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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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इमाम अहमद : 12128

حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مُسْلِمٌ يَعْنِي ابْنَ خَالِدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي حُسَيْنٍ الْمَكِّيِّ الْمُقْرِئُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يُعَظِّمَ اللَّهُ رِزْقَهُ وَأَنْ يَمُدَّ فِي أَجَلِهِ فَلْيَصِلْ رَحِمَهُ

हमें [हुसैन बिन मुहम्मद] ने [मुसलमानों, अर्थात् इब्न खोलिद] को [अब्दुल्ला बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू हुसैन अल-मक्की, अल-मुकरी] से [अनस बिन मलिक] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी चाहता है कि अल्लाह उसकी आजीविका का विस्तार करे और उसके जीवन को लंबा करे, उसे संबंध बनाए रखना चाहिए।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 1150, 12128, 12922, 13096, 13309
इमाम बुखारी : 1925, 5526, 5527
इमाम मुस्लिम : 4638, 4639
इमाम अबू दाऊद : 1443