Imam Nasa'i : 121
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ وَهُوَ ابْنُ جَعْفَرٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ أَنَّهُ لَا بَأْسَ بِهِ
हमका रिपोर्ट कइके, [कुतैबा] उ कहिन; हमका [इस्माइल] - अर्थात् इब्न जाफर - [मूसा बिन उकबा] से [अबू अन नदलरी] से, [अबू सलामा] से [साद बिन अबी वक्काश] से, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, - दुइनौ जूता पोंछै के बारे मा - ई ठीक है।
Imam Nasa'i : 122
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ قَالَ حَدَّثَنَا عِيسَى عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ مُسْلِمٍ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَخَرَجَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِحَاجَتِهِ فَلَمَّا رَجَعَ تَلَقَّيْتُهُ بِإِدَاوَةٍ فَصَبَبْتُ عَلَيْهِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثُمَّ ذَهَبَ لِيَغْسِلَ ذِرَاعَيْهِ فَضَاقَتْ بِهِ الْجُبَّةُ فَأَخْرَجَهُمَا مِنْ أَسْفَلِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَهُمَا وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ صَلَّى بِنَا
हमका [अली बिन खसीराम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [ईसा] [अल अमासी] से [मुस्लिम] से [मसरूक] से [मुघिराह बिन स्यूबाह] से बताइस है, उ कहिन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद का राहत देय के लिए बाहर गें, अऊर लौटै के बाद हम उनसे मिलेन, अऊर हम एक बाल्टी लइके जात रहेन, यहिसे हम उनके लिए पानी डारि दिहेन। फिर उ आपन हाथ धोइस, आपन चेहरा धोइस, फिर आपन बांह धोइस, लेकिन पट्टी बहुत संकरी रही, यहिसे उ आपन बांह का पट्टी के नीचे से निकालिस, फिर उ दुइनौ का धोइस, अऊर आपन दुइनौ जूता पोंछिस, वहिके बाद उ हमरे साथे प्रार्थना किहिस।'
Imam Nasa'i : 123
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ يَحْيَى عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الْمُغِيرَةِ عَنْ أَبِيهِ الْمُغِيرَةِعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ خَرَجَ لِحَاجَتِهِ فَاتَّبَعَهُ الْمُغِيرَةُ بِإِدَاوَةٍ فِيهَا مَاءٌ فَصَبَّ عَلَيْهِ حَتَّى فَرَغَ مِنْ حَاجَتِهِ فَتَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ
हमका सूचित कइके, [कुतैबा बिन सैद] उ कहिन; हमका [अल लैट्स बिन साद] से [यह्या] से [साद बिन इब्राहिम] से, [नफी' बिन जुबैर] से ['उर्वाह बिन मुघिराह] से [मुघिराह बिन स्यूबाह] से, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताइस है। कि उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार खुद का राहत देय के लिए बाहर गें, तौ मुघिराह बिन स्यूबाह एक बाल्टी पानी लइके उनके पीछे चले गें। फिर उ आपन मिशन पूरा करै तक ओनके ऊपर डालिन। फिर वजू करिन औ अपने दुइ खूफ-अपने जूता- पोंछिन।
Imam Nasa'i : 124
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ سَمِعْتُ إِسْمَعِيلَ بْنَ مُحَمَّدِ بْنِ سَعْدٍ قَالَ سَمِعْتُ حَمْزَةَ بْنَ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ قَالَكُنْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ فَقَالَ تَخَلَّفْ يَا مُغِيرَةُ وَامْضُوا أَيُّهَا النَّاسُ فَتَخَلَّفْتُ وَمَعِي إِدَاوَةٌ مِنْ مَاءٍ وَمَضَى النَّاسُ فَذَهَبَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِحَاجَتِهِ فَلَمَّا رَجَعَ ذَهَبْتُ أَصُبُّ عَلَيْهِ وَعَلَيْهِ جُبَّةٌ رُومِيَّةٌ ضَيِّقَةُ الْكُمَّيْنِ فَأَرَادَ أَنْ يُخْرِجَ يَدَهُ مِنْهَا فَضَاقَتْ عَلَيْهِ فَأَخْرَجَ يَدَهُ مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَيَدَيْهِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ
हमका बतावा गा है [मुहम्मद बिन मंसूर] कहिन; हमसे कहिस है [सुफयान] कहिन; हम [इस्माइल बिन मुहम्मद बिन साद] का कहत सुने रहेन; हम [हमजाह बिन अल मुघिराह बिन स्यूबाह] का [अपने पिता] से एक कहानी सुनावत सुने रहेन; 'मैं एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ एक यात्रा पर रहा। उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'हे मुघिराह, बस बाद मा! अऊर तुम, मनुष्य, चलत रहौ'। हम धीमा होइ गयेन अऊर हम एक बाल्टी पानी लइ आयेन, जबकि बाकी दोस्त वहिके पास से गुजरत रहे। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद का राहत देय चले गें। जब उ खतम किहिन, तौ मैं उनके लिए पानी डारै गय रहौं, जब उ संकरी आस्तीन वाला रोमन-निर्मित बागा पहिनले रहे, जेहिसे उ आपन हाथ आस्तीन से बाहर न निकाल पावत रहे, यहिसे उ ओनका आपन बागा से निकार लिहिन। ऊ आपन मुँह अऊर हाथ धोइस, आपन माथा रगड़िस, अऊर आपन दुइ खूफ - आपन जूता - पोंछिस।
Imam Nasa'i : 125
أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي قَيْسٍ عَنْ هُذَيْلِ بْنِ شُرَحْبِيلَ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَسَحَ عَلَى الْجَوْرَبَيْنِ وَالنَّعْلَيْنِقَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ مَا نَعْلَمُ أَحَدًا تَابَعَ أَبَا قَيْسٍ عَلَى هَذِهِ الرِّوَايَةِ وَالصَّحِيحُ عَنْ الْمُغِيرَةِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَسَحَ عَلَى الْخُفَّيْنِ
हमका [इशाक बिन इब्राहिम] हमसे [वाकी] बताइन हैं, हमका [सुफयान] से [अबू कैस] से [हुदजैल बिन सुरहबिल] से [मुघिराह बिन स्यूबाह] से बतावा गा है, कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने दुइ मोजा अऊर अपने दुइ चप्पल पोंछिन। अब्दुर्रहमान कहिन; 'हमका ई इतिहास के बारे मा अबू कैस के अनुसरण करै वाले केहू के बारे मा पता नाहीं है, अऊर जवन सच है ऊ अल मुघिराह से है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अपने दुनौ खूफ - अपने जूते - पोंछ लिहिन।
Imam Nasa'i : 126
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ عَسَّالٍ قَالَرَخَّصَ لَنَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا كُنَّا مُسَافِرِينَ أَنْ لَا نَنْزِعَ خِفَافَنَا ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ وَلَيَالِيَهُنَّ
हमसे [कुतैबा] कहिन, उ कहिन, हमका [सुफयान] से [अशिम] से [जिर्र] से [शफवान बिन असल] से कहिन, उ कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका राहत दिहिन जब हम यात्रा करत रहेन, तीन दिन अऊर तीन रात तक आपन खूफ -जूता- न उतारब'।
Imam Nasa'i : 127
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الرُّهَاوِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَمَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ وَزُهَيْرٌ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ وَسُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ قَالَسَأَلْتُ صَفْوَانَ بْنَ عَسَّالٍ عَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُنَا إِذَا كُنَّا مُسَافِرِينَ أَنْ نَمْسَحَ عَلَى خِفَافِنَا وَلَا نَنْزِعَهَا ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ مِنْ غَائِطٍ وَبَوْلٍ وَنَوْمٍ إِلَّا مِنْ جَنَابَةٍ
हमका [अहमद बिन सुलेमान अर रुहावी] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [यह्या बिन आदम] कहिन; हमका [सुफयान बिन अत्स त्सौरी], [मलिक बिन मिघवाल], [जुहैर], अऊर [अबू बकर बिन अय्यासी] का [अशिम] से, [जिर्र] से [सुफयान बिन उयैना] का भी बताइन हैं, उ कहिन; 'मैंने [शफवान बिन असल] से दुइनौ जूता पोंछै के बारे मा पूछा, तौ उ जवाब दिहिन: 'जब हम यात्रा पै रहेन, तौ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका आपन जूता पोंछै का आदेश दिहिन, अऊर शौच या पेशाब, या सोवै के कारण तीन दिन तक ओनका न उतारै, सिवाय जुनब के'।
Imam Nasa'i : 128
أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَنْبَأَنَا الثَّوْرِيُّ عَنْ عَمْرِو بْنِ قَيْسٍ الْمُلَائِيِّ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ عُتَيْبَةَ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُخَيْمِرَةَ عَنْ شُرَيْحِ بْنِ هَانِئٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلْمُسَافِرِ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ وَلَيَالِيَهُنَّ وَيَوْمًا وَلَيْلَةً لِلْمُقِيمِ يَعْنِي فِي الْمَسْحِ
हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [अब्दु रजाक] रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; हमका [अत्स त्सौरी] से [अमरू बिन कैस अल मुलाई] से [अल हाकम बिन 'उतैबा] से [अल कासिम बिन मुखैमी रदलियाल्लाह अन्हा] से [स्युरैह बिन हानी'] से [अली] रदलियाहुअनहु] से रिपोर्ट किहिन है: 'रसूलुल्लाह सल्लाहुअलाह वल्लम तीन दिन अऊर तीन दिन के लिए वल्लम निर्धारित करत हैं यात्री अऊर निवासी के लिए एक दिन अऊर एक रात - गतिहीन- -अर्थात जूता पोंछै के मामले मा-।
Imam Nasa'i : 129
أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُخَيْمِرَةَ عَنْ شُرَيْحِ بْنِ هَانِئٍ قَالَسَأَلْتُ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا عَنْ الْمَسْحِ عَلَى الْخُفَّيْنِ فَقَالَتْ ائْتِ عَلِيًّا فَإِنَّهُ أَعْلَمُ بِذَلِكَ مِنِّي فَأَتَيْتُ عَلِيًّا فَسَأَلْتُهُ عَنْ الْمَسْحِ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُنَا أَنْ يَمْسَحَ الْمُقِيمُ يَوْمًا وَلَيْلَةً وَالْمُسَافِرُ ثَلَاثًا
हमका [हन्नाद बिन अस सरियाई] से [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अल हकाम] से [अल कासिम बिन मुखैमी रदलियाल्लाह अन्हा] से [स्युरैह बिन हानी] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; 'मैंने ऐसिया रदलियाल्लाह अन्हा से दुइनौ जूता पोंछै के बारे मा पूछा? फिर उ जवाब दिहिस, 'अली के पास आवा, काहे से कि उ हमसे ज्यादा जानत है'। फिर मैं [अली] के पास यहिके बारे मा पूछै के लिए आवा। उ जवाब दिहिन, 'अतीत मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हमका आदेश दिहिन रहैं कि वहिके रहय वाले लोगन का एक दिन अऊर रात अऊर तीन दिन अऊर तीन रात के यात्रा करै वालेन के जूता पोंछवावा जाय'।
Imam Nasa'i : 130
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ يَزِيدَ قَالَ حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَيْسَرَةَ قَالَ سَمِعْتُ النَّزَّالَ بْنَ سَبْرَةَ قَالَرَأَيْتُ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ صَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ قَعَدَ لِحَوَائِجِ النَّاسِ فَلَمَّا حَضَرَتْ الْعَصْرُ أُتِيَ بِتَوْرٍ مِنْ مَاءٍ فَأَخَذَ مِنْهُ كَفًّا فَمَسَحَ بِهِ وَجْهَهُ وَذِرَاعَيْهِ وَرَأْسَهُ وَرِجْلَيْهِ ثُمَّ أَخَذَ فَضْلَهُ فَشَرِبَ قَائِمًا وَقَالَ إِنَّ نَاسًا يَكْرَهُونَ هَذَا وَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَفْعَلُهُ وَهَذَا وُضُوءُ مَنْ لَمْ يُحْدِثْ
हमका [अमरू बिन यजीद] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [बहजू बिन असद] कहिन; हमका [स्यू'बाह] [अब्दुल मलिक बिन मैसा रदलियाल्लाह अन्हा] से बताइस है; 'मैंने [अन नज़ल बिन सबराह] का कहते सुना: 'मैंने [अली] रदलियाल्लाहुअन्हु को दोपहर के नमाज पढ़ते हुए देखा। फिर दूसरन के जरूरतन के लिए बइठ गें। असर का समय आवा तौ उनके लगे एक लोटा पानी लाय गा तौ हथेली मा लइके मुँह, बांह, माथा, गोड़ पोंछिन। फिर बाकी का लइके खड़ा होइके पिय लिहिन। यहिके बाद उई कहिन- 'इंसान का ई तरह पसंद नाहीं है! भले ही हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का ई करत देखेन, अऊर ई उन लोगन के लिए वजू लेवे का तरीका है जे ई रद्द नाहीं किहिन हैं'।
Imam Nasa'i : 131
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ عَامِرٍ عَنْ أَنَسٍأَنَّهُ ذَكَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِإِنَاءٍ صَغِيرٍ فَتَوَضَّأَ قُلْتُ أَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَنْتُمْ قَالَ كُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ مَا لَمْ نُحْدِثْ قَالَ وَقَدْ كُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ
हमका [मुहम्मद बिन अब्दुल अ'ला] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [खालिद] हमसे [स्यूबाह] [अमरू बिन अमीर] से [अनस] से कहिन है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का एक बार वजू के लिए एक छोटा बर्तन लाया गा रहा। हम पूछेन कि का रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर नमाज मा वजू करत रहें? ऊ जवाब दिहिस, 'हाँ'। ऊ पूछिस, 'तुम लोगन के बारे मा का?' उ जवाब दिहिन, 'हम कईयो नमाज पढ़ेन जब उ रद्द नाहीं भै'। उ कहिन, 'अतीत मा हम भी हमेशा एक वजू से कई नमाज पढ़त रहेन'।
Imam Nasa'i : 132
أَخْبَرَنَا زِيَادُ بْنُ أَيَّوبَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ مِنْ الْخَلَاءِ فَقُرِّبَ إِلَيْهِ طَعَامٌ فَقَالُوا أَلَا نَأْتِيكَ بِوَضُوءٍ فَقَالَ إِنَّمَا أُمِرْتُ بِالْوُضُوءِ إِذَا قُمْتُ إِلَى الصَّلَاةِ
हमका [जियाद बिन अय्यूब] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिस है [इब्न उलेयाह] कहिन; हमका [अय्यूब] [इब्न अबू अवलका] से [इब्न अब्बास] से बतावा गा है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम शौचालय से बाहर आए अऊर ओनका खाना परोसा गा। तब लोग कहिन; 'का हम तोहरे लिए वजू का पानी लइ आबै?' उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'मुझे तभी वजू लेने का आदेश मिला जब मैं नमाज पढ़ना चाहत रहा'।
Imam Nasa'i : 133
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنَا عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ فَلَمَّا كَانَ يَوْمُ الْفَتْحِ صَلَّى الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ فَعَلْتَ شَيْئًا لَمْ تَكُنْ تَفْعَلُهُ قَالَ عَمْدًا فَعَلْتُهُ يَا عُمَرُ
हमका ['उबैदिल्लाह बिन सैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [यह्या] से [सुफयान] कहिन; हमका ['अलकमाह बिन मरसाद] [इब्न बुरैदा] से बताइस है, [अपने पिता] से उ कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब नमाज पढ़ै का चाहत रहें तौ हमेशा वजू करत रहें, लेकिन मक्का शहर के जीत के बाद एक वजू से कई नमाज पढ़त रहें। तब उमर ने पूछा, 'तुमने कुछ ऐसा किया जो तुमने आमतौर पर पहले नहीं किया?' उ जवाब दिहिन, 'हम जानबूझ के किहेन, हे उमर!'
Imam Nasa'i : 134
أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا تَوَضَّأَ أَخَذَ حَفْنَةً مِنْ مَاءٍ فَقَالَ بِهَا هَكَذَا وَوَصَفَ شُعْبَةُ نَضَحَ بِهِ فَرْجَهُفَذَكَرْتُهُ لِإِبْرَاهِيمَ فَأَعْجَبَهُ قَالَ الشَّيْخُ ابْنُ السُّنِّيِّ الْحَكَمُ هُوَ ابْنُ سُفْيَانَ الثَّقَفِيُّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ
हमका [इस्माइल बिन मसूद] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [खालिद बिन अल हरिथ] से [स्यु'बाह] से [मंसूर] से [मुजाहिद] से [अल हकाम] से [अपने पिता] से कहिन है, जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वजू लिया, तो उ दुइनौ हथेलियन के बराबर पानी लिहिन, फिर स्यु'बाह -कथावाचक- कहिन कि उ आपन जननांगन पर पानी छिड़किन। फिर ई बात इब्राहिम तक पहुँचाई गै अऊर उ एकर प्रशंसा किहिन। शेख इब्न सुन्नी अल हकाम ने कहा; 'वह इब्न सुफियान अत्स त्साकोफी रदलियाल्लाहुअन्हु हैं
Imam Nasa'i : 135
أَخْبَرَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ مُحَمَّدٍ الدُّورِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَحْوَصُ بْنُ جَوَّابٍ حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ رُزَيْقٍ عَنْ مَنْصُورٍ ح وَأَنْبَأَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا قَاسِمٌ وَهُوَ ابْنُ يَزِيدَ الْجَرْمِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا مَنْصُورٌ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ سُفْيَانَ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ وَنَضَحَ فَرْجَهُ قَالَ أَحْمَدُ فَنَضَحَ فَرْجَهُ
हमका [अल अब्बास बिन मुहम्मद अद दूरी] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [अल अहवाह बिन जवाब] हमसे [अम्मर बिन रुजैक] [मंसूर] से कहिन हैं। एक अउर कथात्मक पंक्ति मा ई बतावा गा है; अऊर हमका रिपोर्ट किहिन है [अहमद बिन हरब] कहिन; हमसे कहिन है [कासिम अर्थात् इब्न यजीद अल जर्मी] कहिन; हमसे [सुफयान] कहिन है, उ कहिन; हमका [मंसूर] से [मुजाहिद] से [अल हाकम बिन सुफियान] से कहिन है: 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वजू करत अऊर अपने गुप्त अंगन पर पानी छिड़कत देखिन'। अहमद संपादकीय रूप से कहिन: 'त उ अपने गुप्त अंगन पर पानी छिड़किन'।
Imam Nasa'i : 136
أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ سُلَيْمَانُ بْنُ سَيْفٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَتَّابٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي حَيَّةَ قَالَرَأَيْتُ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَوَضَّأَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَامَ فَشَرِبَ فَضْلَ وَضُوئِهِ وَقَالَ صَنَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا صَنَعْتُ
हमका [अबू दाउद सुलेमान बिन सैफ] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [अबू अत्ताब] ने कहा है; हमसे [स्यूबाह] से [अबू इशाक] से [अबू हयाह] से संबंधित है, उ कहिन: 'मैंने [अली] रादलियाल्लाहुअन्हु का तीन बार वजू करत देखिन, फिर खड़ा होइके अपने वजू से बचल पानी पिया, अऊर कहिन; 'अल्लाह के रसूल शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वही किया जो अब मैं कर रहा हूँ'।
Imam Nasa'i : 137
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ عَنْ عَونِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَشَهِدْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْبَطْحَاءِ وَأَخْرَجَ بِلَالٌ فَضْلَ وَضُوئِهِ فَابْتَدَرَهُ النَّاسُ فَنِلْتُ مِنْهُ شَيْئًا وَرَكَزْتُ لَهُ الْعَنَزَةَ فَصَلَّى بِالنَّاسِ وَالْحُمُرُ وَالْكِلَابُ وَالْمَرْأَةُ يَمُرُّونَ بَيْنَ يَدَيْهِ
हमका [मुहम्मद बिन मंसूर] [सुफयान] से रिपोर्ट किहिन हैं कहिन; हमका [मलिक बिन मिघवाल] ['औन बिन अबू जुहैफा] से बताइस है, [अपने पिता] से उ कहिन; 'बठहा मा रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का देखा, फिर बिलाल रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वजूद से बचा पानी निकारिन, तौ लोग ओका लइके लड़त रहें अऊर हमका कुछ मिला। फिर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए एक छोटा सा भाला चिपकाया। फिर उ लोगन के साथे प्रार्थना किहिन, जबकि भाला के आगे से बहुत कुकुर, गदहा और मेहरारू गुजरिन।'
Imam Nasa'i : 138
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ الْمُنْكَدِرِ يَقُولُ سَمِعْتُ جَابِرًا يَقُولُمَرِضْتُ فَأَتَانِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو بَكْرٍ يَعُودَانِي فَوَجَدَانِي قَدْ أُغْمِيَ عَلَيَّ فَتَوَضَّأَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَصَبَّ عَلَيَّ وَضُوءَهُ
हमका [मुहम्मद बिन मंसूर] का [सुफयान] से सूचित कइके उ कहिन; 'मैंने [इब्न अल मुनकादिर] का कहते सुना; 'मैंने [जाबीर] का कहते सुना; 'मैं बीमार हउँ'। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अऊर अबू बकर मोरे पास आए अऊर दुइनौ जने मोका बेहोश पावा, तौ उ वजू लिहिन अऊर उनके वजू से बचल पानी मोर ऊपर डाला गा'।
Imam Nasa'i : 139
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ صَلَاةً بِغَيْرِ طُهُورٍ وَلَا صَدَقَةً مِنْ غُلُولٍ
हमका [कुतैबा] से रिपोर्ट कइके उ कहिन; हमसे [अबू अववाना] से [कतादाह] से [अबू अल मलिह] से [अपने पिता] से कहिन है उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अल्लाह बिना शुद्धिकरण के नमाज स्वीकार नाहीं करत है, न ही बाँटै से पहिले गुप्त रूप से लीन गै युद्ध लूट से भिक्षा स्वीकार करत है'।
Imam Nasa'i : 140
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ قَالَ حَدَّثَنَا يَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مُوسَى بْنِ أَبِي عَائِشَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَجَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْأَلُهُ عَنْ الْوُضُوءِ فَأَرَاهُ الْوُضُوءَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ هَكَذَا الْوُضُوءُ فَمَنْ زَادَ عَلَى هَذَا فَقَدْ أَسَاءَ وَتَعَدَّى وَظَلَمَ
हमका [महमूद बिन घैलान] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिस है [या'ला] कहिन; हमसे [सुफयान] से [मूसा बिन अबू ऐसिया] से [अमरू बिन स्यु'एब] से [अपने पिता] से [अपने दादा] ने कहा है; 'एक बेडौइन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास वजू के बारे मा पूछै आवा रहा। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें दिखाया कि कैसे तीनों बार - तीन बार वजू लेना है। फिर उ कहिन, 'इहै तरह वजू करै है'। जे ईसे ज्यादा जोड़त है, ऊ कुछ बुरा अऊर अति करत है, अऊर गलत काम करत है''।