Imam Abu Dawud : 161
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ حَدَّثَنَا سِمَاكٌ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَأَكَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَتِفًا ثُمَّ مَسَحَ يَدَهُ بِمِسْحٍ كَانَ تَحْتَهُ ثُمَّ قَامَ فَصَلَّى
सानु दस्सेया है [मुसद्दद] ने सानु दस्सेया है [अबू अल अहवाश] ने सानू [सुनो] [इक्रीमा] तों [इब्न अब्बास] तों दस्सेया है उसने आख्या; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इक बारी बकरी दी जांघ दा मांस खादा हा, फिर अपने थल्ले कपड़े कन्ने हत्थ साफ कीते, फिर खड़ोईये नमाज पढ़ी।
Imam Abu Dawud : 162
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ النَّمَرِيُّ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ انْتَهَشَ مِنْ كَتِفٍ ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ
सानु दस्सेया गया है [हफश बिन उमर अन-नमीरी] ने सानु [हम्माम] नू [कतादह] तों [यह्या बिन यामर] तों [इब्न अब्बास] तों दस्सेया है कि अल्लाह दे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इक वारी बकरी दी जांघ दा मांस डसया, फिर उसने नमाज कीती ते पहले वज़ूद नहीं कीता।
Imam Abu Dawud : 163
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْحَسَنِ الْخَثْعَمِيُّ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُنْكَدِرِ قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُقَرَّبْتُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُبْزًا وَلَحْمًا فَأَكَلَ ثُمَّ دَعَا بِوَضُوءٍ فَتَوَضَّأَ بِهِ ثُمَّ صَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ دَعَا بِفَضْلِ طَعَامِهِ فَأَكَلَ ثُمَّ قَامَ إِلَى الصَّلَاةِ وَلَمْ يَتَوَضَّأْ
सानु दस्सेया है [इब्राहिम बिन अल हसन अल-खतसामी] ने सानु दस्सेया है [हज्जाज] ने आख्या [इब्न जुरैज] ने मिगी [मुहम्मद बिन अल-मुंकदीर] दस्सेया है उसने कहा; मैं इक बारी [जबीर बिन अब्दुल्ला] गी आखदे होई सुनेआ हा; मैं इक बारी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम गी रोटी ते मांस दा टुकड़ा चढ़ाया हा, फिर उने खाया। फिर वज़ूद दा पानी मंगया, फिर उस पानी नाल वज़ूद कीता। उसदे बाद उने धुहुर दी नमाज कीती। फिर उसने अपना बाकी खाना मंगया, खाया, फिर बिना वजूद कित्ते नमाज पढ़न वास्ते खड़ा हो गया।
Imam Abu Dawud : 164
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ سَهْلٍ أَبُو عِمْرَانَ الرَّمْلِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ أَبِي حَمْزَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَكَانَ آخِرَ الْأَمْرَيْنِ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرْكُ الْوُضُوءِ مِمَّا غَيَّرَتْ النَّارُقَالَ أَبُو دَاوُد هَذَا اخْتِصَارٌ مِنْ الْحَدِيثِ الْأَوَّلِ
सानु दस्सेया है [मूसा बिन सहल अबू इमरान अर-रामली] ने सानु दस्सेया है [अली बिन अय्यासी] ने सानु [स्यूअइब बिन अबू हमजाह] [मुहम्मद बिन अल-मुंकदीर] कोला [जाबीर] कोला दस्सेया ऐ उने आख्या; इनें दो मामलें दा अंत एह् ऐ जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वज़ूद नेईं कीता कीजे ओह् कुसै चीज़ गी खादा हा जेह्ड़ी अग्ग कन्नै छूई गेदी ही। अबू दाऊद ने कहा; एह् पैह्ली हदीस दा सार ऐ।
Imam Abu Dawud : 165
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ أَبِي كَرِيمَةَ قَالَ ابْنُ السَّرْحِ بْنُ أَبِي كَرِيمَةَ مِنْ خِيَارِ الْمُسْلِمِينَ قَالَ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ بْنُ ثُمَامَةَ الْمُرَادِيُّ قَالَقَدِمَ عَلَيْنَا مِصْرَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْحَارِثِ بْنِ جَزْءٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَمِعْتُهُ يُحَدِّثُ فِي مَسْجِدِ مِصْرَ قَالَ لَقَدْ رَأَيْتُنِي سَابِعَ سَبْعَةٍ أَوْ سَادِسَ سِتَّةٍ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي دَارِ رَجُلٍ فَمَرَّ بِلَالٌ فَنَادَاهُ بِالصَّلَاةِ فَخَرَجْنَا فَمَرَرْنَا بِرَجُلٍ وَبُرْمَتُهُ عَلَى النَّارِ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَطَابَتْ بُرْمَتُكَ قَالَ نَعَمْ بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي فَتَنَاوَلَ مِنْهَا بَضْعَةً فَلَمْ يَزَلْ يَعْلُكُهَا حَتَّى أَحْرَمَ بِالصَّلَاةِ وَأَنَا أَنْظُرُ إِلَيْهِ
सानु दस्सेया है [अहमद बिन अमरू बिन अस-सरज] ने सानु दस्सेया है [अब्दुल मलिक बिन अबू करीमाह] ने इब्न अस-सर्ज ने आख्या; इब्न अबी करीमाह ते चुने गेदे मुसलमानें च उने आखेआ; मेनू [उबैद बिन त्सुमामा अल-मुरादी] गी दस्सदे होई उने आखेआ; [अब्दुल्लाह बिन हरित बिन जज़`इन] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे साथी विचों इक, मिस्र विच साडे कोल आया। मिस्र दी मस्जिद च हदीस सुनांदे सुनेया हा, उने आखेआ; मैं इक बारी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे नाल किसे दे घर सातवां या छठवां व्यक्ति सी, फिर बिलाल ने गुजर के नमाज दी नमाज दा आह्वान कीता। इस करिए अस बाहर निकली गे ते इक माह्नू कोला गुजरे जिंदा घड़ा आग्ग उप्पर हा। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: क्या तुहाडा घड़ा अच्छा है? -यानी तुहाडे घड़े दा मांस पका के खाण लई तैयार है?- उस आदमी ने जवाब दित्ता; हां, मैं तुंदे पिता ते मां गी तुंदी फिरौती बनने गी तैयार आं। फिरी ओह् उंदे कोला मांस दा इक टुकड़ा लेई लेआ - फिरी खादा रेआ - ते चबांदे रेआ, जदूं तकर ओह नमाज च दाखल नेईं होई गेआ, जिसलै के मैं उसी दिक्खेआ।
Imam Abu Dawud : 166
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ شُعْبَةَ حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ حَفْصٍ عَنْ الْأَغَرِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْوُضُوءُ مِمَّا أَنْضَجَتْ النَّارُ
सानु दस्सेया है [मुसद्दद] ने सानु दस्सेया है [यह्या] ने [स्यूबाह] से [अबू बकर बिन हफश] को [अल अघर्र] से [अबू हुरैरा] से बताया है उसने कहा; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'अग्ग नाल पका - भुना - खाने दा वज़ूज़ बनाओ'।
Imam Abu Dawud : 167
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبَانُ عَنْ يَحْيَى يَعْنِي ابْنَ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّ أَبَا سُفْيَانَ بْنَ سَعِيدِ بْنِ الْمُغِيرَةِ حَدَّثَهُأَنَّهُ دَخَلَ عَلَى أُمِّ حَبِيبَةَ فَسَقَتْهُ قَدَحًا مِنْ سَوِيقٍ فَدَعَا بِمَاءٍ فَتَمَضْمَضَ فَقَالَتْ يَا ابْنَ أُخْتِي أَلَا تَوَضَّأُ إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَوَضَّئُوا مِمَّا غَيَّرَتْ النَّارُ أَوْ قَالَ مِمَّا مَسَّتْ النَّارُقَالَ أَبُو دَاوُد فِي حَدِيثِ الزُّهْرِيِّ يَا ابْنَ أَخِي
सानु दस्सेया गया है [मुस्लिम बिन इब्राहिम] ने सानू [अबन] नू [याह्या बिन अबू कथिर] तों [अबू सलामाह] तों दस्सेया है कि [अबू सुफियान बिन सईद बिन अल-मुगीराह] ने उस नूं दस्सेया है कि इक वारी [उम्म हबीबाह] नाल मिलया सी, फिर उसने उस नू आटे दा कटोरा परोसया सी, फिर उसने पानी मंगया ते फिर उसने उस नाल अपना मुंह गर्ग कर दित्ता। तो उम्म हबीबा ने उसे आख्या; हे मेरी भैन दे पुत्तर, क्या तू वज़ूद ना करदे? दरअसल, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जो अग्ग नाल बदलया होवे, -या उन्हां ने आख्या- जो अग्ग नाल छूया होवे, ओ खावण वास्ते वज़ूद करो'। अबू दाऊद ने कहा; अज़-ज़ुहरी दी हदीस च एह् दस्सेआ गेदा ऐ; ओ मेरे भाई दे पुत्तर।
Imam Abu Dawud : 168
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَرِبَ لَبَنًا فَدَعَا بِمَاءٍ فَتَمَضْمَضَ ثُمَّ قَالَ إِنَّ لَهُ دَسَمًا
सानु दस्सेया गया है [कुतैबा बिन सईद] ने सानु [अल-लैट्स] तों [उकाइल] तों [अज़-ज़ुहरी] तों [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह] तों [इब्न अब्बास] तों दस्सेया है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इक वारी दूध पीया सी, जिसदे बाद उन्हां ने पानी मंगया, फिर मुंह कुल्ला कीता, फिर आख्या: 'सचहूँ, दूध होंदा है मोटा'।
Imam Abu Dawud : 169
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ عَنْ زَيْدِ بْنِ الْحُبَابِ عَنْ مُطِيعِ بْنِ رَاشِدٍ عَنْ تَوْبَةَ الْعَنْبَرِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَرِبَ لَبَنًا فَلَمْ يُمَضْمِضْ وَلَمْ يَتَوَضَّأْ وَصَلَّىقَالَ زَيْدٌ دَلَّنِي شُعْبَةُ عَلَى هَذَا الشَّيْخِ
ने सानु [उस्मान बिन अबू स्याइबा] गी [ज़ैद बिन अल हुबाब] कोला [मुथी’ बिन रसीद] कोला [तौबा अल-अनबरी] कोला दस्सेआ ऐ जे उने इक बारी [अनस बिन मलिक] गी आखदे होई सुनेआ हा; सचमुच रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इक वारी दूध पीया, फिर मुंह कुल्ला नहीं कीता ते ना वज़ूद कीता ते फिर नमाज पढ़ी। जैद ने कहा; स्यू'बाह ने इस शेख दे बारे च दस्सेया।
Imam Abu Dawud : 170
حَدَّثَنَا أَبُو تَوْبَةَ الرَّبِيعُ بْنُ نَافِعٍ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ حَدَّثَنِي صَدَقَةُ بْنُ يَسَارٍ عَنْ عَقِيلِ بْنِ جَابِرٍ عَنْ جَابِرٍ قَالَخَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْنِي فِي غَزْوَةِ ذَاتِ الرِّقَاعِ فَأَصَابَ رَجُلٌ امْرَأَةَ رَجُلٍ مِنْ الْمُشْرِكِينَ فَحَلَفَ أَنْ لَا أَنْتَهِيَ حَتَّى أُهَرِيقَ دَمًا فِي أَصْحَابِ مُحَمَّدٍ فَخَرَجَ يَتْبَعُ أَثَرَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَزَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْزِلًا فَقَالَ مَنْ رَجُلٌ يَكْلَؤُنَا فَانْتَدَبَ رَجُلٌ مِنْ الْمُهَاجِرِينَ وَرَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ فَقَالَ كُونَا بِفَمِ الشِّعْبِ قَالَ فَلَمَّا خَرَجَ الرَّجُلَانِ إِلَى فَمِ الشِّعْبِ اضْطَجَعَ الْمُهَاجِرِيُّ وَقَامَ الْأَنْصَارِيُّ يُصَلِّ وَأَتَى الرَّجُلُ فَلَمَّا رَأَى شَخْصَهُ عَرِفَ أَنَّهُ رَبِيئَةٌ لِلْقَوْمِ فَرَمَاهُ بِسَهْمٍ فَوَضَعَهُ فِيهِ فَنَزَعَهُ حَتَّى رَمَاهُ بِثَلَاثَةِ أَسْهُمٍ ثُمَّ رَكَعَ وَسَجَدَ ثُمَّ انْتَبَهَ صَاحِبُهُ فَلَمَّا عَرِفَ أَنَّهُمْ قَدْ نَذِرُوا بِهِ هَرَبَ وَلَمَّا رَأَى الْمُهَاجِرِيُّ مَا بِالْأَنْصَارِيِّ مِنْ الدَّمِ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ أَلَا أَنْبَهْتَنِي أَوَّلَ مَا رَمَى قَالَ كُنْتَ فِي سُورَةٍ أَقْرَؤُهَا فَلَمْ أُحِبَّ أَنْ أَقْطَعَهَا
सानु दस्सेया है [अबू तौबाह अर-रबी' बिन नफी'] ने सानु दस्सेया है [इब्न अल-मुबारक] से [मुहम्मद बिन इशाक] ने मिगी [शदाकाह बिन यासर] कोला ['अकील बिन जाबीर] कोला [जाबीर] कोला दस्सेया ऐ उने आख्या; असीं इक वारी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे नाल बाहर निकले सी, यानी अर-रीका दे सार दी लड़ाई दे दौरान, फिर किसे ने - मुसलमानां विचों - इक आदमी दी पत्नी नू मुशरिकां तों कैद कर ली। तो उसने - पति - कह के कसम खा; 'मैं कदें बदला लैना नेईं छड्डना, तां जे मुहम्मद दे दोस्तें च कुसै दा खून बहा सकां'। इस करिए ओह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे नक्शे कदम पर चलने चली गे। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे इक जगह रुकने दे बाद उन्हां ने आख्या कि साडी देखभाल कौन करग? तो मुहाजिरीन विचों इक ते अंसारां विचों इक ने पूरा कर दित्ता। फिरी उन् ने ग् लाया, 'तुस दवैं, दोऐ प्हाड़ियें दे बिच खाई दे मुंह़ने उप् पर सुरक्षित रौह़!' जाबीर ने कहा; जदूं दो आदमी पहाड़ी दे खाई च गे तां मुहाजिरीन दा आदमी -सोंदे- लेट गया, जबकि अंसार दा आदमी खड़ोते दा हा -नमाज करदा-, फिर मुशरिक आया। मूर्तिपूजक ने जदों अंसार दी आकृति वेखी तां उस नूं पता लगया कि अंसार फौज दा सरदार है, इस करके उसने उस ते तीर सुट्टी ते तीर उस नूं टकरा गई। तो अंसार आदभी ने तीर कढ्ढी, जफ तक मशरीक ने उसे तीन तीर से ऩानी भें ऩानी ऩीरे, ऩशरे अॊसर आदभी ने प्रणाभ ककमा औय सजदा ककमा। फिर उसके दोस्त - मुहाजिरीन - जाग गए। जदुं मूर्तिपूजक गी पता लग् गेया के उदे दोस्तें गी पता लग्गी गेया, तां ओह़ भ़री गेया। मुहाजिरीन बंदे ने जदों अंसार आदमी दी लाश नू खून नाल लथपथ वेखया तां आखया; सुभानल्लाह -महिमा अल्लाह-, तुसीं क्यों नहीं जगाया, जदों उसने तुहानू पहली वार गोली मारी? उसने जवाब दित्ता, उस वक्त मैं इक सूरह पढ़ रिहा सी, जबकि मैं पढ़न नू टोकना पसंद नहीं करदा -अंत तक-।
Imam Abu Dawud : 171
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شُغِلَ عَنْهَا لَيْلَةً فَأَخَّرَهَا حَتَّى رَقَدْنَا فِي الْمَسْجِدِ ثُمَّ اسْتَيْقَظْنَا ثُمَّ رَقَدْنَا ثُمَّ اسْتَيْقَظْنَا ثُمَّ رَقَدْنَا ثُمَّ خَرَجَ عَلَيْنَا فَقَالَ لَيْسَ أَحَدٌ يَنْتَظِرُ الصَّلَاةَ غَيْرُكُمْ
सानु दस्सेया है [अहमद बिन मुहम्मद बिन हंबल] ने सानु दस्सेया है [अब्दुरज्जाक] ने सानु दस्सेया है [इब्न जुरैज] ने मिगी दस्सेआ ऐ [नफी'] ने मिगी [अब्दुल्लाह बिन उमर] दस्सेया ऐ कि इक रात अल्लाह दे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ईशा नमाज थमां व्यस्त हे -जंग दी तैयारियें दे कारण-, इस करी उने इसदा लागू करना खत्म करी दित्ता, इस करी अस मस्जिद विच सोया, फिर जाग गया, फिर वापस सो गया, फिर जाग गया, फिर फिर सो गया, फिर साडे नाल मिलन लई बाहर निकल आया ते आखया: 'तुहाडे सिवाय कोई नमाज दा इंतजार नहीं करदा'।
Imam Abu Dawud : 172
حَدَّثَنَا شَاذُّ بْنُ فَيَّاضٍ حَدَّثَنَا هِشَامٌ الدَّسْتُوَائِيُّ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَكَانَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنْتَظِرُونَ الْعِشَاءَ الْآخِرَةَ حَتَّى تَخْفِقَ رُءُوسُهُمْ ثُمَّ يُصَلُّونَ وَلَا يَتَوَضَّئُونَقَالَ أَبُو دَاوُد زَادَ فِيهِ شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ كُنَّا نَخْفِقُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَوَاهُ ابْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ بِلَفْظٍ آخَرَ
सानु दस्सेया है [स्यादज़ बिन फय्यादल] ने सानु [हिस्यम अद-दस्तूवा`ई] [कताद] से [अनास] से बताया है उसने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे साथी इशा दी नमाज दे अंत दा इंतजार करदे हे, जब तक कि उन्हां दा सिर हिल नहीं जांदा सी - नींद आंदी सी - फिर नमाज पढ़दे सन ते हुण वज़ूद नहीं करदे। अबू दाऊद ने कहा; [स्यू'बाह] ने [कतादह] तों उस नू जोड़ दित्ता, उसने [अनस] ने आख्या; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे समें च अस नींद आंदे हे। ते [इब्न अबी अरूबा] ने [कताद] तों इक होर शबदां नाल रिवायत कीती है।
Imam Abu Dawud : 173
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ وَدَاوُدُ بْنُ شَبِيبٍ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ أَنَّ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ قَالَأُقِيمَتْ صَلَاةُ الْعِشَاءِ فَقَامَ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لِي حَاجَةً فَقَامَ يُنَاجِيهِ حَتَّى نَعَسَ الْقَوْمُ أَوْ بَعْضُ الْقَوْمِ ثُمَّ صَلَّى بِهِمْ وَلَمْ يَذْكُرْ وُضُوءًا
सानु दस्सेया है [मूसा बिन इस्माइल] ते [दाऊद बिन स्याबीब] ने दोनों ने आख्या; [थाबीत अल-बुनानी] से सानू [हम्मद बिन सलामाह] ने दस्सेया है कि [अनस बिन मलिक] ने आख्या; ईशा दी नमाज दा इकामत आ गया सी, अचानक इक आदमी खड़ा हो के आख्या, हे अल्लाह दे रसूलुल्लाह, मैंनू कुझ चीज दी लोड़ है - तुहानू -! इस करिए ओह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उंदे कन्ने गल्ल करदे खड़ोते दे हे, जदूं तकर उंदे साथी या उंदे च किश सोई नेईं गे, फिर उंदे कन्ने नमाज पढ़ी। और उसने -थबीत अल-बुनानी- ने वज़ूद दा जिक्र नहीं कीता -इस इतिहास विच-।
Imam Abu Dawud : 174
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ وَهَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ عَنْ عَبْدِ السَّلَامِ بْنِ حَرْبٍ وَهَذَا لَفْظُ حَدِيثِ يَحْيَى عَنْ أَبِي خَالِدٍ الدَّالَانِيِّ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَسْجُدُ وَيَنَامُ وَيَنْفُخُ ثُمَّ يَقُومُ فَيُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ قَالَ فَقُلْتُ لَهُ صَلَّيْتَ وَلَمْ تَتَوَضَّأْ وَقَدْ نِمْتَ فَقَالَ إِنَّمَا الْوُضُوءُ عَلَى مَنْ نَامَ مُضْطَجِعًا زَادَ عُثْمَانُ وَهَنَّادٌ فَإِنَّهُ إِذَا اضْطَجَعَ اسْتَرْخَتْ مَفَاصِلُهُقَالَ أَبُو دَاوُد قَوْلُهُ الْوُضُوءُ عَلَى مَنْ نَامَ مُضْطَجِعًا هُوَ حَدِيثٌ مُنْكَرٌ لَمْ يَرْوِهِ إِلَّا يَزِيدُ أَبُو خَالِدٍ الدَّالَانِيُّ عَنْ قَتَادَةَ وَرَوَى أَوَّلَهُ جَمَاعَةٌ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَلَمْ يَذْكُرُوا شَيْئًا مِنْ هَذَا وَقَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَحْفُوظًا وَقَالَتْ عَائِشَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَنَامُ عَيْنَايَ وَلَا يَنَامُ قَلْبِي و قَالَ شُعْبَةُ إِنَّمَا سَمِعَ قَتَادَةُ مِنْ أَبِي الْعَالِيَةِ أَرْبَعَةَ أَحَادِيثَ حَدِيثَ يُونُسَ بْنِ مَتَّى وَحَدِيثَ ابْنِ عُمَرَ فِي الصَّلَاةِ وَحَدِيثَ الْقُضَاةُ ثَلَاثَةٌ وَحَدِيثَ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدَّثَنِي رِجَالٌ مَرْضِيُّونَ مِنْهُمْ عُمَرُ وَأَرْضَاهُمْ عِنْدِي عُمَرُ قَالَ أَبُو دَاوُد وَذَكَرْتُ حَدِيثَ يَزِيدَ الدَّالَانِيِّ لِأَحْمَدَ بْنِ حَنْبَلٍ فَانْتَهَرَنِي اسْتِعْظَامًا لَهُ وَقَالَ مَا لِيَزِيدَ الدَّالَانِيِّ يُدْخِلُ عَلَى أَصْحَابِ قَتَادَةَ وَلَمْ يَعْبَأْ بِالْحَدِيثِ
[यह्या बिन माईन] ते [हन्नाद बिन अस सरीय] ते [उस्मान बिन अबू स्याइबा] ने [अब्दुसलाम बिन हर्ब] तों सानु दस्सेया है ते ए [अबू खालिद अद-दलानी] तों [कतदाह] तों [अबू अल-अलियाह] तों [इबन अब्बास] तों याह्या दी हदीस दा लफाज है कि अल्लाह दा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु 'अलैहि वसल्लम इक बारी सजदा करदे होई सोई गे ते आवाज़ कीती, फिर नमाज करने आस्तै उठी गेआ ते फिरी वज़ूद नेईं करना। उसने - इब्न अब्बास - ने आख्या; तां मैं उदे कोला पुच्छया; राजा ने नमाज पढ़ी ते वज़ूद नहीं कीता, भले ही राजा सोया होवे। तो उसने आख्या: 'वास्तव विच वज़ूद सिर्फ उन लोकां वास्ते फर्ज है जो लेट के सोंदे हन'। [उस्मान] ते [हन्नाद] ने लफाडल कन्ने जोड़ेया; 'क्योंकि जदों ओह लेट के सोंदा है तां उस दे सारे जोड़ कमजोर हो जांदे हन'। अबू दाऊद ने कहा; लेट के सोने आले लोकें गी वज़ूद करने दे बारे च हदीस इक बुरी हदीस ऐ, कताद दे यजीद अबू खालिद अद-दलानी दे अलावा कुसै ने बी नेईं बखान कीता। इस हदीस दी शुरुआत जमाअत ने इब्न अब्बास कोला रिवायत कीती ही, ते उन्हां ने इस बारे विच कुझ वी ज़िकर नहीं कीता -जिन्हां वास्ते लेट के सोंदे होए वज़ूद-, ते उन्हां ने आख्या; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम गी बचाया गेआ - उंदे दिल दी नींद थमां -। और ऐस्याह, अल्लाह उस पर खुश होवे, ने आख्या; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'मेरी अक्खां सोईयां ने पर मेरा दिल नहीं'। शु'बाह ने आख्या; दरअसल कतादा ने अबू अल अलियाह कोला सिर्फ चार हदीस सुनी, जिंदे च: यूनुस बिन मत्ता दी हदीस, नमाज दे बारे च इब्न उमर दी हदीस, इस बयान दे बारे च हदीस कि जज दे त्रै समूह न, ते इब्न अब्बास दी हदीस, जिने मिगी उनें लोकें दे बारे च दस्सेआ जेह्ड़े बरकत न, जिंदे च उमर बी शामल न, ते जेह्ड़ा मेरी नजर च मता बरकत ऐ ओह् उमर ऐ। अबू दाऊद ने कहा; मैं इक बारी अहमद बिन हनबल गी यजीद अद-दलानी दी हदीस दा जिक्र कीता हा, इस करी उने उस इतिहास दा बड़ा इन्कार करने दे कारण मिगी सख्त चेतावनी दित्ती ही, ते उने आखेआ हा; यजीद अद-दलानी गी कतादा दे दोस्तें गी दस्सने कन्नै केह् लेना-देना ऐ जेह्ड़ी उनेंगी रिपोर्ट नेईं कीती ही? उसी -अहमद- ने हदीस दी कोई परवाह नेईं कीती।
Imam Abu Dawud : 175
حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ الْحِمْصِيُّ فِي آخَرِينَ قَالُوا حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ عَنْ الْوَضِينِ بْنِ عَطَاءٍ عَنْ مَحْفُوظِ بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَائِذٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وِكَاءُ السَّهِ الْعَيْنَانِ فَمَنْ نَامَ فَلْيَتَوَضَّأْ
सानु दस्सेया है [हैवा बिन स्यूरईह अल हिमशी] ... सानु [बकीय्याह] से [अल-वदलीन बिन अथा`] से [महफुज बिन अलकामाह] से [अब्दुररहमान बिन अ`इज] से [अली बिन अबू तालिब] से बताया है उसने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: नितंब दो अक्खां हन, इस करके जो सोंदा है, वज़ूद कर दे।
Imam Abu Dawud : 176
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ أَبِي مُعَاوِيَةَ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ ح و حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنِي شَرِيكٌ وَجَرِيرٌ وَابْنُ إِدْرِيسَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِكُنَّا لَا نَتَوَضَّأُ مِنْ مَوْطِئٍ وَلَا نَكُفُّ شَعْرًا وَلَا ثَوْبًاقَالَ أَبُو دَاوُد قَالَ إِبْرَاهِيمُ بْنُ أَبِي مُعَاوِيَةَ فِيهِ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ مَسْرُوقٍ أَوْ حَدَّثَهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَقَالَ هَنَّادٌ عَنْ شَقِيقٍ أَوْ حَدَّثَهُ عَنْهُ
ने सानु [हन्नाद बिन अस-सरी] ते [इब्राहिम बिन अबू मुअवियाह] गी [अबू मुअवियाह] कोला दस्सेया ऐ। ते सानु दस्सदे होए [उस्मान बिन अबू स्याइबा] ने मिगी [सियारिक] ते [जरीर] ते [इब्न इदरीस] गी [अल अ'मासी] कोला [स्याकीक] कोला दस्सेया हा; [अब्दुल्लाह] ने आख्या; पैर -गंदगी- उप्पर कदम रखने पर अस दुबारा वजूद नेईं करदे ते अपने बाल जां कपड़े बी नेईं कड्ढदे -सजदा करदे बेल्लै उनेंगी छोड़ी दिंदे आं-। अबू दाऊद ने कहा; [इब्राहिम बिन अबू मुअवियाह] ने उस नू आख्या, [अल अ'मासी] तों [स्याकीक] तों [मसरुक] तों या उसने उस नूं उस तों दस्सेया सी, उसने आख्या; [अब्दुल्लाह] ने कहा, ते [शकीक] तों [हन्नाद] ने आख्या या उसने उस नूं उस तों दस्सेया सी।
Imam Abu Dawud : 177
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ عَبْدِ الْحَمِيدِ عَنْ عَاصِمٍ الْأَحْوَلِ عَنْ عِيسَى بْنِ حِطَّانَ عَنْ مُسْلِمِ بْنِ سَلَّامٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ طَلْقٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا فَسَا أَحَدُكُمْ فِي الصَّلَاةِ فَلْيَنْصَرِفْ فَلْيَتَوَضَّأْ وَلْيُعِدْ الصَّلَاةَ
सानु दस्सेया है [उस्मान बिन अबू स्याइबाह] ने सानु [जरीर बिन अब्दुल हामिद] गी ['अशिम अल अहवाल] कोला [ईसा बिन हिथथान] कोला [मुस्लिम बिन सल्लम] कोला [अली बिन थलक] कोला दस्सेया ऐ उने आख्या; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: अगर तुहाडे विचों कोई नमाज पढ़दे होए हवा गुजरे तां वज़ूद करो ते फिर नमाज दोहरान दे।
Imam Abu Dawud : 178
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ الْحَذَّاءُ عَنْ الرَّكِينِ بْنِ الرَّبِيعِ عَنْ حُصَيْنِ بْنِ قَبِيصَةَ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَكُنْتُ رَجُلًا مَذَّاءً فَجَعَلْتُ أَغْتَسِلُ حَتَّى تَشَقَّقَ ظَهْرِي فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ ذُكِرَ لَهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَفْعَلْ إِذَا رَأَيْتَ الْمَذْيَ فَاغْسِلْ ذَكَرَكَ وَتَوَضَّأْ وُضُوءَكَ لِلصَّلَاةِ فَإِذَا فَضَخْتَ الْمَاءَ فَاغْتَسِلْ
सानु दस्सेया है [कुतैबा बिन सईद] ने सानु दस्सेया है ['अबीदा बिन हुमैद अल हद्ज़ज़ा`] से [अर-रकीन बिन अर-रबी'] से [हुशैन बिन काबीशाह] से [अली रदलियाल्लाहु अनहु] से उसने कहा; मैं कोई ऐसा व्यक्ति आं जेड़ा अक्सर बाहर निकलदा हां मद्जी, इस करी मैं हमेशा नहा लैंदा हां, इस करी मेरी पीठ ऐसा लगदा ऐ जे एह् फटने आह्ली ऐ। इस करिए मैं इस गल्ल गी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम गी पजाया जां उंदे कोल पजाया। तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'ऐसा न करो, अगर तुहानूं मज़ी दिखे तां फिर अपने जननांग धोओ, फिर वज़ूद करो जिवें तुसीं नमाज वास्ते वज़ूद करदे हो। जदूं तुस स्खलन करदे ओ, तां फिर नहाओ!'
Imam Abu Dawud : 179
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ أَبِي النَّضْرِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ عَنْ الْمِقْدَادِ بْنِ الْأَسْوَدِأَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَمَرَهُ أَنْ يَسْأَلَ لَهُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الرَّجُلِ إِذَا دَنَا مِنْ أَهْلِهِ فَخَرَجَ مِنْهُ الْمَذْيُ مَاذَا عَلَيْهِ فَإِنَّ عِنْدِي ابْنَتَهُ وَأَنَا أَسْتَحْيِي أَنْ أَسْأَلَهُ قَالَ الْمِقْدَادُ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِذَا وَجَدَ أَحَدُكُمْ ذَلِكَ فَلْيَنْضَحْ فَرْجَهُ وَلْيَتَوَضَّأْ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ عُرْوَةَ أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ قَالَ لِلْمِقْدَادِ وَذَكَرَ نَحْوَ هَذَا قَالَ فَسَأَلَهُ الْمِقْدَادُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِيَغْسِلْ ذَكَرَهُ وَأُنْثَيَيْهِ قَالَ أَبُو دَاوُد وَرَوَاهُ الثَّوْرِيُّ وَجَمَاعَةٌ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْمِقْدَادِ عَنْ عَلِيٍّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ الْقَعْنَبِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ حَدِيثٍ حَدَّثَهُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَ قُلْتُ لِلْمِقْدَادِ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ قَالَ أَبُو دَاوُد وَرَوَاهُ الْمُفَضَّلُ بْنُ فَضَالَةَ وَجَمَاعَةٌ وَالثَّوْرِيُّ وَابْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ وَرَوَاهُ ابْنُ إِسْحَقَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْمِقْدَادِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَذْكُرْ أُنْثَيَيْهِ
[अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] ने सानु [मलिक] तों [अबू अन-नदलर] तों [सुलेमान बिन यासर] तों [अल-मिकदाद बिन अल असवद] तों दस्सेया है कि [अली बिन अबू तालिब अल्लाह उस तों खुश होवे] ने इक वारी उस नूं आख्या सी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तों इक आदमी दे बारे विच पुच्छो जो अपनी घरेआली दे कोल आ गया, फिर उसदा मज़्ज़िल बाहर निकल आया। उसी की करना चाइदा - नहा लैना चाहिदा या सिर्फ वजूद करना चाइदा -? क्योंकि मेरी घरआली उंदी बेटी ऐ, इस करी मैं उंदे कोला -सीधे- पुच्छने च शर्मिंदगी महसूस कीती। मिकदाद ने आख्या; तो मैं इस बारे च रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला पुच्छया। फिर उसने सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'जदूं तुहाडे विचों किसी नू ए मज़ी मिल जावे तां उस नूं अपने निजी अंग धोवे, ते वज़ूद कर लैवे जिवें ओह नमाज वास्ते वज़ूद करदा है'। सानु दस्सेया है [अहमद बिन यूनुस] ने सानु [ज़ुहैर] नू [हिस्याम बिन उरवाह] तों [उर्वाह] तों दस्सेया है कि [अली बिन अबू तालिब अल्लाह उहदे नाल खुश होवे] ने इक वारी [अल-मिकदाद] नू आख्या सी, उसने इस तरह दी लफाज़ दा जिक्र कीता सी, उसने आख्या तो मिकदाद ने इस बारे च पुच्छया, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आख्या: 'उसी अपने जननांग ते अपनी दो गोले धोने दे'। अबू दाऊद ने कहा; ते एह् [अतस-त्सौरी] ते जमाआ ने [हिस्याम] थमां [अपने पिता] थमां [अल-मिकदाद] थमां [अली] थमां नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम थमां रिवायत कीती ऐ। सानु दस्सेया है [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह अल-कानबी] उसने कहा; [मेरे पिता] गी [हिस्याम बिन उर्वाह] कोला [अपने पिता] कोला इक हदीस थमां दस्सदे होई जेह्ड़ी उने [अली बिन अबू तालिब] कोला दस्सी ही; मैं इक बारी [अल-मिकदाद] गी आखेआ हा, फिर उने हदीस दा मतलब दस्सेया। अबू दाऊद ने कहा; ते एह् [अल-मुफदल्लल बिन फदलाह] ते जमाआह ते [अतसौरी] ते [इब्न उयैनह] ने [हिशाम] थमां [उंदे पिता] कोला [अली बिन अबू तालिब] कोला रिवायत कीता ऐ। ते [इब्न इशाक] ने [हिसियाम बिन उरवाह] कोला [अपने पिता] कोला [अल-मिकदाद] कोला नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला रिवायत कीती ऐ, उने अपने दो जननांगें दा जिक्र नेईं कीता।
Imam Abu Dawud : 180
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ يَعْنِي ابْنَ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ عُبَيْدِ بْنِ السَّبَّاقِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ قَالَكُنْتُ أَلْقَى مِنْ الْمَذْيِ شِدَّةً وَكُنْتُ أُكْثِرُ مِنْ الِاغْتِسَالِ فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِنَّمَا يُجْزِيكَ مِنْ ذَلِكَ الْوُضُوءُ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَكَيْفَ بِمَا يُصِيبُ ثَوْبِي مِنْهُ قَالَ يَكْفِيكَ بِأَنْ تَأْخُذَ كَفًّا مِنْ مَاءٍ فَتَنْضَحَ بِهَا مِنْ ثَوْبِكَ حَيْثُ تَرَى أَنَّهُ أَصَابَهُ
सानु दस्सेया है [मुसद्दद] ने सानु दस्सेया है [इस्माइल बिन इब्राहिम] ने सानु दस्सेया है [मुहम्मद बिन इशक] ने मिगी [सैद बिन उबैद बिन अस-सब्बक] [अपने पिता] कोला [सहल बिन हुनैफ] कोला दस्सेया ऐ उने आख्या; मैं हमेशा मद्जी कढदा हां, इस करके मैं हमेशा नहा लैंदा हां। तो मैं इस बारे च रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला पुच्छया। उसने जवाब दित्ता: 'सचमुच तुहाडे वास्ते उस तों वज़ूद करना काफी है'। मैं फिरी पुच्छया; ऐ अल्लाह दे रसूलुल्लाह, फिर मेरे कपड़े छूने वाले मद्जी दा के हाल ऐ? उसने जवाब दित्ता: 'बस हत्थ दी हथेली च पानी लैओ, फिर अपने कपड़े दे उस हिस्से उप्पर छिड़को, जिसगी तुसें गी पता ऐ जे मद्जी दा असर पौंदा ऐ'।