذْهَبَهُ عَنِّي إِلَّا مَوْضِعَ الدِّرْهَمِ مِنْ سُرَّتِي لِأَذْكُرَ بِهِ رَبِّي قَالَ لَهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اسْتَغْفِرْ لِي قَالَ أَنْتَ أَحَقُّ أَنْ تَسْتَغْفِرَ لِي أَنْتَ صَاحِبُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ خَيْرَ التَّابِعِينَ رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ أُوَيْسٌ وَلَهُ وَالِدَةٌ وَكَانَ بِهِ بَيَاضٌ فَدَعَا اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ فَأَذْهَبَهُ عَنْهُ إِلَّا مَوْضِعَ الدِّرْهَمِ فِي سُرَّتِهِ فَاسْتَغْفَرَ لَهُ ثُمَّ دَخَلَ فِي غِمَارِ النَّاسِ فَلَمْ يُدْرَ أَيْنَ وَقَعَ قَالَ فَقَدِمَ الْكُوفَةَ قَالَ وَكُنَّا نَجْتَمِعُ فِي حَلْقَةٍ فَنَذْكُرُ اللَّهَ وَكَانَ يَجْلِسُ مَعَنَا فَكَانَ إِذَا ذَكَرَ هُوَ وَقَعَ حَدِيثُهُ مِنْ قُلُوبِنَا مَوْقِعًا لَا يَقَعُ حَدِيثُ غَيْرِهِ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ أَبِي الشَّوَارِبِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنِ الْقَرْثَعِ عَنْ قَيْسٍ أَوْ ابْنِ قَيْسٍ رَجُلٍ مِنْ جُعْفِيٍّ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ عَفَّانَ

हमें बताया है ['अफ़्फ़ान] हमें बताया है [हम्मद बिन सलामा] [सईद अल जुरैरी] से [अबू नदलरा] से [उसैर बिन जाबिर] से उन्होंने कहा; जब यमन के लोग आए, तो उमर ने ग्रुप को देखा और पूछा, क्या तुम में से कोई क़रान (मुराद कबीलों में से एक) से है?" फिर वह क़रान से आए लोगों के पास गया और पूछा; "तुम कौन हो?" उन्होंने जवाब दिया; "क़रान के लोग।" फिर उमर या उवैस की लगाम गिर गई और दोनों में से एक (उमर या उवैस) ने दूसरे को पहचान लिया, उमर ने पूछा; "तुम्हारा नाम क्या है?" उसने जवाब दिया; "मैं उवैस हूँ।" Umar bertanya; "Apakah kamu mempunyai seorang ibu?" Dia menjawab; "Ya." Umar bertanya lagi; "Apakah kamu pernah mengalami penyakit belang?" Dia menjawab; "Ya, dan aku memohon kepada Allah 'azza wajalla, kemudian Allah menghilangkannya dariku, kecuali masih tersisa sebesar uang dirham di bagian pusarku sebagai pengingat kepada Rabbku." Kemudian Umar berkata kepadanya; "Mohonkan ampun untukku." Namun dia menjawab; "Kamu orang yang lebih patut memohonkan ampun untukku karena kamu telah menyertai Rasulullah shallallahu 'alaihi wassallam." तो [उमर] ने कहा; "सच में, मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "सच में, ताबीन की पीढ़ी में सबसे अच्छा आदमी एक आदमी था जिसका नाम उवैस था, उसकी एक माँ थी और एक बार उसे एक दाग की बीमारी हुई, फिर उसने अल्लाह से पूछा, और अल्लाह ने उसे ठीक कर दिया सिवाय इसके कि उसकी नाभि में अभी भी एक दिरहम बाकी था।" आखिर में उन्होंने उमर के लिए माफ़ी मांगी, फिर भीड़ में घुस गए ताकि उन्हें पता न चले कि वह कहाँ हैं।" उसैर ने कहा; "फिर वह कूफ़ा पहुँचे, जब हम इकट्ठा होकर अल्लाह का ज़िक्र कर रहे थे, तो वह हमारे साथ बैठे, और जब उन्होंने बात की तो उनकी बातें हमारे दिलों को छू गईं, जो दूसरे लोगों की बातों से अलग थीं।" हसन बिन 'उबैदिल्लाह, इब्राहिम से क़र्तसा' से क़ैस या इब्नु क़ैस, जुफ़ी से एक आदमी, उमर बिन अल ख़तथब से, फिर उन्होंने एक हदीस का ज़िक्र किया जो अफ़्फ़ान हदीस जैसी थी।

मृत बालकों की प्रतीक्षा करने के निषेध के बारे में पैगंबर की चेतावनी

इमाम अहमद : 258

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ حَدَّثَنَا ثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لَمَّا عَوَّلَتْ عَلَيْهِ حَفْصَةُ فَقَالَ يَا حَفْصَةُ أَمَا سَمِعْتِ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْمُعَوَّلُ عَلَيْهِ يُعَذَّبُ قَالَ وَعَوَّلَ صُهَيْبٌ فَقَالَ عُمَرُ يَا صُهَيْبُ أَمَا عَلِمْتَ أَنَّ الْمُعَوَّلَ عَلَيْهِ يُعَذَّبُ

हमें बताया है [अफ़्फ़ान] ने हमें बताया है [हम्मद बिन सलामा] ने हमें [त्साबित] [अनस] से बताया है कि [उमर बिन अल ख़तथब] ने हफ़्शा से कहा जब हफ़्शा उस पर फूट-फूट कर रोया; “ऐ हफ़्शा, क्या तुमने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते नहीं सुना; “जिस व्यक्ति के लिए दुख मनाया जाता है, उसे यातना दी जाएगी।” उन्होंने कहा; और शुहैब ने भी दुख जताया, फिर उमर ने कहा; “ऐ शुहैब, क्या तुम नहीं जानते कि जिस व्यक्ति के लिए दुख मनाया जाता है, उसे यातना दी जाएगी?”

दुनिया में रेशम पहनने पर प्रतिबन्ध, क्योंकि इसे परलोक में पहनना पड़ता है

इमाम अहमद : 259

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ حَدَّثَنَا يَزِيدُ الرِّشْكُ عَنْ مُعَاذَةَ عَنْ أُمِّ عَمْرٍو ابْنَةِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّهَا سَمِعَتْ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ يُحَدِّثُ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْطُبُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ لَبِسَ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا فَلَا يُكْسَاهُ فِي الْآخِرَةِ

हमें [अफ्फान] ने बताया है, हमें [अब्दुल वाहिद] ने हमें [यज़ीद अर रिसिक] ने [मुअज़्ज़ा] से [उम्मू अमरू] अब्दुल्ला की बेटी से बताया है, कि उसने [अब्दुल्ला बिन अज़ ज़ुबैर] को कहते सुना, कि उसने [उमर] को उपदेश देते और कहते सुना; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी इस दुनिया में रेशम के कपड़े पहनता है, उसे परलोक में रेशम के कपड़े नहीं पहनाए जाएंगे।"

भोर और एएसआर के बाद प्रार्थना पर रोक

इमाम अहमद : 260

حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ حَدَّثَنَا أَبُو الْعَالِيَةِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَدَّثَنِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ فِيهِمْ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ عَفَّانُ مَرَّةً شَهِدَ عِنْدِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ وَأَرْضَاهُمْ عِنْدِي عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا صَلَاةَ بَعْدَ صَلَاتَيْنِ بَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا أَبَانُ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ بِمِثْلِ هَذَا شَهِدَ عِنْدِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ

हमें बताया है [अफ्फान] ने हमें बताया है [हम्माम] ने हमें बताया है [क़तादा] ने हमें [अबुल अलियाह] से [इब्न अब्बास] से बताया है, मुझे कुछ ऐसे साथियों के बारे में बताया है जो प्रसन्न हैं, उनमें से उमर भी हैं। एक अन्य अवसर पर 'अफ्फान ने कहा; मेरे सामने कुछ ऐसे लोगों की गवाही दी है जो प्रसन्न हैं, और मैं सबसे अधिक प्रसन्न हूं [उमर], उन्होंने गवाही दी कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है; "दो नमाज़ों के बाद कोई नमाज़ नहीं है, अर्थात् फ़ज्र की नमाज़ के बाद सूरज उगने तक और अस्र की नमाज़ के बाद सूरज डूबने तक।" हमें बताया है [अफ्फान] ने हमें बताया है [अबान] ने हमें [अबुल अलियाह] से [इब्न अब्बास] से [क़तादा] इस तरह की हदीस के साथ बताया है; "मेरे सामने कुछ ऐसे लोगों की गवाही दी है जो प्रसन्न हैं।"