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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Nasa'i (الامام النسائي) - 5662 Hadith

Hadith

Imam Nasa'i : 5561

أَخْبَرَنَا أَبُو عَلِيٍّ مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ أَيُّوبَ مَرْوَزِيٌّ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُثْمَانَ قَالَ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ عُبَيْدٍ الْكِنْدِيُّ خُرَاسَانِيٌّ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَا هُوَ يَسِيرُ إِذْ حَلَّ بِقَوْمٍ فَسَمِعَ لَهُمْ لَغَطًا فَقَالَ مَا هَذَا الصَّوْتُ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ لَهُمْ شَرَابٌ يَشْرَبُونَهُ فَبَعَثَ إِلَى الْقَوْمِ فَدَعَاهُمْ فَقَالَ فِي أَيِّ شَيْءٍ تَنْتَبِذُونَ قَالُوا نَنْتَبِذُ فِي النَّقِيرِ وَالدُّبَّاءِ وَلَيْسَ لَنَا ظُرُوفٌ فَقَالَ لَا تَشْرَبُوا إِلَّا فِيمَا أَوْكَيْتُمْ عَلَيْهِ قَالَ فَلَبِثَ بِذَلِكَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَلْبَثَ ثُمَّ رَجَعَ عَلَيْهِمْ فَإِذَا هُمْ قَدْ أَصَابَهُمْ وَبَاءٌ وَاصْفَرُّوا قَالَ مَا لِي أَرَاكُمْ قَدْ هَلَكْتُمْ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ أَرْضُنَا وَبِيئَةٌ وَحَرَّمْتَ عَلَيْنَا إِلَّا مَا أَوْكَيْنَا عَلَيْهِ قَالَ اشْرَبُوا وَكُلُّ مُسْكِرٍ حَرَامٌ

हमका [अबू अली मुहम्मद बिन यह्या बिन अय्यूब मरवाजी] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [अब्दुल्ला बिन उथमान] कहिन है कि उ कहिन; हमसे कहिन है [ईसा बिन उबैद अल किंडी खुरासानी] उ कहिन; हम [अब्दुल्लाह बिन बुरैदा] का [उनके पिता] से कहत सुने रहेन, 'जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम चलत रहे अऊर एक लोगन के पास से गुजरत रहे, तौ उ ओनके हंगामा सुनेन। ऊ पूछिस: 'वह आवाज का है?' उइ जवाब दिहिन, 'हे अल्लाह के पैगम्बर, उइके पास उ पेय है जवन उइ आमतौर पर पीत हैं!' तो उन्होंने किसी को भेजा और उन्हें बोलाया, फिर उन्होंने पूछा: 'तुम पैगम्बर के भावनाओं को किस पात्र में बनाते हो?' उइ जवाब दिहिन, 'हम अन नकीर अऊर अद दुबा मा नबीज़ के भावना बनाइन, काहे से कि हमरे पास दूसर जगह नाहीं है'। उ कहिन: 'उन बर्तन के अलावा जेकर ढक्कन बाँधौ, ओसे न पियौ'। बुरैदह कहिन, 'तब कंटेनर का उपयोग काफी देर तक छोड़ दीन गा रहा, अऊर जब उ फिर से आवा रहा, तौ ओनका एक संक्रामक बीमारी फंस गै रही कि ओनके चेहरा फीका देखात रहा। उ कहिन: 'मैं काहे देखत हउँ कि तुमका ई दुर्भाग्य है?' उइ जवाब दिहिन, 'हे अल्लाह के पैगम्बर, हमार भूमि अऊर पर्यावरण, अऊर तुम हमका ढक्कन वाले बर्तन के अलावा भी मना किहिन हैं'। उ कहिन: 'पीओ, अऊर हर मादक पेय हराम है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5562

أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الْحَفَرِيُّ وَأَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ سَالِمٍ عَنْ جَابِرٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمَّا نَهَى عَنْ الظُّرُوفِ شَكَتْ الْأَنْصَارُ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَيْسَ لَنَا وِعَاءٌ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَا إِذًا

हमका [महमूद बिन घैलान] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [अबू दाऊद अल हाफारी] अऊर [अबू अहमद अज़ जुबैरी] से [सुफयान] से [मंसूर] से [सलीम] से [जाबिर] से कहिन है, 'जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुछ बर्तनन के उपयोग पर रोक लगाई, तौ अंसार लोग शिकायत किहिन। उन्होंने कहा कि हे अल्लाह के रसूल हमारे पास कोई बर्तन नहीं है ! तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तब तो ठीक है'।

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Imam Nasa'i : 5563

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ يُونُسَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلَةَ أُسْرِيَ بِهِ بِقَدَحَيْنِ مِنْ خَمْرٍ وَلَبَنٍ فَنَظَرَ إِلَيْهِمَا فَأَخَذَ اللَّبَنَ فَقَالَ لَهُ جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَاكَ لِلْفِطْرَةِ لَوْ أَخَذْتَ الْخَمْرَ غَوَتْ أُمَّتُكَ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्लाह] से [यूनुस] से [अज जुहरी] से [सैद इब्नुल मुसैयब] से [अबू हुरैरा] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'जउन रात रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम आपन इसरा बनाइन', ओनका दुइ बर्तन परोसा गा रहा; खमीर अऊर दूध। फिर दूध वाला बर्तन लइके ओन दुइनौ के देखिन। जिबरील अलैहिस सलाम ने भी कहा, 'अल्लाह का स्तन्य जे तोहका फितरह देखाइस है, अगर तू शराब लेब तौ तू अपने लोगन का भटकाव करब'।

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Imam Nasa'i : 5564

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ خَالِدٍ وَهُوَ ابْنُ الْحَارِثِ عَنْ شُعْبَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا بَكْرِ بْنَ حَفْصٍ يَقُولُ سَمِعْتُ ابْنَ مُحَيْرِيزٍ يُحَدِّثُ عَنْ رَجُلٍ مَنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَشْرَبُ نَاسٌ مِنْ أُمَّتِي الْخَمْرَ يُسَمُّونَهَا بِغَيْرِ اسْمِهَا

हमका [मुहम्मद बिन अब्दुल अ'ला] [खालिद] से रिपोर्ट किहिन है - अर्थात् इब्नुल हरिथ - [स्यूबाह] से उ कहिन; हम [अबू बकर बिन हफश] का कहत सुने रहेन; हम [इब्नू मुहैरिज़] का पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के [एक पुरुष] दोस्त से, पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावत सुने रहेन, उ कहिन: 'मेरे उम्मत से कुछ लोग होइहैं जे शराब पीत हैं, उ लोग ओका ओकरे नाम के अलावा कुछ अउर कहिहैं'।

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Imam Nasa'i : 5565

أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ حَمَّادٍ قَالَ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَزْنِي الزَّانِي حِينَ يَزْنِي وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَشْرَبُ الْخَمْرَ شَارِبُهَا حِينَ يَشْرَبُهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَسْرِقُ السَّارِقُ حِينَ يَسْرِقُ وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَنْتَهِبُ نُهْبَةً يَرْفَعُ النَّاسُ إِلَيْهِ فِيهَا أَبْصَارَهُمْ حِينَ يَنْتَهِبُهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ

हमका [ईसा बिन हम्माद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अल लैट्स] से [उकैल] से [इब्न शिहाब] से [अबू बकर बिन अब्दुर्रहमान इब्नुल हरिथ] से [अबू हुरैरा] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जब उ व्यभिचार करत है तौ एक आस्तिक का आस्तिक नाहीं कहा जात है, जब उ व्यभिचार करत है तौ एक आस्तिक का आस्तिक नाहीं कहा जात है, आस्तिक का आस्तिक नाहीं कहा जात है जब उ चोरी करत है, अऊर एक आस्तिक का आस्तिक नाहीं कहा जात है जब उ दूसर लोगन के अधिकारन का लूटत है जब तक कि जब लोग लूटत हैं तो आपन आँखि नहीं फेर लेत हैं'।

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Imam Nasa'i : 5566

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ وَأَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ كُلُّهُمْ حَدَّثُونِي عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَزْنِي الزَّانِي حِينَ يَزْنِي وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَسْرِقُ السَّارِقُ حِينَ يَسْرِقُ وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَشْرَبُ الْخَمْرَ حِينَ يَشْرَبُهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَنْتَهِبُ نُهْبَةً ذَاتَ شَرَفٍ يَرْفَعُ الْمُسْلِمُونَ إِلَيْهِ أَبْصَارَهُمْ وَهُوَ مُؤْمِنٌ

हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [अल वलिद बिन मुस्लिम] से [अल औजाई] से [अज़ जुहरी] से कहिन है, उ कहिन; मोका बतावा है [सैद इब्नुल मुसैयाब] अऊर [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान] अऊर [अबू बकर बिन अब्दुर्रहमान] सब मोका [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से बताइन हैं, उ कहिन: 'एक मुसकी का मुसकी नाहीं कहा जात है जब ऊ वयस्क करत है, तब मुसकी नाहीं कहा जात है, आस्तिक का आस्तिक नाहीं कहा जात है जब उ खमेर पीत है, अऊर एक आस्तिक का आस्तिक नाहीं कहा जात है जब उ दूसर लोगन के अधिकारन का लूटत है जब तक कि लोग लूटत समय ओनके तरफ नाहीं देखत हैं।'

Hadith

Imam Nasa'i : 5567

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا جَرِيرٌ عَنْ مُغِيرَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي نُعْمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَنَفَرٍ مِنْ أَصْحَابِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالُواقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فَاجْلِدُوهُ ثُمَّ إِنْ شَرِبَ فَاجْلِدُوهُ ثُمَّ إِنْ شَرِبَ فَاجْلِدُوهُ ثُمَّ إِنْ شَرِبَ فَاقْتُلُوهُ

हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [जरीर] से [मुघिरह] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू नूम] से [इब्न उमर] अऊर मुहम्मद के साथियन के एक समूह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अऊर मुहम्मद के साथियन के एक समूह से रिपोर्ट किहिन है, उइ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो भी खमर पीता है तो ओका फिर से चाबुक मारौ, तौ फिर से पियत है, तौ ऊ ओका फिर से कोड़ा मारो ओका कोड़ा मारौ, अऊर अगर उ फिर से पियत है तौ ओका मार डावा। वहिका'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5568

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا شَبَابَةُ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ خَالِهِ الْحَارِثِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا سَكِرَ فَاجْلِدُوهُ ثُمَّ إِنْ سَكِرَ فَاجْلِدُوهُ ثُمَّ إِنْ سَكِرَ فَاجْلِدُوهُ ثُمَّ قَالَ فِي الرَّابِعَةِ فَاضْرِبُوا عُنُقَهُ

हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [शबाबाह] बताइस है, उ कहिन; हमसे [इब्न अबू दज़ी`ब] अपने चाचा [अल हरिथ बिन अब्दुर्रहमान] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] से रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहिन है, उ कहिन: 'अगर उ नशा मा है तौ ओका कोड़ा मारो, फिर अगर उ फिर से नशा मा है तौ ओका कोड़ा मारो, फिर अगर उ नशा मा है तौ ओका फिर से कोड़ा मारो'। फिर चौथी बार कहिन: 'तब ओका मारौ'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5569

أَخْبَرَنَا وَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ ابْنِ فُضَيْلٍ عَنْ وَائِلِ بْنِ بَكْرٍ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ بْنِ أَبِي مُوسَى عَنْ أَبِيهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ مَا أُبَالِي شَرِبْتُ الْخَمْرَ أَوْ عَبَدْتُ هَذِهِ السَّارِيَةَ مِنْ دُونِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ

का ई हमका [वाशिल बिन अब्दुल अ'ला] से [इब्न फुदलैल] से [वैल बिन बकर] से [अबू बुरदह बिन अबू मूसा] से [उनके पिता] से सूचित किहिस है? रदलियाअल्लाहु अन्हू, कि उ कहिन, 'मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं शराब पीऊं या मैं ई स्तम्भ के पूजा करूँ सिवाय अल्लाह 'अज्जा वजल्ला' के।

Hadith

Imam Nasa'i : 5570

أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا عُثْمَانُ بْنُ حِصْنِ بْنِ عَلَّاقٍ دِمَشْقِيٌّ قَالَ حَدَّثَنَا عُرْوَةُ بْنُ رُوَيْمٍ أَنَّ ابْنَ الدَّيْلَمِيِّرَكِبَ يَطْلُبُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ قَالَ ابْنُ الدَّيْلَمِيِّ فَدَخَلْتُ عَلَيْهِ فَقُلْتُ هَلْ سَمِعْتَ يَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرٍو رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَكَرَ شَأْنَ الْخَمْرِ بِشَيْءٍ فَقَالَ نَعَمْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَشْرَبُ الْخَمْرَ رَجُلٌ مِنْ أُمَّتِي فَيَقْبَلُ اللَّهُ مِنْهُ صَلَاةً أَرْبَعِينَ يَوْمًا

हमका [अली बिन हुजर] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [उथमान बिन हिशन बिन अल्लाक दिमासिकी] रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; हमसे कहिन है [उर्वाह बिन रुवैम] कहिन, 'इब्न अद दैलामी अब्दुल्ला बिन अमरू बिन अल ऐश का ढूंढै गें। [इब्नू अद दैलामी] ने कहा, 'मैं [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अश] से मिलने के लिए अंदर गया, फिर मैंने उनसे पूछा, 'हे अब्दुल्लाह बिन अमरू, का तुमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का शराब के बारे में कुछ बतावा सुना?' ऊ जवाब दिहिस, 'ठीक है। हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: 'यह मेरी उम्मत का कोई आदमी नहीं है जो खमेर पीता है, तो अल्लाह चालीस दिन तक उसकी नमाज स्वीकार कर लेता है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5571

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا خَلَفٌ يَعْنِي ابْنَ خَلِيفَةَ عَنْ مَنْصُورِ بْنِ زَاذَانَ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ عُتَيْبَةَ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَالْقَاضِي إِذَا أَكَلَ الْهَدِيَّةَ فَقَدْ أَكَلَ السُّحْتَ وَإِذَا قَبِلَ الرِّشْوَةَ بَلَغَتْ بِهِ الْكُفْرَ وَقَالَ مَسْرُوقٌ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فَقَدْ كَفَرَ وَكُفْرُهُ أَنْ لَيْسَ لَهُ صَلَاةٌ

हमका बतावा गा है कि [कुतैबा] अऊर [अली बिन हुजर] दुइनौ कहिन; हमसे [खलफ] - अर्थात् इब्न खलीफा - [मंसूर बिन ज़द्ज़ान] से [अल हकाम बिन उतैबा] से [अबू वैल] से [मसरुक] से कहिन है, 'अगर एक न्यायाधीश कुछ खात है जवन दीन जात है तौ उ क्रोध खात है, अऊर अगर उ रिश्वत स्वीकार करत है तौ ई ओका कठोरता के ओर आकर्षित करि।' [मसरूक] ने कहा, 'जो भी खमर पीता है तो वह काफिर कर चुका है, और उसका काफिर यह है कि उसकी नमाज सेवा स्वीकार नहीं है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5572

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُاجْتَنِبُوا الْخَمْرَ فَإِنَّهَا أُمُّ الْخَبَائِثِ إِنَّهُ كَانَ رَجُلٌ مِمَّنْ خَلَا قَبْلَكُمْ تَعَبَّدَ فَعَلِقَتْهُ امْرَأَةٌ غَوِيَّةٌ فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِ جَارِيَتَهَا فَقَالَتْ لَهُ إِنَّا نَدْعُوكَ لِلشَّهَادَةِ فَانْطَلَقَ مَعَ جَارِيَتِهَا فَطَفِقَتْ كُلَّمَا دَخَلَ بَابًا أَغْلَقَتْهُ دُونَهُ حَتَّى أَفْضَى إِلَى امْرَأَةٍ وَضِيئَةٍ عِنْدَهَا غُلَامٌ وَبَاطِيَةُ خَمْرٍ فَقَالَتْ إِنِّي وَاللَّهِ مَا دَعَوْتُكَ لِلشَّهَادَةِ وَلَكِنْ دَعَوْتُكَ لِتَقَعَ عَلَيَّ أَوْ تَشْرَبَ مِنْ هَذِهِ الْخَمْرَةِ كَأْسًا أَوْ تَقْتُلَ هَذَا الْغُلَامَ قَالَ فَاسْقِينِي مِنْ هَذَا الْخَمْرِ كَأْسًا فَسَقَتْهُ كَأْسًا قَالَ زِيدُونِي فَلَمْ يَرِمْ حَتَّى وَقَعَ عَلَيْهَا وَقَتَلَ النَّفْسَ فَاجْتَنِبُوا الْخَمْرَ فَإِنَّهَا وَاللَّهِ لَا يَجْتَمِعُ الْإِيمَانُ وَإِدْمَانُ الْخَمْرِ إِلَّا لَيُوشِكُ أَنْ يُخْرِجَ أَحَدُهُمَا صَاحِبَهُأَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ الْمُبَارَكِ عَنْ يُونُسَ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ أَنَّ أَبَاهُ قَالَ سَمِعْتُ عُثْمَانَ يَقُولُ اجْتَنِبُوا الْخَمْرَ فَإِنَّهَا أُمُّ الْخَبَائِثِ فَإِنَّهُ كَانَ رَجُلٌ مِمَّنْ خَلَا قَبْلَكُمْ يَتَعَبَّدُ وَيَعْتَزِلُ النَّاسَ فَذَكَرَ مِثْلَهُ قَالَ فَاجْتَنِبُوا الْخَمْرَ فَإِنَّهُ وَاللَّهِ لَا يَجْتَمِعُ وَالْإِيمَانُ أَبَدًا إِلَّا يُوشِكَ أَحَدُهُمَا أَنْ يُخْرِجَ صَاحِبَهُ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] से [ममर] से [अज जुहरी] से [अबू बकर बिन अब्दुर्रहमान बिन अल हरिथ] से [अपने पिता] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; हम [उथमान? रदलियाअल्लाहु अन्हू] ने कहा, 'मदिरा पीने से परहेज करौ काहे से कि ई सब पापन का स्रोत है। तोहरे पहिले एक मनई रहा जउन पूजा मा भक्त रहा अऊर एक वेश्या ओका पसंद करत रहा। फिर उ औरत ने अपनी दासी का ई कहे के लिए भेजा, 'वास्तव में, मैं तोहका गवाही देय के लिए बोलावत हउँ'। तौ ऊ आदमी अऊर दासी चले गें, जबकि ऊ खुदै तैयार होइ गवा कि जब ऊ आदमी घुसा तौ ऊ अपने अलावा केहू के बिना घर के दरवाजा पै ताला लगा दिहिस। तौ ऊ आदमी का सामना एक सुंदर औरत से भा रहा जेकरे बगल मा एक छोट बच्चा अऊर खमेर के बोतल रही। तब औरत ने कहा, 'अल्लाह के कसम, मैं तोहका गवाही देय के ताईं नाहीं बुलावत हउँ, बल्कि मैं तोहका अपने साथ सेक्स करै, या एक गिलास शराब पीवै, या ई छोटका बच्चा का मारै के ताईं बुलावत हउँ!' आदमी बोला, 'बस एक गिलास खमेर देइ द्या'। यहिसे ऊ मेहरारू ओका एक गिलास शराब दिहिस। ऊ आदमी तब कहिस, 'मोरे लिए जोड़ौ'। ऊ आदमी तब तक पीत रहा जब तक कि ऊ औरत के साथ व्यभिचार नाहीं किहिस अऊर एक आत्मा - एक छोट बच्चा - का मार डारिस। त शराब पीये से दूर रहौ, काहे से कि - अल्लाह के कसम - ईमान अऊर शराब पीये के आदत तब तक एक साथ नाहीं होइ जब तक कि ओनमा से एक दूसर का बाहर नाहीं लावत है'। हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] - अर्थात् इब्नुल मुबारक - [यूनुस] से [अज़ जुहरी] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; मोका [अबू बकर बिन अब्दुर्रहमान बिन अल हरिथ] बताइन है कि [उनके पिता] कहिन; हम [उथमान] का कहत सुने रहेन, 'मदिरा पीयै से परहेज करा काहे से कि ई सब पापन का स्रोत है। एक बार एक मनई रहा जे मानव जीवन से हट के पूजा करत रहा....फिर उ हदीस के अनुसार उल्लेख किहिन। उ कहिन, 'शराब पीये से परहेज करा, काहे से कि - अल्लाह के कसम - ईमान अऊर शराब पीये के आदत तब तक एक साथ नाहीं होइ जब तक कि ओनमा से एक दूसर का बाहर नाहीं लावत है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5573

أَخْبَرَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَلِيٍّ قَالَ حَدَّثَنَا سُرَيْجُ بْنُ يُونُسَ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ الْعَلَاءِ وَهُوَ ابْنُ الْمُسَيَّبِ عَنْ فُضَيْلٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَمَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فَلَمْ يَنْتَشِ لَمْ تُقْبَلْ لَهُ صَلَاةٌ مَا دَامَ فِي جَوْفِهِ أَوْ عُرُوقِهِ مِنْهَا شَيْءٌ وَإِنْ مَاتَ مَاتَ كَافِرًا وَإِنْ انْتَشَى لَمْ تُقْبَلْ لَهُ صَلَاةٌ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً وَإِنْ مَاتَ فِيهَا مَاتَ كَافِرًاخَالَفَهُ يَزِيدُ بْنُ أَبِي زِيَادٍ

हमका [अबू बकर बिन अली] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [सूरैज बिन यूनुस] कहिन है, उ कहिन; हमसे [यह्या बिन अब्दुल मलिक] [अल अला] से - अर्थात् इब्नुल मुसय्यब - [फुदलैल] से [मुजाहिद] से [इब्न उमर] से कहिन है, 'जे शराब पीत है अऊर अबहीं तक नशा मा नाहीं भवा है, ओकर नमाज तब तक स्वीकार नाहीं कीन जाई जब तक कि ओकरे पेट या नस मा कुछ न कुछ है। अगर उ मरत है तौ उ एक अविश्वासी के रूप मा मरत है। औ जो नसात तक खमेर पियै, चालिस राति तक ओकर दुआ न मानी जाई ॥ औ यदि मदिरा पिय के मर जाय तौ काफिर होइके मरत है।' हालांकि, ई इतिहास यजीद बिन अबू जियाद द्वारा विवादित है'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5574

أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ آدَمَ بْنِ سُلَيْمَانَ عَنْ عَبْدِ الرَّحِيمِ عَنْ يَزِيدَ ح وَأَنْبَأَنَا وَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍوعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ مُحَمَّدُ بْنُ آدَمَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فَجَعَلَهَا فِي بَطْنِهِ لَمْ يَقْبَلْ اللَّهُ مِنْهُ صَلَاةً سَبْعًا إِنْ مَاتَ فِيهَا وَقَالَ ابْنُ آدَمَ فِيهِنَّ مَاتَ كَافِرًا فَإِنْ أَذْهَبَتْ عَقْلَهُ عَنْ شَيْءٍ مِنْ الْفَرَائِضِ وَقَالَ ابْنُ آدَمَ الْقُرْآنِ لَمْ تُقْبَلْ لَهُ صَلَاةٌ أَرْبَعِينَ يَوْمًا إِنْ مَاتَ فِيهَا وَقَالَ ابْنُ آدَمَ فِيهِنَّ مَاتَ كَافِرًا

[यजीद] से [अब्दुर्रहिम] से मोका [मुहम्मद बिन आदम बिन सुलेमान] रिपोर्ट किहिन हैं। -दूसरे तरीका से ई बतावा गा है- ई हमका बतावा गा है [वाशिल बिन अब्दुल अ'ला] कहिन, हमका [इब्न फुदलैल] से [यजीद बिन अबू जियाद] से [मुजाहिद] से [अब्दुल्ला बिन अमरू] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावा गा है, अऊर [मुहम्मद बिन आदम सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम] कहिन, वसल्लम, उन्होंने कहा: 'जो भी खमेर पीये जब तक कि ओकरे पेट मा घुस न जाय, ओकर नमाज सात दिन तक स्वीकार न होई।' अगर उ इमा मर जात है, तौ इब्न आदम कहिन, 'उन दिनन मा, फिर उ काफिर होइके मरत है। अगर खमर के कारण ओकर मन कौनो फर्ज से दूर होइ जात है, तौ इब्न आदम कहिन, 'अल-कुरान, तब चालीस दिन तक ओकर नमाज स्वीकार नाइ होई। अगर उ यहिमा मर जात है, तौ इब्न आदम कहिन, 'उन दिनन मा, उ काफिर होइके मर जई'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5575

أَخْبَرَنَا الْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّا بْنِ دِينَارٍ قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَقَ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي رَبِيعَةُ بْنُ يَزِيدَ ح و أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ بْنِ سَعِيدٍ عَنْ بَقِيَّةَ عَنْ أَبِي عَمْرٍو وَهُوَ الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ يَزِيدَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ قَالَدَخَلْتُ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ وَهُوَ فِي حَائِطٍ لَهُ بِالطَّائِفِ يُقَالُ لَهُ الْوَهْطُ وَهُوَ مُخَاصِرٌ فَتًى مِنْ قُرَيْشٍ يُزَنُّ ذَلِكَ الْفَتَى بِشُرْبِ الْخَمْرِ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ شَرْبَةً لَمْ تُقْبَلْ لَهُ تَوْبَةٌ أَرْبَعِينَ صَبَاحًا فَإِنْ تَابَ تَابَ اللَّهُ عَلَيْهِ فَإِنْ عَادَ لَمْ تُقْبَلْ تَوْبَتُهُ أَرْبَعِينَ صَبَاحًا فَإِنْ تَابَ تَابَ اللَّهُ عَلَيْهِ فَإِنْ عَادَ كَانَ حَقًّا عَلَى اللَّهِ أَنْ يَسْقِيَهُ مِنْ طِينَةِ الْخَبَالِ يَوْمَ الْقِيَامَةِاللَّفْظُ لِعَمْرٍو

हमका [अल कासिम बिन जकारिया बिन दीनार] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [मुआविया बिन अमरू] कहिन, हमसे कहिन हैं [अबू इशाक] उ कहिन; हमसे [अल औजाई] कहिन है, उ कहिन; मोका [रबीअह बिन यजीद] बताइस है। -एक अउर तरीका से ई कहा गा है- [अबू अमरू] से [बकिया] से [अमरू बिन उथमान बिन सैद] -अर्थात अल औजाई- [रबिया बिन यजीद] से [अब्दुल्लाह बिन अद दैलामी] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन, 'मैं [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल ऐश] से उनके बगीचा मा मिला, जेका अल वथ, तइफ क्षेत्र मा कहा जात है। उ समय उ एक कुरैश आदमी का हाथ पकड़े रहे जेकरे ऊपर खमेर पीये का आरोप रहा। तब उन्होंने कहा कि एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को कहते सुना है कि जो बस एक बार खामेर पी लेगा, चालीस दिन तक उसकी पश्चाताप नहीं मानी जायेगी। अगर उई पश्चाताप करिहैं तौ अल्लाह ओका स्वीकार करिहैं, लेकिन अगर उई दुहराइहैं तौ चालीस दिन तक ओनकै पश्चाताप स्वीकार नाइ कीन जाई। अगर उ पश्चाताप करिहैं तौ अल्लाह ओकर पश्चाताप स्वीकार करिहैं, अऊर अगर उ फिर से दोहराइहैं तौ अल्लाह का हक है कि उ ओका क़यामत के दिन नरक के लोगन के गंदे पसीने से पिलावै'। ई लफाड्ज अमरू से अहै।

Hadith

Imam Nasa'i : 5576

أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ عَنْ مَالِكٍ وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ وَاللَّفْظُ لَهُ عَنْ ابْنِ الْقَاسِمِ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ لَمْ يَتُبْ مِنْهَا حُرِمَهَا فِي الْآخِرَةِ

हमका [कुतैबा] [मलिक] अऊर [अल हरिथ बिन मिसकिन] से उनके उपस्थिति मा पढ़ के उपदेश देय के बाद - हम भी सुनेन, अऊर ई उनसे लफादज़ है- [इब्नुल कासिम] से उ कहिन; ने [इब्न उमर] से [नफी'] से [मलिक] से कहा है, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जे ई दुनिया मा खमेर पीत है अऊर ओसे पश्चाताप करै का समय नाहीं मिला है, अल्लाह ओका परलोक मा मना कर देई'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5577

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ عَنْ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ نُبَيْطٍ عَنْ جَابَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍوعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ مَنَّانٌ وَلَا عَاقٌّ وَلَا مُدْمِنُ خَمْرٍ

हमका [मुहम्मद बिन बसिसियार] [मुहम्मद] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [स्यू'बाह] से [मंसूर] से [सलीम बिन अबू अल जुद] से [नुबैथ] से [जबान] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहिन है: 'कोऊ भी स्वर्ग मा नाहीं घुस जाई जे उपहारन के बारे मा गपशप करत है, लोग जे अपने माता-पिता के आज्ञा न मानत हैं - अऊर खमेर के आदी हैं।

Hadith

Imam Nasa'i : 5578

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فِي الدُّنْيَا فَمَاتَ وَهُوَ يُدْمِنُهَا لَمْ يَتُبْ مِنْهَا لَمْ يَشْرَبْهَا فِي الْآخِرَةِ

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [हम्मद बिन जैद] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; हमका [अय्यूब] से [नाफी'] से [इब्न उमर] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताइन है, उ कहिन: 'जे ई दुनिया मा खमेर पीत है, फिर नशा के स्थिति मा मर जात है अऊर ओसे पश्चाताप नाहीं किहिस है, तब उ परलोक मा नाहीं पीई'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5579

أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ دُرُسْتَ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ شَرِبَ الْخَمْرَ فِي الدُّنْيَا فَمَاتَ وَهُوَ يُدْمِنُهَا لَمْ يَشْرَبْهَا فِي الْآخِرَةِ

हमका [यह्या बिन दुरुस्ता] सूचित कइके उ कहिन; हमका [हम्मद] से [अय्यूब] से [नफी'] से [इब्न उमर? रदलियाहु अन्हुमा] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे ई दुनिया मा खमेर पीत है, फिर एकर लत मा रहत मर जात है, उ परलोक मा न पीई'।

Hadith

Imam Nasa'i : 5580

أَخْبَرَنَا سُوَيْدٌ قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ يَحْيَى عَنْ الضَّحَّاكِ قَالَمَنْ مَاتَ مُدْمِنًا لِلْخَمْرِ نُضِحَ فِي وَجْهِهِ بِالْحَمِيمِ حِينَ يُفَارِقُ الدُّنْيَا

हमका [सुवैद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] [अल हसन बिन यह्या] से [अदल दलहक] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन, 'जे शराब पीये के आदी है, जब उ मर जाई तौ ओकरे चेहरा पर गर्म पानी छिड़का जाई'।