Tata cara shalat tasbih
इमाम इब्नु माजा : 1376
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَبُو عِيسَى الْمَسْرُوقِيُّ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُبَيْدَةَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ مَوْلَى أَبِي بَكْرِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ عَنْ أَبِي رَافِعٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلْعَبَّاسِ يَا عَمِّ أَلَا أَحْبُوكَ أَلَا أَنْفَعُكَ أَلَا أَصِلُكَ قَالَ بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَصَلِّ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ تَقْرَأُ فِي كُلِّ رَكْعَةٍ بِفَاتِحَةِ الْكِتَابِ وَسُورَةٍ فَإِذَا انْقَضَتْ الْقِرَاءَةُ فَقُلْ سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ خَمْسَ عَشْرَةَ مَرَّةً قَبْلَ أَنْ تَرْكَعَ ثُمَّ ارْكَعْ فَقُلْهَا عَشْرًا ثُمَّ ارْفَعْ رَأْسَكَ فَقُلْهَا عَشْرًا ثُمَّ اسْجُدْ فَقُلْهَا عَشْرًا ثُمَّ ارْفَعْ رَأْسَك فَقُلْهَا عَشْرًا ثُمَّ اسْجُدْ فَقُلْهَا عَشْرًا ثُمَّ ارْفَعْ رَأْسَكَ فَقُلْهَا عَشْرًا قَبْلَ أَنْ تَقُومَ فَتِلْكَ خَمْسٌ وَسَبْعُونَ فِي كُلِّ رَكْعَةٍ وَهِيَ ثَلَاثُ مِائَةٍ فِي أَرْبَعِ رَكَعَاتٍ فَلَوْ كَانَتْ ذُنُوبُكَ مِثْلَ رَمْلِ عَالِجٍ غَفَرَهَا اللَّهُ لَكَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَنْ لَمْ يَسْتَطِعْ يَقُولُهَا فِي يَوْمٍ قَالَ قُلْهَا فِي جُمُعَةٍ فَإِنْ لَمْ تَسْتَطِعْ فَقُلْهَا فِي شَهْرٍ حَتَّى قَالَ فَقُلْهَا فِي سَنَةٍ
हमें बताया है [मूसा बिन अब्दुर्रहमान अबू ईसा अल मसरूकी] ने कहा, हमें बताया है [ज़ैद अल हुबाब] ने कहा, हमें बताया है [मूसा बिन उबैदा] ने कहा, मुझे बताया है [सईद बिन अबू सईद] - अबू बक्र बिन अमरू बिन हज़म के पुराने गुलाम - [अबू रफ़ी] से उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अब्बास से कहा: "ऐ चाचा, क्या आप चाहेंगे कि मैं आपको कोई तोहफ़ा दूं, क्या आप चाहेंगे कि मैं आपको फ़ायदे दूं, क्या आप चाहेंगे कि मैं आपके साथ आपकी दोस्ती जारी रखूं?" उन्होंने जवाब दिया, "ज़रूर, ऐ अल्लाह के रसूल।" उन्होंने कहा: "चार रकअत नमाज़ पढ़ो, हर रकअत में तुम फ़ातिहातुल किताब (सूरत अल फ़ातिहा) और एक सूरह पढ़ो। जब तुम पढ़ना खत्म कर लो, तो कहो; "सुभानअल्लाहु वल हम्दुलिल्लाह वा ला इलाहा इल्ला अल्लाहु वल्लाहु अकबर (अल्लाह की शान और सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है, अल्लाह सबसे बड़ा है) पंद्रह बार रुकू से पहले। फिर रुकू और दस बार फिर से पढ़ो। फिर अपना सिर उठाओ और इसे दस बार फिर से कहो, फिर सजदा करो और इसे दस बार फिर से कहो, फिर अपना सिर उठाओ और इसे दस बार फिर से कहो, फिर सजदा करो और इसे दस बार फिर से कहो, फिर अपना सिर उठाओ और उठने से पहले इसे दस बार फिर से कहो। ये हर रकअत में पचहत्तर होते हैं, और चार रकअत में तीन सौ। अगर तुम्हारे गुनाह रेत के पहाड़ जैसे भी हों, तो अल्लाह उन्हें माफ़ कर देगा। अब्बास ने कहा, "अल्लाह के रसूल, उन लोगों का क्या जो एक दिन में यह नहीं कह सकते?" उन्होंने कहा: "हफ़्ते में एक बार करो, अगर नहीं कर सकते तो महीने में एक बार करो," जब तक उन्होंने कहा: "तो साल में एक बार करो।"