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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
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इमाम तिर्मिदज़ी (الإمام الترمذي) - 3891 हदीस

संभोग के बाद स्नान करने की बाध्यता

इमाम तिर्मिदज़ी : 101

حَدَّثَنَا أَبُو مُوسَى مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْإِذَا جَاوَزَ الْخِتَانُ الْخِتَانَ فَقَدْ وَجَبَ الْغُسْلُ فَعَلْتُهُ أَنَا وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاغْتَسَلْنَاقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَرَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ

हमें बताया गया है [अबू मूसा मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने कहा; हमें बताया है [अल वालिद बिन मुस्लिम] ने [अल औज़ाई] से [अब्दुर्रहमान बिन अल कोसिम] से [अपने पिता] से ['ऐस्या] से उन्होंने कहा; "अगर खतना खतने से मिलता है तो नहाना ज़रूरी है। मैंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ ऐसा किया था, फिर हमने जुनूब से नहाया।" उन्होंने कहा; "इस अध्याय में अबू हुरैरा, अब्दुल्लाह बिन उमर और रफी बिन खादिज का भी इतिहास है।"

यदि खतना के बाद खतना हो तो स्नान करने की बाध्यता

इमाम तिर्मिदज़ी : 102

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيِّبِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا جَاوَزَ الْخِتَانُ الْخِتَانَ وَجَبَ الْغُسْلُقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ عَنْ عَائِشَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ إِذَا جَاوَزَ الْخِتَانُ الْخِتَانَ فَقَدْ وَجَبَ الْغُسْلُ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهُمْ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَعُثْمَانُ وَعَلِيٌّ وَعَائِشَةُ وَالْفُقَهَاءِ مِنْ التَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ مِثْلِ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ قَالُوا إِذَا الْتَقَى الْخِتَانَانِ وَجَبَ الْغُسْلُ

[हन्नाद] ने हमें वर्णित किया है; [वाकी] ने हमें [सुफियान] से [अली बिन ज़ैद] से [सईद बिन अल मुसय्यब] से ['आयशा] से वर्णित किया है, उन्होंने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यदि खतना खतने से अधिक है, तो स्नान अनिवार्य है।" अबू ईसा ने कहा; "'आयशा की यह हदीस हसन सहीह है।" उन्होंने कहा; "यह हदीस कई तरीकों से 'आयशा' से वर्णित की गई है, अर्थात् हदीस, "यदि खतना खतने से अधिक है, तो स्नान अनिवार्य है।" यह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों में से अधिकांश विद्वानों की राय है, जैसे अबू बक्र, उमर, उस्मान, अली और 'आयशा। और फुकहा ताबीन और उनके बाद के लोगों में से भी जैसे सुफियान अत्स त्सौरी, सयाफी, अहमद और इसहाक। उन्होंने कहा; "अगर खतना खतने से मिलता है तो नहाना ज़रूरी है।"

इस्लाम की शुरुआत में सपनों के कारण स्नान करना एक राहत थी

इमाम तिर्मिदज़ी : 103

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا يُونُسُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ قَالَإِنَّمَا كَانَ الْمَاءُ مِنْ الْمَاءِ رُخْصَةً فِي أَوَّلِ الْإِسْلَامِ ثُمَّ نُهِيَ عَنْهَاحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَإِنَّمَا كَانَ الْمَاءُ مِنْ الْمَاءِ فِي أَوَّلِ الْإِسْلَامِ ثُمَّ نُسِخَ بَعْدَ ذَلِكَ وَهَكَذَا رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهُمْ أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ وَرَافِعُ بْنُ خَدِيجٍ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ عَلَى أَنَّهُ إِذَا جَامَعَ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ فِي الْفَرْجِ وَجَبَ عَلَيْهِمَا الْغُسْلُ وَإِنْ لَمْ يُنْزِلَا

हमें बताया है [अहमद बिन मानी'] ने कहा; हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन अल मुबारक] ने कहा; हमें [यूनुस बिन यज़ीद] ने [अज़ ज़ुहरी] से [साहल बिन साद] से [उबै बिन का'ब] से बताया है उसने कहा; "पानी (स्नान) का अस्तित्व क्योंकि पानी (वीर्य) मूल रूप से इस्लाम के शुरुआती दिनों में एक राहत था, उसके बाद इसे निषिद्ध कर दिया गया।" हमें बताया है [अहमद बिन मानी'] ने कहा; हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन अल मुबारक] ने कहा; हमें [ममार] ने [अज़ ज़ुहरी] से इस तरह की रिवायत दी है, जैसा कि हदीस में है।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है, पानी की मौजूदगी क्योंकि पानी सिर्फ़ इस्लाम के शुरुआती दिनों में था, उसके बाद इसे हराम कर दिया गया।" इसी तरह, कुछ लोगों ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों से यह हदीस सुनाई है, उनमें उबै बिन कअब और रफ़ी बिन खुदिज शामिल हैं। कई जानकार इस हदीस पर अमल करते हैं, कि अगर कोई आदमी अपनी पत्नी के प्राइवेट पार्ट में जमा करता है, तो नहाना ज़रूरी है, भले ही सीमेन न निकले।"

स्वप्न में जल (वीर्य) के कारण जल (स्नान) का अस्तित्व

इमाम तिर्मिदज़ी : 104

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا شَرِيكٌ عَنْ أَبِي الْجَحَّافِ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَإِنَّمَا الْمَاءُ مِنْ الْمَاءِ فِي الِاحْتِلَامِقَالَ أَبُو عِيسَى سَمِعْت الْجَارُودَ يَقُولُ سَمِعْتُ وَكِيعًا يَقُولُ لَمْ نَجِدْ هَذَا الْحَدِيثَ إِلَّا عِنْدَ شَرِيكٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَأَبُو الْجَحَّافِ اسْمُهُ دَاوُدُ بْنُ أَبِي عَوْفٍ وَيُرْوَى عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الْجَحَّافِ وَكَانَ مَرْضِيًّا قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ وَعَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ وَالزُّبَيْرِ وَطَلْحَةَ وَأَبِي أَيُّوبَ وَأَبِي سَعِيدٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ الْمَاءُ مِنْ الْمَاءِ

हमें बताया है [अली बिन हुज्र] ने कहा; हमें [शरीक] ने [अबू अल हज्जफ] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से उपदेश किया है उन्होंने कहा; "सपने में पानी (वीर्य) के कारण पानी (स्नान) है।" अबू ईसा ने कहा; "मैंने अल जरूद को कहते सुना; "मैंने वाकी को कहते सुना; "हमें यह हदीस शरीक के अलावा और किसी से नहीं मिली।" अबू ईसा ने कहा; "अबू अल जहफ का नाम दाऊद बिन अबू औफ है।" यह हदीस सुफियान अत्स त्सौरी से भी वर्णित है। उन्होंने कहा; "हमने अबू अल जहफ से कहा है, वह एक सम्मानित व्यक्ति हैं।" अबू ईसा ने कहा; "इस चैप्टर में उस्मान बिन अफ़्फ़ान, अली बिन अबू तालिब, अज़ ज़ुबैर, थलहा, अबू अय्यूब और अबू सईद से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक रिवायत भी है, कि उन्होंने कहा: "पानी (नहाना) पानी (सीमेन) की वजह से है।"

जो लोग गीले हो जाएं उन्हें नहलाएं

इमाम तिर्मिदज़ी : 105

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ خَالِدٍ الْخَيَّاطُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ هُوَ الْعُمَرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الرَّجُلِ يَجِدُ الْبَلَلَ وَلَا يَذْكُرُ احْتِلَامًا قَالَ يَغْتَسِلُ وَعَنْ الرَّجُلِ يَرَى أَنَّهُ قَدْ احْتَلَمَ وَلَمْ يَجِدْ بَلَلًا قَالَ لَا غُسْلَ عَلَيْهِ قَالَتْ أُمُّ سَلَمَةَ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ عَلَى الْمَرْأَةِ تَرَى ذَلِكَ غُسْلٌ قَالَ نَعَمْ إِنَّ النِّسَاءَ شَقَائِقُ الرِّجَالِقَالَ أَبُو عِيسَى وَإِنَّمَا رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ حَدِيثَ عَائِشَةَ فِي الرَّجُلِ يَجِدُ الْبَلَلَ وَلَا يَذْكُرُ احْتِلَامًا وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ ضَعَّفَهُ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ مِنْ قِبَلِ حِفْظِهِ فِي الْحَدِيثِ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ إِذَا اسْتَيْقَظَ الرَّجُلُ فَرَأَى بِلَّةً أَنَّهُ يَغْتَسِلُ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَأَحْمَدَ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ إِنَّمَا يَجِبُ عَلَيْهِ الْغُسْلُ إِذَا كَانَتْ الْبِلَّةُ بِلَّةَ نُطْفَةٍ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَإِسْحَقَ وَإِذَا رَأَى احْتِلَامًا وَلَمْ يَرَ بِلَّةً فَلَا غُسْلَ عَلَيْهِ عِنْدَ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ

हमसे [अहमद बिन मानी] ने वर्णित किया है; हमसे [हम्मद बिन खालिद अल खय्याथ] ने [अब्दुल्ला बिन उमर] से - अर्थात अल उमरी - [उबैदुल्ला बिन उमर] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से ['ऐस्या] से वर्णित किया है उसने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक बार एक ऐसे आदमी के बारे में पूछा गया जो भीग गया था लेकिन उसे सपना याद नहीं था, उन्होंने जवाब दिया: "उसे नहाना चाहिए।" और उनसे एक ऐसे आदमी के बारे में भी पूछा गया जिसने सपना देखा लेकिन कुछ भी गीला (सीमेन) नहीं हुआ, उन्होंने जवाब दिया: "उसे नहाना ज़रूरी नहीं था।" उम्म सलमा ने पूछा, "ऐ रसूलल्लाह, अगर कोई औरत ऐसा सपना देखे, तो क्या उसे भी नहाना चाहिए?" उन्होंने जवाब दिया: "हाँ, क्योंकि औरतें मर्दों की बहनें होती हैं।" अबू ईसा ने कहा; "जिसने यह हदीस सुनाई, यानी 'ऐस्याह की हदीस जिसमें एक आदमी के बारे में बताया गया था जो कुछ गीला हो गया था, लेकिन उसे याद नहीं था कि उसने सपना देखा था या नहीं, वह उबादिदुल्लाह बिन उमर से अब्दुल्ला बिन उमर थे। हालाँकि, याह्या बिन सईद ने अब्दुल्ला बिन उमर को उनकी हदीस याद करने में कमज़ोर कर दिया। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों और उनके मानने वालों में से कई जानकारों की यह राय है कि अगर कोई आदमी सुबह उठे और उसे कुछ गीला दिखे, तो उसे नहाना ज़रूरी है। यही राय सुफ़यान अत्स त्सौरी और अहमद ने भी रखी थी। और मानने वालों में से कुछ जानकारों ने कहा कि अगर गीलापन सीमेन है तो इंसान को नहाना ज़रूरी है। यह सयाफ़ी और इसहाक की राय है। अगर कोई इंसान सपना देखता है लेकिन उसे कुछ गीला (सीमेन) नहीं दिखता, तो उसे नहाना ज़रूरी नहीं है।

मैडज़ी को वुडलू की आवश्यकता होती है, मणि को स्नान की आवश्यकता होती है

इमाम तिर्मिदज़ी : 106

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو السَّوَّاقُ الْبَلْخِيُّ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ ح قَالَ و حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْجُعْفِيُّ عَنْ زَائِدَةَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّ قَالَ سَأَلْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْمَذْيِ فَقَالَ مِنْ الْمَذْيِ الْوُضُوءُ وَمِنْ الْمَنِيِّ الْغُسْلُ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ الْمِقْدَادِ بْنِ الْأَسْوَدِ وَأُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ مِنْ الْمَذْيِ الْوُضُوءُ وَمِنْ الْمَنِيِّ الْغُسْلُ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ

मुहम्मद बिन अमरू अस सवाक अल बल्खी ने हमसे कहा; हुसैय्यम ने हमसे कहा [यज़ीद बिन अबू ज़ियाद] से, और उन्होंने कहा; महमूद बिन घैलन ने हमसे कहा; हुसैन अल जुफी ने हमसे कहा [ज़ैदा] से [यज़ीद बिन अबू ज़ियाद] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [अली] से, उन्होंने कहा; "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मद्ज़ी के बारे में पूछा, और उन्होंने जवाब दिया: "मज़्ज़ी निकालने के लिए वज़ू करना ज़रूरी है, और वीर्य निकालने के लिए स्नान करना ज़रूरी है।" उन्होंने कहा; "इस अध्याय में अल मिकदाद बिन अल असवद और उबै बिन कअब से भी एक रिवायत है।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन असली है। यह हदीस अली इब्न अबू तालिब से भी रिवायत की गई है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक और रिवायत के ज़रिए, यानी हदीस, "मज़ीह निकलने पर वुज़ू ज़रूरी है, और सीमेन निकलने पर गुस्ल ज़रूरी है।" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों, ताबीन और उनके बाद आने वालों में से ज़्यादातर जानकारों की यही राय है। यही राय सुफ़यान, सयाफ़ी, अहमद और इसहाक की भी थी।

माडज़ी के लिए पर्याप्त वुडलू, कपड़े के लिए पानी का छिड़काव

इमाम तिर्मिदज़ी : 107

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ عُبَيْدٍ هُوَ ابْنُ السَّبَّاقِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ قَالَ كُنْتُ أَلْقَى مِنْ الْمَذْيِ شِدَّةً وَعَنَاءً فَكُنْتُ أُكْثِرُ مِنْهُ الْغُسْلَ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَسَأَلْتُهُ عَنْهُ فَقَالَ إِنَّمَا يُجْزِئُكَ مِنْ ذَلِكَ الْوُضُوءُ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ بِمَا يُصِيبُ ثَوْبِي مِنْهُ قَالَ يَكْفِيكَ أَنْ تَأْخُذَ كَفًّا مِنْ مَاءٍ فَتَنْضَحَ بِهِ ثَوْبَكَ حَيْثُ تَرَى أَنَّهُ أَصَابَ مِنْهُ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَلَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ فِي الْمَذْيِ مِثْلَ هَذَا وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الْمَذْيِ يُصِيبُ الثَّوْبَ فَقَالَ بَعْضُهُمْ لَا يُجْزِئُ إِلَّا الْغَسْلُ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَإِسْحَقَ وَقَالَ بَعْضُهُمْ يُجْزِئُهُ النَّضْحُ و قَالَ أَحْمَدُ أَرْجُو أَنْ يُجْزِئَهُ النَّضْحُ بِالْمَاءِ

[हन्नाद] ने हमें बताया है; [अब्दा] ने हमें [मुहम्मद बिन इसहाक] से [सईद बिन उबैद] से बताया है - यानी इब्न अस सब्बाक, [अपने पिता] से [सहल बिन हुनैफ] से उन्होंने कहा; "मैं अक्सर थकान की वजह से मदी निकालता हूँ, यहाँ तक कि मैं अक्सर उसी वजह से नहा लेता हूँ। फिर मैंने बताया और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इसके बारे में पूछा, उन्होंने जवाब दिया: "तुम्हारे लिए वुज़ू करना काफ़ी है।" फिर मैंने फिर पूछा, "अल्लाह के रसूल, उस कपड़े का क्या जो लगा है?" उन्होंने जवाब दिया: "तुम्हारे लिए हथेली जितना पानी लेना काफ़ी है, फिर उसे लगे हुए हिस्से पर छिड़कना।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है। और हम मुहम्मद बिन इसहाक की मदी के बारे में हदीस के अलावा हदीस नहीं जानते। कपड़े पर लगने वाली मदी के बारे में विद्वान अभी भी अलग-अलग राय रखते हैं, उनमें से कुछ कहते हैं: "नहाना ज़रूरी है।" यह शफीई और इसहाक की राय है। जबकि दूसरों ने कहा, "इस पर पानी छिड़कना ही काफी है।" और अहमद ने कहा; "मुझे उम्मीद है कि इस पर पानी छिड़कना ही काफी है।"

मैड्ज़ी को सिर्फ़ पानी में डुबाना है, धोना नहीं है

इमाम तिर्मिदज़ी : 108

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ قَالَ ضَافَ عَائِشَةَ ضَيْفٌ فَأَمَرَتْ لَهُ بِمِلْحَفَةٍ صَفْرَاءَ فَنَامَ فِيهَا فَاحْتَلَمَ فَاسْتَحْيَا أَنْ يُرْسِلَ بِهَا وَبِهَا أَثَرُ الِاحْتِلَامِ فَغَمَسَهَا فِي الْمَاءِ ثُمَّ أَرْسَلَ بِهَا فَقَالَتْ عَائِشَةُ لِمَ أَفْسَدَ عَلَيْنَا ثَوْبَنَا إِنَّمَا كَانَ يَكْفِيهِ أَنْ يَفْرُكَهُ بِأَصَابِعِهِ وَرُبَّمَا فَرَكْتُهُ مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِأَصَابِعِي قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ مِنْ الْفُقَهَاءِ مِثْلِ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ قَالُوا فِي الْمَنِيِّ يُصِيبُ الثَّوْبَ يُجْزِئُهُ الْفَرْكُ وَإِنْ لَمْ يُغْسَلْ وَهَكَذَا رُوِيَ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ عَائِشَةَ مِثْلَ رِوَايَةِ الْأَعْمَشِ وَرَوَى أَبُو مَعْشَرٍ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ وَحَدِيثُ الْأَعْمَشِ أَصَحُّ

हमें [हन्नाद] ने बताया है; हमें [अबू मुअविया] ने [अल अमासी] से [इब्राहिम] से [हम्माम बिन अल हारिथ] से बताया है उन्होंने कहा; "एक मेहमान था जो 'आइस्याह' के घर आया था, फिर 'आइस्याह ने उसे एक पीले कंबल के साथ सोने के लिए कहा, इसलिए वह उस कंबल के साथ सो गया। मेहमान ने एक गीला सपना देखा, और वह कंबल वापस करने में शर्मिंदा था क्योंकि इसमें शुक्राणु के निशान थे, इसलिए उसने इसे पानी में डुबो दिया। उसके बाद ही उसने इसे 'आइस्याह' को लौटा दिया। तो ['आइस्याह] ने कहा, "उसने हमारे कपड़े को क्यों खराब कर दिया (गीला कर दिया)? भले ही यह उसके लिए अपनी उंगलियों से निशानों को खुरचने के लिए पर्याप्त था, मैंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कपड़े को अपनी उंगलियों से खुरच दिया था।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन प्रामाणिक है। यह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कई साथियों, ताबीन और उनके बाद फुकाहा में से लोगों की राय है। जैसे सुफियान अत्स त्सौरी, सयाफी, अहमद और इसहाक। वे कपड़े पर वीर्य के बारे में कहते हैं, "उसे खुरचना ही काफी है, भले ही वह उसे धोए नहीं।" इसे [मंसूर] से [हम्माम बिन अल हारिथ] से ['ऐस्या] से इस तरह बताया गया है। जैसे अल अमासी का इतिहास। और [अबू मसियार] ने यह हदीस [इब्राहिम] से [अल असवद] से ['ऐस्या] से सुनाई है। और अल अमासी की हदीस ज़्यादा असली है।"

वीर्य को खुरचने से कपड़े पर अवशेष रह जाता है

इमाम तिर्मिदज़ी : 109

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونِ بْنِ مِهْرَانَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا غَسَلَتْ مَنِيًّا مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَحَدِيثُ عَائِشَةَ أَنَّهَا غَسَلَتْ مَنِيًّا مِنْ ثَوْبِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ بِمُخَالِفٍ لِحَدِيثِ الْفَرْكِ لِأَنَّهُ وَإِنْ كَانَ الْفَرْكُ يُجْزِئُ فَقَدْ يُسْتَحَبُّ لِلرَّجُلِ أَنْ لَا يُرَى عَلَى ثَوْبِهِ أَثَرُهُ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ الْمَنِيُّ بِمَنْزِلَةِ الْمُخَاطِ فَأَمِطْهُ عَنْكَ وَلَوْ بِإِذْخِرَةٍ

[अहमद बिन मानी] ने कहा; [अबू मुअविया] ने हमें [अमरू बिन मैमुन बिन मिहरान] से [सुलेमान बिन यासर] से [आयशा] से बताया कि उन्होंने एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कपड़ों पर लगे सीमेन के निशान धोए थे।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है। इस चैप्टर में इब्न अब्बास का भी एक रिवायत है। जबकि आयशा की हदीस, कि उन्होंने एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कपड़ों पर लगे सीमेन के निशान धोए थे, खुरचने की हदीस से उलटी नहीं है। क्योंकि भले ही खुरचना काफी हो, कभी-कभी आदमी को यह पसंद नहीं आता कि उसके कपड़ों पर निशान अभी भी दिख रहे हों। इब्न अब्बास ने कहा; "सीमेन नाक के पानी जैसा होता है, इसलिए उसे इसे इद्ज़खीर (लकड़ी) से भी साफ करना चाहिए।"

जुनब में बिना पानी छुए सोना

इमाम तिर्मिदज़ी : 110

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنَامُ وَهُوَ جُنُبٌ وَلَا يَمَسُّ مَاءً حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفِيانَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ نَحْوَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا قَوْلُ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيِّبِ وَغَيْرِهِ وَقَدْ رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ كَانَ يَتَوَضَّأُ قَبْلَ أَنْ يَنَامَ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْأَسْوَدِ وَقَدْ رَوَى عَنْ أَبِي إِسْحَقَ هَذَا الْحَدِيثَ شُعْبَةُ وَالثَّوْرِيُّ وَغَيْرُ وَاحِدٍ وَيَرَوْنَ أَنَّ هَذَا غَلَطٌ مِنْ أَبِي إِسْحَقَ

हन्नाद ने हमसे कहा; अबू बक्र बिन अय्यासी ने हमसे कहा, अल अमासी से, अबू इसहाक से, अल असवद से, ऐस्याह से, उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार जुनुब में सो गए, और उन्होंने पानी को हाथ नहीं लगाया।" वाकी ने हमसे कहा, सुफ़यान से, अबू इसहाक से, ऐसा ही। अबू ईसा ने कहा; "यह सईद बिन मुसय्यब और दूसरों के शब्द हैं।" यह हदीस सिर्फ़ एक आदमी ने नहीं, अल असवद से, ऐस्याह से, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनाई है, कि उन्होंने सोने से पहले वज़ू किया। और यह अबू इसहाक की अल असवद से हदीस से ज़्यादा असली है। यह हदीस अबू इसहाक से स्यूना, अत्स त्सौरी और उनके अलावा और लोगों ने भी सुनाई है। और उन्होंने माना कि यह अबू इसहाक की गलती थी।"

संक्षिप्त नाम के साथ स्लीपिंग जुनूब

इमाम तिर्मिदज़ी : 111

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَأَنَّهُ سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيَنَامُ أَحَدُنَا وَهُوَ جُنُبٌ قَالَ نَعَمْ إِذَا تَوَضَّأَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَمَّارٍ وَعَائِشَةَ وَجَابِرٍ وَأَبِي سَعِيدٍ وَأُمِّ سَلَمَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عُمَرَ أَحْسَنُ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَأَصَحُّ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ قَالُوا إِذَا أَرَادَ الْجُنُبُ أَنْ يَنَامَ تَوَضَّأَ قَبْلَ أَنْ يَنَامَ

मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना ने हमें बताया है; याह्या बिन सईद ने [उबैदुल्लाह बिन उमर] से [नफी] से [इब्न उमर] से [उमर] से बताया है कि उन्होंने एक बार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा, "क्या हममें से कोई जुनुब की हालत में सो सकता है?" उन्होंने जवाब दिया: "हाँ, जब तक वह वज़ू करता है।" उन्होंने कहा; "इस अध्याय में अम्मार, ऐश्या, जाबिर, अबू सईद और उम्म सलमा की भी रिवायतें हैं।" अबू ईसा ने कहा; "इस अध्याय में उमर की हदीस सबसे अच्छी और सबसे असली है, यह राय सुफ़यान अत्स तौसरी, बिन अल मुबारक, अहमद और इसहाक ने ली थी। उन्होंने कहा; "अगर कोई जुनुब सोना चाहता है, तो उसे वज़ू करना चाहिए।"

मुस्लिम लोगों को प्रतिरक्षा नहीं है

इमाम तिर्मिदज़ी : 112

حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ الطَّوِيلُ عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُزَنِيِّ عَنْ أَبِي رَافِعٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقِيَهُ وَهُوَ جُنُبٌ قَالَ فَانْبَجَسْتُ أَيْ فَانْخَنَسْتُ فَاغْتَسَلْتُ ثُمَّ جِئْتُ فَقَالَ أَيْنَ كُنْتَ أَوْ أَيْنَ ذَهَبْتَ قُلْتُ إِنِّي كُنْتُ جُنُبًا قَالَ إِنَّ الْمُسْلِمَ لَا يَنْجُسُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ حُذَيْفَةَ وَابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَمَعْنَى قَوْلِهِ فَانْخَنَسْتُ يَعْنِي تَنَحَّيْتُ عَنْهُ وَقَدْ رَخَّصَ غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي مُصَافَحَةِ الْجُنُبِ وَلَمْ يَرَوْا بِعَرَقِ الْجُنُبِ وَالْحَائِضِ بَأْسًا

हमें बताया है [इस्हाक बिन मंसूर] ने कहा; हमें बताया है [याह्या बिन सईद अल क़थथन] ने कहा; हमें बताया है [हुमैद अथ थवील] [बक्र बिन अब्दुल्लाह अल मुज़ानी] से [अबू रफी] से [अबू हुरैरा] से कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे मुलाकात की जब वह जुनुब की हालत में थे। अबू हुरैरा ने कहा; "फिर मैं छिप गया और स्नान किया, फिर मैं वापस आया।" उन्होंने पूछा: "तुम कहाँ हो?" या उन्होंने कहा: "तुम कहाँ जा रहे हो?" मैंने उत्तर दिया, "वास्तव में मैं जुनुब की हालत में हूं," उन्होंने कहा: "मुसलमान अशुद्ध नहीं हैं।" उन्होंने कहा; "इस अध्याय में हुदज़ैफा और इब्न अब्बास का एक इतिहास भी है।" अबू ईसा ने कहा; "अबू हुरैरा की यह हदीस हसन असली है। "मैं छिपता हूँ" का मतलब है "मैं उससे दूर रहता हूँ"। और सिर्फ़ विद्वान ही जुनब लोगों से हाथ मिलाने की इजाज़त के बारे में राहत नहीं देते, और वे जुनब लोगों या पीरियड्स वाली महिलाओं के पसीने के बारे में कोई मनाही नहीं देखते।"

अगर महिलाओं को स्वप्नदोष हो तो उन्हें अवश्य नहाना चाहिए

इमाम तिर्मिदज़ी : 113

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَتْجَاءَتْ أُمُّ سُلَيْمٍ بِنْتُ مِلْحَانَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ لَا يَسْتَحْيِي مِنْ الْحَقِّ فَهَلْ عَلَى الْمَرْأَةِ تَعْنِي غُسْلًا إِذَا هِيَ رَأَتْ فِي الْمَنَامِ مِثْلَ مَا يَرَى الرَّجُلُ قَالَ نَعَمْ إِذَا هِيَ رَأَتْ الْمَاءَ فَلْتَغْتَسِلْ قَالَتْ أُمُّ سَلَمَةَ قُلْتُ لَهَا فَضَحْتِ النِّسَاءَ يَا أُمَّ سُلَيْمٍقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ الْفُقَهَاءِ أَنَّ الْمَرْأَةَ إِذَا رَأَتْ فِي الْمَنَامِ مِثْلَ مَا يَرَى الرَّجُلُ فَأَنْزَلَتْ أَنَّ عَلَيْهَا الْغُسْلَ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَالشَّافِعِيُّ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ سُلَيْمٍ وَخَوْلَةَ وَعَائِشَةَ وَأَنَسٍ

हमें बताया है [इब्न अबू उमर] ने कहा; हमें बताया है [सुफ़यान बिन उयैना] [हिस्याम बिन उरवाह] से [उनके पिता] से [ज़ैनह बिन्त अबू सलमा] से [उम्मू सलमा] से उन्होंने कहा; "उम्म सुलैम बिन्त मिल्हान पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आईं और कहा: "ऐ रसूलुल्लाह, अल्लाह सच से शर्मिंदा नहीं है, क्या एक औरत भी नहाना ज़रूरी है अगर वह मर्द की तरह सपने देखती है?" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है। यह ज़्यादातर फुकाहा की राय है, कि अगर कोई औरत मर्द की तरह सपने देखती है, जब तक कि वह पानी न छोड़ने लगे, तो उसे नहाना ज़रूरी है। यह राय सुफ़यान अत्स त्सौरी और सयाफ़ी ने भी ली है।" उन्होंने कहा; "इस चैप्टर में उम्म सुलैम, खौला, ऐस्या और अनस का भी एक इतिहास है।"

जुनूब के दौरान पत्नी को छूना

इमाम तिर्मिदज़ी : 114

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ حُرَيْثٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْرُبَّمَا اغْتَسَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ الْجَنَابَةِ ثُمَّ جَاءَ فَاسْتَدْفَأَ بِي فَضَمَمْتُهُ إِلَيَّ وَلَمْ أَغْتَسِلْقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ لَيْسَ بِإِسْنَادِهِ بَأْسٌ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ وَالتَّابِعِينَ أَنَّ الرَّجُلَ إِذَا اغْتَسَلَ فَلَا بَأْسَ بِأَنْ يَسْتَدْفِئَ بِامْرَأَتِهِ وَيَنَامَ مَعَهَا قَبْلَ أَنْ تَغْتَسِلَ الْمَرْأَةُ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ

हन्नाद ने हमें बताया है; वाकी ने हमें बताया है [हुरैत] से [अश स्याबी] से [मसरुक] से [ऐस्या] से उसने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जुनूब से नहाया फिर वह अपने शरीर को गर्म करने आए, तो मैंने उन्हें गले लगा लिया जबकि मैंने स्नान नहीं किया था।" अबू ईसा ने कहा; "इस हदीस में कोई समस्या नहीं है। इस हदीस में कोई समस्या नहीं है। यह विज्ञान के विशेषज्ञों में से कई लोगों की राय है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और ताबीन के साथियों में से, उन्होंने कहा: "अगर कोई आदमी नहा चुका है, तो उसके लिए अपनी पत्नी के शरीर को गर्म करने और उसके नहाने से पहले उसके साथ सोने में कुछ भी गलत नहीं है।" यह सुफियान अत्स त्सौरी, सयाफी, अहमद और इसहाक की राय है।

जब पानी न हो तो धूल एक शुद्धिकरण उपकरण के रूप में

इमाम तिर्मिदज़ी : 115

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ بُجْدَانَ عَنْ أَبِي ذَرٍّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الصَّعِيدَ الطَّيِّبَ طَهُورُ الْمُسْلِمِ وَإِنْ لَمْ يَجِدْ الْمَاءَ عَشْرَ سِنِينَ فَإِذَا وَجَدَ الْمَاءَ فَلْيُمِسَّهُ بَشَرَتَهُ فَإِنَّ ذَلِكَ خَيْرٌو قَالَ مَحْمُودٌ فِي حَدِيثِهِ إِنَّ الصَّعِيدَ الطَّيِّبَ وَضُوءُ الْمُسْلِمِ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَعِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَكَذَا رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ بُجْدَانَ عَنْ أَبِي ذَرٍّ وَقَدْ رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ أَيُّوبُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ رَجُلٍ مِنْ بَنِي عَامِرٍ عَنْ أَبِي ذَرٍّ وَلَمْ يُسَمِّهِ قَالَ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ الْفُقَهَاءِ أَنَّ الْجُنُبَ وَالْحَائِضَ إِذَا لَمْ يَجِدَا الْمَاءَ تَيَمَّمَا وَصَلَّيَا وَيُرْوَى عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ أَنَّهُ كَانَ لَا يَرَى التَّيَمُّمَ لِلْجُنُبِ وَإِنْ لَمْ يَجِدْ الْمَاءَ وَيُرْوَى عَنْهُ أَنَّهُ رَجَعَ عَنْ قَوْلِهِ فَقَالَ يَتَيَمَّمُ إِذَا لَمْ يَجِدْ الْمَاءَ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَمَالِكٌ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ

मुहम्मद बिन बसिस्यार और महमूद बिन घैलन ने हमसे कहा है कि उन्होंने कहा; अबू अहमद अज़ ज़ुबैरी ने हमसे कहा है कि उन्होंने कहा; सुफ़यान ने हमें बताया है कि खालिद अल हद्ज़ज़ा ने अबू क़िलाबा से अमरू बिन बुजदान से अबू ज़ार से कहा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अच्छी धूल एक मुसलमान के लिए पवित्रता का ज़रिया है, भले ही उसे दस साल से पानी न मिला हो। इसलिए अगर उसके पास पानी है, तो उसे इसे अपनी त्वचा पर मलना चाहिए क्योंकि यह बेहतर है।" महमूद ने अपनी हदीस में कहा, "अच्छी धूल एक मुसलमान के लिए पवित्रता का ज़रिया है।" उन्होंने कहा; "इस अध्याय में अबू हुरैरा, अब्दुल्ला बिन अमरू और इमरान बिन हुसैन का भी इतिहास है।" अबू ईसा ने कहा; "इस तरह, केवल एक व्यक्ति ने अबू क़िलाबा से खालिद अल हद्ज़ज़ा से, अबू ज़ार से अमरू बिन बुजदान से वर्णन नहीं किया।" [अय्यूब] ने यह हदीस [अबू क़िलाबा] से [बनी अमीर के एक आदमी] से [अबू ज़र] तक सुनाई, लेकिन उन्होंने अपना नाम नहीं बताया। उन्होंने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है। यह ज़्यादातर फ़क़ीह का कहना है, कि अगर कोई जुनुब हो और उसे पीरियड्स हों, अगर उसे पानी न मिले, तो उसे तयम्मुम करना चाहिए और फिर नमाज़ पढ़नी चाहिए।" इब्न मसूद से यह भी रिवायत है कि एक जुनुब तयम्मुम नहीं कर सकता, भले ही उसे पानी न मिले। लेकिन उनसे यह रिवायत है कि उन्होंने अपनी राय वापस ले ली, फिर उन्होंने कहा; "अगर उसे पानी न मिले तो वह तयम्मुम नहीं कर सकता।" यह राय सुफ़यान अत्स त्सौरी, मलिक, सयाफ़ी, अहमद और इसहाक ने ली थी।

महिलाओं को हर नमाज़ के बाद स्नान और वुज़ू करना ज़रूरी है

इमाम तिर्मिदज़ी : 116

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَعَبْدَةُ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْجَاءَتْ فَاطِمَةُ بِنْتُ أَبِي حُبَيْشٍ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي امْرَأَةٌ أُسْتَحَاضُ فَلَا أَطْهُرُ أَفَأَدَعُ الصَّلَاةَ قَالَ لَا إِنَّمَا ذَلِكَ عِرْقٌ وَلَيْسَتْ بِالْحَيْضَةِ فَإِذَا أَقْبَلَتْ الْحَيْضَةُ فَدَعِي الصَّلَاةَ وَإِذَا أَدْبَرَتْ فَاغْسِلِي عَنْكِ الدَّمَ وَصَلِّيقَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ فِي حَدِيثِهِ وَقَالَ تَوَضَّئِي لِكُلِّ صَلَاةٍ حَتَّى يَجِيءَ ذَلِكَ الْوَقْتُ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَمَالِكٌ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيُّ أَنَّ الْمُسْتَحَاضَةَ إِذَا جَاوَزَتْ أَيَّامَ أَقْرَائِهَا اغْتَسَلَتْ وَتَوَضَّأَتْ لِكُلِّ صَلَاةٍ

उन्होंने हमें सुनाया [हन्नाद] ने कहा; उन्होंने हमें सुनाया [वकी'] और [अब्दाह] और [अबू मुआविया] ने [हिशाम बिन उरवा] से, [उनके पिता] से, [आइशा] से, उन्होंने कहा; "फatimah बिन्त हुबैस पैगंबर, सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, के पास आईं और कहा; 'ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे इस्तिहदाह (रक्तस्राव) हो रहा है, और मैं शुद्ध अवस्था में नहीं हूँ। क्या मैं नमाज़ से परहेज़ कर सकती हूँ?' उन्होंने उत्तर दिया, 'नहीं, यह केवल बीमारी का खून है, मासिक धर्म का नहीं। जब मासिक धर्म का खून आए, तो नमाज़ छोड़ दो; जब वह रुक जाए, तो स्नान करो और अपने आप को खून से पवित्र करो, फिर नमाज़ पढ़ो।" अबू मुआविया ने अपनी रिवायत में कहा, "उस समय तक हर नमाज़ के लिए वुज़ू करो।" उन्होंने कहा, "इस अध्याय में उम्म सलामा से भी एक रिवायत है।" अबू ईसा ने कहा, "'आइशा की यह हदीस हसन सहीह दर्जे की है।" यह केवल पैगंबर, सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, के साथियों और ताबईन के एक विद्वान की राय नहीं है। यह राय सुफ्यान अल-थवरी, मालिक, इब्न अल-मुबारक और अल-शafi'ई की भी है, कि प्रसवोत्तर रक्तस्राव का अनुभव कर रही महिला को तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक उसके मासिक धर्म के दिन समाप्त न हो जाएं, फिर स्नान करे और प्रत्येक प्रार्थना के लिए वुजू करे।"

इस्तिहाज़ा महिलाओं के लिए शुद्धिकरण की प्रक्रिया

इमाम तिर्मिदज़ी : 117

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ أَبِي الْيَقْظَانِ عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ فِي الْمُسْتَحَاضَةِ تَدَعُ الصَّلَاةَ أَيَّامَ أَقْرَائِهَا الَّتِي كَانَتْ تَحِيضُ فِيهَا ثُمَّ تَغْتَسِلُ وَتَتَوَضَّأُ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍ وَتَصُومُ وَتُصَلِّيحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا شُرَيْكٌ نَحْوَهُ بِمَعْنَاهُ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ قَدْ تَفَرَّدَ بِهِ شَرِيكٌ عَنْ أَبِي الْيَقْظَانِ قَالَ وَسَأَلْتُ مُحَمَّدًا عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ فَقُلْتُ عَدِيُّ بْنُ ثَابِتٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ جَدُّ عَدِيٍّ مَا اسْمُهُ فَلَمْ يَعْرِفْ مُحَمَّدٌ اسْمَهُ وَذَكَرْتُ لِمُحَمَّدٍ قَوْلَ يَحْيَى بْنِ مَعِينٍ أَنَّ اسْمَهُ دِينَارٌ فَلَمْ يَعْبَأْ بِهِ و قَالَ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ فِي الْمُسْتَحَاضَةِ إِنْ اغْتَسَلَتْ لِكُلِّ صَلَاةٍ هُوَ أَحْوَطُ لَهَا وَإِنْ تَوَضَّأَتْ لِكُلِّ صَلَاةٍ أَجْزَأَهَا وَإِنْ جَمَعَتْ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ بِغُسْلٍ وَاحِدٍ أَجْزَأَهَا

कुतैबा ने हमें बताया है; शरीक ने हमें अबू अल यकज़ान से, अदी बिन साबित से, मेरे पिता से, उनके दादा से, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनाया है कि उन्होंने आराम कर रही महिलाओं के बारे में कहा: "जिस दिन उन्हें मासिक धर्म हो, उस दिन उन्हें नमाज़ छोड़ देनी चाहिए, उसके बाद उन्हें हर नमाज़ में नहाना और वज़ू करना चाहिए, रोज़ा रखना चाहिए और नमाज़ पढ़नी चाहिए।" अली बिन हुज्र ने हमें बताया कि सियारिक ने हमें एक हदीस सुनाई जिसका मतलब भी ऐसा ही था।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस सिर्फ़ सियारिक ने सुनाई है, अबू अल यकज़ान ने नहीं।" उन्होंने कहा; "मैंने मुहम्मद से इस हदीस के बारे में पूछा, मैंने कहा, अदी बिन साबित, उनके पिता से, उनके दादा से, उनके दादा का नाम क्या था?" लेकिन मुहम्मद को उनका नाम नहीं पता था। फिर मैंने मुहम्मद को याह्या बिन माइन की बातें बताईं कि उसका नाम दीनार है, लेकिन उसने इस पर ध्यान नहीं दिया।" अहमद और इसहाक ने उस औरत के बारे में कहा जो इस्तहादलाह करती है, "अगर वह हर नमाज़ के समय नहाती है तो उसके लिए ज़्यादा सावधानी है, अगर वह हर नमाज़ के समय वज़ू करती है तो यह उसके लिए सही है, और अगर वह दो नमाज़ों को एक नहा के साथ करती है तो यह भी उसके लिए सही है।"

भारी मासिक धर्म रक्त का अनुभव करने वाली महिलाओं के लिए फतवा

इमाम तिर्मिदज़ी : 118

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَامَرٍ الْعَقَدِيُّ حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ طَلْحَةَ عَنْ عَمِّهِ عِمْرَانَ بْنِ طَلْحَةَ عَنْ أُمِّهِ حَمْنَةَ بِنْتِ جَحْشٍ قَالَتْكُنْتُ أُسْتَحَاضُ حَيْضَةً كَثِيرَةً شَدِيدَةً فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَسْتَفْتِيهِ وَأُخْبِرُهُ فَوَجَدْتُهُ فِي بَيْتِ أُخْتِي زَيْنَبَ بِنْتِ جَحْشٍ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أُسْتَحَاضُ حَيْضَةً كَثِيرَةً شَدِيدَةً فَمَا تَأْمُرُنِي فِيهَا قَدْ مَنَعَتْنِي الصِّيَامَ وَالصَّلَاةَ قَالَ أَنْعَتُ لَكِ الْكُرْسُفَ فَإِنَّهُ يُذْهِبُ الدَّمَ قَالَتْ هُوَ أَكْثَرُ مِنْ ذَلِكَ قَالَ فَتَلَجَّمِي قَالَتْ هُوَ أَكْثَرُ مِنْ ذَلِكَ قَالَ فَاتَّخِذِي ثَوْبًا قَالَتْ هُوَ أَكْثَرُ مِنْ ذَلِكَ إِنَّمَا أَثُجُّ ثَجًّا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَآمُرُكِ بِأَمْرَيْنِ أَيَّهُمَا صَنَعْتِ أَجْزَأَ عَنْكِ فَإِنْ قَوِيتِ عَلَيْهِمَا فَأَنْتِ أَعْلَمُ فَقَالَ إِنَّمَا هِيَ رَكْضَةٌ مِنْ الشَّيْطَانِ فَتَحَيَّضِي سِتَّةَ أَيَّامٍ أَوْ سَبْعَةَ أَيَّامٍ فِي عِلْمِ اللَّهِ ثُمَّ اغْتَسِلِي فَإِذَا رَأَيْتِ أَنَّكِ قَدْ طَهُرْتِ وَاسْتَنْقَأْتِ فَصَلِّي أَرْبَعًا وَعِشْرِينَ لَيْلَةً أَوْ ثَلَاثًا وَعِشْرِينَ لَيْلَةً وَأَيَّامَهَا وَصُومِي وَصَلِّي فَإِنَّ ذَلِكِ يُجْزِئُكِ وَكَذَلِكِ فَافْعَلِي كَمَا تَحِيضُ النِّسَاءُ وَكَمَا يَطْهُرْنَ لِمِيقَاتِ حَيْضِهِنَّ وَطُهْرِهِنَّ فَإِنْ قَوِيتِ عَلَى أَنْ تُؤَخِّرِي الظُّهْرَ وَتُعَجِّلِي الْعَصْرَ ثُمَّ تَغْتَسِلِينَ حِينَ تَطْهُرِينَ وَتُصَلِّينَ الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ جَمِيعًا ثُمَّ تُؤَخِّرِينَ الْمَغْرِبَ وَتُعَجِّلِينَ الْعِشَاءَ ثُمَّ تَغْتَسِلِينَ وَتَجْمَعِينَ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ فَافْعَلِي وَتَغْتَسِلِينَ مَعَ الصُّبْحِ وَتُصَلِّينَ وَكَذَلِكِ فَافْعَلِي وَصُومِي إِنْ قَوِيتِ عَلَى ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ أَعْجَبُ الْأَمْرَيْنِ إِلَيَّقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَرَوَاهُ عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو الرَّقِّيُّ وَابْنُ جُرَيْجٍ وَشَرِيكٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ طَلْحَةَ عَنْ عَمِّهِ عِمْرَانَ عَنْ أُمِّهِ حَمْنَةَ إِلَّا أَنَّ ابْنَ جُرَيجٍ يَقُولُ عُمَرُ بْنُ طَلْحَةَ وَالصَّحِيحُ عِمْرَانُ بْنُ طَلْحَةَ قَالَ وَسَأَلْتُ مُحَمَّدًا عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ فَقَالَ هُوَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهَكَذَا قَالَ أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ هُوَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ و قَالَ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ فِي الْمُسْتَحَاضَةِ إِذَا كَانَتْ تَعْرِفُ حَيْضَهَا بِإِقْبَالِ الدَّمِ وَإِدْبَارِهِ وَإِقْبَالُهُ أَنْ يَكُونَ أَسْوَدَ وَإِدْبَارُهُ أَنْ يَتَغَيَّرَ إِلَى الصُّفْرَةِ فَالْحُكْمُ لَهَا عَلَى حَدِيثِ فَاطِمَةَ بِنْتِ أَبِي حُبَيْشٍ وَإِنْ كَانَتْ الْمُسْتَحَاضَةُ لَهَا أَيَّامٌ مَعْرُوفَةٌ قَبْلَ أَنْ تُسْتَحَاضَ فَإِنَّهَا تَدَعُ الصَّلَاةَ أَيَّامَ أَقْرَائِهَا ثُمَّ تَغْتَسِلُ وَتَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ وَتُصَلِّي وَإِذَا اسْتَمَرَّ بِهَا الدَّمُ وَلَمْ يَكُنْ لَهَا أَيَّامٌ مَعْرُوفَةٌ وَلَمْ تَعْرِفْ الْحَيْضَ بِإِقْبَالِ الدَّمِ وَإِدْبَارِهِ فَالْحُكْمُ لَهَا عَلَى حَدِيثِ حَمْنَةَ بِنْتِ جَحْشٍ وَكَذَلِكَ قَالَ أَبُو عُبَيْدٍ و قَالَ الشَّافِعِيُّ الْمُسْتَحَاضَةُ إِذَا اسْتَمَرَّ بِهَا الدَّمُ فِي أَوَّلِ مَا رَأَتْ فَدَامَتْ عَلَى ذَلِكَ فَإِنَّهَا تَدَعُ الصَّلَاةَ مَا بَيْنَهَا وَبَيْنَ خَمْسَةَ عَشَرَ يَوْمًا فَإِذَا طَهُرَتْ فِي خَمْسَةَ عَشَرَ يَوْمًا أَوْ قَبْلَ ذَلِكَ فَإِنَّهَا أَيَّامُ حَيْضٍ فَإِذَا رَأَتْ الدَّمَ أَكْثَرَ مِنْ خَمْسَةَ عَشَرَ يَوْمًا فَإِنَّهَا تَقْضِي صَلَاةَ أَرْبَعَةَ عَشَرَ يَوْمًا ثُمَّ تَدَعُ الصَّلَاةَ بَعْدَ ذَلِكَ أَقَلَّ مَا تَحِيضُ النِّسَاءُ وَهُوَ يَوْمٌ وَلَيْلَةٌ قَالَ أَبُو عِيسَى وَاخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي أَقَلِّ الْحَيْضِ وَأَكْثَرِهِ فَقَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ أَقَلُّ الْحَيْضِ ثَلَاثَةٌ وَأَكْثَرُهُ عَشَرَةٌ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَأَهْلِ الْكُوفَةِ وَبِهِ يَأْخُذُ ابْنُ الْمُبَارَكِ وَرُوِيَ عَنْهُ خِلَافُ هَذَا و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْهُمْ عَطَاءُ بْنُ أَبِي رَبَاحٍ أَقَلُّ الْحَيْضِ يَوْمٌ وَلَيْلَةٌ وَأَكْثَرُهُ خَمْسَةَ عَشَرَ يَوْمًا وَهُوَ قَوْلُ مَالِكٍ وَالْأَوْزَاعِيِّ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ وَأَبِي عُبَيْدٍ

हमें बताया है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने कहा; हमें बताया है [अबू अमीर अल अकादी] ने कहा; हमें बताया है [जुहैर बिन मुहम्मद] [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद बिन अकील] से [इब्राहिम बिन मुहम्मद बिन थलहा] अपने चाचा [इमरान बिन थलहा] से अपनी मां [हमना बिन्त जहसी] से उसने कहा; "मुझे पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होती थी, इसलिए मैं पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास उन्हें खबर देने और फतवा मांगने गई। मैं उनसे अपनी बहन ज़ैनब बिन्त जहसी के घर पर मिली, फिर मैंने कहा: "अल्लाह के रसूल, सच में मुझे पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होती है, इसने मुझे नमाज़ और रोज़ा रखने से रोक दिया है, तो आप मुझे इस मामले में क्या हुक्म देते हैं?" उन्होंने कहा: "मुझे रूई दो, क्योंकि यह खून निकाल देगी," उन्होंने कहा; "खून इससे ज़्यादा है?" उन्होंने कहा: "इसे किसी ऐसी चीज़ से ढक दो जो खून को बहने से रोक सके," उन्होंने कहा; "खून बहुत ज़्यादा है।" उन्होंने कहा: "एक कपड़ा लो," उन्होंने कहा; और अगर तुम दोनों कर सकते हो तो तुम बेहतर जानते हो।" उन्होंने कहा: "वास्तव में यह शैतान का एक झटका है, इसलिए अल्लाह के ज्ञान के अनुसार छह या सात दिनों तक मासिक धर्म करो, उसके बाद स्नान करो। यदि आप महसूस करते हैं कि आप शुद्ध और स्वच्छ हैं तो चौबीस रात या तेईस दिन और रात प्रार्थना करें, उपवास करें और प्रार्थना करें क्योंकि यह आपके लिए पर्याप्त है। इसी तरह, मासिक धर्म वाली महिलाओं की तरह करें और अपने मासिक धर्म और पवित्र अवधि के दौरान खुद को शुद्ध करें। यदि आप दोपहर की प्रार्थना को पूरा करने और दोपहर की प्रार्थना को जल्दी करने के लिए पर्याप्त मजबूत हैं, तो आप साफ होने पर स्नान करें, फिर आप दोपहर की प्रार्थना और दोपहर की प्रार्थना पढ़ें। उसके बाद, आप मग़रिब की प्रार्थना समाप्त करते हैं और ईशा की प्रार्थना को जल्दी करते हैं, फिर स्नान करें और दोनों प्रार्थनाओं को मिला दें फिर इसे करें। यदि आप भोर में स्नान करते हैं तो इसे करें। तो, इसे करें। और यदि आप मजबूत हैं तो उपवास करें। " "यह हदीस हसन असली है। [उबैदुल्लाह बिन अमरू अर रक़ी] और [इब्न जुराइज़] और [स्यारिक] ने [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अकील] से [इब्राहिम बिन मुहम्मद बिन थलहा] से उनके चाचा [इमरान] से उनकी माँ [हमना] से रिवायत की। बस इतना है कि इब्न जुराइज़ ने उमर बिन तल्हा का नाम लिया। सच तो यह है कि इमरान बिन तल्हा। उन्होंने कहा; "मैंने मुहम्मद से इस हदीस के बारे में पूछा, तो उन्होंने पूछा, "हदीस हसन शाहीह।" इसी तरह अहमद बिन हनबल ने कहा, "यह हदीस हसन शाहीह है।" अहमद और इसहाक ने उन औरतों के बारे में कहा जो मुस्तहदला करती हैं, "अगर उसे अपने पीरियड्स का पता हो...... तो कानून वैसा ही है जैसा फातिमा बिन्त अबू हुबैसी की हदीस में बताया गया है। अगर इस्तहदला करने वाली औरत को इस्तहदला से पहले के दिन पता हों, तो उसे अपने पीरियड्स के दिनों में नमाज़ छोड़ देनी चाहिए। फिर वह हर नमाज़ के बाद नहाए और वुज़ू करे, फिर वह नमाज़ पढ़ सकती है। अगर खून अभी भी निकल रहा है और उसे दिन पता नहीं हैं, या खून के आने-जाने से पीरियड्स का पता नहीं चलता है, तो उसके लिए सही कानून हमना बिन्त जहसी की हदीस है। अबू उबैद ने भी ऐसा ही कहा। शफीई ने कहा; "अगर किसी औरत को इस्तहदला होता है, तो उसका खून हमेशा पहली बार देखने पर बहता है और ऐसा ही चलता रहता है, तो उसे उस समय के बीच पंद्रह दिनों तक नमाज़ छोड़ देनी चाहिए। हालांकि, अगर वह पंद्रह दिन या उससे पहले पवित्र रहती है, तो उसमें पीरियड्स के दिन भी शामिल हैं। अगर औरत को पंद्रह दिनों से ज़्यादा खून आता है, तो उसे चौदह दिनों की नमाज़ों की भरपाई करनी चाहिए। फिर उसके बाद वह औरतों के सबसे छोटे पीरियड, यानी एक दिन और एक रात के दौरान नमाज़ छोड़ देती है।" अबू ईसा ने कहा; "सबसे छोटे और सबसे लंबे पीरियड के बारे में उलेमा की राय अलग-अलग है। कुछ जानकार कहते हैं; "सबसे तेज़ पीरियड तीन दिन का होता है और सबसे लंबा दस दिन का होता है।" यह सुफ़यान अत्स त्सौरी, बिन अल मुबारक और कूफ़ा के रहने वाले की राय है। और कुछ दूसरे जानकार जैसे 'अथा बिन अबू रबाह कहते हैं, "सबसे तेज़ पीरियड एक दिन और एक रात का होता है, और सबसे लंबा पंद्रह दिन का होता है। यह मलिक, अल औज़ाई, सयाफ़ी, अहमद, इसहाक और अबू उबैद की राय है।"

इस्तिहादला महिलाओं को हर बार नमाज़ पढ़ते समय नहाना पड़ता है

इमाम तिर्मिदज़ी : 119

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا قَالَتْاسْتَفْتَتْ أُمُّ حَبِيبَةَ ابْنَةُ جَحْشٍ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ إِنِّي أُسْتَحَاضُ فَلَا أَطْهُرُ أَفَأَدَعُ الصَّلَاةَ فَقَالَ لَا إِنَّمَا ذَلِكَ عِرْقٌ فَاغْتَسِلِي ثُمَّ صَلِّي فَكَانَتْ تَغْتَسِلُ لِكُلِّ صَلَاةٍقَالَ قُتَيْبَةُ قَالَ اللَّيْثُ لَمْ يَذْكُرْ ابْنُ شِهَابٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ أُمَّ حَبِيبَةَ أَنْ تَغْتَسِلَ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍ وَلَكِنَّهُ شَيْءٌ فَعَلَتْهُ هِيَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَيُرْوَى هَذَا الْحَدِيثُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَمْرَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ اسْتَفْتَتْ أُمُّ حَبِيبَةَ بِنْتُ جَحْشٍ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ الْمُسْتَحَاضَةُ تَغْتَسِلُ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍ وَرَوَى الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ وَعَمْرَةَ عَنْ عَائِشَةَ

हमें [कुतैबा] ने बताया है; हमें [अल लैट्स] ने [इब्न शिहाब] से [उरवाह] से ['ऐस्या] से बताया है कि उन्होंने कहा; "उम्म हबीबा बिन्त जहसी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फतवा मांगा, उन्होंने कहा; "वास्तव में, मुझे इस्तेहादलाह का अनुभव हुआ, जिससे मैं अशुद्ध हो गई, तो क्या मुझे प्रार्थना छोड़ देनी चाहिए?" उन्होंने कहा: "नहीं, यह केवल बीमारी का खून है, आपको स्नान करना चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए।" इसलिए उम्म हबीबा प्रार्थना करने जाते समय हमेशा स्नान करती थीं।" कुतैबा ने कहा; "अल लैट्स ने कहा; "इब्न शिहाब ने उल्लेख नहीं किया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उम्म हबीबा को हर बार प्रार्थना करने से पहले स्नान करने का आदेश दिया था, लेकिन यह कुछ ऐसा था जो वह आमतौर पर करती थीं।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस अज़ ज़ुहरी से, अमरा से, 'ऐस्या से भी वर्णित की गई थी, उन्होंने कहा; "उम्मू हबीबा बिन्त जहसी ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) से फतवा मांगा।" और कुछ विद्वानों ने कहा है कि जो औरतें इस्तिहाद से गुज़र रही हैं, उन्हें हर बार नमाज़ पढ़ते समय नहाना चाहिए।" [अल औज़ाई] ने [अज़ ज़ुहरी] से [उरवाह] और [अमरा] से ['ऐस्या] रिवायत किया है।

मासिक धर्म के कारण छूटी हुई नमाज़ों के लिए क़ज़ा करने की कोई ज़रूरत नहीं है

इमाम तिर्मिदज़ी : 120

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ مُعَاذَةَأَنَّ امْرَأَةً سَأَلَتْ عَائِشَةَ قَالَتْ أَتَقْضِي إِحْدَانَا صَلَاتَهَا أَيَّامَ مَحِيضِهَا فَقَالَتْ أَحَرُورِيَّةٌ أَنْتِ قَدْ كَانَتْ إِحْدَانَا تَحِيضُ فَلَا تُؤْمَرُ بِقَضَاءٍقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَائِشَةَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ أَنَّ الْحَائِضَ لَا تَقْضِي الصَّلَاةَ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ الْفُقَهَاءِ لَا اخْتِلَافَ بَيْنَهُمْ فِي أَنَّ الْحَائِضَ تَقْضِي الصَّوْمَ وَلَا تَقْضِي الصَّلَاةَ

हमसे कहा है [कुतैबा] ने कहा; हमसे कहा है [हम्मद बिन ज़ैद] ने [अय्यूब] से [अबू क़िलाबा] से [मुअज़्ज़ा] से कि एक औरत ने ['ऐस्या] से पूछा, उसने कहा; "क्या हममें से किसी को पीरियड्स के दौरान अपनी नमाज़ें क़ज़ा करनी चाहिए?" तो उसने जवाब दिया, "क्या तुम हारुरिया (ख़वारिज) हो? बेशक, हममें (पैगंबर की पत्नियों) में से कुछ ऐसी भी हैं जिन्हें पीरियड्स होते हैं, लेकिन उन्हें इसकी क़ज़ा करने का हुक्म नहीं है।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है, कुछ लोगों ने इसे 'ऐस्या' से रिवायत किया है, इस लाइन से नहीं, कि पीरियड्स वाली औरत पर अपनी नमाज़ों की क़ज़ा नहीं करनी पड़ती। यह ज़्यादातर फ़ुक़हा की राय है, और उनके बीच इस बात पर कोई झगड़ा नहीं है कि पीरियड्स वाली औरत को अपने रोज़े की क़ज़ा करनी चाहिए, न कि अपनी नमाज़ों की क़ज़ा करनी चाहिए।"