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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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इमाम नसाई (الامام النسائي) - 5662 हदीस

जागने के बाद हाथ धोने की नैतिकता

इमाम नसाई : 1

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ فَلَا يَغْمِسْ يَدَهُ فِي وَضُوئِهِ حَتَّى يَغْسِلَهَا ثَلَاثًا فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ

उन्होंने हमें [कुतैबा] बताया है; उन्होंने हमें [सुफ़यान] से [अज़ ज़ुहरी] से [अबू सलमा] से [अबू हुरैरा] से बताया है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब तुम में से कोई सोकर उठे, तो अपने हाथों को वज़ू में तब तक न डुबोए जब तक वह तीन बार हाथ न धो ले, क्योंकि तुम में से कोई नहीं जानता कि उसके हाथ रात में कहाँ गए।"

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आदत थी रात की नमाज़ से पहले मुंह को सिवाक से रगड़ना

इमाम नसाई : 2

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ جَرِيرٍ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ يَشُوصُ فَاهُ بِالسِّوَاكِ

हमें बताया गया है कि [इस्हाक बिन इब्राहीम] और [कुतैबा बिन सईद] [जरीर] से [मंसूर] से [अबू वाइल] से [हुदज़ैफा] ने कहा: "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब वह लैल की नमाज़ अदा करना चाहते थे तो वह अपने मुंह पर सिवाक रगड़ते थे।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिवाक और "एए', एए'' कहने का इस्तेमाल किया

इमाम नसाई : 3

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ قَالَ أَخْبَرَنَا غَيْلَانُ بْنُ جَرِيرٍ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَدَخَلْتُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَسْتَنُّ وَطَرَفُ السِّوَاكِ عَلَى لِسَانِهِ وَهُوَ يَقُولُ عَأْ عَأْ

हमें [अहमद बिन अब्दा] ने बताया है; हमें [हम्मद बिन ज़ैद] ने बताया है; हमें [ग़लान बिन जरीर] ने [अबू बुरदा] से [अबू मूसा] से बताया है; उन्होंने कहा; "मैं रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला, जब वह सिवाक कर रहे थे, और सिवाक की नोक उनकी ज़बान पर थी, तो उन्होंने कहा: आ', आ'।

इस्लाम में पद मांगने पर प्रतिबंध और अबू मूसा को यमन भेजना

इमाम नसाई : 4

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا يَحْيَى وَهُوَ ابْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا قُرَّةُ بْنُ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ هِلَالٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَأَقْبَلْتُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَعِي رَجُلَانِ مِنْ الْأَشْعَرِيِّينَ أَحَدُهُمَا عَنْ يَمِينِي وَالْآخَرُ عَنْ يَسَارِي وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْتَاكُ فَكِلَاهُمَا سَأَلَ الْعَمَلَ قُلْتُ وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ نَبِيًّا مَا أَطْلَعَانِي عَلَى مَا فِي أَنْفُسِهِمَا وَمَا شَعَرْتُ أَنَّهُمَا يَطْلُبَانِ الْعَمَلَ فَكَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى سِوَاكِهِ تَحْتَ شَفَتِهِ قَلَصَتْ فَقَالَ إِنَّا لَا أَوْ لَنْ نَسْتَعِينَ عَلَى الْعَمَلِ مَنْ أَرَادَهُ وَلَكِنْ اذْهَبْ أَنْتَ فَبَعَثَهُ عَلَى الْيَمَنِ ثُمَّ أَرْدَفَهُ مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا

हमें बताया है [अमरु बिन अली] ने हमें बताया है [याह्या -इब्नु सईद] ने कहा; हमें बताया है [कुर्राह बिन बिन खालिद] ने कहा; हमें बताया है [हुमैद बिन हिलाल] ने कहा; मुझे [अबू बरदा] ने [अबू मूसा] से बताया कि उसने कहा, "मैंने एक बार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सामना किया और मेरे साथ बनी असीरी से दो आदमी थे; एक मेरे दाईं ओर और दूसरा मेरे बाईं ओर, जबकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सिवाक कर रहे थे। फिर दोनों लोगों ने उनसे सिविल सर्विस की नौकरी मांगी, तब मैंने अबू मूसा ने कहा, 'उसकी कसम जिसने आपको सच्चाई के वाहक के रूप में भेजा, दोनों लोगों ने मुझे अपनी चिंता व्यक्त नहीं की और मुझे यह भी पता नहीं था कि वे सिविल सर्विस की नौकरी मांग रहे थे, फिर ऐसा हुआ जैसे मैंने उनका सिवाक देखा जो उनके होठों के नीचे था ताकि वे एक साथ जुड़ गए और उठ खड़े हुए। फिर उन्होंने कहा, 'हम उन लोगों से मदद नहीं मांगते - या नहीं मांगेंगे - जो सिविल सर्विस की नौकरी चाहते हैं, इसलिए आप यमन जाएं,

सिवाक होने से भगवान की प्रसन्नता मिलती है

इमाम नसाई : 5

أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ يَزِيدَ وَهُوَ ابْنُ زُرَيْعٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي عَتِيقٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ

हमें [हुमैद बिन मसअदा] और [मुहम्मद बिन अब्दुल अ'ला] को [यज़ीद] यानी इब्न जुराई से खबर मिली है; मुझे [अब्दुर्रहमान बिन अबू अतीक] तक खबर पहुंची है, उन्होंने कहा; [मेरे पिता] ने मुझसे कहा है; मैंने [ऐस्या] से सुना है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "सिवाक मुंह में खुशबू लाता है, और अल्लाह को मंज़ूरी देता है।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम से लगातार सिवाक के लिए सिफारिशें

इमाम नसाई : 6

أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ وَعِمْرَانُ بْنُ مُوسَى قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ الْحَبْحَابِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَكْثَرْتُ عَلَيْكُمْ فِي السِّوَاكِ

हमें बताया गया है कि [हुमैद बिन मसअदा] और ['इमरान बिन मूसा] दोनों ने कहा; हमें [अब्दुल वारित्स] ने बताया है; हमें [स्यू'एब बिन हभाब] ने [अनस बिन मलिक] से बताया है कि उन्होंने कहा; कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मैं अक्सर तुम्हें बहुत सारे सिवाक करने की सलाह देता हूं।"

नागरिकता का दायित्व लोगों के लिए बोझ नहीं होना चाहिए

इमाम नसाई : 7

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ مَالِكٍ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي لَأَمَرْتُهُمْ بِالسِّوَاكِ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍ

हमें [कुतैबा बिन सईद] ने [मलिक] से [अबू ज़िनाद] से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि उन्होंने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर मुझे अपने लोगों पर बोझ डालने की चिंता न होती, तो मैं उन्हें हर बार नमाज़ पढ़ते समय सिवाक करने का आदेश देता।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम की आदत घर में प्रवेश करते समय सवाक थी

इमाम नसाई : 8

أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ قَالَ حَدَّثَنَا عِيسَى وَهُوَ ابْنُ يُونُسَ عَنْ مِسْعَرٍ عَنْ الْمِقْدَامِ وَهُوَ ابْنُ شُرَيْحٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَبِأَيِّ شَيْءٍ كَانَ يَبْدَأُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ بَيْتَهُ قَالَتْ بِالسِّوَاكِ

उन्होंने कहा, "हमने [अली बिन खसराम] को बताया है; उन्होंने हमें [ईसा - यानी इब्न यूनुस] को [मिसर] से [मिकदम यानी इब्न स्यूरैह] से [अपने पिता] से बताया है।" उन्होंने कहा, "मैंने ऐश्या से पूछा, 'जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने घर में दाखिल हुए तो सबसे पहले क्या किया? ['ऐश्या] ने कहा, 'बरसीवाक'।"

पाँच चीज़ें जो मानव स्वभाव में शामिल हैं

इमाम नसाई : 9

أَخْبَرَنَا الْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ عَنْ ابْنِ وَهْبٍ عَنْ يُونُسَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْفِطْرَةُ خَمْسٌ الِاخْتِتَانُ وَالِاسْتِحْدَادُ وَقَصُّ الشَّارِبِ وَتَقْلِيمُ الْأَظْفَارِ وَنَتْفُ الْإِبْطِ

हमें बताया गया है कि [अल हारिथ बिन मिस्कीन] को पढ़ा गया है और मैंने इसे [इब्न वहाब] से [यूनुस] से [इब्न शिहाब] से [सईद बिन मुसय्यब] से [अबू हुरैरा] से सुना है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "पांच चीजें जिनमें फितरा, खतना, जघन बाल मुंडवाना, मूंछें काटना, नाखून काटना और बगल के बाल नोचना शामिल हैं।"

स्वच्छता बनाए रखना मानव स्वभाव है

इमाम नसाई : 10

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ قَالَ سَمِعْتُ مَعْمَرًا عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَمْسٌ مِنْ الْفِطْرَةِ قَصُّ الشَّارِبِ وَنَتْفُ الْإِبْطِ وَتَقْلِيمُ الْأَظْفَارِ وَالِاسْتِحْدَادُ وَالْخِتَانُ

हमें [मुहम्मद बिन अब्दुल अ'ला] ने बताया; हमें बताया है [अल मुअत्तमिर] ने कहा; मैंने [ममार] को [ज़ुहरी] से [सईद बिन मुसय्यब] से [अबू हुरैरा] से सुना, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "पांच चीजें जो फ़ितरा का हिस्सा हैं, मूंछें कटवाना, बगल के बाल उखाड़ना, नाखून काटना, प्यूबिक हेयर शेव करना और खतना।"

खतना, मूंछें कटवाना और बाल मुंडवाना स्वाभाविक है

इमाम नसाई : 11

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ خَمْسٌ مِنْ الْفِطْرَةِ الْخِتَانُ وَحَلْقُ الْعَانَةِ وَنَتْفُ الْإِبْطِ وَتَقْلِيمُ الْأَظْفَارِ وَأَخْذُ الشَّارِبِ

उन्होंने हमें [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन यज़ीद] बताया; उन्होंने हमें [सुफ़यान], [ज़ुहरी], [सईद बिन मुसय्यब], [अबू हुरैरा], रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया: "फ़ितरत में पाँच चीज़ें शामिल हैं: खतना, प्यूबिक हेयर शेव करना, बगल के बाल उखाड़ना, नाखून काटना और मूंछें कटवाना।"

स्वच्छता और स्व-देखभाल प्रकृति का हिस्सा है

इमाम नसाई : 12

أَخْبَرَنَا الْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ عَنْ ابْنِ وَهْبٍ عَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْفِطْرَةُ قَصُّ الْأَظْفَارِ وَأَخْذُ الشَّارِبِ وَحَلْقُ الْعَانَةِ

हमें बताया गया कि [हारित्स बिन मिस्कीन] ने इसे उनके लिए पढ़ा था और मैंने [इब्नु वहब] से [हंदज़ला बिन अबू सुफ़यान] से [नफी] से [इब्न उमर] से सुना कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "फितरत में नाखून काटना, मूंछें कटवाना और जघन बाल मुंडवाना शामिल है।"

इस्लाम में मूंछें न कटवाने पर पाबंदी

इमाम नसाई : 13

أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ عَنْ يُوسُفَ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ حَبِيبِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ لَمْ يَأْخُذْ شَارِبَهُ فَلَيْسَ مِنَّا

उन्होंने कहा, "हमें [अली बिन हुज्र] ने बताया है; उन्होंने कहा, हमें [उबैदा बिन हुमैद] ने [यूसुफ बिन शुहैब] से [हबीब बिन यासर] से [ज़ैद बिन अर्कम] से बताया है; उन्होंने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई अपनी मूंछें नहीं कटवाता, वह हमारे समूह में से नहीं है।"

मूंछें, नाखून और जघन बाल काटने की चालीस दिन की सीमा

इमाम नसाई : 14

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا جَعْفَرٌ هُوَ ابْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَوَقَّتَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي قَصِّ الشَّارِبِ وَتَقْلِيمِ الْأَظْفَارِ وَحَلْقِ الْعَانَةِ وَنَتْفِ الْإِبْطِ أَنْ لَا نَتْرُكَ أَكْثَرَ مِنْ أَرْبَعِينَ يَوْمًا وَقَالَ مَرَّةً أُخْرَى أَرْبَعِينَ لَيْلَةً

उन्होंने हमें [कुतैबा] बताया है; उन्होंने हमें [जाफर यानी इब्न सुलेमान] [अबू इमरान अल जौनी] से [अनस बिन मलिक] से बताया है; उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने हमारे लिए मूंछें कटवाने, नाखून काटने, प्यूबिक हेयर शेव करने और बगल के बाल उखाड़ने का एक समय तय किया है, यानी हम इसे चालीस दिनों से ज़्यादा न छोड़ें।" एक और मौके पर उन्होंने कहा: "चालीस रातें।"

मूंछ छोटी करने और दाढ़ी लंबी करने का आदेश

इमाम नसाई : 15

أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى هُوَ ابْنُ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَحْفُوا الشَّوَارِبَ وَأَعْفُوا اللِّحَى

उन्होंने हमें [उबैदिल्लाह बिन सईद] बताया है; उन्होंने हमें [याह्या, यानी इब्न सईद] [उबैदिल्लाह] से बताया है, उन्होंने मुझे [नफी] [इब्न उमर] से बताया है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मूंछें छोटी कर लो और दाढ़ी लंबी कर लो।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आदत है कि जब आप मारना चाहें तो दूर रहें

इमाम नसाई : 16

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ الْخَطْمِيُّ عُمَيْرُ بْنُ يَزِيدَ قَالَ حَدَّثَنِي الْحَارِثُ بْنُ فُضَيْلٍ وَعُمَارَةُ بْنُ خُزَيْمَةَ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي قُرَادٍ قَالَخَرَجْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْخَلَاءِ وَكَانَ إِذَا أَرَادَ الْحَاجَةَ أَبْعَدَ

उन्होंने हमें [अमरू बिन अली] बताया; उन्होंने हमें बताया [याह्या बिन सईद] ने हमें बताया [अबू जाफर अल खथमी उमैर बिन यजीद] ने कहा; उन्होंने हमें [अल हारिथ बिन फुदैल] और [उमरह बिन हुजैमा बिन साबित] [अब्दुर्रहमान बिन अबू कुर्राद] से बताया; उन्होंने कहा; "मैं एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ एक शांत जगह पर गया था, जब वह खुद को आराम करना चाहते थे, तो वह दूर चले गए।"

रसूलल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बुझने से पहले वुज़ू का पानी लेने को कहा

इमाम नसाई : 17

أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا إِسْمَعِيلُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا ذَهَبَ الْمَذْهَبَ أَبْعَدَ قَالَ فَذَهَبَ لِحَاجَتِهِ وَهُوَ فِي بَعْضِ أَسْفَارِهِ فَقَالَ ائْتِنِي بِوَضُوءٍ فَأَتَيْتُهُ بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِقَالَ الشَّيْخُ إِسْمَعِيلُ هُوَ ابْنُ جَعْفَرِ بْنِ أَبِي كَثِيرٍ الْقَارِئُ

हमें [अली बिन हुज्र] बताया गया है कि हमें [इस्माइल] [मुहम्मद बिन अम्र] से [अबू सलमा] से [अल मुगीरा बिन स्यूबा] से बताया गया है कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम टॉयलेट गए, तो वह दूर रहे। उन्होंने कहा, "एक बार वह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सफर में शौच के लिए गए। फिर उन्होंने कहा, 'वज़ू का पानी लाओ'। मैंने तुरंत उन्हें वज़ू का पानी दिया, उन्होंने तुरंत वज़ू किया और अपने दोनों जूते (खुफ़) धोए।" यह शेख इस्माइल, यानी इब्नु जाफ़र बिन अबू कत्सिर अल क़ोरी ने कहा है।

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कूड़ा निस्तारण स्थल पर खड़े होकर पेशाब किया

इमाम नसाई : 18

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ قَالَ أَنْبَأَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَكُنْتُ أَمْشِي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَانْتَهَى إِلَى سُبَاطَةِ قَوْمٍ فَبَالَ قَائِمًا فَتَنَحَّيْتُ عَنْهُ فَدَعَانِي وَكُنْتُ عِنْدَ عَقِبَيْهِ حَتَّى فَرَغَ ثُمَّ تَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ

हमें [इसहाक बिन इब्राहिम] ने बताया है कि उन्होंने कहा; हमें [ईसा बिन यूनुस] ने बताया है; हमें [अल अमासी] ने [स्याक़िक] से [हुदज़ैफ़ा] से बताया है कि उन्होंने कहा: "मैं एक बार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ चल रहा था। जब वह लोगों के कूड़े के ढेर पर पहुँचे, तो वह खड़े होकर पेशाब कर रहे थे, इसलिए मैं तुरंत उनसे दूर हो गया। फिर उन्होंने मुझे बुलाया, और मैं उनके पीछे तब तक रहा जब तक उन्होंने काम खत्म नहीं कर लिया। फिर उन्होंने वज़ू किया और अपने दोनों जूते (खुफ़) पोंछे।"

बाथरूम में प्रवेश करते समय प्रार्थना

इमाम नसाई : 19

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا إِسْمَعِيلُ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ

हमें [इसहाक बिन इब्राहिम] ने बताया है, उन्होंने कहा; हमें [इस्माइल] ने [अब्दुल अज़ीज़ बिन शुहैब] से [अनस बिन मलिक] ने बताया है, उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब टॉयलेट में गए, तो उन्होंने यह नमाज़ पढ़ी, 'ऐ अल्लाह, मैं मर्दों और औरतों की बुराइयों से तेरी पनाह चाहता हूँ।"

क़िबला की ओर मुँह करके या पीछे मुड़कर नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध

इमाम नसाई : 20

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ وَاللَّفْظُ لَهُ عَنْ ابْنِ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ رَافِعِ بْنِ إِسْحَقَ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيَّ وَهُوَ بِمِصْرَ يَقُولُوَاللَّهِ مَا أَدْرِي كَيْفَ أَصْنَعُ بِهَذِهِ الْكَرَايِيسِ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا ذَهَبَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْغَائِطِ أَوْ الْبَوْلِ فَلَا يَسْتَقْبِلْ الْقِبْلَةَ وَلَا يَسْتَدْبِرْهَا

हमें [मुहम्मद बिन सलामह] और [अल हारिथ बिन मिस्कीन] को [इब्न कासिम] से खबर मिली है; मुझे [मलिक] को [इस्हाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] से [रफी बिन इस्हाक] से बताया गया है कि उसने [अबू अय्यूब अल अंसारी] को सुना (वह मिस्र में था) उसने कहा; "अल्लाह की कसम, मुझे नहीं पता कि इन शौचालयों का क्या करना है? भले ही पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अगर तुम में से कोई शौच या पेशाब करना चाहता है, तो क़िबला की ओर मुँह न करे या अपनी पीठ न करे।"