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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Nasa'i (الامام النسائي) - 5662 Hadith

Hadith

Imam Nasa'i : 5621

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ هِشَامٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ يَزِيدَ الْخَطْمِيَّ قَالَكَتَبَ إِلَيْنَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَمَّا بَعْدُ فَاطْبُخُوا شَرَابَكُمْ حَتَّى يَذْهَبَ مِنْهُ نَصِيبُ الشَّيْطَانِ فَإِنَّ لَهُ اثْنَيْنِ وَلَكُمْ وَاحِدٌ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्लाह] से [हिशम] से [इब्न सिरिन] से रिपोर्ट किहिन है कि [अब्दुल्लाह बिन यजीद अल खथमी] कहिन, '[उमर इब्नुल खठथब] हमका लिखिन, 'अम्मा बदु; जब तक शैतान भाग गायब न होइ जाय तब तक आपन पेय उबालौ। सचमुच, ओकरे लिए दुइ भाग हैं अऊर तोहरे लिए एक भाग'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5622

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ جَرِيرٍ عَنْ مُغِيرَةَ عَنْ الشَّعْبِيِّ قَالَكَانَ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَرْزُقُ النَّاسَ الطِّلَاءَ يَقَعُ فِيهِ الذُّبَابُ وَلَا يَسْتَطِيعُ أَنْ يَخْرُجَ مِنْهُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [जरीर] से [मुघिरा] से [अश स्याबी] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, '[अली] लोगन का पैगम्बर के रस का पेय दिहिन, जे अगर एक मक्खी गिर के घुस जात है तौ उ फिर से बाहर नाहीं आ पावत है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5623

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ دَاوُدَ قَالَ سَأَلْتُ سَعِيدًا مَا الشَّرَابُ الَّذِي أَحَلَّهُ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ الَّذِي يُطْبَخُ حَتَّى يَذْهَبَ ثُلُثَاهُ وَيَبْقَى ثُلُثُهُ

हमका [मुहम्मद इब्नुल मुत्सना] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [इब्न अबू आदी] [दाऊद] से कहिन है, उ कहिन, 'मैंने पूछा [कहा], '[उमर] द्वारा किस तरह के -निचोड़े- पेय पदार्थन के अनुमति है? रदलियाल्लाहु अन्हू?' उ जवाब दिहिन, 'जवन तब तक पकावा जात है जब तक कि ओकर दुइ तिहाई गायब न होइ जाय अऊर एक तिहाई रह जाय'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5624

أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ دَاوُدَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ أَبَا الدَّرْدَاءِ كَانَ يَشْرَبُ مَا ذَهَبَ ثُلُثَاهُ وَبَقِيَ ثُلُثُهُ

हमका [जकरिया बिन यह्या] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [अब्दुल अ'ला] कहिन है, उ कहिन; हमसे [हम्मद बिन सलामा] से [दाऊद] से [सैद इब्नुल मुसैयब] कहिन हैं, '[अबू दरदा] रस पीत रहें जेकर दुइ तिहाई गायब होइ चुका रहा अऊर एक तिहाई बच गा रहा'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5625

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ هُشَيْمٍ قَالَ أَنْبَأَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّأَنَّهُ كَانَ يَشْرَبُ مِنْ الطِّلَاءِ مَا ذَهَبَ ثُلُثَاهُ وَبَقِيَ ثُلُثُهُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [हुसैम] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; हमका [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [कैस बिन अबू हाजिम] से [अबू मूसा अल असियारी] से रिपोर्ट किहिन है, कि उ उबला हुआ रस पियत रहे, जेहिमा से दुइ तिहाई गायब होइगा रहा अऊर एक तिहाई बच गा रहा'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5626

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِوَسَأَلَهُ أَعْرَابِيٌّ عَنْ شَرَابٍ يُطْبَخُ عَلَى النِّصْفِ فَقَالَ لَا حَتَّى يَذْهَبَ ثُلُثَاهُ وَيَبْقَى الثُّلُثُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [सुफयान] से [या'ला बिन अथा] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'मैंने [सैद इब्नुल मुसय्यब] से एक गाँव के अरब से रस के बारे मा पूछा है, जेका तब तक पकावा गा रहा जब तक कि ओकर आधा गायब न होइ गवा। फिर उ जवाब दिहिस, 'तुम -पी- नाहीं सकत हौ, जब तक कि दुइ तिहाई खतम न होइ जाय अऊर एक तिहाई न रह जाय'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5627

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ مَعْنٍ قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ صَالِحٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ إِذَا طُبِخَ الطِّلَاءُ عَلَى الثُّلُثِ فَلَا بَأْسَ بِهِ

हमका [अहमद बिन खालिद] का [मा'न] से सूचित कइके उ कहिन; हमका [मुआविया बिन सालिह] [यह्या बिन सईद] से [सैद इब्नुल मुसैयब] से कहिन है, उ कहिन, 'अगर रस तब तक पकावा जात है जब तक कि एक तिहाई न रह जाय, तौ ठीक है'।

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Imam Nasa'i : 5628

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ يَزِيدَ بْنِ زُرَيْعٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ قَالَسَأَلْتُ الْحَسَنَ عَنْ الطِّلَاءِ الْمُنَصَّفِ فَقَالَ لَا تَشْرَبْهُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [यजीद बिन ज़ुराई'] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; हमसे [अबू राजा] कहिन रहैं, उ कहिन, 'मैंने पूछा? [अल हसन] रस के बारे मा जवन तब तक पकावा गा रहा जब तक कि केवल आधा नाहीं बचा रहा, उ जवाब दिहिस, 'इका न पियौ'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5629

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ بَشِيرِ بْنِ الْمُهَاجِرِ قَالَسَأَلْتُ الْحَسَنَ عَمَّا يُطْبَخُ مِنْ الْعَصِيرِ قَالَ مَا تَطْبُخُهُ حَتَّى يَذْهَبَ الثُّلُثَانِ وَيَبْقَى الثُّلُثُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [बसीर इब्नुल मुहाजिर] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'मैं पूछत हउँ? [अल हसन] पकाए गए रस के बारे मा, उ तब जवाब दिहिन: '-तुम रस का तब तक पी सकत हौ जब तक कि तुम पकाया रहा जब तक कि दुइ तिहाई खतम न होइ जाय अऊर केवल एक तिहाई न रह जाय'।

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Imam Nasa'i : 5630

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ قَالَ حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ أَوْسٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ سِيرِينَ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُ إِنَّ نُوحًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَازَعَهُ الشَّيْطَانُ فِي عُودِ الْكَرْمِ فَقَالَ هَذَا لِي وَقَالَ هَذَا لِي فَاصْطَلَحَا عَلَى أَنَّ لِنُوحٍ ثُلُثَهَا وَلِلشَّيْطَانِ ثُلُثَيْهَا

हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका बताइस है [वाकी'] ऊ कहिस; हमसे [स'द बिन औस] [अनस बिन सिरिन] से कहिन है, उ कहिन, 'मैंने [अनस बिन मलिक] का कहत सुना है, 'शैतान अऊर नुह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खजूर के पत्तन पर झगड़ा किहिन। शैतान कहिस, 'ई हमार है'। अऊर नूह कहिस, 'ई मोर अहै'। तब उइ समझौता से मेल मिलाप किहिन; कि पैगम्बर नूह का हिस्सा एक तिहाई रहा अऊर शैतान का हिस्सा दुई तिहाई रहा।

Hadith

Imam Nasa'i : 5631

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ طُفَيْلٍ الْجَزَرِيِّ قَالَ كَتَبَ إِلَيْنَا عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِأَنْ لَا تَشْرَبُوا مِنْ الطِّلَاءِ حَتَّى يَذْهَبَ ثُلُثَاهُ وَيَبْقَى ثُلُثُهُ وَكُلُّ مُسْكِرٍ حَرَامٌ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [अब्दुल मलिक बिन थुफैल अल जजारी] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन, '[उमर बिन अब्दुल अजीज] हमका लिखिन, 'जब तक दुइ तिहाई खतम न होइ जाय अऊर एक तिहाई बच जाय तब तक पकावा गा रस न पियौ। और हर नशा हराम है''।

Hadith

Imam Nasa'i : 5632

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ عَنْ بُرْدٍ عَنْ مَكْحُولٍ قَالَكُلُّ مُسْكِرٍ حَرَامٌ

हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [अल मुतमीर] से [बर्द] से [मखुल] से कहिन है, उ कहिन, 'हर नशा हराम है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5633

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ أَبِي يَعْفُورٍ السُّلَمِيِّ عَنْ أَبِي ثَابِتٍ الثَّعْلَبِيِّ قَالَكُنْتُ عِنْدَ ابْنِ عَبَّاسٍ فَجَاءَهُ رَجُلٌ فَسَأَلَهُ عَنْ الْعَصِيرِ فَقَالَ اشْرَبْهُ مَا كَانَ طَرِيًّا قَالَ إِنِّي طَبَخْتُ شَرَابًا وَفِي نَفْسِي مِنْهُ قَالَ أَكُنْتَ شَارِبَهُ قَبْلَ أَنْ تَطْبُخَهُ قَالَ لَا قَالَ فَإِنَّ النَّارَ لَا تُحِلُّ شَيْئًا قَدْ حَرُمَ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्लाह] [अबू याफुर अस सुलामी] से [अबू थाबित अस्त त्सालाबी] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'जब हम [इब्न अब्बास] के साथे रहेन, तौ एक आदमी उनके पास आवा अऊर भावनाओं के बारे मा पूछिस?' इब्न अब्बास ने जवाब दिया, 'जब तक ताजा है तब तक रस पी लें'। अबू अय्यूब ने कहा, 'मैंने रस पकाया और अपने लिए रख लिया'। इब्न अब्बास ने पूछा, 'का तुमने ईका पकाए से पहिले पी लिहे रहेव?' अबू अय्यूब ने जवाब दिया, 'नहीं'। इब्न अब्बास कहिन, 'वास्तव मा, आग ओका हलाम नाहीं बना सकत है जेका मना कीन गा है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5634

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ قِرَاءَةً أَخْبَرَنِي عَطَاءٌ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُوَاللَّهِ مَا تُحِلُّ النَّارُ شَيْئًا وَلَا تُحَرِّمُهُقَالَ ثُمَّ فَسَّرَ لِي قَوْلَهُ لَا تُحِلُّ شَيْئًا لِقَوْلِهِمْ فِي الطِّلَاءِ وَلَا تُحَرِّمُهُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्लाह] [इब्न जुरैज] से रिपोर्ट किहिन है - पढ़ै मा - उ कहिन; हमका [अथा] रिपोर्ट किहिन रहैं, उ कहिन, 'मैं [इब्न अब्बास] का कहत सुने रहेन, 'अल्लाह के कसम, आग कुछौ हल या गैरकानूनी नाहीं बना सकत है'। अथा कहिन, 'तब इब्न अब्बास ने मोका समझावा कि उ का कहिन, "तुम कुछ हलाल नाहीं बना सकत हौ - भावनाओं के बारे मा जवन कहत हैं - या मना नाहीं कइ सकत हौ।"

Hadith

Imam Nasa'i : 5635

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ حَيْوَةَ بْنِ شُرَيْحٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عُقَيْلٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَاشْرَبْ الْعَصِيرَ مَا لَمْ يُزْبِدْ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] का [हैवाह बिन सूरैह] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; [इब्न शिहाब] से [सैद इब्नुल मुसय्यब] से मोका [उकैल] रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'जब तक झाग न आवै तब तक शराब का रस पियौ'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5636

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ هِشَامِ بْنِ عَائِذٍ الْأَسَدِيِّ قَالَسَأَلْتُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْعَصِيرِ قَالَ اشْرَبْهُ حَتَّى يَغْلِيَ مَا لَمْ يَتَغَيَّرْ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [हिस्याम बिन 'ऐद्ज अल असदी] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन, 'मैंने [इब्राहिम] से रस के बारे मा पूछा, उ जवाब दिहिन, 'जब तक ई उबल न जाय तब तक पीओ अऊर ई बदल न जाय'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5637

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ عَطَاءٍفِي الْعَصِيرِ قَالَ اشْرَبْهُ حَتَّى يَغْلِيَ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] से [अब्दुल मलिक] से [अथा] से फल के रस के बारे मा बतावा है, 'उन्होंन जवाब दिहिस, 'जब तक ई उबल न जाय - किण्वन से गुजरत है -'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5638

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ دَاوُدَ عَنْ الشَّعْبِيِّ قَالَاشْرَبْهُ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ إِلَّا أَنْ يَغْلِيَ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] से [हम्मद बिन सलामा] से [दाऊद] से [अश स्याबी] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'इका तीन दिन तक पीवा, जब तक कि ई उबल न जाय -किण्वन से गुजरत-'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5639

أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ كَثِيرٍ قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ قَالَ حَدَّثَنِي الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ عَنْ أَبِيهِ فَيْرُوزَ قَالَقَدِمْتُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا أَصْحَابُ كَرْمٍ وَقَدْ أَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ تَحْرِيمَ الْخَمْرِ فَمَاذَا نَصْنَعُ قَالَ تَتَّخِذُونَهُ زَبِيبًا قُلْتُ فَنَصْنَعُ بِالزَّبِيبِ مَاذَا قَالَ تُنْقِعُونَهُ عَلَى غَدَائِكُمْ وَتَشْرَبُونَهُ عَلَى عَشَائِكُمْ وَتُنْقِعُونَهُ عَلَى عَشَائِكُمْ وَتَشْرَبُونَهُ عَلَى غَدَائِكُمْ قُلْتُ أَفَلَا نُؤَخِّرُهُ حَتَّى يَشْتَدَّ قَالَ لَا تَجْعَلُوهُ فِي الْقُلَلِ وَاجْعَلُوهُ فِي الشِّنَانِ فَإِنَّهُ إِنْ تَأَخَّرَ صَارَ خَلًّا

मोका [अमरू बिन उथमान बिन सैद बिन कतसीर] रिपोर्ट कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [बकिया] उ कहिन; ने मुझसे [अल औजाई] से [यह्या बिन अबू अमरू] से [अब्दुल्लाह बिन अद दैलामी] से अपने पिता [फैरूज] से कहा है, उ कहिन, 'मैं रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पास आया अऊर पूछा, 'हे रसूलल्लाह, हम अंगूर के बाग के मालिक हैं, जबकि अल्लाह अज्जा वल्लाब के लिए चौड़ा कर दिया है, तो हमका का करै का चाही?' उ जवाब दिहिन: 'इका जबीब -सूखी शराब- बनावा'। हम पूछेन, 'फिर जबीब का का करी?' उन्होंने जवाब दिया : 'तुम सुबह भिगोय के फिर दुपहरिया मा पी लेव। तुम दुपहरिया मा भिगोय के फिर सुबेरे पिय लेत हौ।' हम पूछेन, 'का ई अच्छा नाहीं होई कि हम ईका तब तक खतम करब जब तक कि ऊ कठिन न होइ जाय?' उ कहिन: 'इका कुलाल -एक बड़ा माटी के जार- मा न भिगोवा, बल्कि एक छोट जार मा भिगोवा काहे से कि अगर ई लटक जात है तौ ई सिरका बन जाई'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5640

أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ مُحَمَّدٍ أَبُو عُمَيْرِ بْنِ النَّحَّاسِ عَنْ ضَمْرَةَ عَنْ الشَّيْبَانِيِّ عَنْ ابْنِ الدَّيْلَمِيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَقُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لَنَا أَعْنَابًا فَمَاذَا نَصْنَعُ بِهَا قَالَ زَبِّبُوهَا قُلْنَا فَمَا نَصْنَعُ بِالزَّبِيبِ قَالَ انْبِذُوهُ عَلَى غَدَائِكُمْ وَاشْرَبُوهُ عَلَى عَشَائِكُمْ وَانْبِذُوهُ عَلَى عَشَائِكُمْ وَاشْرَبُوهُ عَلَى غَدَائِكُمْ وَانْبِذُوهُ فِي الشِّنَانِ وَلَا تَنْبِذُوهُ فِي الْقِلَالِ فَإِنَّهُ إِنْ تَأَخَّرَ صَارَ خَلًّا

हमका [ईसा बिन मुहम्मद अबू उमैर बिन अन नूहस] से [डलामरा] से [अश स्याबानी] से [इब्न अद दैलामी] से [अपने पिता] से रिपोर्ट कइके उ कहिन, 'हम पूछेन, 'हे अल्लाह के रसूल, हमरे पास बहुत शराब है, तौ हमका का करै का चाही?' उ जवाब दिहिन: 'इका जबीब -सूखी शराब- बनावा'। हम फिर पूछेन, 'फिर जबीब का का करी?' उ जवाब दिहिन: 'सुबह रस बनावा फिर दुपहरिया मा पीवा। अउर दुपहरिया मा रस बनावा फिर सुबेरे पियै। नबीदज का रस एक छोट जार मा बनावा न कि कुलाल -एक बड़ा माटी के बर्तन जार- मा, काहे से कि अगर ई लटक जात है तौ ई सिरका बन जाई'।