इमाम मुस्लिम : 5281
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ بْنِ كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَا فِي رَفِّي مِنْ شَيْءٍ يَأْكُلُهُ ذُو كَبِدٍ إِلَّا شَطْرُ شَعِيرٍ فِي رَفٍّ لِي فَأَكَلْتُ مِنْهُ حَتَّى طَالَ عَلَيَّ فَكِلْتُهُ فَفَنِيَ
हमें बताया है [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल अला` बिन कुरैब] ने हमें [अबू उसामा] से [हिशाम] से [अपने पिता] से [आयशा] से कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हो गई, जबकि मेरे शेल्फ पर लोगों के खाने के लिए आधे अनाज के अलावा कुछ भी नहीं था। मैंने इसे लंबे समय तक खाया, फिर मैंने इसे मापा और खत्म कर दिया।
इमाम मुस्लिम : 5282
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ يَزِيدَ بْنِ رُومَانَ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا كَانَتْ تَقُولُ وَاللَّهِ يَا ابْنَ أُخْتِي إِنْ كُنَّا لَنَنْظُرُ إِلَى الْهِلَالِ ثُمَّ الْهِلَالِ ثُمَّ الْهِلَالِ ثَلَاثَةَ أَهِلَّةٍ فِي شَهْرَيْنِ وَمَا أُوقِدَ فِي أَبْيَاتِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَارٌ قَالَ قُلْتُ يَا خَالَةُ فَمَا كَانَ يُعَيِّشُكُمْ قَالَتْ الْأَسْوَدَانِ التَّمْرُ وَالْمَاءُ إِلَّا أَنَّهُ قَدْ كَانَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جِيرَانٌ مِنْ الْأَنْصَارِ وَكَانَتْ لَهُمْ مَنَائِحُ فَكَانُوا يُرْسِلُونَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ أَلْبَانِهَا فَيَسْقِينَاهُ
याह्या बिन याह्या ने हमें अपने पिता यज़ीद बिन रुमान से उरवाह से आयशा से सुनाया, जिन्होंने कहा: अल्लाह की कसम, ऐ मेरी भतीजी, हम दो महीने तक तीन बार आधे चांद को देखते थे, फिर आधे चांद को, फिर आधे चांद को, जबकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के घरों में कोई आग नहीं जलाता था। उरवाह ने पूछा: "ऐ चाची, आपकी रोज़ी क्या थी?" उसने उत्तर दिया: "अस्वदान; खजूर और पानी।" हालाँकि, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के पड़ोसी अंसार थे, जिनके पास दूध देने वाली ऊँटें थीं। वे अपना कुछ दूध अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को भेजते थे और वह हमें वह दूध पीने के लिए देते थे।
इमाम मुस्लिम : 5283
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ أَحْمَدُ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي أَبُو صَخْرٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُسَيْطٍ ح و حَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي أَبُو صَخْرٍ عَنْ ابْنِ قُسَيْطٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ لَقَدْ مَاتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَا شَبِعَ مِنْ خُبْزٍ وَزَيْتٍ فِي يَوْمٍ وَاحِدٍ مَرَّتَيْنِ
मुझे बताया है [अबू अथ ताहिर अहमद] ने हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन वहाब] ने मुझे [अबू शखर] [यज़ीद बिन अब्दुल्ला बिन कुसैथ] से बताया है। मुझे बताया गया है [हारुन बिन सईद] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] ने मुझे [अबू शखर] [इब्न कुसैथ] से [उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर] से [ऐस्या] पैगंबर की पत्नी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा है: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हो गई और वह दिन में दो बार रोटी और तेल से कभी भी भरा नहीं था।
इमाम मुस्लिम : 5284
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا دَاوُدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمَكِّيُّ الْعَطَّارُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ أُمِّهِ عَنْ عَائِشَةَ ح و حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْعَطَّارُ حَدَّثَنِي مَنْصُورُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحَجَبِيُّ عَنْ أُمِّهِ صَفِيَّةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ شَبِعَ النَّاسُ مِنْ الْأَسْوَدَيْنِ التَّمْرِ وَالْمَاءِ
हमें बताया है [याह्या बिन याह्या] ने हमें बताया है [दाऊद बिन अब्दुर्रहमान अल मक्की अल अत्तर] [मंसूर] से [उसकी माँ] से [ऐस्या] से। हमें बताया है [सईद बिन मंशूर] ने हमें बताया है [दाऊद बिन अब्दुर्रहमान अल अत्तर] ने मुझे बताया है [मंशूर बिन अब्दुर्रहमान अल हजबी] [उसकी माँ, शफिया] से [ऐस्या] से कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु तब हुई जब लोग पूरे असवादैन थे; खजूर और पानी।
इमाम मुस्लिम : 5285
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ مَنْصُورِ بْنِ صَفِيَّةَ عَنْ أُمِّهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ شَبِعْنَا مِنْ الْأَسْوَدَيْنِ الْمَاءِ وَالتَّمْرِ و حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا الْأَشْجَعِيُّ ح و حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ كِلَاهُمَا عَنْ سُفْيَانَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِهِمَا عَنْ سُفْيَانَ وَمَا شَبِعْنَا مِنْ الْأَسْوَدَيْنِ
मुझे बताया है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने हमें बताया है [अब्दुर्रहमान] ने [सुफयान] से [मंशूर बिन शफिया] से [उसकी मां] से [ऐस्या] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हो गई और हम पूरे अल अस्वदैन हैं; खजूर और पानी। हमें बताया है [अबू कुरैब] ने हमें बताया है [अल असियाजी] ने। हमें बताया है [नशर बिन अली] ने हमें बताया है [अबू अहमद] उन दोनों ने [सुफयान] से इस सनद के साथ कि हदीस में वे दोनों उल्लेख करते हैं: सुफयान से: और हम कभी भी अल अस्वदैन (खजूर और पानी) से भरे नहीं होते।
इमाम मुस्लिम : 5286
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ يَعْنِيَانِ الْفَزَارِيَّ عَنْ يَزِيدَ وَهُوَ ابْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ و قَالَ ابْنُ عَبَّادٍ وَالَّذِي نَفْسُ أَبِي هُرَيْرَةَ بِيَدِهِ مَا أَشْبَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْلَهُ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ تِبَاعًا مِنْ خُبْزِ حِنْطَةٍ حَتَّى فَارَقَ الدُّنْيَا
हमें बताया गया है कि [मुहम्मद बिन अब्बद] और [इब्न अबी उमर] दोनों ने कहा: हमें बताया गया है कि [मरवान अल फज़ारी] ने [यज़ीद बिन कैसन] से [अबू हाज़िम] से [अबू हुरैरा] से कहा: उस की कसम जिसके हाथ में मेरी आत्मा है। इब्न अब्बद ने कहा: उस की कसम जिसके हाथ में अबू हुरैरा की आत्मा है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने परिवार को लगातार तीन दिनों तक गेहूं की रोटी नहीं खिलाई जब तक कि उनकी मृत्यु नहीं हो गई।
इमाम मुस्लिम : 5287
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ كَيْسَانَ حَدَّثَنِي أَبُو حَازِمٍ قَالَ رَأَيْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يُشِيرُ بِإِصْبَعِهِ مِرَارًا يَقُولُ وَالَّذِي نَفْسُ أَبِي هُرَيْرَةَ بِيَدِهِ مَا شَبِعَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَهْلُهُ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ تِبَاعًا مِنْ خُبْزِ حِنْطَةٍ حَتَّى فَارَقَ الدُّنْيَا
मुझे बताया गया है कि [मुहम्मद बिन हातिम] ने हमें [याह्या बिन सईद] ने [यज़ीद बिन कैसन] से बताया है कि [अबू हाज़िम] ने कहा: मैंने [अबू हुरैरा] को कई बार अपनी उंगली से इशारा करते हुए देखा, उन्होंने कहा: उस व्यक्ति की कसम जिसके हाथों में अबू हुरैरा की आत्मा है, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके परिवार को लगातार तीन दिनों तक गेहूं की रोटी से पेट नहीं भरा था जब तक कि उनकी मृत्यु नहीं हो गई।
इमाम मुस्लिम : 5288
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ سِمَاكٍ قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ بْنَ بَشِيرٍ يَقُولُا أَلَسْتُمْ فِي طَعَامٍ وَشَرَابٍ مَا شِئْتُمْ لَقَدْ رَأَيْتُ نَبِيَّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَا يَجِدُ مِنْ الدَّقَلِ مَا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ وَقُتَيْبَةُ لَمْ يَذْكُرْ بِهِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ ح و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا الْمُلَائِيُّ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ كِلَاهُمَا عَنْ سِمَاكٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَزَادَ فِي حَدِيثِ زُهَيْرٍ وَمَا تَرْضَوْنَ دُونَ أَلْوَانِ التَّمْرِ وَالزُّبْدِ
हमें [कुतैबा बिन सईद] और [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] दोनों ने बताया है: हमें [अबू अल अहवाश] को [सिमक] से बताया गया है: मैंने [अन नुमान बिन बसीर] को कहते सुना: क्या तुम अपनी इच्छानुसार नहीं खाते और पीते? मैं देखता था कि आपके पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास पेट भरने के लिए सबसे खराब खजूर भी नहीं थे। हमें बताया है [मुहम्मद बिन रफी] ने हमें बताया है [याह्या बिन आदम] ने हमें बताया है [ज़ुहैर] ने हमें बताया है। हमें बताया है [इसहाक बिन इब्राहीम] ने हमें बताया है [अल मुला`ई] ने हमें बताया है [इस्राइल] उन दोनों ने [सुनो] इस सनद से ऐसा लगता है। उन्होंने हदीस ज़ुहैर में कहा: इस बीच आप विभिन्न प्रकार के खजूर और पनीर के अलावा अन्य (खाने से) हिचकिचा रहे हैं।
इमाम मुस्लिम : 5289
و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ وَاللَّفْظُ لِابْنِ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ يَخْطُبُ قَالَ ذَكَرَ عُمَرُ مَا أَصَابَ النَّاسُ مِنْ الدُّنْيَا فَقَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَظَلُّ الْيَوْمَ يَلْتَوِي مَا يَجِدُ دَقَلًا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ
हमें [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] और [इब्न बस्यार] इब्न मुत्सन्ना का पाठ बताया है, दोनों ने कहा: हमें बताया है [मुहम्मद बिन जाफर] ने हमें बताया है [स्यूबा] [सिमक बिन हरब] से कहा: मैंने [अन नुमान बिन बस्यिर] को उपदेश देते सुना, उन्होंने कहा: उमर ने मनुष्यों पर आने वाली दुनिया का उल्लेख किया फिर उन्होंने कहा: मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उस समय परिपत्र में देखा है, उनके पास अपना पेट भरने के लिए सबसे खराब तिथियां (यहां तक कि) भी नहीं हैं।
इमाम मुस्लिम : 5290
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ سَرْحٍ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي أَبُو هَانِئٍ سَمِعَ أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِيَّ يَقُولُا سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ وَسَأَلَهُ رَجُلٌ فَقَالَ أَلَسْنَا مِنْ فُقَرَاءِ الْمُهَاجِرِينَ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ أَلَكَ امْرَأَةٌ تَأْوِي إِلَيْهَا قَالَ نَعَمْ قَالَ أَلَكَ مَسْكَنٌ تَسْكُنُهُ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَأَنْتَ مِنْ الْأَغْنِيَاءِ قَالَ فَإِنَّ لِي خَادِمًا قَالَ فَأَنْتَ مِنْ الْمُلُوكِ
मुझे बताया है [अबू अथ ताहिर अहमद बिन अम्रु बिन सरह] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] ने मुझे बताया है [अबू हानी] उसने [अबू अब्दुर्रहमान अल हुबली] को कहते सुना: मैंने सुना [अब्दुल्ला बिन अम्रु बिन अल ऐश] किसी ने पूछा, उसने उत्तर दिया: क्या हम मुहाजिरिन के गरीब लोग नहीं हैं? अब्दुल्ला ने उससे पूछा: क्या तुम्हारे पास रक्षा करने के लिए एक पत्नी है? उसने उत्तर दिया: हाँ। अब्दुल्ला ने पूछा: क्या आपके पास कोई आवास है जिसमें आप रहते हैं? उसने उत्तर दिया: हाँ। अब्दुल्ला ने कहा: आप अमीर लोगों में से एक हैं। उसने कहा: मेरे पास एक नौकर है। अब्दुल्ला ने कहा: आप राजाओं में से हैं।
इमाम मुस्लिम : 5291
قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَجَاءَ ثَلَاثَةُ نَفَرٍ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ وَأَنَا عِنْدَهُ فَقَالُوا يَا أَبَا مُحَمَّدٍ إِنَّا وَاللَّهِ مَا نَقْدِرُ عَلَى شَيْءٍ لَا نَفَقَةٍ وَلَا دَابَّةٍ وَلَا مَتَاعٍ فَقَالَ لَهُمْ مَا شِئْتُمْ إِنْ شِئْتُمْ رَجَعْتُمْ إِلَيْنَا فَأَعْطَيْنَاكُمْ مَا يَسَّرَ اللَّهُ لَكُمْ وَإِنْ شِئْتُمْ ذَكَرْنَا أَمْرَكُمْ لِلسُّلْطَانِ وَإِنْ شِئْتُمْ صَبَرْتُمْ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ فُقَرَاءَ الْمُهَاجِرِينَ يَسْبِقُونَ الْأَغْنِيَاءَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَى الْجَنَّةِ بِأَرْبَعِينَ خَرِيفًا قَالُوا فَإِنَّا نَصْبِرُ لَا نَسْأَلُ شَيْئًا
[अबू अब्दुर्रहमान] ने कहा: तीन आदमी [अब्दुल्ला बिन अम्र बिन अल ऐश] के पास आए और मैं उनके पास था, उन्होंने कहा: ऐ अबू मुहम्मद, सच में, अल्लाह की कसम, हम मजबूर हैं, हमारे पास न तो रोजी-रोटी का कोई ज़रिया है, न जानवर, न सामान। उसने उनसे कहा: यह तुम पर है, अगर तुम चाहो, तो हमारे पास लौट आओ और हम तुम्हें कुछ देंगे जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए आसान कर दिया है, अगर तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे मामलों की खबर शासक को दूंगा और अगर तुम चाहो, तो सब्र करो क्योंकि मैंने एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते सुना था: "बेशक, गरीब प्रवासी, कयामत के दिन जन्नत में अमीरों से चालीस साल पहले पहुँचेंगे।" उन्होंने कहा: हम सब्र करेंगे, हम कुछ नहीं मांगते।
इमाम मुस्लिम : 5292
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ جَمِيعًا عَنْ إِسْمَعِيلَ قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ دِينَارٍ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَقُولُا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِأَصْحَابِ الْحِجْرِ لَا تَدْخُلُوا عَلَى هَؤُلَاءِ الْقَوْمِ الْمُعَذَّبِينَ إِلَّا أَنْ تَكُونُوا بَاكِينَ فَإِنْ لَمْ تَكُونُوا بَاكِينَ فَلَا تَدْخُلُوا عَلَيْهِمْ أَنْ يُصِيبَكُمْ مِثْلُ مَا أَصَابَهُمْ
हमसे कहा है [याह्या बिन अय्यूब], [कुतैबा बिन सईद] और [अली बिन हुज्र], सभी [इस्माईल] से, [इब्न अय्यूब] ने कहा: हमसे कहा है [इस्माईल बिन जाफर] ने मुझसे [अब्दुल्ला बिन दिनार] कहा है कि उसने [अब्दुल्ला बिन उमर] को कहते सुना: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने साथियों से जो हिज्र (समूद का स्थान) पार कर रहे थे, कहा: "उन लोगों के पास प्रवेश न करो जिन्हें यातना दी जा रही है जब तक कि तुम रो न पड़ो, यदि तुम नहीं रोते हो, तो उनके पास प्रवेश न करो क्योंकि तुम पर प्रहार किया जाएगा जैसा उनके साथ हुआ था।"
इमाम मुस्लिम : 5293
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ وَهُوَ يَذْكُرُ الْحِجْرَ مَسَاكِنَ ثَمُودَ قَالَ سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ إِنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ مَرَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْحِجْرِ فَقَالَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَدْخُلُوا مَسَاكِنَ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ إِلَّا أَنْ تَكُونُوا بَاكِينَ حَذَرًا أَنْ يُصِيبَكُمْ مِثْلُ مَا أَصَابَهُمْ ثُمَّ زَجَرَ فَأَسْرَعَ حَتَّى خَلَّفَهَا
मुझे बताया गया है कि [हरमला बिन याह्या] ने हमें बताया है कि [इब्न वहाब] ने मुझे बताया है [यूनुस] ने [इब्न शिहाब] से कहा कि उन्होंने हिज्र का ज़िक्र किया, वह जगह जहाँ समूद रहते थे- [सलीम बिन अब्दुल्ला] ने कहा कि [अब्दुल्ला बिन उमर] हम और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हिज्र से गुज़रे, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमसे कहा: "उन लोगों के घरों में मत जाओ जो खुद पर ज़ुल्म करते हैं, जब तक कि तुम रो न पड़ो क्योंकि तुम्हें डर है कि जो उनके साथ हुआ वह तुम्हारे साथ भी होगा।" फिर उन्होंने मना कर दिया और हमें छोड़कर जल्दी से चले गए।
इमाम मुस्लिम : 5294
حَدَّثَنِي الْحَكَمُ بْنُ مُوسَى أَبُو صَالِحٍ حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ إِسْحَقَ أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ أَخْبَرَهُ أَنَّ النَّاسَ نَزَلُوا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْحِجْرِ أَرْضِ ثَمُودَ فَاسْتَقَوْا مِنْ آبَارِهَا وَعَجَنُوا بِهِ الْعَجِينَ فَأَمَرَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُهَرِيقُوا مَا اسْتَقَوْا وَيَعْلِفُوا الْإِبِلَ الْعَجِينَ وَأَمَرَهُمْ أَنْ يَسْتَقُوا مِنْ الْبِئْرِ الَّتِي كَانَتْ تَرِدُهَا النَّاقَةُ و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مُوسَى الْأَنْصَارِيُّ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ عِيَاضٍ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ فَاسْتَقَوْا مِنْ بِئَارِهَا وَاعْتَجَنُوا بِهِ
मुझे बताया गया है [अल हकम बिन मूसा अबू सलीह] ने हमें बताया है [स्यूऐब बिन इसहाक] ने हमें [उबैदुल्लाह] [नफी] से बताया है कि [अब्दुल्ला बिन उमर] ने उनसे कहा है कि लोग हिज्र -समद क्षेत्र- में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास रुके, उन्होंने कुओं का पानी पिया और आटा गूंथ लिया (पानी से) फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें आदेश दिया कि जो उन्होंने पिया है और जो आटा उन्होंने बनाया है (उस पानी से) उसे गिरा दें और उन्हें आदेश दिया कि वे उस कुएं से पिएं जहां से ऊंट आए थे। हमें बताया है [इसहाक बिन मूसा अल अंसारी] ने हमें बताया है [अनस बिन इयाद] ने मुझे [उबैदुल्लाह] इस सनद के साथ एक समान मतान के साथ बताया है केवल उन्होंने अपनी हदीस में कहा है: "कुएं से पियो और उसके (पानी) से आटा गूंथ लो।"
इमाम मुस्लिम : 5295
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَبِي الْغَيْثِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ السَّاعِي عَلَى الْأَرْمَلَةِ وَالْمِسْكِينِ كَالْمُجَاهِدِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَأَحْسِبُهُ قَالَ وَكَالْقَائِمِ لَا يَفْتُرُ وَكَالصَّائِمِ لَا يُفْطِرُ
हमें बताया गया है [अब्दुल्ला बिन मसलमा बिन कानाब] ने हमें [मलिक] ने [सौर बिन ज़ैद] से [अबू अल घैस] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो व्यक्ति विधवाओं और गरीबों की मदद करता है वह उस व्यक्ति की तरह है जो अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए प्रयास करता है - मुझे लगता है कि उन्होंने कहा: और जैसे कोई रात में प्रार्थना करता है वह थकता नहीं है - और जैसे कोई जो उपवास करता है वह उपवास नहीं तोड़ता है।"
इमाम मुस्लिम : 5296
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ الدِّيلِيِّ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الْغَيْثِ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَافِلُ الْيَتِيمِ لَهُ أَوْ لِغَيْرِهِ أَنَا وَهُوَ كَهَاتَيْنِ فِي الْجَنَّةِ وَأَشَارَ مَالِكٌ بِالسَّبَّابَةِ وَالْوُسْطَى
मुझे बताया गया है कि [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने हमें बताया है कि [इसहाक बिन ईसा] ने हमें बताया है कि [मलिक] ने [सौर बिन ज़ैद अद दिली] से कहा: मैंने [अबू अल ग़ैत] को [अबू हुर्रियत] से रिवायत करते हुए सुना: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई अपने या किसी और के अनाथ का सहारा बनता है, मैं और वह जन्नत में इन दोनों की तरह हैं।" मलिक ने अपनी तर्जनी और मध्यमा उंगली से इशारा किया।
इमाम मुस्लिम : 5297
حَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الْأَيْلِيُّ وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي عَمْرٌو وَهُوَ ابْنُ الْحَارِثِ أَنَّ بُكَيْرًا حَدَّثَهُ أَنَّ عَاصِمَ بْنَ عُمَرَ بْنِ قَتَادَةَ حَدَّثَهُ أَنَّهُ سَمِعَ عُبَيْدَ اللَّهِ الْخَوْلَانِيَّ يَذْكُرُ أَنَّهُ سَمِعَ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ عِنْدَ قَوْلِ النَّاسِ فِيهِ حِينَ بَنَى مَسْجِدَ الرَّسُولِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّكُمْ قَدْ أَكْثَرْتُمْ وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ بَنَى مَسْجِدًا قَالَ بُكَيْرٌ حَسِبْتُ أَنَّهُ قَالَ يَبْتَغِي بِهِ وَجْهَ اللَّهِ بَنَى اللَّهُ لَهُ مِثْلَهُ فِي الْجَنَّةِ وَفِي رِوَايَةِ هَارُونَ بَنَى اللَّهُ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ
मुझे [हारुन बिन सईद अल आइली] और [अहमद बिन ईसा] दोनों ने कहा: हमें बताया है [इब्न वहाब] ने मुझे [अमरू बिन अल हारिथ] बताया है कि [बुकैर] ने उनसे कहा है कि [आशिम बिन उमर बिन क़तादा] ने उनसे कहा है कि उन्होंने [उबैदुल्लाह अल ख़ौलानी] को यह उल्लेख करते सुना कि उन्होंने [उथमन बिन अफ़्फ़ान] को सुना जब लोगों ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मस्जिद का निर्माण करते समय उनके बारे में कहा: वास्तव में आप गुणा करें, मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना है: "जो कोई भी मस्जिद बनाता है -बुकैर ने कहा: मैंने सोचा कि उन्होंने कहा: क्योंकि वह अल्लाह का चेहरा चाहता है- तो अल्लाह उसे स्वर्ग में उसके समान बनाएगा।" हारुन के इतिहास में कहा गया है: "अल्लाह उसके लिए स्वर्ग में एक घर बनाएगा।"
इमाम मुस्लिम : 5298
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى كِلَاهُمَا عَنْ الضَّحَّاكِ قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ مَخْلَدٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ أَرَادَ بِنَاءَ الْمَسْجِدِ فَكَرِهَ النَّاسُ ذَلِكَ وَأَحَبُّوا أَنْ يَدَعَهُ عَلَى هَيْئَتِهِ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ بَنَى مَسْجِدًا لِلَّهِ بَنَى اللَّهُ لَهُ فِي الْجَنَّةِ مِثْلَهُ و حَدَّثَنَاه إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْحَنَفِيُّ وَعَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ كِلَاهُمَا عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ جَعْفَرٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِهِمَا بَنَى اللَّهُ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ
हमें [जुहैर बिन हर्ब] और [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] दोनों [अद धहक] से बताया है [इब्न अल मुत्सन्ना]: हमें बताया है [अद धहक बिन मखलद] ने हमें बताया है [अब्दुलहमीद बिन जाफर] ने मुझे [मेरे पिता] [महमूद बिन लबिद] से बताया है कि [उथमन बिन अफ़्फान] एक मस्जिद बनाना चाहते हैं लेकिन लोग इसे पसंद नहीं करते हैं, वे चाहते हैं कि मस्जिद जैसी है वैसी ही रहे। फिर उन्होंने कहा: मैंने एक बार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "जो कोई भी मस्जिद बनाता है, अल्लाह स्वर्ग में उसके जैसी एक और बना देगा।" हमें बताया गया है कि [इस्हाक बिन इब्राहिम अल हदज़ली] ने हमें [अबू बक्र अल हनफी] और [अब्दुलमालिक बिन अश शब्बा] दोनों ने [अब्दुलहामिद बिन जाफर] से इस सनद के साथ बताया है, केवल हदीस में दोनों कहते हैं: "अल्लाह उसके लिए स्वर्ग में एक घर बनाएगा।"
इमाम मुस्लिम : 5299
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَاللَّفْظُ لِأَبِي بَكْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بَيْنَا رَجُلٌ بِفَلَاةٍ مِنْ الْأَرْضِ فَسَمِعَ صَوْتًا فِي سَحَابَةٍ اسْقِ حَدِيقَةَ فُلَانٍ فَتَنَحَّى ذَلِكَ السَّحَابُ فَأَفْرَغَ مَاءَهُ فِي حَرَّةٍ فَإِذَا شَرْجَةٌ مِنْ تِلْكَ الشِّرَاجِ قَدْ اسْتَوْعَبَتْ ذَلِكَ الْمَاءَ كُلَّهُ فَتَتَبَّعَ الْمَاءَ فَإِذَا رَجُلٌ قَائِمٌ فِي حَدِيقَتِهِ يُحَوِّلُ الْمَاءَ بِمِسْحَاتِهِ فَقَالَ لَهُ يَا عَبْدَ اللَّهِ مَا اسْمُكَ قَالَ فُلَانٌ لِلِاسْمِ الَّذِي سَمِعَ فِي السَّحَابَةِ فَقَالَ لَهُ يَا عَبْدَ اللَّهِ لِمَ تَسْأَلُنِي عَنْ اسْمِي فَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ صَوْتًا فِي السَّحَابِ الَّذِي هَذَا مَاؤُهُ يَقُولُ اسْقِ حَدِيقَةَ فُلَانٍ لِاسْمِكَ فَمَا تَصْنَعُ فِيهَا قَالَ أَمَّا إِذْ قُلْتَ هَذَا فَإِنِّي أَنْظُرُ إِلَى مَا يَخْرُجُ مِنْهَا فَأَتَصَدَّقُ بِثُلُثِهِ وَآكُلُ أَنَا وَعِيَالِي ثُلُثًا وَأَرُدُّ فِيهَا ثُلُثَهُ و حَدَّثَنَاه أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ كَيْسَانَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ وَأَجْعَلُ ثُلُثَهُ فِي الْمَسَاكِينِ وَالسَّائِلِينَ وَابْنِ السَّبِيلِ
हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने बताया है, अबू बक्र का पाठ, दोनों में कहा गया है: हमें बताया है [यज़ीद बिन हारून] ने हमें बताया है [अब्दुलअज़ीज़ बिन अबू सलामा] [वहब बिन कैसन] से [उबैदुल्लाह बिन उमैर अल लैतसी] से [अबू हुरैरा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब कोई खेत की रेत में होता है, तो उसने बादल में एक आवाज़ सुनी: 'फलां के बगीचे को पानी दो' तो बादल हट गया और पानी डाला। यह पता चला कि बगीचे में कोई था जो फावड़े से पानी को संभाल रहा था। उसने उससे पूछा: 'ऐ अल्लाह के बंदे, तुम्हारा नाम क्या है? ठीक वैसे ही जैसे उसने बादलों से नाम सुना था। उसने पूछा: 'ऐ अल्लाह के बंदे, तुम मेरा नाम क्यों पूछते हो? तो, आपका नाम। आप अपने बगीचे में क्या करते हैं?' उसने जवाब दिया: 'क्योंकि आपने ऐसा कहा, मैंने इसके नतीजे देखे, फिर मैंने इसका एक तिहाई हिस्सा दान में दे दिया, मैंने इसका एक तिहाई हिस्सा अपने परिवार के साथ खाया और मैंने इसका एक तिहाई हिस्सा बगीचे में वापस कर दिया।' हमें बताया है [अहमद बिन अब्दाह अध धाबी] ने हमें बताया है [अबू दाऊद] ने हमें बताया है [अब्दुलअज़ीज़ बिन अबू सलामा] ने हमें बताया है [वहाब बिन कैसन] ने इस सनद के साथ, बस उन्होंने कहा: "और मैं एक तिहाई गरीबों, भिखारियों और इब्न सबील को देता हूं।"
इमाम मुस्लिम : 5300
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا رَوْحُ بْنُ الْقَاسِمِ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ اللَّهُ تَبَارَكَ وَتَعَالَى أَنَا أَغْنَى الشُّرَكَاءِ عَنْ الشِّرْكِ مَنْ عَمِلَ عَمَلًا أَشْرَكَ فِيهِ مَعِي غَيْرِي تَرَكْتُهُ وَشِرْكَهُ
मुझे बताया है [जुहैर बिन हर्ब] ने हमें बताया है [इस्माईल बिन इब्राहीम] ने हमें बताया है [रौह बिन अल कासिम] [अल अला` बिन अब्दुर्रहमान बिन या'कूब] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अल्लाह तबारका वा तआला ने कहा: 'मैं वह सहयोगी हूं जिसे सबसे कम सहयोगियों की आवश्यकता है, जो कोई भी मेरे अलावा किसी और को मेरे साथ साझी ठहराता है, मैंने उसे और उसके सहयोगियों को छोड़ दिया।'"