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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Bukhari (الامام البخاري) - 7008 Hadith

Hadith

Imam Bukhari : 21

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَدْخُلُ أَهْلُ الْجَنَّةِ الْجَنَّةَ وَأَهْلُ النَّارِ النَّارَ ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى أَخْرِجُوا مِنْ النَّارِ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ فَيُخْرَجُونَ مِنْهَا قَدْ اسْوَدُّوا فَيُلْقَوْنَ فِي نَهَرِ الْحَيَا أَوْ الْحَيَاةِ شَكَّ مَالِكٌ فَيَنْبُتُونَ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ فِي جَانِبِ السَّيْلِ أَلَمْ تَرَ أَنَّهَا تَخْرُجُ صَفْرَاءَ مُلْتَوِيَةًقَالَ وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَمْرٌو الْحَيَاةِ وَقَالَ خَرْدَلٍ مِنْ خَيْرٍ

हमरा सब के [इस्माइल] कहलक अछि, हमरा सब के [मलिक] स [अमरू बिन याह्या अल मज़ानी] स [अपन पिता] स [अबू सईद अल खुदरी] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलक: 'स्वर्ग के अहलू स्वर्ग में प्रवेश क गेल अछि आ नरक के अहलू नरक में प्रवेश क गेल अछि। तखन अल्लाह तआला कहलनि: 'जेकर हृदय मे सरसों के दाना के आकार के ईमान हो, ओकरा नरक सं बाहर निकालू'। तेँ ओ सभ जरि गेल कारी हालत मे नरक सँ बाहर निकलल आ तखन जीवन वा जीवनक नदी मे राखि देल गेल । -मलिक संदिग्ध अछि। - तखन ओ सभ ओहिना उगैत गेल जेना कोनो नदीक कात मे बीया उगैत अछि । की अहाँ सभकेँ ध्यान नहि गेल जे कोना ओ पीयर रंगक संग बाहर आबि गेलाह'।कहला [वुहैब] हमरा सभकेँ ['अमरू] कहने छल: 'जीवन'। आ कहलक: 'कनि नीक'।

Hadith

Imam Bukhari : 22

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ صَالِحٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَا أَنَا نَائِمٌ رَأَيْتُ النَّاسَ يُعْرَضُونَ عَلَيَّ وَعَلَيْهِمْ قُمُصٌ مِنْهَا مَا يَبْلُغُ الثُّدِيَّ وَمِنْهَا مَا دُونَ ذَلِكَ وَعُرِضَ عَلَيَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَعَلَيْهِ قَمِيصٌ يَجُرُّهُ قَالُوا فَمَا أَوَّلْتَ ذَلِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الدِّينَ

हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन उबैदिल्लाह] कहलनि, हमरा सब के [इब्राहिम बिन सअद] के [सालिह] स [इब्न शिहाब] स [अबू उमामा बिन सहल बिन हुनैफ] स कहलक अछि जे ओ [अबू सैद अल खुदरी] के कहैत सुनने छल, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जखन हम सुतल छलहुं, तखन हम सपना देखलहुं जे लोक के हमरा सामने देखब। कपड़ा पहिरैत छलाह, जाहि मे किछु छाती धरि पहुँचैत छल आ किछु ओहि सँ कम छल । आ उमर बिन अल खथथब हमरा लग आनल गेल आ ओ कपड़ा पहिरि घीचि लेलक। साथी सब पूछलकै: 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, तोरा की मतलब छै?' ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलनि: 'अद-दीन -धर्म-'।

Hadith

Imam Bukhari : 23

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِ وَهُوَ يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعْهُ فَإِنَّ الْحَيَاءَ مِنْ الْإِيمَانِ

हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन यूसुफ] कहलक अछि, हमरा सब के [मलिक बिन अनस] के [इब्न शिहाब] स [सलीम बिन अब्दुल्लाह] स [अपन पिता] स कहल गेल अछि, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) अंसार के एकटा दोस्त के पास स गुजरल छलाह जे ओहि समय अपन भाई के शर्म के बारे में निर्देश द रहल छलाह। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'ओकरा छोड़ि दियौक, कारण सचमुच लाज ईमान के हिस्सा अछि'।

Hadith

Imam Bukhari : 24

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمُسْنَدِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو رَوْحٍ الْحَرَمِيُّ بْنُ عُمَارَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّ الْإِسْلَامِ وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ

हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद अल मुस्नादी] ओ कहलनि, हमरा सब के कहलक अछि [अबू राउह अल हरमी बिन उमराह] कहलनि, हमरा सब के [स्यूबाह] के [वाकिद बिन मुहम्मद] कहलनि; हम [हमर पिता] के [इब्न उमर] स कहैत सुनलहुं, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहने छलाह: 'हमरा आदेश देल गेल छल जे जा धरि ओ गवाही नहि देत, लोक स लड़ब; अल्लाह के अलावा कोनो देवता नै छै आरू कि सचमुच मुहम्मद अल्लाह के दूत छै, नमाज के कायम रखै छै, जकात दै छै। जँ ओ सभ एहन करैत छथि तँ ओ सभ अपन खून आ सम्पत्ति हमरासँ बचा लेने छथि सिवाय इस्लामक नियमक अनुसार आ हुनकर हिसाब-किताब अल्लाहक लग अछि।'

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Imam Bukhari : 25

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ وَمُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَا حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ أَيُّ الْعَمَلِ أَفْضَلُ فَقَالَ إِيمَانٌ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ قِيلَ ثُمَّ مَاذَا قَالَ الْجِهَادُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ قِيلَ ثُمَّ مَاذَا قَالَ حَجٌّ مَبْرُورٌ

हमरा सब क॑ [अहमद बिन यूनुस] आरू [मूसा बिन इस्माइल] दोनों न॑ कहल॑ छै, हमरा सब क॑ [इब्राहिम बिन स’द] कहलऽ गेलऽ छै, ई हमरा [इब्न शिहाब] क॑ [सईद बिन अल मुसैयब] स॑ [अबू हुरैरा] स॑ कहलऽ गेलऽ छै, कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ इस्लाम के बारे म॑ पूछलऽ गेलऽ छेलै, जे सबसें महत्वपूर्ण छै ? त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: ‘अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह पर विश्वास’। तखन फेर पुछलखिन: 'तखन की?' ओ जवाब देलखिन: 'अल जिहाद फी सबिल्लाह -अल्लाह के रास्ता में लड़ना-। तखन फेर पुछलखिन: 'तखन आओर की?' ओ उत्तर देलनि, शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम: 'हज मब्रूर' |

Hadith

Imam Bukhari : 26

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عَامِرُ بْنُ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ سَعْدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْطَى رَهْطًا وَسَعْدٌ جَالِسٌ فَتَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا هُوَ أَعْجَبُهُمْ إِلَيَّ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا لَكَ عَنْ فُلَانٍ فَوَاللَّهِ إِنِّي لَأَرَاهُ مُؤْمِنًا فَقَالَ أَوْ مُسْلِمًا فَسَكَتُّ قَلِيلًا ثُمَّ غَلَبَنِي مَا أَعْلَمُ مِنْهُ فَعُدْتُ لِمَقَالَتِي فَقُلْتُ مَا لَكَ عَنْ فُلَانٍ فَوَاللَّهِ إِنِّي لَأَرَاهُ مُؤْمِنًا فَقَالَ أَوْ مُسْلِمًا ثُمَّ غَلَبَنِي مَا أَعْلَمُ مِنْهُ فَعُدْتُ لِمَقَالَتِي وَعَادَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا سَعْدُ إِنِّي لَأُعْطِي الرَّجُلَ وَغَيْرُهُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْهُ خَشْيَةَ أَنْ يَكُبَّهُ اللَّهُ فِي النَّارِوَرَوَاهُ يُونُسُ وَصَالِحٌ وَمَعْمَرٌ وَابْنُ أَخِي الزُّهْرِيِّ عَنْ الزُّهْرِيِّ

हमरा सभकेँ [अबू अल यमन] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [स्यूअइब] [अज ज़ुहरी]सँ कहलक अछि, हमरा [अमीर बिन स’द बिन अबू वकाश] [स’द]सँ कहलक अछि, जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कतेको लोककेँ भोजन देलनि आ ओहि समय स’द बैसल छल। मुदा ओ ई भोजन कोनो आदमी केँ नहि देलनि, भले ओ व्यक्ति हमरा लेल उपस्थित लोक मे सबसँ बेसी प्रभावशाली छल, तेँ हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ पूछलहुँ: हे रसुलुल्लाह, फल्लाँ के की? सच मे हम हुनका एकटा आस्तिक बुझैत छी। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: या ओ मुसलमान छथि? तखन हम एक क्षण चुप भ गेलहुं, आ हम मजबूर भ गेलहुं जे हुनकर की मतलब छल, सल्लाह अलैहि वसल्लम, ताहि पर बेसी निश्चित रहब, ताहि लेल हम अपन बात दोहरौलहुं: हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, फल्लाह के की? सच मे हम हुनका एकटा आस्तिक बुझैत छी। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: या ओ मुसलमान छथि? तखन हमरा फेर धक्का देल गेल जे हुनकर की मतलब छल ताहि पर बेसी निश्चिंत रहब जाबत हम फेर अपन प्रश्न दोहरौने रही। तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: हे स’द, सचमुच हम ओहि व्यक्ति के सेहो देब। मुदा हम ओकरा देबासँ बेसी दोसरकेँ देब नीक बुझब, कारण हमरा डर अछि जे अल्लाह ओकरा नरकमे फेकि देत'। [युनुस], [सालिह], [मा'मार] आ [अज जुहरी के भतीजा], [अज ज़ुहरी] स रिवायत केने छथि।

Hadith

Imam Bukhari : 27

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍوأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّ الْإِسْلَامِ خَيْرٌ قَالَ تُطْعِمُ الطَّعَامَ وَتَقْرَأُ السَّلَامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ

हमरा सब के [कुतैबा] कहलक अछि, हमरा सब के [अल लैट्स] स [यजीद बिन अबू हबीब] स [अबू अल खैर] स [अब्दुल्लाह बिन अमरू] स कहलक अछि जे कियो रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलक; 'कोन इस्लाम सबसँ नीक अछि ?' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अहाँ अपन जान-पहचान वाला लोक के खुआबैत छी आ नमस्कार करैत छी जे अहाँ नहि जनैत छी'।

Hadith

Imam Bukhari : 28

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُرِيتُ النَّارَ فَإِذَا أَكْثَرُ أَهْلِهَا النِّسَاءُ يَكْفُرْنَ قِيلَ أَيَكْفُرْنَ بِاللَّهِ قَالَ يَكْفُرْنَ الْعَشِيرَ وَيَكْفُرْنَ الْإِحْسَانَ لَوْ أَحْسَنْتَ إِلَى إِحْدَاهُنَّ الدَّهْرَ ثُمَّ رَأَتْ مِنْكَ شَيْئًا قَالَتْ مَا رَأَيْتُ مِنْكَ خَيْرًا قَطُّ

हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] के [मलिक] स [जैद बिन असलम] स [‘अथो’ बिन यासर] स [इब्न अब्बास] स कहल गेल अछि, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: ‘हमरा नरक देखाओल गेल छल, पता चलल अछि जे एकर अधिकांश निवासी महिला छथि। कारण ओ सभ प्रायः एकरा नकारैत छथि'। पूछल गेल जे की ओ सब अल्लाह के इन्कार केलक? ओ बजलाह - पतिक वरदान केँ नकारैत छथि, भलाई केँ नकारैत छथि। जँ अहाँ सभ दिन हुनका सभ मे सँ कोनो एकटाक संग नीक रहलहुँ अछि तखन ओकरा अहाँ मे मात्र एकटा अधलाह बात देखैत अछि तऽ ओ कहत जे 'हम अहाँ मे कहियो कनिको नीक बात नहि देखलहुँ'।

Hadith

Imam Bukhari : 29

حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ وَاصِلٍ الْأَحْدَبِ عَنْ الْمَعْرُورِ بْنِ سُوَيْدٍ قَالَ لَقِيتُ أَبَا ذَرٍّبِالرَّبَذَةِ وَعَلَيْهِ حُلَّةٌ وَعَلَى غُلَامِهِ حُلَّةٌ فَسَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِنِّي سَابَبْتُ رَجُلًا فَعَيَّرْتُهُ بِأُمِّهِ فَقَالَ لِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا ذَرٍّ أَعَيَّرْتَهُ بِأُمِّهِ إِنَّكَ امْرُؤٌ فِيكَ جَاهِلِيَّةٌ إِخْوَانُكُمْ خَوَلُكُمْ جَعَلَهُمْ اللَّهُ تَحْتَ أَيْدِيكُمْ فَمَنْ كَانَ أَخُوهُ تَحْتَ يَدِهِ فَلْيُطْعِمْهُ مِمَّا يَأْكُلُ وَلْيُلْبِسْهُ مِمَّا يَلْبَسُ وَلَا تُكَلِّفُوهُمْ مَا يَغْلِبُهُمْ فَإِنْ كَلَّفْتُمُوهُمْ فَأَعِينُوهُمْ

हमरा सब के कहल गेल अछि [सुलेमान बिन हर्ब] कहलनि, हमरा सब के [स्यूअबाह] के कहल गेल अछि [वशिल अल अहदाब] स [अल म'रूर बिन सुवैद] कहलनि: हमरा रबजह में [अबू ज़ार] स भेंट भेल जे ओहि समय दू परत कपड़ा पहिरने छलाह, आ हुनकर बेटा सेहो, ताहि लेल हम हुनका स एहि बारे में पूछलहुं, त ओ जवाब देलनि: हम हुनकर अपमान क ककरो अपमान केलहुं अछि माँ, त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा डांटलनि: 'हे अबू धारर की अहाँ हुनकर माँ के अपमान केलौं? असल मे अहाँ मे एखनो जहिलियाक -स्वभाव- अछि। तोहर भाइ तोहर आश्रित अछि, अल्लाह तोहर हाथक नीचा राखि देने अछि । तेँ जकरा हाथक नीचाँ भाइ - ओकर आश्रित - तखन जँ ओ खाइत अछि तँ ओकरा जेना खाइत अछि तेना भोजन दिअ , जँ कपड़ा पहिरने अछि तँ ओकरा जे पहिरैत अछि से दिअ , ओकरा सभकेँ कोनो एहन चीजक बोझ नहि दियौक जे ओकर सीमासँ बाहर हो। जँ अहाँ हुनका सभ पर बोझ दऽ दैत छी तँ हुनकर सभक मददि करू'।

Hadith

Imam Bukhari : 30

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ وَيُونُسُ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ الْأَحْنَفِ بْنِ قَيْسٍ قَالَذَهَبْتُ لِأَنْصُرَ هَذَا الرَّجُلَ فَلَقِيَنِي أَبُو بَكْرَةَ فَقَالَ أَيْنَ تُرِيدُ قُلْتُ أَنْصُرُ هَذَا الرَّجُلَ قَالَ ارْجِعْ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا الْتَقَى الْمُسْلِمَانِ بِسَيْفَيْهِمَا فَالْقَاتِلُ وَالْمَقْتُولُ فِي النَّارِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا الْقَاتِلُ فَمَا بَالُ الْمَقْتُولِ قَالَ إِنَّهُ كَانَ حَرِيصًا عَلَى قَتْلِ صَاحِبِهِ

हमरा सभकेँ [अब्दुररहमान बिन अल मुबारक] हमरा सभकेँ कहलक अछि [हम्मद बिन जैद] हमरा सभकेँ [अय्यूब] आ [यूनुस] [अल हसन]सँ [अल अहनाफ बिन कैस]सँ कहलक अछि; हम ककरो मदद करय लेल आयल छलहुं आ फेर [अबू बकराह] सं भेंट भेल, तें ओ पुछलनि: 'अहाँ कतय जा रहल छी?' हम जवाब देलियनि: 'हम ककरो मदद करय चाहैत छी' ओ कहलनि: 'घुरि जाउ, कारण हम अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ कहैत सुनने छी: 'जँ दू टा मुसलमान एक दोसरा सँ भेंट करत - लड़बाक लेल - एक दोसरा सँ तलवार निकालैत, तखन जे मारल जायत आ मारल जायत, ओ नरक मे चलि जायत'। हम पुछलियनि: हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, ई हत्या करय वाला के लेल अछि, मुदा मारल जाय वाला के की? त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'ओहो पहिने सचमुच अपन दोस्त के मारय चाहैत छलाह'।

Hadith

Imam Bukhari : 31

حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ ح قَالَ و حَدَّثَنِي بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ أَبُو مُحَمَّدٍ الْعَسْكَرِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَلَمَّا نَزَلَتْ{ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُمْ بِظُلْمٍ }قَالَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّنَا لَمْ يَظْلِمْ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ{ إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ }

हमरा सब स रिवायत केने छथि [अबू अल वलीद] कहने छथि, हमरा सब स [स्यूबाह] स रिवायत केने छथि आ एहि स मिलैत जुलैत हदीस सेहो रिवायत केने छथि। अन्याय पर हुनकर ईमान' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब पूछलखिन: 'हमरा सब में स के अन्याय नै केलक अछि? त अल्लाह 'अज्जा वजल्ला -अपन वचन- उतारलनि: 'वास्तव में शिर्क एकटा पैघ अन्याय अछि' | -प्रश्न। लुकमान : १३- ८.

Hadith

Imam Bukhari : 32

حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ أَبُو الرَّبِيعِ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ مَالِكِ بْنِ أَبِي عَامِرٍ أَبُو سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ آيَةُ الْمُنَافِقِ ثَلَاثٌ إِذَا حَدَّثَ كَذَبَ وَإِذَا وَعَدَ أَخْلَفَ وَإِذَا اؤْتُمِنَ خَانَ

हमरा सभकेँ [सुलेमान अबू अर रबी’] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [इस्माइल बिन जा’फर] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [नफी’ बिन मलिक बिन अबू अबू अमीर अबू सुहैल] [अपन पिता] सँ [अबू हुरैरा] सँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम सँ कहलक अछि, ओ कहलनि: ‘पाखंडक निशान तीन अछि; झूठ बाजै छै, वादा करै छै त ओकरा तोड़ै छै आ जनादेश देल गेलै त ओकरा धोखा करै छै'।

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Imam Bukhari : 33

حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ بْنُ عُقْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍوأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَرْبَعٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ كَانَ مُنَافِقًا خَالِصًا وَمَنْ كَانَتْ فِيهِ خَصْلَةٌ مِنْهُنَّ كَانَتْ فِيهِ خَصْلَةٌ مِنْ النِّفَاقِ حَتَّى يَدَعَهَا إِذَا اؤْتُمِنَ خَانَ وَإِذَا حَدَّثَ كَذَبَ وَإِذَا عَاهَدَ غَدَرَ وَإِذَا خَاصَمَ فَجَرَتَابَعَهُ شُعْبَةُ عَنْ الْأَعْمَشِ

हमरा सब के [कबीशाह बिन उकबाह] कहलक अछि, हमरा सब के [सूफयान] के [अल अमासी] स [अब्दुल्लाह बिन मुर्राह] स [मसरुक] स [अब्दुल्लाह बिन अमरू] स कहल गेल अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जँ कोनो व्यक्ति मे चारि चीज अछि तखन ओ असली मुनाफीक अछि, आ जे कियो मे अछि स्वयं एहि चारि चीज मे एकटा गुण तखन ओकरा मे एकटा गुण निफाक छैक जाबत ओ ओकरा नहि छोड़ि देलकैक | अर्थात जँ ओकरा कोनो जनादेश देल गेलै तँ ओ ओकरा संग धोखा करै छै , जँ झूठ बाजै छै , जँ वादा करै छै तँ ओकरा तोड़ि दै छै आ जँ लड़ै छै तँ ठक करै छै'। ई हदीस [स्यूबाह] द्वारा सेहो [अल अ'मासी] सँ रिवायत कयल गेल अछि |

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Imam Bukhari : 34

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَقُمْ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ

हमरा सब के कहलक [अबू अल यमन] कहलक, हमरा सब के बता देलक [स्यूअइब] कहलक, हमरा सब के [अबू अल ज़नाद] स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] कहलक, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलक: 'जे कियो इमान के कारण लैलातुल कदर के कायम रखैत अछि आ इनाम के आशा करैत अछि, ओकर पिछला पाप माफ भ गेल अछि'।

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Imam Bukhari : 35

حَدَّثَنَا حَرَمِيُّ بْنُ حَفْصٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ قَالَ حَدَّثَنَا عُمَارَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو زُرْعَةَ بْنُ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ انْتَدَبَ اللَّهُ لِمَنْ خَرَجَ فِي سَبِيلِهِ لَا يُخْرِجُهُ إِلَّا إِيمَانٌ بِي وَتَصْدِيقٌ بِرُسُلِي أَنْ أُرْجِعَهُ بِمَا نَالَ مِنْ أَجْرٍ أَوْ غَنِيمَةٍ أَوْ أُدْخِلَهُ الْجَنَّةَ وَلَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي مَا قَعَدْتُ خَلْفَ سَرِيَّةٍ وَلَوَدِدْتُ أَنِّي أُقْتَلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ أُحْيَا ثُمَّ أُقْتَلُ ثُمَّ أُحْيَا ثُمَّ أُقْتَلُ

हमरा सभकेँ कहलक अछि [हरमी बिन हफश] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [अब्दुल वाहिद] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [उमराह] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू ज़ुराह बिन अमरू बिन जरीर] कहलक अछि: हम [अबू हुरैरा] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमसँ सुनने छी, ओ कहलनि: ‘अल्लाह गारंटी दैत छथि जे बाहर निकलैत छथि -झगड़ा- हुनकर रास्ता पर, नहि एक ओकरा बाहर धकेल दै छै सिवाय हमरा पर विश्वास के कारण आरू जेकरा हमर दूत छै ओकरा इनाम या घोनीमा प्राप्त करी क॑ या स्वर्ग में प्रवेश करी क॑ ओकरा वापस करै लेली धर्मी ठहराबै छै । जँ ई हमर लोक पर बोझ नहि रहैत त' अवश्य हम सरिय्याह - विशेष शक्ति - के पाछू चुपचाप नहि बैसितहुँ आ अवश्य हमरा नीक लागत जँ हमरा अल्लाह के रास्ता मे मारल जाय आ फेर हमरा फेर सँ जीवित क' देल जाय, फेर हमरा फेर सँ मारल जाय, फेर हमरा फेर सँ जीवित क' देल जाय, फेर हमरा फेर सँ मारल जाय'।

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Imam Bukhari : 36

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ قَامَ رَمَضَانَ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ

हमरा सब के [इस्माइल] कहल गेल अछि, हमरा [मलिक] के [इब्न शिहाब] स [हुमैद बिन अब्दुररहमान] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि जे अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जे कियो इमान के कारण रमजान के कायम राखत आ इनाम के उम्मीद करत, ओकर पिछला पाप माफ भ जायत।'

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Imam Bukhari : 37

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ صَامَ رَمَضَانَ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ

हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन सलाम] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन फुदलैल] कहलनि, हमरा सब के [याह्या बिन सईद] के [अबू सलामाह] स [अबू हुरैराह] स कहलक अछि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे कियो इमान के कारण रोजा रखैत अछि आ इनाम के आशा करैत अछि, ओकर पिछला पाप माफ भ जाइत अछि।

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Imam Bukhari : 38

حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ مُطَهَّرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ مَعْنِ بْنِ مُحَمَّدٍ الْغِفَارِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الدِّينَ يُسْرٌ وَلَنْ يُشَادَّ الدِّينَ أَحَدٌ إِلَّا غَلَبَهُ فَسَدِّدُوا وَقَارِبُوا وَأَبْشِرُوا وَاسْتَعِينُوا بِالْغَدْوَةِ وَالرَّوْحَةِ وَشَيْءٍ مِنْ الدُّلْجَةِ

हमरा सब स [अब्दुस सलाम बिन मुथहहर] कहला, हमरा सब स [उमर बिन अली] स [माआन बिन मुहम्मद अल घिफारी] स [सैद बिन अबू सईद अल मकबुरी] स [अबू हुरैरा] स रिवायत अछि जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे सचमुच धर्म आसान अछि, आ कियो धर्म कए कठिन नहि करैत अछि सिवाय इ जे ओ हेताह परास्त - तेजीसँ कठिन आ कठिन -। त सोझे काज करू, नजदीक आबि जाउ - सत्यक - आ नीक खबरि दियौक आ अल गदवाह - भोरे-भोर बाहर निकलब - आ अर-रुहाह - धुहरक पछाति बाहर निकलब - आ अद-दुलजाह सं किछु - राति में बाहर निकलब - '.

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Imam Bukhari : 39

حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ أَوَّلَ مَا قَدِمَ الْمَدِينَةَ نَزَلَ عَلَى أَجْدَادِهِ أَوْ قَالَ أَخْوَالِهِ مِنْ الْأَنْصَارِ وَأَنَّهُ صَلَّى قِبَلَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ عَشَرَ شَهْرًا أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا وَكَانَ يُعْجِبُهُ أَنْ تَكُونَ قِبْلَتُهُ قِبَلَ الْبَيْتِ وَأَنَّهُ صَلَّى أَوَّلَ صَلَاةٍ صَلَّاهَا صَلَاةَ الْعَصْرِ وَصَلَّى مَعَهُ قَوْمٌ فَخَرَجَ رَجُلٌ مِمَّنْ صَلَّى مَعَهُ فَمَرَّ عَلَى أَهْلِ مَسْجِدٍ وَهُمْ رَاكِعُونَ فَقَالَ أَشْهَدُ بِاللَّهِ لَقَدْ صَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِبَلَ مَكَّةَ فَدَارُوا كَمَا هُمْ قِبَلَ الْبَيْتِ وَكَانَتْ الْيَهُودُ قَدْ أَعْجَبَهُمْ إِذْ كَانَ يُصَلِّي قِبَلَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ وَأَهْلُ الْكِتَابِ فَلَمَّا وَلَّى وَجْهَهُ قِبَلَ الْبَيْتِ أَنْكَرُوا ذَلِكَقَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ عَنْ الْبَرَاءِ فِي حَدِيثِهِ هَذَا أَنَّهُ مَاتَ عَلَى الْقِبْلَةِ قَبْلَ أَنْ تُحَوَّلَ رِجَالٌ وَقُتِلُوا فَلَمْ نَدْرِ مَا نَقُولُ فِيهِمْ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ }

हमरा सब स रिवायत अछि [अमर बिन खालिद] कहलक अछि, हमरा सब स रिवायत अछि [जुहैर] कहलक अछि, हमरा सब स [अबू इशाक] स रिवायत अछि [अल बरो` बिन अजीब] स जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जखन ओ पहिल बेर मदीना आयल छलाह तखन हुनकर दादा - अजीब- या हुनकर चाचा सब अंसार स रोकने छलाह, आ ओहि समय ओ सल्लल्लाहु सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सोलह-सतरह मास धरि बैतुल मकदीस के मुँहे नमाज पढ़ैत छलाह, आ बैतुल्लाह - काबाह- के मुँहे नमाज पढ़बा मे बहुत खुश छलाह | पहिल नमाज जे ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केलनि - काबा के मुँह केने - असर के नमाज छल आ लोक सेहो हुनका संग नमाज पढ़ैत छल | एक दिन एकटा साथी जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ नमाज पढ़ी रहलऽ छेलै, दोसरऽ मस्जिद में लोगऽ के पास स॑ गुजरी गेलै जब॑ वू प्रणाम करी रहलऽ छेलै, आरू वू कहलकै: 'हम अल्लाह के गवाही दै छियै कि हम्में अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के साथ मक्का के तरफ मुँह करी क॑ नमाज पढ़ै छेलियै, ई लेली जे प्रणाम करी रहलऽ छेलै, वू अल्लाह केरऽ घर के तरफ मुड़लऽ छेलै आरू यहूदी आरू किताब केरऽ लोग आश्चर्यचकित होय गेलऽ छेलै, कैन्हेंकि पहलें... पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के घर के सामने नमाज पढ़लनि। जखन ओ सब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अल्लाह के घर दिस मुँह घुमाबैत देखलक त ओ सब एहि बात स इनकार क देलक। जुहैर न॑ कहलकै: अबू इशक न॑ हमरा सिनी क॑ अल बरो` स॑ बतैलकै, अपनऽ हदीस म॑ ऐसनऽ व्यक्ति प॑ फैसला के बारे म॑ बतैलऽ गेलऽ छै जे ऐन्हऽ समय म॑ मर॑ छै जब॑ किबला के दिशा म॑ कोनो बदलाव नै करलऽ गेलऽ छै आरू साथ ही साथ वू समय म॑ बहुत लोगऽ क॑ मारलऽ गेलऽ छेलै?, हमरा सब क॑ ई नै पता छेलै कि ओकरा सब के बारे म॑ की करलऽ जाय जब॑ तलक कि अंततः अल्लाह ता’ला न॑ अपनऽ बात नै प्रकट करी देलकै: 'आरू अल्लाह तोरऽ ईमान क॑ बर्बाद नै करतै ।' -प्रश्न। अल बकोरोह : 143- 2019।

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Imam Bukhari : 40

حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَحْسَنَ أَحَدُكُمْ إِسْلَامَهُ فَكُلُّ حَسَنَةٍ يَعْمَلُهَا تُكْتَبُ لَهُ بِعَشْرِ أَمْثَالِهَا إِلَى سَبْعِ مِائَةِ ضِعْفٍ وَكُلُّ سَيِّئَةٍ يَعْمَلُهَا تُكْتَبُ لَهُ بِمِثْلِهَا

हमरा सब के कहल गेल अछि [इशक बिन मंशूर] कहलनि, हमरा सब के कहल गेल अछि [अब्दुरज्जाक] कहलनि, हमरा सब के [माममर] के [हमाम बिन मुनाब्बीह] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जँ अहाँ सब मे सँ कियो अपन इस्लाम मे सुधार करत तखन हर नीक काज लेल हुनका लेल दस एहने लिखल जायत।' -नीक-सात सय स्तर तक, आ हर एक अधलाह काज के लेल ओ मात्र एकटा बुराई के काज लिखल जायत जे ओहि स मिलैत जुलैत अछि'।