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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ahmad (الامام احمد) - 26363 Hadith

Hadith

Imam Ahmad : 181

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ أَنَا سَأَلْتُهُ حَدَّثَنَا هِشَامٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ يَوْمَ جُمُعَةٍ فَذَكَرَ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَذَكَرَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَالَ إِنِّي قَدْ رَأَيْتُ كَأَنَّ دِيكًا قَدْ نَقَرَنِي نَقْرَتَيْنِ وَلَا أُرَاهُ إِلَّا لِحُضُورِ أَجَلِي وَإِنَّ أَقْوَامًا يَأْمُرُونِي أَنْ أَسْتَخْلِفَ وَإِنَّ اللَّهَ لَمْ يَكُنْ لِيُضِيعَ دِينَهُ وَلَا خِلَافَتَهُ وَالَّذِي بَعَثَ بِهِ نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنْ عَجِلَ بِي أَمْرٌ فَالْخِلَافَةُ شُورَى بَيْنَ هَؤُلَاءِ السِّتَّةِ الَّذِينَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَنْهُمْ رَاضٍ وَإِنِّي قَدْ عَلِمْتُ أَنَّ قَوْمًا سَيَطْعُنُونَ فِي هَذَا الْأَمْرِ أَنَا ضَرَبْتُهُمْ بِيَدِي هَذِهِ عَلَى الْإِسْلَامِ فَإِنْ فَعَلُوا فَأُولَئِكَ أَعْدَاءُ اللَّهِ الْكَفَرَةُ الضُّلَّالُ وَإِنِّي لَا أَدَعُ بَعْدِي شَيْئًا أَهَمَّ إِلَيَّ مِنْ الْكَلَالَةِ وَمَا أَغْلَظَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي شَيْءٍ مُنْذُ صَاحَبْتُهُ مَا أَغْلَظَ لِي فِي الْكَلَالَةِ وَمَا رَاجَعْتُهُ فِي شَيْءٍ مَا رَاجَعْتُهُ فِي الْكَلَالَةِ حَتَّى طَعَنَ بِإِصْبَعِهِ فِي صَدْرِي وَقَالَ يَا عُمَرُ أَلَا تَكْفِيكَ آيَةُ الصَّيْفِ الَّتِي فِي آخِرِ سُورَةِ النِّسَاءِ فَإِنْ أَعِشْ أَقْضِي فِيهَا قَضِيَّةً يَقْضِي بِهَا مَنْ يَقْرَأُ الْقُرْآنَ وَمَنْ لَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أُشْهِدُكَ عَلَى أُمَرَاءِ الْأَمْصَارِ فَإِنَّمَا بَعَثْتُهُمْ لِيُعَلِّمُوا النَّاسَ دِينَهُمْ وَسُنَّةَ نَبِيِّهِمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيَقْسِمُوا فِيهِمْ فَيْئَهُمْ وَيَعْدِلُوا عَلَيْهِمْ وَيَرْفَعُوا إِلَيَّ مَا أَشْكَلَ عَلَيْهِمْ مِنْ أَمْرِهِمْ أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَأْكُلُونَ مِنْ شَجَرَتَيْنِ لَا أُرَاهُمَا إِلَّا خَبِيثَتَيْنِ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا وَجَدَ رِيحَهُمَا مِنْ الرَّجُلِ فِي الْمَسْجِدِ أَمَرَ بِهِ فَأُخِذَ بِيَدِهِ فَأُخْرِجَ إِلَى الْبَقِيعِ وَمَنْ أَكَلَهُمَا فَلْيُمِتْهُمَا طَبْخًا

हमरा सब के [याह्या बिन सईद] कहलक अछि जे हम हुनका स पूछलौं, हमरा सब स कहलक अछि [हिस्यम] हमरा सब के [कतादह] के [सलीम बिन अबुल जा'द] स [मदन बिन अबू थल्हाह अल या'मारी] स कहलक अछि जे [उमर बिन अल खथथब] शुक्र दिन मंच पर ठाढ़ छलाह, फेर अल्लाह के स्तुति आ महिमामंडन केलनि आ फेर रसुलुल्लाह के नाम लेलनि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ अबू बकर तखन कहलनि; 'हमरा सपना आयल छल आ हमरा लागल जे ई हमर मृत्युक संकेत अछि, हम सपना देखलहुँ जेना मुर्गा हमरा दू बेर चुभल हो' -म'दान बाजल; ओ -उमर- कहलनि जे मुर्गी लाल छल, - तखन हम अबू बकरक पत्नी असमा' बिंत उमैस केँ कहलियनि, तें ओ बजलीह; 'अजाम आदमी -विदेशी/अरब के अलावा- तोरा मारि देत'। उमर बजलाह; 'आरू सचमुच, लोगऽ न॑ हमरा उत्तराधिकारी नियुक्त करै के आदेश देल॑ छै, आरू सचमुच अल्लाह अपनऽ धर्म आरू नेतृत्व क॑ बर्बाद नै करतै, जेकरा स॑ हुनी अपनऽ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क॑ भेजलकै, अगर हमरा स॑ पहल॑ मौत होय जाय त॑ हम्में ई मामला क॑ छह लोगऽ के बीच चर्चा करै लेली सौंप देबै जे जब॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ मौत होय गेलै त॑ वू ओकरा स॑ खुश होय गेलै, त॑ ओकरा म॑ स॑ जेकरा भी आपने गुहार लगाबै अहाँ के प्रति वफादारी सुनबाक चाही आ मानबाक चाही, आ सचमुच हमरा बुझल अछि जे एहन लोक छथि जे एहि मामला के बाधित करत आ हम इस्लाम के आधार पर हुनका सब स अपन हाथ स लड़ब, ओ सब अल्लाह के दुश्मन छथि, काफिर आ पाखण्डी, अल्लाह के कसम हम जे हमर रब्ब हमरा स वादा केने छथि ओकरा नहि छोड़ब, तखन हमरा जगह पर हमरा लेल अल कलाला स बेसी महत्वपूर्ण चीज - कियो जे मरि जायत आ पिता आ बेटा के पाछू नहि छोड़ब -, आ अल्लाह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के द्वारा हमरा लेल अतीत के बाद स कहियो एहन कोनो बात पर जोर नै देलखिन जे अल कलाला के मामला में हमरा प्रति हुनकर दृढ़ता स बेसी छल, जाबे तक ओ हमर छाती पर अपन आँगुर नै मारि देलखिन आ कहलखिन: 'सूरह आन निसा के अंत में राख शोइफ आयत में अहाँ के लेल इ काफी अछि', आ सचमुच, जौं हम जीबैत छी त हम मामला के फैसला एहन निर्णय स करब जे ओहि सब के पता भ सकैत अछि जे पढ़ै छै आरू जे नै पढ़ै छै, आरू हम देश के नेता सिनी के ऊपर अल्लाह के गवाही दै छियै, हम्में ओकरा खाली ऐसनऽ लेली भेजलकै कि वू लोगऽ क॑ अपनऽ धार्मिक मामला के बारे म॑ सिखाबै आरू ताकि वू अपनऽ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के सुन्नत के बारे म॑ समझै, तखनिये हमरा स॑ शिकायत करै कि ओकरा जे नै पता छै, वास्तव म॑ तोहें, हे लोग, दू गाछ खाबै जेकरा हम्में नै मानै छियै सिवाय ई कि वू गंदा छै, यानी लहसुन आरू शलोट, द्वारा अल्लाह हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एकटा आदमी स गंध सूंघैत देखलहुं अछि, फेर ओ हुनका आदेश देलथि जे हुनकर हाथ पकड़ि लेथि आ फेर मस्जिद स बाहर निकलि जाथि जा धरि ओ बकी नहि पहुंच जाएत, ताहि लेल जे कियो दुनू कए खाएत ओ ता धरि पकाबथि जा धरि कोनो गंध नहि आबि जाएत।'

Hadith

Imam Ahmad : 182

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ عَنْ مُجَالِدٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ لِطَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ مَا لِي أَرَاكَ قَدْ شَعِثْتَ وَاغْبَرَرْتَ مُنْذُ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَعَلَّكَ سَاءَكَ يَا طَلْحَةُ إِمَارَةُ ابْنِ عَمِّكَ قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ إِنِّي لَأَجْدَرُكُمْ أَنْ لَا أَفْعَلَ ذَلِكَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنِّي لَأَعْلَمُ كَلِمَةً لَا يَقُولُهَا أَحَدٌ عِنْدَ حَضْرَةِ الْمَوْتِ إِلَّا وَجَدَ رُوحَهُ لَهَا رَوْحًا حِينَ تَخْرُجُ مِنْ جَسَدِهِ وَكَانَتْ لَهُ نُورًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَلَمْ أَسْأَلْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْهَا وَلَمْ يُخْبِرْنِي بِهَا فَذَلِكَ الَّذِي دَخَلَنِي قَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَنَا أَعْلَمُهَا قَالَ فَلِلَّهِ الْحَمْدُ فَمَا هِيَ قَالَ هِيَ الْكَلِمَةُ الَّتِي قَالَهَا لِعَمِّهِ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ قَالَ طَلْحَةُ صَدَقْتَ

हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन नुमैर] के [मुजालिद] स [अमीर] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स कहला के बाद ओ कहलनि; हम सुनलहुँ [उमर बिन अल खथथब] तलहा बिन उबैदिल्लाह केँ कहैत; 'हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निधन के बाद तोहर केश बिखरल आ धूल-धूसरित किएक देखैत छी, शायद अहाँक काका के बेटा के नेतृत्व अहाँ के दयनीय बना देने अछि हे तल्हा?' ओ उत्तर देलथिन; 'हम अल्लाह के शरण लैत छी, वास्तव में हम अहाँ स नीक छी जे एहन नै करी, वास्तव में हम अल्लाह के रसूलुल्लाह के कहैत सुनने छी जे: 'सत्ते हम एकटा वाक्य के जनैत छी जे जौं व्यक्ति मृत्यु के सामना करय के समय एकरा उच्चारण करत त निश्चित रूप स अपन आत्मा के सहज हालत में भेटत जखन ओ ओकर शरीर स बाहर निकलत आ कयामत के दिन इजोत होयत,' मुदा हमरा अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाह स पूछबाक समय नै भेटल अछि 'अलैहि वसल्लम एहि बारे मे आ ओ हमरा एहि बारे मे नहि कहने छथि, इएह हमरा एहन बना दैत अछि,' उमर कहलनि; 'हमरा पता छै, तखन सब स्तुति अल्लाह के छै, जे कहलक ओकरा अलावा किछु नै छल जे ओ अपन काका के कहलक वाक्य छल, अर्थात 'ला इलाहा इल्लाल्लाह'। [थल्हाह] कहलक; 'अहाँ सही कहैत छी'।

Hadith

Imam Ahmad : 183

حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ أَنْبَأَنَا أَبُو عُمَيْسٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ مِنْ الْيَهُودِ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ آيَةً فِي كِتَابِكُمْ لَوْ عَلَيْنَا مَعْشَرَ الْيَهُودِ نَزَلَتْ لَاتَّخَذْنَا ذَلِكَ الْيَوْمَ عِيدًا قَالَ وَأَيُّ آيَةٍ هِيَ قَالَ قَوْلُهُ عَزَّ وَجَلَّ { الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِي } قَالَ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَاللَّهِ إِنَّنِي لَأَعْلَمُ الْيَوْمَ الَّذِي نَزَلَتْ فِيهِ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالسَّاعَةَ الَّتِي نَزَلَتْ فِيهَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَشِيَّةَ عَرَفَةَ فِي يَوْمِ الْجُمُعَةِ

हमरा सब के कहलक अछि [जाफर बिन औन] हमरा सब के [अबू उमैस] के [कायस बिन मुस्लिम] स [थारिक बिन सिहाब] स कहलक अछि ओ कहलनि; एकटा यहूदी आदमी [उमर] लग आबि कहलक; 'हे आस्थावानक सेनापति, सचमुच अहाँ अपन पोथी मे एकटा एहन श्लोक पढ़ने छी, जे जँ हमरा सभ यहूदी सभ केँ प्रकट कयल गेल रहैत त' हम सभ ओहि दिन केँ छुट्टीक दिन बना दैतहुँ।' उमर पुछलकै; 'ओ कोन श्लोक अछि ?' ओ उत्तर देलथिन; 'अल्लाह कहैत छथि: 'आइ हम अहाँक धर्म केँ सिद्ध क' देलहुँ आ अहाँक लेल अपन बरकत सिद्ध केलहुँ'। -QS अल मैइदाह श्लोक 3- त उमर कहलनि; 'सत्ते, हमरा निश्चित रूप सँ पता अछि जे ई आयत कोन दिन आ कहिया नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर उतारल गेल छल, अर्थात अराफा के दिन, शुक्रवार के दुपहर मे'।

Hadith

Imam Ahmad : 184

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ عَيَّاشِ بْنِ أَبِي رَبِيعَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ عَنْ حَكِيمِ بْنِ حَكِيمِ بْنِ عَبَّادِ بْنِ حُنَيْفٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّ رَجُلًا رَمَى رَجُلًا بِسَهْمٍ فَقَتَلَهُ وَلَيْسَ لَهُ وَارِثٌ إِلَّا خَالٌ فَكَتَبَ فِي ذَلِكَ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَكَتَبَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ مَوْلَى مَنْ لَا مَوْلَى لَهُ وَالْخَالُ وَارِثُ مَنْ لَا وَارِثَ لَهُ

हमरा सब के [वाकी'] हमरा सब के [सुफयान] के [अब्दुररहमान बिन अल हरित्स बिन अय्यासी बिन अबू रबियाह] स [हकीम बिन हकीम बिन अब्बाद बिन हुनाइफ] स [अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] स कहल गेल अछि जे एक आदमी दोसर आदमी के तीर स गोली मारि देलक जाबत तक ओकर मौत नै भ गेल, जखन कि ओ -मृतक- के छल अपनऽ माय के चाचा के अलावा कोनो वारिस नै, त॑ वू मामला म॑ अबू उबैदा बिन जर्राह न॑ [उमर] क॑ एगो चिट्ठी लिखलकै कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहल॑ छेलै कि ‘अल्लाह आरू हुनकऽ रसूलुल्लाह वू लोगऽ के रक्षक छै, जेकरा पास रक्षक नै छै आरू मातृक चाचा वू लोगऽ के रक्षक छै, जेकरा पास रक्षक नै छै’ ।

Hadith

Imam Ahmad : 185

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي يَعْفُورٍ الْعَبْدِيِّ قَالَ سَمِعْتُ شَيْخًا بِمَكَّةَ فِي إِمَارَةِ الْحَجَّاجِ يُحَدِّثُ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَهُ يَا عُمَرُ إِنَّكَ رَجُلٌ قَوِيٌّ لَا تُزَاحِمْ عَلَى الْحَجَرِ فَتُؤْذِيَ الضَّعِيفَ إِنْ وَجَدْتَ خَلْوَةً فَاسْتَلِمْهُ وَإِلَّا فَاسْتَقْبِلْهُ فَهَلِّلْ وَكَبِّرْ

हमरा सभकेँ [वाकी’] हमरा सभकेँ [सुफयान] [अबू या’फुर अल ‘अब्दी]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; हम अल हज्जाज के शासनकाल में [मक्का में एक शेख] के [उमर बिन अल खथथब] स कहैत सुनने रही जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका स कहलखिन: हे उमर, अहाँ एकटा मजबूत आदमी छी, ताहि लेल ब्लैक स्टोन पर भीड़ नै करू, कियाक त एहि स कमजोर लोक के चोट पहुंचत। जँ कारी पाथर खाली भेटि जाय तँ ओकरा चुम्मा लिअ, आ जँ नहि तँ तहलील कहैत ओकर मुँह करू आ तकबीर करू'।

Hadith

Imam Ahmad : 186

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ جِبْرِيلَ عَلَيْهِ السَّلَام قَالَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَبِالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ فَقَالَ لَهُ جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام صَدَقْتَ قَالَ فَتَعَجَّبْنَا مِنْهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ قَالَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاكَ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ مَعَالِمَ دِينِكُمْ

हमरा सब के [वाकी’] हमरा सब के [कहमस] के [इब्न बुराइदा] स [याह्या बिन यामर] स [इब्न उमर] स कहल गेल अछि जे जिब्रिल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलखिन; 'आस्था की होइत छैक ?' अतः ओ जवाब देलनि: 'अहाँ सभ केँ अल्लाह, हुनकर फरिश्ता, हुनकर रसूलुल्लाह, अंतिम दिन आ नीक-बेजाय भाग्य पर विश्वास करबाक चाही'। तखन जिब्राईल हुनका कहलथिन। 'अहाँ सही कहैत छी'। ओ -इब्नु उमर- कहलनि; 'त' हम सभ हुनका पर आश्चर्यचकित रहि गेलहुँ, कारण ओ पुछलनि आ फेर पुष्टि केलनि,' ओ कहलनि; तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'ई जिब्रिल छथि जे अहाँक दीन के मामला सिखाबय लेल अहाँक पास आयल छथि'।

Hadith

Imam Ahmad : 187

حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عُرْوَةَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَقْبَلَ اللَّيْلُ وَقَالَ مَرَّةً جَاءَ اللَّيْلُ مِنْ هَهُنَا وَذَهَبَ النَّهَارُ مِنْ هَهُنَا فَقَدْ أَفْطَرَ الصَّائِمُ يَعْنِي الْمَشْرِقَ وَالْمَغْرِبَ

हमरा सभकेँ [वाकी’] हमरा सभकेँ [हिस्यम बिन उरवाह] [अपन पिता उरवाह]सँ [‘अशिम बिन उमर] [अपन पिता]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘अगर राति पड़ि गेल त’ दोसर अवसर पर ओ कहलनि; 'एतय सँ राति अबैत छैक आ एतहि सँ दिन चलि जाइत छैक, तखन व्रत रखनिहारक व्रत तोड़बाक समय भ' जाइत छैक'। हुनकर जे कहबाक छलनि से छल पूब आ पश्चिम।

Hadith

Imam Ahmad : 188

حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَنْبَأَنَا إِسْرَائِيلُ بْنُ يُونُسَ عَنْ عَبْدِ الْأَعْلَى الثَّعْلَبِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَ كُنْتُ مَعَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ إِنِّي رَأَيْتُ الْهِلَالَ هِلَالَ شَوَّالٍ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَا أَيُّهَا النَّاسُ أَفْطِرُوا ثُمَّ قَامَ إِلَى عُسٍّ فِيهِ مَاءٌ فَتَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ فَقَالَ الرَّجُلُ وَاللَّهِ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَا أَتَيْتُكَ إِلَّا لِأَسْأَلَكَ عَنْ هَذَا أَفَرَأَيْتَ غَيْرَكَ فَعَلَهُ فَقَالَ نَعَمْ خَيْرًا مِنِّي وَخَيْرَ الْأُمَّةِ رَأَيْتُ أَبَا الْقَاسِمِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَعَلَ مِثْلَ الَّذِي فَعَلْتُ وَعَلَيْهِ جُبَّةٌ شَامِيَّةٌ ضَيِّقَةُ الْكُمَّيْنِ فَأَدْخَلَ يَدَهُ مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ ثُمَّ صَلَّى عُمَرُ الْمَغْرِبَ

हमरा सब के कहलक अछि [यजीद] हमरा सब के [इजराइल बिन यूनुस] के [अब्दुल अ'ला अतस त्सा`लाबी] स [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स कहलक अछि ओ कहलनि; हम [उमर] के संग छलहुं, अचानक कियो हुनका लग आबि कहलक; 'सत्ते हम अर्धचन्द्र केँ शौवाल मासक निशानी बुझने छी,' उमर बजलाह; 'हे लोक, अपन व्रत तोड़ू'। तखन ओ पानि सँ भरल प्याला पर ठाढ़ भ' गेलाह, फेर वजूद केलनि आ अपन दू टा खुफ पोछलनि, तखन ओ आदमी कहलनि; 'अल्लाह के कसम, हे अमीरुल मु'मिनिन, हम तोरा पास ई बात पूछै के अलावा नै ऐलऽ छेलियै, तोरा छोड़ी क॑ दोसरऽ कोय ई काम करतें देखलऽ छेलियै?' उमर जबाब देलकै; 'हँ, हमरासँ नीक कियो अछि आ ओ उम्मा जकाँ नीक अछि ।' हम देखलहुँ जे अबुल कासिम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा जकाँ करैत छलाह, आ ओ एकटा संकीर्ण शमियाह वस्त्र पहिरने छलाह जाहि मे दू टा आस्तीनक छेद छल, तखन ओ वस्त्रक नीचाँ सँ हाथ निकालि लेलनि'। तखन उमर मगरीब नमाज केलनि।

Hadith

Imam Ahmad : 189

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ إِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يُحَرِّمْ الضَّبَّ وَلَكِنْ قَذِرَهُ و قَالَ غَيْرُ مُحَمَّدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ الْيَشْكُرِيِّ

हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [सईद] के [कतादह] स [सुलेमान] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स कहलक अछि जे [उमर बिन अल खथथब] कहलनि; 'सत्ते, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मॉनिटर बिच्छू के मना नै केलकै लेकिन ओकरा ओकरा स घृणा महसूस भेलै'। आ एकर अतिरिक्त मुहम्मद कहलनि; सुलेमान अल यासिकुरी से।

Hadith

Imam Ahmad : 190

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سَالِمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ اسْتَأْذَنَهُ فِي الْعُمْرَةِ فَأَذِنَ لَهُ فَقَالَ يَا أَخِي لَا تَنْسَنَا مِنْ دُعَائِكَ وَقَالَ بَعْدُ فِي الْمَدِينَةِ يَا أَخِي أَشْرِكْنَا فِي دُعَائِكَ فَقَالَ عُمَرُ مَا أُحِبُّ أَنَّ لِي بِهَا مَا طَلَعَتْ عَلَيْهِ الشَّمْسُ لِقَوْلِهِ يَا أَخِي

हमरा सब के [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के [स्यूबाह] स [अशिम बिन उबैदिल्लाह] स [सलीम] स [अब्दुल्लाह बिन उमर] स [उमर] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, जे ओ हुनका स उमरा करबाक अनुमति मंगलक, तखन ओ एकर अनुमति देलक, ओ कहलक: 'हे हमर भाई, हमरा सब के नहि बिसरब अपन नमाज मे,' आ मदीना मे रहला पर कहलनि: 'हे हमर भाइ हमरा सभ केँ अपन नमाज मे शामिल करू'। तेँ उमर बजलाह; 'हुनकर बातक कारणेँ सूर्य उगैत काल हमरा कतेक नीक लागल; 'हे हमर भाइ'।

Hadith

Imam Ahmad : 191

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَحَجَّاجٌ قَالَ سَمِعْتُ شُعْبَةَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّهُ قَالَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرَأَيْتَ مَا نَعْمَلُ فِيهِ أَقَدْ فُرِغَ مِنْهُ أَوْ فِي شَيْءٍ مُبْتَدَإٍ أَوْ أَمْرٍ مُبْتَدَعٍ قَالَ فِيمَا قَدْ فُرِغَ مِنْهُ فَقَالَ عُمَرُ أَلَا نَتَّكِلُ فَقَالَ اعْمَلْ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ فَكُلٌّ مُيَسَّرٌ أَمَّا مَنْ كَانَ مِنْ أَهْلِ السَّعَادَةِ فَيَعْمَلُ لِلسَّعَادَةِ وَأَمَّا أَهْلُ الشَّقَاءِ فَيَعْمَلُ لِلشَّقَاءِ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सभकेँ [स्यूबाह] आ [हज्जाज] कहलक अछि; हम [स्यूबाह] स [अशिम बिन उबैदिल्लाह] स [सलीम] स [इब्न उमर] स [उमर] स सुनलहुं जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलथि; 'अहाँक की विचार अछि जे हम सभ जे क' रहल छी से कोनो एहन चीज जे स्थापित भ' गेल अछि वा किछु नव अछि वा आयोजित भ' रहल अछि?' ओ उत्तर देलथिन; ‘मामला तय भ’ गेलै,’ तखन उमर पुछलकै; 'की हम सभ बाद मे एहि पर निर्भर नहि रहब?' तखन ओ उत्तर देलनि: 'हे इब्नुल खथथब, करू, कारण सभक लेल काज आसान भ' जायत, जेना जे सुखक मालिक मे अछि, ओ सुखक लेल काज करत, जखन कि जे दुर्दशाक मालिक मे अछि, ओ दुखक काज करत।'

Hadith

Imam Ahmad : 192

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ حَدَّثَنَا الزُّهْرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ خَطَبَ النَّاسَ فَسَمِعَهُ يَقُولُ أَلَا وَإِنَّ أُنَاسًا يَقُولُونَ مَا بَالُ الرَّجْمِ فِي كِتَابِ اللَّهِ الْجَلْدُ وَقَدْ رَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَمْنَا بَعْدَهُ وَلَوْلَا أَنْ يَقُولَ قَائِلُونَ أَوْ يَتَكَلَّمَ مُتَكَلِّمُونَ أَنَّ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ زَادَ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا لَيْسَ مِنْهُ لَأَثْبَتُّهَا كَمَا نُزِّلَتْ

हमरा सब के कहलक अछि [हुसैम] हमरा सब के [अज जुहरी] [उबैदल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] स कहलक अछि हमरा [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] हमरा [अब्दुर्रहमान बिन औफ] के कहने अछि जे [उमर बिन अल खथथब] लोक के सामने प्रवचन देलनि आ ओ -अब्दुरहमान- हुनका कहैत सुनलनि; 'जानू, असल मे लोक कहैत अछि जे पाथर मारबाक कोनो नियम छैक की? भले ही अल्लाह केरऽ किताब म॑ खाली कोड़ा मारै के नियम छै । सचमुच, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पत्थरबाजी के नियम के अंजाम देने छैथ आ हम सब हुनका बाद पत्थरबाजी के नियम के सेहो अंजाम देलहुं, जौं लोक नै कहत या गप्प नै करितथि, जे उमर अल्लाह के किताब में किछु एहन जोड़लखिन जे हुनका स नै छल, हम ओकरा ओहिना निर्धारित करितहुं जेना ओ प्रकट केने छलाह'।

Hadith

Imam Ahmad : 193

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ يَزِيدَ بْنَ خُمَيْرٍ يُحَدِّثُ عَنْ حَبِيبِ بْنِ عُبَيْدٍ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنِ ابْنِ السِّمْطِ أَنَّهُ أَتَى أَرْضًا يُقَالُ لَهَا دَوْمِينُ مِنْ حِمْصَ عَلَى رَأْسِ ثَمَانِيَةَ عَشَرَ مِيلًا فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ فَقُلْتُ لَهُ أَتُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ فَقَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ بِذِي الْحُلَيْفَةِ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ إِنَّمَا أَفْعَلُ كَمَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ قَالَ فَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमरा सब के कहने छथि [मुहम्मद बिन जा'फर] हमरा सब के कहने छथि [स्यूबाह] ओ कहलनि; हम [यजीद बिन खुमैर] स [हबीब बिन उबैद] स [इब्न सिमथी] स [जुबैर बिन नुफैर] स कहैत सुनलहुं जे ओ अठारह मील दूर हिमशा मे दौमैन नामक स्थान पर आबि गेलाह, तखन ओ दू रकाअत के नमाज पढ़लथि, ताहि लेल हम हुनका स पूछलहुं; 'दू रकाअत नमाज केलौं की?' तखन ओ उत्तर देलथिन; 'हम [उमर बिन अल खथथब] के ज़ुल खुलैफा -बीर अली- में दू रकाअत के नमाज पढ़ैत देखलहुं, तखन हम हुनका सं पुछलियनि, ओ जवाब देलनि; 'एकमात्र बात ई जे हम जे देखलहुँ से केलहुँ जे हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ देखलहुँ वा ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम' की केलनि।'

Hadith

Imam Ahmad : 194

قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا أَحْمَد بْن حَنْبَلٍ قَرَأْتُ عَلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَهْدِيٍّ : مَالِكٌ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ دَخَلَ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَسْجِدَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَعُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْطُبُ النَّاسَ فَقَالَ عُمَرُ أَيَّةُ سَاعَةٍ هَذِهِ فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ انْقَلَبْتُ مِنْ السُّوقِ فَسَمِعْتُ النِّدَاءَ فَمَا زِدْتُ عَلَى أَنْ تَوَضَّأْتُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَالْوُضُوءَ أَيْضًا وَقَدْ عَلِمْتَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَأْمُرُ بِالْغُسْلِ

हमरा सब के कहलक अछि अबू अब्दुररहमान हमरा सब के कहने अछि अहमद बिन हनबल; हम [अब्दुररहमान बिन महदी] केँ पढ़लहुँ जाहि मे लिखल अछि, [मलिक] [इब्नु शिहाब] सँ [सलीम बिन अब्दुल्लाह] सँ [इब्नु उमर] सँ ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ एगो साथी शुक्रवार क॑ मस्जिद म॑ प्रवेश करलकै, जबकि [उमर बिन अल खथथब] लोगऽ के सामने प्रवचन द॑ रहलऽ छेलै, तखनिये उमर न॑ पूछलकै; 'कतेक समय अछि ?' तेँ ओ उत्तर देलथिन। 'हे अमीरुल मुकमिनिन हम बाजार स वापस आबि गेलहुं तखन नमाज के आह्वान सुनलहुं आ किछु नहि केलहुं सिवाय तुरंत वजूद केलहुं'। तेँ उमर पुछलखिन; 'आ बस वजूद करब? भले ही तोहें पहले से ही जानते हैं कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नहाए के आदेश देले हैं |

Hadith

Imam Ahmad : 195

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَانَ الْمُشْرِكُونَ لَا يُفِيضُونَ مِنْ جَمْعٍ حَتَّى تُشْرِقَ الشَّمْسُ عَلَى ثَبِيرٍ فَخَالَفَهُمْ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَفَاضَ قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ

[सुफयान] स [अबू इशक] स [अमरू बिन मैमुन] स [उमर बिन अल खथथब] स हमरा सब कए [अब्दुररहमान] कए कहला पर ओ कहला; 'मुश्रिक सब ताबत धरि मुदजदलिफा स नहि निकलल छल जाबत धरि त्साबीर स सूर्य नहि निकलल छल, ताहि लेल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका सब स असहमत भ गेलाह आ सूर्यास्त स पहिने मुजदलिफा स चलि गेलाह'।

Hadith

Imam Ahmad : 196

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ حَدَّثَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُ أَخْبَرَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَأُخْرِجَنَّ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى مِنْ جَزِيرَةِ الْعَرَبِ حَتَّى لَا أَدَعَ إِلَّا مُسْلِمًا

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुरज्जाक] हमरा सब के कहलक अछि [इब्नु जुरैज] हमरा [अबू अज जुबैर] के कहलक अछि जे ओ [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] के कहैत सुनने छल; हमरा [उमर बिन अल खथथब] कहि देने छथि, जे ओ अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छलाह: 'वास्तव में हम अरब प्रायद्वीप स यहूदी आ ईसाई के भगा देब, जाहि स हम मुसलमान के छोड़ि ओहि में नहि छोड़ब'।

Hadith

Imam Ahmad : 197

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ بَيْنَا هُوَ قَائِمٌ يَخْطُبُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَدَخَلَ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَادَاهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَيَّةُ سَاعَةٍ هَذِهِ فَقَالَ إِنِّي شُغِلْتُ الْيَوْمَ فَلَمْ أَنْقَلِبْ إِلَى أَهْلِي حَتَّى سَمِعْتُ النِّدَاءَ فَلَمْ أَزِدْ عَلَى أَنْ تَوَضَّأْتُ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ الْوُضُوءَ أَيْضًا وَقَدْ عَلِمْتُمْ وَفِي مَوْضِعٍ آخَرَ وَقَدْ عَلِمْتَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَأْمُرُ بِالْغُسْلِ

हमरा सब [अब्दुर्रज्जाक] के कहल गेल अछि [अज ज़ुहरी] स [सलीम] स [अपन पिता] स हमरा सब [मा'मर] के कहल गेल अछि जे जखन [उमर बिन अल खथथब] शुक्र दिन प्रचार करय लेल ठाढ़ भेलाह त अचानक नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एकटा साथी प्रवेश केलनि, तखन उमर हुनका बजौलनि; 'कतेक समय अछि ?' तेँ ओ उत्तर देलथिन। ‘आइ हम व्यस्त छलहुँ आ जा धरि नमाजक आह्वान नहि सुनलहुँ ता धरि अपन परिवार लग नहि घुरि गेलहुँ, तखन जा धरि सोझे वजूद पर नहि गेलहुँ ता धरि किछु नहि जोड़लहुँ,’ तखन उमर पुछलनि; 'वुडू सेहो? की अहाँ के पहिने स पता नै छल,’ एकटा आओर रिवायत में ‘की अहाँ के पहिने स पता नै छल जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नहाय के आदेश देने छलाह’।

Hadith

Imam Ahmad : 198

حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ يَعْنِي ابْنَ عَمَّارٍ حَدَّثَنِي سِمَاكٌ الْحَنَفِيُّ أَبُو زُمَيْلٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ خَيْبَرَ أَقْبَلَ نَفَرٌ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا فُلَانٌ شَهِيدٌ فُلَانٌ شَهِيدٌ حَتَّى مَرُّوا عَلَى رَجُلٍ فَقَالُوا فُلَانٌ شَهِيدٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَلَّا إِنِّي رَأَيْتُهُ فِي النَّارِ فِي بُرْدَةٍ غَلَّهَا أَوْ عَبَاءَةٍ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ اذْهَبْ فَنَادِ فِي النَّاسِ أَنَّهُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا الْمُؤْمِنُونَ قَالَ فَخَرَجْتُ فَنَادَيْتُ أَلَا إِنَّهُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ إِلَّا الْمُؤْمِنُونَ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [हसीम बिन अल कासिम] हमरा सभकेँ कहलक अछि [इक्रीमाह अर्थात इब्न अम्मर] हमरा सभकेँ कहलक अछि [देखू अल हनाफी अबू जमील] ओ कहलनि; हमरा कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] हमरा कहलक अछि [उमर बिन अल खथथब] ओ कहलनि; जखन खैबर युद्ध भेल त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी के एकटा समूह हुनका लग आबि क कहलखिन; फल्लाँ शहीद भेल फल्लाँ शहीद भेल, तेँ एकटा आदमी लगसँ गुजरि गेल आ कहलक; तहिना शहीद भ गेलाह, तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'नहि, असल मे हम ओकरा नरक मे जाइत देखलहुं, कारण ओ जे कपड़ा या कोट चोरा लेने छल'. तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे हे इब्नुल खथथब जाउ लोक केँ कहि दियौक जे विश्वास करयवला केँ छोड़ि कियो स्वर्ग मे प्रवेश नहि करत। उमर बजलाह; तेँ हम बाहर जा कऽ लोक सभ केँ बजौलहुँ। 'जानू जे विश्वास करय वाला के छोड़ि क' कियो स्वर्ग मे प्रवेश नहि करत'।

Hadith

Imam Ahmad : 199

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ يَعْنِي ابْنَ أَبِي الْفُرَاتِ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِي الْأَسْوَدِ الدِّيْلِيِّ قَالَ أَتَيْتُ الْمَدِينَةَ وَقَدْ وَقَعَ بِهَا مَرَضٌ فَهُمْ يَمُوتُونَ مَوْتًا ذَرِيعًا فَجَلَسْتُ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَمَرَّتْ بِهِ جَنَازَةٌ فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرٌ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِأُخْرَى فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا خَيْرٌ فَقَالَ وَجَبَتْ ثُمَّ مُرَّ بِالثَّالِثَةِ فَأُثْنِيَ عَلَى صَاحِبِهَا شَرٌّ فَقَالَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَجَبَتْ فَقُلْتُ وَمَا وَجَبَتْ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَالَ قُلْتُ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّمَا مُسْلِمٍ شَهِدَ لَهُ أَرْبَعَةٌ بِخَيْرٍ أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ قَالَ قُلْنَا أَوْ ثَلَاثَةٌ قَالَ أَوْ ثَلَاثَةٌ فَقُلْنَا أَوْ اثْنَانِ قَالَ أَوْ اثْنَانِ ثُمَّ لَمْ نَسْأَلْهُ عَنْ الْوَاحِدِ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन यजीद] हमरा सब के कहलक अछि [दाउद अर्थात इब्न अबिल फुराथ] हमरा [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] के [अबुल असवद अद दैली] स कहलक अछि ओ कहलनि; जखन हम मदीना आयल रही त ओतय महामारी भेल छल, कतेको के भयंकर मौत भ गेल छल, तखन हम उमर के बगल में बैसल रही, अचानक एकटा लाश हुनका सामने सं गुजरि गेल, आ लाश के नीक सं प्रशंसा भेल, उमर कहलनि; 'वाजीब' तखन एकटा आओर लाश ओहि ठाम सँ गुजरल आ लाशक प्रशंसा दयापूर्वक कयल गेल आ ओ कहलनि; 'वाजीब' तखन तेसर लाशक लगसँ गुजरैत आ लाशक कुरूपताक खुलासा भेल, [उमर] कहलनि; 'आवश्यक' तें हम पुछलियनि; 'अमीरुल मुक्मिनिन, फर्ज के की मतलब छै?' ओ उत्तर देलथिन; हम कहलियनि जेना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छलाह : 'जखन कोनो मुसलमान के चारि नीक लोक गवाह बनत तखन अल्लाह ओकरा स्वर्ग मे प्रवेश करत'। हम पुछलियनि; 'तीन केहन?' ओ उत्तर देलखिन: 'आकि तीन?' हम फेर पुछलियनि; 'दू गोटे त' की हेतै?' ओ उत्तर देलखिन: 'वा दू'। तखन हम सभ नहि पुछैत छी जे एकटा'।

Hadith

Imam Ahmad : 200

حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا حَيْوَةُ أَخْبَرَنِي بَكْرُ بْنُ عَمْرٍو أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ هُبَيْرَةَ يَقُولُ إِنَّهُ سَمِعَ أَبَا تَمِيمٍ الْجَيْشَانِيَّ يَقُولُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ إِنَّهُ سَمِعَ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْ أَنَّكُمْ تَتَوَكَّلُونَ عَلَى اللَّهِ حَقَّ تَوَكُّلِهِ لَرَزَقَكُمْ كَمَا يَرْزُقُ الطَّيْرَ تَغْدُو خِمَاصًا وَتَرُوحُ بِطَانًا

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू अब्दुररहमान] हमरा सभकेँ कहलक अछि [हैवाह] हमरा [बकर बिन अमरू]केँ कहलक अछि जे ओ [अब्दुल्लाह बिन हुबैराह]केँ कहैत सुनने छल; कि ओ [अबू तमीम अल जैस्यानी] कहैत सुनलनि; कि ओ [उमर बिन अल खथथब] के बतबैत सुनने छल जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छल: 'जँ अहाँ अल्लाह पर सच्चा भरोसा के संग भरोसा करब त निश्चित रूप सँ ओ अहाँ के रोजी-रोटी देथिन, जेना ओ ओहि चिड़ै के रोजी-रोटी देने छथि जे भोरे खाली चलि जाइत अछि आ भरल-पूरल वापस आबि जाइत अछि'।