इमाम मुस्लिम : 5161
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ عَنْ نَافِعِ بْنِ عُتْبَةَ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزْوَةٍ قَالَ فَأَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَوْمٌ مِنْ قِبَلِ الْمَغْرِبِ عَلَيْهِمْ ثِيَابُ الصُّوفِ فَوَافَقُوهُ عِنْدَ أَكَمَةٍ فَإِنَّهُمْ لَقِيَامٌ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَاعِدٌ قَالَ فَقَالَتْ لِي نَفْسِي ائْتِهِمْ فَقُمْ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَهُ لَا يَغْتَالُونَهُ قَالَ ثُمَّ قُلْتُ لَعَلَّهُ نَجِيٌّ مَعَهُمْ فَأَتَيْتُهُمْ فَقُمْتُ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَهُ قَالَ فَحَفِظْتُ مِنْهُ أَرْبَعَ كَلِمَاتٍ أَعُدُّهُنَّ فِي يَدِي قَالَ تَغْزُونَ جَزِيرَةَ الْعَرَبِ فَيَفْتَحُهَا اللَّهُ ثُمَّ فَارِسَ فَيَفْتَحُهَا اللَّهُ ثُمَّ تَغْزُونَ الرُّومَ فَيَفْتَحُهَا اللَّهُ ثُمَّ تَغْزُونَ الدَّجَّالَ فَيَفْتَحُهُ اللَّهُ قَالَ فَقَالَ نَافِعٌ يَا جَابِرُ لَا نَرَى الدَّجَّالَ يَخْرُجُ حَتَّى تُفْتَحَ الرُّومُ
हमें बताया गया है [कुतैबा बिन सईद] ने हमें [जरीर] ने [अब्दुलमालिक बिन उमैर] से [जाबिर बिन समुरा] से [नफी बिन उतबा] से कहा: हम एक युद्ध में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ थे। उन्होंने कहा: एक लोग मग़रिब से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए, उन्होंने ऊनी कपड़े पहने थे, वे उनसे एक पहाड़ी के पास मिले। वे खड़े रहे जबकि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैठे थे। उन्होंने (नफी) कहा: मेरे दिल ने कहा: उनके पास आओ और उनके और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बीच खड़े हो जाओ ताकि वे उन पर हमला न करें तो मैंने कहा: शायद उन्होंने उनसे धीरे से बात की। मैं उनके पास गया फिर मैं उनके और उनके बीच खड़ा हो गया। उसने कहा: "तुम अरब पेनिनसुला से लड़ोगे और अल्लाह उसे जीत लेगा, फिर पर्शिया से लड़ोगे और अल्लाह उसे जीत लेगा, फिर तुम रोम से लड़ोगे और अल्लाह उसे जीत लेगा, फिर तुम दज्जाल से लड़ोगे और अल्लाह उसे जीत लेगा।" तब नफी ने कहा: ऐ जाबिर, हमें नहीं लगता कि दज्जाल तब तक आएगा जब तक रोम जीत नहीं लिया जाता।
इमाम मुस्लिम : 5162
حَدَّثَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ الْمَكِّيُّ وَاللَّفْظُ لِزُهَيْرٍ قَالَ إِسْحَقُ أَخْبَرَنَا و قَالَ الْآخَرَانِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ فُرَاتٍ الْقَزَّازِ عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ أَسِيدٍ الْغِفَارِيِّ قَالَ اطَّلَعَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَيْنَا وَنَحْنُ نَتَذَاكَرُ فَقَالَ مَا تَذَاكَرُونَ قَالُوا نَذْكُرُ السَّاعَةَ قَالَ إِنَّهَا لَنْ تَقُومَ حَتَّى تَرَوْنَ قَبْلَهَا عَشْرَ آيَاتٍ فَذَكَرَ الدُّخَانَ وَالدَّجَّالَ وَالدَّابَّةَ وَطُلُوعَ الشَّمْسِ مِنْ مَغْرِبِهَا وَنُزُولَ عِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيَأَجُوجَ وَمَأْجُوجَ وَثَلَاثَةَ خُسُوفٍ خَسْفٌ بِالْمَشْرِقِ وَخَسْفٌ بِالْمَغْرِبِ وَخَسْفٌ بِجَزِيرَةِ الْعَرَبِ وَآخِرُ ذَلِكَ نَارٌ تَخْرُجُ مِنْ الْيَمَنِ تَطْرُدُ النَّاسَ إِلَى مَحْشَرِهِمْ
हमें [अबू खैतसमा ज़ुहैर बिन हर्ब], [इसहाक बिन इब्राहिम] और [इब्न अबी उमर अल मक्की] ज़ुहैर का पाठ सुनाया है, इसहाक ने कहा: हमें उपदेश दिया है, जबकि अन्य ने कहा है: हमें [सुफ़यान बिन उयैनाह] ने [फ़ुरात अल क़ज़ाज़] से [अबू अथ थुफैल] से [हुदज़ैफा बिन असिद अल गिफ़ारी] से सुनाया है कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमारे पास आए जब हम कुछ चर्चा कर रहे थे, उन्होंने पूछा: "आप किस बारे में बात कर रहे हैं?" हमने उत्तर दिया: हम प्रलय के बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा: "जब तक तुम पहले से दस संकेत नहीं देख लेते, तब तक घड़ी नहीं आएगी।" उन्होंने कोहरे, दज्जाल, जानवरों, पश्चिम से सूरज का उदय, ईसा बिन मरियम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अवतरण, याजुज और मागोग, तीन भूस्खलन का उल्लेख किया; पूर्व में भूस्खलन, पश्चिम में भूस्खलन और अरब प्रायद्वीप में भूस्खलन और अंतिम भूस्खलन यमन से निकल रही आग है जो लोगों को उनके इकट्ठा होने की जगहों की ओर धकेल रही है।
इमाम मुस्लिम : 5163
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ فُرَاتٍ الْقَزَّازِ عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ عَنْ أَبِي سَرِيحَةَ حُذَيْفَةَ بْنِ أَسِيدٍ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غُرْفَةٍ وَنَحْنُ أَسْفَلَ مِنْهُ فَاطَّلَعَ إِلَيْنَا فَقَالَ مَا تَذْكُرُونَ قُلْنَا السَّاعَةَ قَالَ إِنَّ السَّاعَةَ لَا تَكُونُ حَتَّى تَكُونَ عَشْرُ آيَاتٍ خَسْفٌ بِالْمَشْرِقِ وَخَسْفٌ بِالْمَغْرِبِ وَخَسْفٌ فِي جَزِيرَةِ الْعَرَبِ وَالدُّخَانُ وَالدَّجَّالُ وَدَابَّةُ الْأَرْضِ وَيَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ وَطُلُوعُ الشَّمْسِ مِنْ مَغْرِبِهَا وَنَارٌ تَخْرُجُ مِنْ قُعْرَةِ عَدَنٍ تَرْحَلُ النَّاسَ قَالَ شُعْبَةُ وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ رُفَيْعٍ عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ عَنْ أَبِي سَرِيحَةَ مِثْلَ ذَلِكَ لَا يَذْكُرُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ و قَالَ أَحَدُهُمَا فِي الْعَاشِرَةِ نُزُولُ عِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ و قَالَ الْآخَرُ وَرِيحٌ تُلْقِي النَّاسَ فِي الْبَحْرِ و حَدَّثَنَاه مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ يَعْنِي ابْنَ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ فُرَاتٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الطُّفَيْلِ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي سَرِيحَةَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غُرْفَةٍ وَنَحْنُ تَحْتَهَا نَتَحَدَّثُ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِهِ قَالَ شُعْبَةُ وَأَحْسِبُهُ قَالَ تَنْزِلُ مَعَهُمْ إِذَا نَزَلُوا وَتَقِيلُ مَعَهُمْ حَيْثُ قَالُوا قَالَ شُعْبَةُ وَحَدَّثَنِي رَجُلٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ عَنْ أَبِي سَرِيحَةَ وَلَمْ يَرْفَعْهُ قَالَ أَحَدُ هَذَيْنِ الرَّجُلَيْنِ نُزُولُ عِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ و قَالَ الْآخَرُ رِيحٌ تُلْقِيهِمْ فِي الْبَحْرِ و حَدَّثَنَاه مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ الْحَكَمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْعِجْلِيُّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ فُرَاتٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الطُّفَيْلِ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي سَرِيحَةَ قَالَ كُنَّا نَتَحَدَّثُ فَأَشْرَفَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِنَحْوِ حَدِيثِ مُعَاذٍ وَابْنِ جَعْفَرٍ و قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ الْحَكَمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ رُفَيْعٍ عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ عَنْ أَبِي سَرِيحَةَ بِنَحْوِهِ قَالَ وَالْعَاشِرَةُ نُزُولُ عِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ قَالَ شُعْبَةُ وَلَمْ يَرْفَعْهُ عَبْدُ الْعَزِيزِ
हमें बताया है [उबैदुल्लाह बिन मुअदज़ अल अम्बारी] ने हमें बताया है [मेरे पिता] ने हमें बताया है [स्यूबा] [फ़ुरात अल क़ज़ाज़] से [अबू अथ थुफैल] से [अबू सरीहा हुदज़ैफा बिन उसैद] ने कहा: जब हम नीचे थे तब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कमरे में थे, उन्होंने ऊपर से हमें देखा और पूछा: "तुम किस बारे में बात कर रहे हो?" हमने उत्तर दिया: प्रलय। उन्होंने कहा: "प्रलय तब तक नहीं होगा जब तक आप दस संकेत नहीं देखते: पूर्व में भूस्खलन, पश्चिम में भूस्खलन और अरब प्रायद्वीप में भूस्खलन, कोहरा, दज्जाल, पृथ्वी के जानवर, गोग और मागोग, पश्चिम से सूरज का उदय और अदन घाटी के नीचे से निकलने वाली आग जो लोगों का नेतृत्व करेगी।" स्यूबा ने कहा: उसने मुझे [अब्दुलअज़ीज़ बिन रुफ़ई] [अबू अथ थुफ़ैल] से [अबू सरीहा] से ऐसा बताया, उसने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ज़िक्र नहीं किया। दोनों में से एक ने दसवीं निशानी के बारे में कहा: ईसा बिन मरियम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अवतरण। दूसरे ने कहा: हवा जिसने लोगों को समुद्र में फेंक दिया। हमें बताया है [मुहम्मद बिन बस्यार] ने हमें बताया है [मुहम्मद बिन जाफ़र] ने हमें बताया है [स्यूबा] [फ़ुरात] से कहा: मैंने [अबू अथ थुफ़ैल] को [अबू सरीहा] से यह कहते हुए सुना: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कमरे में थे जब हम उनके अधीन थे, हम बात कर रहे थे, उन्होंने एक समान हदीस का उल्लेख किया। शुबा ने कहा: मुझे लगता है कि उन्होंने कहा: "(आग) जहाँ भी वे होते हैं, उन्हें घेर लेती है और उनकी झपकी के दौरान उनके साथ होती है।" स्यूबा ने कहा: किसी ने मुझे [अबू सरीहा] से [अबू अथ थुफैल] की यह हदीस सुनाई है और वह इसे समझ नहीं पाया। इन दो लोगों में से एक ने कहा: ईसा बिन मरियम का अवतरण। दूसरे ने कहा: हवा ने उन्हें समुद्र में फेंक दिया। हमें बताया है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने हमें बताया है [अबू अन नुमान अल हकीम बिन अब्दुल्ला अल इजली] ने हमें बताया है [स्यूबा] ने [फुरात] से कहा: मैंने [अबू अथ थुफैल] को [अबू सरीहा] से कहते सुना, उन्होंने कहा: हम बात कर रहे थे और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें ऊपर से देखा, जैसे मुअज़ और इब्न जाफर की हदीस है। इब्न मुत्सन्ना ने कहा: हमें बताया है [अबू अन नुमान अल हकम बिन अब्दुल्ला] ने हमें बताया है [स्यूबा] [अब्दुलअज़ीज़ बिन रुफ़ई] से [अबू अथ थुफ़ैल] से [अबू सरीहा] से ऐसा लगता है, उन्होंने कहा: और दसवां (संकेत) ईसा बिन मरियम का वंश है। स्यूबा ने कहा: अब्दुलअज़ीज़ ने उसकी परवाह नहीं की।
इमाम मुस्लिम : 5164
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي ابْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ح و حَدَّثَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ اللَّيْثِ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ جَدِّي حَدَّثَنِي عُقَيْلُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ قَالَ قَالَ ابْنُ الْمُسَيَّبِ أَخْبَرَنِي أَبُو هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى تَخْرُجَ نَارٌ مِنْ أَرْضِ الْحِجَازِ تُضِيءُ أَعْنَاقَ الْإِبِلِ بِبُصْرَى
मुझे बताया है [हरमला बिन यह्या] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] ने मुझे बताया है [यूनुस] ने [इब्न शिहाब] से मुझे बताया है [इब्न अल मुसय्यब] ने मुझे बताया है कि [अबू हुरैरा] को अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खबर दी गई थी, उन्होंने कहा। मुझे यह बताया गया है [अब्दुल मलिक बिन स्यूऐब बिन अल लैट्स] ने हमें बताया है [मेरे पिता] ने [मेरे दादा] ने मुझे बताया है [उकैल बिन खालिद] ने [इब्न शिहाब] से कहा: कहा [इब्न अल मुसय्यब] ने मुझे [अबू हुरैरा] बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "प्रलय का दिन तब तक नहीं आएगा जब तक धरती हिजाज़ से एक आग न निकले जो बुशरो में एक ऊँट की गर्दन को रोशन करे।" (स्याम में शहर, पेंट।)
इमाम मुस्लिम : 5165
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ حَدَّثَنَا الْأَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَبْلُغُ الْمَسَاكِنُ إِهَابَ أَوْ يَهَابَ قَالَ زُهَيْرٌ قُلْتُ لِسُهَيْلٍ فَكَمْ ذَلِكَ مِنْ الْمَدِينَةِ قَالَ كَذَا وَكَذَا مِيلًا
मुझे बताया है [अमरु अन नकीद] ने हमें बताया है [अल असवद बिन अमीर] ने हमें बताया है [जुहैर] [सुहैल बिन अबू सलीह] से [उसके पिता] से [अबू हुरैरा] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जिन घरों में वे रहते हैं वे इहाब या यहाब के क्षेत्र तक पहुंचेंगे।" जुहैर ने कहा: मैंने सुहैल से पूछा: मदीना शहर से (इहाब या यहाब) कितनी दूर है? उसने उत्तर दिया: इतने और इतने मील।
इमाम मुस्लिम : 5166
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَيْسَتْ السَّنَةُ بِأَنْ لَا تُمْطَرُوا وَلَكِنْ السَّنَةُ أَنْ تُمْطَرُوا وَتُمْطَرُوا وَلَا تُنْبِتُ الْأَرْضُ شَيْئًا
[कुतैबा बिन सईद] ने हमें [याकूब बिन अब्दुर्रहमान] [सुहैल] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से वर्णित किया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "सूखा वह नहीं है कि आप पर बारिश नहीं होती, बल्कि सूखा वह है कि आप पर बारिश होती है और बारिश होती है लेकिन धरती कुछ भी उगा नहीं पाती।"
इमाम मुस्लिम : 5167
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا لَيْثٌ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ مُسْتَقْبِلُ الْمَشْرِقِ يَقُولُ أَلَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا أَلَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنُ الشَّيْطَانِ
हमें बताया है [कुतैबा बिन सईद] ने हमें [लैतस] बताया है। मुझे बताया गया है कि [मुहम्मद बिन रूम्ह] ने हमें [अल लैतस] [नफी] से [इब्न उमर] से उपदेश दिया है, उसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना जब वह पूर्व की ओर मुंह करके खड़े थे: "याद रखो, वास्तव में बदनामी यहाँ है, वास्तव में बदनामी यहाँ शैतान के सींगों के उठने की दिशा से है।"
इमाम मुस्लिम : 5168
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى ح و حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ كُلُّهُمْ عَنْ يَحْيَى الْقَطَّانِ قَالَ الْقَوَارِيرِيُّ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَامَ عِنْدَ بَابِ حَفْصَةَ فَقَالَ بِيَدِهِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ الْفِتْنَةُ هَاهُنَا مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنُ الشَّيْطَانِ قَالَهَا مَرَّتَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا و قَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ فِي رِوَايَتِهِ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عِنْدَ بَابِ عَائِشَةَ
मुझे [उबैदुल्लाह बिन उमर अल कवाररी] और [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने बताया है। हमें [उबैदुल्लाह बिन सईद], [याह्या अल क़थथन] से सब कुछ बताया है [अल कवाररी] ने कहा: मुझे [याह्या बिन सईद] ने [उबैदुल्लाह बिन उमर] से बताया है मुझे [नफी] ने [इब्न उमर] से बताया है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हफ्शाह के दरवाजे के पास खड़े थे फिर अपने हाथ से पूर्व की ओर इशारा करते हुए कहा: "निंदा यहाँ है, उस जगह से जहां यह शैतान के सींग दिखाई देता है।" उन्होंने इसे दो या तीन बार कहा। उबैदुल्लाह बिन सईद ने अपने वर्णन में कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आइज़्या के दरवाजे के पास खड़े थे।
इमाम मुस्लिम : 5169
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَهُوَ مُسْتَقْبِلُ الْمَشْرِقِ هَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا هَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا هَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنُ الشَّيْطَانِ
मुझे बताया है [हरमला बिन यह्या] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] ने मुझे बताया है [यूनुस] ने [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्लाह] से [उसके पिता] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा और वह पूर्व की ओर मुंह करके बोले: "याद रखो, वास्तव में बदनामी यहाँ है, याद रखो, वास्तव में बदनामी यहाँ है, याद रखो, वास्तव में बदनामी यहाँ है, शैतान के सींगों के उठने की दिशा से।"
इमाम मुस्लिम : 5170
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ عَمَّارٍ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ بَيْتِ عَائِشَةَ فَقَالَ رَأْسُ الْكُفْرِ مِنْ هَاهُنَا مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنُ الشَّيْطَانِ يَعْنِي الْمَشْرِقَ
हमें बताया गया है कि [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [वाकी'] [इकरीमा बिन अम्मार] से [सलीम] से [इब्न उमर] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐश्या के घर से बाहर आए और कहा: "कुफ़्र की माँ यहीं से है, जहाँ शैतान की पालकी उठती है।" उनका मतलब पूरब से था।
इमाम मुस्लिम : 5171
و حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ يَعْنِي ابْنَ سُلَيْمَانَ أَخْبَرَنَا حَنْظَلَةُ قَالَ سَمِعْتُ سَالِمًا يَقُولُ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ يَقُولُا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُشِيرُ بِيَدِهِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ وَيَقُولُ هَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا هَا إِنَّ الْفِتْنَةَ هَاهُنَا ثَلَاثًا حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنَا الشَّيْطَانِ
हमें बताया है [इब्न नुमैर] ने हमें बताया है [इस्हाक बिन सुलेमान] ने हमें बताया है [हंजला] ने कहा: मैंने [सलीम] को कहते सुना: मैंने [इब्न उमर] को कहते सुना: मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पूर्व की ओर हाथ से इशारा करते हुए कहते सुना: "याद रखो, वास्तव में फितना यहाँ है। याद रखो, वास्तव में फितना यहाँ है, -तीन बार- दो सींगों के उठने की दिशा से। राक्षस।"
इमाम मुस्लिम : 5172
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ أَبَانَ وَوَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى وَأَحْمَدُ بْنُ عُمَرَ الْوَكِيعِيُّ وَاللَّفْظُ لِابْنِ أَبَانَ قَالُوا حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ يَقُولُا يَا أَهْلَ الْعِرَاقِ مَا أَسْأَلَكُمْ عَنْ الصَّغِيرَةِ وَأَرْكَبَكُمْ لِلْكَبِيرَةِ سَمِعْتُ أَبِي عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَقُولُا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ الْفِتْنَةَ تَجِيءُ مِنْ هَاهُنَا وَأَوْمَأَ بِيَدِهِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنَا الشَّيْطَانِ وَأَنْتُمْ يَضْرِبُ بَعْضُكُمْ رِقَابَ بَعْضٍ وَإِنَّمَا قَتَلَ مُوسَى الَّذِي قَتَلَ مِنْ آلِ فِرْعَوْنَ خَطَأً فَقَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لَهُ { وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنَاكَ مِنْ الْغَمِّ وَفَتَنَّاكَ فُتُونًا } قَالَ أَحْمَدُ بْنُ عُمَرَ فِي رِوَايَتِهِ عَنْ سَالِمٍ لَمْ يَقُلْ سَمِعْتُ
हमें [अब्दुल्ला बिन उमर बिन अबान], [वशील बिन अब्दुला'ला] और [अहमद बिन उमर अल वाकी], इब्न अबान के पाठ से बताया है, उन्होंने कहा: हमें [इब्न फुदैल] ने [अपने पिता] से बताया है: मैंने [सलीम बिन अब्दुल्ला बिन उमर] को कहते सुना: हे इराक के लोगों, मैं छोटी समस्याओं के बारे में नहीं पूछता और मैं आपको बड़ी समस्याओं के लिए नहीं धकेलता, मैंने एक बार अपने पिता [अब्दुल्ला बिन उमर] को कहते सुना: मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: "वास्तव में फ़ित्ना यहाँ प्रकट हुआ - उसने अपना हाथ पूर्व की ओर दिखाया - शैतान के दो सींगों की दिशा से। आपने एक दूसरे की गर्दनें काट दीं। मूसा ने केवल उस व्यक्ति को मार डाला जिसे उसने मार डाला जो फिरौन के परिवार से दुर्घटना से था और फिर अल्लाह 'अज़्ज़ा वजल्ला ने उससे कहा: 'और तुमने एक बार एक इंसान को मार डाला, फिर हमने तुम्हें परेशानी से बचाया और हमने तुम्हें कई परीक्षणों से परखा है। (तहाहा: 40) अहमद बिन उमर ने अपने इतिहास में कहा: सलीम से, उसने यह नहीं कहा: मैंने सुना है।
इमाम मुस्लिम : 5173
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَ عَبْدٌ أَخْبَرَنَا و قَالَ ابْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ ابْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى تَضْطَرِبَ أَلَيَاتُ نِسَاءِ دَوْسٍ حَوْلَ ذِي الْخَلَصَةِ وَكَانَتْ صَنَمًا تَعْبُدُهَا دَوْسٌ فِي الْجَاهِلِيَّةِ بِتَبَالَةَ
मुझे [मुहम्मद बिन रफी] और [अब्दु बिन हुमैद] ने बताया, अब्दु ने कहा: हमें उपदेश दिया है, जबकि इब्न रफी ने कहा: हमें बताया है [अब्दुर्रज्जाक] ने हमें बताया है [ममार] [अज़ ज़ुहरी] से [इब्न अल मुसय्यब] से [अबू हुरैरा] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "क़यामत तब तक नहीं आती जब तक दौस की कमज़ोर औरतें ज़िल खलाशाह के चारों ओर न घूमें।" वह वह मूर्ति है जिसकी दौस ने तबलाह में अज्ञानता के दौर में पूजा की थी।
इमाम मुस्लिम : 5174
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ وَأَبُو مَعْنٍ زَيْدُ بْنُ يَزِيدَ الرَّقَاشِيُّ وَاللَّفْظُ لِأَبِي مَعْنٍ قَالَا حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ الْأَسْوَدِ بْنِ الْعَلَاءِ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَذْهَبُ اللَّيْلُ وَالنَّهَارُ حَتَّى تُعْبَدَ اللَّاتُ وَالْعُزَّى فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ كُنْتُ لَأَظُنُّ حِينَ أَنْزَلَ اللَّهُ { هُوَ الَّذِي أَرْسَلَ رَسُولَهُ بِالْهُدَى وَدِينِ الْحَقِّ لِيُظْهِرَهُ عَلَى الدِّينِ كُلِّهِ وَلَوْ كَرِهَ الْمُشْرِكُونَ } أَنَّ ذَلِكَ تَامًّا قَالَ إِنَّهُ سَيَكُونُ مِنْ ذَلِكَ مَا شَاءَ اللَّهُ ثُمَّ يَبْعَثُ اللَّهُ رِيحًا طَيِّبَةً فَتَوَفَّى كُلَّ مَنْ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةِ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ فَيَبْقَى مَنْ لَا خَيْرَ فِيهِ فَيَرْجِعُونَ إِلَى دِينِ آبَائِهِمْ و حَدَّثَنَاه مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ وَهُوَ الْحَنَفِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَهُ
[अबू कामिल अल जहदारी] और [अबू मानू ज़ैद बिन यज़ीद अर रक़सी] ने हमें अबू मानू का पाठ सुनाया है, दोनों ने कहा: [खालिद बिन अल हारिथ] ने हमें [अब्दुलहमीद बिन जाफ़र] [अल असवद बिन अल अला`] से [अबू सलमा] से [आयशा] से सुनाया है: मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "रात और दिन तब तक गायब नहीं होंगे जब तक लता और उज़्ज़ा की पूजा नहीं की जाती।" मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल, मैंने सोचा कि जब अल्लाह ने आयत उतारी: "वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन (कुरान) और सत्य के धर्म के साथ भेजा है ताकि वह सभी धर्मों पर विजयी हो, भले ही बहुदेववादियों को यह नापसंद हो" (तौबा: 33) कि वह पूर्ण हो गया था। उन्होंने कहा: "बेशक, यह अल्लाह की मर्ज़ी से होगा, फिर वह एक हल्की हवा भेजेगा जब तक कि वह मर न जाए, हर वह इंसान जिसके दिल में राई के दाने के बराबर भी ईमान है, फिर जो लोग बचेंगे उनमें ज़रा भी अच्छाई नहीं होगी, तो वे अपने पुरखों के दीन में लौट आएंगे।" हमें [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने बताया है, हमें [अबू बक्र अल हनफ़ी] ने बताया है, हमें [अब्दुल हामिद बिन जाफ़र] ने इसी सनद के साथ इसी तरह के मतन के साथ बताया है।
इमाम मुस्लिम : 5175
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ فِيمَا قُرِئَ عَلَيْهِ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يَمُرَّ الرَّجُلُ بِقَبْرِ الرَّجُلِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي مَكَانَهُ
यह हमें [कुतैबा बिन सईद] द्वारा [मलिक बिन अनस] से अल्लाह के रसूल में बताया गया है जो उन्हें [अबू अज़ ज़िनद] से [अल अरज] से [अबू हुरैरा] से पढ़ा गया था रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कयामत तब तक नहीं आती जब तक कोई किसी की कब्र के पास से न गुज़रे और फिर वह कहे: काश मैं इसे बदल देता।"
इमाम मुस्लिम : 5176
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ أَبَانَ بْنِ صَالِحٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ الرِّفَاعِيُّ وَاللَّفْظُ لِابْنِ أَبَانَ قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ عَنْ أَبِي إِسْمَعِيلَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا تَذْهَبُ الدُّنْيَا حَتَّى يَمُرَّ الرَّجُلُ عَلَى الْقَبْرِ فَيَتَمَرَّغُ عَلَيْهِ وَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي كُنْتُ مَكَانَ صَاحِبِ هَذَا الْقَبْرِ وَلَيْسَ بِهِ الدِّينُ إِلَّا الْبَلَاءُ
हमसे [अब्दुल्ला बिन उमर बिन मुहम्मद बिन अबान बिन सलेह] और [मुहम्मद बिन यज़ीद अर रिफाई] अबान का पाठ वर्णित किया है, दोनों ने कहा: हमसे [इब्न फुज़ैल] ने [अबू इस्माइल] से [अबू हाज़िम] से [अबू हुरैरा] से वर्णित किया है: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "उसके हाथ में मेरी आत्मा है, दुनिया तब तक गायब नहीं होगी जब तक कि कोई कब्र के पास से गुजरे और उसके ऊपर रुक जाए और कहे: 'काश मैं इस कब्र का निवासी होता,' जबकि उसके पास परीक्षणों के अलावा कोई अन्य धर्म नहीं था।'
इमाम मुस्लिम : 5177
و حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ الْمَكِّيُّ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ عَنْ يَزِيدَ وَهُوَ ابْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَيَأْتِيَنَّ عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ لَا يَدْرِي الْقَاتِلُ فِي أَيِّ شَيْءٍ قَتَلَ وَلَا يَدْرِي الْمَقْتُولُ عَلَى أَيِّ شَيْءٍ قُتِلَ
हमें बताया गया है [इब्न अबी उमर अल मक्की] ने हमें [मरवान] [यज़ीद बिन कैसन] से [अबू हाज़िम] से [अबू हुरैरा] से कहा: पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वास्तव में एक समय आएगा जब हत्या करने वाला यह नहीं समझ पाएगा कि वह किस कारण से हत्या कर रहा है और जिस व्यक्ति की हत्या की जाती है वह यह नहीं समझ पाएगा कि उसे किस कारण से मारा जा रहा है।"
इमाम मुस्लिम : 5178
و حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ أَبَانَ وَوَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنْ أَبِي إِسْمَعِيلَ الْأَسْلَمِيِّ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا تَذْهَبُ الدُّنْيَا حَتَّى يَأْتِيَ عَلَى النَّاسِ يَوْمٌ لَا يَدْرِي الْقَاتِلُ فِيمَ قَتَلَ وَلَا الْمَقْتُولُ فِيمَ قُتِلَ فَقِيلَ كَيْفَ يَكُونُ ذَلِكَ قَالَ الْهَرْجُ الْقَاتِلُ وَالْمَقْتُولُ فِي النَّارِ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ أَبَانَ قَالَ هُوَ يَزِيدُ بْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي إِسْمَعِيلَ لَمْ يَذْكُرْ الْأَسْلَمِيَّ
यह हमें [अब्दुल्ला बिन उमर बिन अबान] और [वशील बिन अब्दुलाला] द्वारा बताया गया है, दोनों ने कहा: यह हमें [मुहम्मद बिन फुदलाई] द्वारा [अबू इस्माईल अल असलमी] से [अबू हाज़िम] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "उसके हाथों में मेरी आत्मा है, दुनिया तब तक गायब नहीं होगी जब तक कि इंसानों के लिए ऐसा समय न आ जाए जब हत्या करने वाला यह न समझे कि वह किस कारण से हत्या कर रहा है और मारा जाने वाला व्यक्ति भी यह न समझे कि उसे किस कारण से मारा जा रहा है।" इसमें कहा गया है: यह कैसे हुआ? उसने उत्तर दिया: "हत्या, जो लोग हत्या करते हैं और जो मारे जाते हैं वे नरक में हैं।" यह इब्न अबान के इतिहास में कहा गया है: उन्होंने कहा: वह अबू इस्माईल से यज़ीद बिन कैसन था, उसने यह नहीं कहा: अल असलमी।
इमाम मुस्लिम : 5179
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ وَاللَّفْظُ لِأَبِي بَكْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدٍ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُا عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُخَرِّبُ الْكَعْبَةَ ذُو السُّوَيْقَتَيْنِ مِنْ الْحَبَشَةِ
हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [इब्न अबी उमर], अबू बक्र के पाठ के बारे में बताया है, दोनों ने कहा: हमें [सुफ़यान बिन उयैनाह] ने [ज़ियाद बिन सआद] से [अज़ ज़ुहरी] से [सईद] से बताया कि उसने [अबू हुरैरा] को कहते सुना: पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से: हबस्या से दज़ुस सुवैक़तैन ने काबा को नष्ट कर दिया।
इमाम मुस्लिम : 5180
و حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ ابْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُخَرِّبُ الْكَعْبَةَ ذُو السُّوَيْقَتَيْنِ مِنْ الْحَبَشَةِ
मुझे बताया है [हरमला बिन याह्या] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] ने मुझे बताया है [यूनुस] [इब्न शिहाब] से [इब्न अल मुसय्यब] से [अबू हुरैरा] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "हबस्या से दज़ुस सुवैकतैन ने काबा को नष्ट कर दिया।"