Imam Ahmad : 201
حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ حَدَّثَنِي عَطَاءُ بْنُ دِينَارٍ عَنْ حَكِيمِ بْنِ شَرِيكٍ الْهُذَلِيِّ عَنْ يَحْيَى بْنِ مَيْمُونٍ الْحَضْرَمِيِّ عَنْ رَبِيعَةَ الْجُرَشِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تُجَالِسُوا أَهْلَ الْقَدَرِ وَلَا تُفَاتِحُوهُمْ وَقَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ مَرَّةً سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सब के कहलक अछि [अबू अब्दुररहमान] हमरा [सैद बिन अबू अय्यूब] कहने छथि जे भाग्य में विश्वास नै करय वाला लोक के संग बैसू, आ हुनका सब स गप्प नै खोलू'। अबू अब्दुर्रहमान एकटा आओर इतिहास मे कहलनि; अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुनलौं।
Imam Ahmad : 202
حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ الْهَمْدَانِيِّ أَبِي عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ حَبِيبَ بْنَ عُبَيْدٍ يُحَدِّثُ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنِ ابْنِ السِّمْطِ أَنَّهُ خَرَجَ مَعَ عُمَرَ إِلَى ذِي الْحُلَيْفَةِ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ فَسَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِنَّمَا أَصْنَعُ كَمَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सब के [हसीम बिन अल कासिम] हमरा सब के [स्यूबाह] के [यजीद बिन खुमैर अल हमदानी अबू उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [हबीब बिन उबैद] के [इब्न अस सिमथ] स [जुबैर बिन नुफैर] के कहैत सुनलहुं जे ओ [उमर] के संग ज़ुल हुलैफाह में निकलल छलाह आ फेर दू रकाअत के नमाज केलनि, तें हम हुनका सं ओहि बारे में पूछलहुं, ओ जवाब देलनि; 'हम तहिना केलहुँ जेना हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ देखलहुँ'।
Imam Ahmad : 203
حَدَّثَنَا أَبُو نُوحٍ قُرَادٌ أَنْبَأَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سِمَاكٌ الْحَنَفِيُّ أَبُو زُمَيْلٍ حَدَّثَنِي ابْنُ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ بَدْرٍ قَالَ نَظَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أَصْحَابِهِ وَهُمْ ثَلَاثُ مِائَةٍ وَنَيِّفٌ وَنَظَرَ إِلَى الْمُشْرِكِينَ فَإِذَا هُمْ أَلْفٌ وَزِيَادَةٌ فَاسْتَقْبَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْقِبْلَةَ ثُمَّ مَدَّ يَدَيْهِ وَعَلَيْهِ رِدَاؤُهُ وَإِزَارُهُ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ أَيْنَ مَا وَعَدْتَنِي اللَّهُمَّ أَنْجِزْ مَا وَعَدْتَنِي اللَّهُمَّ إِنَّكَ إِنْ تُهْلِكْ هَذِهِ الْعِصَابَةَ مِنْ أَهْلِ الْإِسْلَامِ فَلَا تُعْبَدْ فِي الْأَرْضِ أَبَدًا قَالَ فَمَا زَالَ يَسْتَغِيثُ رَبَّهُ عَزَّ وَجَلَّ وَيَدْعُوهُ حَتَّى سَقَطَ رِدَاؤُهُ فَأَتَاهُ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَخَذَ رِدَاءَهُ فَرَدَّاهُ ثُمَّ الْتَزَمَهُ مِنْ وَرَائِهِ ثُمَّ قَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ كَفَاكَ مُنَاشَدَتُكَ رَبَّكَ فَإِنَّهُ سَيُنْجِزُ لَكَ مَا وَعَدَكَ وَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُمْ بِأَلْفٍ مِنْ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ } فَلَمَّا كَانَ يَوْمُئِذٍ وَالْتَقَوْا فَهَزَمَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ الْمُشْرِكِينَ فَقُتِلَ مِنْهُمْ سَبْعُونَ رَجُلًا وَأُسِرَ مِنْهُمْ سَبْعُونَ رَجُلًا فَاسْتَشَارَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَا بَكْرٍ وَعَلِيًّا وَعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا نَبِيَّ اللَّهِ هَؤُلَاءِ بَنُو الْعَمِّ وَالْعَشِيرَةُ وَالْإِخْوَانُ فَإِنِّي أَرَى أَنْ تَأْخُذَ مِنْهُمْ الْفِدْيَةَ فَيَكُونُ مَا أَخَذْنَا مِنْهُمْ قُوَّةً لَنَا عَلَى الْكُفَّارِ وَعَسَى اللَّهُ أَنْ يَهْدِيَهُمْ فَيَكُونُونَ لَنَا عَضُدًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا تَرَى يَا ابْنَ الْخَطَّابِ قَالَ قُلْتُ وَاللَّهِ مَا أَرَى مَا رَأَى أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَلَكِنِّي أَرَى أَنْ تُمَكِّنَنِي مِنْ فُلَانٍ قَرِيبًا لِعُمَرَ فَأَضْرِبَ عُنُقَهُ وَتُمَكِّنَ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مِنْ عَقِيلٍ فَيَضْرِبَ عُنُقَهُ وَتُمَكِّنَ حَمْزَةَ مِنْ فُلَانٍ أَخِيهِ فَيَضْرِبَ عُنُقَهُ حَتَّى يَعْلَمَ اللَّهُ أَنَّهُ لَيْسَتْ فِي قُلُوبِنَا هَوَادَةٌ لِلْمُشْرِكِينَ هَؤُلَاءِ صَنَادِيدُهُمْ وَأَئِمَّتُهُمْ وَقَادَتُهُمْ فَهَوِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا قَالَ أَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَلَمْ يَهْوَ مَا قُلْتُ فَأَخَذَ مِنْهُمْ الْفِدَاءَ فَلَمَّا أَنْ كَانَ مِنْ الْغَدِ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ غَدَوْتُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا هُوَ قَاعِدٌ وَأَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَإِذَا هُمَا يَبْكِيَانِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي مَاذَا يُبْكِيكَ أَنْتَ وَصَاحِبَكَ فَإِنْ وَجَدْتُ بُكَاءً بَكَيْتُ وَإِنْ لَمْ أَجِدْ بُكَاءً تَبَاكَيْتُ لِبُكَائِكُمَا قَالَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الَّذِي عَرَضَ عَلَيَّ أَصْحَابُكَ مِنْ الْفِدَاءِ لَقَدْ عُرِضَ عَلَيَّ عَذَابُكُمْ أَدْنَى مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ لِشَجَرَةٍ قَرِيبَةٍ وَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { مَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَنْ يَكُونَ لَهُ أَسْرَى حَتَّى يُثْخِنَ فِي الْأَرْضِ إِلَى قَوْلِهِ لَوْلَا كِتَابٌ مِنْ اللَّهِ سَبَقَ لَمَسَّكُمْ فِيمَا أَخَذْتُمْ } مِنْ الْفِدَاءِ ثُمَّ أُحِلَّ لَهُمْ الْغَنَائِمُ فَلَمَّا كَانَ يَوْمُ أُحُدٍ مِنْ الْعَامِ الْمُقْبِلِ عُوقِبُوا بِمَا صَنَعُوا يَوْمَ بَدْرٍ مِنْ أَخْذِهِمْ الْفِدَاءَ فَقُتِلَ مِنْهُمْ سَبْعُونَ وَفَرَّ أَصْحَابُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكُسِرَتْ رَبَاعِيَتُهُ وَهُشِمَتْ الْبَيْضَةُ عَلَى رَأْسِهِ وَسَالَ الدَّمُ عَلَى وَجْهِهِ وَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى { أَوَلَمَّا أَصَابَتْكُمْ مُصِيبَةٌ قَدْ أَصَبْتُمْ مِثْلَيْهَا } الْآيَةَ بِأَخْذِكُمْ الْفِدَاءَ
हमरा सब के कहलक अछि [अबू नुह कुरदल] हमरा सब के कहलक अछि [इकरीमा बिन अम्मार] हमरा सब के कहलक अछि [देखू अल हनाफी अबू जुमैल] हमरा सब के कहलक अछि [इब्नु अब्बास] हमरा सब के कहलक अछि [उमर बिन अल खथथब], ओ कहलनि; 'जखन बदरक लड़ाई भेल' उमर बजलाह; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन साथी सब दिस तकलनि आ ओ सब तीन सय पचास लोकक संख्या मे छलाह, फेर मुशरीक दिस देखलनि आ ओहि मे सँ एक हजार सँ बेसी छल, तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किबला के सामना केलनि तखन दुनू हाथ उठौलनि आ ओ अपन शाल आ सरोंग पहिरि लेलनि तखन ओ प्रार्थना केलनि: 'हे अल्लाह अहाँ हमरा सँ कोन वादा केने छी, हे अल्लाह अहाँ हमरा सँ वादा केने छी, हे अल्लाह सच मे जँ अहाँ मुसलमानक एहि छोट समूह केँ नष्ट क' देब, तखन अहाँक इबादत एहि धरती पर सदाक लेल नहि होयत'। उमर बजलाह; 'तँ नबी अपन रब सँ मदद मँगैत रहलाह आ हुनका सँ प्रार्थना करैत रहलाह जाबत धरि हुनकर शाल नहि खसि पड़लनि, तखन अबू बकर हुनका लग आबि हुनकर शाल ल' क' वापस क' देलनि, फेर पाछू सँ हुनका संग देलनि आ कहलनि; 'हे नबीयूल्लाह, तोहर रब्ब सँ अहाँक शिकायत काफी अछि, कारण ओ अहाँ केँ जे वादा कयल गेल छल, से अहाँ केँ पूरा क' देताह,' तखन अल्लाह अवगत केलनि; ' -याद राखू-, जखन अहाँ अपन प्रभु सँ मदद मँगलहुँ, तखन ओ अहाँ केँ अनुमति देलनि: 'सत्ते, हम अहाँ केँ हजार स्वर्गदूतक संग सुदृढीकरण आनब जे उत्तराधिकार मे आओत' | -QS अल अनफाल श्लोक 9-। त जखन ओ दिन आयल आ दुनू सेना के भेंट भेल त अल्लाह मुश्रिक सब के नष्ट क देलखिन जाहि स हुनका सब में स सत्तर गोटे मारल गेल आ सत्तर सैनिक के बंदी बना देल गेल, तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकर, अली आ उमर स परामर्श केलनि। अबू बकर कहलनि; 'हे नबीयुल्लाह, ई सब काका के बच्चा छै, करीबी रिश्तेदार छै आरू अखनी भी रिश्तेदार छै, ई लेली हमरा लगै छै कि तोरा ओकरा सिनी सें फिरौती के संपत्ति लेना चाहियऽ, आरो हम्में ओकरा सिनी सें जे लेबै, वू काफिर के सामना करै के हमरऽ ताकत बनी जाय छै, आशा छै कि अल्लाह ओकरा सिनी के मार्गदर्शन देतै ताकि वू हमरऽ समर्थक बनी जाय'।' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'हे इब्नुल खथथब, अहाँक की विचार अछि?' उमर जबाब देलकै; 'हम कहलियनि; 'अल्लाह के कसम, हमर विचार अबू बकर के समान नै अछि, मुदा हमर विचार अछि जे अहाँ उमर के सब रिश्तेदार के हमरा हाथ में सौंप देलहुं जे हम हुनकर गरदन काटि देब, आ अहाँ अकील के अली के सौंप देलहुं जे ओ हुनकर गरदनि काटि लेथि, आ अहाँ हमजा के एतेक रास भाई के हमजा के सौंप देलहुं जे ओ हुनकर गर्दन काटि लेथि, जाहि सं अल्लाह के पता चलय जे हमरा सबहक दिल में कोनो स्नेह नहिं अछि मुश्रिक, ओ सब ओकर गणमान्य, बुजुर्ग आ नेता छथि'। मुदा, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकरक विचार दिस झुकल छलाह आ हमर विचार दिस नहि’ । तखन ओकरा सभसँ फिरौती लऽ लेलक, तखन दोसर दिन उमर कहलक; 'भोरे हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आयल रही आ अचानक ओ आ अबू बकर बैसि गेलाह आ दुनू गोटे कानि रहल छलाह, तें हम पुछलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा बताउ जे अहाँ आ अहाँक दोस्त के की कानैत अछि, जँ हम कान सकैत छलहुँ त' कानैत आ जँ नहि कानि सकैत छलहुँ त' कानब, स्वयं कानब, कारण अहाँ दुनू गोटे कानि रहल छी'। उमर बजलाह; 'तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अहाँक साथी सब द्वारा फिरौती के रूप में प्रस्तावित राय, सचमुच हमरा ई देखाओल गेल अछि जे अहाँक सिस्कसा नजदीकी गाछ स बेसी नजदीक अछि' आ अल्लाह अपन वचन पठौलनि जे 'नबी के लेल ई उचित नहि अछि जे ओ अपन दुश्मन के धरती के चेहरा पर लकवा मारय स पहिने कैदी राखय' -QS अल अनफाल श्लोक 67-, हुनकर वचन तक; 'अहाँ जे फिरौती लेलौं तकर कारण अहाँ केँ बहुत यातना अवश्य होयत' -QS अल अनफाल श्लोक 68-। अर्थात फिरौती, तखन हुनका लोकनिक लेल वैध बना देल गेल घनिमाह खजाना - युद्धक लूट -, तेँ जखन उहुदक युद्ध वर्ष 1 मे भेल | अगिला बेर हुनका सब के सजा देल गेलैन जेकर परिणाम छल जे ओ सब बदर के लड़ाई में फिरौती लेबय के रूप में केने छलाह, जाहि स हुनका सब में स सत्तर गोटे के मौत भ गेल छल, आ लड़ाई के दौरान पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब हुनका स भागि गेल छल, जाहि स हुनकर दू टा दाढ़ टूटि गेल छल, हुनकर कपार फाटि गेल छल आ हुनकर चेहरा पर खून बहल छल, तखन अल्लाह अपन वचन पठा देलखिन: 'आ अहाँ सब के कियैक कष्ट भेल एकटा आपदा - उहुद के लड़ाई में - भले ही तोहें अपनऽ दुश्मनऽ पर दोगुना हार के शिकार होय चुकलऽ छेल्हऽ - बदर के लड़ाई में ' -QS अली इमरान आयत १६५- ओकरऽ शब्दऽ के प्रति: 'वास्तव में, अल्लाह के सब चीजऽ पर अधिकार छै' । -QS अली इमरान श्लोक 165- कारण अहाँ फिरौती लेलौं।
Imam Ahmad : 204
حَدَّثَنَا أَبُو نُوحٍ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ قَالَ فَسَأَلْتُهُ عَنْ شَيْءٍ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيَّ قَالَ فَقُلْتُ لِنَفْسِي ثَكِلَتْكَ أُمُّكَ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ نَزَرْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيْكَ قَالَ فَرَكِبْتُ رَاحِلَتِي فَتَقَدَّمْتُ مَخَافَةَ أَنْ يَكُونَ نَزَلَ فِيَّ شَيْءٌ قَالَ فَإِذَا أَنَا بِمُنَادٍ يُنَادِي يَا عُمَرُ أَيْنَ عُمَرُ قَالَ فَرَجَعْتُ وَأَنَا أَظُنُّ أَنَّهُ نَزَلَ فِيَّ شَيْءٌ قَالَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَزَلَتْ عَلَيَّ الْبَارِحَةَ سُورَةٌ هِيَ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ الدُّنْيَا وَمَا فِيهَا { إِنَّا فَتَحْنَا لَكَ فَتْحًا مُبِينًا لِيَغْفِرَ لَكَ اللَّهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ }
हमरा सब के [अबू नुह] हमरा सब के [मलिक बिन अनस] के [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स [उमर बिन अल खथथब] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम सब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग यात्रा पर छलहुं, तखन हम तीन बेर हुनका स कोनो बात पूछलहुं त ओ हमरा जवाब नहि देलथि, ताहि लेल हम दिल स कहलियनि; 'अहाँ कतेक अभागल छी हे इब्नुल खथथब, अहाँ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ तीन बेर पूछबाक बहुत प्रयास केलहुँ मुदा ओ अहाँक कोनो जवाब नहि देलनि'। उमर बजलाह; तेँ हम अपन गाड़ी मे बैसि गेलहुँ आ आगू बढ़लहुँ कारण हमरा चिन्ता छल जे किछु हमरा पर उतरि जायत । उमर बजलाह; अचानक कियो हमरा फोन केलक; 'हे उमर, उमर कतय छथि ?' उमर बजलाह; 'त हम एहि लेल आयल रही जे हमरा लागल जे हमरा बारे मे किछु उतरि गेल अछि, तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'काल्हि राति हमरा लग एकटा चिट्ठी उतरल जे हम दुनिया आ ओकर सामग्री सँ बेसी पसिन करैत छी, 'सत्ते हम अहाँ केँ स्पष्ट जीत द' देलहुँ अछि।' ताकि अल्लाह अहाँ के बीतल आ भविष्य के पाप के माफ क देथिन' -QS Al Fath verse 1 - 2-'।
Imam Ahmad : 205
حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَنْ حَكِيمِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ مُوسَى بْنِ طَلْحَةَ عَنِ ابْنِ الْحَوْتَكِيَّةِ قَالَ أُتِيَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بِطَعَامٍ فَدَعَا إِلَيْهِ رَجُلًا فَقَالَ إِنِّي صَائِمٌ ثُمَّ قَالَ وَأَيُّ الصِّيَامِ تَصُومُ لَوْلَا كَرَاهِيَةُ أَنْ أَزِيدَ أَوْ أَنْقُصَ لَحَدَّثْتُكُمْ بِحَدِيثِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ جَاءَهُ الْأَعْرَابِيُّ بِالْأَرْنَبِ وَلَكِنْ أَرْسِلُوا إِلَى عَمَّارٍ فَلَمَّا جَاءَ عَمَّارٌ قَالَ أَشَاهِدٌ أَنْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ جَاءَهُ الْأَعْرَابِيُّ بِالْأَرْنَبِ قَالَ نَعَمْ فَقَالَ إِنِّي رَأَيْتُ بِهَا دَمًا فَقَالَ كُلُوهَا قَالَ إِنِّي صَائِمٌ قَالَ وَأَيُّ الصِّيَامِ تَصُومُ قَالَ أَوَّلَ الشَّهْرِ وَآخِرَهُ قَالَ إِنْ كُنْتَ صَائِمًا فَصُمْ الثَّلَاثَ عَشْرَةَ وَالْأَرْبَعَ عَشْرَةَ وَالْخَمْسَ عَشْرَةَ
हमरा सभकेँ [अबू अन नडलर] हमरा सभकेँ [अल मसौदी] [हकीम बिन जुबैर]सँ [मूसा बिन थल्हाह]सँ [इब्नुल हौतकिया]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; [उमर बिन अल खथथब] के भोजन देल गेलै तखन ओ एकटा आदमी के फोन केलक मुदा ओ कहलक; 'हम उपवास क' रहल छी'। उमर पुछलकै; 'अहाँ कोन व्रत क' रहल छी? अगर अहां के जोड़-घटय के चिंता नहिं छल त हम अहां के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एकटा हदीस जरूर कहब जखन एकटा बेदुइन अरब खरगोश ल क हुनका लग आयल छल, मुदा ओ अम्मर के पाछु चलल छल'. तेँ जखन अम्मर आबि गेलाह त उमर बजलाह; 'की अहाँ अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ ओहि दिन देखलहुँ जखन एकटा बेदुइन अरब खरगोश ल' क' पहुँचल छल?' अम्मर जबाब देलकै; 'हँ'। [अम्मर] आगू बजलाह; देखलहुँ खून छल, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘अहाँ द्वारा खाउ’ अम्मर कहलनि; 'हम उपवास क' रहल छी'। नबी पुछलखिन: 'अहाँ कोन रोजा रखैत छी?' अम्मर जबाब देलकै; 'महीना के आरंभ आ अंत में उपवास'। तखन नबी कहलनि जे जँ अहाँ रोजा राखय चाहैत छी तखन तेरहम, चौदहम आ पन्द्रहम दिन रोजा राखब’।
Imam Ahmad : 206
حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا أَبُو عَقِيلٍ حَدَّثَنَا مُجَالِدُ بْنُ سَعِيدٍ أَخْبَرَنَا عَامِرٌ عَنْ مَسْرُوقِ بْنِ الْأَجْدَعِ قَالَ لَقِيتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ لِي مَنْ أَنْتَ قُلْتُ مَسْرُوقُ بْنُ الْأَجْدَعِ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْأَجْدَعُ شَيْطَانٌ وَلَكِنَّكَ مَسْرُوقُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ عَامِرٌ فَرَأَيْتُهُ فِي الدِّيوَانِ مَكْتُوبًا مَسْرُوقُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ فَقُلْتُ مَا هَذَا فَقَالَ هَكَذَا سَمَّانِي عُمَرُ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू अन नडलर] हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू अकील] हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुजालिद बिन सईद] हमरा सभकेँ [‘अमीर] [मसरुक बिन अल अजदा’]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हमरा [उमर बिन अल खथथब] स भेंट भेल तखन ओ हमरा कहलनि; 'अहां के छी?' हम उत्तर देलियनि; 'मसरुक बिन अजदा'। तेँ उमर बजलाह; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत सुनलियैन जे ‘अजदा’ शैतानक नाम थिक, मुदा अहाँ मसरुक बिन अब्दुररहमान छी। अमीर बजलाह; 'त' हम मसरुक बिन अब्दुररहमानक लिखित दस्तावेज मे देखलहुँ, हम पुछलियनि; 'ई की अछि ?' तेँ ओ उत्तर देलथिन। 'उमर हमर नाम एहने रखलनि'।
Imam Ahmad : 207
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ مُحَرَّرِ بْنِ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْعَزْلِ عَنْ الْحُرَّةِ إِلَّا بِإِذْنِهَا
हमरा सब के [इशाक बिन ईसा] हमरा सब के [इब्न लहिअह] द्वारा [जफर बिन रबियाह] स [अज ज़ुहरी] स [मुहर्रर बिन अबू हुरैरा] स [उनकर पिता] स [उमर बिन अल खथथब] स कहल गेल अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अजल - पत्नीक योनिसँ बाहर वीर्य उगलब - पत्नीसँ अनुमति छोड़ि' ।
Imam Ahmad : 208
حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عَمْرٍو قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ يَعْنِي ابْنَ سَعْدٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ يَقُولُ لَئِنْ عِشْتُ إِلَى هَذَا الْعَامِ الْمُقْبِلِ لَا يُفْتَحُ لِلنَّاسِ قَرْيَةٌ إِلَّا قَسَمْتُهَا بَيْنَهُمْ كَمَا قَسَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَيْبَرَ
हमरा सब [अबू अमीर अब्दुल मलिक बिन अमरू] के कहला के बाद ओ कहलनि; [जैद बिन असलम] स [अपन पिता] स हमरा सब कए [हिस्याम अर्थात इब्न सअद] कए कहला क बाद ओ कहलथि; हम [उमर] केँ कहैत सुनलहुँ; 'जँ हम अगिला साल धरि जीब तखन एकोटा गाम नहि जीतल जायत, जाबत हम ओकरा सभ मे ओहिना बाँटि नहि देब जेना खैबरक युद्ध मे अल्लाह केर रसूलुल्लाह बाँटि देने छलाह'।
Imam Ahmad : 209
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزَاةٍ فَحَلَفْتُ لَا وَأَبِي فَهَتَفَ بِي رَجُلٌ مِنْ خَلْفِي فَقَالَ لَا تَحْلِفُوا بِآبَائِكُمْ فَإِذَا هُوَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सब के [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह अज जबीरी] हमरा सब के [इजराइल] के [सिमक] स [इकरीमा] स [इब्न अब्बास] स [उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग एकटा लड़ाई में छलहुं तखन हम कसम खयलहुं; 'नहि, हमर पिताक लेल'। तेँ कियो हमरा पाछूसँ डाँटि कऽ कहलक : 'अपन पिताक कसम नहि खाउ' । पता चलल जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम छलाह |
Imam Ahmad : 210
حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَئِنْ عِشْتُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ لَأُخْرِجَنَّ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى مِنْ جَزِيرَةِ الْعَرَبِ
हमरा सब के [अबू अहमद अज जुबैरी] हमरा सब के [सुफयान] के [अबू अज़ जुबैर] स [जबीर] स [उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'जँ हम जीबैत छी तँ अरब प्रायद्वीपसँ यहूदी आ ईसाईकेँ अवश्य भगा देब' ।
Imam Ahmad : 211
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُمَرَ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَمْسَحُ عَلَى الْخُفَّيْنِ
हमरा सब के [सुलेमान बिन दाउद अबू दाउद] हमरा सब के [शरिक] के ['अशिम] स [अपन पिता] स [उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह के दुनु खुफ के रगड़ैत देखलहुं'।
Imam Ahmad : 212
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا سَلَّامٌ يَعْنِي أَبَا الْأَحْوَصِ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ عَنْ سَيَّارِ بْنِ الْمَعْرُورِ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْطُبُ وَهُوَ يَقُولُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَنَى هَذَا الْمَسْجِدَ وَنَحْنُ مَعَهُ الْمُهَاجِرُونَ وَالْأَنْصَارُ فَإِذَا اشْتَدَّ الزِّحَامُ فَلْيَسْجُدْ الرَّجُلُ مِنْكُمْ عَلَى ظَهْرِ أَخِيهِ وَرَأَى قَوْمًا يُصَلُّونَ فِي الطَّرِيقِ فَقَالَ صَلُّوا فِي الْمَسْجِدِ
हमरा सब के [सुलेमान बिन दाउद अबू दाउद] हमरा सब के [सल्लम अर्थात अबुल अहवास] के [सिमक बिन हरब] स [सय्यर बिन अल म'रूर] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर] के उपदेश आ कहैत सुनलहुँ; 'सत्ते, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ई मस्जिद बनौलनि, आ हम सभ मुहाजिरीन आ अंसार सँ हुनका संग छलहुँ, जखन मस्जिद मे एतेक भीड़ भ' गेल जे अहाँ सभ मे सँ एक गोटे अपन भाइक पीठ पर सजदा केलक आ गली मे लोक सभ केँ नमाज पढ़ैत देखलक त' ओ कहलनि: 'मस्जिद मे नमाज पढ़ू'।
Imam Ahmad : 213
قَالَ قَرَأْتُ عَلَى يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ زُهَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ عَنْ حَارِثَةَ بْنِ مُضَرِّبٍ أَنَّهُ حَجَّ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَتَاهُ أَشْرَافُ أَهْلِ الشَّامِ فَقَالُوا يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ إِنَّا أَصَبْنَا مِنْ أَمْوَالِنَا رَقِيقًا وَدَوَابَّ فَخُذْ مِنْ أَمْوَالِنَا صَدَقَةً تُطَهِّرُنَا بِهَا وَتَكُونُ لَنَا زَكَاةً فَقَالَ هَذَا شَيْءٌ لَمْ يَفْعَلْهُ اللَّذَانِ كَانَا مِنْ قَبْلِي وَلَكِنْ انْتَظِرُوا حَتَّى أَسْأَلَ الْمُسْلِمِينَ
ओ -अहमद बिन हम्बल- कहलनि; हम [याह्या बिन सईद] केँ [जुहैर] सँ पढ़लहुँ ओ कहलनि; हमरा सब [अबू इशाक] के [हरितसाह बिन मुडलररब] स कहल गेल अछि जे ओ [उमर बिन अल खथथब] के संग हज केने छलाह, तखन सीरिया के लोक के नेता सब हुनका लग आबि कहलखिन; 'हे अमीरुल मुकमिनिन, हमरा सभ लग सम्पत्ति, गुलाम आ माल-जाल अछि, तेँ हमरा सभक सम्पत्ति सँ जकात मे लऽ लिअ जे हमरा सभ केँ शुद्ध क' सकैत अछि,' तखन उमर उत्तर देलनि; 'ई एहन काज अछि जे हमरा सँ पहिने के दुनू गोटे नहि केने छथि मुदा इंतजार करू जा धरि हम मुसलमान सभ सँ नहि पूछब'।
Imam Ahmad : 214
حَدَّثَنَا رَوْحٌ وَمُؤَمَّلٌ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَئِنْ عِشْتُ لَأُخْرِجَنَّ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى مِنْ جَزِيرَةِ الْعَرَبِ حَتَّى لَا أَتْرُكَ فِيهَا إِلَّا مُسْلِمًا
हमरा लोकनि केँ कहल गेल अछि जे [रौह] आ [मु`अम्मल] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब [सुफियन अतस त्सौरी] के [अबू अज़ जुबैर] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स कहल गेल अछि जे [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जँ हम जीवित रहब त' हम अरब प्रायद्वीप सँ यहूदी आ ईसाई केँ निश्चित रूप सँ बाहर निकालब जाबत धरि हम एहि मे मुसलमान केँ छोड़ि कोनो मुसलमान नहि छोड़ब'।
Imam Ahmad : 215
حَدَّثَنَا عَتَّابُ بْنُ زِيَادٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا يُونُسُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنِ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ وَعُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ عَبْد اللَّهِ وَقَدْ بَلَغَ بِهِ أَبِي إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ فَاتَهُ شَيْءٌ مِنْ وِرْدِهِ أَوْ قَالَ مِنْ جُزْئِهِ مِنْ اللَّيْلِ فَقَرَأَهُ مَا بَيْنَ صَلَاةِ الْفَجْرِ إِلَى الظُّهْرِ فَكَأَنَّمَا قَرَأَهُ مِنْ لَيْلَتِهِ
हमरा सब के बता देलक अछि [अत्ताब बिन जियाद] हमरा सब के बता देलक अछि [अब्दुल्लाह यानी इब्नुल मुबारक] हमरा सब के [यूनुस] के [अज जुहरी] स [अस सईब बिन यजीद] स आ [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] स [अब्दुररहमान बिन अब्द] स [उमर बिन अल खथथब] स, अब्दुल्ला कहलनि; 'हमर पिता नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक पहुँचा देने छथि, जे ओ कहलनि: 'जे कियो अपन विरिद सँ किछु छोड़ि दैत छथि,' वा कहलनि: 'ओहि मे सँ किछु सँ राति मे आ फेर भोर आ मध्याह्नक नमाजक बीच पढ़ैत छथि, जेना राति मे पढ़ि लेताह'।
Imam Ahmad : 216
حَدَّثَنَا أَبُو نُوحٍ قُرَادٌ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سِمَاكٌ الْحَنَفِيُّ أَبُو زُمَيْلٍ حَدَّثَنِي ابْنُ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي عُمَرُ قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ بَدْرٍ قَالَ نَظَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أَصْحَابِهِ وَهُمْ ثَلَاثُ مِائَةٍ وَنَيِّفٌ وَنَظَرَ إِلَى الْمُشْرِكِينَ فَإِذَا هُمْ أَلْفٌ وَزِيَادَةٌ فَاسْتَقْبَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْقِبْلَةَ ثُمَّ مَدَّ يَدَهُ وَعَلَيْهِ رِدَاؤُهُ وَإِزَارُهُ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ أَيْنَ مَا وَعَدْتَنِي اللَّهُمَّ أَنْجِزْ مَا وَعَدْتَنِي اللَّهُمَّ إِنْ تُهْلِكْ هَذِهِ الْعِصَابَةَ مِنْ أَهْلِ الْإِسْلَامِ فَلَا تُعْبَدْ فِي الْأَرْضِ أَبَدًا قَالَ فَمَا زَالَ يَسْتَغِيثُ رَبَّهُ وَيَدْعُوهُ حَتَّى سَقَطَ رِدَاؤُهُ فَأَتَاهُ أَبُو بَكْرٍ فَأَخَذَ رِدَاءَهُ فَرَدَّاهُ ثُمَّ الْتَزَمَهُ مِنْ وَرَائِهِ ثُمَّ قَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ كَفَاكَ مُنَاشَدَتُكَ رَبَّكَ فَإِنَّهُ سَيُنْجِزُ لَكَ مَا وَعَدَكَ وَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى { إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُمْ بِأَلْفٍ مِنْ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ } فَلَمَّا كَانَ يَوْمُئِذٍ وَالْتَقَوْا فَهَزَمَ اللَّهُ الْمُشْرِكِينَ فَقُتِلَ مِنْهُمْ سَبْعُونَ رَجُلًا وَأُسِرَ مِنْهُمْ سَبْعُونَ رَجُلًا فَاسْتَشَارَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَا بَكْرٍ وَعَلِيًّا وَعُمَرَ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ يَا نَبِيَّ اللَّهِ هَؤُلَاءِ بَنُو الْعَمِّ وَالْعَشِيرَةُ وَالْإِخْوَانُ فَأَنَا أَرَى أَنْ تَأْخُذَ مِنْهُمْ الْفِدَاءَ فَيَكُونُ مَا أَخَذْنَا مِنْهُمْ قُوَّةً لَنَا عَلَى الْكُفَّارِ وَعَسَى اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَنْ يَهْدِيَهُمْ فَيَكُونُونَ لَنَا عَضُدًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا تَرَى يَا ابْنَ الْخَطَّابِ فَقَالَ قُلْتُ وَاللَّهِ مَا أَرَى مَا رَأَى أَبُو بَكْرٍ وَلَكِنِّي أَرَى أَنْ تُمَكِّنَنِي مِنْ فُلَانٍ قَرِيبٍ لِعُمَرَ فَأَضْرِبَ عُنُقَهُ وَتُمَكِّنَ عَلِيًّا مِنْ عَقِيلٍ فَيَضْرِبَ عُنُقَهُ وَتُمَكِّنَ حَمْزَةَ مِنْ فُلَانٍ أَخِيهِ فَيَضْرِبَ عُنُقَهُ حَتَّى يَعْلَمَ اللَّهُ أَنَّهُ لَيْسَ فِي قُلُوبِنَا هَوَادَةٌ لِلْمُشْرِكِينَ هَؤُلَاءِ صَنَادِيدُهُمْ وَأَئِمَّتُهُمْ وَقَادَتُهُمْ فَهَوِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا قَالَ أَبُو بَكْرٍ وَلَمْ يَهْوَ مَا قُلْتُ فَأَخَذَ مِنْهُمْ الْفِدَاءَ فَلَمَّا كَانَ مِنْ الْغَدِ قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ غَدَوْتُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا هُوَ قَاعِدٌ وَأَبُو بَكْرٍ وَإِذَا هُمَا يَبْكِيَانِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي مَاذَا يُبْكِيكَ أَنْتَ وَصَاحِبَكَ فَإِنْ وَجَدْتُ بُكَاءً بَكَيْتُ وَإِنْ لَمْ أَجِدْ بُكَاءً تَبَاكَيْتُ لِبُكَائِكُمَا قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الَّذِي عَرَضَ عَلَيَّ أَصْحَابُكَ مِنْ الْفِدَاءِ وَلَقَدْ عُرِضَ عَلَيَّ عَذَابُكُمْ أَدْنَى مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ لِشَجَرَةٍ قَرِيبَةٍ وَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى { مَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَنْ يَكُونَ لَهُ أَسْرَى حَتَّى يُثْخِنَ فِي الْأَرْضِ إِلَى قَوْلِهِ لَمَسَّكُمْ فِيمَا أَخَذْتُمْ } مِنْ الْفِدَاءِ ثُمَّ أُحِلَّ لَهُمْ الْغَنَائِمُ فَلَمَّا كَانَ يَوْمُ أُحُدٍ مِنْ الْعَامِ الْمُقْبِلِ عُوقِبُوا بِمَا صَنَعُوا يَوْمَ بَدْرٍ مِنْ أَخْذِهِمْ الْفِدَاءَ فَقُتِلَ مِنْهُمْ سَبْعُونَ وَفَرَّ أَصْحَابُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكُسِرَتْ رَبَاعِيَتُهُ وَهُشِمَتْ الْبَيْضَةُ عَلَى رَأْسِهِ وَسَالَ الدَّمُ عَلَى وَجْهِهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ { أَوَلَمَّا أَصَابَتْكُمْ مُصِيبَةٌ قَدْ أَصَبْتُمْ مِثْلَيْهَا إِلَى قَوْلِهِ إِنَّ اللَّهَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ } بِأَخْذِكُمْ الْفِدَاءَ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू नुह कुराद] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इकरीमा बिन अम्मर] हमरा सभकेँ कहलक अछि [सिमक अल हनाफी अबू जुमैल] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इब्न अब्बास] हमरा सभकेँ कहलक अछि [उमर] ओ कहलनि; जखन बदर के लड़ाई के दिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन साथी सब के देखलनि जेकर संख्या तीन सौ पचास छल आ ओ ओहि मुश्रिक के देखलनि जिनकर संख्या हजार स बेसी छल, तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किबला के दिशा के सामना केलनि आ शाल आ सरोंग पहिरने हाथ उठौलनि, तखन ओ नमाज केलनि: 'ओ अल्लाह, जे अहाँ हमरासँ वादा केने छी, हमरा देखाउ जे अहाँ हमरासँ वादा केने छी, हे अल्लाह, जँ अहाँ इस्लामी उम्माक एहि छोट समूहकेँ नष्ट कऽ देब तँ निश्चित रूपसँ एहि धरती पर अहाँक पूजा सदाक लेल नहि होयत'। उमर बजलाह; 'त' ओ मददि मँगैत रहलाह आ अपन प्रभु सँ प्रार्थना करैत रहलाह जाबत धरि हुनकर शाल नहि खसि पड़लनि, तखन अबू बकर हुनका लग आबि अपन शाल वापस क' देलनि आ पाछू सँ हुनका संग देलनि आ कहलनि; 'हे नबीयुल्लाह, अहाँक रब्ब सँ अहाँक शिकायत काफी अछि कारण ओ अहाँ सँ अपन वादा निश्चित रूप सँ पूरा करताह'। त अल्लाह तआला नीचा पठौलनि' - मोन राखू -, जखन अहाँ अपन प्रभु सँ मदद मांगब, तखन ओ अहाँ केँ अनुमति दैत छथि: 'सत्ते, हम अहाँ केँ हजार स्वर्गदूतक संग सुदृढीकरण आनब जे उत्तराधिकार मे आओत'। -QS अल अनफाल आयत 9- तखन ओहि दिन दू टा सेना भेटल आ अल्लाह मुश्रिक सब के नष्ट क देलक, जाहि में सत्तर लोक के मारल गेल आ सत्तर गोटे के बंदी बना लेल गेल, तखन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकर, अली आ उमर स परामर्श केलनि, अबू बकर कहलनि; 'हे नबीयुल्लाह, ई सब हमर सबहक काका के बच्चा, करीबी रिश्तेदार आ हमर सबहक भाई छथि, तें हमरा लगैत अछि जे अहाँ हुनका सब सं फिरौती के पाइ ल' लैत छी, जाहि सं हम सब हुनका सब सं जे किछु लैत छी से हमरा सब लेल काफिर पर ताकत बनि जाय, आ आशा अछि जे अल्लाह हुनका सब के मार्गदर्शन देत, जाहि सं ओ सब हमरा सब लेल ताकत बनि सकथि'।' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: 'हे इब्नुल खथथब, अहाँक की विचार अछि?' तेँ उमर बजलाह; 'हम कहलियनि; 'अल्लाह के कसम, हमरा अबू बकर के समान राय नै छै, लेकिन हमरो ई राय छै कि तोहें हमरा उमर के भाई के फलां-फल्लाह देलऽ छेलियै कि हम्में ओकरऽ गरदन काटै लेली, आरू तोहें अकील के अली के हाथ में सौंपलऽ छेल्हौ तखनिये वू ओकरऽ गरदन काटी देलकै, आरो तोहें हमजाह के भाई के फलां-फल्लाह ओकरा सौंप देलियऽ आरू ओकरा बाद वू ओकरऽ गरदन काटी देलकै, ताकि अल्लाह ई जान॑ सक॑ कि ओकरा में कोय असर नै छै मुश्रिक के लेल हमर सबहक दिल, ओ सब हुनकर गणमान्य, बुजुर्ग आ नेता छथि'। मुदा रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकरक विचार दिस झुकल छलाह आ हमर विचार दिस नहि, 'तखन ओ हुनका सभसँ फिरौती ल' लेलनि, तेँ दोसर दिन उमर कहलनि; 'भोरे हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आयल रही, अचानक ओ आ अबू बकर बैसि गेलाह आ दुनू गोटे कानि रहल छलाह, तें हम पुछलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, कहू जे अहाँ आ अहाँक दोस्त सब के की कानय लागल? जँ हम कान सकैत छलहुँ तऽ कानैत छलहुँ आ जँ नहि कानि सकैत छलहुँ तँ हम स्वयं कानैत छलहुँ कारण अहाँ दुनू गोटे कानैत छी' । उमर बजलाह; 'तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'जे राय अहाँक मित्र फिरौती के रूप में प्रस्तावित केने छलाह, हमरा सचमुच देखाओल गेल अछि जे अहाँक सिस्कसा नजदीकी गाछ सं बेसी नजदीक अछि' आ अल्लाह अपन वचन पठौलनि जे 'नबी के लेल ई उचित नहिं जे ओ अपन दुश्मन के धरती के चेहरा पर अपंग बनाबय सं पहिने कैदी राखय' -QS अल अनफाल श्लोक 67- जब तक कि हुनकर वचन 'अहाँ जे फिरौती लेलौं ओकर कारण अहाँ केँ बहुत पैघ यातना अवश्य भेटत' -QS अल अनफाल श्लोक 68-। अर्थात फिरौती, तखन हुनका लोकनिक लेल घनिमाह सम्पत्ति - युद्धक लूट - वैध बना देल गेलनि, तेँ जखन अगिला साल उहुदक युद्ध भेलनि तखन हुनका लोकनि केँ सजा भेटलनि कारण ओ लोकनि बदरक युद्ध मे फिरौती लेबाक रूप मे की केलनि, तेँ दियान | सत्तर गिर गेलै, आरू लड़ाई के दौरान नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी ओकरा स॑ भागी गेलै, जेकरा स॑ ओकरऽ दू दाढ़ टूटी गेलै, ओकरऽ कपार फाटी गेलै आरू ओकरऽ चेहरा स॑ खून बह॑ लगलै, तखनिये अल्लाह न॑ अपनऽ वचन के खुलासा करलकै: ‘आरू जब॑ तोरा पर आपदा आबी गेलै - उहुद के लड़ाई म॑ -, भले ही तोहें अपनऽ दुश्मनऽ प॑ दोगुना हार के शिकार होय गेलऽ छेलियै - एट बदर के लड़ाई' -QS अली इमरान आयत 165- जब तक कि उनके वचन: 'वास्तव में अल्लाह के सब चीजों पर अधिकार है' | -QS अली इमरान श्लोक 165- कारण अहाँ फिरौती लेलौं'।
Imam Ahmad : 217
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي ثَوْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ لَمْ أَزَلْ حَرِيصًا عَلَى أَنْ أَسْأَلَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ الْمَرْأَتَيْنِ مِنْ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّتَيْنِ قَالَ اللَّهُ تَعَالَى { إِنْ تَتُوبَا إِلَى اللَّهِ فَقَدْ صَغَتْ قُلُوبُكُمَا } حَتَّى حَجَّ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَحَجَجْتُ مَعَهُ فَلَمَّا كُنَّا بِبَعْضِ الطَّرِيقِ عَدَلَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَعَدَلْتُ مَعَهُ بِالْإِدَاوَةِ فَتَبَرَّزَ ثُمَّ أَتَانِي فَسَكَبْتُ عَلَى يَدَيْهِ فَتَوَضَّأَ فَقُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَنْ الْمَرْأَتَانِ مِنْ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّتَانِ قَالَ اللَّهُ تَعَالَى { إِنْ تَتُوبَا إِلَى اللَّهِ فَقَدْ صَغَتْ قُلُوبُكُمَا } فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَاعَجَبًا لَكَ يَا ابْنَ عَبَّاسٍ قَالَ الزُّهْرِيُّ كَرِهَ وَاللَّهِ مَا سَأَلَهُ عَنْهُ وَلَمْ يَكْتُمْهُ عَنْهُ قَالَ هِيَ حَفْصَةُ وَعَائِشَةُ قَالَ ثُمَّ أَخَذَ يَسُوقُ الْحَدِيثَ قَالَ كُنَّا مَعْشَرَ قُرَيْشٍ قَوْمًا نَغْلِبُ النِّسَاءَ فَلَمَّا قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ وَجَدْنَا قَوْمًا تَغْلِبُهُمْ نِسَاؤُهُمْ فَطَفِقَ نِسَاؤُنَا يَتَعَلَّمْنَ مِنْ نِسَائِهِمْ قَالَ وَكَانَ مَنْزِلِي فِي بَنِي أُمَيَّةَ بْنِ زَيْدٍ بِالْعَوَالِي قَالَ فَتَغَضَّبْتُ يَوْمًا عَلَى امْرَأَتِي فَإِذَا هِيَ تُرَاجِعُنِي فَأَنْكَرْتُ أَنْ تُرَاجِعَنِي فَقَالَتْ مَا تُنْكِرُ أَنْ أُرَاجِعَكَ فَوَاللَّهِ إِنَّ أَزْوَاجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيُرَاجِعْنَهُ وَتَهْجُرُهُ إِحْدَاهُنَّ الْيَوْمَ إِلَى اللَّيْلِ قَالَ فَانْطَلَقْتُ فَدَخَلْتُ عَلَى حَفْصَةَ فَقُلْتُ أَتُرَاجِعِينَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ نَعَمْ قُلْتُ وَتَهْجُرُهُ إِحْدَاكُنَّ الْيَوْمَ إِلَى اللَّيْلِ قَالَتْ نَعَمْ قُلْتُ قَدْ خَابَ مَنْ فَعَلَ ذَلِكَ مِنْكُنَّ وَخَسِرَ أَفَتَأْمَنُ إِحْدَاكُنَّ أَنْ يَغْضَبَ اللَّهُ عَلَيْهَا لِغَضَبِ رَسُولِهِ فَإِذَا هِيَ قَدْ هَلَكَتْ لَا تُرَاجِعِي رَسُولَ اللَّهِ وَلَا تَسْأَلِيهِ شَيْئًا وَسَلِينِي مَا بَدَا لَكِ وَلَا يَغُرَّنَّكِ إِنْ كَانَتْ جَارَتُكِ هِيَ أَوْسَمَ وَأَحَبَّ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ مِنْكِ يُرِيدُ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَ وَكَانَ لِي جَارٌ مِنْ الْأَنْصَارِ وَكُنَّا نَتَنَاوَبُ النُّزُولَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَنْزِلُ يَوْمًا وَأَنْزِلُ يَوْمًا فَيَأْتِينِي بِخَبَرِ الْوَحْيِ وَغَيْرِهِ وَآتِيهِ بِمِثْلِ ذَلِكَ قَالَ وَكُنَّا نَتَحَدَّثُ أَنَّ غَسَّانَ تُنْعِلُ الْخَيْلَ لِتَغْزُوَنَا فَنَزَلَ صَاحِبِي يَوْمًا ثُمَّ أَتَانِي عِشَاءً فَضَرَبَ بَابِي ثُمَّ نَادَانِي فَخَرَجْتُ إِلَيْهِ فَقَالَ حَدَثَ أَمْرٌ عَظِيمٌ قُلْتُ وَمَاذَا أَجَاءَتْ غَسَّانُ قَالَ لَا بَلْ أَعْظَمُ مِنْ ذَلِكَ وَأَطْوَلُ طَلَّقَ الرَّسُولُ نِسَاءَهُ فَقُلْتُ قَدْ خَابَتْ حَفْصَةُ وَخَسِرَتْ قَدْ كُنْتُ أَظُنُّ هَذَا كَائِنًا حَتَّى إِذَا صَلَّيْتُ الصُّبْحَ شَدَدْتُ عَلَيَّ ثِيَابِي ثُمَّ نَزَلْتُ فَدَخَلْتُ عَلَى حَفْصَةَ وَهِيَ تَبْكِي فَقُلْتُ أَطَلَّقَكُنَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ لَا أَدْرِي هُوَ هَذَا مُعْتَزِلٌ فِي هَذِهِ الْمَشْرُبَةِ فَأَتَيْتُ غُلَامًا لَهُ أَسْوَدَ فَقُلْتُ اسْتَأْذِنْ لِعُمَرَ فَدَخَلَ الْغُلَامُ ثُمَّ خَرَجَ إِلَيَّ فَقَالَ قَدْ ذَكَرْتُكَ لَهُ فَصَمَتَ فَانْطَلَقْتُ حَتَّى أَتَيْتُ الْمِنْبَرَ فَإِذَا عِنْدَهُ رَهْطٌ جُلُوسٌ يَبْكِي بَعْضُهُمْ فَجَلَسْتُ قَلِيلًا ثُمَّ غَلَبَنِي مَا أَجِدُ فَأَتَيْتُ الْغُلَامَ فَقُلْتُ اسْتَأْذِنْ لِعُمَرَ فَدَخَلَ الْغُلَامُ ثُمَّ خَرَجَ عَلَيَّ فَقَالَ قَدْ ذَكَرْتُكَ لَهُ فَصَمَتَ فَخَرَجْتُ فَجَلَسْتُ إِلَى الْمِنْبَرِ ثُمَّ غَلَبَنِي مَا أَجِدُ فَأَتَيْتُ الْغُلَامَ فَقُلْتُ اسْتَأْذِنْ لِعُمَرَ فَدَخَلَ ثُمَّ خَرَجَ إِلَيَّ فَقَالَ قَدْ ذَكَرْتُكَ لَهُ فَصَمَتَ فَوَلَّيْتُ مُدْبِرًا فَإِذَا الْغُلَامُ يَدْعُونِي فَقَالَ ادْخُلْ فَقَدْ أَذِنَ لَكَ فَدَخَلْتُ فَسَلَّمْتُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا هُوَ مُتَّكِئٌ عَلَى رَمْلِ حَصِيرٍ ح و حَدَّثَنَاه يَعْقُوبُ فِي حَدِيثِ صَالِحٍ قَالَ رُمَالِ حَصِيرٍ قَدْ أَثَّرَ فِي جَنْبِهِ فَقُلْتُ أَطَلَّقْتَ يَا رَسُولَ اللَّهِ نِسَاءَكَ فَرَفَعَ رَأْسَهُ إِلَيَّ وَقَالَ لَا فَقُلْتُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَوْ رَأَيْتَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَكُنَّا مَعْشَرَ قُرَيْشٍ قَوْمًا نَغْلِبُ النِّسَاءَ فَلَمَّا قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ وَجَدْنَا قَوْمًا تَغْلِبُهُمْ نِسَاؤُهُمْ فَطَفِقَ نِسَاؤُنَا يَتَعَلَّمْنَ مِنْ نِسَائِهِمْ فَتَغَضَّبْتُ عَلَى امْرَأَتِي يَوْمًا فَإِذَا هِيَ تُرَاجِعُنِي فَأَنْكَرْتُ أَنْ تُرَاجِعَنِي فَقَالَتْ مَا تُنْكِرُ أَنْ أُرَاجِعَكَ فَوَاللَّهِ إِنَّ أَزْوَاجَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيُرَاجِعْنَهُ وَتَهْجُرُهُ إِحْدَاهُنَّ الْيَوْمَ إِلَى اللَّيْلِ فَقُلْتُ قَدْ خَابَ مَنْ فَعَلَ ذَلِكَ مِنْهُنَّ وَخَسِرَ أَفَتَأْمَنُ إِحْدَاهُنَّ أَنْ يَغْضَبَ اللَّهُ عَلَيْهَا لِغَضَبِ رَسُولِهِ فَإِذَا هِيَ قَدْ هَلَكَتْ فَتَبَسَّمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَدَخَلْتُ عَلَى حَفْصَةَ فَقُلْتُ لَا يَغُرُّكِ إِنْ كَانَتْ جَارَتُكِ هِيَ أَوْسَمَ وَأَحَبَّ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْكِ فَتَبَسَّمَ أُخْرَى فَقُلْتُ أَسْتَأْنِسُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ نَعَمْ فَجَلَسْتُ فَرَفَعْتُ رَأْسِي فِي الْبَيْتِ فَوَاللَّهِ مَا رَأَيْتُ فِيهِ شَيْئًا يَرُدُّ الْبَصَرَ إِلَّا أَهَبَةً ثَلَاثَةً فَقُلْتُ ادْعُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنْ يُوَسِّعَ عَلَى أُمَّتِكَ فَقَدْ وُسِّعَ عَلَى فَارِسَ وَالرُّومِ وَهُمْ لَا يَعْبُدُونَ اللَّهَ فَاسْتَوَى جَالِسًا ثُمَّ قَالَ أَفِي شَكٍّ أَنْتَ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ أُولَئِكَ قَوْمٌ عُجِّلَتْ لَهُمْ طَيِّبَاتُهُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فَقُلْتُ اسْتَغْفِرْ لِي يَا رَسُولَ اللَّهِ وَكَانَ أَقْسَمَ أَنْ لَا يَدْخُلَ عَلَيْهِنَّ شَهْرًا مِنْ شِدَّةِ مَوْجِدَتِهِ عَلَيْهِنَّ حَتَّى عَاتَبَهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] स [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन अबू त्साउर] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर बिन अल खथथब] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दू पत्नी के बारे में पूछैत रहलौं जेकर जिक्र अल्लाह तआला के शब्द में अछि: 'जँ अहाँ दुनू गोटे अल्लाह के पास पश्चाताप करब, तखन वास्तव में अहाँ दुनू के दिल -भलाई स्वीकार करबाक लेल-,' -QS तहरिम आयत 4- पर, जाबत तक जखन उमर हज केने छलाह तखन हम हुनका संग हज सेहो केने रही, जखन कि 1990 में यात्राक बीच मे उमर एकटा बर्तन ल' क' खींच लेलनि आ हमहूँ हुनका संग गेलहुँ, तखन ओ शौच केलनि आ तकर बाद ओ हमरा लग आबि गेलाह आ हम हुनकर दुनू हाथ पर ढारि देलियनि तखन ओ वजूद केलनि, हम पुछलियनि; 'हे अमीरुल मुकमिनिन जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ दू पत्नी छै जेकरऽ जिक्र अल्लाह केरऽ शब्दऽ म॑ करलऽ गेलऽ छै: 'जदि तोहें दोनों अल्लाह के पास पश्चाताप करबै, त॑ सचमुच तोरऽ दोनों के दिल -भलाई क॑ स्वीकार करै लेली-' -QS At Tahrim verse 4-?' त उमर जवाब देलखिन: ‘हे इब्न अब्बास, अहाँ केहन आश्चर्यक बात छी,’ -अज जुहरी कहलनि; अल्लाह के कसम उमर के इब्न अब्बास के पूछल बात नीक नै लागल आ ओ एकरा कोनो रहस्य नै बनौलखिन- उमर जवाब देलखिन; 'ओ हफशाह आ ऐस्याह छथि'। इब्न अब्बास कहलनि; 'तखन उमर हदीसक जिक्र करय लगलाह, ओ कहलनि; 'हम, कुरैश लोक, एकटा एहन लोक छलहुँ जकरा अपन पत्नी पर अधिकार छलैक, तखन जखन मदीना पहुँचलहुँ त' हमरा सभ केँ एहन लोक भेटल जकर पत्नीक पति पर अधिकार छलैक, आ हमर पत्नी सभ अपन पत्नीक लगभग नकल करैत छलीह,' उमर कहलनि; 'ओहि समय हमर घर बानी उमैया बिन जैद गामक अवली इलाका मे छल, एक दिन हम अपन पत्नी पर तमसा गेल रही, मुदा पता चलल जे ओ हमरा सं लड़ि रहल छलीह, तें हम हुनकर विरोध सं इनकार केलहुं तें ओ पुछलीह; 'अहाँ हमर विरोध के अहाँ के किएक नकारैत छी, अल्लाह के लेल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी सब हुनकर विरोध तक केलनि, एक दिन ओहि में स एकटा त साँझ तक हुनका स दूर तक रहलाह'। उमर बजलाह; तखन हम जा कऽ हफशाह मे आबि पुछलियनि। 'की अहाँ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खिलाफ लड़लौं?' ओ उत्तर देलथिन; 'हँ' हम फेर पुछलियनि; 'आ अहाँ सभ मे सँ एक गोटे दिनक इजोत सँ राति धरि एहि सँ दूर रहैत छी?' ओ उत्तर देलथिन; 'हँ' हम कहलियनि; 'सत्ते ई एकटा बर्बादी आ नुकसान अछि अहाँ मे सँ जे कियो ई काज करैत अछि, की अहाँ मे सँ कियो अल्लाह केर कोप सँ सुरक्षित महसूस करत किएक त' हुनकर रसूलुल्लाह अहाँ पर क्रोधित छलाह, तखन वास्तव मे ओ नाश भ' गेल छथि, अल्लाह केर रसूलुल्लाह सँ कोनो तरहक मांग नहि करू, आ हमरा सँ जे चाही से पूछू, ईर्ष्या नहि करू जँ अहाँक पड़ोसी अहाँ सँ बेसी सुन्दर अछि आ अल्लाह केर रसूलुल्लाह सँ बेसी प्रेम करैत अछि।' सल्लल्लाहु 'अलैहि वसल्लम'। हुनकर की मतलब छलनि ऐस्याह, उमर कहलनि; 'हमर अंसार के एकटा पड़ोसी छल आ हम सब बारी-बारी स रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ओतय जाइत छलहुं, एक दिन ओ उपस्थित छलाह आ एक दिन हम उपस्थित छलहुं, फेर ओ खुलासी आ अन्य समस्या के खबर ल क हमरा लग आयल छलाह, आ हमहूँ हुनका लग ओहिना गेल छलहुं'। उमर बजलाह; 'आ हम सभ घस्सनक गप्प केलहुँ जे ओ सभ हमरा सभसँ लड़बाक लेल घुड़सवार सभकेँ तैयार कएने छल ।' एक दिन हमर मित्र जे घुमैत छलाह - नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम - ईशा के समय हमरा लग आबि हमर दरबज्जा खटखटौलनि, तखन ओ हमरा बजौलनि आ हम हुनका सं भेंट करय लेल बाहर आबि गेलहुं, तखन ओ कहलनि; 'बहुत पैघ घटना घटल अछि'। हम पुछलियनि; 'की अनैत छी, घसनक समाचारक विषय मे?' ओ उत्तर देलथिन; 'नहि, खबर त' ओहि सँ बेसी पैघ आ नमहर अछि, अर्थात ई खबर जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन पत्नी सँ ठकने छलाह'। तेँ हम कहलियनि; 'हफशाह के लेल ई व्यर्थ आ नुकसान भेल अछि आ हमरा पहिने शंका छल जे एहन होयत,' भोरका नमाज समाप्त केलाक बाद हम अपन कपड़ा जकड़ि लेलहुँ फेर हमरा लग चलि गेलहुँ । हफशाह सं भेंट भेल आ पता चलल जे ओ कानि रहल छलाह, तें हम पुछलियनि; 'की नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मानसिक रूप स अहाँ के खारिज क देने छथि?' ओ उत्तर देलथिन; 'पता नहि, आब ओ पीबय बला जगह मे असगर भ' गेल छथि'। अस्तु, अल्लाह केर रसूलुल्लाह केर कारी नौकर सँ भेंट भेल आ हम कहलियनि; ‘उमर के अनुमति माँगू,’ तखन नौकर भीतर आबि गेल तखन फेर बाहर आबि कहलक; 'हम अहाँक रिपोर्ट हुनका लग केने छी मुदा ओ चुप भ' गेल छथि'। तखन हम मंच पर गेलहुं आ पता चलल जे एकर चारूकात बहुत लोक बैसल छलाह आ किछु गोटे कानि रहल छलाह, तें हम किछु काल बैसल रही, मुदा जे अनुभव क रहल छलहुं से हमरा पर हावी भ गेल तें अल्लाह केर रसूलुल्लाह केर सेवक सं भेंट भेल आ हम कहलियनि; ‘उमर सँ अनुमति माँगू,’ तखन ओ भीतर आबि हमरा सँ भेंट करय लेल घुरि क’ बाहर आबि कहलनि; 'हम अहाँक रिपोर्ट हुनका लग क' देने छी मुदा ओ चुप छथि'। तखन हम बाहर आबि मंच पर बैसि गेलहुँ मुदा जे अनुभव भेल से हमरा पर हावी भ गेल तेँ फेर नौकर लग गेलहुँ आ कहलियैक; 'उमर के अनुमति माँगें'। तखन ओ भीतर आबि हमरा लग वापस आबि कहलनि; 'हम अहाँक रिपोर्ट हुनका लग केने छी मुदा ओ चुप रहलाह' । अंततः हम चलि गेलहुँ, मुदा अचानक नोकर हमरा बजा कऽ कहलक; 'भीतर आऊ, ओ अहाँकेँ अनुमति द' देने अछि'। अस्तु हम भीतर गेलहुं आ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नमस्कार केलहुं, जखन ओ कढ़ाई वाला चटाई पर झुकल छलाह. आ हदीस [सालिह] सँ हमरा सभ [या'कुब] केँ सुनाबैत ओ कहलनि; 'कि नबी बुनल चटाई पर झुकल छलाह जाहि सं हुनकर शरीरक कात मे छाप छोड़ि गेलनि,' तखन हम - उमर - पुछलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की अहाँ अपन पत्नी के तलाक द' देने छी?' ओ हमरा दिस माथ उठबैत बजलाह; 'नहि,' तखन हम तकबीर अल्लाहु अकबर - अल्लाह महान छथि - कहलियनि, जँ अहाँ हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह हमरा सभ केँ देखलहुँ, आ हम सभ कुरैश एहन लोक छलहुँ जकर पत्नी पर अधिकार छल, मुदा मदीना एलाक बाद हमरा सभ केँ एकटा एहन लोक भेटल जकर पत्नीक पति पर अधिकार छल, आ लगभग हमर सभक पत्नी अपन पत्नीक नकल करैत छलीह, तखन एक दिन हम अपन पत्नी पर तमसा गेलहुँ, मुदा पता चलल जे ओ हमरा खिलाफ छलीह, हम हुनका सँ इनकार क' देलियनि हमरा प्रति प्रतिरोध तेँ ओ पुछलीह; 'अहाँ हमर विरोध के अहाँ के किएक नकारैत छी, अल्लाह के लेल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी सब हुनकर विरोध तक केलनि, एक दिन ओहि में स एकटा त साँझ तक हुनका स दूर तक रहलाह।' तेँ हम कहलियनि; 'सत्ते ई एकटा बर्बादी आ नुकसान अछि हुनका सभ मे सँ जे कियो ई काज करैत अछि, की हुनका सभ मे सँ कियो अपन रसूलुल्लाह केर क्रोधक कारण अल्लाह केर कोप सँ सुरक्षित महसूस करत, तखन वास्तव मे ओ नष्ट भ' गेल रहितथि,' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुस्कुराइत बजलाह, हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह हम हफशाह स भेंट केलहुं आ हम कहलियनि; 'जँ अहाँक पड़ोसी अहाँ सँ बेसी सुन्दर अछि आ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ बेसी प्रेम करैत अछि त' ईर्ष्या नहि करू', ओ फेर मुस्कुराइत बजलाह, आ हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा अनुमति दिअ'। नबी उत्तर देलखिन: 'हँ'। तखन हम बैसि घरक ऊपर माथ उठेलहुँ, तखन अल्लाहक कसम, हमरा तीन खाल छोड़ि कोनो एहन चीज नहि देखबा मे आयल जे हमर आँखि केँ मोड़ि सकय, तें हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अपनऽ उम्मा के विशालता के लेलऽ दुआ करऽ, कैन्हेंकि फारसी आरू रोमन ओकरा लेली विशाल रहलऽ छै, भले ही वू अल्लाह के इबादत नै करै छै' । ओ अपन आसन सोझ क’ कहलनि: ‘की अहाँ मे कोनो संदेह अछि, हे इब्नुल खथथाब, ई सब एहन लोक अछि जे सांसारिक जीवन मे अपन भोग मे तेजी अनैत अछि’। हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा लेल माफी माँगू' आ ओ एक महीना धरि अपन पत्नी सभ लग नहि आबय के कसम खा लेने छलाह, कारण ओ हुनका सभ पर एतेक क्रोधित छलाह जे अल्लाह हुनका डाँटि देलनि'।
Imam Ahmad : 218
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنِي يُونُسُ بْنُ سُلَيْمٍ قَالَ أَمْلَى عَلَيَّ يُونُسُ بْنُ يَزِيدَ الْأَيْلِيُّ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدٍ الْقَارِيِّ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ كَانَ إِذَا نَزَلَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْوَحْيُ يُسْمَعُ عِنْدَ وَجْهِهِ دَوِيٌّ كَدَوِيِّ النَّحْلِ فَمَكَثْنَا سَاعَةً فَاسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ وَرَفَعَ يَدَيْهِ فَقَالَ اللَّهُمَّ زِدْنَا وَلَا تَنْقُصْنَا وَأَكْرِمْنَا وَلَا تُهِنَّا وَأَعْطِنَا وَلَا تَحْرِمْنَا وَآثِرْنَا وَلَا تُؤْثِرْ عَلَيْنَا وَارْضَ عَنَّا وَأَرْضِنَا ثُمَّ قَالَ لَقَدْ أُنْزِلَتْ عَلَيَّ عَشْرُ آيَاتٍ مَنْ أَقَامَهُنَّ دَخَلَ الْجَنَّةَ ثُمَّ قَرَأَ عَلَيْنَا { قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ } حَتَّى خَتَمَ الْعَشْرَ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा [युनुस बिन सुलैम] के कहने अछि ओ कहलनि; हमरा [यूनुस बिन यजीद अल ऐली] के [इब्नु शिहाब] स ['उरवाह बिन अज जुबैर] स [अब्दुररहमान बिन अब्दुल कारी] स डिक्टेट केने छथि ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [उमर बिन अल खथथब] कहैत छथि; जखन अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास कोनो ववाही आयल त हुनका चेहरा पर ततैया के आवाज जेकाँ गर्जना सुनाई पड़लनि, ताहि लेल हम सब एक क्षण इंतजार करब बंद क देलहुं, फेर ओ किबला के सामने आबि गेलाह आ अल्लाहम्मा जिदना वाला तनकुशना वा अक्रिमना वला तुहिन्ना व तुहिना नमाज पढ़ैत दुनू हाथ उठौलनि वला तहरीम्ना वा आतसिरना वला तु'त्सिर अलईना वर्डला 'अन्ना वा अर्दलीना - हे अल्लाह, हमरा सब में जोड़ू आ हमरा सब स नै छीनू, हमरा सब के महिमामंडन करू आ हमरा सब के अपमानित नै करू, हमरा सब के दियौ आ नै रोकू, हमरा सब के जीतू आ हमरा सब के दुश्मन के जीत नै करू, हमरा सब स प्रसन्न रहू आ हमरा सब के खुश करू - तखन ओ कहलनि: 'हमरा पर दस आयत उतारल गेल अछि, जे पूरा करत से स्वर्ग मे प्रवेश करत'। तखन ओ हमरा सभ केँ पढ़लनि: 'सत्ते, भाग्यशाली छथि जे विश्वास करैत छथि' -QS अल मुकमिनुन: 1-10-'।
Imam Ahmad : 219
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ مَوْلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ شَهِدَ الْعِيدَ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَصَلَّى قَبْلَ أَنْ يَخْطُبَ بِلَا أَذَانٍ وَلَا إِقَامَةٍ ثُمَّ خَطَبَ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ صِيَامِ هَذَيْنِ الْيَوْمَيْنِ أَمَّا أَحَدُهُمَا فَيَوْمُ فِطْرِكُمْ مِنْ صِيَامِكُمْ وَعِيدُكُمْ وَأَمَّا الْآخَرُ فَيَوْمٌ تَأْكُلُونَ فِيهِ مِنْ نُسُكِكُمْ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنَا الزُّهْرِيُّ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي عُبَيْدٍ مَوْلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَزْهَرَ قَالَ شَهِدْتُ الْعِيدَ مَعَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ
हमरा सब के कहल गेल अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [मा'मर] के [अज ज़ुहरी] स [अबू उबैद, अब्दुररहमान बिन औफ के गुलाम] स कहने छथि जे ओ [उमर बिन अल खथथब] के संग सहायता के नमाज के गवाह बनलाह, फेर उमर बिना नमाज के आह्वान आ इकामत के प्रवचन देबा स पहिने नमाज केलखिन, फेर ओ प्रवचन देलखिन आ कहलनि; 'हे लोक, सचमुच अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एहि दू दिन के रोजा मना क देने छथि, जाहि मे एकटा एहि लेल जे ई ओहि दिन अछि जखन अहाँ अपन रोजा तोड़ैत छी आ अहाँक भोज के दिन, जखन कि दोसर एहि लेल जे ई ओहि दिन अछि जखन अहाँ अपन कत्लल मांस खाइत छी'। हमरा सब के [या'कुब] हमरा सब के [हमर पिता] के [मुहम्मद बिन इशाक] स कहलक अछि [स'द बिन अबू उबैद, अब्दुररहमान बिन अजहर के गुलाम] स हमरा सब के [अज जुहरी] के कहलक अछि ओ कहलक; 'हम उमर बिन अल खथथब के संग एड के छुट्टी देखलहुं, तखन ओ उपरोक्त हदीस के जिक्र केलनि।'
Imam Ahmad : 220
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَبَّلَ الْحَجَرَ ثُمَّ قَالَ قَدْ عَلِمْتُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَوْلَا أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَكَ مَا قَبَّلْتُكَ
हमरा सब के [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन उमर] के [इब्न उमर] स [नफी'] स कहलक अछि जे [उमर] कारी पत्थर के चुम्मा लेलक, फेर कहलक; 'सत्ते हम जनैत छी जे अहाँ त' मात्र पाथर छी, जँ हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ अहाँ केँ चुम्मा लैत नहि देखितहुँ त' हम निश्चित रूप सँ अहाँ केँ चुम्मा नहि लेने रहितहुँ'।