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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
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Imam Nasa'i (الامام النسائي) - 5662 हदीस

हदीस

Imam Nasa'i : 81

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْبَصْرِيُّ عَنْ بِشْرِ بْنِ الْمُفَضَّلِ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ عَامِرٍ الشَّعْبِيِّ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الْمُغِيرَةِ عَنْ الْمُغِيرَةِ وَعَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ رَجُلٍ حَتَّى رَدَّهُ إِلَى الْمُغِيرَةِ قَالَ ابْنُ عَوْنٍ وَلَا أَحْفَظُ حَدِيثَ ذَا مِنْ حَدِيثِ ذَا أَنَّ الْمُغِيرَةَ قَالَكُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ فَقَرَعَ ظَهْرِي بِعَصًا كَانَتْ مَعَهُ فَعَدَلَ وَعَدَلْتُ مَعَهُ حَتَّى أَتَى كَذَا وَكَذَا مِنْ الْأَرْضِ فَأَنَاخَ ثُمَّ انْطَلَقَ قَالَ فَذَهَبَ حَتَّى تَوَارَى عَنِّي ثُمَّ جَاءَ فَقَالَ أَمَعَكَ مَاءٌ وَمَعِي سَطِيحَةٌ لِي فَأَتَيْتُهُ بِهَا فَأَفْرَغْتُ عَلَيْهِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ وَوَجْهَهُ وَذَهَبَ لِيَغْسِلَ ذِرَاعَيْهِ وَعَلَيْهِ جُبَّةٌ شَامِيَّةٌ ضَيِّقَةُ الْكُمَّيْنِ فَأَخْرَجَ يَدَهُ مِنْ تَحْتِ الْجُبَّةِ فَغَسَلَ وَجْهَهُ وَذِرَاعَيْهِ وَذَكَرَ مِنْ نَاصِيَتِهِ شَيْئًا وَعِمَامَتِهِ شَيْئًا قَالَ ابْنُ عَوْنٍ لَا أَحْفَظُ كَمَا أُرِيدُ ثُمَّ مَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ ثُمَّ قَالَ حَاجَتَكَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَيْسَتْ لِي حَاجَةٌ فَجِئْنَا وَقَدْ أَمَّ النَّاسَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ وَقَدْ صَلَّى بِهِمْ رَكْعَةً مِنْ صَلَاةِ الصُّبْحِ فَذَهَبْتُ لِأُوذِنَهُ فَنَهَانِي فَصَلَّيْنَا مَا أَدْرَكْنَا وَقَضَيْنَا مَا سُبِقْنَا

हमनी के [मुहम्मद बिन इब्राहिम अल बशरी] से [बिसीर बिन अल मुफादल] से [इब्नु 'आउन] से [अमीर अस-स्या'बी] से ['उरवाह बिन अल मुगिराह] से [अल मुगीरा] से आ [मुहम्मद बिन सिरीन] से [एक आदमी] से रिपोर्ट कइले बा जे तब अल मुगिरा पर भरोसा कइलस, इब्न औन कहले कि; 'हम एह से ई हदीस रटत नइखीं' कि अल मुगीरा, कहले रहले कि, 'हम एक बेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे सफर -सफर- पर रहनी।' अपना लगे जवन लाठी रहे ओकरा से हमार पीठ मार दिहलस। उ हमार पोजीशन सीधा कईले, त हमहूँ उनका साथे सीधा हो गईनी जब तक कि उ कवनो इलाका में ना पहुंच गईले, उ रुक गईले, फेर फिर से चल गईले, - मुघिरा कहले - अवुरी उ तब तक चल गईले जब तक हम उनुका के ना देख पवनी। तब उ आके कहलस कि तोहरा लगे पानी बा का? 'चमड़ा -सठीहह- से बनल बर्तन में पानी ले अइनी, त ओकरा लगे ले के अइनी, फेर ओकरा पर डाल देनी।' उ तुरंत हाथ, चेहरा अवुरी कोहनी धो लेले। ऊ सीरिया के एगो वस्त्र पहिनले रहले जवन दुनु हाथ से संकरी रहे - ऊ अपना वस्त्र के नीचे से हाथ निकालत रहले - फेर चेहरा आ बाँहि धोवत रहले. तब उ अपना माथा के आगे के हिस्सा अवुरी पगड़ी के जिक्र कईले, इब्न औन कहले; 'आ हमरा याद नइखे कि हम का चाहत रहनी'। फेर ऊ आपन दुनु जूता -खुफ- पोंछ दिहलन. ऊ तब कहले, 'रउरा इच्छा? '. के बा। हम जवाब देनी कि हे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, हमरा कवनो जरूरत नईखे। एकरा बाद हमनी के अइनी जा आ हमनी के अब्दुर्रहमान बिन औफ के लोग के साथे मंडली के नमाज के नेतृत्व करत मिलल। सुबह के नमाज के एक रकात मिल चुकल बा। हम तुरंत ओकरा के बतावे गईनी, लेकिन उ हमरा के रोक देले। हमनी के जवन मिलल ओकरा से भी प्रार्थना कईनी जा, फेर जवन छूट गईल ओकरा के सिद्ध कईनी।'

हदीस

Imam Nasa'i : 82

أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ عَنْ سُفْيَانَ وَهُوَ ابْنُ حَبِيبٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ النُّعْمَانِ بْنِ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ أَوْسِ بْنِ أَبِي أَوْسٍ عَنْ جَدِّهِ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَوْكَفَ ثَلَاثًا

[हुमैद बिन मसदाह] हमनी के [सुफयान यानी इब्न हबीब] से [स्यूबाह] से [नुमान बिन सलीम] से [इब्न औस बिन अबू औस] से [उनकर दादा] से जानकारी देले बाड़े उ कहले बाड़े; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के तीन बेर हाथ धोवत देखनी'।

हदीस

Imam Nasa'i : 83

أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ حُمْرَانَ بْنِ أَبَانَ قَالَرَأَيْتُ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَوَضَّأَ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدَيْهِ ثَلَاثًا فَغَسَلَهُمَا ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَيْهِ الْيُمْنَى إِلَى الْمِرْفَقِ ثَلَاثًا ثُمَّ الْيُسْرَى مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ قَدَمَهُ الْيُمْنَى ثَلَاثًا ثُمَّ الْيُسْرَى مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ نَحْوَ وُضُوئِي ثُمَّ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ نَحْوَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ لَا يُحَدِّثُ نَفْسَهُ فِيهِمَا بِشَيْءٍ غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ

हमनी के [सुवैद बिन नसर] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के [अब्दुल्लाह] के [मा'मार] से [अज-जुहरी] से [अथा बिन यजीद अल लैत्सी] से [हुमरान बिन अब्बन] से रिपोर्ट कईले बाड़े उ कहले कि; 'हम [उस्मान बिन अफान] रदलियाल्लाहुअनहु के वज़ूद करत देखनी; ऊ तीन बेर हाथ पर पानी डाल दिहलन, फेर धो दिहलन, फेर मुँह कुल्ला के पानी नाक में डाल दिहलन. एकरा बाद तीन बेर चेहरा धोवलस, फेर तीन बेर दाहिना हाथ कोहनी तक धोवलस, फेर बायां हाथ, फेर माथा पोंछले। ओकरा बाद ओकर दाहिना गोड़ तीन बेर आ बायां गोड़ तीन बेर धोईं. जब उ बात खतम कईले त कहले कि हम देखनी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिले हमरा वज़ूद निहन वज़ूद करत रहले। अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहले कि, "जे भी अयीसन वज़ूद करी, ओकरा बाद दु रकाअत करी - बिना बीच में अपना से बात कईले - अल्लाह ओकरा पहिले के पाप के माफ क दिहे।"

हदीस

Imam Nasa'i : 84

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُغِيرَةِ قَالَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ هُوَ ابْنُ سَعِيدِ بْنِ كَثِيرِ بْنِ دِينَارٍ الْحِمْصِيُّ عَنْ شُعَيْبٍ هُوَ ابْنُ أبِي حَمْزَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ أَخْبَرَنِي عَطَاءُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ حُمْرَانَأَنَّهُ رَأَى عُثْمَانَ دَعَا بِوَضُوءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدَيْهِ مِنْ إِنَائِهِ فَغَسَلَهَا ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ثُمَّ أَدْخَلَ يَمِينَهُ فِي الْوَضُوءِ فَتَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ كُلَّ رِجْلٍ مِنْ رِجْلَيْهِ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ثُمَّ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ مِثْلَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ قَامَ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ لَا يُحَدِّثُ فِيهِمَا نَفْسَهُ بِشَيْءٍ غَفَرَ اللَّهُ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ

हमनी के [अहमद बिन मुहम्मद बिन अल मुगिराह] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [उस्मान यानी इब्न सैद बिन कथिर बिन दिनार अल हमशी] [स्यूअइब यानी इब्न अबू हमजाह] से [अज-जुहरी] से हमरा के ['अथा बिन यजीद] के [हुमरान] से सूचित कईले बाड़े, कि उ [उस्मान बिन अफान] के वज़ूद के पानी मांगत देखले बाड़े। फेर ओकरा बर्तन से हाथ पर डालल गइल, त ऊ तीन बेर हाथ धोवलन, फेर आपन दाहिना हाथ वज़ूद के पानी में डाल दिहलन. एकरा बाद उ आपन मुंह कुल्ला क के नाक में पानी डाल के तीन बेर चेहरा धो के तीन बेर कोहनी तक हाथ धो के माथा पोंछले, तीन बेर गोड़ धो लेले, फेर कहले कि, 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के अईसन वज़ूद करत देखनी, फिर दु रका'त के नमाज पढ़ले - बिना बीच में अपना से बात कईले - तब अल्लाह माफ क दिहे ओकर बीतल पाप।'

हदीस

Imam Nasa'i : 85

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ ح و حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ عِيسَى عَنْ مَعْنٍ عَنْ مَالِكٍ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا تَوَضَّأَ أَحَدُكُمْ فَلْيَجْعَلْ فِي أَنْفِهِ مَاءً ثُمَّ لِيَسْتَنْثِرْ

हमनी के [मुहम्मद बिन मंशूर] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के [सुफयान] बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हमनी के [अबू जिनाद] के बतवले बाड़े अवुरी हमनी के [अल हुसैन बिन ईसा] के [माआन] से [मलिक] से [अबू जिनाद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जब रउआ में से केहु वजूद करी त ओकरा नाक में पानी के साँस लेवे के चाही, फिर ओकरा के फेर से उड़ा देवे के चाही।'

हदीस

Imam Nasa'i : 86

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمٍ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ كَثِيرٍ ح وَأَنْبَأَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي هَاشِمٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ لَقِيطِ بْنِ صَبْرَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْبِرْنِي عَنْ الْوُضُوءِ قَالَ أَسْبِغْ الْوُضُوءَ وَبَالِغْ فِي الِاسْتِنْشَاقِ إِلَّا أَنْ تَكُونَ صَائِمًا

हमनी के [कुतैबा बिन सईद] के जानकारी देके उ कहले कि; [इस्माइल बिन कथिर] से हमनी के [याह्या बिन सुलैम] के बतवले बाड़े अवुरी हमनी के [इशहाक बिन इब्राहिम] के बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े; [सुफयान] से [अबू हसीम] से [अपना पिता] से [अशिम बिन लकीथ बिन शबिराह] से हमनी के [वाकी’] के रिपोर्ट कईला के बाद उ कहले कि, 'हम रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहनी कि 'हे रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, हमरा के वज़ूद के बारे में सूचित करीं'। उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देले कि, 'अपना वज़ूद पूरा करीं अवुरी नाक में पानी चूसे खाती गंभीर रहीं, सिवाय रोजा के समय'।

हदीस

Imam Nasa'i : 87

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ عَنْ مَالِكٍ ح و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ وَمَنْ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ

[मलिक] से हमनी के [कुतैबा] के रिपोर्ट कईले बाड़े अवुरी हमनी के [इशहाक बिन मंसूर] के बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े; हमनी के [अब्दुररहमान] से [मलिक] से [इब्न शिहाब] से [अबू इदरीश अल खौलानी] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले बाड़े कि, 'जे वजूद करी, उ ओकरा के नाक में डाल के बाहर छोड़ देवे।' जे पत्थर से अपना के शुद्ध करेला, ओकरा विषम संख्या से करे के चाहीं।

हदीस

Imam Nasa'i : 88

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ هِلَالِ بْنِ يَسَافٍ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ قَيْسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا تَوَضَّأْتَ فَاسْتَنْثِرْ وَإِذَا اسْتَجْمَرْتَ فَأَوْتِرْ

हमनी के [कुतैबाह] के रिपोर्ट देके उ कहले कि; हमनी के [हम्मद] के [मंसूर] से [हिलाल बिन यासफ] से [सलाह बिन कैस] से बतवले बाड़े, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जब रउआ वज़ूद करीले त कृपया अपना नाक में पानी डाल दीं, फिर ओकरा के थूक दीं।' अगर रउरा पत्थर से अपना के शुद्ध करीं त विषम संख्या के इस्तेमाल करीं'.

हदीस

Imam Nasa'i : 89

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ زُنْبُورٍ الْمَكِّيُّ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَهُ عَنْ عِيسَى بْنِ طَلْحَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ مَنَامِهِ فَتَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَبِيتُ عَلَى خَيْشُومِهِ

हमनी के [मुहम्मद बिन ज़ुनबुर अल मक्की] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के [इब्न अबू हाजिम] [यजीद बिन अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े कि [मुहम्मद बिन इब्राहिम] हमनी के बतवले बाड़े, [ईसा बिन तलहह] से [अबू हुरैरा] से, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहले कि, 'जब रउआ में से केहु नींद से जाग के वज़ूद करेला त ओकरा नाक में पानी के साँस लेवे के चाही अवुरी ओकरा बाद ओकरा के फेर से तीन गो बाहर निकाले के चाही।' बार, काहे कि शैतान अपना नाक के पुल में रहेला -रात भर रहेला-'।

हदीस

Imam Nasa'i : 90

أَخْبَرَنَا مُوسَى بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ زَائِدَةَ قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ عَنْ عَلِيٍّأَنَّهُ دَعَا بِوَضُوءٍ فَتَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ وَنَثَرَ بِيَدِهِ الْيُسْرَى فَفَعَلَ هَذَا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ هَذَا طُهُورُ نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमनी के [मूसा बिन अब्दुररहमान] के जानकारी देके उ कहले कि; [जैदा] से हमनी के [हुसैन बिन अली] के बतवले बाड़े उ कहले कि; हमनी के [खालिद बिन अलकामाह] [अब्दु खैर] से [अली] से बतवले बाड़े, कि उ एक बेर वज़ूद के पानी मंगले रहले। एकरा बाद ऊ गार्गल कइले आ पानी के नाक में साँस लिहले फेर बायां हाथ से निकाल दिहले; उ तीन बेर कईले, फेर कहले कि, अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना के अईसने शुद्ध कईले।

हदीस

Imam Nasa'i : 91

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ قَالَأَتَيْنَا عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَقَدْ صَلَّى فَدَعَا بِطَهُورٍ فَقُلْنَا مَا يَصْنَعُ بِهِ وَقَدْ صَلَّى مَا يُرِيدُ إِلَّا لِيُعَلِّمَنَا فَأُتِيَ بِإِنَاءٍ فِيهِ مَاءٌ وَطَسْتٍ فَأَفْرَغَ مِنْ الْإِنَاءِ عَلَى يَدَيْهِ فَغَسَلَهَا ثَلَاثًا ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثَلَاثًا مِنْ الْكَفِّ الَّذِي يَأْخُذُ بِهِ الْمَاءَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَغَسَلَ يَدَهُ الْيُمْنَى ثَلَاثًا وَيَدَهُ الشِّمَالَ ثَلَاثًا وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ مَرَّةً وَاحِدَةً ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَهُ الْيُمْنَى ثَلَاثًا وَرِجْلَهُ الشِّمَالَ ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَعْلَمَ وُضُوءَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهُوَ هَذَا

हमनी के बतवले बा [कुतैबा] हमनी के [अबू अवानाह] से [खालिद बिन अलकामाह] से [अब्दु खैर] से बतवले बाड़े, उ कहले कि, 'हम [अली बिन अबू तालिब] रदलियाल्लाहुअनहु के लगे आईल रहनी।' उ नमाज पढ़ले रहले, लेकिन वज़ूद खाती पानी मंगले रहले, त हम कहनी कि उ नमाज पढ़ले होखला के बावजूद ए पानी से का करतारे? ' पता चलल कि ऊ हमनी के सिखावे के अलावा ओहमें से कवनो ना चाहत रहले! त ऊ पानी से भरल बर्तन आ करछुल लेके अइले, फेर हाथ में पानी डालले, फेर तीन बेर धो के पानी निकाले वाला हाथ के हथेली से तीन बेर गार्गल क के नाक में चूस लिहले, तीन बेर मुँह धो के तीन बेर दहिना हाथ धो के तीन बेर बायां हाथ धो के एक बेर माथा पोंछले। ओकरा बाद ओकर दाहिना गोड़ तीन बेर धोईं, आ बायां गोड़ तीन बेर धोईं। बात खतम कइला के बाद अली कहले कि जेकरा रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद जानल पसंद बा, इ ओकर वजूद ह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम।

हदीस

Imam Nasa'i : 92

أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ وَهُوَ ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ مَالِكِ بْنِ عُرْفُطَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّهُ أُتِيَ بِكُرْسِيٍّ فَقَعَدَ عَلَيْهِ ثُمَّ دَعَا بِتَوْرٍ فِيهِ مَاءٌ فَكَفَأَ عَلَى يَدَيْهِ ثَلَاثًا ثُمَّ مَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ بِكَفٍّ وَاحِدٍ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ وَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَغَسَلَ ذِرَاعَيْهِ ثَلَاثًا ثَلَاثًا وَأَخَذَ مِنْ الْمَاءِ فَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَأَشَارَ شُعْبَةُ مَرَّةً مِنْ نَاصِيَتِهِ إِلَى مُؤَخَّرِ رَأْسِهِ ثُمَّ قَالَ لَا أَدْرِي أَرَدَّهُمَا أَمْ لَا وَغَسَلَ رِجْلَيْهِ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى طُهُورِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهَذَا طُهُورُهُو قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ هَذَا خَطَأٌ وَالصَّوَابُ خَالِدُ بْنُ عَلْقَمَةَ لَيْسَ مَالِكَ بْنَ عُرْفُطَةَ

हमनी के [सुवैद बिन नसर] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के [अब्दुल्लाह यानी इब्न मुबारक] के [स्यूबाह] से मलिक बिन उर्फुथाह से [अब्दु खैर] से [अली रदलियाहुआनहू] से बतावल गईल बा, कि उनुका के कुर्सी ले आवल गईल, उ तुरंत कुर्सी प बईठ गईले। फेर पानी से भरल एगो छोट बर्तन मंगले, तीन बेर हाथ के हथेली में डाल देले फेर तीन बेर गार्गल कईले अवुरी एक हथेली से तीन बेर नाक में चूस लेले। एकरा बाद उ तीन बेर आपन चेहरा धो लेले, तीन बेर आपन बांह धो लेले, फिर आपन माथा लेके पोंछले - स्यूबाह - - एह हदीस के रवाना - बतावत बाड़े कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर मुकुट के ऊपर से गरदन के नाक तक आपन माथा पोंछले रहले, उ - स्यूबा - कहले कि, 'पता ना उ हाथ वापस कईले बाड़े कि ना - से गर्दन के नाक से सिर के मुकुट तक -?' - आ ऊ आपन दू गो गोड़ के एक-एक गोड़ तीन बेर धो लिहले. एकरा बाद उ कहले कि, 'जेकरा के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शुद्ध करे के तरीका देखल पसंद बा, उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शुद्ध करे के तरीका इहे बा'। आ अबू अब्दुररहमान कहले कि; 'ऊपर के रिवायत में कुछ गड़बड़ी बा, सही बा [खालिद बिन अलकामाह] मालिक बिन उर्फुथा ना।'

हदीस

Imam Nasa'i : 93

أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ وَحُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ عَنْ يَزِيدَ وَهُوَ ابْنُ زُرَيْعٍ قَالَ حَدَّثَنِي شُعْبَةُ عَنْ مَالِكِ بْنِ عُرْفُطَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ قَالَشَهِدْتُ عَلِيًّا دَعَا بِكُرْسِيٍّ فَقَعَدَ عَلَيْهِ ثُمَّ دَعَا بِمَاءٍ فِي تَوْرٍ فَغَسَلَ يَدَيْهِ ثَلَاثًا ثُمَّ مَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ بِكَفٍّ وَاحِدٍ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَيَدَيْهِ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ غَمَسَ يَدَهُ فِي الْإِنَاءِ فَمَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى وُضُوءِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهَذَا وُضُوءُهُ

हमनी के [अमरू बिन अली] आ [हुमैद बिन मसदाह] के [यजीद यानी इब्न ज़ुराई] से रिपोर्ट कइला के बाद उ कहले; हमरा [स्यूबाह] से [मलिक बिन उर्फुथाह] से [अब्दी खैर] से बतवले बाड़े, उ कहले कि, 'हम देखनी कि [अली] कुर्सी मांगत रहले, अवुरी उ बईठ गईले।' फेर एगो छोट बर्तन में पानी मंगले। ओकरा बाद हाथ धो के तीन बेर मुँह कुल्ला कइलन आ एक हथेली से तीन बेर नाक में पानी चूस लिहलन, तीन बेर चेहरा धो के तीन बेर-तीन बेर हाथ धो के फेर बर्तन में हाथ डुबा के एक बेर माथा रगड़ लिहलन. उहो तीन-तीन बेर गोड़ धोवलस। एकरा बाद उ कहले कि, 'जेकरा के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद के तरीका देखल पसंद बा, उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद करे के तरीका इहे बा'।

हदीस

Imam Nasa'i : 94

أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْحَسَنِ الْمِقْسَمِيُّ قَالَ أَنْبَأَنَا حَجَّاجٌ قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ حَدَّثَنِي شَيْبَةُ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ عَلِيٍّ أَخْبَرَهُ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَلِيٌّ أَنَّ الْحُسَيْنَ بْنَ عَلِيٍّ قَالَدَعَانِي أَبِي عَلِيٌّ بِوَضُوءٍ فَقَرَّبْتُهُ لَهُ فَبَدَأَ فَغَسَلَ كَفَّيْهِ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ قَبْلَ أَنْ يُدْخِلَهُمَا فِي وَضُوئِهِ ثُمَّ مَضْمَضَ ثَلَاثًا وَاسْتَنْثَرَ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ثُمَّ غَسَلَ يَدَهُ الْيُمْنَى إِلَى الْمِرْفَقِ ثَلَاثًا ثُمَّ الْيُسْرَى كَذَلِكَ ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ مَسْحَةً وَاحِدَةً ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَهُ الْيُمْنَى إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثَلَاثًا ثُمَّ الْيُسْرَى كَذَلِكَ ثُمَّ قَامَ قَائِمًا فَقَالَ نَاوِلْنِي فَنَاوَلْتُهُ الْإِنَاءَ الَّذِي فِيهِ فَضْلُ وَضُوئِهِ فَشَرِبَ مِنْ فَضْلِ وَضُوئِهِ قَائِمًا فَعَجِبْتُ فَلَمَّا رَآنِي قَالَ لَا تَعْجَبْ فَإِنِّي رَأَيْتُ أَبَاكَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصْنَعُ مِثْلَ مَا رَأَيْتَنِي صَنَعْتُ يَقُولُ لِوُضُوئِهِ هَذَا وَشُرْبِ فَضْلِ وَضُوئِهِ قَائِمًا

हमनी के [इब्राहिम बिन हसन अल मिकसामी] के जानकारी देके उ कहले कि; हमनी के [हज्जाज] के रिपोर्ट देके उ कहले कि; [इब्न जुरैज] कहले बाड़न; हमरा के [शैबाह] से कहले बा कि [मुहम्मद बिन अली] उनुका से कहले बाड़े कि उ कहले बाड़े; हमार बाबूजी -[अली]- हमरा से बतवले कि [हुसैन बिन अली], कहले कि, 'हमार बाबूजी -[अली]- हमरा से वज़ूद के पानी मंगले, एहसे हम उनुका लगे ले आईल रहनी।' फेर तीन बेर हाथ के हथेली धोवे लगले - वजूद शुरू करे से पहिले - तीन बेर मुंह कुल्ला क के नाक में पानी साँस लिहले आ फेर साँस छोड़ले, फेर तीन बेर चेहरा धो के तीन बेर दाहिना हाथ कोहनी तक धो के तीन बेर बायां हाथ धो के एक बेर माथा पोंछले, फेर तीन बेर दाहिना गोड़ टखने तक आ बायां गोड़ तीन बेर धो दिहले. एकरा बाद उ खड़ा होके कहले, 'ई ले'। हम तुरते ओह बर्तन के स्वीकार कइनी जवना में अबहीं ले हमरा वजूद से कुछ पानी बचल रहे आ ऊ खड़ा होके ओकरा से पानी पी लिहलसि. हम त अचरज में पड़ गईनी! हमार अचरज देखला के बाद उ कहले कि, 'अचरज मत होखऽ! हम एक बेर तोहार दादा - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के उहे करत देखले रहनी जवन रउआ हमरा के करत देखत बानी।' अली बिन अबू तालिब अपना वजूद अवुरी ओकरा से पानी खड़ा होके पीये के बारे में कहले।

हदीस

Imam Nasa'i : 95

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي حَيَّةَ وَهُوَ ابْنُ قَيْسٍ قَالَرَأَيْتُ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ كَفَّيْهِ حَتَّى أَنْقَاهُمَا ثُمَّ تَمَضْمَضَ ثَلَاثًا وَاسْتَنْشَقَ ثَلَاثًا وَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَغَسَلَ ذِرَاعَيْهِ ثَلَاثًا ثَلَاثًا ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ قَدَمَيْهِ إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثُمَّ قَامَ فَأَخَذَ فَضْلَ طَهُورِهِ فَشَرِبَ وَهُوَ قَائِمٌ ثُمَّ قَالَ أَحْبَبْتُ أَنْ أُرِيَكُمْ كَيْفَ طُهُورُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

कुतैबा बिन सईद हमनी के रिपोर्ट कइले बाड़न कि ऊ कहले बाड़न कि: अबू अल अहवास हमनी के अबू इशाक से अबू हयाह से, यानी इब्न कैस से रिपोर्ट कइले बाड़न, जे कहले बाड़न कि हम अली (रह.अ.व.) के वजूद करत देखनी; हाथ धोवे तक धोवत रहले, फेर तीन बेर मुँह कुल्ला क के तीन बेर नाक में पानी डालले, फेर तीन बेर चेहरा धो के तीन बेर बांह धोले, फेर माथा पोंछले, फेर टखना तक गोड़ धोले। फेर खड़ा होके आपन वजूद के बचे वाला हिस्सा लेके खड़ा होके ओहमें से पियले। एकरा बाद उ कहले कि हम रउआ के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के वज़ूद के तरीका देखावल चाहतानी।

हदीस

Imam Nasa'i : 96

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ وَاللَّفْظُ لَهُ عَنْ ابْنِ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ قَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ جَدُّ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى هَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تُرِيَنِي كَيْفَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ نَعَمْ فَدَعَا بِوَضُوءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدَيْهِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثُمَّ مَسَحَ رَأْسَهُ بِيَدَيْهِ فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ بَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ ثُمَّ ذَهَبَ بِهِمَا إِلَى قَفَاهُ ثُمَّ رَدَّهُمَا حَتَّى رَجَعَ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي بَدَأَ مِنْهُ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ

हमनी के [मुहम्मद बिन सलामा] के उपदेश देले बाड़े अवुरी [अल हरिथ बिन मिस्किन] के उनुका के पढ़ल गईल बा अवुरी हम उनुका से उच्चारण सुनले बानी, [इब्नु कासिम] से उ कहले; हमरा के [मलिक] के [अमरू बिन याह्या अल मज़िनी] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े कि उ [अब्दुल्लाह बिन जैद बिन अशिम] - रसुलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम के दोस्त से कहले रहले, अवुरी उनुकर दादा अमरू बिन याह्या - से कहले रहले कि, 'का आप हमरा के देखा सकतानी कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कईसे वज़ूद करेले?' अब्दुल्ला बिन जैद कहले कि 'हाँ'। फेर वज़ूद खातिर पानी मँगलन, फेर हाथ पर पानी डाल के दू दू बेर धोवलन। एकरा बाद मुंह कुल्ला क के तीन बेर नाक में पानी डाल के तीन बेर चेहरा धो के कोहनी तक दु बेर हाथ धो के दुनो हाथ से माथा रगड़ी। ऊ आपन हाथ आगे आ फेर पीछे दौड़वले, माथा के नोक से शुरू होके फेर वापस अपना गर्दन के नाक तक खींचले, फेर ओकरा के अपना मूल जगह पर वापस ले अइले, फेर गोड़ धो दिहले.

हदीस

Imam Nasa'i : 97

أَخْبَرَنَا عُتْبَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ مَالِكٍ هُوَ ابْنُ أَنَسٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ وَهُوَ جَدُّ عَمْرِو بْنِ يَحْيَىهَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تُرِيَنِي كَيْفَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ نَعَمْ فَدَعَا بِوَضُوءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدِهِ الْيُمْنَى فَغَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ مَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثُمَّ مَسَحَ رَأْسَهُ بِيَدَيْهِ فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ بَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ ثُمَّ ذَهَبَ بِهِمَا إِلَى قَفَاهُ ثُمَّ رَدَّهُمَا حَتَّى رَجَعَ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي بَدَأَ مِنْهُ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ

हमनी के [‘उतबाह बिन अब्दुल्लाह] के [मलिक, अर्थात इब्न अनस] से [अमर बिन याह्या] से [उनकर पिता] से, कि उ एक बेर [अब्दुल्लाह बिन जैद बिन अशिम] -अमरू बिन याह्या के दादा- से कहले रहले कि, 'का आप हमरा के देखा सकतानी कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कईसे वज़ूद करेले?' अब्दुल्ला बिन जैद कहले कि 'हाँ'। तब ऊ वजूद के पानी मंगले। हाथ में डाल के दू बेर धोवलस, फेर मुंह कुल्ला क के तीन बेर नाक में पानी डाल दिहलस। फेर तीन बेर चेहरा धो के कोहनी तक दू बेर हाथ धो के माथा के नोक से शुरू होके माथा के पीछे रगड़ले, फेर वापस गर्दन के नाक तक खींचले, फेर ओकरा के अपना मूल जगह प वापस क देले। ओकरा बाद ओकर गोड़ धो लीं।

हदीस

Imam Nasa'i : 98

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ الَّذِي أُرِيَ النِّدَاءَ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَيَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ وَغَسَلَ رِجْلَيْهِ مَرَّتَيْنِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ مَرَّتَيْنِ

हमनी के [मुहम्मद बिन मंसूर] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमनी के [सुफयान] [अमर बिन याह्या] से [अपना पिता] से [अब्दुल्लाह बिन जैद] से बतवले बाड़े उ कहले; 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद करत देखनी, एहसे उ तीन बेर चेहरा धोले, दु बेर हाथ, दु बेर गोड़ अवुरी दु बेर सिर पोंछले'।

हदीस

Imam Nasa'i : 99

أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى عَنْ جُعَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ مَرْوَانَ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ أَبِي ذُنَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو عَبْدِ اللَّهِ سَالِمٌ سَبَلَانُ قَالَوَكَانَتْ عَائِشَةُ تَسْتَعْجِبُ بِأَمَانَتِهِ وَتَسْتَأْجِرُهُ فَأَرَتْنِي كَيْفَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ فَتَمَضْمَضَتْ وَاسْتَنْثَرَتْ ثَلَاثًا وَغَسَلَتْ وَجْهَهَا ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَتْ يَدَهَا الْيُمْنَى ثَلَاثًا وَالْيُسْرَى ثَلَاثًا وَوَضَعَتْ يَدَهَا فِي مُقَدَّمِ رَأْسِهَا ثُمَّ مَسَحَتْ رَأْسَهَا مَسْحَةً وَاحِدَةً إِلَى مُؤَخِّرِهِ ثُمَّ أَمَرَّتْ يَدَهَا بِأُذُنَيْهَا ثُمَّ مَرَّتْ عَلَى الْخَدَّيْنِقَالَ سَالِمٌ كُنْتُ آتِيهَا مُكَاتَبًا مَا تَخْتَفِي مِنِّي فَتَجْلِسُ بَيْنَ يَدَيَّ وَتَتَحَدَّثُ مَعِي حَتَّى جِئْتُهَا ذَاتَ يَوْمٍ فَقُلْتُ ادْعِي لِي بِالْبَرَكَةِ يَا أُمَّ الْمُؤْمِنِينَ قَالَتْ وَمَا ذَاكَ قُلْتُ أَعْتَقَنِي اللَّهُ قَالَتْ بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَأَرْخَتْ الْحِجَابَ دُونِي فَلَمْ أَرَهَا بَعْدَ ذَلِكَ الْيَوْمِ

हमनी के [अल हुसैन बिन हुरैत] के जानकारी देले बा उ कहले कि; [जुएद बिन अब्दुररहमान] से हमनी के [फदलू बिन मूसा] के बतवले बाड़े उ कहले कि; हमरा [अब्दुल मलिक बिन मरवान बिन अल हरिथ बिन अबू ज़ुनब] के रिपोर्ट क के उ कहले; हमरा [अबू अब्दुल्ला सलीम सबलन] के जानकारी देके उ कहले कि; ' [ऐश्याह] उनकर भरोसा करे वाला स्वभाव से अतना प्रभावित रहली कि उनुका के काम पर रखली। तब ऐसिया हमरा के देखा दिहलन कि कइसे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वज़ूद कइले बाड़न; ऊ गार्गल क के नाक में पानी साँस के तीन बेर निकाल दिहलन, तीन बेर चेहरा धो के तीन बेर दाहिना हाथ आ बायां हाथ तीन बेर धो लिहलन, फेर माथा के आगे के हिस्सा पर हाथ रख के एके झटका में पीठ तक रगड़त रहले. तब ऊ दौड़ल -रगड़त- हाथ दुनु कान आ दुनु गाल पर'। सलीम कहले कि; 'हम एक बेर अमुकतब - एगो गुलाम जेकरा के किस्त में भुगतान क के मुक्त करावे के वादा कइल गइल रहे - रहत घरी 'ऐस्याह में आइल रहनी।' जबले हमरा से कुछुओ ना छिपल होखे। उ हमरा सोझा बईठ के हमरा से गपशप करत रहले। एक दिन हम कहनी कि हे उम्मुल मु'मिनिन, हमरा खातिर आशीर्वाद से दुआ करीं! ' 'ऐशा कहली; ई का हऽ? ' हम जवाब देनी कि 'अल्लाह हमरा के आजाद कईले'। उ हमरा खातिर प्रार्थना कईले अवुरी कहले कि; 'अल्लाह तोहरा के बरकत देसु'। उ तुरंत हमरा सोझा आपन हिजाब ढंक देली अवुरी ओकरा बाद हम उनुका के फेर कबो ना देखनी।'

हदीस

Imam Nasa'i : 100

أَخْبَرَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ أَيُّوبَ الطَّالَقَانِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ يَدَيْهِ ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ مِنْ غَرْفَةٍ وَاحِدَةٍ وَغَسَلَ وَجْهَهُ وَغَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّةً مَرَّةً وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَأُذُنَيْهِ مَرَّةًقَالَ عَبْدُ الْعَزِيزِ وَأَخْبَرَنِي مَنْ سَمِعَ ابْنَ عَجْلَانَ يَقُولُ فِي ذَلِكَ وَغَسَلَ رِجْلَيْهِ

हमनी के [अल हैतसम बिन अय्यूब एट थलाकानी] के रिपोर्ट कईला के बाद उ कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] उ कहले बाड़े; हमनी के [जैद बिन असलम] के [अथा बिन यासर] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़े, उ कहले; 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद करत देखनी। हाथ धोवलन, फेर मुँह कुल्ला क के एक घूंट से नाक में पानी डाल के - हाथ के हथेली से पानी लेत रहले - आ बीच-बीच में मुँह-हाथ धोवत रहले। फेर एक बेर ओकर माथा आ दुनु कान रगड़ लीं.' [अब्दुल अजीज] कहले कि; [उ व्यक्ति] जे [इब्न अजलान] से सुनले रहे, उ हमरा के रिपोर्ट कईले रहे, उ एह हदीस में कहले रहे; "उ आपन गोड़ धो लिहले."