Imam Ibnu Majah : 61
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ نِزَارٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صِنْفَانِ مِنْ هَذِهِ الْأُمَّةِ لَيْسَ لَهُمَا فِي الْإِسْلَامِ نَصِيبٌ الْمُرْجِئَةُ وَالْقَدَرِيَّةُ
हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [मुहम्मद बिन फुदलैल] कहले बाड़े, हमनी के बता देले बाड़े [अली बिन निजार] से [अपना पिता] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले बाड़न कि एह उम्मा के दू गो समूह बा जवन इस्लाम के हिस्सा नइखे; अर्थात मुरजी`आह आ कदरियाह'।
Imam Ibnu Majah : 62
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ كَهْمَسِ بْنِ الْحَسَنِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ قَالَ كُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ شَدِيدُ سَوَادِ شَعَرِ الرَّأْسِ لَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ سَفَرٍ وَلَا يَعْرِفُهُ مِنَّا أَحَدٌ فَجَلَسَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَسْنَدَ رُكْبَتَهُ إِلَى رُكْبَتِهِ وَوَضَعَ يَدَيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصَوْمُ رَمَضَانَ وَحَجُّ الْبَيْتِ فَقَالَ صَدَقْتَ فَعَجِبْنَا مِنْهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَكُتُبِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ صَدَقْتَ فَعَجِبْنَا مِنْهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَمَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَمَا أَمَارَتُهَا قَالَ أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي تَلِدُ الْعَجَمُ الْعَرَبَ وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الْعَالَةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبِنَاءِ قَالَ ثُمَّ قَالَ فَلَقِيَنِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ ثَلَاثٍ فَقَالَ أَتَدْرِي مَنْ الرَّجُلُ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ ذَاكَ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ مَعَالِمَ دِينِكُمْ
हमनी के बतवले बा [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, हमनी के [वाकी'] से [कहमस बिन अल हसन] से [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] से [याह्या बिन या'मर] से [इब्न उमर] से [उमर] से कहले बाड़े; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में बईठल रहनी, तब एगो आदमी आईल जवन बहुत सफेद कपड़ा पहिनले रहे, बाल बहुत करिया रहे, ओकरा प कवनो लमहर सफर के निशान ना लउकत रहे, अवुरी हमनी में से केहु उनुका के ना जानत रहे। एकरा बाद उ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में बईठ के नबी के घुटना से घुटना दबा के जांघ प हाथ रखले। तब ऊ व्यक्ति पूछलस कि; 'हे मुहम्मद, इस्लाम का ह?' ऊ जवाब दिहले: 'गवाही दीं कि अल्लाह के अलावा कवनो देवता इबादत के लायक नइखे आ हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हईं, नमाज करीं, जकात करीं, रमजान महीना में रोजा करीं आ बैतुल्लाह के तीर्थ करीं'. ऊ फेरु कहले- 'तू सही कहत बाड़ू'। त हम हैरान रहनी, उहे पूछले रहले अवुरी उहे एकर पुष्टि भी कईले रहले। फेरु फेरु पूछले कि हे मुहम्मद, ईमान का होला? उ जवाब देले कि, 'तू अल्लाह, उनुकर फरिश्ता, उनुकर रसूलुल्लाह, उनुकर किताब, अंतिम दिन अवुरी कदर, निमन अवुरी बुरा दुनो प विश्वास करेनी'। ऊ कहले- 'तू सही कहत बाड़ू'। त हम हैरान रहनी, उ पूछले अवुरी उहो एकर पुष्टि कईले। फेरु फेरु पूछले कि हे मुहम्मद इहसान का ह? उ जवाब देले कि आप अल्लाह के अयीसन पूजा करेनी जईसे उनुका के देखत होखे। अगर रउआ उनुका के नईखी देख सकत त उ असल में रउआ के देखतारे'। पूछले कि क़यामत के दिन कब आई? उ जवाब देले कि, 'जेकरा से एकरा बारे में पूछल जाला, उ पूछे वाला से जादे नईखे जानत।' ऊ पूछले: 'का संकेत बा?' ऊ जवाब दिहले: 'एक गुलाम मेहरारू अपना मालिक के बच्चा के जनम दिहलस'। -वाकी' कहलस; 'माने कि 'अजाम - अरब राष्ट्र से ना - अरब लोग के जनम दिहलस - 'आ रउआ देखनी कि नंगे पांव अवुरी नंगे छाती वाला लोग, गरीब अवुरी भेड़ चरवाहा इमारत बनावे में एक दूसरा से प्रतिस्पर्धा करत रहले'। इब्न उमर कहले कि; उमर कहले कि; 'तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन दिन बाद हमरा से मिलले, उ फेर पूछले कि, 'का रउवा जानत बानी कि उ आदमी के ह?' हम जवाब देनी कि 'अल्लाह अवुरी उनुकर रसूलुल्लाह एकरा से जादे जानत बाड़े'। उ कहले कि, 'जिब्राईल ही आपके धार्मिक मामला के बारे में सिखावे खाती आपके लगे आईल रहले'।
Imam Ibnu Majah : 63
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ أَبِي حَيَّانَ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا بَارِزًا لِلنَّاسِ فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَلِقَائِهِ وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ الْآخِرِ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ وَلَا تُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ وَتُؤَدِّيَ الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ وَلَكِنْ سَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا إِذَا وَلَدَتْ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا فَذَلِكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا وَإِذَا تَطَاوَلَ رِعَاءُ الْغَنَمِ فِي الْبُنْيَانِ فَذَلِكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ فَتَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ{ إِنَّ اللَّهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ }الْآيَةَ
हमनी के बतवले बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहले बा, हमनी के [इस्माइल बिन उलैयाह] से [अबू हयान] से [अबू ज़ुराह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; एक दिन जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुसलमानन में रहले त एगो आदमी आके पूछलस; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इमान का ह?' उ जवाब देले कि, 'तू अल्लाह, उनुका फरिश्ता, उनुकर किताब, उनुका रसूलुल्लाह, उनुका मुलाकात प विश्वास करेनी अवुरी आखिरी दिन के कयामत के दिन प विश्वास करेनी'। उ पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इस्लाम का ह? उ जवाब देले कि, 'तू अल्लाह के इबादत करेनी अवुरी उनुका से कुछूओ शरीब ना करेनी, फर्ज नमाज करेनी, फर्ज जकात देवेनी अवुरी रमजान के महीना में रोजा राखेनी'। उ फेर पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इहसान का ह? उ जवाब देले कि आप अल्लाह के अयीसन पूजा करेनी जईसे उनुका के देखत होखे। अगर रउआ उनुका के ना देखब त उ असल में रउआ के देखतारे'। उ फेर पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, दुनिया के अंत कब होई? उ जवाब देले कि, 'जवना से पूछल जाता, ओकरा से पूछे वाला से जादे जानकारी नईखे।' लेकिन हम तोहके संकेतन के बारे में बताइब। अगर कवनो महिला गुलाम अपना मालिक के बच्चा के जन्म देले होखे त उहो एगो संकेत रहे। बकरी चले वाला लोग भवन बनावे में प्रतिस्पर्धा करेला, इहे एगो संकेत बा। पांच में - अलौकिक समस्या के कुंजी - अल्लाह के छोड़ के केहु नईखे जानत'। तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आयत पढ़ले कि 'वास्तव में क़यामत के दिन के ज्ञान अकेले अल्लाह के लगे बा; आ उहे बरखा करे वाला हवें, आ जानत बाड़न कि गर्भ में का बा। आ केहू ना जान सके - निश्चित रूप से - काल्हु ऊ का कोशिश करी. आ केहू के पता नइखे चलत कि ऊ धरती पर कहाँ मर जइहें. दरअसल, अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वज्ञ हवें'।
Imam Ibnu Majah : 64
حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ صَالِحٍ أَبُو الصَّلْتِ الْهَرَوِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُوسَى الرِّضَا عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ الْحُسَيْنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِيمَانُ مَعْرِفَةٌ بِالْقَلْبِ وَقَوْلٌ بِاللِّسَانِ وَعَمَلٌ بِالْأَرْكَانِقَالَ أَبُو الصَّلْتِ لَوْ قُرِئَ هَذَا الْإِسْنَادُ عَلَى مَجْنُونٍ لَبَرَأَ
हमनी के बतावल गइल बा कि [सहल बिन अबू सहल] आ [मुहम्मद बिन इस्माइल] दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुस सलाम बिन सालिह अबू ऐश शाल्त अल हरावी] कहले बाड़े, हमनी के [अली बिन मूसा अर रिदला] से [अपना पिता] से [जा'फर बिन मुहम्मद] से [अपना पिता] से [अली बिन अल हसन] से [अपना पिता] से [अली बिन अबू तालिब] से कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'ईमान दिल में ज्ञान ह, जीभ से वचन ह, अवुरी अंग से कर्म ह'। अबू ऐश शाल्ट कहले कि; 'अगर पागल के ई सनद पढ़ल जाव त ऊ ठीक हो जाई'.
Imam Ibnu Majah : 65
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ أَوْ قَالَ لِجَارِهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ
हमनी के बतावल गइल बा कि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] आ [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन जा'फर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [स्यूबाह] कहले बाड़े; हम [कोतादाह] के [अनस बिन मलिक] से एगो हदीस बतावत सुनले बानी उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'तू में से केहु तब तक विश्वास ना करी जब तक उ अपना भाई से प्यार ना करी, चाहे उ ना कही कि 'अपना पड़ोसी से ओसही प्यार करेला'।
Imam Ibnu Majah : 66
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَلَدِهِ وَوَالِدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
हमनी के बतावल गइल बा कि [मुहम्मद बिन बस्स्यार] आ [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन जा'फर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [स्यूबाह] कहले बाड़े; हम [अनस बिन मलिक] से [कोतादाह] सुनले बानी उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'तू में से केहु तब तक विश्वास ना करी जब तक हम उ आदमी ना बन जाई, जवना से उ अपना बच्चा, अपना माता-पिता अवुरी पूरा इंसान से जादे प्यार करेले'।
Imam Ibnu Majah : 67
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ حَتَّى تُؤْمِنُوا وَلَا تُؤْمِنُوا حَتَّى تَحَابُّوا أَوَ لَا أَدُلُّكُمْ عَلَى شَيْءٍ إِذَا فَعَلْتُمُوهُ تَحَابَبْتُمْ أَفْشُوا السَّلَامَ بَيْنَكُمْ
हमनी के बतवले बा [अबू बकर बिन अबू सियाइबा] कहले बाड़े, हमनी के [वाकी'] अवुरी [अबू मुअवियाह] [अल अ'मासी] से [अबू शालिह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जवना हाथ में हमार आत्मा बा, तब तक आप जन्नत में ना घुसब, जब तक आप विश्वास ना करब, अवुरी जब तक आप एक दूसरा से प्यार ना करब तब तक विश्वास ना करब। का हम रउरा के कवनो अइसन प्रथा देखाईं कि अगर रउरा एकर अभ्यास करब त रउरा एक दोसरा से प्यार करब? रउरा सभे के बीच अभिवादन फइलवऽ'।
Imam Ibnu Majah : 68
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سِبَابُ الْمُسْلِمِ فُسُوقٌ وَقِتَالُهُ كُفْرٌ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े ['अफ्फान] कहले बाड़े, हमनी के [स्यूबाह] [अल अ'मासी] से बतवले बाड़े। आ एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के बतवले बाड़े [हिस्यम बिन अम्मर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [ईसा बिन यूनुस] कहले बाड़े, हमनी के [अल अमासी] से [अबू व`इल] से [अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि मुसलमान के निंदा कईल बुराई ह अवुरी ओकरा के मारल कुफर ह।
Imam Ibnu Majah : 69
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ الرَّازِيُّ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ فَارَقَ الدُّنْيَا عَلَى الْإِخْلَاصِ لِلَّهِ وَحْدَهُ وَعِبَادَتِهِ لَا شَرِيكَ لَهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ مَاتَ وَاللَّهُ عَنْهُ رَاضٍ قَالَ أَنَسٌ وَهُوَ دِينُ اللَّهِ الَّذِي جَاءَتْ بِهِ الرُّسُلُ وَبَلَّغُوهُ عَنْ رَبِّهِمْ قَبْلَ هَرْجِ الْأَحَادِيثِ وَاخْتِلَافِ الْأَهْوَاءِ وَتَصْدِيقُ ذَلِكَ فِي كِتَابِ اللَّهِ فِي آخِرِ مَا نَزَلَ يَقُولُ اللَّهُ { فَإِنْ تَابُوا } قَالَ خَلْعُ الْأَوْثَانِ وَعِبَادَتِهَا { وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوْا الزَّكَاةَ } وَقَالَ فِي آيَةٍ أُخْرَى { فَإِنْ تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوْا الزَّكَاةَ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ } حَدَّثَنَا أَبُو حَاتِمٍ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى الْعَبْسِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ الرَّازِيُّ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ أَنَسٍ مِثْلَهُ
हमनी के बतवले बाड़े [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अबू अहमद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अबू जाफर अर रजी] से [रबी’ बिन अनस] से [अनास बिन मलिक] से उ कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले बाड़न कि जे केहू अल्लाह के प्रति ईमानदारी के हालत में मर जाव, उनकर इबादत करेला आ उनकर साथी ना करेला, नमाज पढ़ेला आ जकात देला, ओकरा बाद ऊ अल्लाह के प्रसन्नता में मर जाला’। अनस कहले कि; 'उहे अल्लाह के धर्म ह जवन रसूलन के ओर से ले आवल गईल रहे, उ लोग एकरा के चर्चा अवुरी कामुक विवाद के भ्रम से पहिले अपना रब्ब से पहुंचवले।' इ बात अल्लाह के किताब में अवगत आयत के अंत में मिलेला, अल्लाह कहले बाड़े कि, 'अगर उ लोग पश्चाताप करीहे - अनस कहले; मूर्ति आ ओकर गुलामी के त्याग, नमाज के कायम राखल आ जकात दिहल'। उनकर एगो अउरी शब्द में: 'अगर उ लोग पश्चाताप करेला, नमाज के कायम रखेला, जकात देला, त उ लोग दीन में राउर भाई हवे'। हमनी के बतवले बाड़े [अबू हातिम] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [उबैदुल्लाह बिन मूसा अल अब्सी] कहले बाड़े, हमनी के [अबू जाफर अर रजी] से [अर रबी’ बिन अनस] से उपर के हदीस निहन बतवले बाड़े।
Imam Ibnu Majah : 70
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَرِ حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ عَنْ يُونُسَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ
हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन अल अजहर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अबू अन नडलर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अबू जा'फर] से [यूनुस] से [अल हसन] से [अबू हुरैरा] से उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'हमरा के आदेश दिहल गईल कि जब तक लोग से लड़ाई ना करी, जब तक उ लोग गवाही ना देस कि अल्लाह के अलावे अवुरी कवनो भगवान नईखन, अवुरी हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हई, नमाज अवुरी जकात देवेनी'।
Imam Ibnu Majah : 71
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ بَهْرَامَ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ
हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन अल अजहर] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [मुहम्मद बिन यूसुफ] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अब्दुल हामिद बिन बहराम] से [स्याहर बिन हौस्याब] से [अब्दुररहमान बिन गनीम] से [मुअदज बिन जबल] से उ कहले कि; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'हमरा के आदेश दिहल गईल कि जब तक लोग से लड़ाई ना करी, जब तक उ लोग गवाही ना देस कि अल्लाह के अलावे इबादत के लायक कवनो देवता नईखन अवुरी सचमुच हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हई, नमाज स्थापित करेनी अवुरी जकात देवेनी'।
Imam Ibnu Majah : 72
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ الرَّازِيُّ أَنْبَأَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ اللَّيْثِيُّ حَدَّثَنَا نِزَارُ بْنُ حَيَّانَ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صِنْفَانِ مِنْ أُمَّتِي لَيْسَ لَهُمَا فِي الْإِسْلَامِ نَصِيبٌ أَهْلُ الْإِرْجَاءِ وَأَهْلُ الْقَدَرِ حَدَّثَنَا أَبُو عُثْمَانَ الْبُخَارِيُّ سَعِيدُ بْنُ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ خَارِجَةَ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ عَنْ عَبْدِ الْوَهَّابِ بْنِ مُجَاهِدٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَا الْإِيمَانُ يَزِيدُ وَيَنْقُصُ حَدَّثَنَا أَبُو عُثْمَانَ الْبُخَارِيُّ حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ عَنْ حَرِيزِ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ الْحَارِثِ أَظُنُّهُ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ قَالَ الْإِيمَانُ يَزْدَادُ وَيَنْقُصُ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन इस्माइल अर राजी] कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [यूनुस बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद अल लैट्स] कहले बाड़े, हमनी के [निजर बिन हय्यान] से [इक्रिमा] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़े अवुरी [जबिर बिन अब्दुल्लाह] दुनो कहले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले बाड़न कि हमरा उम्मा के दू गो समूह बा जवना के इस्लाम में कवनो हिस्सा बिल्कुल नइखे; मुरजिया आ कदरिया के अनुयायी लोग। हमनी के बतवले बाड़े अबू उस्मान अल बुखारी सईद बिन सअद उ कहले बाड़े; हमनी के अल हैतसम बिन खरिजा के बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हमनी के बतवले बाड़न कि इस्माइल - यानी इब्न इयासी - अब्दुल वहाब बिन मुजाहिद से मुजाहिद से इब्न अब्बास से आ अबू हुरैरा दुनु जने कहले बाड़न कि ‘ईमान बढ़ेला आ घटेला’. हमनी के बतवले बाड़े अबू उस्मान अल बुखारी कहले बाड़े, बता देले बाड़े अल हैतसम कहले बाड़े, बता देले बाड़े इस्माइल से जरीर बिन उस्मान से अल हरित से हमरा लागल कि इ अबू दरदा से मुजाहिद से बा` उ कहले; 'आस्था मोम आ कम हो जाला'।
Imam Ibnu Majah : 73
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَمُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍحَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ الصَّادِقُ الْمَصْدُوقُ أَنَّهُ يُجْمَعُ خَلْقُ أَحَدِكُمْ فِي بَطْنِ أُمِّهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا ثُمَّ يَكُونُ عَلَقَةً مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ يَكُونُ مُضْغَةً مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ يَبْعَثُ اللَّهُ إِلَيْهِ الْمَلَكَ فَيُؤْمَرُ بِأَرْبَعِ كَلِمَاتٍ فَيَقُولُ اكْتُبْ عَمَلَهُ وَأَجَلَهُ وَرِزْقَهُ وَشَقِيٌّ أَمْ سَعِيدٌ فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهَا إِلَّا ذِرَاعٌ فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الْكِتَابُ فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ فَيَدْخُلُهَا وَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهَا إِلَّا ذِرَاعٌ فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الْكِتَابُ فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَيَدْخُلُهَا
हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [वाकी'] अवुरी [मुहम्मद बिन फुदलैल] अवुरी [अबू मुअवियाह]। एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के बतवले बा [अली बिन मैमुन अर रक्की] कहले बा, हमनी के [अबू मुअवियाह] अवुरी [मुहम्मद बिन उबैद] [अल अ'मासी] से [जैद बिन वहाब] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; [अब्दुल्लाह बिन मसूद] कहले कि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, एगो ईमानदार आ भरोसेमंद आदमी हमनी के बतवले बाड़न कि रउरा सभे में से हर एक के सृष्टि चालीस दिन ले महतारी के पेट में तबले जमा हो जाला जबले ऊ खून के थक्का ना बन जाव. तब उ अयीसन मांस के गांठ बन गईल, फेर अल्लाह उनुका लगे एगो फरिश्ता भेजले, उनुका के चार वाक्य के आदेश दिहल गईल, फेर उ कहले कि, 'अपना कर्म, आपन मौत अवुरी आपन रोजी-रोटी के संगे-संगे आपन दुख चाहे सुख भी लिखीं'। जेकरा हाथ में हमार आत्मा बा, सचमुच रउआ में से एगो स्वर्ग के निवासी लोग के काम तब तक कईले जब तक कि ओकरा अवुरी स्वर्ग के बीच एक हाथ के छोड़ के कवनो दूरी ना रहे, लेकिन रिकॉर्ड उनुका से पहिले तब तक रहे जब तक कि उ नरक के निवासी के काम के अंजाम ना देले अवुरी अंत में नरक में ना घुस गईले। आ साँचहू, रउरा में से केहू नरक के निवासी लोग के करनी तब तक कइल जब तक कि ओकरा आ नरक के बीच एक हाथ के छोड़ के कवनो दूरी ना रहे, लेकिन रिकार्ड ओकरा से पहिले तब तक रहे जब तक कि उ स्वर्ग के निवासी लोग के काम के अंजाम ना देले अवुरी अंत में उ स्वर्ग में ना घुस गईले'।
Imam Ibnu Majah : 74
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا سِنَانٍ عَنْ وَهْبِ بْنِ خَالِدٍ الْحِمْصِيِّ عَنْ ابْنِ الدَّيْلَمِيِّ قَالَوَقَعَ فِي نَفْسِي شَيْءٌ مِنْ هَذَا الْقَدَرِ خَشِيتُ أَنْ يُفْسِدَ عَلَيَّ دِينِي وَأَمْرِي فَأَتَيْتُ أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ فَقُلْتُ أَبَا الْمُنْذِرِ إِنَّهُ قَدْ وَقَعَ فِي نَفْسِي شَيْءٌ مِنْ هَذَا الْقَدَرِ فَخَشِيتُ عَلَى دِينِي وَأَمْرِي فَحَدِّثْنِي مِنْ ذَلِكَ بِشَيْءٍ لَعَلَّ اللَّهَ أَنْ يَنْفَعَنِي بِهِ فَقَالَ لَوْ أَنَّ اللَّهَ عَذَّبَ أَهْلَ سَمَاوَاتِهِ وَأَهْلَ أَرْضِهِ لَعَذَّبَهُمْ وَهُوَ غَيْرُ ظَالِمٍ لَهُمْ وَلَوْ رَحِمَهُمْ لَكَانَتْ رَحْمَتُهُ خَيْرًا لَهُمْ مِنْ أَعْمَالِهِمْ وَلَوْ كَانَ لَكَ مِثْلُ جَبَلِ أُحُدٍ ذَهَبًا أَوْ مِثْلُ جَبَلِ أُحُدٍ تُنْفِقُهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ مَا قُبِلَ مِنْكَ حَتَّى تُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ فَتَعْلَمَ أَنَّ مَا أَصَابَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُخْطِئَكَ وَأَنَّ مَا أَخْطَأَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُصِيبَكَ وَأَنَّكَ إِنْ مُتَّ عَلَى غَيْرِ هَذَا دَخَلْتَ النَّارَ وَلَا عَلَيْكَ أَنْ تَأْتِيَ أَخِي عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعُودٍ فَتَسْأَلَهُ فَأَتَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ فَسَأَلْتُهُ فَذَكَرَ مِثْلَ مَا قَالَ أُبَيٌّ وَقَالَ لِي وَلَا عَلَيْكَ أَنْ تَأْتِيَ حُذَيْفَةَ فَأَتَيْتُ حُذَيْفَةَ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ مِثْلَ مَا قَالَا وَقَالَ ائْتِ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَاسْأَلْهُ فَأَتَيْتُ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْ أَنَّ اللَّهَ عَذَّبَ أَهْلَ سَمَاوَاتِهِ وَأَهْلَ أَرْضِهِ لَعَذَّبَهُمْ وَهُوَ غَيْرُ ظَالِمٍ لَهُمْ وَلَوْ رَحِمَهُمْ لَكَانَتْ رَحْمَتُهُ خَيْرًا لَهُمْ مِنْ أَعْمَالِهِمْ وَلَوْ كَانَ لَكَ مِثْلُ أُحُدٍ ذَهَبًا أَوْ مِثْلُ جَبَلِ أُحُدٍ ذَهَبًا تُنْفِقُهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ مَا قَبِلَهُ مِنْكَ حَتَّى تُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ كُلِّهِ فَتَعْلَمَ أَنَّ مَا أَصَابَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُخْطِئَكَ وَمَا أَخْطَأَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُصِيبَكَ وَأَنَّكَ إِنْ مُتَّ عَلَى غَيْرِ هَذَا دَخَلْتَ النَّارَ
हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [इशहाक बिन सुलेमान] उ कहले बाड़े; हम [अबू सिनान] के [वहब बिन खालिद अल हिमशी] से [इब्न अद दैलामी] से सुनले बानी उ कहले; 'नियति के बारे में हमरा आत्मा में कुछ अटकल बा।' हमरा चिंता रहे कि एहसे हमरा धर्म अवुरी हमरा कामकाज के नुकसान होई, एहसे हम [उबई बिन काअब] के लगे गईनी। हम ओकरा से पूछनी; 'हे अबुल मुंडिर, भाग्य के बात से हमरा के कुछ परेशान कर रहल बा, हमरा चिंता बा कि एकरा से हमरा धर्म अवुरी हमरा काम के नुकसान होई।' त एकरा से जुड़ल कुछ बताईं, अल्लाह के एकर फायदा होखे'। ऊ कहत बाड़न कि; 'अगर अल्लाह आकाश आ धरती के निवासी लोग के सजा दिहे त उ लोग के सजा जरूर दिहे, अवुरी उ लोग के संगे अन्याय ना करीहे।' अगर उ दया कईले रहते त उनुकर दया ओ लोग के कर्म से निमन रहित। अगर रउरा लगे उहुद पहाड़ जइसन सोना बा आ ओकरा बाद रउरा ओकरा के अल्लाह के राह में खरच कर देत बानी त जबले रउरा किस्मत में विश्वास ना करब तबले ओकरा के स्वीकार ना कइल जाई. जान लीं कि जवन राउर हिस्सा बा ऊ रउरा से अलगा ना होखी आ जवन राउर ना होखे ऊ राउर हिस्सा ना होखी. अगर रउवा एह सब के अलावा अउरी हालत में मरब त रउवा नरक में चल जाईब। अगर रउरा हमरा भाई अब्दुल्ला बिन मसूद के लगे आ जाईं त ओकरा से पूछीं त कवनो नुकसान नइखे'. त हम [अब्दुल्लाह] के लगे गईनी अवुरी उनुका से ए बारे में पूछनी, त उ उबाई जवन कहले उहे कहले। तब उ हमरा से कहले, 'हुदजाइफा में आईल त कवनो बुराई नईखे'। त हम [हुदजाइफा] के लगे गईनी अवुरी उनुका से एकरा बारे में पूछनी। तब उ दुनो लोग के कहला के मुताबिक जवाब देले'। हुदजाइफा कहले कि; 'जैद बिन थाबीत के लगे आके ओकरा से पूछीं'। त हम [जैद बिन थाबीत] के लगे गईनी अवुरी उनुका से पूछनी, फेर उ जवाब देले, 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि, 'अगर अल्लाह आकाश अवुरी धरती के निवासी के सजा दिहे त निश्चित रूप से उ ओ लोग के सजा दिहे, अवुरी उ ओ लोग के संगे अन्याय ना करीहे।' अगर उ दया कईले रहते त उनुकर दया ओ लोग के कर्म से निमन रहित। अगर रउरा लगे उहुद पहाड़ जइसन सोना बा आ ओकरा बाद रउरा ओकरा के अल्लाह के राह में खरच कर देत बानी त जबले रउरा किस्मत में विश्वास ना करब तबले ओकरा के स्वीकार ना कइल जाई. जान लीं कि जवन राउर हिस्सा बा ऊ रउरा से अलगा ना होखी आ जवन राउर ना होखे ऊ राउर हिस्सा ना होखी. अगर रउआ एह सब के अलावा अउरी हालत में मरब त रउआ नरक में चल जाईब'।
Imam Ibnu Majah : 75
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَكُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبِيَدِهِ عُودٌ فَنَكَتَ فِي الْأَرْضِ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَقَالَ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ إِلَّا وَقَدْ كُتِبَ مَقْعَدُهُ مِنْ الْجَنَّةِ وَمَقْعَدُهُ مِنْ النَّارِ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَفَلَا نَتَّكِلُ قَالَ لَا اعْمَلُوا وَلَا تَتَّكِلُوا فَكُلٌّ مُيَسَّرٌ لِمَا خُلِقَ لَهُ ثُمَّ قَرَأَ{ فَأَمَّا مَنْ أَعْطَى وَاتَّقَى وَصَدَّقَ بِالْحُسْنَى فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْيُسْرَى وَأَمَّا مَنْ بَخِلَ وَاسْتَغْنَى وَكَذَّبَ بِالْحُسْنَى فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرَى }
हमनी के बतवले बाड़े [उस्मान बिन अबू स्याइबा] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [वाकी']। आ एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुहम्मद] कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [अबू मुअवियाह] अवुरी [वाकी'] से [अल अमासी] से [सअद बिन उबैदा] से [अबू अब्दुररहमान अस सुलामी] से [अली बिन अबू तालिब] से उ कहले रहले कि: 'हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में बईठल रहनी जबकि उनुका हाथ में अगरवुड रहे।' ऊ ओकरा के जमीन पर फेंक दिहलन फेर आपन माथा उठवले आ कहले: ‘रउरा में से हर केहू के स्वर्ग में एगो सीट आ नरक में एगो सीट दिहल गइल बा’. उनुका से पूछल गईल कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अगर हमनी के सिर्फ आत्मसमर्पण क देनी त का होई? ऊ जवाब दिहलन: 'ना, करत रहीं आ हार मत मानीं.' ओकरा खातिर जवन बनावल गइल बा ओकरा हिसाब से सभका के आसान बनावल जाई'. तब उ पढ़ले: 'रहल बात ओह व्यक्ति के जे -अल्लाह के राह में आपन धन- देके पुण्यात्मा होखे, आ पुष्टि करेला कि सबसे बढ़िया इनाम -स्वर्ग- बा, तब हमनी के ओकरा खातिर -एक आसान रास्ता- तैयार करब जा।' आ रहल बात जे नटखट बा आ अपना के पर्याप्त महसूस करत बा, आ बेहतरीन इनाम से इनकार करत बा, त हमनी का ओह लोग खातिर एगो कठिन राह तइयार कर देब जा.'
Imam Ibnu Majah : 76
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّنَافِسِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمُؤْمِنُ الْقَوِيُّ خَيْرٌ وَأَحَبُّ إِلَى اللَّهِ مِنْ الْمُؤْمِنِ الضَّعِيفِ وَفِي كُلٍّ خَيْرٌ احْرِصْ عَلَى مَا يَنْفَعُكَ وَاسْتَعِنْ بِاللَّهِ وَلَا تَعْجَزْ فَإِنْ أَصَابَكَ شَيْءٌ فَلَا تَقُلْ لَوْ أَنِّي فَعَلْتُ كَذَا وَكَذَا وَلَكِنْ قُلْ قَدَّرَ اللَّهُ وَمَا شَاءَ فَعَلَ فَإِنَّ لَوْ تَفْتَحُ عَمَلَ الشَّيْطَانِ
हमनी के बतावल गइल बा कि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [अली बिन मुहम्मद अथ थानाफुसी] दुनु कहले रहले; हमनी के [अब्दुल्लाह बिन इदरीश] [रबीअह बिन उस्मान] से [मुहम्मद बिन याह्या बिन हिब्बन] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, मजबूत मुसलमान कमजोर मुसलमान से बेहतर अवुरी अल्लाह के प्रिय होखेला, अवुरी हरेक के भलाई होखेला। हर चीज खातिर उत्साहित रहीं जवन रउरा खातिर फायदेमंद होखे, अल्लाह से मदद मांगीं आ कमजोर मत रहीं. अगर रउरा कवनो आपदा से टकरा गइल बानी त कुछ मत बोलीं; 'काश हम ई आ ई कइले रहतीं'। बाकिर मान लीं कि; 'ई भगवान के फरमान ह, उ जवन मन करे उहे करेले'। 'अगर शैतान दरवाजा खोले' कहावत के वजह से।
Imam Ibnu Majah : 77
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ وَيَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ سَمِعَ طَاوُسًا يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يُخْبِرُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ احْتَجَّ آدَمُ وَمُوسَى عَلَيْهِمَا السَّلَام فَقَالَ لَهُ مُوسَى يَا آدَمُ أَنْتَ أَبُونَا خَيَّبْتَنَا وَأَخْرَجْتَنَا مِنْ الْجَنَّةِ بِذَنْبِكَ فَقَالَ لَهُ آدَمُ يَا مُوسَى اصْطَفَاكَ اللَّهُ بِكَلَامِهِ وَخَطَّ لَكَ التَّوْرَاةَ بِيَدِهِ أَتَلُومُنِي عَلَى أَمْرٍ قَدَّرَهُ اللَّهُ عَلَيَّ قَبْلَ أَنْ يَخْلُقَنِي بِأَرْبَعِينَ سَنَةً فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى ثَلَاثًا
हमनी के बतावल गइल बा कि [हिसियाम बिन अम्मर] आ [या'कुब बिन हुमैद बिन कसीब] दुनु कहले रहले; हमनी के [सुफयान बिन उयैनह] ['अमरू बिन दिनार] से बतवले बाड़े कि उ [थावस] के कहत सुनले रहले; हम [अबू हुरैरा] के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हमनी के रिपोर्ट सुननी, उ कहले कि आदम अवुरी मूसा अलैहिमास सलाम एक दूसरा से बहस कईले। मूसा कहले- हे आदम, तू हमनी के बाप हउअ। तू अपना पाप के चलते हमनी के निराश क देले बाड़ू अवुरी स्वर्ग से निकाल देले बाड़ू'। आदम जवाब दिहले: 'हे मूसा, अल्लाह तोहरा के अपना वचन से चुनले बाड़े अवुरी अपना हाथ से आपके खाती तौराह लिखले बाड़े। का रउआ हमरा के ओह चीजन खातिर निंदा करत बानी जवन अल्लाह हमरा के चालीस साल बनावे से पहिले हमरा खिलाफ तय कईले बाड़े'। त आदम के तर्क मूसा के हरा दिहलस, फिर आदम के तर्क मूसा के हरा दिहलस। उ तीन बेर दोहरवले।
Imam Ibnu Majah : 78
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ رِبْعِيٍّ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ عَبْدٌ حَتَّى يُؤْمِنَ بِأَرْبَعٍ بِاللَّهِ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَبِالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَوْتِ وَالْقَدَرِ
हमनी के रिवायत कइले बा [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन ज़ुरराह] कहले बाड़न, हमनी के [शरीक] के [मंसूर] से [रिब’ई] से [अली रदलिअल्लाहु अनहु] से रिवायत कइले बाड़न उ कहले बाड़न; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि जब तक नौकर चार चीज़ प विश्वास ना करी तब तक विश्वास ना करी; अल्लाह में विश्वास जेकर कवनो साथी नइखे, ई विश्वास कि हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हईं, मौत के बाद कयामत पर विश्वास आ किस्मत में विश्वास'।
Imam Ibnu Majah : 79
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا طَلْحَةُ بْنُ يَحْيَى بْنِ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَمَّتِهِ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ دُعِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى جِنَازَةِ غُلَامٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ طُوبَى لِهَذَا عُصْفُورٌ مِنْ عَصَافِيرِ الْجَنَّةِ لَمْ يَعْمَلْ السُّوءَ وَلَمْ يُدْرِكْهُ قَالَ أَوَ غَيْرُ ذَلِكَ يَا عَائِشَةُ إِنَّ اللَّهَ خَلَقَ لِلْجَنَّةِ أَهْلًا خَلَقَهُمْ لَهَا وَهُمْ فِي أَصْلَابِ آبَائِهِمْ وَخَلَقَ لِلنَّارِ أَهْلًا خَلَقَهُمْ لَهَا وَهُمْ فِي أَصْلَابِ آبَائِهِمْ
हमनी के बतावल गइल बा कि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [अली बिन मुहम्मद] दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [वाकी'] कहले बाड़े, हमनी के बता देले बाड़े [थल्हाह बिन याह्या बिन थल्हाह बिन उबैदुल्लाह] से अपना चाची [ऐसिया बिंत थल्हाह] से [ऐसिया उम्मुल मुकमिनिन रदलियाल्लाहु 'अनहा] से कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अंसार के एगो बच्चा के लाश में शामिल होखे के नेवता दिहल गईल रहे। त हम कहनी कि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, एह स्वर्गीय कबूतर से निकलल कबूतर खातिर बहुत भाग्यशाली बा, उ कवनो बुरा काम नईखे कईले अवुरी ना ही ओकर सामना भईल बा'। उ कहले कि, 'या एकरा अलावे हे ऐश्याह, सचमुच अल्लाह एकरा निवासी खाती एगो जन्नत बनवले बाड़े।' अल्लाह ओकरा खातिर ओह लोग के तब बनवले बाड़न जब ऊ लोग अबहीं अपना बाप-दादा के पसलियन में रहुवे. अल्लाह एकरा निवासी लोग खातिर नरक भी बनवले बाड़े। ऊ ओकरा खातिर बनवले रहले, जबकि ऊ अबहीं अपना बाप के पसलियन में रहले.
Imam Ibnu Majah : 80
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ عَنْ زِيَادِ بْنِ إِسْمَعِيلَ الْمَخْزُومِيِّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَجَاءَ مُشْرِكُو قُرَيْشٍ يُخَاصِمُونَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْقَدَرِ فَنَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ{ يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَى وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ إِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ }
हमनी के बतावल गइल बा कि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [अली बिन मुहम्मद] दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [वाकी'] कहले बाड़े, हमनी के [सुफयान अतस त्सौरी] से [जियाद बिन इस्माइल अल मखज़ूमी] से [मुहम्मद बिन अब्बद बिन जा'फर] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; 'कुरैश के मुशरिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से किस्मत के बारे में बहस करे आइल रहले। त इ श्लोक उतरल- 'जवना दिन उ लोग नरक के आग में मुंह झुक जईहे।' सकोर के नरक के लपट महसूस करीं। सचमुच हमनी के सब कुछ कोदर से बनावेनी जा'।