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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 हदीस

हदीस

Imam Ibnu Majah : 81

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عُثْمَانَ مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى عَائِشَةَ فَذَكَرَ لَهَا شَيْئًا مِنْ الْقَدَرِ فَقَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ تَكَلَّمَ فِي شَيْءٍ مِنْ الْقَدَرِ سُئِلَ عَنْهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَنْ لَمْ يَتَكَلَّمْ فِيهِ لَمْ يُسْأَلْ عَنْهُقَالَ أَبُو الْحَسَنِ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَاهُ حَازِمُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شَيْبَانَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عُثْمَانَ فَذَكَرَ نَحْوَهُ

हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [मलिक बिन इस्माइल] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [याह्या बिन उस्मान] अबू बकर के पूर्व गुलाम, कहले बाड़े; [याह्या बिन अब्दुल्लाह बिन अबू अवलकाह] [अपना पिता] से हमनी के बतवले कि उ एक बेर [ऐस्याह] से मिलल रहले अवुरी किस्मत से जुड़ल कुछ बात के जिक्र कईले रहले। त ऊ कहले कि; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि जे भी किस्मत के बारे में कुछ चर्चा करी, तब क़यामत के दिन ओकरा से जवाब देवे के कहल जाई। आ जे एकरा पर चरचा ना करी ओकरा के जिम्मेदार ना ठहरावल जाई'. अबुल हसन अल कथथान कहले कि; हमनी के बता देले बाड़े हाजिम बिन याह्या कहले बाड़े, बता देले बाड़े अब्दुल मलिक बिन सायबान कहले बाड़े, बता देले बाड़े याह्या बिन उस्मान। ओकरा बाद उ ऊपर के हदीस के जिक्र कईले।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 82

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ أَبِي هِنْدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى أَصْحَابِهِ وَهُمْ يَخْتَصِمُونَ فِي الْقَدَرِ فَكَأَنَّمَا يُفْقَأُ فِي وَجْهِهِ حَبُّ الرُّمَّانِ مِنْ الْغَضَبِ فَقَالَ بِهَذَا أُمِرْتُمْ أَوْ لِهَذَا خُلِقْتُمْ تَضْرِبُونَ الْقُرْآنَ بَعْضَهُ بِبَعْضٍ بِهَذَا هَلَكَتْ الْأُمَمُ قَبْلَكُمْقَالَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو مَا غَبَطْتُ نَفْسِي بِمَجْلِسٍ تَخَلَّفْتُ فِيهِ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا غَبَطْتُ نَفْسِي بِذَلِكَ الْمَجْلِسِ وَتَخَلُّفِي عَنْهُ

हमनी के रिवायत भइल बा [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़न, हमनी के रिवायत कइले बाड़न [अबू मुअवियाह] कहले बाड़न, हमनी के [दाउद बिन अबू हिंद] से [अमर बिन शुअइब] से [अपना पिता] से [अपना दादा] से रिवायत कइले बाड़न उ कहले बाड़न; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना साथी लोग से मिले निकलले जे किस्मत के लेके बहस करत रहले। त अइसन लागल कि क्रोध के चलते उनकर चेहरा अनार नियर हो गइल होखे। एकरा बाद उ कहले कि, 'का एही खाती आपके आज्ञा दिहल गईल बा, चाहे उ कहले कि, 'का एकरा खाती आपके रचना भईल बा! रउआ कुरान के कुछ हिस्सा के दोसरा हिस्सा से टकरा जानी। एकरा चलते तोहरा से पहिले के लोग के नाश हो गईल'। ऊ - कथाकार - कहले; तब अब्दुल्लाह बिन अमर कहले कि, अगर हम ओह सभा में ना शामिल होखब जवना में अल्लाह के रसूलुल्लाह अलैहि वसल्लम मौजूद रहले त हम अपना से केतना नाराज होखब। आ ओह सभा में ना रहला का चलते हम अपना पर केतना नाराज होखब'.

हदीस

Imam Ibnu Majah : 83

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي حَيَّةَ أَبُو جَنَابٍ الْكَلْبِيُّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا عَدْوَى وَلَا طِيَرَةَ وَلَا هَامَةَ فَقَامَ إِلَيْهِ رَجُلٌ أَعْرَابِيٌّ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ الْبَعِيرَ يَكُونُ بِهِ الْجَرَبُ فَيُجْرِبُ الْإِبِلَ كُلَّهَا قَالَ ذَلِكُمْ الْقَدَرُ فَمَنْ أَجْرَبَ الْأَوَّلَ

हमनी के बतावल गइल बा कि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [अली बिन मुहम्मद] दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [वाकी'] कहले बाड़े, हमनी के बता देले बाड़े [याह्या बिन अबू हयाह अबू जनाब अल कलबी] से [अपना पिता] से [इब्न उमर] से उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'कवनो 'अदवा -अल्लाह के किस्मत के बिना संक्रामक बेमारी- नईखे, ना कवनो थियारा -निराशावाद के भावना- अवुरी ना कवनो हम्मा -ई विश्वास कि हड्डी फेर से जिंदा हो सकता-'। त एगो बेदुइन अरब खड़ा होके कहलस; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, पपड़ी वाला ऊंट के बारे में का सोचत बानी, त सभ ऊंट पपड़ी से संक्रमित हो गईल बाड़े?' ऊ जवाब दिहलन: 'ई सब किस्मत ह, - अगर ना - त पहिला ऊंट के के संक्रमित कइलस! ' 1999 में भइल रहे।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 84

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عِيسَى الْجَرَّارُ عَنْ عَبْدِ الْأَعْلَى بْنِ أَبِي الْمُسَاوِرِ عَنْ الشَّعْبِيِّ قَالَلَمَّا قَدِمَ عَدِيُّ ابْنُ حَاتِمٍ الْكُوفَةَ أَتَيْنَاهُ فِي نَفَرٍ مِنْ فُقَهَاءِ أَهْلِ الْكُوفَةِ فَقُلْنَا لَهُ حَدِّثْنَا مَا سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا عَدِيَّ ابْنَ حَاتِمٍ أَسْلِمْ تَسْلَمْ قُلْتُ وَمَا الْإِسْلَامُ فَقَالَ تَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَتُؤْمِنُ بِالْأَقْدَارِ كُلِّهَا لِخَيْرِهَا وَشَرِّهَا حُلْوِهَا وَمُرِّهَا

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [याह्या बिन ईसा अल जरर] से [अब्दुल अ'ला बिन अबू अल मुसावीर] से [शा'बी] से उ कहले बाड़े; 'जब [आदी बिन हातिम] कुफा में अइले त हमनी के आ फुकाहा के बीच से कई लोग' उनुका लगे आके ओकरा से कहलस; 'हमनी के उ हदीस पढ़ीं जवन रउआ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनले बानी,' उ तब कहले; 'हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आईल रहनी, तब उ कहले रहले कि, 'हे आदि बिन हातिम, इस्लाम में प्रवेश करीं अवुरी आप सुरक्षित हो जाईब'। हम ओकरा बाद पूछनी कि इस्लाम का ह? उ जवाब देले कि, 'तू गवाही देत बाड़ू कि अल्लाह के अलावे इबाद के लायक कवनो देवता नईखन अवुरी हम उनुकर रसूलुल्लाह हई, अवुरी आप उनुका सभ नीमन-बाउर, मीठ अवुरी कड़वा खानपान प विश्वास करतानी'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 85

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَسْبَاطُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ يَزِيدَ الرِّقَاشِيِّ عَنْ غُنَيْمِ بْنِ قَيْسٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلُ الْقَلْبِ مَثَلُ الرِّيشَةِ تُقَلِّبُهَا الرِّيَاحُ بِفَلَاةٍ

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [असबथ बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, हमनी के [अल अ'मासी] से [यजीद अर रकासी] से [घुनैम बिन कैस] से [अबू मूसा अल अस्यरी] से कहले बाड़े उ कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि दिल के दृष्टांत खुला जमीन प हवा के ओर से फेंकल पंख निहन बा।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 86

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا خَالِي يَعْلَى عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لِي جَارِيَةً أَعْزِلُ عَنْهَا قَالَ سَيَأْتِيهَا مَا قُدِّرَ لَهَا فَأَتَاهُ بَعْدَ ذَلِكَ فَقَالَ قَدْ حَمَلَتْ الْجَارِيَةُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا قُدِّرَ لِنَفْسٍ شَيْءٌ إِلَّا هِيَ كَائِنَةٌ

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े हमार चाचा [या'ला] से [अल अ'मासी] से [सलीम बिन अबू अल जा'द] से [जाबीर] से उ कहले बाड़े; एगो अंसार आदमी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आके पूछलस; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच हमरा लगे एगो गुलाम रहे, जवना के खिलाफ हम 'अजल' कईले रहनी। उ कहले कि, 'कुछ अयीसन होई जवन कि उनुका खाती तय भईल बा'। कुछ देर बाद फेरु आके कहले; 'गुलाम गर्भवती बिया! ' त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जवन आत्मा खातिर तय भईल बा, उ पूरा होई'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 87

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ ثَوْبَانَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَزِيدُ فِي الْعُمْرِ إِلَّا الْبِرُّ وَلَا يَرُدُّ الْقَدَرَ إِلَّا الدُّعَاءُ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيُحْرَمُ الرِّزْقَ بِخَطِيئَةٍ يَعْمَلُهَا

हमनी के बतवले बा [अली बिन मुहम्मद] कहले बा, हमनी के [वाकी'] से [सुफयान] से [अब्दुल्ला बिन ईसा] से [अब्दुल्लाह बिन अबू अल जा'द] से [त्साउबान] से कहले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, ' अच्छा काम के अलावे कुछूओ जीवन में बढ़ोतरी ना करेला, नमाज के अलावे कुछूओ किस्मत के विरोध ना करेला, अवुरी सचमुच, आदमी के गलती के चलते ओकर रोजी-रोटी से वंचित राखल जाला'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 88

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا عَطَاءُ بْنُ مُسْلِمٍ الْخَفَّافُ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ سُرَاقَةَ بْنِ جُعْشُمٍ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ الْعَمَلُ فِيمَا جَفَّ بِهِ الْقَلَمُ وَجَرَتْ بِهِ الْمَقَادِيرُ أَمْ فِي أَمْرٍ مُسْتَقْبَلٍ قَالَ بَلْ فِيمَا جَفَّ بِهِ الْقَلَمُ وَجَرَتْ بِهِ الْمَقَادِيرُ وَكُلٌّ مُيَسَّرٌ لِمَا خُلِقَ لَهُ

हमनी के रिवायत कइले बाड़न [हिस्यम बिन अम्मर] कहले बाड़न, हमनी के रिवायत कइले बाड़न [‘अथो` बिन मुस्लिम अल खफ्फाफ] उ कहले बाड़न; हमनी के [अल अ'मासी] [मुजाहिद] से बतवले बाड़े अवुरी [सुरकाह बिन जू'स्यूम] उ कहले बाड़े; हम पूछनी कि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का करम कवनो अइसन चीज ह जवन कलम से लिख के सूख गइल होखे आ रजत पहिलहीं से लागू हो गइल होखे भा भविष्य में होखे वाला चीज ह?' उ जवाब देले: 'इहाँ तक कि एकरा के एगो कलम से लिखल गईल रहे जवन कि सूख गईल बा अवुरी जवन प्रावधान लागू भईल बा, ओकरा मुताबिक सबकुछ आसान हो गईल बा, जवन कि ओकरा खाती बनावल गईल बा'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 89

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُصَفَّى الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مَجُوسَ هَذِهِ الْأُمَّةِ الْمُكَذِّبُونَ بِأَقْدَارِ اللَّهِ إِنْ مَرِضُوا فَلَا تَعُودُوهُمْ وَإِنْ مَاتُوا فَلَا تَشْهَدُوهُمْ وَإِنْ لَقِيتُمُوهُمْ فَلَا تُسَلِّمُوا عَلَيْهِمْ

हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन अल मुशफा अल हिमशी] कहले बाड़े, हमनी के [बकिया बिन अल वलीद] से [अल औजाई] से [इब्नु जुरैज] से [अबू जुबैर] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े उ कहले कि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में एह उम्मा के ज्ञानी उहे हवें जे अल्लाह के किस्मत से इनकार करेले। बेमार बाड़े त उनुका से मिले मत जाईं, मर गइलन त शोक मत करीं आ मिलब त नमस्कार मत करीं.'

हदीस

Imam Ibnu Majah : 90

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا إِنِّي أَبْرَأُ إِلَى كُلِّ خَلِيلٍ مِنْ خُلَّتِهِ وَلَوْ كُنْتُ مُتَّخِذًا خَلِيلًا لَاتَّخَذْتُ أَبَا بَكْرٍ خَلِيلًا إِنَّ صَاحِبَكُمْ خَلِيلُ اللَّهِ قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي نَفْسَهُ

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [वाकी'] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अल अ'मासी] से [अब्दुल्लाह बिन मुर्राह] से [अबुल अहवाश] से [अब्दुल्लाह] से उ कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि जान लीं कि हम सचमुच हर प्रेमी के प्रति सबसे दयालु इंसान हई। अगर हमरा कवनो प्रेमी लेबे के इजाजत मिलित त हम अबू बकर के आपन प्रेमी जरूर लेतीं. सचमुच, तोहार दोस्त अल्लाह के प्रिय ह।' वाकी' कहलस; 'उनकर मतलब खुदे बा'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 91

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا نَفَعَنِي مَالٌ قَطُّ مَا نَفَعَنِي مَالُ أَبِي بَكْرٍ فَبَكَى أَبُو بَكْرٍ وَقَالَ هَلْ أَنَا وَمَالِي إِلَّا لَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ

हमनी के [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] अवुरी [अली बिन मुहम्मद] के बतावल गईल बा, दुनो लोग कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [अबू मुअवियाह] कहले बाड़े; हमनी के [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से [अल अ'मासी] के बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अबू बकर के धन निहन कवनो धन नईखे जवना से हमरा फायदा हो सके', तब अबू बकर रोवे लगले, अवुरी कहले; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का हम आ हमार संपत्ति राउर ना ह'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 92

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ عُمَارَةَ عَنْ فِرَاسٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ سَيِّدَا كُهُولِ أَهْلِ الْجَنَّةِ مِنْ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ إِلَّا النَّبِيِّينَ وَالْمُرْسَلِينَ لَا تُخْبِرْهُمَا يَا عَلِيُّ مَا دَامَا حَيَّيْنِ

हमनी के बतवले बा [हिस्यम बिन अम्मर] कहले बा, हमनी के [सुफयान] से [अल हसन बिन उमरह] से [फिरस] से [एश स्या’बी] से [अल हरिथ] से [अली] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, अबू बकर अवुरी उमर पहिला अवुरी बाद के समूह से स्वर्ग के वयस्क निवासी के नेता हवे, सिवाय नबी अवुरी रसूलुम के। हे अली, जबले दुनु जने जिंदा बाड़े तबले मत बताईं'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 93

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عَطِيَّةَ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَهْلَ الدَّرَجَاتِ الْعُلَى يَرَاهُمْ مَنْ أَسْفَلَ مِنْهُمْ كَمَا يُرَى الْكَوْكَبُ الطَّالِعُ فِي الْأُفُقِ مِنْ آفَاقِ السَّمَاءِ وَإِنَّ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ مِنْهُمْ وَأَنْعَمَا

हमनी के [अली बिन मुहम्मद] आ [अमर बिन अब्दुल्लाह] दुनु जने कहले बाड़न कि; हमनी के रिवायत कइले बाड़न [वाकी’] कहले बाड़न, हमनी के [अल अ’माश] से [अथियाह बिन स’द] से [अबू सईद अल खुदरी] से रिवायत कइले बाड़न उ कहले बाड़न; अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में जन्नत के निवासी में सबसे ऊँच पद के लोग उनुका से नीचे के लोग देख सकतारे, जईसे कि तारा आसमान के अंत में उठला प देखाई देतारे। आ साँचहू अबू बकर आ उमर ओह लोग में शामिल बाड़े जेकरा ई बरकत मिलल बा.'

हदीस

Imam Ibnu Majah : 94

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ مَوْلًى لِرِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ الْيَمَانِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَا أَدْرِي مَا قَدْرُ بَقَائِي فِيكُمْ فَاقْتَدُوا بِاللَّذَيْنِ مِنْ بَعْدِي وَأَشَارَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [वाकी']। आ एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बश्यार] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [मु`अम्मल] दुनो कहले बाड़े; हमनी के [सुफयान] से [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से [पूर्व गुलाम रिब'ई बिन हिरासी] से [रिब'ई बिन हिरासी] से [हुदजाइफा बिन अल यमन] से बतवले बाड़े उ कहले; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में, हमरा नईखे मालूम कि हम आपके संगे कब तक -जीब-, एहसे हमरा बाद दु लोग के पीछे चली'। एकरा बाद उ अबू बकर अवुरी उमर के ओर इशारा कईले।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 95

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ عُمَرَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ أَبِي حُسَيْنٍ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُلَمَّا وُضِعَ عُمَرُ عَلَى سَرِيرِهِ اكْتَنَفَهُ النَّاسُ يَدْعُونَ وَيُصَلُّونَ أَوْ قَالَ يُثْنُونَ وَيُصَلُّونَ عَلَيْهِ قَبْلَ أَنْ يُرْفَعَ وَأَنَا فِيهِمْ فَلَمْ يَرُعْنِي إِلَّا رَجُلٌ قَدْ زَحَمَنِي وَأَخَذَ بِمَنْكِبِي فَالْتَفَتُّ فَإِذَا عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ فَتَرَحَّمَ عَلَى عُمَرَ ثُمَّ قَالَ مَا خَلَّفْتُ أَحَدًا أَحَبَّ إِلَيَّ أَنْ أَلْقَى اللَّهَ بِمِثْلِ عَمَلِهِ مِنْكَ وَايْمُ اللَّهِ إِنْ كُنْتُ لَأَظُنُّ لَيَجْعَلَنَّكَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ مَعَ صَاحِبَيْكَ وَذَلِكَ أَنِّي كُنْتُ أَكْثَرُ أَنْ أَسْمَعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ ذَهَبْتُ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَدَخَلْتُ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَخَرَجْتُ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ فَكُنْتُ أَظُنُّ لَيَجْعَلَنَّكَ اللَّهُ مَعَ صَاحِبَيْكَ

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [याह्या बिन आदम] कहले बाड़े, हमनी के [इब्न मुबारक] से [उमर बिन सईद बिन अबू हुसैन] से [इब्न अबू अवलकाह] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हम [इब्न अब्बास] के कहत सुनले बानी; 'जब उमर के बिछौना पर रखल गइल त लोग ओकरा के ढंक के ओकरा खातिर दुआ कइल आ ओकरा खातिर दुआ कइल, भा इब्न अब्बास कहले; 'उठावे से पहिले एकर स्तुति आ प्रार्थना करीं, जबकि ओह घरी हम ओह लोग में रहनी.' हमरा पर केहू के नजर ना पड़ल सिवाय केहू के जे हमरा कंधा के निचोड़ के पकड़ लिहलस। जब हम मुड़नी त पता चलल कि उ [अली बिन अबू तालिब] हवे। ऊ उच्चारण कइले; 'रहिमाहुल्लाह' -रहमा अल्लाह- उमर से। तब उ कहले कि; 'हम केहू के छोड़ले बानी, जेकरा से हम अल्लाह से मिलल पसंद करीं, हमार करम तोहरा से उनुका करम निहन बा।' अल्लाह के कसम हमरा पूरा भरोसा बा कि अल्लाह रउरा के रउरा दुनु दोस्तन का साथे मिल के बना दीहें. इहे कारण बा कि हम अक्सर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हमेशा इ जिक्र करत सुनत रहनी कि 'हम अबू बकर अवुरी उमर के संगे गईल रहनी।' अबू बकर आ उमर के साथे घुस गईनी। आ हम अबू बकर आ उमर के साथे निकल गइनी।' त हमरा पूरा भरोसा बा कि अल्लाह रउरा के रउरा दुनो साथी के संगे जरूर बनाईहे।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 96

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَخَرَجَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ فَقَالَ هَكَذَا نُبْعَثُ

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मैमुन अर रक्की] कहले बाड़े, हमनी के [सईद बिन मसलमाह] से [इस्माइल बिन उमैया] से [नाफी] से [इब्न उमर] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकर आ उमर के बीच निकल के कहले कि 'अइसहीं हमनी के जिंदा होखब जा'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 97

حَدَّثَنَا أَبُو شُعَيْبٍ صَالِحُ بْنُ الْهَيْثَمِ الْوَاسِطِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْقُدُّوسِ بْنُ بَكْرِ بْنِ خُنَيْسٍ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ عَنْ عَوْنِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ سَيِّدَا كُهُولِ أَهْلِ الْجَنَّةِ مِنْ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ إِلَّا النَّبِيِّينَ وَالْمُرْسَلِينَ

हमनी के बतवले बाड़े [अबू स्यूअइब सालिह बिन अल हैतसम अल वसीथी] कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल कुदुस बिन बकर बिन खुनैस] कहले बाड़े, हमनी के [मलिक बिन मिघवाल] से ['आउन बिन अबू जुहैफाह] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अबू बकर अवुरी उमर अपना साथी खाती स्वर्ग के नेता हवे, जवन कि पहिले अवुरी बाद के दुनो समूह के समूह के बाड़े, सिवाय नबी अवुरी रसूलुल्लाह के'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 98

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ وَالْحُسَيْنُ بْنُ الْحَسَنِ الْمَرْوَزِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُّ النَّاسِ أَحَبُّ إِلَيْكَ قَالَ عَائِشَةُ قِيلَ مِنْ الرِّجَالِ قَالَ أَبُوهَا

हमनी के बतावल गइल बा कि [अहमद बिन अब्दाह] आ [अल हुसैन बिन अल हसन अल मरवाजी] दुनु कहले रहले; हमनी के [अल मुअतमीर बिन सुलेमान] के [हुमैद] से [अनास बिन मलिक] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; नबी से पूछल गइल कि; 'रउरा केकरा से सबसे जादे प्यार करेनी?' ऊ जवाब दिहले- 'ऐस्याह'। तब उनका से फेरु से पूछल गइल; 'पुरुष से?' ऊ जवाब दिहले: 'उनकर पिता'।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 99

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ أَخْبَرَنِي الْجُرَيْرِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَأَيُّ أَصْحَابِهِ كَانَ أَحَبَّ إِلَيْهِ قَالَتْ أَبُو بَكْرٍ قُلْتُ ثُمَّ أَيُّهُمْ قَالَتْ عُمَرُ قُلْتُ ثُمَّ أَيُّهُمْ قَالَتْ أَبُو عُبَيْدَةَ

हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अबू उसामाह] कहले बाड़े, हमरा के [अल जुआइरी] [अब्दुल्लाह बिन सियाकिक] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हम [आइशा] से पूछनी; 'उनुका कवन दोस्त के सबसे जादे प्यार बा?' ऊ जवाब दिहलन; 'अबू बकर' के नाम से जानल जाला। हम फेरु से पूछनी; 'तब के?' ऊ जवाब दिहलन; 'उमर' के नाम से जानल जाला। हम फेरु से पूछनी; 'तब के?' ऊ जवाब दिहलन; 'अबू उबैदाह' के नाम से जानल जाला।

हदीस

Imam Ibnu Majah : 100

حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّلْحِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ خِرَاشٍ الْحَوْشَبِيُّ عَنْ الْعَوَّامِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَلَمَّا أَسْلَمَ عُمَرُ نَزَلَ جِبْرِيلُ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ لَقَدْ اسْتَبْشَرَ أَهْلُ السَّمَاءِ بِإِسْلَامِ عُمَرَ

हमनी के बतवले बाड़े [इस्माइल बिन मुहम्मद अथ थल्ही] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन खिरासी अल हौस्याबी] से [अल अववाम बिन हौस्याब] से [मुजाहिद] से [इब्नु अब्बास] से उ कहले बाड़े; ' जब उमर इस्लाम अपना लिहले त जिब्रिल उतर के कहले: 'हे मुहम्मद, उमर के इस्लाम से आसमान के लोग खुश बाड़े'।