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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
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Imam Nasa'i (الامام النسائي) - 5662 हदीस

हदीस

Imam Nasa'i : 121

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ وَهُوَ ابْنُ جَعْفَرٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ أَنَّهُ لَا بَأْسَ بِهِ

हमनी के रिपोर्ट देके [कुतैबा] कहले कि; हमनी के [इस्माइल] - यानी इब्न जाफर - [अबू अन नदली] से [मूसा बिन उकबाह] से, [सअद बिन अबी वक्काश] से [अबू सलामाह] से, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम से, - दुनो जूता पोंछे के बारे में बतवले बाड़े - ठीक बा।

हदीस

Imam Nasa'i : 122

أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ قَالَ حَدَّثَنَا عِيسَى عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ مُسْلِمٍ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَخَرَجَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِحَاجَتِهِ فَلَمَّا رَجَعَ تَلَقَّيْتُهُ بِإِدَاوَةٍ فَصَبَبْتُ عَلَيْهِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثُمَّ ذَهَبَ لِيَغْسِلَ ذِرَاعَيْهِ فَضَاقَتْ بِهِ الْجُبَّةُ فَأَخْرَجَهُمَا مِنْ أَسْفَلِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَهُمَا وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ صَلَّى بِنَا

हमनी के [अली बिन खसीराम] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के [ईसा] से [अल अ'मासी] से [मुस्लिम] से [मसरुक] से [मुगीरा बिन स्यूबाह] से बतवले बाड़े, उ कहले; 'रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना के राहत देवे खातिर निकलले, अवुरी जब उ लवटले त हम उनुका से मिलनी, अवुरी हम लोटा लेके चलत रहनी, एहसे हम उनुका खाती पानी डाल देनी। एकरा बाद उ हाथ धो के चेहरा धो लेले, फेर बांह धो लेले, लेकिन पट्टी बहुत संकरी रहे, एहसे उ पट्टी के नीचे से आपन बांह निकाल लेले, फेर दुनो के धो देले अवुरी दुनो जूता पोंछले, ओकरा बाद हमनी के संगे प्रार्थना कईले।'

हदीस

Imam Nasa'i : 123

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ يَحْيَى عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الْمُغِيرَةِ عَنْ أَبِيهِ الْمُغِيرَةِعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ خَرَجَ لِحَاجَتِهِ فَاتَّبَعَهُ الْمُغِيرَةُ بِإِدَاوَةٍ فِيهَا مَاءٌ فَصَبَّ عَلَيْهِ حَتَّى فَرَغَ مِنْ حَاجَتِهِ فَتَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ

हमनी के जानकारी देके [कुतैबा बिन सैद] कहले कि; हमनी के [अल लैत्स बिन सअद] [याह्या] से [सअद बिन इब्राहिम] से, [नफी’ बिन जुबैर] से [उर्वाह बिन मुगिराह] से [मुघीरा बिन स्यूबाह] से, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े। कि ऊ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर अपना के राहत देबे खातिर निकलल रहले, एहसे मुगीरा बिन स्यूबाह पानी के लोटा लेके उनका पीछे चल गइलन. फेर ऊ ओकरा पर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब तक डाल दिहलन जबले ऊ आपन मिशन पूरा ना कर लिहलन. फेर वज़ूद क के आपन दू गो खुफ - आपन जूता - पोंछले।

हदीस

Imam Nasa'i : 124

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ سَمِعْتُ إِسْمَعِيلَ بْنَ مُحَمَّدِ بْنِ سَعْدٍ قَالَ سَمِعْتُ حَمْزَةَ بْنَ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ قَالَكُنْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ فَقَالَ تَخَلَّفْ يَا مُغِيرَةُ وَامْضُوا أَيُّهَا النَّاسُ فَتَخَلَّفْتُ وَمَعِي إِدَاوَةٌ مِنْ مَاءٍ وَمَضَى النَّاسُ فَذَهَبَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِحَاجَتِهِ فَلَمَّا رَجَعَ ذَهَبْتُ أَصُبُّ عَلَيْهِ وَعَلَيْهِ جُبَّةٌ رُومِيَّةٌ ضَيِّقَةُ الْكُمَّيْنِ فَأَرَادَ أَنْ يُخْرِجَ يَدَهُ مِنْهَا فَضَاقَتْ عَلَيْهِ فَأَخْرَجَ يَدَهُ مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ

हमनी के [मुहम्मद बिन मंसूर] के रिपोर्ट मिलल बा; हमनी के बतवले बाड़े [सुफयान] कहले बाड़े; हम [इस्माइल बिन मुहम्मद बिन साआद] के कहत सुनले बानी; हम सुनले बानी कि [हमजाह बिन अल मुगिराह बिन स्यूबाह] [उनकर पिता] से एगो कहानी सुनावत रहले कि; 'हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे एगो सफर पर रहनी। उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि हे मुगीरा, अभी बाद में! आ तू लोग, इंसान, चलत रहऽ'। हम धीमा हो गइनी आ हम लोटा पानी लेके अइनी, जबकि बाकी दोस्त लोग ओहिजा से गुजरत रहे। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना के राहत देवे गईले। उनकर बात खतम भइला के बाद हम उनका खातिर पानी डाले चल गइनी, जबकि ऊ रोमन बनावल चोगा पहिनले रहले जवना के आस्तीन संकरी रहे, ताकि ऊ आस्तीन से हाथ ना निकाल सके, एहसे ऊ अपना वस्त्र से निकाल लिहले. मुँह-हाथ धो के माथा रगड़ले, आ आपन दू गो खुफ - जूता - पोंछले।

हदीस

Imam Nasa'i : 125

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي قَيْسٍ عَنْ هُذَيْلِ بْنِ شُرَحْبِيلَ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَسَحَ عَلَى الْجَوْرَبَيْنِ وَالنَّعْلَيْنِقَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ مَا نَعْلَمُ أَحَدًا تَابَعَ أَبَا قَيْسٍ عَلَى هَذِهِ الرِّوَايَةِ وَالصَّحِيحُ عَنْ الْمُغِيرَةِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ

हमनी के [इशाक बिन इब्राहिम] हमनी के [वाकी’] बतवले बाड़े, हमनी के [सुफयान] के [अबू कैस] से [हुदजाइल बिन स्यूराहबिल] से [मुगीरा बिन स्यूबाह] से बतावल गईल बा, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुकर दु मोजा अवुरी उनुकर दु चप्पल पोंछ देले बाड़े। अब्दुररहमान कहले कि; 'हमनी के एह इतिहास के लेके अबू कैस के पीछे चले वाला केहु के नईखी जानत, अवुरी जवन बात सही बा उ अल मुगीरा से बा कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुकर दुनो खूफ - उनुकर जूता - पोंछ देले।'

हदीस

Imam Nasa'i : 126

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ عَسَّالٍ قَالَرَخَّصَ لَنَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا كُنَّا مُسَافِرِينَ أَنْ لَا نَنْزِعَ خِفَافَنَا ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ وَلَيَالِيَهُنَّ

हमनी के बतवले बाड़े [कुतैबा] उ कहले बाड़े, हमनी के [सुफयान] से ['अशिम] से [जिरर] से [शफवान बिन असल] से बतवले बाड़े, उ कहले; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के सफर करत घरी राहत देले रहले, तीन दिन तीन रात तक आपन खुफ -जूता- ना उतारे के'।

हदीस

Imam Nasa'i : 127

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الرُّهَاوِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَمَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ وَزُهَيْرٌ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ وَسُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ قَالَسَأَلْتُ صَفْوَانَ بْنَ عَسَّالٍ عَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُنَا إِذَا كُنَّا مُسَافِرِينَ أَنْ نَمْسَحَ عَلَى خِفَافِنَا وَلَا نَنْزِعَهَا ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ مِنْ غَائِطٍ وَبَوْلٍ وَنَوْمٍ إِلَّا مِنْ جَنَابَةٍ

हमनी के [अहमद बिन सुलेमान अर रुहावी] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन आदम] कहले बाड़े; हमनी के [सुफयान बिन अतस त्साऊरी], [मलिक बिन मिघवाल], [जुहैर], आ [अबू बकर बिन अय्यासी] के भी [सुफयान बिन उयैनह] ['अशिम] से, [जिरर] से, बतवले बाड़न, उ कहले बाड़न; 'हम [शफवान बिन असल] से दुनो जूता पोंछे के बारे में पूछनी, उ जवाब देले कि, 'जब हमनी के कवनो यात्रा प रहनी, त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के जूता पोंछे के आदेश देले रहले, अवुरी शौच चाहे पेशाब, चाहे सुते के चलते तीन दिन तक जूता ना उतारब, सिवाय जुनुब के'।

हदीस

Imam Nasa'i : 128

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَنْبَأَنَا الثَّوْرِيُّ عَنْ عَمْرِو بْنِ قَيْسٍ الْمُلَائِيِّ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ عُتَيْبَةَ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُخَيْمِرَةَ عَنْ شُرَيْحِ بْنِ هَانِئٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلْمُسَافِرِ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ وَلَيَالِيَهُنَّ وَيَوْمًا وَلَيْلَةً لِلْمُقِيمِ يَعْنِي فِي الْمَسْحِ

हमनी के [इशहाक बिन इब्राहिम] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के [अब्दु रजाक] के रिपोर्ट कईले बाड़े उ कहले कि; हमनी के [अतस त्साऊरी] के रिपोर्ट कइले बाड़न [अमरू बिन कैस अल मुलाई] से [अल हकम बिन उतैबा] से [अल कासिम बिन मुखैमी रदलियाहुअनहा] से [सियूरैह बिन हानी’] से [अली] रदलियाल्लाहुअनहु से उ कहले बाड़न कि ' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि के मुसाफिर खातिर तीन दिन तीन रात आ एक दिन तय कइले रहले आ एक रात बटोही खातिर। बसल -बसावल- -अर्थात जूता पोंछे के मामला में-।

हदीस

Imam Nasa'i : 129

أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُخَيْمِرَةَ عَنْ شُرَيْحِ بْنِ هَانِئٍ قَالَسَأَلْتُ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا عَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَقَالَتْ ائْتِ عَلِيًّا فَإِنَّهُ أَعْلَمُ بِذَلِكَ مِنِّي فَأَتَيْتُ عَلِيًّا فَسَأَلْتُهُ عَنْ الْمَسْحِ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُنَا أَنْ يَمْسَحَ الْمُقِيمُ يَوْمًا وَلَيْلَةً وَالْمُسَافِرُ ثَلَاثًا

हमनी के [हन्नाद बिन अस सरीयी] के [अबू मुअवियाह] से [अल अ'मासी] से [अल हकाम] से [अल कासिम बिन मुखैमी रदलियाहुअनहा] से [स्यूरैह बिन हानी'] से रिपोर्ट कईले बाड़े, उ कहले कि; 'हम ऐश्याह रदलियाल्लाहुअनहा से दुनो जूता पोंछे के बारे में पूछले रहनी? तब उ जवाब दिहले, 'अली के लगे आ जा, काहे कि उनुका एकरा बारे में हमरा से जादे जानकारी बा'। तब हम [अली] के लगे एकरा बारे में पूछे आईल रहनी। उ जवाब देले कि, 'पहिले में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के आदेश देले रहले कि उहाँ रहेवाला लोग के एक दिन अवुरी रात अवुरी तीन दिन तीन रात के यात्रा करेवाला लोग खाती जूता पोंछवावे के चाही'।

हदीस

Imam Nasa'i : 130

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ يَزِيدَ قَالَ حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَيْسَرَةَ قَالَ سَمِعْتُ النَّزَّالَ بْنَ سَبْرَةَ قَالَرَأَيْتُ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ صَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ قَعَدَ لِحَوَائِجِ النَّاسِ فَلَمَّا حَضَرَتْ الْعَصْرُ أُتِيَ بِتَوْرٍ مِنْ مَاءٍ فَأَخَذَ مِنْهُ كَفًّا فَمَسَحَ بِهِ وَجْهَهُ وَذِرَاعَيْهِ وَرَأْسَهُ وَرِجْلَيْهِ ثُمَّ أَخَذَ فَضْلَهُ فَشَرِبَ قَائِمًا وَقَالَ إِنَّ نَاسًا يَكْرَهُونَ هَذَا وَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَفْعَلُهُ وَهَذَا وُضُوءُ مَنْ لَمْ يُحْدِثْ

हमनी के [‘अमरू बिन यजीद] के रिपोर्ट देके उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [बहजू बिन असद] कहले बाड़े; हमनी के [स्यूबाह] से [अब्दुल मलिक बिन मैसा रदलियाल्लाहुअनहा] से बतवले बाड़े कहले बाड़े; 'हम [अन नज्जल बिन सबराह] के कहत सुनले बानी: 'हम [अली] रदलियाल्लाहुअनहु के दुपहरिया के नमाज पढ़त देखनी।' फेर दोसरा के जरूरत खातिर बइठ गइलन. जब असर के समय आइल त उनका लगे लोटा पानी ले आवल गइल, त ऊ ओकरा के हाथ के हथेली में लेके आपन चेहरा, बाँहि, माथा आ गोड़ पोछ दिहलन। फेरु बाकी के लेके खड़ा होके पी लिहले। ओकरा बाद उ कहले कि इंसान के अयीसन पसंद नईखे! भले ही हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इ काम करत देखले रहनी, अवुरी इहे तरीका बा, जवन लोग वज़ूद रद्द नईखन कईले।'

हदीस

Imam Nasa'i : 131

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ عَامِرٍ عَنْ أَنَسٍأَنَّهُ ذَكَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِإِنَاءٍ صَغِيرٍ فَتَوَضَّأَ قُلْتُ أَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَنْتُمْ قَالَ كُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ مَا لَمْ نُحْدِثْ قَالَ وَقَدْ كُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ

[मुहम्मद बिन अब्दुल अ'ला] हमनी के सूचित कईले बाड़े कि उ कहले बाड़े; [खालिद] हमनी के बतवले बाड़े कि [स्यूबाह] हमनी के [अमर बिन अमीर] से [अनस] से बतवले बाड़े कि रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के वजूद खाती एगो छोट बर्तन ले आवल गईल रहे। हम पूछनी कि का रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हर नमाज खातिर वजूद कईले रहले? ऊ कहले, 'हँ'। ऊ पूछले, 'रउरा का हाल बा?' उ कहले कि, हमनी के कई गो नमाज तब तक करेनी, जब तक कि उ टूटल ना होखे।' उ कहले कि हमनी के एक वज़ूद में कई गो नमाज करत रहनी।

हदीस

Imam Nasa'i : 132

أَخْبَرَنَا زِيَادُ بْنُ أَيَّوبَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ مِنْ الْخَلَاءِ فَقُرِّبَ إِلَيْهِ طَعَامٌ فَقَالُوا أَلَا نَأْتِيكَ بِوَضُوءٍ فَقَالَ إِنَّمَا أُمِرْتُ بِالْوُضُوءِ إِذَا قُمْتُ إِلَى الصَّلَاةِ

हमनी के [जियाद बिन अय्यूब] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [इब्न उलय्याह] कहले बाड़े; हमनी के [अय्यूब] के [इब्न अबू अवालकाह] से [इब्न अब्बास] से बतावल गईल बा, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शौचालय से बाहर निकलले अवुरी उनुका के खाना परोसल गईल। तब लोग कहलस; 'का हम तोहरा खातिर वज़ूद के पानी ले आईं?' उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देले कि, 'हमरा के तबे वज़ूद करे के आदेश दिहल गईल जब हम नमाज कईल चाहत रहनी'।

हदीस

Imam Nasa'i : 133

أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنَا عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ فَلَمَّا كَانَ يَوْمُ الْفَتْحِ صَلَّى الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ فَعَلْتَ شَيْئًا لَمْ تَكُنْ تَفْعَلُهُ قَالَ عَمْدًا فَعَلْتُهُ يَا عُمَرُ

हमनी के [उबैदिल्लाह बिन सईद] के रिपोर्ट कईला के बाद उ कहले कि; बता देले बा [याह्या] से [सुफयान] कहले बा; हमनी के [अलकमाह बिन मरसाद] [इब्न बुराइदा] से बतवले बाड़े, [अपना पिता] से उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा नमाज करे के चाहत रहले त वज़ूद करत रहले, लेकिन मक्का शहर के फतह के बाद उ एक वज़ूज़ से कई गो नमाज कईले। तब उमर पूछले कि रउरा अइसन काम कइनी जवन पहिले आमतौर पर ना करत रहीं? उ जवाब देले कि हम जानबूझ के कईले बानी ए उमर!

हदीस

Imam Nasa'i : 134

أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا تَوَضَّأَ أَخَذَ حَفْنَةً مِنْ مَاءٍ فَقَالَ بِهَا هَكَذَا وَوَصَفَ شُعْبَةُ نَضَحَ بِهِ فَرْجَهُفَذَكَرْتُهُ لِإِبْرَاهِيمَ فَأَعْجَبَهُ قَالَ الشَّيْخُ ابْنُ السُّنِّيِّ الْحَكَمُ هُوَ ابْنُ سُفْيَانَ الثَّقَفِيُّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ

हमनी के [इस्माइल बिन मसूद] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के [खालिद बिन अल हरिथ] से [स्यूबाह] से [मंसूर] से [मुजाहिद] से [अल हकम] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े, जब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वज़ूद कईले रहले, त उ दुनो हथेली के बराबर पानी ले लेले रहले, फिर स्यूबाह -कथाकार- कहले कि उ अपना जननांग प पानी छिड़कले रहले। फेर इ बात इब्राहिम तक पहुंचावल गईल अवुरी उ एकर तारीफ कईले। शेख इब्न सुन्नी अल हकम कहले कि; 'उ इब्न सुफियन अतस त्साकोफी रदलियाल्लाहुअनहु हवें।'

हदीस

Imam Nasa'i : 135

أَخْبَرَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ مُحَمَّدٍ الدُّورِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَحْوَصُ بْنُ جَوَّابٍ حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ رُزَيْقٍ عَنْ مَنْصُورٍ ح وَأَنْبَأَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا قَاسِمٌ وَهُوَ ابْنُ يَزِيدَ الْجَرْمِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا مَنْصُورٌ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ سُفْيَانَ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ وَنَضَحَ فَرْجَهُ قَالَ أَحْمَدُ فَنَضَحَ فَرْجَهُ

हमनी के [अल अब्बास बिन मुहम्मद अद दुरी] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [अल अहवाश बिन जवाब] हमनी के [अम्मर बिन रुजैक] [मंसूर] से बतवले बाड़े। एगो अउरी कथात्मक पंक्ति में एकर जिक्र बा; आ हमनी के रिपोर्ट कइले बा [अहमद बिन हर्ब] कहले बाड़न; हमनी के बतवले बाड़े [कासिम अर्थात इब्न यजीद अल जरमी] कहले बाड़े; हमनी के [सुफयान] बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हमनी के [मंसूर] [मुजाहिद] से [अल हकम बिन सुफियन] से बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े कि, 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद करत देखनी अवुरी उनुका निजी अंग प पानी छिड़कत रहले'। अहमद संपादकीय रूप से कहले कि, 'त उ अपना निजी अंग प पानी छिड़क देले'।

हदीस

Imam Nasa'i : 136

أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ سُلَيْمَانُ بْنُ سَيْفٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَتَّابٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي حَيَّةَ قَالَرَأَيْتُ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَوَضَّأَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَامَ فَشَرِبَ فَضْلَ وَضُوئِهِ وَقَالَ صَنَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا صَنَعْتُ

हमनी के [अबू दाउद सुलेमान बिन सैफ] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के रिवायत कइले बाड़न [अबू अत्ताब] कहले बाड़न; हमनी के [स्यूबाह] से [अबू इशाक] से [अबू हयाह] से बतवले बाड़े, उ कहले कि, 'हम देखनी कि [अली] रदलियाहुअनहु तीन बेर वज़ूद कईले, फिर खड़ा होके अपना वज़ूद से बचे वाला पानी पी लेले, अवुरी कहले; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कइले, जइसे हम अब कर रहल बानी'।

हदीस

Imam Nasa'i : 137

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ عَنْ عَونِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَشَهِدْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْبَطْحَاءِ وَأَخْرَجَ بِلَالٌ فَضْلَ وَضُوئِهِ فَابْتَدَرَهُ النَّاسُ فَنِلْتُ مِنْهُ شَيْئًا وَرَكَزْتُ لَهُ الْعَنَزَةَ فَصَلَّى بِالنَّاسِ وَالْحُمُرُ وَالْكِلَابُ وَالْمَرْأَةُ يَمُرُّونَ بَيْنَ يَدَيْهِ

[मुहम्मद बिन मंसूर] हमनी के [सुफयान] से रिपोर्ट कइले बाड़न जे कहले बाड़न कि; [मलिक बिन मिघवाल] हमनी के [अउन बिन अबू जुहैफा] से, [उनकर पिता] से, जवन कहले बाड़े कि, 'हम बथहा में रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के देखनी, फिर बिलाल रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के वज़ूज़ से बचे वाला पानी के निकाल देले, एहसे लोग एकरा प लड़ाई लड़ले अवुरी हम तनी-मनी चल गईनी।' के बा। फिर हम अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) खातिर एगो छोट भाला चिपका देनी। तब उ लोग के संगे प्रार्थना कईले, जबकि भाला के सोझा बहुत कुकुर, गदहा अवुरी मेहरारू गुजर गईले।'

हदीस

Imam Nasa'i : 138

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ الْمُنْكَدِرِ يَقُولُ سَمِعْتُ جَابِرًا يَقُولُمَرِضْتُ فَأَتَانِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو بَكْرٍ يَعُودَانِي فَوَجَدَانِي قَدْ أُغْمِيَ عَلَيَّ فَتَوَضَّأَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَصَبَّ عَلَيَّ وَضُوءَهُ

[सुफयान] से हमनी के [मुहम्मद बिन मंसूर] के जानकारी देके उ कहले कि; 'हम [इब्न अल मुनकादिर] के कहत सुनले बानी; 'हम [जाबीर] के कहत सुनले बानी; ' हम त बेमार बानी'। तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ अबू बकर हमरा से मिले अइले आ दुनु जने हमरा के बेहोश पावल, एहसे ऊ वजूद कर लिहलन आ उनुका वजूद से बचल पानी हमरा पर डाल दिहल गइल.'

हदीस

Imam Nasa'i : 139

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ صَلَاةً بِغَيْرِ طُهُورٍ وَلَا صَدَقَةً مِنْ غُلُولٍ

हमनी के [कुतैबाह] के रिपोर्ट देके उ कहले कि; हमनी के [अबू अवनाह] [कतादा] से [अबू अल मलिह] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, अल्लाह बिना शुद्धि के नमाज ना स्वीकार करेले, ना ही बांटे से पहिले गुप्त रूप से लिहल गईल युद्ध के लूट से दक्षिणा कबूल करेले।

हदीस

Imam Nasa'i : 140

أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ قَالَ حَدَّثَنَا يَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مُوسَى بْنِ أَبِي عَائِشَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَجَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْأَلُهُ عَنْ الْوُضُوءِ فَأَرَاهُ الْوُضُوءَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ هَكَذَا الْوُضُوءُ فَمَنْ زَادَ عَلَى هَذَا فَقَدْ أَسَاءَ وَتَعَدَّى وَظَلَمَ

हमनी के [महमूद बिन घैलन] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के बतवले बा [या'ला] कहले बा; हमनी के [सुफयान] से [मूसा बिन अबू ऐसियाह] से [अमरू बिन स्यूअइब] से [अपना पिता] से [उनकर दादा] से बतवले बाड़े कहले बाड़े; एगो बेदूईन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास वज़ूद के बारे में पूछे आइल रहले। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका के तीनों बेर - तीन बेर - वज़ूद करे के तरीका देखवले। तब उ कहले कि, 'अइसहीं वज़ूद कईल जाला'। जे एकरा से जादा जोड़ता, उ कुछ बुरा अवुरी जादे काम करता, अवुरी गलत काम करता''।