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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम अहमद : 18917

حَدَّثَنَا يَزِيدُ قَالَ أَخْبَرَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَن سَعِيدِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ عَن أَبِيهِ عَن جَدِّهِ أَبِي مُوسَى قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أُمَّتِي أُمَّةٌ مَرْحُومَةٌ لَيْسَ عَلَيْهَا فِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ إِلَّا عَذَابُهَا فِي الدُّنْيَا الْقَتْلُ وَالْبَلَاءُ وَالزَّلَازِلُ

उन्होंने कहा, "हमें [यज़ीद] ने बताया है; हमें [अल मसूदी] ने [सईद बिन अबू बुरदा] से [उनके पिता] से [उनके दादा, अबू मूसा] से बताया है; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "बेशक, मेरी उम्मत एक प्यारे लोग हैं, उन्हें आखिरत में कोई तकलीफ़ नहीं होगी, सिवाय उस तकलीफ़ के जो इस दुनिया में कत्ल, आज़माइश और सदमों के रूप में मौजूद है।"