Imam Ahmad : 221
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنِي سَيَّارٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ أَنَّ رَجُلًا كَانَ نَصْرَانِيًّا يُقَالُ لَهُ الصُّبَيُّ بْنُ مَعْبَدٍ أَسْلَمَ فَأَرَادَ الْجِهَادَ فَقِيلَ لَهُ ابْدَأْ بِالْحَجِّ فَأَتَى الْأَشْعَرِيَّ فَأَمَرَهُ أَنْ يُهِلَّ بِالْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ جَمِيعًا فَفَعَلَ فَبَيْنَمَا هُوَ يُلَبِّي إِذْ مَرَّ يَزِيدُ بْنُ صُوحَانَ وَسَلْمَانُ بْنُ رَبِيعَةَ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ لَهَذَا أَضَلُّ مِنْ بَعِيرِ أَهْلِهِ فَسَمِعَهَا الصُّبَيُّ فَكَبُرَ ذَلِكَ عَلَيْهِ فَلَمَّا قَدِمَ أَتَى عُمَرَ فَذَكَرَ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ هُدِيتَ لِسُنَّةِ نَبِيِّكَ قَالَ وَسَمِعْتُهُ مَرَّةً أُخْرَى يَقُولُ وُفِّقْتَ لِسُنَّةِ نَبِيِّكَ
हमरा सब के कहलक अछि [हुसैम] हमरा [सय्यर] के [अबू व`इल] स सूचित केने छथि जे अश शुबै बिन मा'बाद नामक एकटा ईसाई आदमी इस्लाम अपना लेलक, तखन ओ जिहाद पर जेबाक लेल तैयार छल, तें ओकरा कहल गेल; 'पहिने हज करबा सँ शुरू करू,' तखन अल अस्यारी आबि हुनका आदेश देलनि जे एकहि संग हज आ उमरा करबाक इरादा राखू, तखन ओ केलक, जखन ओ ताल्बिया क' रहल छल -लफज 'लब्बैका' पढ़ि रहल छल- अचानक यजीद बिन शुहान आ सलमान बिन रबियाह आबि गेल, तखन दुनू मे सँ एक गोटे अपन मित्र केँ कहलक; 'सत्ते ई व्यक्ति अपन पालतू ऊँट सँ बेसी भटकल अछि' । शुबे सुनलनि जे ई हुनका लेल समस्या बनि गेलनि, तखन ओ [उमर] लग आबि हुनका घटनाक बारे मे कहलनि, तखन उमर हुनका कहलनि; 'अहाँ केँ अहाँक नबीक सुन्नत देखाओल गेल अछि,' अबू वा'इल कहलनि; आ दोसर बेर हम हुनका कहैत सुनलियनि; 'अहाँ अपन नबी के सुन्नत के अनुरूप छी'।
Imam Ahmad : 222
حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْمُرُ عِنْدَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اللَّيْلَةَ كَذَاكَ فِي الْأَمْرِ مِنْ أَمْرِ الْمُسْلِمِينَ وَأَنَا مَعَهُ
हमरा सब के [अबू मुअवियाह] हमरा सब के [अल अमासी] के [इब्राहिम] स [अलकामाह] स [उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सदिखन राति मे नहि सुतैत छलाह - चर्चा करैत - अबू बकर सँ मुसलमानक काज पर, आ हम हुनका संग छलहुँ'।
Imam Ahmad : 223
حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا عَاصِمٌ الْأَحْوَلُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَرْجِسَ قَالَ رَأَيْتُ الْأُصَيْلِعَ يَعْنِي عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يُقَبِّلُ الْحَجَرَ وَيَقُولُ إِنِّي لَأُقَبِّلُكَ وَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ لَا تَنْفَعُ وَلَا تَضُرُّ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ لَمْ أُقَبِّلْكَ
हमरा सब के [अबू मुअवियाह] हमरा सब के ['अशिम अल अहवाल] के [अब्दुल्लाह बिन सिरजिस] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम देखलहुँ जे अल उशैली' - अर्थात् [उमर] - कहैत काल कारी पाथर केँ चुम्मा लैत; 'सत्ते, हम तोरा चुम्मा लेलौं, आ हमरा बुझल अछि जे अहाँ मात्र एकटा एहन पाथर छी जे कोनो फायदा आ कोनो नुकसान नहि पहुँचबैत अछि, जँ हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ अहाँ केँ चुम्मा लैत नहि देखितहुँ त' हम निश्चित रूप सँ अहाँ केँ चुम्मा नहि लेने रहितहुँ'।
Imam Ahmad : 224
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيَرْقُدُ أَحَدُنَا وَهُوَ جُنُبٌ قَالَ نَعَمْ إِذَا تَوَضَّأَ
हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन नुमैर] हमरा सब के [उबैदुल्लाह] के [नफी'] स [इब्न उमर] स [उमर] स कहलक अछि, हम पूछैत छी; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की ककरो जुनुब के अवस्था में सुतना जायज छै?' ओ उत्तर देलनि: 'हँ, जखन अहाँ वजूद क' लेने छी'।
Imam Ahmad : 225
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ أَخْبَرَنَا هِشَامٌ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَقْبَلَ اللَّيْلُ وَأَدْبَرَ النَّهَارُ وَغَابَتْ الشَّمْسُ فَقَدْ أَفْطَرْتَ
हमरा सब के कहलक अछि [इब्न नुमैर] हमरा सब के [हिशाम] के [अपन पिता] स ['अशिम] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि; 'जखन राति भ' गेलै, आ दिन बीति गेलै आ सूर्यास्त भ' गेलै, तखन अहाँक व्रत तोड़बाक समय आबि गेलै'।
Imam Ahmad : 226
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ الْمَعْنَى عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ عَامِرِ بْنِ وَاثِلَةَ أَنَّ نَافِعَ بْنَ عَبْدِ الْحَارِثِ لَقِيَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بِعُسْفَانَ وَكَانَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اسْتَعْمَلَهُ عَلَى مَكَّةَ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَنْ اسْتَخْلَفْتَ عَلَى أَهْلِ الْوَادِي قَالَ اسْتَخْلَفْتُ عَلَيْهِمْ ابْنَ أَبْزَى قَالَ وَمَا ابْنُ أَبْزَى فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ مَوَالِينَا فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ اسْتَخْلَفْتَ عَلَيْهِمْ مَوْلًى فَقَالَ إِنَّهُ قَارِئٌ لِكِتَابِ اللَّهِ عَالِمٌ بِالْفَرَائِضِ قَاضٍ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَمَا إِنَّ نَبِيَّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ قَالَ إِنَّ اللَّهَ يَرْفَعُ بِهَذَا الْكِتَابِ أَقْوَامًا وَيَضَعُ بِهِ آخَرِينَ
हमरा सब क॑ बतैलकै [अबू कामिल] न॑ हमरा सब क॑ बतैलकै [इब्राहिम बिन स’द] न॑ हमरा सब क॑ [इब्नु शिहाब] क॑ बतैलकै आरू हमरा सब क॑ बतैलकै [अब्दुर्रज्जाक] न॑ [अबू अथ थुफैल अमीर बिन वतसिलाह] के अर्थ म॑ हमरा सब क॑ [मा’मर] क॑ [अज ज़ुहरी] स॑ बतैलकै कि नाफी’ बिन अब्दुल हरिथ [उमर बिन अल खथथब] स॑ 1990 म॑ मिललऽ छेलै उस्फान, आ उमर हुनका मक्का के गवर्नर नियुक्त केलनि, तखन उमर हुनका कहलखिन; 'उपत्यक लोकक लेल केकरा नेता नियुक्त करैत छी ?' ओ उत्तर देलथिन; 'हम हुनका सभक लेल इब्न अबजा नियुक्त केने रही'। उमर पुछलकै; 'इब्न अबजा के छथि ?' ओ उत्तर देलथिन; 'ओ हमरा सभक नोकर मे सँ एक छथि'। उमर बजलाह; 'अहाँ हुनका सभक लेल गुलाम पोसलहुँ?' ओ उत्तर देलथिन; 'सत्ते, ओ एहन व्यक्ति छथि जे अल्लाह केर किताब रटने छथि, फरा`इडल आ एकटा कदली केर विभाजन बुझैत छथि' | तेँ उमर बजलाह; 'सत्ते, तोहर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि: 'वास्तव मे अल्लाह एहि किताब सँ कोनो लोक केँ ऊँच करैत छथि आ एहि सँ दोसर लोक केँ नम्र करैत छथि'।
Imam Ahmad : 227
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ سُمَيْعٍ عَنْ مُسْلِمٍ الْبَطِينِ عَنْ أَبِي الْبَخْتَرِيِّ قَالَ قَالَ عُمَرُ لِأَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ الْجَرَّاحِ ابْسُطْ يَدَكَ حَتَّى أُبَايِعَكَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ أَنْتَ أَمِينُ هَذِهِ الْأُمَّةِ فَقَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ مَا كُنْتُ لِأَتَقَدَّمَ بَيْنَ يَدَيْ رَجُلٍ أَمَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَؤُمَّنَا فَأَمَّنَا حَتَّى مَاتَ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन फुदलैल] हमरा सब के [इस्माइल बिन सुमै'] के [मुस्लिम अल बथिन] स [अबुल बख्तारी] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] उबैदा बिन अल जर्राह सँ कहलनि; 'अपन हाथ पसारि दियौक जाहि सँ हम अहाँक प्रति वफादारी क' सकब, कारण हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केँ कहैत सुनने रही: 'अहाँ अमीन छी - एहि उम्माक भरोसा'।' अबू उबैदा जबाब देलकै; 'हम आगू - आगू - एकटा एहन आदमीक सोझाँ नहि जायब जकरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा हमरा सभक नेतृत्व करबाक आदेश देल गेल अछि, तखन जा धरि ओ मरि नहि जायत ता धरि हमरा सभक नेतृत्व करू'।
Imam Ahmad : 228
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ عَنِ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ سَلْمَانَ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَسَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِسْمَةً فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَغَيْرُ هَؤُلَاءِ أَحَقُّ مِنْهُمْ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّهُمْ خَيَّرُونِي بَيْنَ أَنْ يَسْأَلُونِي بِالْفُحْشِ أَوْ يُبَخِّلُونِي فَلَسْتُ بِبَاخِلٍ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [सुफयान] के [अल अ'मासी] स [स्याकिक बिन सलामाह] स [सलमान बिन रबियाह] स [उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम घनीमा के संपत्ति के वितरण के वितरण केलनि, तखन हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हुनका सब के अलावा एहन लोक छैथ जे हुनका सब स बेसी हकदार छैथ'। तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'सत्ते ओ सब हमरा दू टा विकल्प बनेबा लेल मजबूर केलक, या त ओ सब हमरा क्रूरता स मजबूर केलक या ओ सब हमरा कंजूस मानत, भले हम कंजूस व्यक्ति नहि छी'।
Imam Ahmad : 229
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ يَنَامُ أَحَدُنَا وَهُوَ جُنُبٌ قَالَ نَعَمْ وَيَتَوَضَّأُ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَهُ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [उबैदुल्लाह बिन उमर] के [नाफी’] स [इब्न उमर] स कहलक अछि जे उमर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलखिन; 'हमरा सभ मे सँ कियो जुनब मे रहैत सुति सकैत अछि?' ओ उत्तर देलखिन: 'हँ, आ पहिने वजूद करू जेना नमाज के लेल वजूद'। हमरा सब के कहल गेल अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [मा'मर] के [अयूब] स [नाफी] स [इब्न उमर] स रिपोर्ट केने छथि जे उमर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सेहो एहने सवाल पूछलखिन'।
Imam Ahmad : 230
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ قَالَ رَأَى ابْنُ عُمَرَ سَعْدَ بْنَ مَالِكٍ يَمْسَحُ عَلَى خُفَّيْهِ فَقَالَ ابْنُ عُمَرَ وَإِنَّكُمْ لَتَفْعَلُونَ هَذَا فَقَالَ سَعْدٌ نَعَمْ فَاجْتَمَعَا عِنْدَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ سَعْدٌ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أَفْتِ ابْنَ أَخِي فِي الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كُنَّا وَنَحْنُ مَعَ نَبِيِّنَا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَمْسَحُ عَلَى خِفَافِنَا فَقَالَ ابْنُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَإِنْ جَاءَ مِنْ الْغَائِطِ وَالْبَوْلِ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ نَعَمْ وَإِنْ جَاءَ مِنْ الْغَائِطِ وَالْبَوْلِ قَالَ نَافِعٌ فَكَانَ ابْنُ عُمَرَ بَعْدَ ذَلِكَ يَمْسَحُ عَلَيْهِمَا مَا لَمْ يَخْلَعْهُمَا وَمَا يُوَقِّتُ لِذَلِكَ وَقْتًا فَحَدَّثْتُ بِهِ مَعْمَرًا فَقَالَ حَدَّثَنِيهِ أَيُّوبُ عَنْ نَافِعٍ مِثْلَهُ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [उबैदुल्लाह बिन उमर] के [नाफी'] स कहलक अछि ओ कहलनि; कि इब्न उमर सअद बिन मलिक के अपन दू टा खुफ -चमड़ा के जूता- रगड़ैत देखलनि, [इब्नू उमर] कहलनि; 'की अहाँ सब प्रायः ई काज करैत छी?' स'द जवाब देलक; 'हँ,' तखन दुनू गोटे उमरक कात मे भेंट केलनि, आ स'द बजलाह; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, हमर भाइक बेटा केँ दुनू खुफ पोछबाक फतवा दियौक!' इब्न उमर पुछलखिन; 'आ जँ शौच आ पेशाब केलाक बाद आबि गेल हो?' [उमर] उत्तर देलनि; 'हँ, शौच वा पेशाब केलाक बाद सेहो'। नफी' बाजल; 'तकर बाद इब्न उमर सदिखन अपन दुनू खुफ पोछैत छलाह, जाबत धरि ओ ओकरा नहि निकालैत छलाह, आ पोछबाक लेल निर्धारित समय सीमा मे।' तेँ ओ हमरा [मा'मार] केँ कहलनि, ओ कहलनि; हमरा [अय्यूब] के [नफी'] स सेहो एहने हदीस के संग कहने छथि'।
Imam Ahmad : 231
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ أَخْبَرَنِي مَالِكُ بْنُ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ قَالَ صَرَفْتُ عِنْدَ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ وَرِقًا بِذَهَبٍ فَقَالَ أَنْظِرْنِي حَتَّى يَأْتِيَنَا خَازِنُنَا مِنْ الْغَابَةِ قَالَ فَسَمِعَهَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ لَا وَاللَّهِ لَا تُفَارِقُهُ حَتَّى تَسْتَوْفِيَ مِنْهُ صَرْفَهُ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الذَّهَبُ بِالْوَرِقِ رِبًا إِلَّا هَاءَ وَهَاءَ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के कहलक अछि [अज जुहरी] स [मा'मार] हमरा सब के कहने अछि [मलिक बिन औस बिन अल हदातसन] ओ कहलनि; हम चानी के सोना के बदला तलहा बिन उबैदिल्लाह के देलियैक, तलहा कहलनि; ‘हमर प्रतीक्षा करू, जाबत धरि हमर सभक कोषाध्यक्ष जंगलसँ नहि आओत,’ मलिक बाजल; तखन [उमर बिन अल खथथब] ई घटना सुनलनि, ओ कहलनि; 'नहि, अल्लाह केर कसम, अहाँ हुनका सँ अलग नहि होइत छी जा धरि हुनका सँ आदान-प्रदान पूर्ण रूप सँ नहि भेटैत अछि, कारण हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ कहैत सुनने रही; 'चानीक बदला सोनाक आदान-प्रदान नगद छोड़ि सूद थिक'।
Imam Ahmad : 232
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ قَالَ لَمَّا ارْتَدَّ أَهْلُ الرِّدَّةِ فِي زَمَانِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ عُمَرُ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ يَا أَبَا بَكْرٍ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَإِذَا قَالُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَاللَّهِ لَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ فَإِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عَنَاقًا كَانُوا يُؤَدُّونَهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَيْهَا قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ أَنَّ اللَّهَ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لِلْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ
हमरा सभकेँ [अब्दुरज्जाक] हमरा सभकेँ [मा'मर]केँ [अज जुहरी]सँ [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; जखन अबू बकर के नेतृत्व में बहुत लोक धर्मत्याग केलक त [उमर] पूछलखिन; 'अहाँ मनुक्ख सँ कोना लड़ब, हे अबू बकर, जखन कि अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: 'हमरा आदेश देल गेल छल जे मनुक्ख सँ लड़ब जा धरि ओ नहि कहत; 'ला इलाहा इल्लाह - अल्लाह के अलावा इबादत के लायक कोनो देवता नै छै-' अगर ओ सब 'ला इलाहा इल्लाह' कहने छैथ त ओ सब अपना के आ अपन संपत्ति के हमरा स राखि लेने छथि, सिवाय अपन अधिकार के, आ गणना अल्लाह पर छोड़ि देल गेल अछि'। तेँ [अबू बकर] उत्तर देलनि; 'अल्लाह के कसम, हम नमाज आ जकात के फर्ज में अंतर करय वाला के संग लड़ब, कारण जकात संपत्ति के अधिकार अछि, अल्लाह के कसम, अगर ओ एकटा बकरी के बच्चा के सौंपय सं मना क देत जे ओ पहिने अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देने छल, त हम ओकरा सब सं जरूर लड़ब'। उमर बजलाह; 'अल्लाह केरऽ कसम, अबू बकर द्वारा आरू कुछ नै कहलऽ गेलऽ छेलै लेकिन हम्में देखलियै कि अल्लाह न॑ अबू बकर केरऽ छाती खोली क॑ ओकरा सिनी स॑ लड़ै लेली, आरू हम्में स्वीकार करै छियै कि ई बात सही छेलै' ।
Imam Ahmad : 233
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كُنْتُ فِي رَكْبٍ أَسِيرُ فِي غَزَاةٍ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَحَلَفْتُ فَقُلْتُ لَا وَأَبِي فَنَهَرَنِي رَجُلٌ مِنْ خَلْفِي وَقَالَ لَا تَحْلِفُوا بِآبَائِكُمْ فَالْتَفَتُّ فَإِذَا أَنَا بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [इजरायल] के [सिमक] स [इकरीमा] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; 'जखन हम आ हमर टोली नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग लड़ाई के तरफ बढ़लहुं त हम कसम खा क कहलहुं; ‘नहि, हमर पिताक द्वारा,’ अचानक कियो हमरा पाछूसँ डाँटि देलक आ कहलक: ‘अपन पिताक नामक कसम नहि खाउ!’। अस्तु हम घुमलहुं, आ पता चलल जे हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम'क संग छलहुं.
Imam Ahmad : 234
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ سَمِعَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا أَحْلِفُ بِأَبِي فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ يَنْهَاكُمْ أَنْ تَحْلِفُوا بِآبَائِكُمْ قَالَ عُمَرُ فَوَاللَّهِ مَا حَلَفْتُ بِهَا بَعْدُ ذَاكِرًا وَلَا آثِرًا
हमरा सभकेँ [अब्दुर्रज्जाक] हमरा सभकेँ [अज ज़ुहरी]सँ [सलीम]सँ [अपन पिता]सँ [उमर]सँ [मा'मर] कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमर बात सुनलनि जखन हम अपन पिताक संग शपथ लेलहुँ, तखन ओ कहलनि: 'सत्ते, अल्लाह अहाँ केँ अपन पिताक पिता सँ शपथ लेबा सँ मना करैत छथि!' उमर बजलाह; 'त' अल्लाह केर कसम, तकर बाद हम हुनका सँ फेर कहियो शपथ नहि लेलहुँ, चाहे मोन राखब वा नहि'।
Imam Ahmad : 235
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا خَالِدٌ عَنْ خَالِدٍ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَخَّصَ فِي الْحَرِيرِ فِي إِصْبَعَيْنِ
हमरा सब के [खलाफ बिन अल वलीद] हमरा सब के [खालिद] के [खालिद] स [अबू उस्मान] स [उमर] स कहल गेल अछि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दू आँगुर के आकार के रेशम के मामला में राहत देलखिन'।
Imam Ahmad : 236
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا التَّيْمِيُّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنَّا مَعَ عُتْبَةَ بْنِ فَرْقَدٍ فَكَتَبَ إِلَيْهِ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بِأَشْيَاءَ يُحَدِّثُهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَكَانَ فِيمَا كَتَبَ إِلَيْهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَلْبَسُ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا إِلَّا مَنْ لَيْسَ لَهُ فِي الْآخِرَةِ مِنْهُ شَيْءٌ إِلَّا هَكَذَا وَقَالَ بِإِصْبَعَيْهِ السَّبَّابَةِ وَالْوُسْطَى قَالَ أَبُو عُثْمَانَ فَرَأَيْتُ أَنَّهَا أَزْرَارُ الطَّيَالِسَةِ حِينَ رَأَيْنَا الطَّيَالِسَةَ
हमरा सभकेँ [याह्या बिन सईद] हमरा सभकेँ [अबू उस्मान]सँ [अत तैमी] कहलक अछि ओ कहलनि; जखन हम उत्बाह बिन फरकाद के संग छलहुं तखन [उमर] हुनका एकटा चिट्ठी लिखलनि जाहि मे हुनका पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सं कहल गेल बात छल, आ हुनका जे लिखलनि ताहि मे ईहो छल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, 'ई दुनिया मे रेशम नहि पहिरब, सिवाय ओहि लोक के जे परलोक मे एकरा बिल्कुल नहि पहिरत सिवाय एतेक'। ओ कहलनि; 'ओ दुनू आँगुर अर्थात तर्जनी आ मध्य आँगुरसँ देखौलनि ।' अबू उस्मान कहलनि; 'हम देखलहुँ जे ई धारदार खुरदुरा कपड़ा छल जखन कि धारदार खुरदुरा कपड़ा देखलहुँ' ।
Imam Ahmad : 237
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي عَمَّارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَابَيْهِ عَنْ يَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ قَالَ قُلْتُ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِقْصَارُ النَّاسِ الصَّلَاةَ الْيَوْمَ وَإِنَّمَا قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { إِنْ خِفْتُمْ أَنْ يَفْتِنَكُمْ الَّذِينَ كَفَرُوا } فَقَدْ ذَهَبَ ذَاكَ الْيَوْمَ فَقَالَ عَجِبْتُ مِمَّا عَجِبْتَ مِنْهُ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ صَدَقَةٌ تَصَدَّقَ اللَّهُ بِهَا عَلَيْكُمْ فَاقْبَلُوا صَدَقَتَهُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي عَمَّارٍ يُحَدِّثُ فَذَكَرَهُ
हमरा सब के [इब्न जुरैज] स [याह्या] कहलक अछि हमरा [अब्दुररहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अबू अम्मर] स [अब्दुल्लाह बिन बबैह] स [या'ला बिन उमैया] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर बिन अल खथथब] केँ कहलियनि; 'की आब लोकक लेल अपन नमाज पढ़ब जायज अछि, भले अल्लाह मात्र कहैत छथि: 'तखन अहाँ अपन नमाज किएक नहि पढ़ैत छी, जँ अहाँ केँ काफिरक हमला सँ डर होइत अछि' -QS An Nisa'ayat: 101-, जखन कि आब एहन नहि रहि गेल अछि?' उमर जबाब देलकै; 'हमरा एक बेर आश्चर्य भेल जे अहाँ की आश्चर्यचकित छी, आ हम एक बेर अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ पूछने रही, तखन ओ जवाब देलनि: 'ओ दक्षिणा अछि जे अल्लाह अहाँ केँ देने छथि, तेँ हुनकर दक्षिणा स्वीकार करू।' हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुर रोजाक] हमरा सब के कहलक [इब्नु जुरैज] हम सुनने छी [अब्दुर रहमान बिन अब्दुल्लाओह बिन अबी अमर] के ई हदीस कहैत।
Imam Ahmad : 238
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنِ ابْنِ أَبِي عَرُوبَةَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِنَّ آخِرَ مَا نَزَلَ مِنْ الْقُرْآنِ آيَةُ الرِّبَا وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُبِضَ وَلَمْ يُفَسِّرْهَا فَدَعُوا الرِّبَا وَالرِّيبَةَ
[इब्न अबी अरूबाह] स हमरा सब के [याह्या] के बता देलक अछि [सैद बिन अल मुसैयब] स हमरा सब के [कतादह] के कहने अछि ओ कहलनि; [उमर] कहलनि; 'सत्ते, कुरान केरऽ आखिरी आयत जे उतारलऽ गेलऽ छै, वू सूद केरऽ आयत छेकै आरू सचमुच अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ मौत होय गेलऽ छै आरू वू एकरऽ व्याख्या नै करलकै, ई लेली सूद केरऽ सूद छोड़ी दियौ ।
Imam Ahmad : 239
حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَيِّتُ يُعَذَّبُ فِي قَبْرِهِ بِالنِّيَاحَةِ عَلَيْهِ
हमरा सब के कहलक अछि [याह्या] हमरा सब के बता देने अछि [स्यूबाह] हमरा सब के [कतादह] स [सईद बिन अल मुसैयब] स [इब्न उमर] स [उमर] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलक: 'एकटा मृत व्यक्ति के ओकर कब्र में सताओल जायत, कियाक त ओकर नियहा -रोना- ओकरा पर सताओल जायत'।
Imam Ahmad : 240
حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُعَذَّبُ الْمَيِّتُ بِبُكَاءِ أَهْلِهِ عَلَيْهِ
हमरा सब के [याह्या] के कहल गेल अछि ['उबैदिल्लाह] स हमरा सब के [नाफी'] [इब्न उमर] स [उमर] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहल गेल अछि, ओ कहलनि: 'एक मृत व्यक्ति के यातना देल जायत, कियाक त ओकर परिवार ओकरा लेल कानि रहल अछि'।