इमाम इब्नु माजा : 81
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عُثْمَانَ مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى عَائِشَةَ فَذَكَرَ لَهَا شَيْئًا مِنْ الْقَدَرِ فَقَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ تَكَلَّمَ فِي شَيْءٍ مِنْ الْقَدَرِ سُئِلَ عَنْهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَنْ لَمْ يَتَكَلَّمْ فِيهِ لَمْ يُسْأَلْ عَنْهُقَالَ أَبُو الْحَسَنِ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَاهُ حَازِمُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شَيْبَانَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عُثْمَانَ فَذَكَرَ نَحْوَهُ
हमें बताया है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने कहा, हमें बताया है [मलिक बिन इस्माइल] ने कहा, हमें बताया है [याह्या बिन उस्मान] अबू बक्र के पुराने गुलाम ने कहा; [याह्या बिन अब्दुल्लाह बिन अबू अवलका] ने हमें [अपने पिता] से बताया कि वह एक बार [ऐस्या] से मिले और किस्मत से जुड़ी कोई बात कही। तो उन्होंने कहा; मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "जो कोई किस्मत के बारे में कुछ बात करेगा, कयामत के दिन वह ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा। और जो इस पर बात नहीं करेगा वह ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।" अबुल हसन अल क़थथन ने कहा; हमें बताया है हाज़िम बिन यह्या ने कहा, हमें बताया है अब्दुल मलिक बिन सय्यबान ने कहा, हमें बताया है याह्या बिन उस्मान ने। फिर उन्होंने ऊपर दी गई हदीस का ज़िक्र किया।
इमाम इब्नु माजा : 82
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ أَبِي هِنْدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى أَصْحَابِهِ وَهُمْ يَخْتَصِمُونَ فِي الْقَدَرِ فَكَأَنَّمَا يُفْقَأُ فِي وَجْهِهِ حَبُّ الرُّمَّانِ مِنْ الْغَضَبِ فَقَالَ بِهَذَا أُمِرْتُمْ أَوْ لِهَذَا خُلِقْتُمْ تَضْرِبُونَ الْقُرْآنَ بَعْضَهُ بِبَعْضٍ بِهَذَا هَلَكَتْ الْأُمَمُ قَبْلَكُمْقَالَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو مَا غَبَطْتُ نَفْسِي بِمَجْلِسٍ تَخَلَّفْتُ فِيهِ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا غَبَطْتُ نَفْسِي بِذَلِكَ الْمَجْلِسِ وَتَخَلُّفِي عَنْهُ
हमें [अली बिन मुहम्मद] ने बताया है, हमें [अबू मुअविया] ने बताया है, हमें [दाऊद बिन अबू हिंद] ने [अम्र बिन शुऐब] से [अपने पिता] से [अपने दादा] से बताया है, उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपने साथियों से मिलने निकले जो किस्मत के बारे में बहस कर रहे थे। तो ऐसा था जैसे गुस्से के कारण उनका चेहरा अनार जैसा हो गया था। फिर उन्होंने कहा: "क्या इसी के लिए तुम्हें आदेश दिया गया था, या उन्होंने कहा, "क्या इसी के लिए तुम्हें बनाया गया था? तुम कुरान के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से टकराते हो। इस वजह से तुमसे पहले के लोग नष्ट हो गए थे।" उन्होंने (कहानी कहने वाले) कहा; "अब्दुल्ला बिन अम्र ने तब कहा: "अगर मैं उस सभा में शामिल नहीं होता जिसमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मौजूद थे, तो मैं अपनी आत्मा पर कितना गुस्सा होता। और उस सभा में अपनी अनुपस्थिति के कारण मैं अपनी आत्मा पर कितना गुस्सा होता।"
इमाम इब्नु माजा : 83
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي حَيَّةَ أَبُو جَنَابٍ الْكَلْبِيُّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا عَدْوَى وَلَا طِيَرَةَ وَلَا هَامَةَ فَقَامَ إِلَيْهِ رَجُلٌ أَعْرَابِيٌّ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ الْبَعِيرَ يَكُونُ بِهِ الْجَرَبُ فَيُجْرِبُ الْإِبِلَ كُلَّهَا قَالَ ذَلِكُمْ الْقَدَرُ فَمَنْ أَجْرَبَ الْأَوَّلَ
हमें बताया गया है कि [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [अली बिन मुहम्मद] दोनों ने कहा; हमें बताया है [वाकी] ने कहा, हमें बताया है [याह्या बिन अबू हय्या अबू जनाब अल कलबी] [अपने पिता] से [इब्न उमर] ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अल्लाह की किस्मत के बिना कोई 'अदवा (संक्रमण वाली बीमारी) नहीं है, कोई थायराह (निराशा की भावना) नहीं है और कोई हम्माह (यह विश्वास कि हड्डियां वापस जीवित हो सकती हैं) नहीं है।" तो एक बद्दू अरब खड़ा हुआ और कहा; "अल्लाह के रसूल, आप ऊँटों के पपड़ीदार होने के बारे में क्या सोचते हैं, तो सभी ऊँटों में पपड़ीदार बीमारी होती है?" उसने जवाब दिया: "यह सब किस्मत है, (अगर नहीं) तो पहले ऊँट को किसने संक्रमित किया!"
इमाम इब्नु माजा : 84
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عِيسَى الْجَرَّارُ عَنْ عَبْدِ الْأَعْلَى بْنِ أَبِي الْمُسَاوِرِ عَنْ الشَّعْبِيِّ قَالَلَمَّا قَدِمَ عَدِيُّ ابْنُ حَاتِمٍ الْكُوفَةَ أَتَيْنَاهُ فِي نَفَرٍ مِنْ فُقَهَاءِ أَهْلِ الْكُوفَةِ فَقُلْنَا لَهُ حَدِّثْنَا مَا سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا عَدِيَّ ابْنَ حَاتِمٍ أَسْلِمْ تَسْلَمْ قُلْتُ وَمَا الْإِسْلَامُ فَقَالَ تَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَتُؤْمِنُ بِالْأَقْدَارِ كُلِّهَا لِخَيْرِهَا وَشَرِّهَا حُلْوِهَا وَمُرِّهَا
हमें [अली बिन मुहम्मद] ने बताया है, हमें [याह्या बिन ईसा अल जर्रार] ने [अब्दुल अला बिन अबू अल मुसाविर] से [शाबी] से बताया है, उन्होंने कहा; "जब [अदी बिन हातिम] कूफ़ा आए, तो हम और फुकाहा में से कई लोग उनके पास आए और उनसे कहा: "हमें वह हदीस पढ़ो जो तुमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनी थी," उन्होंने फिर कहा: "मैं एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गया, तो उन्होंने कहा: "ऐ अदी बिन हातिम, इस्लाम में आ जाओ और तुम सुरक्षित रहोगे।" फिर मैंने उनसे पूछा, "इस्लाम क्या है?" उन्होंने जवाब दिया: "तुम गवाही देते हो कि अल्लाह के अलावा कोई पूजा के लायक नहीं है और मैं उसका रसूल हूँ, और तुम उसकी सभी चीज़ों पर विश्वास करते हो, अच्छी और बुरी, मीठी और कड़वी।"
इमाम इब्नु माजा : 85
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَسْبَاطُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ يَزِيدَ الرِّقَاشِيِّ عَنْ غُنَيْمِ بْنِ قَيْسٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلُ الْقَلْبِ مَثَلُ الرِّيشَةِ تُقَلِّبُهَا الرِّيَاحُ بِفَلَاةٍ
मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर ने हमसे कहा, अस्बात बिन मुहम्मद ने हमसे कहा, अल अमासी ने हमसे कहा, यज़ीद अर रक़सी ने हमसे कहा, घुनईम बिन क़ैस ने हमसे कहा, अबू मूसा अल असीरी ने हमसे कहा; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "दिल की मिसाल खुली ज़मीन पर हवा से उड़ते हुए पंख की तरह है।"
इमाम इब्नु माजा : 86
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا خَالِي يَعْلَى عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لِي جَارِيَةً أَعْزِلُ عَنْهَا قَالَ سَيَأْتِيهَا مَا قُدِّرَ لَهَا فَأَتَاهُ بَعْدَ ذَلِكَ فَقَالَ قَدْ حَمَلَتْ الْجَارِيَةُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا قُدِّرَ لِنَفْسٍ شَيْءٌ إِلَّا هِيَ كَائِنَةٌ
हमें बताया है [अली बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें मेरे चाचा [या'ला] ने [अल अमासी] से [सलीम बिन अबू अल जा'द] से [जाबिर] से बताया है; उन्होंने कहा; "एक अंसार आदमी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया और पूछा: "अल्लाह के रसूल, वाकई मेरी एक गुलाम लड़की है जिसके खिलाफ मैंने 'अज़ल' किया था।" उन्होंने कहा: "कुछ ऐसा होगा जो उसके लिए तय किया गया है।" कुछ समय बाद वह फिर आया, और कहा: "गुलाम लड़की गर्भवती है!" तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो आत्मा के लिए तय किया गया है, वह पूरा होगा।"
इमाम इब्नु माजा : 87
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ ثَوْبَانَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَزِيدُ فِي الْعُمْرِ إِلَّا الْبِرُّ وَلَا يَرُدُّ الْقَدَرَ إِلَّا الدُّعَاءُ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيُحْرَمُ الرِّزْقَ بِخَطِيئَةٍ يَعْمَلُهَا
हमें बताया है [अली बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें बताया है [वाकी] [सुफ़यान] से [अब्दुल्ला बिन ईसा] से [अब्दुल्ला बिन अबू अल जाद] से [सौबान] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अच्छे कामों के अलावा कोई भी चीज़ ज़िंदगी नहीं बढ़ाती, नमाज़ के अलावा कोई भी चीज़ किस्मत को नहीं बदल सकती, और बेशक, एक आदमी अपनी गलतियों की वजह से अपनी रोज़ी से महरूम हो जाता है।"
इमाम इब्नु माजा : 88
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا عَطَاءُ بْنُ مُسْلِمٍ الْخَفَّافُ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ سُرَاقَةَ بْنِ جُعْشُمٍ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ الْعَمَلُ فِيمَا جَفَّ بِهِ الْقَلَمُ وَجَرَتْ بِهِ الْمَقَادِيرُ أَمْ فِي أَمْرٍ مُسْتَقْبَلٍ قَالَ بَلْ فِيمَا جَفَّ بِهِ الْقَلَمُ وَجَرَتْ بِهِ الْمَقَادِيرُ وَكُلٌّ مُيَسَّرٌ لِمَا خُلِقَ لَهُ
हमसे [हिस्याम बिन अम्मार] ने रिवायत की है, हमसे [अथो बिन मुस्लिम अल खफ्फफ] ने रिवायत की है; हमसे [अल अमासी] ने [मुजाहिद] और [सुराका बिन जुस्यूम] से बताया है, उन्होंने कहा; मैंने पूछा; "ऐ अल्लाह के रसूल, क्या अमल कोई ऐसी चीज़ है जो कलम से लिखी गई हो और सूख गई हो और उसकी व्यवस्थाएँ लागू हो चुकी हों, या यह कोई ऐसी चीज़ है जो भविष्य में होगी?" उन्होंने जवाब दिया: "यह भी एक ऐसी कलम से लिखी गई थी जो सूख गई थी और उसकी व्यवस्थाएँ लागू हो चुकी थीं, और हर चीज़ उसके लिए बनाई गई चीज़ों के अनुसार आसान हो गई।"
इमाम इब्नु माजा : 89
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُصَفَّى الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مَجُوسَ هَذِهِ الْأُمَّةِ الْمُكَذِّبُونَ بِأَقْدَارِ اللَّهِ إِنْ مَرِضُوا فَلَا تَعُودُوهُمْ وَإِنْ مَاتُوا فَلَا تَشْهَدُوهُمْ وَإِنْ لَقِيتُمُوهُمْ فَلَا تُسَلِّمُوا عَلَيْهِمْ
हमसे कहा है [मुहम्मद बिन अल मुशफ्फा अल हिमशी] ने, हमसे कहा है [बकियाह बिन अल वालिद] ने [अल औज़ाई] से [इब्न जुरैज] से [अबू जुबैर] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: “बेशक, इस उम्मत के समझदार लोग वे लोग हैं जो अल्लाह के नसीब को झुठलाते हैं। अगर वे बीमार हों, तो उनसे मिलने मत जाओ, अगर वे मर जाएं, तो उनका दुख मत मनाओ और अगर तुम उनसे मिलो, तो नमस्ते मत कहो।”
इमाम इब्नु माजा : 90
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا إِنِّي أَبْرَأُ إِلَى كُلِّ خَلِيلٍ مِنْ خُلَّتِهِ وَلَوْ كُنْتُ مُتَّخِذًا خَلِيلًا لَاتَّخَذْتُ أَبَا بَكْرٍ خَلِيلًا إِنَّ صَاحِبَكُمْ خَلِيلُ اللَّهِ قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي نَفْسَهُ
हमें बताया है [अली बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें बताया है [वाकी'] ने कहा, हमें बताया है [अल अमासी] ने [अब्दुल्ला बिन मुर्रा] से [अबुल अहवाश] से [अब्दुल्ला] से उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जान लो कि मैं हर प्रेमी के लिए वाकई सबसे दयालु व्यक्ति हूँ। अगर मुझे प्रेमी बनाने की अनुमति दी जाती, तो मैं निश्चित रूप से अबू बकर को अपना प्रेमी बनाता। वास्तव में, आपका दोस्त अल्लाह का प्रेमी है।" वाकी' ने कहा; "उसका मतलब खुद से है।"
इमाम इब्नु माजा : 91
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا نَفَعَنِي مَالٌ قَطُّ مَا نَفَعَنِي مَالُ أَبِي بَكْرٍ فَبَكَى أَبُو بَكْرٍ وَقَالَ هَلْ أَنَا وَمَالِي إِلَّا لَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ
हमें [अबू बकर बिन अबू सय्यबा] और [अली बिन मुहम्मद] बताया गया है, दोनों ने कहा; हमें [अबू मुअविया] ने बताया है; हमें [अल अमासी] ने [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] से बताया है, उन्होंने कहा; रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कोई भी दौलत मुझे अबू बकर की दौलत जैसा फ़ायदा नहीं दे सकती," तब अबू बकर ने पुकारा, और कहा; "अल्लाह के रसूल, क्या मैं और मेरा माल आपका है?"
इमाम इब्नु माजा : 92
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ عُمَارَةَ عَنْ فِرَاسٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ سَيِّدَا كُهُولِ أَهْلِ الْجَنَّةِ مِنْ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ إِلَّا النَّبِيِّينَ وَالْمُرْسَلِينَ لَا تُخْبِرْهُمَا يَا عَلِيُّ مَا دَامَا حَيَّيْنِ
हमें बताया है [हस्याम बिन अम्मार] ने कहा, हमें बताया है [सुफ़यान] ने [अल हसन बिन उमरा] से [फ़िरस] से [अश स्याबी] से [अल हारिस] से [अली] से उन्होंने कहा; रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अबू बक्र और उमर स्वर्ग में रहने वाले वयस्क लोगों के नेता हैं, नबियों और रसूलों को छोड़कर। ऐ अली, जब तक वे दोनों जीवित हैं, तब तक कुछ न कहना।"
इमाम इब्नु माजा : 93
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عَطِيَّةَ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَهْلَ الدَّرَجَاتِ الْعُلَى يَرَاهُمْ مَنْ أَسْفَلَ مِنْهُمْ كَمَا يُرَى الْكَوْكَبُ الطَّالِعُ فِي الْأُفُقِ مِنْ آفَاقِ السَّمَاءِ وَإِنَّ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ مِنْهُمْ وَأَنْعَمَا
हमसे [अली बिन मुहम्मद] और [अम्र बिन अब्दुल्लाह] दोनों ने कहा है; हमसे [वाकी] ने कहा है, हमसे [अल अमाश] ने [अथियाह बिन साद] से [अबू सईद अल खुदरी] से कहा है; उन्होंने कहा; अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: “बेशक, जन्नत में सबसे ऊंचे दर्जे के लोगों को उनसे नीचे वाले लोग देख सकते हैं, जैसे आसमान के आखिर में तारे उगते हैं। और बेशक, अबू बक्र और उमर उन लोगों में से हैं जिन्हें यह नेमत मिली।”
इमाम इब्नु माजा : 94
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ مَوْلًى لِرِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ الْيَمَانِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَا أَدْرِي مَا قَدْرُ بَقَائِي فِيكُمْ فَاقْتَدُوا بِاللَّذَيْنِ مِنْ بَعْدِي وَأَشَارَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ
हमें बताया है [अली बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें बताया है [वाकी] ने। और एक और लाइन के अनुसार; हमें बताया है [मुहम्मद बिन बशियार] ने कहा, हमें बताया है [मुअम्मल] दोनों ने कहा; हमें बताया है [सुफ़यान] [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से [पुराने गुलाम रिबी बिन हिरासी] से [रिबी बिन हिरासी] से [हुदज़ैफ़ा बिन अल यमन] से उसने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वास्तव में, मुझे नहीं पता कि मैं तुम्हारे साथ कब तक रहूंगा, इसलिए मेरे बाद दो लोगों का अनुसरण करो।" फिर उन्होंने अबू बक्र और उमर की ओर इशारा किया।
इमाम इब्नु माजा : 95
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ عُمَرَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ أَبِي حُسَيْنٍ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُلَمَّا وُضِعَ عُمَرُ عَلَى سَرِيرِهِ اكْتَنَفَهُ النَّاسُ يَدْعُونَ وَيُصَلُّونَ أَوْ قَالَ يُثْنُونَ وَيُصَلُّونَ عَلَيْهِ قَبْلَ أَنْ يُرْفَعَ وَأَنَا فِيهِمْ فَلَمْ يَرُعْنِي إِلَّا رَجُلٌ قَدْ زَحَمَنِي وَأَخَذَ بِمَنْكِبِي فَالْتَفَتُّ فَإِذَا عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ فَتَرَحَّمَ عَلَى عُمَرَ ثُمَّ قَالَ مَا خَلَّفْتُ أَحَدًا أَحَبَّ إِلَيَّ أَنْ أَلْقَى اللَّهَ بِمِثْلِ عَمَلِهِ مِنْكَ وَايْمُ اللَّهِ إِنْ كُنْتُ لَأَظُنُّ لَيَجْعَلَنَّكَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ مَعَ صَاحِبَيْكَ وَذَلِكَ أَنِّي كُنْتُ أَكْثَرُ أَنْ أَسْمَعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ ذَهَبْتُ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَدَخَلْتُ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَخَرَجْتُ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ فَكُنْتُ أَظُنُّ لَيَجْعَلَنَّكَ اللَّهُ مَعَ صَاحِبَيْكَ
हमें बताया है [अली बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें बताया है [याह्या बिन आदम] ने कहा, हमें बताया है [इब्न मुबारक] [उमर बिन सईद बिन अबू हुसैन] से [इब्न अबू अव्वलह] ने कहा; मैंने [इब्न अब्बास] को कहते सुना; "जब उमर को उनके बिस्तर पर रखा गया था, लोगों ने उन्हें सहारा दिया, उनके लिए प्रार्थना की और उनके लिए प्रार्थना की, या इब्नु अब्बास ने कहा; "उनके लिए प्रशंसा करो और प्रार्थना करो इससे पहले कि उन्हें उठा लिया जाए, जबकि उस समय मैं उनके बीच में था। किसी ने मुझे नहीं देखा सिवाय किसी के जिसने निचोड़ा और मेरे कंधे को पकड़ लिया। जब मैं मुड़ा तो पता चला कि वह [अली बिन अबू तालिब] थे। उन्होंने कहा; "रहिमुल्लाह" (अल्लाह उन पर रहम करे) उमर से। फिर उन्होंने कहा; "मैंने ऐसा कोई नहीं छोड़ा है जिसके कामों को अल्लाह से मिलकर मुझे तुमसे ज़्यादा खुशी हो। अल्लाह की कसम, मुझे यकीन है कि अल्लाह तुम्हें तुम्हारे दो साथियों में से एक बनाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने अक्सर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को हमेशा यह कहते सुना है: "मैं अबू बक्र और उमर के साथ गया। मैं अबू बक्र और उमर के साथ अंदर आया। और मैं अबू बक्र और उमर के साथ निकला।" तो मुझे यकीन है कि अल्लाह तुम्हें तुम्हारे दो साथियों में से एक बनाएगा।"
इमाम इब्नु माजा : 96
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَخَرَجَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ فَقَالَ هَكَذَا نُبْعَثُ
हमें बताया है [अली बिन मैमुन अर रक़्की] ने, हमें बताया है [सईद बिन मसलमा] [इस्माईल बिन उमैया] से [नफी] से [इब्न उमर] ने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बक्र और उमर के बीच से निकले और कहा: "इस तरह हम फिर से ज़िंदा किए जाएँगे।"
इमाम इब्नु माजा : 97
حَدَّثَنَا أَبُو شُعَيْبٍ صَالِحُ بْنُ الْهَيْثَمِ الْوَاسِطِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْقُدُّوسِ بْنُ بَكْرِ بْنِ خُنَيْسٍ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ عَنْ عَوْنِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ سَيِّدَا كُهُولِ أَهْلِ الْجَنَّةِ مِنْ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ إِلَّا النَّبِيِّينَ وَالْمُرْسَلِينَ
हमें बताया है [अबू स्यूऐब सलीह बिन अल हैतसम अल वासीथी] ने कहा, हमें बताया है [अब्दुल कुदुस बिन बक्र बिन खुनैस] ने कहा, हमें बताया है [मलिक बिन मिघवाल] ने [औन बिन अबू जुहैफा] से [अपने पिता] से उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अबू बक्र और उमर अपने साथियों के लिए जन्नत के लीडर हैं, पहले और बाद के दोनों ग्रुप के, सिवाय पैगंबरों और रसूलों के।"
इमाम इब्नु माजा : 98
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ وَالْحُسَيْنُ بْنُ الْحَسَنِ الْمَرْوَزِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُّ النَّاسِ أَحَبُّ إِلَيْكَ قَالَ عَائِشَةُ قِيلَ مِنْ الرِّجَالِ قَالَ أَبُوهَا
हमें बताया गया है कि [अहमद बिन अब्दा] और [अल हुसैन बिन अल हसन अल मरवाज़ी] दोनों ने कहा; हमें [अल मुअत्तमीर बिन सुलेमान] ने [हुमैद] से [अनस बिन मलिक] से बताया है, उन्होंने कहा; पैगंबर से पूछा गया; "आप किससे सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं?" उन्होंने जवाब दिया: "आयशा।" फिर उनसे दोबारा पूछा गया; "इंसानों से?" उन्होंने जवाब दिया: "उनके पिता से।"
इमाम इब्नु माजा : 99
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ أَخْبَرَنِي الْجُرَيْرِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَأَيُّ أَصْحَابِهِ كَانَ أَحَبَّ إِلَيْهِ قَالَتْ أَبُو بَكْرٍ قُلْتُ ثُمَّ أَيُّهُمْ قَالَتْ عُمَرُ قُلْتُ ثُمَّ أَيُّهُمْ قَالَتْ أَبُو عُبَيْدَةَ
हमें बताया है [अली बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें बताया है [अबू उसामा] ने कहा, मुझे बताया है [अल जुएरी] [अब्दुल्ला बिन सयाक़िक] से उन्होंने कहा; मैंने [आयशा] से पूछा; "वह अपने दोस्तों में से किससे सबसे ज़्यादा प्यार करता है?" उसने जवाब दिया; "अबू बकर।" मैंने फिर पूछा; "तो फिर कौन?" उसने जवाब दिया; "उमर।" मैंने फिर पूछा; "तो फिर कौन?" उसने जवाब दिया; "अबू उबैदा।"
इमाम इब्नु माजा : 100
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّلْحِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ خِرَاشٍ الْحَوْشَبِيُّ عَنْ الْعَوَّامِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَلَمَّا أَسْلَمَ عُمَرُ نَزَلَ جِبْرِيلُ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ لَقَدْ اسْتَبْشَرَ أَهْلُ السَّمَاءِ بِإِسْلَامِ عُمَرَ
हमें बताया है [इस्माईल बिन मुहम्मद अथ थलही] ने कहा, हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन खिरसी अल हौस्याबी] [अल अव्वम बिन हौस्याब] से [मुजाहिद] से [इब्न अब्बास] ने कहा; "जब उमर ने इस्लाम कबूल किया, तो जिब्रील नीचे आए और कहा: "हे मुहम्मद, आसमान वाले उमर के इस्लाम से खुश हैं।"