Rabb tabaraka wa ta'ala turun ke langit dunia di sepertiga malam dan yang berdo’a pasti kukabulkan
Imam Ahmad : 17228
حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ زَيْدٍ عَنِ الْحَسَنِ عَن عُثْمَانَ بْنِ أَبِي الْعَاصِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُنَادِي كُلَّ لَيْلَةٍ سَاعَةً فِيهَا مُنَادٍ هَلْ مِنْ دَاعٍ فَأَسْتَجِيبَ لَهُ هَلْ مِنْ سَائِلٍ فَأُعْطِيَهُ هَلْ مِنْ مُسْتَغْفِرٍ فَأَغْفِرَ لَهُ
हमसे कहिन [रौह बिन उबादा] हमसे कहिन हैं [हम्मद बिन सलामा] उ कहिन, हमसे [अली बिन जैद] [अल हसन] से [उस्मान बिन अबुल अश] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहिन हैं, उ कहिन: 'हर रात मा एक समय होत है जब पुकारै वाला -अल्लाह- पुकारत है, जब तक कि मैं ओका नमाज नाहीं करत हउँ, वहाँ कोई है जो तब तक मांगता है जब तक कि मैं उसे नहीं देता, और का कोई है जो भीख मांगता है? जब तक हम ओका माफ नाहीं करब तब तक माफी।'