Imam Bukhari : 41
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ هِشَامٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ عَلَيْهَا وَعِنْدَهَا امْرَأَةٌ قَالَ مَنْ هَذِهِ قَالَتْ فُلَانَةُ تَذْكُرُ مِنْ صَلَاتِهَا قَالَ مَهْ عَلَيْكُمْ بِمَا تُطِيقُونَ فَوَاللَّهِ لَا يَمَلُّ اللَّهُ حَتَّى تَمَلُّوا وَكَانَ أَحَبَّ الدِّينِ إِلَيْهِ مَادَامَ عَلَيْهِ صَاحِبُهُ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] कहिन हैं, हमसे [यह्या] से [हिशम] कहिन हैं, [ऐस्याह] से [मेरे पिता] से कहिन हैं कि पैगम्बर उनके पास आए अऊर उनके साथ एक अउर औरत रही, फिर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने पूछा: का ई है? ऐसिया जवाब दिहिस: 'द फुलाना', फिर आपन प्रार्थना के बारे मा बताइस। तौ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जउन चीजन का तुम बर्दाश्त नाहीं कइ सकत हौ, ओका त्याग द्या, अल्लाह के खातिर, अल्लाह तब तक ऊब नाहीं पइहैं जब तक कि तुम खुद ऊब न जाब, अऊर जउन धर्म उनका सबसे ज्यादा पसंद है, उहै हमेशा नियमित रूप से अऊर लगातार कीन जात है'।
Imam Bukhari : 42
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ قَالَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ أَنَسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَخْرُجُ مِنْ النَّارِ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَفِي قَلْبِهِ وَزْنُ شَعِيرَةٍ مِنْ خَيْرٍ وَيَخْرُجُ مِنْ النَّارِ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَفِي قَلْبِهِ وَزْنُ بُرَّةٍ مِنْ خَيْرٍ وَيَخْرُجُ مِنْ النَّارِ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَفِي قَلْبِهِ وَزْنُ ذَرَّةٍ مِنْ خَيْرٍقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ قَالَ أَبَانُ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ حَدَّثَنَا أَنَسٌ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ إِيمَانٍ مَكَانَ مِنْ خَيْرٍ
हमसे कहिन [मुस्लिम बिन इब्राहिम] कहिन, हमसे कहिन [हिस्याम] कहिन, हमसे [कोतादाह] [अनस] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहिन, उ कहिन: 'उनका नरक से निष्कासित कीन जाई जे कहत है कि अल्लाह के अलावा अउर कउनो भगवान नाहीं है अऊर ओकरे दिल मा बाजरा के बराबर अच्छाई है। अऊर उ नरक से निष्कासित कीन जाई जे कहत है कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान नाहीं है अऊर जेकरे दिल मा गेहूं के दाना के बराबर अच्छाई है। अऊर उ नरक से निष्कासित कीन जाई जे कहे कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान नाहीं है अऊर ओकरे दिल मा सरसों के बीज के आकार के अच्छाई है। अबू अब्दुल्ला कहिन; [अबन] कहिन; हमसे [कोतादाह] हमसे [अनस] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताइस है, उ कहिन। अऊर ई हदीस मा ईमान शब्द के जगह अच्छाई शब्द रखा गा है।
Imam Bukhari : 43
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ الصَّبَّاحِ سَمِعَ جَعْفَرَ بْنَ عَوْنٍ حَدَّثَنَا أَبُو الْعُمَيْسِ أَخْبَرَنَا قَيْسُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِأَنَّ رَجُلًا مِنْ الْيَهُودِ قَالَ لَهُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ آيَةٌ فِي كِتَابِكُمْ تَقْرَءُونَهَا لَوْ عَلَيْنَا مَعْشَرَ الْيَهُودِ نَزَلَتْ لَاتَّخَذْنَا ذَلِكَ الْيَوْمَ عِيدًا قَالَ أَيُّ آيَةٍ قَالَ{ الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمْ الْإِسْلَامَ دِينًا }قَالَ عُمَرُ قَدْ عَرَفْنَا ذَلِكَ الْيَوْمَ وَالْمَكَانَ الَّذِي نَزَلَتْ فِيهِ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ قَائِمٌ بِعَرَفَةَ يَوْمَ جُمُعَةٍ
हमसे [अल हसन बिन अश शब्बाह] बताइस है कि उ [जाफर बिन औन] का कहत सुना है; हमसे [अबू अल उमैस] बताइस है, हमसे [कैस बिन मुस्लिम] [थारिक बिन शिहाब] से [उमर बिन अल खथब] से कहिस है; एक यहूदी आदमी रहा जे कहिस: 'हे अमीरुल मुमिनिन, तुम्हार\आपक किताब मा एक आयत है जेका तुम पढ़ौ, अगर ऊ आयत हम यहूदी लोगन पर उतरत तौ हम - जवने दिन आयत प्रकट होत - छुट्टी -'इद-। तो उमर बिन अल खथब ने कहा: 'वह कौन सा आयत है?' -यहूदी- कहिस: 'आज हम तोहरे बरे तोहरे धर्म का सिद्ध किहे हई, अऊर हम तोहरे ऊपर आपन आशीर्वाद पूरा किहे हई, अऊर हम मंजूरी देहे हई कि इस्लाम तोहरे बरे एक धर्म होई'। -क्यूएस। अल मैदाह पद 3-। तो उमर बिन अल खथब ने जवाब दिया: 'हम जानत हैं कि उ दिन अऊर उ जगह जहाँ पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम पर आयत उतरी, अर्थात् शुक्रवार का दिन जब उ सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अराफा मा रहे।
Imam Bukhari : 44
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ طَلْحَةَ بْنَ عُبَيْدِ اللَّهِ يَقُولُجَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ أَهْلِ نَجْدٍ ثَائِرَ الرَّأْسِ يُسْمَعُ دَوِيُّ صَوْتِهِ وَلَا يُفْقَهُ مَا يَقُولُ حَتَّى دَنَا فَإِذَا هُوَ يَسْأَلُ عَنْ الْإِسْلَامِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَمْسُ صَلَوَاتٍ فِي الْيَوْمِ وَاللَّيْلَةِ فَقَالَ هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهَا قَالَ لَا إِلَّا أَنْ تَطَوَّعَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَصِيَامُ رَمَضَانَ قَالَ هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهُ قَالَ لَا إِلَّا أَنْ تَطَوَّعَ قَالَ وَذَكَرَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الزَّكَاةَ قَالَ هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهَا قَالَ لَا إِلَّا أَنْ تَطَوَّعَ قَالَ فَأَدْبَرَ الرَّجُلُ وَهُوَ يَقُولُ وَاللَّهِ لَا أَزِيدُ عَلَى هَذَا وَلَا أَنْقُصُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْلَحَ إِنْ صَدَقَ
हमसे [इस्माइल] बतावा गा है कि हमका [मलिक बिन अनस] से उनके चाचा - [अबू सुहैल बिन मलिक] - [अपने पिता] से बतावा गा है कि उ [थलहा बिन उबैदुल्लाह] का कहत सुने रहे: रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पास नजेद के लोगन से एक आदमी आवा रहा जेकर सिर धूल भरा रहा अऊर ओकर आवाज जोर से का रहा, लेकिन उ का समझ नाहीं पावा रहा, मतलब, जब तक उ पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के करीब नाहीं आवा- तब तक उ इस्लाम के बारे मा पूछिन, पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम जवाब दिहिन: 'दिन अऊर रात मा पांच बार नमाज पढ़ौ'। ऊ मनई कहिस: 'का मोर अलावा अउर कुछ है'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'थथावु' -सुन्नत-' के अलावा कुछौ नाहीं है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'और रोजा रमदलान'। ऊ मनई फिर से पूछिस: 'का मोर अलावा अउर कुछ है'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'थथावु के अलावा कुछौ नाहीं है' -सुन्नत-'। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जकात': व्यक्ति ने कहा: 'का मोर लिए वहिके अलावा अउर कुछ है'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'थथावु के अलावा कुछौ नाहीं है' -सुन्नत-'। तल्हा बिन उबैदुल्लाह ने कहा: फिर ऊ आदमी ई कहिके चला गवा: 'अल्लाह के कसम, मैं ईका न बढ़ाउब अऊर न घटाब'। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अगर उ ईमानदारी से पूरा करिहैं तौ उ भाग्यशाली होइहैं'।
Imam Bukhari : 45
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَلِيٍّ الْمَنْجُوفِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا رَوْحٌ قَالَ حَدَّثَنَا عَوْفٌ عَنْ الْحَسَنِ وَمُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ اتَّبَعَ جَنَازَةَ مُسْلِمٍ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا وَكَانَ مَعَهُ حَتَّى يُصَلَّى عَلَيْهَا وَيَفْرُغَ مِنْ دَفْنِهَا فَإِنَّه يَرْجِعُ مِنْ الْأَجْرِ بِقِيرَاطَيْنِ كُلُّ قِيرَاطٍ مِثْلُ أُحُدٍ وَمَنْ صَلَّى عَلَيْهَا ثُمَّ رَجَعَ قَبْلَ أَنْ تُدْفَنَ فَإِنَّهُ يَرْجِعُ بِقِيرَاطٍتَابَعَهُ عُثْمَانُ الْمُؤَذِّنُ قَالَ حَدَّثَنَا عَوْفٌ عَنْ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ
हमसे बतावा गा है [अहमद बिन अब्दुल्लाह बिन अली अल मंजूफी] कहिन, हमसे बतावा गा है [रौह] कहिन, हमका [अउफ] [अल हसन] से अऊर [मुहम्मद] [अबू हुरैरा] से बतावा गा है, कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा रहा: 'जो भी मुसलमानन के लाश के साथ है, आशा अऊर आशा के लिए एक इनाम अऊर उ हमेशा शरीर के साथ रहत है जब तक कि ओकरे लिए प्रार्थना न कीन जाय अऊर दफन खतम न होइ जाय, फिर उ दुई किरोथ के साथ घर जात है, हर किरोथ उहुद पर्वत के बराबर होत है। अऊर जे ई नमाज पढ़ि के दफनावै से पहिले घरे जात है, ऊ एक क़िरोथ लइके घरे जात है'। उ कहिन कि [उस्मान अल मुअदज़िन] से भी यहि तरह के हदीस सुनाई गै रही; हमका ['अउफ] [मुहम्मद] से [अबू हुरैराह] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताइस है।
Imam Bukhari : 46
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَرْعَرَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ زُبَيْدٍ قَالَ سَأَلْتُ أَبَا وَائِلٍعَنْ الْمُرْجِئَةِ فَقَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ سِبَابُ الْمُسْلِمِ فُسُوقٌ وَقِتَالُهُ كُفْرٌ
हमसे रिवायत अहै [मुहम्मद बिन अरारा] कहिन, हमसे [स्युबाह] से रिवायित अहै [जुबैद] कहिन: हम [अबू वैल] से मुर्जीअह के बारे मा पूछेन, तौ उ जवाब दिहिन: हमसे [अब्दुल्ला] से रिवायत अहै कि पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसलम ने कहा: कुफर'।
Imam Bukhari : 47
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ حُمَيْدٍ حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَادَةُ بْنُ الصَّامِتِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ يُخْبِرُ بِلَيْلَةِ الْقَدْرِ فَتَلَاحَى رَجُلَانِ مِنْ الْمُسْلِمِينَ فَقَالَ إِنِّي خَرَجْتُ لِأُخْبِرَكُمْ بِلَيْلَةِ الْقَدْرِ وَإِنَّهُ تَلَاحَى فُلَانٌ وَفُلَانٌ فَرُفِعَتْ وَعَسَى أَنْ يَكُونَ خَيْرًا لَكُمْ الْتَمِسُوهَا فِي السَّبْعِ وَالتِّسْعِ وَالْخَمْسِ
हमसे कहिन [कुतैबा बिन सैद] हमसे [इस्माइल बिन जाफर] [हुमैद] से कहिन हैं, हमसे कहिन हैं [अनस बिन मलिक] कहिन, हमसे कहिन हैं ['उबदह बिन ऐश शमित], कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लैलातुल कोदार के बारे मा समझावै के लिए बाहर आए रहे, तब दुइ मुसलमान एक दूसरे से बहस करत रहे। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैं तोहका लैलातुल कोदर समझावै आय रहौं, लेकिन फलाना फलाना फलाना एक दूसरे से बहस करत रहेन जब तक कि आखिर मा उ उठावा गा -लैलातुल कोदर-, अउर उम्मीद है कि आपके लिए अच्छा होई, तौ सातवें, छठवें अउर पांचवें दिन ईका ढूंढौ -लैलातुल कोदर-।
Imam Bukhari : 48
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا أَبُو حَيَّانَ التَّيْمِيُّ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَارِزًا يَوْمًا لِلنَّاسِ فَأَتَاهُ جِبْرِيلُ فَقَالَ مَا الْإِيمَانُ قَالَ الْإِيمَانُ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَبِلِقَائِهِ وَرُسُلِهِ وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ قَالَ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ الْإِسْلَامُ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ وَلَا تُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ وَتُؤَدِّيَ الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ قَالَ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ مَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ وَسَأُخْبِرُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا إِذَا وَلَدَتْ الْأَمَةُ رَبَّهَا وَإِذَا تَطَاوَلَ رُعَاةُ الْإِبِلِ الْبُهْمُ فِي الْبُنْيَانِ فِي خَمْسٍ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ثُمَّ تَلَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ{ إِنَّ اللَّهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ }الْآيَةَ ثُمَّ أَدْبَرَ فَقَالَ رُدُّوهُ فَلَمْ يَرَوْا شَيْئًا فَقَالَ هَذَا جِبْرِيلُ جَاءَ يُعَلِّمُ النَّاسَ دِينَهُمْقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ جَعَلَ ذَلِك كُلَّهُ مِنْ الْإِيمَانِ
हमसे कहिन है [मुसद्दाद] कहिन, हमसे कहिन है [इस्माइल बिन इब्राहिम] हमसे कहिन है [अबू हयान अत तैमी] से [अबू ज़ुरअह] से [अबू हुरैराह] कहिन; कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक दिन अपने दोस्तन के सामने प्रकट भए, फिर फरिश्ता जिबरील अलैहि सलाम आइन जे तब पूछिन: 'ईमान का है?' पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'ईमान ई है कि आप अल्लाह, ओकरे स्वर्गदूतन, ओकरे किताबन, ओकरे साथ मुलाकात, ओकरे रसूलन मा विश्वास करत हैं, अऊर आप क़ामत के दिन मा विश्वास करत हैं'। -जिबरील अलैहिस सलाम- कहिन: 'इस्लाम का है?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'इस्लाम ई है कि तुम अल्लाह के पूजा करौ अऊर ओनके साथ कुछौ न जोड़ौ, तुम नमाज पढ़ौ, तुम फर्ज जकात देओ, अऊर तुम रमदलान के महीना मा रोजा रखौ'। -जिबरील अलैहिस सलाम- कहा: 'इहसान क्या है?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'तुम अल्लाह का अइसे पूजा करत हौ जइसे तुम ओका देखत हौ अऊर अगर तुम ओका नाहीं देखत हौ, तौ वास्तव मा उ तुमका देखत है'। -जिबरील अलैहिस नमस्कार- फिर बोला: 'कयामत का दिन कब होई?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'जिनसे यहिके बारे मा पूछा जात है, उ पूछै वालेन से ज्यादा नाहीं जानत हैं। लेकिन मैं संकेतन का समझाउब; -ऊ हय-; अगर एक दास अपने मालिक का जन्म देत रहा, अगर काला ऊँट के चरवाहे पांच युग तक इमारत बनावै के प्रतिस्पर्धा करत रहें, जेकर अवधि अल्लाह के अलावा अज्ञात है'। तब पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पढ़ा: 'वास्तव में, क़यामत के दिन का ज्ञान केवल अल्लाह के पास है' -QS. लुकमान: 34-। इसके बाद जिबरील अलैहिस ने उनका अभिवादन किया और चले गए, फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा; 'ओका हिंया लइ आवा'। लेकिन साथियों को कुछ नहीं देखा तो नबी ने कहा; 'वह दूत गेब्रियल है जो मनुष्यन के पास ओनके धर्म का सिखावै के लिए आवा रहा'। अबू अब्दुल्ला ने कहा: 'उनके द्वारा बताई गई सब बातें शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ईमान मानी गई।
Imam Bukhari : 49
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ حَمْزَةَ قَالَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ صَالِحٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سُفْيَانَ بْنُ حَرْبٍأَنَّ هِرَقْلَ قَالَ لَهُ سَأَلْتُكَ هَلْ يَزِيدُونَ أَمْ يَنْقُصُونَ فَزَعَمْتَ أَنَّهُمْ يَزِيدُونَ وَكَذَلِكَ الْإِيمَانُ حَتَّى يَتِمَّ وَسَأَلْتُكَ هَلْ يَرْتَدُّ أَحَدٌ سَخْطَةً لِدِينِهِ بَعْدَ أَنْ يَدْخُلَ فِيهِ فَزَعَمْتَ أَنْ لَا وَكَذَلِكَ الْإِيمَانُ حِينَ تُخَالِطُ بَشَاشَتُهُ الْقُلُوبَ لَا يَسْخَطُهُ أَحَدٌ
हमसे कहिन है [इब्राहिम बिन हमजा] कहिन, हमसे [इब्राहिम बिन सद] से [सालीह] से [इब्न शिहाब] से [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्ला] से कहिन है कि [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] ओनका रिपोर्ट किहिन, कि उ कहिन; ने मोका [अबू सुफियान बिन हरब] सूचित किहिन है कि हेराक्लियस ने उनसे कहा: 'मैंने आपसे पूछा है कि का ओनके संख्या बढ़त अहै या घटत अहै? त आप कहत हई कि उ बढ़त हैं, अऊर इहै तरह से विश्वास तब तक विकसित होत रही जब तक कि उ परिपूर्ण न होइ जाय। अऊर हम आपसे पूछित है, का कोई अइसा है जे धर्मत्याग करत है काहे से कि उ अपने धर्म से नफरत करत है? फिर तुम कहत हौ; अगर नाहीं है, तौ वइसने, अगर दिल मा विश्वास बढ़ि गा है अऊर खिल गा है, तौ केहू भी वहिसे नाराज नाहीं होई'।
Imam Bukhari : 50
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ عَنْ عَامِرٍ قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ بْنَ بَشِيرٍ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْحَلَالُ بَيِّنٌ وَالْحَرَامُ بَيِّنٌ وَبَيْنَهُمَا مُشَبَّهَاتٌ لَا يَعْلَمُهَا كَثِيرٌ مِنْ النَّاسِ فَمَنْ اتَّقَى الْمُشَبَّهَاتِ اسْتَبْرَأَ لِدِينِهِ وَعِرْضِهِ وَمَنْ وَقَعَ فِي الشُّبُهَاتِ كَرَاعٍ يَرْعَى حَوْلَ الْحِمَى يُوشِكُ أَنْ يُوَاقِعَهُ أَلَا وَإِنَّ لِكُلِّ مَلِكٍ حِمًى أَلَا إِنَّ حِمَى اللَّهِ فِي أَرْضِهِ مَحَارِمُهُ أَلَا وَإِنَّ فِي الْجَسَدِ مُضْغَةً إِذَا صَلَحَتْ صَلَحَ الْجَسَدُ كُلُّهُ وَإِذَا فَسَدَتْ فَسَدَ الْجَسَدُ كُلُّهُ أَلَا وَهِيَ الْقَلْبُ
हमसे [अबू नुएम] बताइस है [जकरिया] [अमीर] के बारे मा बताइस है; हम [अन नुमान बिन बसीर] का कहत सुने रहेन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'जो हलाल है ऊ साफ अऊर जवन हराम है ऊ भी साफ है। हालांकि, दुइनौ के बीच एक संदिग्ध मामला है - अस्पष्ट - जेका बहुत लोग नाहीं जानत हैं। तौ जे संदिग्ध से दूरी बनावत है, ओकर मतलब है कि ऊ आपन धर्म अऊर आपन सम्मान बनाये रखे है। अऊर जे भी संदिग्ध चीजन मा गिरत है - करत है, ऊ सही मायने मा एक चरवाहा के तरह है जउन अपने पशुधन का एक चट्टान के किनारे चरावत है जेहिसे ओका डर है कि ऊ वहिमा गिर जाई। जानौ कि हर राजा के सीमा होत है, अऊर जानौ कि अल्लाह के अपनी धरती पर मनाही के सीमा उहै है जेका उ मना किहिन हैं। अऊर जानौ कि हर शरीर मा खून का थक्का होत है जउन अगर अच्छा है तौ शरीर अच्छा है अऊर अगर ई क्षतिग्रस्त है तौ शरीर क्षतिग्रस्त है। जानौ, ऊ हृदय है'।
Imam Bukhari : 51
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْجَعْدِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ قَالَكُنْتُ أَقْعُدُ مَعَ ابْنِ عَبَّاسٍ يُجْلِسُنِي عَلَى سَرِيرِهِ فَقَالَ أَقِمْ عِنْدِي حَتَّى أَجْعَلَ لَكَ سَهْمًا مِنْ مَالِي فَأَقَمْتُ مَعَهُ شَهْرَيْنِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ لَمَّا أَتَوْا النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ الْقَوْمُ أَوْ مَنْ الْوَفْدُ قَالُوا رَبِيعَةُ قَالَ مَرْحَبًا بِالْقَوْمِ أَوْ بِالْوَفْدِ غَيْرَ خَزَايَا وَلَا نَدَامَى فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا لَا نَسْتَطِيعُ أَنْ نَأْتِيكَ إِلَّا فِي الشَّهْرِ الْحَرَامِ وَبَيْنَنَا وَبَيْنَكَ هَذَا الْحَيُّ مِنْ كُفَّارِ مُضَرَ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ فَصْلٍ نُخْبِرْ بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا وَنَدْخُلْ بِهِ الْجَنَّةَ وَسَأَلُوهُ عَنْ الْأَشْرِبَةِ فَأَمَرَهُمْ بِأَرْبَعٍ وَنَهَاهُمْ عَنْ أَرْبَعٍ أَمَرَهُمْ بِالْإِيمَانِ بِاللَّهِ وَحْدَهُ قَالَ أَتَدْرُونَ مَا الْإِيمَانُ بِاللَّهِ وَحْدَهُ قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصِيَامُ رَمَضَانَ وَأَنْ تُعْطُوا مِنْ الْمَغْنَمِ الْخُمُسَ وَنَهَاهُمْ عَنْ أَرْبَعٍ عَنْ الْحَنْتَمِ وَالدُّبَّاءِ وَالنَّقِيرِ وَالْمُزَفَّتِ وَرُبَّمَا قَالَ الْمُقَيَّرِ وَقَالَ احْفَظُوهُنَّ وَأَخْبِرُوا بِهِنَّ مَنْ وَرَاءَكُمْ
हमका बतावा गा है [अली बिन अल जादी] कहिन, हमका [स्युबाह] [अबू जमराह] से बतावा गा है कि: मैं एक बार [इब्न अब्बास] के साथे बैठा रहा जब उ मोका अपने गलीचा पर बैठै का निमंत्रण दिहिस अऊर फिर कहिस: 'जब तक मैं तोहका आपन धन का हिस्सा न देब, तब तक मोर साथ रहौ'। तो मैं उनके पास दो महीने तक रहा, फिर कहा: जब अबू कैस का दूत पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने आया तो उनसे पूछा: 'यह कौन सा कुल है या यह किसका दूत है? उ पचे जवाब दिहेन: 'रबिया!' उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'हे दूतों, स्वेच्छा से अऊर बिना पछतावे के स्वागत है'। दूतों ने कहा: 'हे अल्लाह के रसूल, हम पवित्र महीना के अलावा आपके पास नहीं आ सकत हैं, काहे से कि हमरे अऊर आपके बीच मुडलोर जनजाति है जे काफिर हैं। एही से हमका एक ठो साफ पाठ सिखावा कि हम व्यवहार मा ला सकित है अउर जेका हम अपने गाँव के लोगन का सिखा सकित है, जेहिसे हम स्वर्ग मा घुस सकित है'। तब उन्होंने पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से पेय के बारे में पूछा, फिर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने उन्हें चार बातों का आदेश दिया और चार बातों का मना किया, उन्हें एकमात्र अल्लाह पर विश्वास करने का आदेश दिया, फिर पूछा: 'का आप जानत हैं कि एकमात्र अल्लाह पर विश्वास करै का का मतलब है?' उइ जवाब दिहिन: 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने समझाया: गवाही कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान नाहीं है अऊर मुहम्मद अल्लाह के दूत हैं, नमाज पढ़त हैं, जकात देत हैं, रमजान के महीना मा रोजा रखत हैं अऊर युद्ध के लूट का पांचवां हिस्सा देत हैं'। अऊर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ओनका चार चीजन से मना किहिन, यानी अल हंटम, अद दुब्बा`, एक नकीर अऊर अल मुजफत से कुछौ न पियै। या उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मुकोयिर कहा जात है -नकीर नाहीं-। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'सब कुछ ध्यान रखो और अपने गाँव के लोगों को बताओ'।
Imam Bukhari : 52
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ وَقَّاصٍ عَنْ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْأَعْمَالُ بِالنِّيَّةِ وَلِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ فَهِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ وَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ لدُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ امْرَأَةٍ يَتَزَوَّجُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ
हमसे [अब्दुल्लाह बिन मसलामा] ने कहा है, हमसे [मलिक] से [यह्या बिन सईद] से [मुहम्मद बिन इब्राहिम] से [अलकामह बिन वकाश] से [उमर] से कहा गया है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'सभी कर्म अक्सर इनाम पर निर्भर करत हैं, - - - इरादा रहा; जेकर इरादा अल्लाह अऊर ओनके रसूल के खातिर प्रवास करै का है, तौ ओकर प्रवास अल्लाह अऊर ओनके रसूल के पास होई। जे भी दुनिया के कारण प्रवास करै का इरादा रखत है, जेकरे पास उ पहुँचै चाहत है या एक औरत के कारण जेसे उ शादी करै चाहत है, तौ ओकर प्रवासन उहै है जवन उ करै का इरादा रखत है'।
Imam Bukhari : 53
حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي عَدِيُّ بْنُ ثَابِتٍ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ يَزِيدَ عَنْ أَبِي مَسْعُودٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَنْفَقَ الرَّجُلُ عَلَى أَهْلِهِ يَحْتَسِبُهَا فَهُوَ لَهُ صَدَقَةٌ
हमका बतावा गा है [हज्जाज बिन मिन्हाल] कहिन, हमसे बतावा गा है [स्युबाह] कहिन, ई हमका बतावा गा है ['आदि बिन थाबित] कहिन: हम एक बार [अब्दुल्ला बिन यजीद] का [अबू मसूद] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुने रहेन, उ कहिन: 'अगर केहू अपने परिवार के आशा मा जीवन यापन प्रदान करत है इनाम तब भिक्षा देत है'।
Imam Bukhari : 54
حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ حَدَّثَنِي عَامِرُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ أَنَّهُ أَخْبَرَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّكَ لَنْ تُنْفِقَ نَفَقَةً تَبْتَغِي بِهَا وَجْهَ اللَّهِ إِلَّا أُجِرْتَ عَلَيْهَا حَتَّى مَا تَجْعَلُ فِي فَمِ امْرَأَتِكَ
हमसे कहिन [अल हाकम बिन नफी] कहिन, हमसे कहिन [स्युएब] से [अज जुहरी] कहिन, हमसे [अमीर बिन सद] से [सद बिन अबू वकाश] बताइन कि उ रिपोर्ट किहिन, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा, तुम अल्लाह के चेहरा के बिना आशा मा जीवन यापन नाहीं करत हौ पुरस्कृत, जेहिमा कुछ अइसन शामिल है जेहिका आप अपनी पत्नी के मुँह मा खिलावत हैं'।
Imam Bukhari : 55
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ إِسْمَاعِيلَ قَالَ حَدَّثَنِي قَيْسُ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَبَايَعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى إِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ
हमका बतावा गा है [मुसद्दाद] कहिन, हमका बतावा गा है [यह्या] से [इस्माइल] कहिन, हमका बतावा गा है [कैस बिन अबू हाजिम] से [जरीर बिन अब्दुल्ला] कहिन: 'मैंने अल्लाह के रसूल से निष्ठा ली है कि हम नमाज का पालन करैं, जकात दें अऊर हर मुसलमान का सलाह दें'।
Imam Bukhari : 56
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلَاقَةَ قَالَ سَمِعْتُ جَرِيرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُيَوْمَ مَاتَ الْمُغِيرَةُ بْنُ شُعْبَةَ قَامَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَقَالَ عَلَيْكُمْ بِاتِّقَاءِ اللَّهِ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَالْوَقَارِ وَالسَّكِينَةِ حَتَّى يَأْتِيَكُمْ أَمِيرٌ فَإِنَّمَا يَأْتِيكُمْ الْآنَ ثُمَّ قَالَ اسْتَعْفُوا لِأَمِيرِكُمْ فَإِنَّهُ كَانَ يُحِبُّ الْعَفْوَ ثُمَّ قَالَ أَمَّا بَعْدُ فَإِنِّي أَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ أُبَايِعُكَ عَلَى الْإِسْلَامِ فَشَرَطَ عَلَيَّ وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ فَبَايَعْتُهُ عَلَى هَذَا وَرَبِّ هَذَا الْمَسْجِدِ إِنِّي لَنَاصِحٌ لَكُمْ ثُمَّ اسْتَغْفَرَ وَنَزَلَ
हमसे [अबू अन नुमान] कहिन, हमसे [अबू अवाना] [जियाद बिन अलकाह] से कहिन; हम [जरीर बिन अब्दुल्लाह] का कहत सुने रहेन कि जब अल मुघिराह बिन स्यूबाह मर गें, खड़े होके उ अल्लाह के स्तुति किहिन अऊर ओनका पवित्र किहिन, कहिन: 'तुमरे लिए एकमा अल्लाह से डरब अऊर ओनके साथ कुछौ न जोड़ब, अऊर पूर्ण अधीनता अऊर शांति के साथ जब तक कि एक प्रतिस्थापन नेता न आवै, अऊर अब एक उत्तराधिकारी न आवै,' तब उ कहिन: 'अल्लाह तहुअला से माफी मांगो'। आपके नेता - अल मुघिरा - के लिए, काहे से कि उ माफ करब पसंद करत है'। फिर कहिन: 'अम्मा बदु, बेशक मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गय रहौं तब मैं कहिन: 'मैं तोहका इस्लाम से निष्ठा देत हउँ'। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शर्तें दीं और हर मुसलमान को सलाह दी, तो मैंने उस बात के लिए उनसे बेफादारी की, और इस मस्जिद के मालिक के खातिर, मैं हमेशा आपको सलाह देब' फिर उ इस्तिघर बनाइन अऊर मंच से उतरे।
Imam Bukhari : 57
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ قَالَ حَدَّثَنَا فُلَيْحٌ ح و حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُلَيْحٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ حَدَّثَنِي هِلَالُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَبَيْنَمَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَجْلِسٍ يُحَدِّثُ الْقَوْمَ جَاءَهُ أَعْرَابِيٌّ فَقَالَ مَتَى السَّاعَةُ فَمَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحَدِّثُ فَقَالَ بَعْضُ الْقَوْمِ سَمِعَ مَا قَالَ فَكَرِهَ مَا قَالَ وَقَالَ بَعْضُهُمْ بَلْ لَمْ يَسْمَعْ حَتَّى إِذَا قَضَى حَدِيثَهُ قَالَ أَيْنَ أُرَاهُ السَّائِلُ عَنْ السَّاعَةِ قَالَ هَا أَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَإِذَا ضُيِّعَتْ الْأَمَانَةُ فَانْتَظِرْ السَّاعَةَ قَالَ كَيْفَ إِضَاعَتُهَا قَالَ إِذَا وُسِّدَ الْأَمْرُ إِلَى غَيْرِ أَهْلِهِ فَانْتَظِرْ السَّاعَةَ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन सिनान] कहिन, हमसे कहिन हैं [फुलैह]। अऊर एक समान हदीस दूसर तरीका से भी सुनाई गै है, अर्थात्: ई मोका बतावा गा है [इब्राहिम बिन अल मुंडज़िर] कहिन, ई हमका बतावा गा है [मुहम्मद बिन फुलैह] कहिन, ई मोका बतावा गा है [मेरे पिता] कहिन, ई मोका [हिलाल बिन अली] से [अथो' बिन यासर] से [अबुल्लाहुल्लाह] से बतावा गा है: जब प्रोफेसर कहिस: अलैहि वसल्लम एक लोगन के बारे मा चर्चा करत एक सभा मा रहे, अचानक एक बेडौइन अरब आवा अऊर पूछिस: 'कलमत कब आई?' हालांकि, पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अपनी बातचीत जारी रखी। यहि बीच कुछ लोग कहत हैं; 'उनका जवन कहिन उ सुनिन लेकिन उ जवन कहिन उ पसंद नाहीं किहिन,' अऊर कुछ अइसन भी हैं जे कहत हैं; 'कि ऊ का कहिस ऊ नाहीं सुनिस'। जब तक कि अंततः पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा: 'वह व्यक्ति कहाँ है जिसने क़यामत के दिन के बारे में पूछा?' व्यक्ति ने कहा: 'मैं, हे अल्लाह के रसूल!'। तौ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अगर भरोसा खतम होइगा तौ दुनिया के अंत का इंतजार करा'। व्यक्ति ने पूछा : 'जनादेश गायब कैसे हुआ?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'अगर मामला विशेषज्ञन के हवाले नाहीं कीन जात है, तौ हम दुनिया के अंत का इंतजार करत रहब'।
Imam Bukhari : 58
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ عَارِمُ بْنُ الْفَضْلِ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ أَبِي بِشْرٍ عَنْ يُوسُفَ بْنِ مَاهَكَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَتَخَلَّفَ عَنَّا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفْرَةٍ سَافَرْنَاهَا فَأَدْرَكَنَا وَقَدْ أَرْهَقَتْنَا الصَّلَاةُ وَنَحْنُ نَتَوَضَّأُ فَجَعَلْنَا نَمْسَحُ عَلَى أَرْجُلِنَا فَنَادَى بِأَعْلَى صَوْتِهِ وَيْلٌ لِلْأَعْقَابِ مِنْ النَّارِ مَرَّتَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا
हमसे कहा गा है [अबू अन नूमान अरिम बिन अल फदलाल] ने कहा, हमसे [अबू अवाना] से [अबू बिस्यर] से [यूसुफ बिन महक] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू] ने कहा है: पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमसे एक यात्रा पर पीछे रह गए जब तक कि हम लगभग समय नमाज पूरा नहीं कर पाए बस हमरे गोड़ पोंछ के वजूद। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बुलंद आवाज में चिल्लाया: 'हाय उन एड़ियों को जो गीले नहीं हैं, वे नरक में जाएँगे'। ऊ दुइ-तीन बार चिल्लाइस।
Imam Bukhari : 59
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مِنْ الشَّجَرِ شَجَرَةً لَا يَسْقُطُ وَرَقُهَا وَإِنَّهَا مَثَلُ الْمُسْلِمِ فَحَدِّثُونِي مَا هِيَ فَوَقَعَ النَّاسُ فِي شَجَرِ الْبَوَادِي قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَوَقَعَ فِي نَفْسِي أَنَّهَا النَّخْلَةُ فَاسْتَحْيَيْتُ ثُمَّ قَالُوا حَدِّثْنَا مَا هِيَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ هِيَ النَّخْلَةُ
हमसे कहिस है [कुतैबा बिन सैद] हमसे कहिस है [इस्माइल बिन जाफर] से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [इब्न उमर] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में पेड़ों के बीच एक ऐसा पेड़ है जिसके पत्ते नहीं गिरते। अऊर ई एक मुसलमान के लिए एक दृष्टान्त है'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा कि बताओ वो कौन सा पेड़ है ? तौ दोस्तन ने मान लिहिन कि जवन मतलब रहा ऊ घाटी मा एक पेड़ रहा। अब्दुल्ला ने कहा- 'मैं अपने मन मा सोचत रहौं कि पेड़ खजूर है, लेकिन कहै मा शर्मिंदा होइगै। तब साथियों ने पूछा: 'हे अल्लाह के रसूल, ऊ कौन सा पेड़ है?' उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'खजूर का पेड़'।
Imam Bukhari : 60
حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ دِينَارٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ مِنْ الشَّجَرِ شَجَرَةً لَا يَسْقُطُ وَرَقُهَا وَإِنَّهَا مَثَلُ الْمُسْلِمِ حَدِّثُونِي مَا هِيَ قَالَ فَوَقَعَ النَّاسُ فِي شَجَرِ الْبَوَادِي قَالَ عَبْدُ اللَّهِ فَوَقَعَ فِي نَفْسِي أَنَّهَا النَّخْلَةُ فَاسْتَحْيَيْتُ ثُمَّ قَالُوا حَدِّثْنَا مَا هِيَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ هِيَ النَّخْلَةُ
हमसे कहिस है [खालिद बिन मखलाद] हमसे कहिस है [सुलेमान] हमसे [अब्दुल्ला बिन दीनार] [इब्न उमर] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिस है, उ कहिन: 'सचमुच, पेड़न के बीच एक पेड़ है जेकर पत्ता नाहीं गिरत हैं। अऊर ई एक मुसलमान के लिए एक दृष्टान्त है'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा कि बताओ वो कौन सा पेड़ है ? तौ दोस्तन ने मान लिहिन कि जवन मतलब रहा ऊ घाटी मा एक पेड़ रहा। अब्दुल्ला बोले- मन मा सोचत रहेन कि पेड़ खजूर है, लेकिन कहै मा शर्म आवत रही। तब लोग बोले: 'हे अल्लाह के रसूल, ऊ कौन सा पेड़ है?' उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'खजूर का पेड़'।