Sesungguhnya telah ada pada (diri) Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam itu suri teladan
इमाम अहमद : 5293
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ قَيْسٍ الْمَأْرِبِيُّ حَدَّثَنَا ثُمَامَةُ بْنُ شَرَاحِيلَ قَالَ خَرَجْتُ إِلَى ابْنِ عُمَرَ فَقُلْنَا مَا صَلَاةُ الْمُسَافِرِ فَقَالَ رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ إِلَّا صَلَاةَ الْمَغْرِبِ ثَلَاثًا قُلْتُ أَرَأَيْتَ إِنْ كُنَّا بِذِي الْمَجَازِ قَالَ وَمَا ذُو الْمَجَازِ قُلْتُ مَكَانًا نَجْتَمِعُ فِيهِ وَنَبِيعُ فِيهِ وَنَمْكُثُ عِشْرِينَ لَيْلَةً أَوْ خَمْسَ عَشْرَةَ لَيْلَةً قَالَ يَا أَيُّهَا الرَّجُلُ كُنْتُ بِأَذْرَبِيجَانَ لَا أَدْرِي قَالَ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ أَوْ شَهْرَيْنِ فَرَأَيْتُهُمْ يُصَلُّونَهَا رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ وَرَأَيْتُ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نُصْبَ عَيْنِي يُصَلِّيهِمَا رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ نَزَعَ هَذِهِ الْآيَةَ { لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ } حَتَّى فَرَغَ مِنْ الْآيَةِ
मुहम्मद बिन बकर ने हमें बताया है, याह्या बिन कैस अल-मरीबी ने हमें बताया है, त्सुमामा बिन सियाराहिल ने कहा, मैं इब्न उमर से मिला तो हमने पूछा, "एक यात्री कैसे नमाज़ पढ़ता है?" इब्न उमर ने जवाब दिया, "वह दो रकअत है, दो रकअत, मगरिब की नमाज़ को छोड़कर, जो तीन (रकअत) है।" मैंने पूछा, "अगर हम ज़िल मजाज़ में होते तो आप क्या सोचते?" उन्होंने जवाब दिया, "ज़ुल मजाज़ क्या है?" मैंने जवाब दिया, "एक ऐसी जगह जहाँ हम इकट्ठा होते हैं, खरीदते-बेचते हैं और बीस या पंद्रह दिन रात बिताते हैं।" उन्होंने कहा, "ऐ दोस्त, मैं अज़रबैजान में था, मुझे चार महीने या दो महीने याद नहीं हैं - बताने वाले को समय पर शक है - मैंने उन्हें दो रकअत, दो रकअत नमाज़ पढ़ते देखा, और मैंने अपनी आँखों के सामने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा, उन्होंने दो रकअत, दो रकअत नमाज़ पढ़ी।" फिर उन्होंने यह आयत पढ़ी "LAQAD KAANA LAKUM FI RASULILLAAHI USWATUN HASANAH" (बेशक, अल्लाह के रसूल में तुम्हारे लिए एक अच्छी मिसाल है।