इमाम तिर्मिदज़ी : 41
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ قَالَا حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَابِتِ بْنِ ثَوْبَانَ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْفَضْلِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ هُرْمُزَ هُوَ الْأَعْرَجُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرٍ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ ابْنِ ثَوْبَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْفَضْلِ وَهُوَ إِسْنَادٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَوَى هَمَّامٌ عَنْ عَامِرٍ الْأَحْوَلِ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا
हमसे कहा है [अबू कुरैब] और [मुहम्मद बिन रफी] उन्होंने कहा; हमसे कहा है [ज़ैद बिन हुबाब] ने [अब्दुर्रहमान बिन साबित बिन साऊबान] से कहा; मुझसे कहा है [अब्दुल्ला इब्नुल फ़दल] ने [अब्दुर्रहमान बिन हुर्मुज] से - यानी अल अराज - से [अबू हुरैरा] ने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दो बार वज़ू किया।" अबू ईसा ने कहा; "इस अध्याय में जाबिर से भी एक हदीस है।" अबू ईसा ने फिर कहा, "यह हदीस हसन ग़रीब है, हम इसे इब्न साऊबान की हदीस अब्दुल्ला बिन अल फ़दल से ही जानते हैं, और सनद हसन शाहीह है।" अबू ईसा ने कहा; "[हम्माम] ने ['अमीर अल अहवाल] से, ['अथो'] से, [अबू हुरैरा] से वर्णित किया है, कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीन बार वुज़ू किया।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 42
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي حَيَّةَ عَنْ عَلِيٍّأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ ثَلَاثًا ثَلَاثًاقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ عُثْمَانَ وَعَائِشَةَ وَالرُّبَيِّعِ وَابْنِ عُمَرَ وَأَبِي أُمَامَةَ وَأَبِي رَافِعٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْروٍ وَمُعَاوِيَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَجَابِرٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ وَأُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَلِيٍّ أَحْسَنُ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَأَصَحُّ لِأَنَّهُ قَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ عَلِيٍّ رِضْوَانُ اللَّهِ عَلَيْهِ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنَّ الْوُضُوءَ يُجْزِئُ مَرَّةً مَرَّةً وَمَرَّتَيْنِ أَفْضَلُ وَأَفْضَلُهُ ثَلَاثٌ وَلَيْسَ بَعْدَهُ شَيْءٌ و قَالَ ابْنُ الْمُبَارَكِ لَا آمَنُ إِذَا زَادَ فِي الْوُضُوءِ عَلَى الثَّلَاثِ أَنْ يَأْثَمَ و قَالَ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ لَا يَزِيدُ عَلَى الثَّلَاثِ إِلَّا رَجُلٌ مُبْتَلًى
हमें [मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने बताया है, हमें [अब्दुर्रहमान बिन महदी] ने [सुफ़यान] से [अबू इसहाक] से [अबू हय्या] से [अली] ने बताया है; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीन बार वज़ू किया।" अबू ईसा ने कहा; "इस चैप्टर में उस्मान, आयशा, अर रबी, इब्न उमर, अबू उमामा, अबू रफ़ी, अब्दुल्लाह बिन अमरू, मुअविया, अबू हुरैरा, जाबिर बिन अब्दुल्लाह बिन ज़ैद, और उबै बिन कअब की भी रिवायतें हैं।" अबू ईसा ने कहा; "अली की हदीस इस चैप्टर में सबसे असली और सबसे अच्छी हदीस है, क्योंकि इमाम अली से सुनाई गई हदीस सिर्फ़ एक रास्ते से नहीं है।" जानकार इस हदीस पर अमल करते हैं, यानी एक बार वज़ू करना काफ़ी है, दो बार बेहतर है, और अगर तीन बार किया जाए तो और भी अच्छा है। इस बीच, बाकी में कोई फ़ायदा नहीं है।" इब्नुल मुबारक ने कहा; "मुझे डर है कि अगर कोई अपने वज़ू में तीन बार से ज़्यादा जोड़ता है तो उसे गुनाह हो जाएगा।" अहमद बिन इसहाक ने कहा; "तीन बार से ज़्यादा नहीं जोड़ा जाएगा जब तक कि किसी के दिल में चिंता न हो।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 43
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى الْفَزَارِيُّ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ ثَابِتِ بْنِ أَبِي صَفِيَّةَ قَالَ قُلْتُ لِأَبِي جَعْفَرٍ حَدَّثَكَ جَابِرٌأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ مَرَّةً مَرَّةً وَمَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ وَثَلَاثًا ثَلَاثًا قَالَ نَعَمْقَالَ أَبُو عِيسَى وَرَوَى وَكِيعٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ ثَابِتِ بْنِ أَبِي صَفِيَّةَ قَالَ قُلْتُ لِأَبِي جَعْفَرٍ حَدَّثَكَ جَابِرٌ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ مَرَّةً مَرَّةً قَالَ نَعَمْ و حَدَّثَنَا بِذَلِكَ هَنَّادٌ وَقُتَيْبَةُ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ ثَابِتِ بْنِ أَبِي صَفِيَّة قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ شَرِيكٍ لِأَنَّهُ قَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ هَذَا عَنْ ثَابِتٍ نَحْوَ رِوَايَةِ وَكِيعٍ وَشَرِيكٌ كَثِيرُ الْغَلَطِ وَثَابِتُ بْنُ أَبِي صَفِيَّةَ هُوَ أَبُو حَمْزَةَ الثُّمَالِيُّ
हमें बताया है [इस्माईल बिन मूसा अल फज़ारी] ने कहा, हमें [शरीक] ने [थबीत बिन अबू शफिया] से बताया है; मैंने [अबू जाफर] से कहा, "क्या [जाबिर] ने आपको बताया कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार, दो बार और तीन बार वज़ू किया?" उन्होंने उत्तर दिया, "यह सही है।" अबू ईसा ने कहा; "(इस बीच) [वाकी'] ने [थाबित बिन अबू शफ़िया] से यह हदीस सुनाई, उन्होंने कहा; मैंने [अबू जाफ़र] से कहा, "क्या [जाबिर] ने तुम्हें बताया कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कभी-कभी वज़ू करते थे?" उन्होंने जवाब दिया, "हाँ, सही है।" [हन्नाद] और [कुतैबा] ने हमें इसके बारे में बताया, उन्होंने कहा; "[वाकी'] ने हमें [थाबित बिन अबू शफ़िया] से बताया है।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस शरीक द्वारा सुनाई गई हदीस से ज़्यादा असली है, क्योंकि यह हदीस भी दूसरे रास्ते से सुनाई गई थी। और थबित से यह रिवायत वाकी' की रिवायत जैसी है। वहीं, शरीक वह इंसान है जो बहुत सारी गलतियाँ करता है। थबित बिन अबू शफ़िया अबू हमज़ा अत्स त्सुमाली हैं।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 44
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ فَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَغَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَغَسَلَ رِجْلَيْهِ مَرَّتَيْنِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ ذُكِرَ فِي غَيْرِ حَدِيثٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَوَضَّأَ بَعْضَ وُضُوئِهِ مَرَّةً وَبَعْضَهُ ثَلَاثًا وَقَدْ رَخَّصَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي ذَلِكَ لَمْ يَرَوْا بَأْسًا أَنْ يَتَوَضَّأَ الرَّجُلُ بَعْضَ وُضُوئِهِ ثَلَاثًا وَبَعْضَهُ مَرَّتَيْنِ أَوْ مَرَّةً
मुहम्मद बिन अबू उमर ने हमें बताया है, सुफ़यान बिन उयैना ने अमरू बिन याह्या से अपने पिता अब्दुल्लाह बिन ज़ैद से कहा है; "बेशक, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वज़ू किया, उन्होंने अपना चेहरा तीन बार धोया, अपने हाथ दो बार धोए, और अपने सिर और पैरों को दो बार मथ लिया।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन असली है, और एक दूसरी हदीस में भी ज़िक्र है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कभी-कभी एक बार वज़ू करते थे और कभी-कभी तीन बार। इस मामले में जानकार भी राहत देते हैं, उनका मानना है कि एक इंसान को एक बार में तीन बार और कभी-कभी एक बार वज़ू करने की इजाज़त है।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 45
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ وَقُتَيْبَةُ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي حَيَّةَ قَالَرَأَيْتُ عَلِيًّا تَوَضَّأَ فَغَسَلَ كَفَّيْهِ حَتَّى أَنْقَاهُمَا ثُمَّ مَضْمَضَ ثَلَاثًا وَاسْتَنْشَقَ ثَلَاثًا وَغَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَذِرَاعَيْهِ ثَلَاثًا وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ مَرَّةً ثُمَّ غَسَلَ قَدَمَيْهِ إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثُمَّ قَامَ فَأَخَذَ فَضْلَ طَهُورِهِ فَشَرِبَهُ وَهُوَ قَائِمٌ ثُمَّ قَالَ أَحْبَبْتُ أَنْ أُرِيَكُمْ كَيْفَ كَانَ طُهُورُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ عُثْمَانَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَالرُّبَيِّعِ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ أُنَيْسٍ وَعَائِشَةَ رِضْوَانُ اللَّهِ عَلَيْهِمْ حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ وَهَنَّادٌ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ ذَكَرَ عَنْ عَلِيٍّ مِثْلَ حَدِيثِ أَبِي حَيَّةَ إِلَّا أَنَّ عَبْدَ خَيْرٍ قَالَ كَانَ إِذَا فَرَغَ مِنْ طُهُورِهِ أَخَذَ مِنْ فَضْلِ طَهُورِهِ بِكَفِّهِ فَشَرِبَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَلِيٍّ رَوَاهُ أَبُو إِسْحَقَ الْهَمْدَانِيُّ عَنْ أَبِي حَيَّةَ وَعَبْدِ خَيْرٍ وَالْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ وَقَدْ رَوَاهُ زَائِدَةُ بْنُ قُدَامَةَ وَغَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ حَدِيثَ الْوُضُوءِ بِطُولِهِ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ وَرَوَى شُعْبَةُ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَلْقَمَةَ فَأَخْطَأَ فِي اسْمِهِ وَاسْمِ أَبِيهِ فَقَالَ مَالِكُ بْنُ عُرْفُطَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ عَنْ عَلِيٍّ قَالَ وَرُوِيَ عَنْ أَبِي عَوَانَةَ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ عَنْ عَلِيٍّ قَالَ وَرُوِيَ عَنْهُ عَنْ مَالِكِ بْنِ عُرْفُطَةَ مِثْلُ رِوَايَةِ شُعْبَةَ وَالصَّحِيحُ خَالِدُ بْنُ عَلْقَمَةَ
हन्नाद और कुतैबा ने हमें बताया है कि उन्होंने कहा; अबुल अहवाश ने अबू इसहाक से अबू हय्याह से बताया है कि उन्होंने कहा; "मैंने अली को वुज़ू करते देखा, उन्होंने अपने हाथ तब तक धोए जब तक वे साफ़ नहीं हो गए, फिर उन्होंने तीन बार कुल्ला किया, तीन बार नाक में पानी डाला, तीन बार चेहरा धोया, तीन बार कोहनी धोई और एक बार सिर पोंछा। फिर उन्होंने अपने पैर टखनों तक धोए, फिर वे खड़े हुए और वुज़ू के लिए बचा हुआ पानी लिया और खड़े-खड़े ही पी लिया। उसके बाद उन्होंने कहा; "मुझे आपको यह दिखाने में खुशी हो रही है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कैसे वुज़ू किया।" इस अध्याय में उस्मान, अब्दुल्लाह बिन ज़ैद, इब्न अब्बास, अब्दुल्लाह बिन अम्र, अर रबी, अब्दुल्लाह बिन उनैस और आयशा (अल्लाह उनसे खुश हो) की भी कहानियाँ हैं। [कुतैबा] और [हन्नाद] ने हमें बताया है कि उन्होंने कहा; हमें [अबुल अहवाश] ने [अबू इसहाक] से [अब्दु खैर] से बताया है, उन्होंने इसे [अली] से उल्लेख किया है जैसा कि अबू हय्याह की हदीस में है, केवल अब्दु खैर ने कहा; "जब अली ने नहाना समाप्त कर लिया, तो उन्होंने अपने वुज़ू से बचे हुए पानी को अपनी हथेली से लिया, उसके बाद उन्होंने उसे पी लिया।" अबू ईसा ने कहा; "अली की यह हदीस [अबू इसहाक अल हमदानी] ने [अब्दु खैर] से और [अल हारिथ] ने [अली] से वर्णित की है। और इसे [ज़ैदा बिन कुदामा] ने भी वर्णित किया है और इसके अलावा [खालिद बिन अलकामा] से, [अब्दु खैर] से, [अली] रदलिअल्लाहु अहू (पूर्ण वज़ू के बारे में हदीस) से। और यह हदीस हसन प्रामाणिक है। अबू ईसा ने कहा; "स्यूबा ने यह हदीस खालिद बिन अलकामा से सुनाई, लेकिन उसने अपना नाम और अपने पिता का नाम बताने में गलती की। उसने कहा; "मलिक बिन उरफुथा ने अब्दु खैर से अली से।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस [अबू अवाना] ने [खालिद बिन अलकामा] से, [अब्दु खैर] से, [अली] से भी वर्णित की है।" उन्होंने कहा; "यह हदीस मलिक बिन उरफ़ुता से सुनाई गई है, जैसा कि स्यूबा के इतिहास में है। सही हदीस खालिद बिन अलकामा है।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 46
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ وَأَحْمَدُ بْنُ أَبِي عُبَيْدِ اللَّهِ السَّلِيمِيُّ الْبَصْرِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو قُتَيْبَةَ سَلْمُ بْنُ قُتَيْبَةَ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ الْهَاشِمِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ جَاءَنِي جِبْرِيلُ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ إِذَا تَوَضَّأْتَ فَانْتَضِحْقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ قَالَ و سَمِعْت مُحَمَّدًا يَقُولُ الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍ الْهَاشِمِيُّ مُنْكَرُ الْحَدِيثِ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي الْحَكَمِ بْنِ سُفْيَانَ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَزَيْدِ بْنِ حَارِثَةَ وَأَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ و قَالَ بَعْضُهُمْ سُفْيَانُ بْنُ الْحَكَمِ أَوْ الْحَكَمُ بْنُ سُفْيَانَ وَاضْطَرَبُوا فِي هَذَا الْحَدِيثِ
हमें [नशर बिन अली अल जहदलामी] और [अहमद बिन अबू उबैदुल्लाह अस सलीमी अल बशरी] दोनों ने बताया है; हमें [अबू कुतैबा सलाम बिन कुतैबा] ने [अल हसन बिन अली अल हसीमी] से [अब्दुर्रहमान अल अराज] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जिब्रील मेरे पास आए और कहा; 'ऐ मुहम्मद, अगर तुम वुज़ू करते हो तो पहले खुद को पवित्र करो।'" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस ग़रीब है।" और उन्होंने फिर कहा; मैंने मुहम्मद को कहते सुना; "अल हसन बिन अली अल हसीमी मुनकरुल हदीस है।" और इस चैप्टर में अबुल हकम बिन सुफ़यान, इब्न अब्बास, ज़ैद बिन हरित्साह और अबू सईद अल खुदरी की भी एक हदीस है, कुछ दूसरे लोग सुफ़यान बिन अल हकम, या अल हकम बिन सुफ़यान कहते हैं, और वे इस हदीस में अलग-अलग हैं।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 47
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَلَا أَدُلُّكُمْ عَلَى مَا يَمْحُو اللَّهُ بِهِ الْخَطَايَا وَيَرْفَعُ بِهِ الدَّرَجَاتِ قَالُوا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ إِسْبَاغُ الْوُضُوءِ عَلَى الْمَكَارِهِ وَكَثْرَةُ الْخُطَا إِلَى الْمَسَاجِدِ وَانْتِظَارُ الصَّلَاةِ بَعْدَ الصَّلَاةِ فَذَلِكُمْ الرِّبَاطُو حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ الْعَلَاءِ نَحْوَهُ و قَالَ قُتَيْبَةُ فِي حَدِيثِهِ فَذَلِكُمْ الرِّبَاطُ فَذَلِكُمْ الرِّبَاطُ فَذَلِكُمْ الرِّبَاطُ ثَلَاثًا قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَابْنِ عَبَّاسٍ وَعَبِيدَةَ وَيُقَالُ عُبَيْدَةُ بْنُ عَمْرٍو وَعَائِشَةَ وَعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَائِشٍ الْحَضْرَمِيِّ وَأَنَسٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ فِي هَذَا الْبَابِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَلَاءُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ هُوَ ابْنُ يَعْقُوبَ الْجُهَنِيُّ الْحُرَقِيُّ وَهُوَ ثِقَةٌ عِنْدَ أَهْلِ الْحَدِيثِ
हमसे [अली बिन हुज्र] ने वर्णित किया है, हमसे [इस्माईल बिन जाफर] ने [अल 'अला` बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "क्या मैं तुम्हें कुछ ऐसा दिखाऊं जो गलतियों को मिटा सके और तुम्हारे पद को बढ़ा सके?" साथियों ने उत्तर दिया, "हां, ऐ अल्लाह के रसूल।" उन्होंने कहा: "ऐसे समय में नमाज़ पढ़ना जब वह नापसंद हो, मस्जिद तक कई कदम चलना और नमाज़ के बाद नमाज़ का इंतज़ार करना। और यह रिबथ है।" हमसे [कुतैबा] ने वर्णित किया है, हमसे [अब्दुल अज़ीज़ बिन मुहम्मद] ने [अल 'अला`] से हदीस के रूप में वर्णित किया है। कुतैबा ने अपनी हदीस में कहा, "यह रिबथ है, यह रिबथ है, यह रिबथ है।" तीन बार। अबू ईसा ने कहा; "इस चैप्टर में अली, अब्दुल्लाह बिन अमरू, इब्न अब्बास और अबीदा, जिन्हें उबैदा बिन अमरू, आयशा, अब्दुर्रहमान बिन असी अल हदलरामी और अनस भी कहा जाता है, की भी रिवायतें हैं।" अबू ईसा ने कहा; "और इस चैप्टर में अबू हुरैरा की हदीस सबसे अच्छी हदीस है और इसका लेवल सही है।" और अल अला बिन अब्दुर्रहमान इब्न याकूब अल जुहानी अल हुराकी हैं, वह हदीस के जानकारों के हिसाब से एक भरोसेमंद इंसान हैं।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 48
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعِ بْنِ الْجَرَّاحِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ حُبَابٍ عَنْ أَبِي مُعَاذٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خِرْقَةٌ يُنَشِّفُ بِهَا بَعْدَ الْوُضُوءِقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ لَيْسَ بِالْقَائِمِ وَلَا يَصِحُّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْبَابِ شَيْءٌ وَأَبُو مُعَاذٍ يَقُولُونَ هُوَ سُلَيْمَانُ بْنُ أَرْقَمَ وَهُوَ ضَعِيفٌ عِنْدَ أَهْلِ الْحَدِيثِ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ
हमें बताया है [सुफ़यान बिन वाकी' बिन अल जर्राह] ने कहा, हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन वहब] [ज़ैद बिन हुबाब] से [अबू मुअज़्ज़] से [अज़ ज़ुहरी] से [उरवाह] से [ऐस्या] ने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास एक कपड़ा था जिसे वह वुज़ू करने के बाद सुखाते थे।" अबू ईसा ने कहा; "ऐस्या की हदीस मज़बूत नहीं है और इस अध्याय में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कोई प्रामाणिक हदीस नहीं है, अबू मुअज़्ज़ के बारे में, उन्होंने कहा; कि वह सुलेमान बिन अर्कम थे, और हदीस विशेषज्ञों के अनुसार वह एक कमज़ोर व्यक्ति थे। अबू ईसा ने कहा; "इस अध्याय में मुअज़्ज़ बिन जबल का भी एक वर्णन है।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 49
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا رِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ زِيَادِ بْنِ أَنْعُمٍ عَنْ عُتْبَةَ بْنِ حُمَيْدٍ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ نُسَيٍّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَرَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا تَوَضَّأَ مَسَحَ وَجْهَهُ بِطَرَفِ ثَوْبِهِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ وَإِسْنَادُهُ ضَعِيفٌ وَرِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ زِيَادِ بْنِ أَنْعُمٍ الْأَفْرِيقِيُّ يُضَعَّفَانِ فِي الْحَدِيثِ وَقَدْ رَخَّصَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ فِي التَّمَنْدُلِ بَعْدَ الْوُضُوءِ وَمَنْ كَرِهَهُ إِنَّمَا كَرِهَهُ مِنْ قِبَلِ أَنَّهُ قِيلَ إِنَّ الْوُضُوءَ يُوزَنُ وَرُوِيَ ذَلِكَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيِّبِ وَالزُّهْرِيِّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ الرَّازِيُّ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ قَالَ حَدَّثَنِيهِ عَلِيُّ بْنُ مُجَاهِدٍ عَنِّي وَهُوَ عِنْدِي ثِقَةٌ عَنْ ثَعْلَبَة عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ إِنَّمَا كُرِهَ الْمِنْدِيلُ بَعْدَ الْوُضُوءِ لِأَنَّ الْوُضُوءَ يُوزَنُ
हमें बताया है [कुतैबा] ने कहा, हमें बताया है [रिस्यदीन बिन साद] [अब्दुर्रहमान बिन ज़ियाद बिन अन'म] से [उतबा बिन हमैद] से [उबादा बिन नुसाई] से [अब्दुर्रहमान बिन घनमी] से [मुअज़ बिन जबल] ने कहा; "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को वुज़ू पूरा करने के बाद अपने कपड़े के कोने से अपना चेहरा पोंछते हुए देखा।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस ग़रीब स्तर की है और इसकी सनद कमज़ोर है। रिसीदिन बिन साद और अब्दुर्रहमान बिन ज़ियाद बिन अनम अल अफ़रीकी ने हदीस को कमज़ोर कर दिया। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों में से और उनके बाद के कुछ विद्वानों ने वुज़ू के अवशेषों को पोंछने के लिए राहत दी, क्योंकि जो लोग इसे करते थे, यह केवल इस राय पर आधारित था कि वुज़ू को दान के तराजू में तौला जाएगा। यह सईद इब्नुल मुसय्यब और अज़ ज़ुहरी से वर्णित है। हमें बताया है मुहम्मद बिन हमैद अर रज़ी ने कहा, उन्होंने हमें बताया है जरीर उन्होंने कहा; अली बिन मुजाहिद ने इसे मुझे बताया है, और मुझे लगता है कि वह एक भरोसेमंद व्यक्ति हैं, अर्थात् त्सा'लाबा से, अज़ ज़ुहरी से, उन्होंने कहा;
इमाम तिर्मिदज़ी : 50
حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عِمْرَانَ الثَّعْلَبِيُّ الْكُوفِيُّ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ يَزِيدَ الدِّمَشْقِيِّ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ وَأَبِي عُثْمَانَ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ قَالَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنْ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنْ الْمُتَطَهِّرِينَ فُتِحَتْ لَهُ ثَمَانِيَةُ أَبْوَابِ الْجَنَّةِ يَدْخُلُ مِنْ أَيِّهَا شَاءَقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ أَنَسٍ وَعُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عُمَرَ قَدْ خُولِفَ زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ فِي هَذَا الْحَدِيثِ قَالَ وَرَوَى عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ وَغَيْرُهُ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ يَزِيدَ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ عَنْ عُمَرَ وَعَنْ رَبِيعَةَ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ عُمَرَ وَهَذَا حَدِيثٌ فِي إِسْنَادِهِ اضْطِرَابٌ وَلَا يَصِحُّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْبَابِ كَبِيرُ شَيْءٍ قَالَ مُحَمَّدٌ وَأَبُو إِدْرِيسَ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عُمَرَ شَيْئًا
हमें बताया है [जाफर बिन मुहम्मद बिन इमरान अत्स त्सा'लाबी अल कूफी] ने कहा, हमें बताया है [ज़ैद बिन हुबाब] [मुअविया बिन सलेह] से [रबीआ बिन यज़ीद विज्ञापन दिमसीकी] से [अबू इदरीस अल खौलानी] और [अबू उथमान] से [उमर बिन ख़त्थब] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई वज़ू करे और अपना वज़ू पूरा कर ले फिर पढ़े; असीहादु अनला इलाहा इल्लल्लाह वह्दाहू ला श्यारीकलाहु वा असीहादु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू वा रसूलुहू, अल्लाहुम्माज'अलनी मिनत तव्वाबीना वज'अलनी मिनल मुतातहिरीन (मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह सर्वशक्तिमान के अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं है और उसका कोई भागीदार नहीं है, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसका सेवक और रसूल है। हे अल्लाह, मुझे उन लोगों में से बना जो तौबा कर लेते हैं और मुझे उन लोगों में से बना जो खुद को पवित्र कर लेते हैं), उसके लिए स्वर्ग के आठ दरवाजे खोल दिए जाएँगे, वह जिस भी दरवाजे से चाहे प्रवेश कर सकता है।" अबू ईसा ने कहा; "इस अध्याय में अनस और उकबा बिन अमीर की हदीसें भी हैं।" अबू ईसा ने कहा; "इस हदीस में ज़ैद बिन हुबाब ने उमर की हदीस का खंडन किया है।" अबू ईसा ने कहा; "[अब्दुल्ला बिन सलीह] और दूसरों ने [मुअविया बिन शालीह] से, [रबीआ बिन यज़ीद] से, [अबू इदरीस] से, [उकबा बिन आमिर] से, [उमर] से रिवायत की है। और [रबीआ] ने [अबू उस्मान] से, [जुबैर बिन नुफ़ैर] से, [उमर] से रिवायत की है। यह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कोई सही हदीस नहीं है।" मुहम्मद ने कहा; "अबू इदरीस ने उमर से कुछ नहीं सुना।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 51
و حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ وَعَليُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ أَبِي رَيْحَانَةَ عَنْ سَفِينَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَوَضَّأُ بِالْمُدِّ وَيَغْتَسِلُ بِالصَّاعِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَجَابِرٍ وَأَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ سَفِينَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَأَبُو رَيْحَانَةَ اسْمُهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَطَرٍ وَهَكَذَا رَأَى بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ الْوُضُوءَ بِالْمُدِّ وَالْغُسْلَ بِالصَّاعِ و قَالَ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ لَيْسَ مَعْنَى هَذَا الْحَدِيثِ عَلَى التَّوَقِّي أَنَّهُ لَا يَجُوزُ أَكْثَرُ مِنْهُ وَلَا أَقَلُّ مِنْهُ وَهُوَ قَدْرُ مَا يَكْفِي
हमें [अहमद बिन मानी] और [अली बिन हुज्र] दोनों ने बताया है; हमें [इस्माईल बिन उलैय्या] ने [अबू रेहाना] से [सफीना] से बताया है; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिर्फ़ एक मूंग पानी से वज़ू किया और एक शा से नहाया।" अबू ईसा ने कहा; "इस चैप्टर में ऐश्या, जाबिर और अनस बिन मलिक की भी हिस्ट्री हैं।" अबू ईसा ने कहा; "सफीना की हदीस हसन असली है, जबकि अबू रेहानान का नाम अब्दुल्लाह बिन मथार है।" इस तरह, साइंटिफिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक मूंग पानी से वज़ू करना और एक शा से नहाना काफी है। इमाम शफीई, अहमद और इसहाक ने कहा; "यह हदीस कोई लिमिटेशन नहीं है, कि यह बहुत ज़्यादा या बहुत कम नहीं हो सकती, बल्कि मात्रा के हिसाब से होनी चाहिए।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 52
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو دَاودَ الطَّيَالِسِيُّ حَدَّثَنَا خَارِجَةُ بْنُ مُصْعَبٍ عَنْ يُونُسَ بْنِ عُبَيْدٍ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ عُتَيِّ بْنِ ضَمْرَةَ السَّعْدِيِّ عَنْ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ لِلْوُضُوءِ شَيْطَانًا يُقَالُ لَهُ الْوَلَهَانُ فَاتَّقُوا وَسْوَاسَ الْمَاءِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ حَدِيثٌ غَرِيبٌ وَلَيْسَ إِسْنَادُهُ بِالْقَوِيِّ عِنْدَ أَهْلِ الْحَدِيثِ لَأَنَّا لَا نَعْلَمُ أَحَدًا أَسْنَدَهُ غَيْرَ خَارِجَةَ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ الْحَسَنِ قَوْلَهُ وَلَا يَصِحُّ فِي هَذَا الْبَابِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْءٌ وَخَارِجَةُ لَيْسَ بِالْقَوِيِّ عِنْدَ أَصْحَابِنَا وَضَعَّفَهُ ابْنُ الْمُبَارَكِ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने कहा, हमें बताया है [अबू दाऊद अथ थयालिसी] ने कहा, हमें बताया है [खरिजा बिन मुश'ब] [यूनुस बिन उबैद] से [अल हसन] से [उताई बिन दलमरा अस सा'दी] से [उबै बिन का'ब] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा: "वास्तव में प्रत्येक वुज़ू में शैतान है जिसे अल वलहान कहा जाता है, इसलिए पानी में चिंता से दूर रहो।" उन्होंने कहा; "इस अध्याय में अब्दुल्लाह बिन अमरू और अब्दुल्लाह बिन मुगफ़ल की हदीसें भी हैं।" अबू ईसा ने कहा; "उबै बिन काब की हदीस एक ग़रीब हदीस है और हदीस के जानकारों के अनुसार इसकी सनद मज़बूत नहीं है, क्योंकि हम ख़ारिज के अलावा किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते जो इस हदीस पर भरोसा करता हो। यह हदीस भी अल हसन के शब्दों की कई लाइनों से सुनाई गई है। और इस अध्याय में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कोई भी सही हदीस नहीं है। हमारे दोस्तों के अनुसार, ख़ारिज एक ऐसा व्यक्ति था जो मज़बूत नहीं था, और इब्नुल मुबारक ने उसे कमज़ोर कर दिया।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 53
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ الرَّازِيُّ حَدَّثَنَا سَلَمَةُ بْنُ الْفَضْلِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ طَاهِرًا أَوْ غَيْرَ طَاهِرٍقَالَ قُلْتُ لِأَنَسٍ فَكَيْفَ كُنْتُمْ تَصْنَعُونَ أَنْتُمْ قَالَ كُنَّا نَتَوَضَّأُ وُضُوءًا وَاحِدًا قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ وَالْمَشْهُورُ عَنْدَ أَهْلِ الْحَدِيثِ حَدِيثُ عَمْرِو بْنِ عَامِرٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَنَسٍ وَقَدْ كَانَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ يَرَى الْوُضُوءَ لِكُلِّ صَلَاةٍ اسْتِحْبَابًا لَا عَلَى الْوُجُوبِ
हमें [मुहम्मद बिन हुमैद अर रज़ी] ने बताया, हमें [सलमा इब्नुल फ़दल] ने [मुहम्मद बिन इसहाक] से [हुमैद] से [अनस] ने बताया; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा नमाज़ से पहले वज़ू करते थे, चाहे पवित्र हों या नहीं।" हुमैद ने कहा; मैंने अनस से कहा; "तो आप क्या करते हैं?" उन्होंने जवाब दिया, "हम सिर्फ़ एक बार वज़ू करते हैं।" अबू ईसा ने कहा; "हुमैद की अनस से हदीस इस तरफ़ से हसन ग़रीब है। लेकिन हदीस के जानकारों के मुताबिक़ सबसे मशहूर 'अमरू बिन' अमीर अल अंसारी की हदीस है। और कुछ जानकारों का मानना है कि हर नमाज़ से पहले वज़ू करना सही है, ज़रूरी नहीं।
इमाम तिर्मिदज़ी : 54
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ هُوَ ابْنُ مَهْدِيٍّ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ عَامِرٍ الْأنْصَارِيِّ قَال سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍقُلْتُ فَأَنْتُمْ مَا كُنْتُمْ تَصْنَعُونَ قَالَ كُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ كُلَّهَا بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ مَا لَمْ نُحْدِثْ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَحَدِيثُ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ حَدِيثٌ جَيِّدٌ غَرِيبٌ حَسَنٌ
[मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने कहा, [याह्या बिन सईद] और [अब्दुर्रहमान] - यानी इब्न महदी - उन्होंने कहा; [सुफ़यान बिन सईद] ने हमें [अमरू बिन अमीर अल अंसारी] से बताया; मैंने [अनस बिन मलिक] को यह कहते सुना; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर बार नमाज़ पढ़ते समय वज़ू ज़रूर करते थे।" मैंने कहा; "तो, आप क्या करते हैं?" उन्होंने जवाब दिया, "हम सभी नमाज़ें एक ही वज़ू से पढ़ते हैं, जब तक कि हम रोज़ा न तोड़ें।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन सहीह है, जबकि हुमैद की अनस से हदीस एक अच्छी हदीस है, लेकिन ग़रीब हसन है।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 55
وَقَدْ رُوِيَ فِي حَدِيثٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ عَلَى طُهْرٍ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِهِ عَشْرَ حَسَنَاتٍقَالَ وَرَوَى هَذَا الْحَدِيثَ الْأَفْرِيقِيُّ عَنْ أَبِي غُطَيْفٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ الْمَرْوَزِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ الْوَاسِطِيُّ عَنْ الْأَفْرِيقِيِّ وَهُوَ إِسْنَادٌ ضَعِيفٌ قَالَ عَلِيُّ بْنُ الْمَدِينِيِّ قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ ذَكَرَ لِهِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ هَذَا الْحَدِيثُ فَقَالَ هَذَا إِسْنَادٌ مَشْرِقِيٌ قَالَ سَمِعْت أَحْمَدَ بْنَ الْحَسَنِ يَقُولُ سَمِعْتُ أَحْمَدَ بْنَ حَنْبَلٍ يَقُولُ مَا رَأَيْتُ بِعَيْنِي مِثْلَ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقَطَّانِ
इब्न उमर से एक हदीस में वर्णित है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, कि उन्होंने कहा: "जो कोई पवित्र अवस्था में वज़ू करता है, अल्लाह उसके लिए दस अच्छे कर्मों का रिकॉर्ड रखेगा।" उन्होंने कहा; "[अल अफरीकी] ने यह हदीस [अबू गुथैफ] से, [इब्न उमर] से, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से वर्णित की है। [अल हुसैन बिन हुरैत्स अल मरवाज़ी] ने भी हमें ऐसा ही बताया है, कि [मुहम्मद बिन यज़ीद अल वासीथी] ने हमें [अल अफरीकी] से बताया है, और सनद कमजोर है। अली बिन अल मदीनी ने कहा; "याह्या बिन सईद अल क़थथन ने कहा; "जब यह हदीस हिशाम बिन उरवा को बताई गई तो उन्होंने उत्तर दिया, "यह पूर्वी लोगों की सनद है।" अबू ईसा ने कहा; "मैंने अहमद बिन अल हसन को कहते सुना; "मैंने अहमद बिन हम्बल को यह कहते सुना; "मैंने अपनी दोनों आँखों से याह्या बिन सईद अल क़थथन जैसा कोई नहीं देखा।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 56
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ فَلَمَّا كَانَ عَامُ الْفَتْحِ صَلَّى الصَّلَوَاتِ كُلَّهَا بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ فَقَالَ عُمَرُ إِنَّكَ فَعَلْتَ شَيْئًا لَمْ تَكُنْ فَعَلْتَهُ قَالَ عَمْدًا فَعَلْتُهُقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَرَوَى هَذَا الْحَدِيثَ عَلِيُّ بْنُ قَادِمٍ عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَزَادَ فِيهِ تَوَضَّأَ مَرَّةً مَرَّةً قَالَ وَرَوَى سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ هَذَا الْحَدِيثَ أَيْضًا عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ وَرَوَاهُ وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ مُحَارِبٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ وَرَوَاهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ وَغَيْرُهُ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْسَلًا وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ وَكِيعٍ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنَّهُ يُصَلِّي الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ مَا لَمْ يُحْدِثْ وَكَانَ بَعْضُهُمْ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ اسْتِحْبَابًا وَإِرَادَةَ الْفَضْلِ وَيُرْوَى عَنْ الْأَفْرِيقِيِّ عَنْ أَبِي غُطَيْفٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ عَلَى طُهْرٍ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِهِ عَشْرَ حَسَنَاتٍ وَهَذَا إِسْنَادٌ ضَعِيفٌ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَّى الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ
हमें बताया है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने कहा, हमें बताया है [अब्दुर्रहमान बिन महदी] [सुफयान] से [अलकामा बिन मरत्सद] से [सुलेमान बिन बुरैदा] से [उसके पिता] से उन्होंने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा नमाज़ के लिए जाते समय वज़ू करते थे। और मक्का शहर पर जीत के दिन, उन्होंने एक ही वज़ू से सारी नमाज़ें पूरी कीं और अपने खुफ़ का पोंछा लगाया। फिर उमर ने कहा: "सच में, तुम कुछ ऐसा कर रहे हो जिसकी तुम्हें आदत नहीं है," उन्होंने जवाब दिया: "मैंने यह जानबूझकर किया।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन असली है।" [अली बिन कादिम] ने यह हदीस [सुफ़यान अत्स त्सौरी] से सुनाई, फिर उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल एक बार में एक बार वज़ू करते थे।" उन्होंने कहा; "और [सुफ़यान अत्स त्सौरी] ने यह हदीस [मुहारिब बिन दितसार], [सुलेमान बिन बुरैदा], पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से भी सुनाई, कि वह हमेशा नमाज़ के लिए जाते समय वज़ू करते थे। और [वाकी] ने इसे [सुफ़यान] से, [मुहारिब] से, [सुलेमान बिन बुरैदा] से, [अपने पिता] से, [अब्दुर्रहमान बिन महदी] से और इसके अलावा, इसे [सुफ़यान] से, [मुहारिब बिन दित्सर] से, [सुलेमान बिन बुरैदा] से, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मुरसल तरीके से रिवायत किया है, और यह वाकी की हदीस से ज़्यादा असली है। विद्वान इस हदीस का अभ्यास करते हैं, यानी अल्लाह के रसूल ने एक ही वुज़ू से कई नमाज़ें पढ़ीं, जब तक कि वे टूट न जाएं। लेकिन उनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हर बार नमाज़ पढ़ने जाते समय वज़ू करते हैं क्योंकि इससे हिम्मत मिलती है और पुण्य मिलता है।" अल अफ़रीकी, अबू ग़ुथैफ़, इब्न उमर से भी रिवायत है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी पवित्रता की हालत में वज़ू करता है, अल्लाह उसके लिए दस अच्छे काम लिख देगा।" हालाँकि, इस हदीस की ट्रांसमिशन चेन कमज़ोर है। और इस चैप्टर में जाबिर बिन अब्दुल्लाह से एक रिवायत है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक ही वज़ू से ज़ुहर और अस्र की नमाज़ पढ़ी।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 57
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي الشَّعْثَاءِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ حَدَّثَتْنِي مَيْمُونَةُ قَالَتْكُنْتُ أَغْتَسِلُ أَنَا وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ إِنَاءٍ وَاحِدٍ مِنْ الْجَنَابَةِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ الْفُقَهَاءِ أَنْ لَا بَأْسَ أَنْ يَغْتَسِلَ الرَّجُلُ وَالْمَرْأَةُ مِنْ إِنَاءٍ وَاحِدٍ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَعَائِشَةَ وَأَنَسٍ وَأُمِّ هَانِئٍ وَأُمِّ صُبَيَّةَ الْجُهَنِيَّةِ وَأُمِّ سَلَمَةَ وَابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَأَبُو الشَّعْثَاءِ اسْمُهُ جَابِرُ بْنُ زَيْدٍ
हमें बताया है [इब्न अबू उमर] ने कहा, हमें बताया है [सुफ़यान बिन उयैना] [अमरू बिन दीनार] से [अबू सयात्सा] से [इब्न अब्बास] ने कहा; [मैमुना] ने मुझसे कहा, "मैंने एक बार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ जुनुब के समय एक बर्तन में नहाया था।" अबू ईसा ने कहा; "यह एक सच्ची हसन हदीस है, और ज़्यादातर फ़क़ीहों की यही राय है, कि एक आदमी एक औरत के साथ एक ही बर्तन में नहा सकता है।" इस चैप्टर में अली, ऐश्या, अनस, उम्म हानी, उम्म शुबैय्या अल जुहानिया, उम्म सलमा और इब्न उमर की भी रिवायतें हैं।" अबू ईसा ने कहा; "और अबू असी सयात्सा का नाम जाबिर बिन ज़ैद है।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 58
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِي حَاجِبٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْ بَنِي غِفَارٍ قَالَنَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ فَضْلِ طَهُورِ الْمَرْأَةِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَرْجِسَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَكَرِهَ بَعْضُ الْفُقَهَاءِ الْوُضُوءَ بِفَضْلِ طَهُورِ الْمَرْأَةِ وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ كَرِهَا فَضْلَ طَهُورِهَا وَلَمْ يَرَيَا بِفَضْلِ سُؤْرِهَا بَأْسًا
[महमूद बिन घैलन] ने हमें बताया है; [वाकी] ने हमें [सुफ़यान] से [सुलेमान अत तैमी] से [अबू हाजिब] से [गिफ़ार कबीले के एक आदमी] से सुनाया है, उन्होंने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने औरत के नहाने के बचे हुए पानी से मना किया है।" और इसी चैप्टर में अब्दुल्लाह बिन सरजिस से भी एक रिवायत है। अबू ईसा ने कहा; "कुछ फुकहा औरत के नहाने के बचे हुए पानी से वुज़ू करना मकरूह समझते हैं। और यह अहमद और इसहाक का कहना है, वे अपने वुज़ू के बचे हुए पानी को मकरूह समझते हैं, बर्तन के बचे हुए पानी को नहीं।"
इमाम तिर्मिदज़ी : 59
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَاصِمٍ قَال سَمِعْتُ أَبَا حَاجِبٍ يُحَدِّثُ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ عَمْرٍو الْغِفَارِيِّأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ يَتَوَضَّأَ الرَّجُلُ بِفَضْلِ طَهُورِ الْمَرْأَةِ أَوْ قَالَ بِسُؤْرِهَاقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَأَبُو حَاجِبٍ اسْمُهُ سَوَادَةُ بْنُ عَاصِمٍ و قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ فِي حَدِيثِهِ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَتَوَضَّأَ الرَّجُلُ بِفَضْلِ طَهُورِ الْمَرْأَةِ وَلَمْ يَشُكَّ فِيهِ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ
[मुहम्मद बिन बशियार] और [मुहम्मद बिन घैलन] ने कहा; [अबू दाऊद] ने हमें [स्यूबा] से बताया कि [आशिम] ने कहा; मैंने [अबू हाजिब] को [अल हकम बिन अमरू अल गिफारी] से सुना कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक आदमी को औरत के शुद्धिकरण से बचे पानी से वज़ू करने से मना किया, या उन्होंने कहा; "उसके बर्तन से बचा हुआ पानी।" अबू ईसा ने कहा; "यह एक हसन हदीस है। और अबू हाजिब का नाम सवादा बिन आशिम है।" मुहम्मद बिन बशियार ने अपनी हदीस में ज़िक्र किया; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक आदमी को औरत के शुद्धिकरण से बचे पानी से वज़ू करने से मना किया," और मुहम्मद बिन बशियार को इस पर कोई शक नहीं था।
इमाम तिर्मिदज़ी : 60
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَاغْتَسَلَ بَعْضُ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي جَفْنَةٍ فَأَرَادَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَتَوَضَّأَ مِنْهُ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي كُنْتُ جُنُبًا فَقَالَ إِنَّ الْمَاءَ لَا يُجْنِبُقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَمَالِكٍ وَالشَّافِعِيِّ
हमें [कुतैबा] ने बताया है, हमें [अबू अल अहवाश] ने [सिमक बिन हर्ब] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से बताया है, उन्होंने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कई पत्नियों ने एक बर्तन में स्नान किया, फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उससे वज़ू करने वाले थे, लेकिन उन्होंने कहा: "अल्लाह के रसूल, मैं तो जुनूब हूँ," उन्होंने जवाब दिया: "बेशक पानी जुनूब (नापाक नहीं) नहीं है।" अबू ईसा ने कहा; "यह हदीस हसन के दर्जे की है, और इस हदीस को सुफ़यान अत्स त्सौरी, मलिक और शफ़ीई ने माना है।"