Imam Ibnu Majah : 21
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْفُضَيْلِ حَدَّثَنَا الْمَقْبُرِيُّ عَنْ جَدِّهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ لَا أَعْرِفَنَّ مَا يُحَدَّثُ أَحَدُكُمْ عَنِّي الْحَدِيثَ وَهُوَ مُتَّكِئٌ عَلَى أَرِيكَتِهِ فَيَقُولُ اقْرَأْ قُرْآنًا مَا قِيلَ مِنْ قَوْلٍ حَسَنٍ فَأَنَا قُلْتُهُ
सानु [अली इब्नुल मुंडिर] ने आख्या, सानु दस्सेया गया है [मुहम्मद बिन फुदलैल] ने आख्या, सानु [अल मकबुरी] नू [उस दे दादा] तों [अबू हुरैरा] तों नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तों दस्सेया गया है, उसने आख्या: 'सच विच मैं तुहानूं दस्सांगा, तुहाडे विचों इक है जो मेरी हदीस नहीं दस्सना चाहुंदा। अपनी सीट उप्पर पिच्छें झुकदे होई उ’नें आखेआ; 'कुरान पढ़ो, हर चीज़ जो कही गई है - कुरान विच - अच्छे शब्द हन, इस करके मैं आखना'।
Imam Ibnu Majah : 22
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ آدَمَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ شُعْبَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ح و حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَقَالَ لِرَجُلٍ يَا ابْنَ أَخِي إِذَا حَدَّثْتُكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَلَا تَضْرِبْ لَهُ الْأَمْثَالَقَالَ أَبُو الْحَسَنِ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْكَرَابِيسِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْجَعْدِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ مِثْلَ حَدِيثِ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ
सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन अब्बाद बिन आदम] ने कहा, सानु [मेरे पिता] गी [स्यूबाह] कोला [मुहम्मद बिन अमरू] कोला [अबू सलामाह] कोला [अबू हुरैरा] कोला दस्सेया ऐ। इक होर पंक्ति दे मताबक; सानु दस्सेया है [हन्नाद बिन अस साड़ी] ने आख्या है, सानु दस्सेया है [अब्दाह बिन सुलेमान] ने कहा, सानु [मुहम्मद बिन अमरू] ने [अबू सलामाह] तों दस्सेया है कि [अबू हुरैराह] ने इक वारी किसे नू आख्या सी; 'हे मेरे भतीजे, अगर मैं तुहानूं अल्लाह दे रसूलुल्लाह दी हदीस पढ़ी तां उसदे अलावा होर दृष्टांत ना करो'। अबुल हसन ने कहा; ने सानु दस्सेया याह्या बिन अब्दुल्लाह अल करबिसी ने आख्या, अली रदलियाल्लाहु तआला 'अनहू' दी हदीस दे अनुसार 'अमरू बिन मुर्राह' तों स्यूबाह तों अली बिन अल जा'द नू दस्सेया है।
Imam Ibnu Majah : 23
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ مُعَاذٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ حَدَّثَنَا مُسْلِمٌ الْبَطِينُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ قَالَمَا أَخْطَأَنِي ابْنُ مَسْعُودٍ عَشِيَّةَ خَمِيسٍ إِلَّا أَتَيْتُهُ فِيهِ قَالَ فَمَا سَمِعْتُهُ يَقُولُ بِشَيْءٍ قَطُّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا كَانَ ذَاتَ عَشِيَّةٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ قَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَكَسَ قَالَ فَنَظَرْتُ إِلَيْهِ فَهُوَ قَائِمٌ مُحَلَّلَةً أَزْرَارُ قَمِيصِهِ قَدْ اغْرَوْرَقَتْ عَيْنَاهُ وَانْتَفَخَتْ أَوْدَاجُهُ قَالَ أَوْ دُونَ ذَلِكَ أَوْ فَوْقَ ذَلِكَ أَوْ قَرِيبًا مِنْ ذَلِكَ أَوْ شَبِيهًا بِذَلِكَ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू सियाबाह] ने कहा, सानु दस्सेया है [मुअदज बिन मुअदज] से [इब्न 'आउन] ने कहा, सानु [मुस्लिम अल बथिन] से [इब्राहिम अत तैमी] से [अपने पिता] से [अमरू बिन मैमुन] से बताया है उसने कहा [इब्नु मसूद] ने गुरुवार रात गी मिगी दोश नेईं दित्ता, पर मैं उंदे कोल गेआ। -'अमरू बिन मैमुन ने आख्या; - मैं उस नूं नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दी हदीस तों कुझ नहीं आखया। फिरी इक रात उने आख्या; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या, इस करिए उने सिर झुकाया। -'अमरू बिन मैमुन ने आख्या; - भैंने ऩशरे उसे दे खा, लश अऩने बागे के बटनों को बटन डारते शुए खडा था, उवके आॊसू नीचे ऩैदा शो यशे थे औय उवकी गले भें नस उग यही थी औय ऩड़ यही थी। उसने कहा: 'या उसदे अलावा, या उस तों उपर, या उस दे नेड़े, या उस दे समान'।
Imam Ibnu Majah : 24
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ مُعَاذٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ قَالَكَانَ أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ إِذَا حَدَّثَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَفَرَغَ مِنْهُ قَالَ أَوْ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू सियाबाह] ने कहा, सानु [मुअदज बिन मुअदज] [इब्न औन] से [मुहम्मद बिन सिरीन] से बताया है उसने कहा; जदों [अनस बिन मलिक] ने अल्लाह दे रसूले दी हदीस पढ़ के खत्म कर दित्ता तां उसने आख्या; 'या जिवें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या'।
Imam Ibnu Majah : 25
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَقُلْنَا لِزَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ حَدِّثْنَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ كَبِرْنَا وَنَسِينَا وَالْحَدِيثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَدِيدٌ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू सियाबाह] ने आख्या है, [स्यूबाह] से सानू [घुंदर] बताया है। ते दूजे रस्ते तों; सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन बस्स्यार] ने सानु दस्सेया है [अब्दुररहमान बिन महदीय] ने आख्या है, [अमरू बिन मुर्राह] से [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] से [स्यूबाह] को बताया है उसने कहा; असी [जैद बिन अरकाम] गी आखेआ; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दी हदीस दस्सो;' ' असीं बूढ़े ते भुलदे हो गए हां, जबकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दी हदीस बड़ी कठोर ही - भारी -'।
Imam Ibnu Majah : 26
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي السَّفَرِ قَالَ سَمِعْتُ الشَّعْبِيَّ يَقُولُجَالَسْتُ ابْنَ عُمَرَ سَنَةً فَمَا سَمِعْتُهُ يُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا
सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] ने कहा, सानु [अबू अन नदर] [स्यूबाह] से [अब्दुल्लाह बिन अबू अस सफर] से बताया है उसने कहा; 'मैं [ऐश शा'बी] गी आखदे सुनेया; ' मैं इक साल [इब्न उमर] दे कोल पढ़ेया, पर मैं कदें बी उनेंगी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला इक बी हदीस पढ़दे नेईं सुनेआ।
Imam Ibnu Majah : 27
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ ابْنِ طَاوُسٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُإِنَّمَا كُنَّا نَحْفَظُ الْحَدِيثَ وَالْحَدِيثُ يُحْفَظُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَّا إِذَا رَكِبْتُمْ الصَّعْبَ وَالذَّلُولَ فَهَيْهَاتَ
सानु दस्सेया है [अल अब्बास बिन अब्दुल अज़हिम अल अनबरी] ने कहा, सानु दस्सेया है [अब्दुराजाक] ने कहा, सानु [मा'मर] को [इब्न थावस] से [अपने पिता] से बताया है उसने कहा; मैं [इब्न अब्बास] गी आखदे सुनेया; 'पैहले अस हदीस रटदे हे, जबकि हदीस सीधे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला रटदे हे। तो जे तुसीं मुसीबत करदे हो ते लिप्त हो जाओगे, तां कदे वी मुमकिन नहीं होवेगा।'
Imam Ibnu Majah : 28
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ مُجَالِدٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ قَرَظَةَ بْنِ كَعْبٍ قَالَبَعَثَنَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ إِلَى الْكُوفَةِ وَشَيَّعَنَا فَمَشَى مَعَنَا إِلَى مَوْضِعٍ يُقَالُ لَهُ صِرَارٌ فَقَالَ أَتَدْرُونَ لِمَ مَشَيْتُ مَعَكُمْ قَالَ قُلْنَا لِحَقِّ صُحْبَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلِحَقِّ الْأَنْصَارِ قَالَ لَكِنِّي مَشَيْتُ مَعَكُمْ لِحَدِيثٍ أَرَدْتُ أَنْ أُحَدِّثَكُمْ بِهِ وَأَرَدْتُ أَنْ تَحْفَظُوهُ لِمَمْشَايَ مَعَكُمْ إِنَّكُمْ تَقْدَمُونَ عَلَى قَوْمٍ لِلْقُرْآنِ فِي صُدُورِهِمْ هَزِيزٌ كَهَزِيزِ الْمِرْجَلِ فَإِذَا رَأَوْكُمْ مَدُّوا إِلَيْكُمْ أَعْنَاقَهُمْ وَقَالُوا أَصْحَابُ مُحَمَّدٍ فَأَقِلُّوا الرِّوَايَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا شَرِيكُكُمْ
सानु दस्सेया है [अहमद बिन अब्दाह] ने कहा, सानु [हम्मद बिन जैद] को [मुजालिद] से [ऐश शा'बी] से [कराज़ह बिन काअब] से बताया है उसने कहा; उमर बिन खथथब ने भेज के सानु कुफा लेई गेया। ओह् साढ़े कन्नै गै चलदा रेआ, जिसलै तकर अस शिरार नांऽ दी थाह् र नेईं पुज्जे। उसने फिर आख्या; 'तुभ जानते शो कक भैं तुभसे क्मों चल यशा शूॊ?' कराज़ह बिन क'ब ने आख्या; असी जवाब दित्ता, 'अल्लाह दे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे साथ दे हक ते अंसार दे साथियां दे हक दे कारण'। [उमर ने आख्या]; 'मैं तुहाडे नाल इस करिए चलदा हां कि इक हदीस है जो मैं तुहानूं पहुचाना चाहंदा हां, ते मैं चाहुंदा हां कि तुसीं उस नू रट लैओ क्योंकि मैं तुहाडे नाल सफर कर रिहा हां, उसने आख्या; 'सचमुच तुसीं किसे लोकां दे कोल आए हो क्योंकि कुरान उन्हां दे स्तन विच उबलदे घड़े दी तरह उबलदा है।' जेकर ओह तुसेंगी दिक्खदे न तां तुंदे उप्पर अपनी गर्दन क्रेन करदे न ते आखङन; 'हे मुहम्मद दे दोस्तों, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला थोड़ी हदीस सुनाओ ते मैं तुहाडा साथी हां'।
Imam Ibnu Majah : 29
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ قَالَصَحِبْتُ سَعْدَ بْنَ مَالِكٍ مِنْ الْمَدِينَةِ إِلَى مَكَّةَ فَمَا سَمِعْتُهُ يُحَدِّثُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِحَدِيثٍ وَاحِدٍ
सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन बस्स्यार] ने कहा, सानु दस्सेया है [अब्दुररहमान] ने कहा, सानु [हम्मद बिन जैद] को [याह्या बिन सईद] से [जैसा सा`इब बिन यजीद] से बताया है, उसने कहा; ' मैं [सअद बिन मलिक] दे नाल मदीना तों मक्का तक गया, ते मैं उस नूं नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तों इक वी हदीस पढ़दे नहीं सुणया।
Imam Ibnu Majah : 30
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى قَالُوا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] ते [सुवैद बिन सईद] ते [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन ज़ुरारा] ते [इस्माइल बिन मूसा] गी दस्सेआ गेदा ऐ जे उनेंगी आखेआ ऐ; ने [शरीक] को [सिमक] से [अब्दुररहमान बिन अब्दुल्लाह बिन मसूद] से [अपने पिता] से बताया है उसने कहा; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जो जानबूझ के मेरे नाम ते झूठ बोलदा है, ओ नरक विच अपनी सीट तैयार कर दे'।
Imam Ibnu Majah : 31
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى قَالَا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ عَلِيٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَكْذِبُوا عَلَيَّ فَإِنَّ الْكَذِبَ عَلَيَّ يُولِجُ النَّارَ
सानु दस्सेया गया है कि [अब्दुल्लाह बिन अमीर बिन ज़ुरारा] ते [इस्माइल बिन मूसा] दोनों ने आख्या; ने [शरीक] को [मंसूर] से [रिब'ई बिन हिरासी] से [अली] से बताया है उसने कहा; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: मेरे नाम कन्ने झूठ मत बोलना, क्योंकि सचमुच मेरे नाम कन्ने झूठ बोलना तुसें गी नरक च पाई देग।
Imam Ibnu Majah : 32
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ الْمِصْرِيُّ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ حَسِبْتُهُ قَالَ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन रुमह अल मिश्री] ने आख्या है, सानु [अल लैत्स बिन स'द] को [इब्नु शिहाब] से [अनास बिन मलिक] से बताया है उसने कहा; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जो मेरे नां ते झूठ बोलदा है, - मेरा ख्याल है कि उसने आख्या: - जानबूझ के, उसने नरक विच अपनी सीट तैयार कर दे'।
Imam Ibnu Majah : 33
حَدَّثَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु दस्सेया है [अबू खैतसामाह जुहैर बिन हरब] ने आख्या है, सानु [हुसैम] को [अबू अज़ जुबैर] से [जबीर] से बताया है उसने कहा; 'अल्लाह दे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जो कोई जानबूझ के मेरे नाम ते झूठ बोलदा है, ओ नरक विच अपनी सीट तैयार कर दे'।
Imam Ibnu Majah : 34
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَقَوَّلَ عَلَيَّ مَا لَمْ أَقُلْ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू सियाबाह] ने आख्या है, सानु [मुहम्मद बिन बिसीर] को [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामाह] से [अबू हुरैरा] से बताया है उसने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जो कोई मेरी तरफों कोई ऐसी गल्ल करदा है जो मैं नहीं आख्या, ओ नरक विच अपनी सीट तैयार कर दे'।
Imam Ibnu Majah : 35
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَعْلَى التَّيْمِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ مَعْبَدِ بْنِ كَعْبٍ عَنْ أَبِي قَتَادَةَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ عَلَى هَذَا الْمِنْبَرِ إِيَّاكُمْ وَكَثْرَةَ الْحَدِيثِ عَنِّي فَمَنْ قَالَ عَلَيَّ فَلْيَقُلْ حَقًّا أَوْ صِدْقًا وَمَنْ تَقَوَّلَ عَلَيَّ مَا لَمْ أَقُلْ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू स्याइबा], सानु [याह्या बिन या'ला अत तैमी] से [मुहम्मद बिन इशाक] से [मा'बाद बिन क'ब] से [अबू कतादाह] से बताया है उसने कहा; मैं इस मंच तों रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नू कहंदे सुनेया: 'मेरे कोलों ज्यादा हदीस न पढ़ो, इस करके जो मेरे नाम ते बोलदा है, उस नू सच या ईमानदारी नाल बोलन दे। जो मेरे नां ते कोई गल्ल आखदा है जो मैं नहीं आख्या, ओ नरक विच अपनी सीट तैयार कर लै'।
Imam Ibnu Majah : 36
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ جَامِعِ بْنِ شَدَّادٍ أَبِي صَخْرَةَ عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قُلْتُ لِلزُّبَيْرِ بْنِ الْعَوَّامِمَا لِيَ لَا أَسْمَعُكَ تُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا أَسْمَعُ ابْنَ مَسْعُودٍ وَفُلَانًا وَفُلَانًا قَالَ أَمَا إِنِّي لَمْ أُفَارِقْهُ مُنْذُ أَسْلَمْتُ وَلَكِنِّي سَمِعْتُ مِنْهُ كَلِمَةً يَقُولُ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु दस्सेया गया है कि [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] ते [मुहम्मद बिन बस्स्यार] दोनों ने आख्या; सानु दस्सेया है [घुंदर मुहम्मद बिन जा'फर] ने कहा, सानु [स्यूबाह] गी [जमी' बिन स्याद्दद अबू शखराह] कोला ['अमीर बिन अब्दुल्लाह बिन जुबैर] कोला [अपने पिता] कोला दस्सेया ऐ, उने आखेआ; मैं [जुबैर बिन अववाम] गी आखेआ; 'मैं तुहानूं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तों हदीस क्यों नहीं सुणया, जिवें मैं इक वारी इब्न मसूद, फुलान ते फुलान तों सुणया सी?' उने जवाब दित्ता; 'सचमुच मैं इस्लाम गी अपनाने दे बाद थमां कदें बी अल्लाह दे रसूलुल्लाह कोला बक्ख नेईं होई सकेआ, पर मैं इक वाक्य सुनेआ ऐ जे ओह् आखदा ऐ: 'जेह्ड़ा जानबूझियै मेरे नांऽ पर झूठ बोलदा ऐ, ओह् नरक च अपनी सीट तैयार करै'।
Imam Ibnu Majah : 37
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
सानु दस्सेया है [सुवैद बिन सईद] ने कहा, सानु [अली बिन मुशीर] को [मुथरीफ] से [अथियाह] से [अबू सईद] से बताया है उसने कहा; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जो जानबूझ के मेरे नाम ते झूठ बोलदा है, ओ नरक विच अपनी सीट तैयार कर दे'।
Imam Ibnu Majah : 38
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ هَاشِمٍ عَنْ ابْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي حَدِيثًا وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] ने कहा, सानु [अली बिन हिशाम] से [इब्न अबू लैला] से [अल हकम] से [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] से [अली रदलियाहु अनहु] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उसने कहा: 'जो भी मेरे कोला हदीस पजांदा है, जबकि ओह देखदा है कि हदीस है इक झूठ, फिर ओह झूठे च इक ऐ'।
Imam Ibnu Majah : 39
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي حَدِيثًا وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِ
सानु दस्सेया है [अबू बकर बिन अबू सियाबाह] ने कहा, सानु [वाकी'] दस्सेया है। इक होर पंक्ति दे मताबक; सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन बस्स्यार] उसने आख्या; सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन जा'फर] दोनों ने आख्या; ने सानु [स्यूबाह] [अल हकम] तों [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] तों [समुरा बिन जुंडाब] तों नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तों दस्सेया है, उसने आख्या: 'जो मेरे कोल हदीस रिवायत करदा है, जबकि ओह वेखदा है कि हदीस झूठ है, तां ओह झूठे विचों इक है'।
Imam Ibnu Majah : 40
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ رَوَى عَنِّي حَدِيثًا وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنْبَأَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُوسَى الْأَشْيَبُ عَنْ شُعْبَةَ مِثْلَ حَدِيثِ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ
सानु दस्सेया है [उस्मान बिन अबू स्याइबा] ने कहा, सानु [मुहम्मद बिन फुदलैल] से [अल अ'मासी] से [अल हकम] से [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] से [अली] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उसने कहा: 'जो मेरे कोल हदीस रिवायत करदा है, जबकि ओह देखदा है कि हदीस झूठ है, फिर ओह विचों इक है झूठे दा'। सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह] ने आख्या है, [समुरा बिन जुंदाब] दी हदीस दे अनुसार [स्यूअबाह] तों सानु [अल हसन बिन मूसा अल अस्याब] दी रिपोर्ट कीती है।