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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Nasa'i (الامام النسائي) - 5662 Hadith

Hadith

Imam Nasa'i : 161

أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ وَحُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ قَالَا حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ مَنَامِهِ فَلَا يُدْخِلْ يَدَهُ فِي الْإِنَاءِ حَتَّى يُفْرِغَ عَلَيْهَا ثَلَاثَ مَرَّاتٍ فَإِنَّهُ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ

हमका ई बतावा गा है कि [इस्माइल बिन मसूद] अऊर [हुमैद बिन मसूद] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [यजीद बिन जुराई] कहिन; हमसे [मा'मर] से [अज़-जुहरी] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैराह] रदलियाल्लाहुअन्हु से कहिन है, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा; 'जब तुममें से कोई नींद से उठे, तो अपने हाथ को पानी के बर्तन में तब तक न रखें जब तक कि वह अपने हाथ पर तीन बार न डाले, काहे से कि वह नहीं जानत है कि उसका हाथ कहाँ है -जब वह सो रहा है-'।

Hadith

Imam Nasa'i : 162

أَخْبَرَنَا بِشْرُ بْنُ هِلَالٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا نَعَسَ الرَّجُلُ وَهُوَ فِي الصَّلَاةِ فَلْيَنْصَرِفْ لَعَلَّهُ يَدْعُو عَلَى نَفْسِهِ وَهُوَ لَا يَدْرِي

हमका [बिसीर बिन हिलाल] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल वारित्स] [अय्यूब] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपने पिता] से [ऐस्या रदलियाल्लाह अन्हा] से कहिन है, उ कहिन; कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर केहू अपनी नमाज मा नींद मा है, तौ ओका रुकै का चाही, काहे से कि शायद ऊ अपने लिए दुर्घटना - विनाश - के दुआ करत है जबकि ऊ एकर बारे मा जानत नाहीं है!'

Hadith

Imam Nasa'i : 163

أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا مَعْنٌ أَنْبَأَنَا مَالِكٌ ح وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ عَنْ ابْنِ الْقَاسِمِ قَالَ أَنْبَأَنَا مَالِكٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُ دَخَلْتُ عَلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَذَكَرْنَا مَا يَكُونُ مِنْهُ الْوُضُوءُ فَقَالَ مَرْوَانُ مِنْ مَسِّ الذَّكَرِ الْوُضُوءُ فَقَالَ عُرْوَةُ مَا عَلِمْتُ ذَلِكَ فَقَالَ مَرْوَانُ أَخْبَرَتْنِي بُسْرَةُ بِنْتُ صَفْوَانَأَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا مَسَّ أَحَدُكُمْ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ

हमसे कहिस है [हारून बिन अब्दुल्ला] हमसे कहिस है [मां] हमसे कहिस है [मलिक] अऊर [अल हरिथ बिन मिस्किन] का ओनका पढ़ा गा है अऊर हम [इब्नू कासिम] से सुनेन; हमका [मलिक] [अब्दुल्ला बिन अबू बकर बिन मुहम्मद बिन अमर बिन हाजिम] से ई बतावा गा है कि उ [उर्वाह बिन जुबैर] का कहत सुने रहे; 'मरवान बिन हकाम से मुलाकात भै, तब हम वजू के जरूरत वाली बातन का जिक्र किहेन। तभी मरवान बोले, 'गुनाना छुवत'। उरवाह कहिस, 'हमका ई नाहीं पता। फिर [मरवान] ने फिर कहा, "मैंने [बुसराह बिन्त शफवान] को सूचित किया है कि उसने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना है कि जब तुममें से कोई अपने गुप्तांग को छूए तो वजू ले ले"।

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Imam Nasa'i : 164

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُغِيرَةِ قَالَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعَيْبٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُ ذَكَرَ مَرْوَانُ فِي إِمَارَتِهِ عَلَى الْمَدِينَةِ أَنَّهُ يُتَوَضَّأُ مِنْ مَسِّ الذَّكَرِ إِذَا أَفْضَى إِلَيْهِ الرَّجُلُ بِيَدِهِ فَأَنْكَرْتُ ذَلِكَ وَقُلْتُ لَا وُضُوءَ عَلَى مَنْ مَسَّهُ فَقَالَ مَرْوَانُ أَخْبَرَتْنِي بُسْرَةُ بِنْتُ صَفْوَانَأَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَكَرَ مَا يُتَوَضَّأُ مِنْهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيُتَوَضَّأُ مِنْ مَسِّ الذَّكَرِقَالَ عُرْوَةُ فَلَمْ أَزَلْ أُمَارِي مَرْوَانَ حَتَّى دَعَا رَجُلًا مِنْ حَرَسِهِ فَأَرْسَلَهُ إِلَى بُسْرَةَ فَسَأَلَهَا عَمَّا حَدَّثَتْ مَرْوَانَ فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِ بُسْرَةُ بِمِثْلِ الَّذِي حَدَّثَنِي عَنْهَا مَرْوَانُ

हमका [अहमद बिन मुहम्मद बिन अल मुघिराह] सूचित कइके उ कहिन; हमका [उस्मान बिन सैद] से [स्युअैब] से [अज-जुहरी] से कहिन है, उ कहिन; मोका [अब्दुल्ला बिन अबू बकर बिन अमर बिन हाजिम] का सूचित किहिन है कि उ [उर्वाह बिन जुबैर] का कहत सुने हैं; 'मरवान मदीना मा अपने शासनकाल मा कहिन कि अपने गुप्तांग का हाथ से पकड़ के वजू करै का चाही। हम इनकार किहेन अऊर हम कहेन, 'इका छुवै वालेन के लिए वजू नाहीं है! ' तब [मरवान] ने कहा, ['बुसराह बिन शफवान] ने मुझसे कहा कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुने हैं, 'तुमका अपने जननांगन का छूवै के लिए वजू जरूर करै का चाही'। उरवाह कहिन, 'लेकिन तब तक हम मरवान से तब तक बहस किहेन जब तक कि उ आपन अंगरक्षक का नाहीं बोलाइन। उ बुसराह का भेजिन कि उ मरवान का का रिपोर्ट किहिन रहैं, यहिके बारे मा पूछैं। फिर बुसराह वही रिपोर्ट किहिन जवन मारवान मोहि रिपोर्ट किहिन रहैं।'

Hadith

Imam Nasa'i : 165

أَخْبَرَنَا هَنَّادٌ عَنْ مُلَازِمٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَدْرٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ طَلْقِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ أَبِيهِ قَالَخَرَجْنَا وَفْدًا حَتَّى قَدِمْنَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَبَايَعْنَاهُ وَصَلَّيْنَا مَعَهُ فَلَمَّا قَضَى الصَّلَاةَ جَاءَ رَجُلٌ كَأَنَّهُ بَدَوِيٌّ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا تَرَى فِي رَجُلٍ مَسَّ ذَكَرَهُ فِي الصَّلَاةِ قَالَ وَهَلْ هُوَ إِلَّا مُضْغَةٌ مِنْكَ أَوْ بَضْعَةٌ مِنْكَ

हमका [हन्नाद] [मुलाजिम] से रिपोर्ट कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला बिन बदर] [कैस बिन थलक बिन अली] से [अपने पिता] से कहिन है, उ कहिन; 'हम बाहर निकले - अपने इलाके से - जब तक हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास नहीं पहुँच गए। तब हम उनके साथ निष्ठा लिहेन अऊर उनके साथ प्रार्थना किहिन। नमाज खतम करै के बाद एक बेदूइन जइसन दिखै वाला मनई आवा, ऊ कहिस, 'हे रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, नमाज पढ़त समय अपने जननांगन का छूवै वाले लोगन के बारे मा का सोचत हौ? ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया, ' का ई खाली तोहरे मांस का हिस्सा नाहीं है? '

Hadith

Imam Nasa'i : 166

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَكَمِ عَنْ شُعَيْبٍ عَنْ اللَّيْثِ قَالَ أَنْبَأَنَا ابْنُ الْهَادِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ الْقَاسِمِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْإِنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيُصَلِّي وَإِنِّي لَمُعْتَرِضَةٌ بَيْنَ يَدَيْهِ اعْتِرَاضَ الْجَنَازَةِ حَتَّى إِذَا أَرَادَ أَنْ يُوتِرَ مَسَّنِي بِرِجْلِهِ

हमका [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन अल हकाम] से [स्यू'एब] से [लैथ] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; हमका [इब्न हद] से [अब्दुर्रहमान बिन कासिम] से [अल कासिम] से [ऐसिया] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; 'अगर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज पढ़िन अऊर मैं उनके सामने लाश के तरह लेट गइन, जब उ वितर नमाज पढ़ै चाहत रहें, तौ उ हमका अपने गोड़न से छू लिहिन'।

Hadith

Imam Nasa'i : 167

أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ قَالَ سَمِعْتُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ يُحَدِّثُ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْلَقَدْ رَأَيْتُمُونِي مُعْتَرِضَةً بَيْنَ يَدَيْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَسْجُدَ غَمَزَ رِجْلِي فَضَمَمْتُهَا إِلَيَّ ثُمَّ يَسْجُدُ

हमका [याकूब बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [यह्या] से [उबैदुल्लाह] से संबंधित है कहिन; हम [अल कासिम बिन मुहम्मद] का कहत सुने रहेन; [आइशा] से उ कहिन; 'तुमका पहिले से पता है कि मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के सामने झूठ बोलत रहौं भले ही रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम नमाज पढ़त रहें। जब ऊ सजदा करै चाहत रहा तौ मोर गोड़ छुवाइस, फिर मैं आपन गोड़ खींच लिहेव, तब ऊ सजदा करिस।'

Hadith

Imam Nasa'i : 168

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ عَنْ مَالِكٍ عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكُنْتُ أَنَامُ بَيْنَ يَدَيْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرِجْلَايَ فِي قِبْلَتِهِ فَإِذَا سَجَدَ غَمَزَنِي فَقَبَضْتُ رِجْلَيَّ فَإِذَا قَامَ بَسَطْتُهُمَا وَالْبُيُوتُ يَوْمِئِذٍ لَيْسَ فِيهَا مَصَابِيحُ

हमका [कुतैबा] से [मलिक] से [अबू नदर] से [अबू सलामा] से [आइशा] से रिपोर्ट करै के बाद उ कहिन; 'मैं एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने सोया रहा अऊर मोर गोड़ उनके किबला मा रहे। जब उ सजदा किहिन तौ उ मोर गोड़न का छुइन अऊर जब उ खड़ा भए तौ हम आपन गोड़न का फिर से फैलायेन, फिर हम आपन गोड़न का वापस लइ लिहेन, अऊर उ समय ओनमा कौनो रोशनी नाहीं रही।'

Hadith

Imam Nasa'i : 169

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ وَنُصَيْرُ بْنُ الْفَرَجِ وَاللَّفْظُ لَهُ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْفَقَدْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ لَيْلَةٍ فَجَعَلْتُ أَطْلُبُهُ بِيَدِي فَوَقَعَتْ يَدِي عَلَى قَدَمَيْهِ وَهُمَا مَنْصُوبَتَانِ وَهُوَ سَاجِدٌ يَقُولُ أَعُوذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَتِكَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْكَ لَا أُحْصِي ثَنَاءً عَلَيْكَ أَنْتَ كَمَا أَثْنَيْتَ عَلَى نَفْسِكَ

हमका [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन अल मुबारक] अऊर [नुशैर बिन अल फराज] अऊर उनसे ई लफाज़ के रिपोर्ट किहिन हैं, दुइनौ जने कहिन; हमका [अबू उसामा] [उबैदुल्लाह बिन उमर] से [मुहम्मद बिन यह्या बिन हब्बाद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] से [ऐस्या] से कहिन है, उ कहिन; 'एक रात हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का खो दिहिन अऊर हम ओनका दुइनौ हाथन से खोजेन। फिर मोर हाथ उनके दुइनौ गोड़न का छुए जवन सीधे खड़ा रहे, जब उ सिजदा के स्थिति मा रहे। उ कहिन -प्रार्थना-, 'मैं तोहरे क्रोध से तोहरे प्रसन्नता के शरण लेत हउँ अऊर तोहरे यातना से तोहरे क्षमा के शरण लेत हउँ, अऊर तोहरे से तोहरे शरण लेत हउँ। मैं तोहार स्तुति नाहीं गिन सकत जइसे तू खुद के स्तुति करत हौ''।

Hadith

Imam Nasa'i : 170

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو رَوْقٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُقَبِّلُ بَعْضَ أَزْوَاجِهِ ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُقَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ لَيْسَ فِي هَذَا الْبَابِ حَدِيثٌ أَحْسَنُ مِنْ هَذَا الْحَدِيثِ وَإِنْ كَانَ مُرْسَلًا وَقَدْ رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ الْأَعْمَشُ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَ يَحْيَى الْقَطَّانُ حَدِيثُ حَبِيبٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ هَذَا وَحَدِيثُ حَبِيبٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ تُصَلِّ وَإِنْ قَطَرَ الدَّمُ عَلَى الْحَصِيرِ لَا شَيْءَ

हमका [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] [यह्या बिन सईद] से [सुफयान] से रिपोर्ट करै के बाद उ कहिन; [ऐस्याह] से [इब्राहिम अत-ताइमी] से मोका [अबू रौक] से ई सूचना मिली है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम एक बार अपनी कुछ पत्नियन का चुम लिहिन, फिर फिर से बिना वजू किहे नमाज पढ़िन। अबू अब्दुर्रहमान कहिन; यहि अध्याय मा कौनो हदीस नाहीं है जवन यहि हदीस से बढ़िया होय, भले ही ई हदीस मुरसल होय। ई हदीस [अल अमासी] द्वारा [हबीब बिन अबू थाबित] से [उर्वाह] से [ऐस्या] से सुनाई गै है। याह्या अल कथान ने कहा; 'यह हबीब से हदीस है, उरवाह से ऐसिया से है।

Hadith

Imam Nasa'i : 171

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا إِسْمَعِيلُ وَعَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَا حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قَارِظٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ تَوَضَّئُوا مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका ई बतावा गा है कि [इस्माइल] अऊर [अब्दुर्राज़क] दुइनौ कहिन; हमका [ममर] से [अज़-जुहरी] से [उमर बिन अब्दुल अजीज] से [इब्राहिम बिन अब्दुल्ला बिन कारिज़] से [अबू हुरैरा] से कहिन है; 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'तुमका कुछ अइसन चीज खाए के लिए वजू लेवे का चाही जेका छूवा गा होय - आग से पकावा गा होय''।

Hadith

Imam Nasa'i : 172

أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ يَعْنِي ابْنَ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنِي الزُّبَيْدِيُّ عَنْ الزُّهْرِيِّ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ قَارِظٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ تَوَضَّئُوا مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका [हिस्याम बिन अब्दुल मलिक] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [मुहम्मद अर्थात् इब्न हरब] कहिन; [अज-जुबैदी] से [अज़-जुहरी] से कहिन है कि [उमर बिन अब्दुल अजीज] ने उनसे कहा है कि [अब्दुल्ला बिन कारिज़] ने उनसे कहा है कि [अबू हुरैरा] ने कहा है; 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'तुमका -भोजन - कुछौ - छूवा - आग से - पकाया - से वजू लेवे का चाही''।

Hadith

Imam Nasa'i : 173

أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ بَكْرٍ وَهُوَ ابْنُ مُضَرَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ بَكْرِ بْنِ سَوَادَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ قَارِظٍ قَالَرَأَيْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَتَوَضَّأُ عَلَى ظَهْرِ الْمَسْجِدِ فَقَالَ أَكَلْتُ أَثْوَارَ أَقِطٍ فَتَوَضَّأْتُ مِنْهَا إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُ بِالْوُضُوءِ مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका [अर-रबी' बिन सुलेमान] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [इशाक बिन बकर, अर्थात् इब्न मुदलर] कहिन हैं, उ कहिन; मोका [मेरे पिता] से [जफर बिन रबिया] से [बकर बिन सवदा] से [मुहम्मद बिन मुस्लिम] से [उमर बिन अब्दुल अजीज] से [अब्दुल्ला बिन इब्राहिम बिन कारिज़] से कहिन है; 'मैं [अबू हुरैराह] का मस्जिद के पीछे वजू करत देखेन, फिर उ कहिन, 'मैंने गोमांस का एक टुकड़ा खावा अऊर फिर वहिके लिए वजू लिया, मैंने सुना कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम -कुछ पका खाए के लिए- आग से वजू लेवे का आदेश दिहिन''।

Hadith

Imam Nasa'i : 174

أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَىَ بْنُ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو الْأَوْزَاعِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ الْمُطَّلِبَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَنْطَبٍ يَقُولُقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ أَتَوَضَّأُ مِنْ طَعَامٍ أَجِدُهُ فِي كِتَابِ اللَّهِ حَلَالًا لِأَنَّ النَّارَ مَسَّتْهُ فَجَمَعَ أَبُو هُرَيْرَةَ حَصًى فَقَالَ أَشْهَدُ عَدَدَ هَذَا الْحَصَى أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَوَضَّئُوا مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका [इब्राहिम बिन याकूब] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दु शमाद बिन अब्दुल वारिट्स] कहिन; हमसे [मेरे पिता] से [हुसैन अल मुअल्लिम] कहिन हैं; [यह्या बिन अबू कथिर] ने [अब्दुर्रहमान बिन अमर अल औजाई] से मुझसे कहा कि उ [अल मुथलिब बिन अब्दुल्ला बिन हंथब] का कहते सुने; इब्न अब्बास ने कहा: 'का मोका हलाल भोजन -खाए- के लिए वजू लेवे का परी, जेका हम कुरान मा पाए रहेन काहे से कि उ आग से छूवा गा रहा?' तब [अबू हुरैरा] ने एक कंकड़ लिया अऊर कहा, 'मैं इन कंकड़न के बराबर गवाही देत ​​हउँ, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आपका आग से पकाया भोजन खाए के लिए वजू लेवे का चाही''।

Hadith

Imam Nasa'i : 175

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ جَعْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرٍو عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَوَضَّئُوا مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका बतावा गा है [मुहम्मद बिन बस्यार] कहिन; हमसे [इब्न अबू आदी] से [स्युअबाह] से [अमर बिन दीनार] से [यह्या बिन जादा] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से [अबू हुरैराह] से कहिन है कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'तुमका आग से पकाए गए चीजन का खाए के लिए वजू लेवे का चाही -'।

Hadith

Imam Nasa'i : 176

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَا أَنْبَأَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ جَعْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ مُحَمَّدٌ الْقَارِيُّ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّئُوا مِمَّا غَيَّرَتْ النَّارُ

हमका ई बतावा गा है कि [अमर बिन अली] अऊर [मुहम्मद बिन बसियार] दुइनौ कहिन; हमका [इब्न अबू आदी] से [स्यू'बाह] से [अमर बिन दीनार] से [यह्या बिन ज'दाह] से [अब्दुल्ला बिन अमरू] से रिपोर्ट किहिन हैं। [मुहम्मद अल कारी] कहिन; [अबू अय्यूब] से उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कुछ ऐसा खाने के लिए जला करौ जेका बदला गा है - पकाया गा है, आग से संसाधित कीन गा है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 177

أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ وَهَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا حَدَّثَنَا حَرَمِيٌّ وَهُوَ ابْنُ عُمَارَةَ بْنِ أَبِي حَفْصَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ قَالَ سَمِعْتُ يَحْيَى بْنَ جَعْدَةَ يُحَدِّثُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو الْقَارِيِّ عَنْ أَبِي طَلْحَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَوَضَّئُوا مِمَّا غَيَّرَتْ النَّارُ

हमका ई बतावा गा है कि [उबैदुल्लाह बिन सैद] अऊर [हारून बिन अब्दुल्लाह] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [हरामी यानी इब्न उमरह बिन अबू हफशाह] उ कहिन; हमका [स्यू'बाह] से [अम्र बिन दीनार] कहिन; 'मैंने [यह्या बिन जादह] का कहते सुना है; [अब्दुल्लाह बिन अम्र अल कारी] से [अबू तल्हा] से कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुमका कुछ अइसन चीज खाए के लिए वजू लेवे का चाही जेका बदला गा है - पकाया गा है, आग से संसाधित कीन गा है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 178

أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا حَرَمِيُّ بْنُ عُمَارَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَفْصٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ ابْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَبِي طَلْحَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَوَضَّئُوا مِمَّا أَنْضَجَتْ النَّارُ

हमका [हारून बिन अब्दुल्ला] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [हरामी बिन उमराह] बताइस है, उ कहिन; हमका [स्यु'बाह] से [अबू बकर बिन हफश] से [इब्न शिहाब] से [इब्न अबू तल्हा] से [अबू तल्हा] से बतावा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'आपका आग से भुना हुआ कुछ खाए के लिए वजू लेवे का चाही'।

Hadith

Imam Nasa'i : 179

أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا الزُّبَيْدِيُّ قَالَ أَخْبَرَنِي الزُّهْرِيُّ أَنَّ عَبْدَ الْمَلِكِ بْنَ أَبِي بَكْرٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ خَارِجَةَ بْنَ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ تَوَضَّئُوا مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका [हिस्याम बिन अब्दुल मलिक] सूचित कइके उ कहिन; हमका बताइस है [मुहम्मद] कहिन; हमसे कहिन है [अज़-जुबैदी] कहिन; ई मोका [अज़-जुहरी] से सूचित कीन गा है कि [अब्दुल मलिक बिन अबू बकर] ने ओनका सूचित किहिन है कि [खरीजा बिन जैद बिन थाबित] ओनका रिपोर्ट किहिन हैं, कि [जैद बिन थाबित] कहिन: 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'कुछ खाना खाए के लिए वजू करौ, जेका छूवा गा है, आग''।

Hadith

Imam Nasa'i : 180

أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا الزُّبَيْدِيُّ عَنْ الزُّهْرِيِّ أَنَّ أَبَا سَلَمَةَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَخْبَرَهُ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ الْأَخْنَسِ بْنِ شَرِيقٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى أُمِّ حَبِيبَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهِيَ خَالَتُهُ فَسَقَتْهُ سَوِيقًا ثُمَّ قَالَتْ لَهُ تَوَضَّأْ يَا ابْنَ أُخْتِي فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَوَضَّئُوا مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ

हमका [हिस्याम बिन अब्दुल मलिक] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [इब्न हरब] कहिन; हमका [अज़-जुबैदी] [अज-जुहरी] से बताइन है कि [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान] ने [अबू सुफयान बिन सईद बिन अल-अखनास बिन स्यारिक] से बतावा है, कि उ [उम्मू हबीबाह] से मिले रहे - रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैही वसल्लम के पत्नी अऊर उ उनकर महतारी रहीं - तब म आटा -, फिर ओसे कहिन, 'भतीजा, वजू करौ, काहे से कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'आग से भुनी हुई चीज से वजू करौ''।