इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम अहमद : 24128

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّا قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ رَجُلٍ مِنْ قُرَيْشٍ مِنْ بَنِي تَيْمٍ يُقَالُ لَهُ طَلْحَةُ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ قَالَتْ تَنَاوَلَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ إِنِّي صَائِمَةٌ فَقَالَ وَأَنَا صَائِمٌ

हमें बताया है [याह्या बिन ज़कारिया] उन्होंने कहा; मुझे [मेरे पिता] को [सअद बिन इब्रोहिम] से यह बताया गया कि बनी तैम के कुरैश के एक आदमी ने उनसे कहा कि [थलहा] ने [ऐस्या उम्मुल मुक्मिनिन] ने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार मेरा हाथ पकड़ा, तो मैंने कहा: "मैं रोज़े से हूँ।" तो उन्होंने कहा: "मैं भी रोज़े से हूँ।"