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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 41

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ مَيْمُونِ بْنِ أَبِي شَبِيبٍ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي بِحَدِيثٍ وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِ

म्हानै बतायो है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कह्यो, म्हानै बतायो है [वाकी'] सूं [सुफियान] सूं [हबीब बिन अबू थाबित] सूं [मैमुन बिन अबू स्याबीब] सूं [मुघिराह बिन स्याबा] कह्यो है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो: 'जो कोई भी म्हारै सूं कोई हदीस पूगावै है, जदकै वो देखै है कै हदीस झूठ है, तो वो झूठा लोगां मांय सूं एक है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 42

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ بَشِيرِ بْنِ ذَكْوَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي الْمُطَاعِ قَالَ سَمِعْتُ الْعِرْبَاضَ بْنَ سَارِيَةَ يَقُولُقَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَوَعَظَنَا مَوْعِظَةً بَلِيغَةً وَجِلَتْ مِنْهَا الْقُلُوبُ وَذَرَفَتْ مِنْهَا الْعُيُونُ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَعَظْتَنَا مَوْعِظَةَ مُوَدِّعٍ فَاعْهَدْ إِلَيْنَا بِعَهْدٍ فَقَالَ عَلَيْكُمْ بِتَقْوَى اللَّهِ وَالسَّمْعِ وَالطَّاعَةِ وَإِنْ عَبْدًا حَبَشِيًّا وَسَتَرَوْنَ مِنْ بَعْدِي اخْتِلَافًا شَدِيدًا فَعَلَيْكُمْ بِسُنَّتِي وَسُنَّةِ الْخُلَفَاءِ الرَّاشِدِينَ الْمَهْدِيِّينَ عَضُّوا عَلَيْهَا بِالنَّوَاجِذِ وَإِيَّاكُمْ وَالْأُمُورَ الْمُحْدَثَاتِ فَإِنَّ كُلَّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ

म्हानै बतायो है [अब्दुल्लाह बिन अहमद बिन बसीर बिन ज़ाकवान अदिमासिकी] कह्यो, म्हानै बतायो है [अल वालिद बिन मुस्लिम] कह्यो, म्हानै बतायो है [अब्दुल्ला बिन अल 'अला`] कह्यो, म्हानै बतायो है [यह्या बिन अबी अल मुथा'] उण कह्यो; म्हैं ['इरबादल बिन सरियाह] नै कैता सुण्यो; 'एक दिन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम म्हारै बीच खड़्या हुया। बां अैड़ी सलाह दी जिकी घणी मार्मिक ही, जिणसूं काळजै काँपग्या अर आंसू बहग्या। फेर ओ बोल्यो; 'हे अल्लाह रा रसूल, थै म्हानै एक विदाई री सलाह दी है, सो म्हानै एक वसीयत दे दो'। उण कह्यो: 'थनै अल्लाह सूं डरणो चाइजै, एक हबासी दास नै भी सुणो अर मानणो चाइजै। अर म्हारै मर्यां पछै थनै घणा भयानक विवाद देखण नै मिलैला, इण वास्तै थनै म्हारी सुन्नत अर मार्गदर्शन प्राप्त करण आळा राशिदुन खुलाफौर री सुन्नत माथै अडिग रैवणो चाइजै। आपरै दाढ़ रै दांतां सूं सुन्नत नै काटो अर बणाई गई बातां रो पालन मत करो, क्यूंकै असल मांय सगळी बिदत पाखंड है।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 43

حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ بِشْرِ بْنِ مَنْصُورٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ السَّوَّاقُ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ حَبِيبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو السُّلَمِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ الْعِرْبَاضَ بْنَ سَارِيَةَ يَقُولُوَعَظَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَوْعِظَةً ذَرَفَتْ مِنْهَا الْعُيُونُ وَوَجِلَتْ مِنْهَا الْقُلُوبُ فَقُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ هَذِهِ لَمَوْعِظَةُ مُوَدِّعٍ فَمَاذَا تَعْهَدُ إِلَيْنَا قَالَ قَدْ تَرَكْتُكُمْ عَلَى الْبَيْضَاءِ لَيْلُهَا كَنَهَارِهَا لَا يَزِيغُ عَنْهَا بَعْدِي إِلَّا هَالِكٌ مَنْ يَعِشْ مِنْكُمْ فَسَيَرَى اخْتِلَافًا كَثِيرًا فَعَلَيْكُمْ بِمَا عَرَفْتُمْ مِنْ سُنَّتِي وَسُنَّةِ الْخُلَفَاءِ الرَّاشِدِينَ الْمَهْدِيِّينَ عَضُّوا عَلَيْهَا بِالنَّوَاجِذِ وَعَلَيْكُمْ بِالطَّاعَةِ وَإِنْ عَبْدًا حَبَشِيًّا فَإِنَّمَا الْمُؤْمِنُ كَالْجَمَلِ الْأَنِفِ حَيْثُمَا قِيدَ انْقَادَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ الْمِسْمَعِيُّ حَدَّثَنَا ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ الْعِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةَ الصُّبْحِ ثُمَّ أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ فَوَعَظَنَا مَوْعِظَةً بَلِيغَةً فَذَكَرَ نَحْوَهُ

म्हानै बतायो गयो है कै [इस्माइल बिन बिसिर बिन मंसूर] अर [इशाक बिन इब्राहिम अस सव्वाक] दोनूं ई कैयो है; म्हानै [अब्दुर्रहमान बिन महदी] सूं [मुआविया बिन सालिह] सूं [डलामरह बिन हबीब] सूं [अब्दुर्रहमान बिन अमरू अस सुलामी] सूं बतायो है कै उण ['इरबदल बिन सरिया] नै कैता सुण्यो है; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम म्हानै एक ऐड़ी सलाह दी जिणसूं आंसू बहग्या अर दिल काँपग्या। तो म्हे उणसूं कैयो; 'हे अल्लाह रा रसूल, आ वाकई विदाई री सलाह है, तो थै म्हानै कांई वसीयत करो हो?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैं थारै वास्तै साफ मार्गदर्शन छोड़ी है, रात दिन री तरै है। म्हारै पछै कोई भी उणसूं मुड़ नीं जावैला पण वो नास हो जावैला। थारै मांय सूं जो भी जीवैला, बो घणा विवाद देखैला। तो थनै म्हारी सुन्नत सूं कांई ठाह है, अर म्हारो मार्गदर्शन प्राप्त रशीदुन खुलाफौर री सुन्नत माथै अडिग रैवणो चाइजै, बां सुन्नत नै आपरै दाढ़ रै दांतां सूं काट ल्यो। थनै एक हबासी दास रै प्रति भी आज्ञाकारी होणो चाइजै। आस्तिक एक वश में ऊंट री तरै है, जठै भी बांध्यो जावैला, वो आज्ञा मानैला'। म्हानै बतायो है [यह्या बिन हकीम] कह्यो, म्हानै बतायो है [अब्दुल मलिक बिन अश शब्बाह अल मिसमाई] कह्यो है, म्हानै बतायो है [तसौर बिन यजीद] सूं [खालिद बिन म'दान] सूं [अब्दुर्रहमान बिन अमरू] सूं ['इरबादल बिन सरियाह] कह्यो है; 'अल्लाह रा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम म्हानै सुबह री नमाज रै मांय अगुवाई करी, फेर वां म्हारै कनै मुड़'र म्हानै घणी मार्मिक सलाह दी'। फेर बां ऊपरली हदीस रै मुजब बतायो।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 44

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَأَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَطَبَ احْمَرَّتْ عَيْنَاهُ وَعَلَا صَوْتُهُ وَاشْتَدَّ غَضَبُهُ كَأَنَّهُ مُنْذِرُ جَيْشٍ يَقُولُ صَبَّحَكُمْ مَسَّاكُمْ وَيَقُولُ بُعِثْتُ أَنَا وَالسَّاعَةَ كَهَاتَيْنِ وَيَقْرِنُ بَيْنَ إِصْبَعَيْهِ السَّبَّابَةِ وَالْوُسْطَى وَيَقُولُ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ خَيْرَ الْأُمُورِ كِتَابُ اللَّهِ وَخَيْرُ الْهَدْيِ هَدْيُ مُحَمَّدٍ وَشَرُّ الْأُمُورِ مُحْدَثَاتُهَا وَكُلُّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ وَكَانَ يَقُولُ مَنْ تَرَكَ مَالًا فَلِأَهْلِهِ وَمَنْ تَرَكَ دَيْنًا أَوْ ضَيَاعًا فَعَلَيَّ وَإِلَيَّ

म्हानै बतायो गयो है कै [सुवैद बिन सईद] अर [अहमद बिन थाबित अल जहदरी] दोनूं ई कैयो; म्हानै [अब्दुल वहाब अत्स त्साकाफी] सूं [जाफर बिन मुहम्मद] सूं [उणरै पिता] सूं [जाबिर बिन अब्दुल्ला] सूं बतायो है, उण कैयो; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम प्रवचन देतां बगत बांरी आंख्यां लाल हुयगी, बांरी आवाज ऊंची अर बांरी भावनावां भावुक हुयगी, जाणै बो सैनिकों नै चेतावनी देवै हो, बो चिल्लायो- 'सावधान, दुश्मन सवेरै आवैला, दुश्मन दोपहर मांय आवैला! ' अर बो जोर सूं बोल्यो: 'म्हैं न्याय रै दिन रै आगमन रै साथै ईं -दो आंगळियां- री तरै भेज्यो गयो हो,' बो आपरी दो आंगळियां नै एक सागै जोड़ दियो; तर्जनी अर बीचली आंगळी। फेर बो बोल्यो: ''अम्मा बा'डू; साची, सबसूं आछी चीज अल्लाह री किताब है अर सबसूं आछी मार्गदर्शन मुहम्मद री मार्गदर्शन है, सबसूं बुरी चीज वा है जिकी बणाई जावै है, अर हरेक पाखंड पाखंड है'। अर बो हमेशा कैवतो हो: 'जो भी संपत्ति छोड़ै है, वा उणरै वारिस रै वास्तै है। अर जो भी कोई कर्ज या भरोसो छोड़ै है, मैं उणनै उठाऊंला।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 45

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ بْنِ مَيْمُونٍ الْمَدَنِيُّ أَبُو عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرِ بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّمَا هُمَا اثْنَتَانِ الْكَلَامُ وَالْهَدْيُ فَأَحْسَنُ الْكَلَامِ كَلَامُ اللَّهِ وَأَحْسَنُ الْهَدْيِ هَدْيُ مُحَمَّدٍ أَلَا وَإِيَّاكُمْ وَمُحْدِثَاتِ الْأُمُورِ فَإِنَّ شَرَّ الْأُمُورِ مُحْدَثَاتُهَا وَكُلُّ مُحْدَثَةٍ بِدْعَةٌ وَكُلُّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ أَلَا لَا يَطُولَنَّ عَلَيْكُمْ الْأَمَدُ فَتَقْسُوَ قُلُوبُكُمْ أَلَا إِنَّ مَا هُوَ آتٍ قَرِيبٌ وَإِنَّمَا الْبَعِيدُ مَا لَيْسَ بِآتٍ أَلَا أَنَّمَا الشَّقِيُّ مَنْ شَقِيَ فِي بَطْنِ أُمِّهِ وَالسَّعِيدُ مَنْ وُعِظَ بِغَيْرِهِ أَلَا إِنَّ قِتَالَ الْمُؤْمِنِ كُفْرٌ وَسِبَابُهُ فُسُوقٌ وَلَا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يَهْجُرَ أَخَاهُ فَوْقَ ثَلَاثٍ أَلَا وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّ الْكَذِبَ لَا يَصْلُحُ بِالْجِدِّ وَلَا بِالْهَزْلِ وَلَا يَعِدُ الرَّجُلُ صَبِيَّهُ ثُمَّ لَا يَفِي لَهُ فَإِنَّ الْكَذِبَ يَهْدِي إِلَى الْفُجُورِ وَإِنَّ الْفُجُورَ يَهْدِي إِلَى النَّارَ وَإِنَّ الصِّدْقَ يَهْدِي إِلَى الْبِرِّ وَإِنَّ الْبِرَّ يَهْدِي إِلَى الْجَنَّةِ وَإِنَّهُ يُقَالُ لِلصَّادِقِ صَدَقَ وَبَرَّ وَيُقَالُ لِلْكَاذِبِ كَذَبَ وَفَجَرَ أَلَا وَإِنَّ الْعَبْدَ يَكْذِبُ حَتَّى يُكْتَبَ عِنْدَ اللَّهِ كَذَّابًا

म्हानै बतायो है [मुहम्मद बिन उबैद बिन मैमून अल मदनी अबू उबैद] कह्यो है, म्हानै बतायो है [म्हारा पिता] सूं [मुहम्मद बिन जाफर बिन अबू कथिर] सूं [मूसा बिन उकबा] सूं [अबू इशाक] सूं [अबुल अह्वाश] सूं [अब्दुल्ला बिन मसूद] कह्यो है; पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो: ' दोनूं ई वचन अर मार्गदर्शन है। तो सबसूं चोखा शब्द कालामुल्ला है अर सबसूं आच्छो मार्गदर्शन मुहम्मद रो मार्गदर्शन है। कृपया जाण ल्यो, नयी चीजां मत बणाओ। साची, सबसूं बुरी चीजां नूंवी चीजां है - बणाई गई-, अर हरेक नूंवी चीज बिद'ह है, अर हरेक बिद'ह पाखंडी है। जाण लो, घणो लांबो सुपनो मत देखो, जद तांई थारो दिल कठोर नीं हो जावै। जाण ल्यो कै जो भी आबाळो है वो नजीक है अर जो भी दूर है वो अस्यान कोनी आवैला। जाण ल्यो कै दुखी आदमी वो है जको मां रै पेट में दुखी है अर सुखी आदमी वो है जिणनै दूजा लोगां सूं सलाह दी जावै। जाण ल्यो, साची में, एक मुसलमान नै मारणो अविश्वास है अर उणनै अपमानित करणो बुराई है। एक मुसलमान रै वास्तै आपरै भाई सूं तीन दिन सूं बेसी बात नीं करणी हलाल कोनी है। जाण ल्यो, झूठ बोलबा सूं दूर रैवो, असल मांय झूठ बोलणो उचित कोनी है चाहे वो गंभीरता सूं करियो जावै या चंचलता सूं। कोई भी टाबर सूं वचन नीं लेवै अर पछै वचन नीं निभावै। साचाणी, झूठ बोलबा सूं पाप रा काम हुवैला अर साचाणी पाप रा काम नरक तांई ले जावैला। साची, ईमानदारी भलाई अर भलाई स्वर्ग नै दरसावैला। अर ओ एक ईमानदार मिनख नै कैयो जावेला; उण ईमानदारी सूं काम करियो है अर भलो करियो है। जदकै झूठां नै कैयो जावै है; बो झूठ अर पाप करियो है। एक सेवक जो हमेशा झूठ बोलै है, वो अल्लाह रै साम्हीं झूठा रै रूप मांय दर्ज हो जावैला।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 46

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ خِدَاشٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ ح و حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ وَيَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْتَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذِهِ الْآيَةَ{ هُوَ الَّذِي أَنْزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ إِلَى قَوْلِهِ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُوا الْأَلْبَابِ }فَقَالَ يَا عَائِشَةُ إِذَا رَأَيْتُمْ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِيهِ فَهُمْ الَّذِينَ عَنَاهُمْ اللَّهُ فَاحْذَرُوهُمْ

म्हानै बतायो है [मुहम्मद बिन खालिद बिन खिदास] कैयो, म्हानै बतायो है [इस्माइल बिन उलैया] कैयो है, म्हानै बतायो है [अय्यूब]। अर दूजी ओळी रै मुजब; म्हानै [अहमद बिन थाबित अल जहदरी] अर [यह्या बिन हकीम] नै बतायो है, दोनूं ई कैयो; म्हानै [अब्दुल वहाब] बतायो है, [अय्यूब] नै [अब्दुल्लाह बिन अबू अवलका] सूं [ऐस्याह] बतायो है, उण कह्यो,; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इण आयत नै पढ़ो- 'वो ईज है जिण थारै कनै किताब - कुरान - उतरी है। इणरी सामग्री रै मांय ऐड़ा आयत है जका निरपेक्ष है, जका कुरान री मुख्य सामग्री है अर दूजा आयत है जिका मुतस्याबिहात है, जिणसूं बांरा वचन है: 'अर बां सूं कोई सबक नीं सीख्यो जा सकै सिवाय समझ रै।' फेर बो बोल्यो: 'हे आयशा, जे थूं लोगां नै इण बाबत बहस करता देखै है तो वै ई है जिका अल्लाह री मंशा ही, सो बां सूं सावधान रैवो।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 47

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ ح و حَدَّثَنَا حَوْثَرَةُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ دِينَارٍ عَنْ أَبِي غَالِبٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا ضَلَّ قَوْمٌ بَعْدَ هُدًى كَانُوا عَلَيْهِ إِلَّا أُوتُوا الْجَدَلَ ثُمَّ تَلَا هَذِهِ الْآيَةَ{ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ }الْآيَةَ

म्हानै बतायो है [अली बिन अल मुंडजीर] कह्यो, म्हानै बतायो है [मुहम्मद बिन फुदलैल], अर दूजी ओळी रै मुजब; म्हानै बतायो है [हौतसरह बिन मुहम्मद] कैयो, म्हानै बतायो है [मुहम्मद बिन बिसिर] दोनूं कैयो; म्हानै [हज्जाज बिन दीनार] [अबू गालिब] सूं [अबू उमामा] सूं बतायो है, उण कैयो; पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो है: 'कोई लोग मार्गदर्शन रै बाद भटक नीं जावैला जद तांई वे उण मांय रैवैला, सिवाय उण लोगां रै जिका बहस करणो चावै है'। फेर बां ओ श्लोक बांच्यो: 'पण वै लोग बहस करणो चावै है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 48

حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْعَسْكَرِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيٍّ أَبُو هَاشِمِ بْنِ أَبِي خِدَاشٍ الْمَوْصِلِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِحْصَنٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ أَبِي عَبْلَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ لِصَاحِبِ بِدْعَةٍ صَوْمًا وَلَا صَلَاةً وَلَا صَدَقَةً وَلَا حَجًّا وَلَا عُمْرَةً وَلَا جِهَادًا وَلَا صَرْفًا وَلَا عَدْلًا يَخْرُجُ مِنْ الْإِسْلَامِ كَمَا تَخْرُجُ الشَّعَرَةُ مِنْ الْعَجِينِ

म्हानै बतायो है [दाउद बिन सुलेमान अल 'असकरी] कह्यो, म्हानै बतायो है [मुहम्मद बिन अली अबू हसीम बिन अबू खिदासी अल मौशिली] उण कह्यो; म्हानै [मुहम्मद बिन मिहशान] सूं [इब्राहिम बिन अबू 'अबलाह] सूं [अब्दुल्लाह बिन अद दैलामी] सूं [हुज़दैफा] सूं बतायो है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो: 'अल्लाह पाखंडियां सूं स्वीकार कोनी करैला; रोजा, नमाज, दान, हज, उमरा, जिहाद, व्यवहार अर न्याय। वो इस्लाम सूं बारै आयो जियां आटा सूं बाल निकळै है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 49

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مَنْصُورٍ الْحَنَّاطُ عَنْ أَبِي زَيْدٍ عَنْ أَبِي الْمُغِيرَةِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَى اللَّهُ أَنْ يَقْبَلَ عَمَلَ صَاحِبِ بِدْعَةٍ حَتَّى يَدَعَ بِدْعَتَهُ

म्हानै बतायो है [अब्दुल्लाह बिन सईद] कह्यो, म्हानै बतायो है [बिसिर बिन मंशुर अल हन्नाथ] सूं [अबू जैद] सूं [अबू अल मुगीराह] सूं [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] कह्यो है; पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो कै 'अल्लाह एक पाखंडी री प्रथावां नै स्वीकार करण में संकोच करै है जद तांई वो आपरी पाखंड नै त्याग नीं देवै।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 50

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ وَهَارُونُ بْنُ إِسْحَقَ قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ وَرْدَانَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَرَكَ الْكَذِبَ وَهُوَ بَاطِلٌ بُنِيَ لَهُ قَصْرٌ فِي رَبَضِ الْجَنَّةِ وَمَنْ تَرَكَ الْمِرَاءَ وَهُوَ مُحِقٌّ بُنِيَ لَهُ فِي وَسَطِهَا وَمَنْ حَسَّنَ خُلُقَةُ بُنِيَ لَهُ فِي أَعْلَاهَا

म्हानै [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम अद दिमासीकी] अर [हारून बिन इशाक] नै बतायो है, दोनूं ई कैयो; म्हानै [इब्न अबू फुदैक] नै [सलामा बिन वरदान] सूं [अनस बिन मलिक] बतायो है; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई झूठ त्याग देला, जदकै वो झूठो है, उणरै वास्तै स्वर्ग रै किनारे एक महल बण जावैला। जो कोई सही होकर भी बहस छोड देगा, उसके लिये स्वर्ग के बीच में महल बण जावेगा। जो भी आपरी नैतिकता नै सुधारैला, उणरै वास्तै एक महल ऊंचे आकास रै मांय बण जावैला'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 51

حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ وَعَبْدَةُ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ ح و حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ وَمَالِكُ بْنُ أَنَسٍ وَحَفْصُ بْنُ مَيْسَرَةَ وَشُعَيْبُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ لَا يَقْبِضُ الْعِلْمَ انْتِزَاعًا يَنْتَزِعُهُ مِنْ النَّاسِ وَلَكِنْ يَقْبِضُ الْعِلْمُ بِقَبْضِ الْعُلَمَاءِ فَإِذَا لَمْ يُبْقِ عَالِمًا اتَّخَذَ النَّاسُ رُءُوسًا جُهَّالًا فَسُئِلُوا فَأَفْتَوْا بِغَيْرِ عِلْمٍ فَضَلُّوا وَأَضَلُّوا

म्हानै [अबू कुरैब] बतार बो बोल्यो; म्हानै [अब्दुल्लाह बिन इदरीस] अर ['अब्दाह] अर [अबू मुआविया] अर [अब्दुल्लाह बिन नुमीर] अर [मुहम्मद बिन बिसिर] नै बतायो है। अर दूजी ओळी रै मुजब; म्हानै बतायो है [सुवैद बिन सईद] बो बोल्यो; म्हानै [अली बिन मुशीर] अर [मलिक बिन अनस] अर [हफश बिन मैसरह] अर [स्यूअैब बिन इशाक] नै [हिशाम बिन उर्वाह] सूं [उणरै पिता] सूं [अब्दुल्ला बिन अमरू बिन अल आश] बतायो है; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो- 'वास्तव में अल्लाह मिनखां सूं फगत ज्ञान नीं छीन लेवै। फेर भी, ओ उलमा नै मारर ज्ञान नै छीन लेवै है। कोई पुण्यवान मिनख बिलकुल भी कोनी बच्यो तो लोग मूरख नेतावां नै ले लेवेला, जद पूछ्यो जावेला वे बिना ज्ञान रै फतवा देवेला, फेर वे भटक जावेला अर भटकावेला'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 52

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي أَيُّوبَ حَدَّثَنِي أَبُو هَانِئٍ حُمَيْدُ بْنُ هَانِئٍ الْخَوْلَانِيُّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أُفْتِيَ بِفُتْيَا غَيْرَ ثَبَتٍ فَإِنَّمَا إِثْمُهُ عَلَى مَنْ أَفْتَاهُ

म्हानै बतायो है [अबू बकर बिन अबू सैयबा] कह्यो, म्हानै बतायो है [अब्दुल्लाह बिन यजीद] सूं [सैद बिन अबू अय्यूब] कह्यो है, म्हानै बतायो है [अबू हानी` हुमैद बिन हानी` अल खौलानी] सूं [अबू उथमान मुस्लिम बिन यासर] सूं [अबू हुरैरा] कह्यो है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो: 'जिणनै कोई फतवा दियो जावै है जिको फतवा साच नीं है, तो पाप उण फतवा देबा आळा माथै है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 53

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ الْهَمْدَانِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي رِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ وَجَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ أَنْعُمٍ هُوَ الْإِفْرِيقِيُّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ رَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعِلْمُ ثَلَاثَةٌ فَمَا وَرَاءَ ذَلِكَ فَهُوَ فَضْلٌ آيَةٌ مُحْكَمَةٌ أَوْ سُنَّةٌ قَائِمَةٌ أَوْ فَرِيضَةٌ عَادِلَةٌ

म्हानै बतायो है [मुहम्मद इब्नुल 'अला` अल हमदानी] कह्यो; म्हनैं [रिसिदीन बिन सद] अर [जाफर बिन औन] नैं [इब्नू अनौम] सूं - यानी अल अफरीकी - [अब्दुर्रहमान बिन रफी'] सूं [अब्दुल्लाह बिन अमरू] सूं बतायो है; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो- तीन ज्ञान है, बाकी तो फगत गुण है; मुहकामत आयत, सीधी सुन्नत अर निष्पक्ष फराइदल।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 54

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ حَمَّادٍ سَجَّادَةُ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْأُمَوِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سَعِيدِ بْنِ حَسَّانَ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ نُسَيٍّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ قَالَلَمَّا بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْيَمَنِ قَالَ لَا تَقْضِيَنَّ وَلَا تَفْصِلَنَّ إِلَّا بِمَا تَعْلَمُ فَإِنْ أَشْكَلَ عَلَيْكَ أَمْرٌ فَقِفْ حَتَّى تَبَيَّنَهُ أَوْ تَكْتُبَ إِلَيَّ فِيهِ

म्हानै बतायो है [अल हसन बिन हम्माद सज्जादाह] कह्यो, म्हानै बतायो है [यह्या बिन सईद अल उमावी] सूं [मुहम्मद बिन सईद बिन हसन] सूं [उबदाह बिन नुसाई] सूं [अब्दुर्रहमान बिन गानीम] कह्यो है, म्हानै बतायो है [मुआदज बिन जबल] उण कह्यो; जद रसूलुल्लाह शाल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम म्हनै यमन भेज्यो तो बां कैयो कै 'कदैई भी तय मत करो अर नीं ई तय करो सिवाय उण बात रै जिणनै थै जाणौ हो। जे थनै कोई समस्या आवै है तो फेर रुको जद तांई कै वा साफ नीं हो जावै या थै म्हनै कोई चिट्ठी लिखो।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 55

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي الرِّجَالِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَمْ يَزَلْ أَمْرُ بَنِي إِسْرَائِيلَ مُعْتَدِلًا حَتَّى نَشَأَ فِيهِمْ الْمُوَلَّدُونَ أَبْنَاءُ سَبَايَا الْأُمَمِ فَقَالُوا بِالرَّأْيِ فَضَلُّوا وَأَضَلُّوا

म्हानै बतायो है [सुवैद बिन सईद] कैयो, म्हानै बतायो है [इब्नू अबू अर रिजाल] नै [अब्दुर्रहमान बिन अमरू अल औजाई] सूं [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल आश] सूं बतायो है; मैं रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम नै कैता सुण्यो: 'इसराइल रै टाबरां रा कामकाज तब तांई स्थिर रैया जद तांई कैदीयां मांय सूं वंशज नीं निकळ्या। वे तर्क रो उपयोग कर बहस करै है सो वे गुमराह अर भ्रामक है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 56

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّنَافِسِيُّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِيمَانُ بِضْعٌ وَسِتُّونَ أَوْ سَبْعُونَ بَابًا أَدْنَاهَا إِمَاطَةُ الْأَذَى عَنْ الطَّرِيقِ وَأَرْفَعُهَا قَوْلُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَالْحَيَاءُ شُعْبَةٌ مِنْ الْإِيمَانِحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ ح و حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ سُهَيْلٍ جَمِيعًا عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ

म्हानै बतायो है [अली बिन मुहम्मद अथ थानाफुस] कह्यो, म्हानै बतायो है [वाकी'] कह्यो है, म्हानै बतायो है [सुफयान] सूं [सुहैल बिन अबू सालिह] सूं [अब्दुल्लाह बिन दीनार] सूं [अबू सालिह] सूं [अबू हुरैरा] कह्यो है; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो: 'विश्वास रै मांय उनसठ यानी सत्तर दरवाजा हुवै है। सबसूं नीचो है सड़क माथै सूं कांटां नै हटावणो अर सबसूं ऊंची बात है ला इलाहा इल्लाह -अल्लाह रै अलावा कोई भगवान कोनी-। शरम आस्था रो हिस्सो है'। वां म्हानै बतायो है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] वां कैयो; [अबू खालिद अल अहमर] नै [इब्न अजलान] सूं बतायो है। अर दूजी ओळी रै मुजब; म्हानै बतायो है ['अमरू बिन रफी'] कह्यो, म्हानै [जरीर] [सुहैल] सूं [अब्दुल्लाह बिन दीनार] सूं [अबू सलीह] सूं [अबू हुरैरा] सूं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सूं सब कुछ बतायो है जियां ऊपर री हदीस।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 57

حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَسَمِعَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ فَقَالَ إِنَّ الْحَيَاءَ شُعْبَةٌ مِنْ الْإِيمَانِ

म्हानै बतायो गयो है कै [सहल बिन अबू सहल] अर [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन यजीद] दोनूं ई कैयो; म्हानै [सुफयान] सूं [अज जुहरी] सूं [सलीम] सूं [उणरै पिता] सूं बतायो है, बो बोल्यो; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक आदमी नै आपरै भाई नै शर्म रै बारै में सलाह देता सुण्यो। तो पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो: 'सचमुच शर्म ईमान रो हिस्सो है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 58

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ كِبْرٍ وَلَا يَدْخُلُ النَّارَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ

म्हानै बतायो है [सुवैद बिन सईद] कह्यो, म्हानै [अली बिन मुशीर] नै [अल आमसी] बतायो है। अर दूजी ओळी रै मुजब; म्हानै बतायो है [अली बिन मैमून अर रक्की] कह्यो, म्हानै बतायो है [सईद बिन मसलमा] सूं [अल अमसी] सूं [इब्राहिम] सूं [अलकमा] सूं [अब्दुल्ला] कह्यो; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कह्यो है- 'जिण मिनख रै मन मांय सरसों रै दाणां रो भार घमंड है वो स्वर्ग मांय नीं जावैला अर जिण मिनख रै मन मांय सरसों रै दाणां रो भार है वो नरक मांय नीं जावैला'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 59

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَلَّصَ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ مِنْ النَّارِ وَأَمِنُوا فَمَا مُجَادَلَةُ أَحَدِكُمْ لِصَاحِبِهِ فِي الْحَقِّ يَكُونُ لَهُ فِي الدُّنْيَا أَشَدَّ مُجَادَلَةً مِنْ الْمُؤْمِنِينَ لِرَبِّهِمْ فِي إِخْوَانِهِمْ الَّذِينَ أُدْخِلُوا النَّارَ قَالَ يَقُولُونَ رَبَّنَا إِخْوَانُنَا كَانُوا يُصَلُّونَ مَعَنَا وَيَصُومُونَ مَعَنَا وَيَحُجُّونَ مَعَنَا فَأَدْخَلْتَهُمْ النَّارَ فَيَقُولُ اذْهَبُوا فَأَخْرِجُوا مَنْ عَرَفْتُمْ مِنْهُمْ فَيَأْتُونَهُمْ فَيَعْرِفُونَهُمْ بِصُوَرِهِمْ لَا تَأْكُلُ النَّارُ صُوَرَهُمْ فَمِنْهُمْ مَنْ أَخَذَتْهُ النَّارُ إِلَى أَنْصَافِ سَاقَيْهِ وَمِنْهُمْ مَنْ أَخَذَتْهُ إِلَى كَعْبَيْهِ فَيُخْرِجُونَهُمْ فَيَقُولُونَ رَبَّنَا أَخْرَجْنَا مَنْ قَدْ أَمَرْتَنَا ثُمَّ يَقُولُ أَخْرِجُوا مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ وَزْنُ دِينَارٍ مِنْ الْإِيمَانِ ثُمَّ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ وَزْنُ نِصْفِ دِينَارٍ ثُمَّ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍقَالَ أَبُو سَعِيدٍ فَمَنْ لَمْ يُصَدِّقْ هَذَا فَلْيَقْرَأْ{ إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ وَإِنْ تَكُ حَسَنَةً يُضَاعِفْهَا وَيُؤْتِ مِنْ لَدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًا }

म्हानै बतायो है [मुहम्मद बिन याह्या] कैयो है, म्हानै बतायो है [अब्दुर्राज्जाक] कैयो है, म्हानै बतायो है [मामर] नै [जैद बिन असलम] सूं ['अथो` बिन यासर] सूं [अबू सईद अल खुदरी] कैयो है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो है: 'अगर अल्लाह मुमिनां नै नरक सूं उठायो है अर वे खुद नै सुरक्षित महसूस करै है तो थारै मांय सूं किणी एक अर उणरै दोस्त रै बीच इण दुनिया मांय होवण आळी सही बातां रै बाबत बहस मुसीबियां रै आपरै प्रभु रै साथै आपरै भाईयां रै नरक मांय फेंकण रै बारै मांय बहस सूं ज्यादा तीव्र नीं होवैला।' उण कह्यो, 'जो लोग विस्वास करै है, वै कैवै है; 'हे म्हारा प्रभु, म्हारा भाई म्हारै सागै नमाज पढ़ता, म्हारै सागै रोजा राखता अर म्हारै सागै हज करया करता हा, पण थै बांनै नरक मांय क्यूं घाल्या! ' अल्लाह कहै है: 'जाओ अर बां मांय सूं जिका लोगां नै थै जाणौ हो बांनै बारै काढो। सो वे उणरै कनै आया अर बांनै बांरै रूप सूं पिछाण लिया, बांरा रूप आग सूं नीं भस्म हुया। बां मांय सूं एक नै आपरै दोनूं बछड़ां रै हिस्सै तांई आग लागगी। अर केई तो आग सूं टखनां तांई भस्म हुयग्या हा। तो बांनै काढ दियो। फेर वे चिल्लाया; 'हे म्हारा प्रभु, म्हे बांनै बारै काढ दिया जिकां नै थूं म्हांनै हुकम दियो है'। फेर बो बोल्यो, 'उण मिनख नै बारै काढो जिणरै हिवड़ै मांय एक दीनार रो विस्वास है। फेर वो आदमी है जिणरै हिवड़ै मांय आधा दीनार रो आस्था है। फेर असो मिनख है जिणरै दिल मांय सरसों रै बीज जितो भारी भरोसो है'। अबू सईद कह्यो: 'जो कोई भी इण बात माथै विस्वास नीं करैला, तो वो पढ़ैला: 'सचमुच अल्लाह किणी माथै भी एक कण जितो मोटो अन्याय नीं करै है, अर जे कण जितो मोटो गुण है तो अल्लाह उणनै जरूर गुणा करैला अर उणसूं घणो इनाम देवैला'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 60

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ نَجِيحٍ وَكَانَ ثِقَةً عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ عَنْ جُنْدُبِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ فِتْيَانٌ حَزَاوِرَةٌ فَتَعَلَّمْنَا الْإِيمَانَ قَبْلَ أَنْ نَتَعَلَّمَ الْقُرْآنَ ثُمَّ تَعَلَّمْنَا الْقُرْآنَ فَازْدَدْنَا بِهِ إِيمَانًا

म्हानै बतायो है [अली बिन मुहम्मद] कह्यो, म्हानै बतायो है [वाकी'] कह्यो, म्हानै बतायो है [हम्मद बिन नाजीह] -वो त्सीकाह -भरोसो करियो- - [अबू इमरान अल जौनी] सूं [जुंदुब बिन अब्दुल्ला] उण कह्यो; 'जद म्हे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रै सागै हा, उण बगत म्हे मजबूत जवान हा। म्हे कुरान री पढ़ाई सूं पैली ईमान रो अध्ययन करियो, फेर म्हे कुरान रो अध्ययन करियो, इण वास्तै म्हारो ईमान बढ़ग्यो'।