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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 1

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَمَرْتُكُمْ بِهِ فَخُذُوهُ وَمَا نَهَيْتُكُمْ عَنْهُ فَانْتَهُوا

हमरा सभकेँ कहल गेल अछि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहलनि; हमरा [शरीक] के [अल अ'मासी] स [अबू सालिह] स [अबू हुरैरा] स संबंधित केने छथि ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे हम जे आज्ञा दैत छी, ओकरा ल’ लिअ, आ जे मना करब से छोड़ि दियौक’।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 2

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ قَالَ أَنْبَأَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَرُونِي مَا تَرَكْتُكُمْ فَإِنَّمَا هَلَكَ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ بِسُؤَالِهِمْ وَاخْتِلَافِهِمْ عَلَى أَنْبِيَائِهِمْ فَإِذَا أَمَرْتُكُمْ بِشَيْءٍ فَخُذُوا مِنْهُ مَا اسْتَطَعْتُمْ وَإِذَا نَهَيْتُكُمْ عَنْ شَيْءٍ فَانْتَهُوا

हमरा सभकेँ [मुहम्मद बिन ऐश शब्बाह] कहलक अछि जे ओ कहलनि; हमरा [जरीर] के [अल अ'मासी] स [अबू सालिह] स [अबू हुरैरा] स रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे हम जे छोड़ि देलहुँ से अहाँ सभ केँ छोड़ि देलहुँ। सचमुच, अहाँ सँ पहिने के लोक अपन पैगम्बर सँ अपन प्रश्न आ विवाद के कारण नाश भ गेलाह। जँ हम अहाँकेँ कोनो काज करबाक आदेश दैत छी तँ अहाँकेँ यथासंभव करू , आ जँ हम अहाँकेँ कोनो काजसँ मना करब तँ ओहिसँ दूर रहू' ।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 3

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَطَاعَنِي فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ وَمَنْ عَصَانِي فَقَدْ عَصَى اللَّهَ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू बकर बिन अबू सियाइबा] कहलनि, हमरा सभकेँ [अबू मुअवियाह] कहलक अछि, आ [वाकी’] [अल अ'मासी] सँ [अबू सालिह] सँ [अबू हुरैरा] सँ ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे हमर आज्ञा मानैत अछि, ओ अल्लाह के आज्ञा मानलक आ जे हमर आज्ञा नहि मानैत अछि, ओ अल्लाह के आज्ञा नहि मानलक’।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ عَنْ ابْنِ الْمُبَارَكِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سُوقَةَ عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ قَالَكَانَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا سَمِعَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا لَمْ يَعْدُهُ وَلَمْ يُقَصِّرْ دُونَهُ

हमरा सब स रिवायत भेल अछि [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] कहलक अछि, हमरा सब स [जकारिया बिन अदी] [इब्न मुबारक] स [मुहम्मद बिन सुकाह] स [अबू जाफर] स रिवायत अछि ओ कहलक; ' [इब्न उमर] जँ ओ अल्लाह केर रसूलुल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ कोनो हदीस सुनितथि त' ओ ओकरा छूटि नहि जेताह आ ने कोनो आन काज मे व्यस्त रहताह'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 5

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى بْنِ سُمَيْعٍ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَفْطَسُ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْجُرَشِيِّ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ قَالَخَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ نَذْكُرُ الْفَقْرَ وَنَتَخَوَّفُهُ فَقَالَ أَالْفَقْرَ تَخَافُونَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَتُصَبَّنَّ عَلَيْكُمْ الدُّنْيَا صَبًّا حَتَّى لَا يُزِيغَ قَلْبَ أَحَدِكُمْ إِزَاغَةً إِلَّا هِيهْ وَايْمُ اللَّهِ لَقَدْ تَرَكْتُكُمْ عَلَى مِثْلِ الْبَيْضَاءِ لَيْلُهَا وَنَهَارُهَا سَوَاءٌقَالَ أَبُو الدَّرْدَاءِ صَدَقَ وَاللَّهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرَكَنَا وَاللَّهِ عَلَى مِثْلِ الْبَيْضَاءِ لَيْلُهَا وَنَهَارُهَا سَوَاءٌ

हमरा सब के कहलक अछि [हिस्यम बिन अम्मर अद डिमासिकी] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन ईसा बिन सुमै'] कहलक अछि, हमरा सब के [इब्राहिम बिन सुलेमान अल अफथास] [अल वलीद बिन अब्दुररहमान अल जुरासी] स [जुबैर बिन नुफैर] स [अबू दरदा`] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब स भेंट करय लेल बाहर आबि गेलाह, जखन हम सब गरीबी के मुद्दा पर चर्चा क रहल छलहुं आ हमरा सब के हुनका स डर लागल। तखन ओ कहलनि: ‘अहाँ गरीबी सँ डरैत छी? जिनकर हाथ मे हमर आत्मा अछि, संसार अहाँ केँ देल जायत, जाहि सँ अहाँ मे सँ एक गोटेक हृदय ओकरा सँ भेंट करबाक अतिरिक्त नहि घुमि सकैत अछि। सचमुच, हम अहाँ सभक लेल एहन चीज छोड़ि देने छी जे चमकैत रोशनी मे अछि, राति-दिन एके रंग अछि'। अबू दरदा` कहलनि; 'अल्लाह के कसम सच छै, अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा सब के लेल एहन चीज छोड़ि देने छैथ जे चमकदार रोशन छै, रात आ दिन एके छै'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 6

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي مَنْصُورِينَ لَا يَضُرُّهُمْ مَنْ خَذَلَهُمْ حَتَّى تَقُومَ السَّاعَةُ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [मुहम्मद बिन जा'फर] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [स्यूबाह] [मुअवियाह बिन कुर्राह]सँ [अपन पिता]सँ कहलक अछि ओ कहलक; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे हमर उम्म के एकटा समूह सदिखन रहत जेकरा मदद भेटत। जे ओकरा सभ केँ तिरस्कार करत से कयामतक दिन धरि ओकरा सभ केँ कोनो नुकसान नहि पहुँचाओत'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 7

حَدَّثَنَا أَبُو عَبْد اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَلْقَمَةَ نَصْرُ بْنُ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَيْرِ بْنِ الْأَسْوَدِ وَكَثِيرِ بْنِ مُرَّةَ الْحَضْرَمِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي قَوَّامَةً عَلَى أَمْرِ اللَّهِ لَا يَضُرُّهَا مَنْ خَالَفَهَا

अबू अब्दुल्ला हमरा सब के कहलनि जे ओ कहलनि; हमरा सभकेँ [हिस्याम बिन अम्मर] कहने छथि जे ओ कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [याह्या बिन हमजाह] कहलनि; हमरा सब के [उमैर अल असवद] स [अबू अलकामा नशर बिन अलकामाह] आ [अबू हुरैरा] स [कत्सिर बिन मुर्राह अल हदलरामी] कहलक अछि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हमर उम्म के एकटा एहन समूह हमेशा रहत जे अल्लाह के हुकुम पर मजबूती सं ठाढ़ रहत, आ ओकरा सं असहमत लोक के नुकसान नहि पहुंचाओत'.

Hadith

Imam Ibnu Majah : 8

حَدَّثَنَا أَبُو عَبْد اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا الْجَرَّاحُ بْنُ مَلِيحٍ حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ زُرْعَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عِنَبَةَ الْخَوْلَانِيَّ وَكَانَ قَدْ صَلَّى الْقِبْلَتَيْنِ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَزَالُ اللَّهُ يَغْرِسُ فِي هَذَا الدِّينِ غَرْسًا يَسْتَعْمِلُهُمْ فِي طَاعَتِهِ

अबू अब्दुल्ला हमरा सब के कहलनि जे ओ कहलनि; हमरा सभकेँ कहलक अछि [हिस्याम बिन अम्मर] कहलनि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [अल जर्राह बिन मलीह] कहलनि, हमरा सभकेँ [बकर बिन ज़ुराह] कहलनि अछि ओ कहलनि; हम [अबू इनाबाह अल खौलानी] के सुनलहुं आ ओ एकटा मित्र छलाह जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग दुनू किबला के मुँह केने नमाज पढ़ि रहल छलाह, ओ कहलनि; हम सुनलहुँ जे रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहैत छथि : 'अल्लाह एहि धर्म मे सदिखन पौधा -सुधारक- रोपताह, जकरा ओ हुनकर आज्ञाकारिता दिस निर्देशित करताह'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 9

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ نَافِعٍ حَدَّثَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ أَرْطَاةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَامَ مُعَاوِيَةُ خَطِيبًا فَقَالَ أَيْنَ عُلَمَاؤُكُمْ أَيْنَ عُلَمَاؤُكُمْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ إِلَّا وَطَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي ظَاهِرُونَ عَلَى النَّاسِ لَا يُبَالُونَ مَنْ خَذَلَهُمْ وَلَا مَنْ نَصَرَهُمْ

हमरा सब के कहलक अछि [या'कुब बिन हुमैद बिन कसीब] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [अल कासिम बिन नाफी'] कहलक, हमरा सब के [अमरू बिन स्यूअइब] स [अपन पिता] स कहलक अछि [अल हज्जाज बिन अर्थह] के ओ कहलक; [मुअवियाह] प्रवचन के लेल ठाढ़ भ गेलाह, ओ तखन कहलनि; 'अहाँक विद्वान सभ कतय छथि ? अहाँक विद्वान कतय छथि ? हम रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: 'कयामत के दिन ता धरि नहि होयत जा धरि हमर उम्मा के कोनो समूह सब मनुक्ख पर जीत नहिं हासिल करत, ओकरा सब के अपमान करय वाला के चिंता नहिं होयत आ ने ओकर मदद करय वाला के'.

Hadith

Imam Ibnu Majah : 10

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ شُعَيْبٍ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ بَشِيرٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَبِي أَسْمَاءَ الرَّحَبِيِّ عَنْ ثَوْبَانَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي عَلَى الْحَقِّ مَنْصُورِينَ لَا يَضُرُّهُمْ مَنْ خَالَفَهُمْ حَتَّى يَأْتِيَ أَمْرُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ

हमरा सब के कहलक अछि [हिस्यम बिन अम्मर] कहलनि, हमरा सब के बता देलनि अछि [मुहम्मद बिन स्यूअइब] कहलनि, हमरा सब के [सैद बिन बस्यर] के [कतादह] स [अबू किलाबाह] स [अबू असमा` अर रहबी] स [त्साउबान] स कहलक अछि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, 'हमर लोकक एकटा समूह सदिखन रहत जे सच्चाई सँ मदद करत, जा धरि अल्लाह केर फैसला नहि आबि जायत ता धरि एहि सँ असहमत लोक केँ नुकसान नहि पहुँचाओत'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 11

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ قَالَ سَمِعْتُ مُجَالِدًا يَذْكُرُ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَطَّ خَطًّا وَخَطَّ خَطَّيْنِ عَنْ يَمِينِهِ وَخَطَّ خَطَّيْنِ عَنْ يَسَارِهِ ثُمَّ وَضَعَ يَدَهُ فِي الْخَطِّ الْأَوْسَطِ فَقَالَ هَذَا سَبِيلُ اللَّهِ ثُمَّ تَلَا هَذِهِ الْآيَةَ{ وَأَنَّ هَذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيمًا فَاتَّبِعُوهُ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَبِيلِهِ }

हमरा सब के कहलक अछि [अबू सईद अब्दुल्लाह बिन सईद] कहलनि, हमरा सब के बता देलनि अछि [अबू खालिद अल अहमर] ओ कहलनि; हम [मुजालिद] के [एश स्या'बी] स [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स उल्लेख सुनलहुं ओ कहलनि; 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कात में छलहुं, ओ तखन एकटा लाइन बनौलनि, फेर अपन दहिना कात दू लाइन आ बामा कात दू लाइन आओर बनौलनि. तखन ओ बीचक रेखा पर हाथ राखि कहलनि: 'ई अल्लाह केर रास्ता थिक'। तखन ओ ई श्लोक पढ़लनि: 'आ से - जे हम सभ आज्ञा देने छी - ई हमर सोझ बाट अछि, तेँ एकर पालन करू; आ दोसर बाट पर नहि चलू, कारण ओ सभ अहाँ सभ केँ हुनकर बाट सँ छिड़िया देत'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 12

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ حَدَّثَنِي الْحَسَنُ بْنُ جَابِرٍ عَنْ الْمِقْدَامِ بْنِ مَعْدِيكَرِبَ الْكِنْدِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُوشِكُ الرَّجُلُ مُتَّكِئًا عَلَى أَرِيكَتِهِ يُحَدَّثُ بِحَدِيثٍ مِنْ حَدِيثِي فَيَقُولُ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ كِتَابُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ مَا وَجَدْنَا فِيهِ مِنْ حَلَالٍ اسْتَحْلَلْنَاهُ وَمَا وَجَدْنَا فِيهِ مِنْ حَرَامٍ حَرَّمْنَاهُ أَلَّا وَإِنَّ مَا حَرَّمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلُ مَا حَرَّمَ اللَّهُ

हमरा सभकेँ कहने अछि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहलनि, ओ कहलनि; हमरा सब के [जैद इब्नु अल हुबाब] स [मुअवियाह बिन सालिह] कहलक अछि, हमरा [अल हसन बिन जाबिर] स [अल मिकदाम बिन म'दीकरीब अल किंदी] कहलक अछि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ' आशंका छल जे कियो हुनकर सीट पर पाछू झुकि जायत, हुनका हमरा दिस सं एकटा हदीस कहल गेलनि, मुदा ओ कहलनि; 'हमरा आ अहाँक बीच अल्लाह 'अज्जा वजल्ला' केर किताब अछि।' जे किछु हलाल भेटैत अछि ओकरा हलाल बना दैत छी, आ जे किछु हराम भेटैत अछि ओकरा हरम बना दैत छी'। जानिये, सचमुच, जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा मना करलऽ गेलऽ छेलै, वू अल्लाह न॑ मना करी देल॑ छै ।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 13

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ فِي بَيْتِهِ أَنَا سَأَلْتُهُ عَنْ سَالِمٍ أَبِي النَّضْرِ ثُمَّ مَرَّ فِي الْحَدِيثِ قَالَ أَوْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا أُلْفِيَنَّ أَحَدَكُمْ مُتَّكِئًا عَلَى أَرِيكَتِهِ يَأْتِيهِ الْأَمْرُ مِمَّا أَمَرْتُ بِهِ أَوْ نَهَيْتُ عَنْهُ فَيَقُولُ لَا أَدْرِي مَا وَجَدْنَا فِي كِتَابِ اللَّهِ اتَّبَعْنَاهُ

हमरा सब के कहलक अछि [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [सुफयान बिन उयैनह] -हम हुनका सं हुनकर घर पर पूछने छलहुं- [सलीम अबू अल नडलर] सं -तखन ओ एकटा हदीस पढ़लनि-, ओ कहलनि; या [जैद बिन असलम] स॑ [उबैदुल्लाह बिन अबू रफी’] स॑ [हुनकरऽ पिता] न॑ कहलकै; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सत्ते, अहाँ मे सँ एक गोटे अपन सीट पर वापस बैसल भेटत, तखन ओ हमर आदेश आ मनाही ल' क' हुनका लग आबि जेताह, मुदा ओ कहताह; 'हमरा नहि बुझल छल जे हमरा सभ केँ अल्लाह केर किताब मे की भेटल, तेँ हम सभ ओकर पालन केलहुँ।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 14

حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ

हमरा सब स रिवायत भेल अछि [अबू मरवान मुहम्मद बिन उस्मान अल उस्मानी] कहलक अछि, हमरा सब स रिवायत अछि [इब्राहिम बिन सअद बिन इब्राहिम बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स [अपन पिता] स [अल कासिम बिन मुहम्मद] स [आइशा] स कहलक अछि; अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे कियो हमरा सभक काज मे कोनो नव मामला के परिचय दैत अछि जे ओकर हिस्सा नहि अछि तखन ओकरा खारिज क’ देल जाइत अछि’।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 15

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحِ بْنِ الْمُهَاجِرِ الْمِصْرِيُّ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ حَدَّثَهُأَنَّ رَجُلًا مِنْ الْأَنْصَارِ خَاصَمَ الزُّبَيْرَ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي شِرَاجِ الْحَرَّةِ الَّتِي يَسْقُونَ بِهَا النَّخْلَ فَقَالَ الْأَنْصَارِيُّ سَرِّحْ الْمَاءَ يَمُرُّ فَأَبَى عَلَيْهِ فَاخْتَصَمَا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْقِ يَا زُبَيْرُ ثُمَّ أَرْسِلْ الْمَاءَ إِلَى جَارِكَ فَغَضِبَ الْأَنْصَارِيُّ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنْ كَانَ ابْنَ عَمَّتِكَ فَتَلَوَّنَ وَجْهُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا زُبَيْرُ اسْقِ ثُمَّ احْبِسْ الْمَاءَ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَى الْجَدْرِ قَالَ فَقَالَ الزُّبَيْرُ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَحْسِبُ هَذِهِ الْآيَةَ نَزَلَتْ فِي ذَلِكَ{ فَلَا وَرَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ حَتَّى يُحَكِّمُوكَ فِيمَا شَجَرَ بَيْنَهُمْ ثُمَّ لَا يَجِدُوا فِي أَنْفُسِهِمْ حَرَجًا مِمَّا قَضَيْتَ وَيُسَلِّمُوا تَسْلِيمًا }

[मुहम्मद बिन रुम्ह बिन अल मुहाजिर अल मिश्री] न॑ कहलकै, [अल लैस्त बिन स’द] न॑ [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] स॑ [इब्न सिहाब] स॑ हमरा सब क॑ बतैलकै कि [अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] न॑ ओकरा कहलकै कि अंसार केरऽ एगो आदमी न॑ अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) केरऽ मौजूदगी म॑ अज़ जुबैर स॑ बहस करलकै सिंचाई प्रणाली के उपयोग ओ सब अपन खजूर के पानि देबय लेल करैत छलाह. अंसार कहलक जे पानि बीतय दियौक, मुदा अज जुबैर ध्यान नहि देलक। तेँ हुनका लोकनिक बीच रसूलुल्लाह (स.अ.व.) केर सान्निध्य मे बहस शुरू भ गेल। अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, हे जुबैर, अपन बगीचा मे पानि दियौ, आ तखन पानि अपन पड़ोसी मे बहाउ। मुदा अंसार तमसा गेल आ कहलक जे हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की ई एहि लेल जे ओ अहाँक मामा के बेटा छथि? तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चेहरा बदलि गेलै, तखन ओ कहलनि: 'हे जुबैर, पानि -अपन बगीचा-, तखन पानि के रोकू ताकि ओ अपन मूल मे वापस आबि जाय'। अब्दुल्ला बिन जुबैर कहलनि; अतः जुबैर कहलनि: 'अल्लाह केर कसम, हमरा लगैत अछि जे ई आयत ओहि घटना मे प्रकट भेल छल: 'त' अहाँक रब्ब द्वारा, ओ सभ - सार मे - ता धरि विश्वास नहि करैत छथि जाबत धरि ओ सभ अहाँ केँ ओहि मामला मे न्यायाधीश नहि बना दैत छथि जाहि पर ओ सभ विवाद क' रहल छथि, तखन हुनका सभक मोन मे अहाँक निर्णय पर कोनो आपत्ति नहि छनि, आ ओ सभ एकरा पूर्ण रूप सँ स्वीकार करैत छथि'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 16

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى النَّيْسَابُورِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَمْنَعُوا إِمَاءَ اللَّهِ أَنْ يُصَلِّينَ فِي الْمَسْجِدِفَقَالَ ابْنٌ لَهُ إِنَّا لَنَمْنَعُهُنَّ فَغَضِبَ غَضَبًا شَدِيدًا وَقَالَ أُحَدِّثُكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَقُولُ إِنَّا لَنَمْنَعُهُنَّ

हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन याह्या अन नैसाबुरी] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुर्राजाक] कहलक, हमरा सब के [मा'मर] के [अज जुहरी] स [सलीम] स [इब्न उमर] स कहलक अछि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, अल्लाह के महिला नौकर के मस्जिद में नमाज पढ़य स मना नै करू। तखने एकटा बच्चा कहलक; 'सत्ते, हम सभ ओकरा सभ पर रोक लगा देब'। तें इब्नू उमर क्रोधित भ गेलाह आ डांटल गेलाह; 'हम अहाँ सभ केँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केर हदीस पढ़लहुँ, मुदा अहाँ कहलहुँ; 'सत्ते, हम सभ ओकरा सभ पर रोक लगा देब'।'

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Imam Ibnu Majah : 17

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ وَأَبُو عَمْرٍو حَفْصُ بْنُ عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍأَنَّهُ كَانَ جَالِسًا إِلَى جَنْبِهِ ابْنُ أَخٍ لَهُ فَخَذَفَ فَنَهَاهُ وَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْهَا فَقَالَ إِنَّهَا لَا تَصِيدُ صَيْدًا وَلَا تَنْكِي عَدُوًّا وَإِنَّهَا تَكْسِرُ السِّنَّ وَتَفْقَأُ الْعَيْنَقَالَ فَعَادَ ابْنُ أَخِيهِ فَخَذَفَ فَقَالَ أُحَدِّثُكَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْهَا ثُمَّ عُدْتَ تَخْذِفُ لَا أُكَلِّمُكَ أَبَدًا

[अहमद बिन थाबीत अल जदारी] आ [अबू अम्र हफस बिन उमर] दुनू गोटे कहलनि: [अब्दुल वहाब अत-थकाफी] कहलनि, [अय्यूब] हमरा सभ केँ [सैद बिन जुबैर] सँ [अब्दुल्लाह बिन मुगफ्ल] सँ कहलनि, जे हुनकर एकटा भतीजा हुनका बगल मे बैसल छलाह आ ओ गुलेल केर प्रयोग करैत छलाह | ओ ओकरा रोकलनि आ कहलनि: सचमुच अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) एकरा मना क देलखिन। ओ बजलाह - ओ क्रिया ने शिकारक शिकार होइत छैक आ ने दुश्मनक नाश होइत छैक । ई मात्र दाँत तोड़ि दैत अछि आ आँखि केँ गोज निकालि दैत अछि।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 18

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ حَدَّثَنِي بُرْدُ بْنُ سِنَانٍ عَنْ إِسْحَقَ بْنِ قَبِيصَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ عُبَادَةَ بْنَ الصَّامِتِ الْأَنْصَارِيَّ النَّقِيبَ صَاحِبَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَزَا مَعَ مُعَاوِيَةَ أَرْضَ الرُّومِ فَنَظَرَ إِلَى النَّاسِ وَهُمْ يَتَبَايَعُونَ كِسَرَ الذَّهَبِ بِالدَّنَانِيرِ وَكِسَرَ الْفِضَّةِ بِالدَّرَاهِمِ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَأْكُلُونَ الرِّبَا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تَبْتَاعُوا الذَّهَبَ بِالذَّهَبِ إِلَّا مِثْلًا بِمِثْلٍ لَا زِيَادَةَ بَيْنَهُمَا وَلَا نَظِرَةًفَقَالَ لَهُ مُعَاوِيَةُ يَا أَبَا الْوَلِيدِ لَا أَرَى الرِّبَا فِي هَذَا إِلَّا مَا كَانَ مِنْ نَظِرَةٍ فَقَالَ عُبَادَةُ أُحَدِّثُكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَتُحَدِّثُنِي عَنْ رَأْيِكَ لَئِنْ أَخْرَجَنِي اللَّهُ لَا أُسَاكِنُكَ بِأَرْضٍ لَكَ عَلَيَّ فِيهَا إِمْرَةٌ فَلَمَّا قَفَلَ لَحِقَ بِالْمَدِينَةِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ مَا أَقْدَمَكَ يَا أَبَا الْوَلِيدِ فَقَصَّ عَلَيْهِ الْقِصَّةَ وَمَا قَالَ مِنْ مُسَاكَنَتِهِ فَقَالَ ارْجِعْ يَا أَبَا الْوَلِيدِ إِلَى أَرْضِكَ فَقَبَحَ اللَّهُ أَرْضًا لَسْتَ فِيهَا وَأَمْثَالُكَ وَكَتَبَ إِلَى مُعَاوِيَةَ لَا إِمْرَةَ لَكَ عَلَيْهِ وَاحْمِلْ النَّاسَ عَلَى مَا قَالَ فَإِنَّهُ هُوَ الْأَمْرُ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [हिस्याम बिन अम्मर] कहलनि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [याह्या बिन हमजाह] कहलनि, हमरा [बुर्द बिन सिनान] केँ [इशक बिन काबीशाह] सँ [अपन पिता] कहलनि; [उबादाह बिन शमित अल अंसारी] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ सेनापति आरू दोस्त छेलै जे रोमन दुनिया म॑ मुअविया के साथ लड़ै छेलै । हुनकर नजरि एहन लोक सभ पर पड़लनि जे सोनाक टुकड़ी दिनार मे आ चानीक टुकड़ी दिरहम मे कीन-बेचैत छल। तखन ओ उद्घोष केलनि; 'हे लोक, सचमुच अहाँ सब सूदखोरी के सेवन क' लेने छी, हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने छी: 'सोना के बदला में सोना नै बेचू जाबत ओ बराबर नै होयत, कोनो अतिरिक्त नै छै आ दुनू के बीच कोनो देरी नै छै'। मुअविया ओकरा कहलकै; 'हे अबुल वालिद हमरा एहि लेन-देन मे सूद नहि देखाइत अछि, सिवाय एकर निलंबन मे ! ' उबादा उत्तर देलक; 'हम अहाँ सभ केँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ हदीस पहुँचा देलहुँ, मुदा अहाँ अपन विचार सँ सोचैत छी। सचमुच, जँ अल्लाह हमरा बाहर निकालि देत तखन हम अहाँक आज्ञा मे रहितो अहाँक इलाका मे नहि रहब'। मदीना घुरला पर उमर बिन खथथब सँ भेंट भेलनि, तखन उमर हुनका कहलखिन, हे अबुल वालिद, अहाँ केँ एतय की बाध्य केलक? तखन उमर केँ ई खिस्सा सुनौलनि, आ ओ कतय रहैत छथि से नहि कहलनि। उमर बजलाह - हे अबुल वालिद, अपन देश वापस जाउ। सचमुच, अल्लाह अहाँ आ अहाँ सन लोक के बिना कोनो देश के तिरस्कृत बना देत'। तखन उमर मुअविया केँ चिट्ठी लिखलनि; 'अहाँकेँ हुनका आदेश देबाक कोनो अधिकार नहि अछि, आ लोककेँ हुनकर बातक पालन करबाक लेल आमंत्रित करबाक कोनो अधिकार नहि अछि, कारण ओ सत्यसँ ऊपर छथि' ।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 19

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ الْخَلَّادِ الْبَاهِلِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ أَنْبَأَنَا عَوْنُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَإِذَا حَدَّثْتُكُمْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَظُنُّوا بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الَّذِي هُوَ أَهْنَاهُ وَأَهْدَاهُ وَأَتْقَاهُ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू बकर बिन अल खल्लाद अल बाहिली] कहलनि, हमरा सब के [इब्न अजलान] स [याह्या बिन सईद] कहलक अछि, हमरा सब के [अउन बिन अब्दुल्लाह] के [अब्दुल्लाह बिन मसूद] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'जँ हम अहाँ सभ केँ अल्लाह केर रसूलुल्लाह सँ कोनो हदीस पढ़लहुँ, तखन ई मानि लिअ जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह एकरा पहुँचा देलनि, ओ निर्देश देलनि आ ओ धर्मपरायणताक वसीयत देलनि'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 20

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي الْبَخْتَرِيِّ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَ إِذَا حَدَّثْتُكُمْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَظُنُّوا بِهِ الَّذِي هُوَ أَهْنَاهُ وَأَهْدَاهُ وَأَتْقَاهُ

हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] कहलक अछि, हमरा सब के [याह्या बिन सईद] के [स्यूबाह] स [अमरू बिन मुर्राह] स [अबुल बहकतरी] स [अबू अब्दुररहमान अस सुलामी] स [अली बिन अबू तालिब] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'जखन हम अहाँ के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हदीस पढ़लौं तखन ई मानि लिअ जे अल्लाह के रसूलुल्लाह एकरा संप्रेषित केलनि, ओ निर्देश देलनि आ ओ धर्मपरायणता के वसीयत देलनि'।