इमाम अहमद : 10671
حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ بِشْرِ بْنِ حَرْبٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاقِفًا بِعَرَفَةَ يَدْعُو هَكَذَا وَرَفَعَ يَدَيْهِ حِيَالَ ثَنْدُوَتَيْهِ وَجَعَلَ بُطُونَ كَفَّيْهِ مِمَّا يَلِي الْأَرْضَ
हमें बताया है [रौह] ने कहा; हमें [हम्माद] ने [बिसिर बिन हर्ब] से [अबू सईद अल खुदरी] से बताया है कि उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 'अराफा' में इस तरह वुकूफ किया," फिर उन्होंने अपने हाथों को अपनी छाती तक ऊपर उठाया और अपनी हथेलियों को ज़मीन की ओर कर दिया।